संपादकीय लेख


Volume-46, 10-16 February, 2018

 

 

 केंद्रीय बज़ट 2018-2019
आम लोगों, युवाओं और किसानों का हितकारी

 

सरकार ने कहा है कि विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों में विकास के पटरी पर वापस आ जाने से भारत अब 8 प्रतिशत से भी अधिक की आर्थिक विकास दर हासिल करने की दिशा में मज़बूती से अग्रसर हो गया है. जबकि, 2017-18 की दूसरी तिमाही में  सकल घरेलू उत्पाद में 6.3 प्रतिशत की दर के साथ अर्थव्यवस्था में बदलाव के संकेत दिखाई दिये, दूसरी छ:माही में इसके 7.2 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बने रहने की संभावना है. केंद्रीय वित्त और कार्पोरेट मामले मंत्री श्री अरूण जेटली ने 1 फरवरी, 2018 को संसद में 2018-19 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि भारतीय समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था ने ढांचागत सुधारों के साथ संयोजन में महत्वपूर्ण लचीलापन दिखाया. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया है कि सेवाओं के क्षेत्र में 8 प्रतिशत से अधिक की उच्च विकास दर के साथ भारत की विकास दर अगले वर्ष 7.4 प्रतिशत रहेगी जबकि 2017-18 में निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि होने की आशा है तथा विनिर्माण क्षेत्र अच्छे विकास पथ पर लौट आया है.

देश को एक ईमानदार, स्वच्छ और पारदर्शी सरकार देने तथा एक मज़बूत, भरोसेमंद और नये भारत के निर्माण के लिये चार वर्ष पहले भारत के लोगों के साथ किये गये वायदे को दोराहते हुए श्री जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत को दुनिया की तेज़ी से अग्रसर अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने के लिये सिलसिलेवार आधारभूत ढांचागत सुधारों को लागू किया है.

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसे कार्यक्रम शुरू किये हैं जिससे ढांचागत बदलावों और अच्छे विकास का लाभ किसानों, गऱीबों और हमारे समाज के अन्य कमज़ोर वर्गों तक पहुंचे तथा कम विकसित क्षेत्रों का उत्थान हो सके. उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में इन उपलब्धियों का समेकन किया जायेगा और विशेष तौर पर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों के लिये अच्छे स्वास्थ्य की सुविधाएं, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, बुनियादी ढांचे के सृजन और देश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिये अधिक संसाधन उपलब्ध करवाने के लिये राज्यों के साथ मिलकर काम करने पर ज़ोर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने सुनिश्चित किया है कि पात्र लाभार्थियों तक लाभ पहुंचे और उन्हें यह सीधे प्राप्त हो तथा कहा कि भारत की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी व्यवस्था है तथा यह एक वैश्विक सफल कथा बनकर उभरी है.

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

किसानों के कल्याण और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने अनेक नई योजनाओं और उपायों की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी अघोषित खरीफ फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य ज्यादातर रबी फसलों की तरह उनकी उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुणा रखने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिये संस्थागत ऋण की मात्रा वर्ष दर वर्ष बढ़ाकर 2014-15 में रु. 8.5 करोड़ से 2017-18 में रु. 10 लाख करोड़ हो गई है और उन्होंने इसे बढ़ाकर 2018-19 में रु. 11 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव किया है. डेरी अवसंरचना कोष की स्थापना के पश्चात श्री जेटली ने मत्स्यपालन क्षेत्र के लिये मात्स्यिकी और एक्वाकल्चर ढांचागत विकास कोष तथा पशुपालन क्षेत्र की अवसंरचना आवश्यकता के वित्तपोषण के लिये एक पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष की स्थापना की घोषणा की. दो नये कोषों के लिये कुल रु. 10,000 करोड़ के वित्त का प्रावधान किया गया है. ऑपरेशन फल्ड’’ की तजऱ् पर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों की संतुष्टि के साथ टमाटर, प्याज और आलू जैसी जल्दी नष्ट होने वाली फसलों के मूल्यों में उतार चढ़ाव की चुनौती से निपटने के लिये रु. 500 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘‘ऑपरेशन ग्रीन्स’’ नामक एक नई योजना की घोषणा की गई. उन्होंने 86 प्रतिशत से अधिक लघु और सीमांत किसानों के हितों का ध्यान रखने के लिये मौजूदा 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि मंडियों में विकसित और उन्नत करने की भी घोषणा की. ये ग्रामीण मंडिया इलेक्ट्रानिकी ई-नैम के साथ जुड़ी हैं और इन्हें एपीएमसीज के विनियमों से छूट दी गई है जो कि किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तथा थोक क्रेताओं को बिक्री करने की सुविधा प्रदान करेंगी. इसके अलावा 22000 ग्रामीण कृषि मंडियों और 585 एपीएमसीज में कृषि विपणन अवसंरचना के विकास और उन्नयन के लिये रु. 2000 करोड़ की रािश के साथ एक कृषि बाज़ार अवसंरचना कोष स्थापित किया जायेगा. उन्होंने कहा कि अब तक 470 एपीएमसीज को ई-नैम नेटवर्क के साथ जोड़ा जा चुका है और शेष को मार्च, 2018 तक जोड़ दिया जायेगा. श्री जेटली ने अत्यधिक विशेषीकृत औषधीय और सुगंधित पौधों की संगठित खेती के लिये रु. 200 करोड़ की घोषणा की और कहा कि कृषक उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उत्पादक संगठनों द्वारा बड़े कलस्टरों में वरीयतन प्रत्येक 1000 हेक्टेयर में जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसी प्रकार, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का आबंटन 2017-18 में रु. 715 करोड़ से 2018-19 में दोगुना कर रु. 1400 करोड़ कर दिया गया है.

