संपादकीय लेख


Volume-49, 3-9 March, 2018

 

उद्योग 4.0 - भारत के लिए व्यापक संभावनाएं

उद्योग 4.0 चौथी औद्योगिक क्रांति के प्रमुख संचालकों में से एक है. प्रथम औद्योगिक क्रांति जल और भाप की शक्ति से संचालित हुई थी, जिसके फस्वरूप विनिर्माण में मानव श्रम का स्थान यंत्रों ने लिया. दूसरी औद्योगिक क्रांति विद्युत शक्ति पर आधारित थी, जिसकी परिणति उत्पादन में व्यापक बढ़ोतरी के रूप में हुई. तीसरी क्रांति के अंतर्गत विनिर्माण के स्वचालन के लिए इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया. अब चौथी औद्योगिक क्रांति विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में स्वचालन (ऑटोमेशन) और डेटा एक्सचेंज (आंकड़ों का आदान-प्रदान) पर आधारित है.

उद्योग 4.0 अथवा चौथी औद्योगिक क्रांति, जैसा कि इसे कहा जा रहा है, विश्वभर में एक जबर्दस्त ताकत के रूप में उभर रही है और इसे अगली औद्योगिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है. इस क्रांति का आधार बढ़ते डिजिटीकरण और उत्पादों, मूल्य शृंखलाओं और व्यापार मॉडलों के बीच परस्पर संबंध है. उद्योग 4.0 का संचालन डेटा वॉल्यूम्स, कम्प्यूटेशनल पॉवर, इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी), व्यापार विश्लेषण, संवर्धित वास्तविकता, कृत्रिम इंटेलिजेंस, ऐलिमेंटल डिजाइन, अनुकरण, अत्याधुनिक रोबोटों, सवंर्धित विनिर्माण, सेंसर आधारित प्रौद्योगिकियों और साइबर भौतिक प्रणालियों जैसी धारणाओं के जरिए किया जा रहा है. उद्योग 4.0 का अर्थ है, वास्तविक और आभासी जगतों का समाभिरूपण- अर्थात् विनिर्माण में परंपरागत और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एक साथ लाने का अगला चरण. इसका नतीजा एक ऐसी ‘‘स्मॉर्ट फैक्टरी’’ के रूप में सामने आएगा, जिसमें प्रतिभा, संसाधन सक्षमता, श्रम दक्षता डिजाइन और व्यापार साझीदारों के साथ प्रत्यक्ष एकीकरण जैसी विशेषताएं शामिल होंगी.

उद्योग 4.0, को यदि संक्षेप में कहें तो यह भावी एवं