वित्त मंत्री ने बांस को हरित सोनाबताते हुए बांस क्षेत्र के संपूर्ण विकास को बढ़ावा देने के लिये रु. 1290 करोड़ के परिव्यय के साथ पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन की घोषणा की. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-हर खेत को पानी के अधीन 96 सिंचाई से वंचित जिलों में चलाई जायेगी जिसके लिये रु. 2600 करोड़ आबंटित किये गये हैं. केंद्र किसानों को अपने खेतों में सिंचाई के लिये सौर जल पंपों की स्थापना में सुविधा के लिये राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगा. उन्होंने मत्स्यपालन और पशुपालन से जुड़े किसानों को भी उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिये किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा विस्तारित करने का भी प्रस्ताव किया. श्री जेटली ने कहा कि भारत की कृषि निर्यात क्षमता वर्तमान में 30 अरब अमरीकी डॉलर के मुकाबले 100 अरब अमरीकी डॉलर तक की है और इस क्षमता को साकार करने के लिये कृषि वस्तुओं के निर्यात को सरल बनाया जायेगा. उन्होंने सभी 42 मेगा फूड पार्कों में अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं की स्थापना की भी घोषणा की. उन्होंने हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिये फसलों के अवशेषों के यथा स्थान प्रबंधन हेतु अपेक्षित सस्ती मशीनरी के साथ सरकारों के प्रयासों में मदद के लिये एक विशेष योजना की भी घोषणा की.

महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को ऋण के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले 37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वर्ष 2016-17 में लगभग 42,500 करोड़ रुपये किया गया था और विश्वास व्यक्त किया कि स्वयं सहायता समूहों को ऋण मार्च, 2019 तक बढ़ाकर रु. 75,000 करोड़ कर दिया जायेगा. उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम की राशि को भी वर्ष 2018-19 में  बढ़ाकर रु. 5750 करोड़ करने की घोषणा की.

निम्न और मध्यम वर्ग के लाभ के लिये उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत पूर्व के 5 करोड़ के लक्ष्य की अपेक्षा 8 करोड़ गऱीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किये जायेंगे. सौभाग्य योजना के अधीन 4 करोड़ गऱीब परिवारों को रु. 16,000 करोड़ के परिव्यय के साथ बिजली के कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं. 2022 तक सब के लिये घर के लक्ष्य को पूरा करने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन के अधीन पहले से 6 करोड़ शौचालयों के निर्माण के अलावा, 2019 तक एक करोड़ से अधिक आवासों का निर्माण किया जायेगा.

श्री जेटली ने ज़ोर देकर कहा कि अगले वर्ष सरकार का फ़ोकस आजीविका, कृषि और संबद्ध गतिविधियों तथा ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण पर अधिक खर्च करके ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और बुनियादी ढांचे के सृजन के लिये रु. 11.98 लाख करोड़ के अतिरिक्त बजटीय और ग़ैर बजटीय संसाधनों सहित मंत्रालयों द्वारा रु. 14.34 लाख करोड़ रु. की कुल राशि खर्च की जायेगी. खेती संबंधी गतिविधियों और स्वरोजग़ार से रोजग़ार के अलावा, इस व्यय से 321 करोड़ व्यक्ति दिवसों का रोजग़ार, 3.17 लाख किलोमीटर ग्रामीण सडक़ों, 51 लाख नये ग्रामीण आवासों, 1.88 करोड़ शौचालयों का निर्माण होगा और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के अलावा 1.75 करोड़ नये घरेलू बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराये जायेंगे.

मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यम एवं रोजग़ार

बजट में मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यमों को रोजग़ार और आर्थिक वृद्धि के लिये बहुत बढ़ावा दिया गया है. ऋण सहायता, पूंजी और ब्याज सब्सिडी तथा नवाचार के लिये रु. 3794 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है. अप्रैल, 2015 में शुरु. की गई मुद्रा योजना का शुभारंभ किया गया था जिसके तहत 10.38 करोड़ के मुद्रा ऋण दिये गये. इनमें से 76 प्रतिशत ऋण खाते महिलाओं के जबकि 50 प्रतिशत से ज्यादा अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के हैं. उन्होंने कहा कि पिछले सभी वर्षों में लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पार करने बाद 2018-19 के लिये मुद्रा के अंतर्गत तीन लाख करोड़ रुपये के ऋण का लक्ष्य रखा गया है.

रोजग़ार सृजन

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि रोजग़ार के अवसरों का सृजन सरकार की प्रमुख नीतियों में शामिल है, वित्त मंत्री ने एक स्वतंत्र अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष 70 लाख औपचारिक रोजग़ारों का सृजन किया जायेगा. पिछले तीन वर्षों के दौरान रोजग़ार सृजन की दिशा में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार अगले तीन वर्षों में सभी क्षेत्रों के लिये ईपीएफ में नये कर्मचारियों के वेतन का 12 प्रतिशत योगदान करेगी. उन्होंने कर्मचारियों के अंशदान में कोई परिवर्तन किये बिना मौजूदा 12 प्रतिशत या 10 प्रतिशत के मुकाबले पहले तीन वर्षों के अपने रोजग़ार के लिये महिला कर्मचारियों का अंशदान घटकर 8 प्रतिशत करने के लिये कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 में संशोधनों का प्रस्ताव किया.

बजट में टैक्सटाइल क्षेत्र में  2016 में रु. 6000 करोड़ रु. की तुलना में 2018-19 में रु. 7148 करोड़ रु. के परिव्यय का प्रस्ताव किया.

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा

वित्त मंत्री ने कहा कि 2018-19 के लिये स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर बजटीय व्ययों का अनुमान 2017-18 के 1.22 लाख करोड़ रु. की तुलना में 1.38 लाख करोड़ रु. है.

शिक्षा के मोर्चे पर श्री जेटली ने वर्ष 2022 तक खेल और कौशल विकास में प्रशिक्षण प्रदान करने के अलावा, 50 प्रतिशत से ज्यादा की अनुसूचित जनजाति आबादी और कम से कम 20 हजार जनजातीय लोगों वाले प्रत्येक ब्लॉक में स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिये विशेष सुविधाओं के साथ नवोदय विद्यालयों के समकक्ष एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की स्थापना की घोषणा की. स्वास्थ्य संस्थानों सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शोध और संबद्ध अवसंरचना में विकास को बढ़ावा देने के लिये अगले चार वर्षों में कुल रु. 1,00,000 करोड़ के निवेश के साथ ‘‘रिवाइटेलाइजिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सिस्टम्स इन एजुकेशन (आरआईएसई) नामक एक बड़ी पहल की घोषणा की गई. उन्होंने कहा कि सतह पर स्थिति के मूल्यांकन के लिये 20 लाख से अधिक बच्चों के मध्य एक सर्वेक्षण किया गया है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार के लिये जि़लावार कार्यनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी. शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार के लिये शिक्षकों के लिये एकीकृत बी.एड कार्यक्रम शुरू किया जायेगा. श्री जेटली ने कहा कि सरकार इस वर्ष ‘‘प्रधानमंत्री शोध अध्येता (पीएमआरएफ)’’ योजना शुरू करेगी. इसके तहत प्रमुख संस्थानों से 1000 उत्कृष्ट बी.टैक छात्रों की पहचान की जायेगी और उन्हें एक अच्छी अध्येतावृत्ति के साथ आईआईटीज और आईआईएससी में पीएच.डी करने की सुविधाएं प्रदान की जायेंगी. इस वर्ष राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिये आबंटन रु. 9975 करोड़ रखा गया है.

वित्त मंत्री ने 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को दायरे में लाने के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना नामक विश्व के सबसे बड़े सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम की घोषणा की जिसके तहत द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने वाले प्रति परिवार को पांच लाख रुपये का प्रतिवर्ष कवरेज प्रदान किया जायेगा. उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के लिये भी रु. 1200 करोड़ की प्रतिबद्धता व्यक्त की जिसके साथ 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्रों को लोगों के घरों के निकट लाने के लिये स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को लागू किया जायेगा. सरकार ने सभी टीबी रोगियों को उनके इलाज की अवधि के दौरान के लिये प्रति माह 500 रु. की दर से पोषण सहायता प्रदान करने के लिये रु. 600 करोड़ की अतिरिक्त राशि आबंटित करने का भी फैसला किया है. श्री जेटली ने कहा कि सरकार देश में मौजूदा जिला अस्पतालों को उन्नत करते हुए 24 नये सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों की स्थापना करेगी.

गंगा की सफाई के मामले में वित्त मंत्री ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत अवसंरचना विकास, नदी तल की सफाई, ग्रामीण स्वच्छता और अन्य कार्यों के लिये रु. 16713 करोड़ रु. की लागत पर कुल 187 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है. इनमें से 47 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाएं निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं. सभी 4465 गंगा ग्रामों-नदी के किनारे पर स्थित गांवों-को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 115 जिलों की विकास के विभिन्न संकेतकों पर विचार करते हुए उन्हें विकास के संदर्भ में आदर्श जिले बनाने बनाने के वास्ते पहचान की है.

-पत्र सूचना कार्यालय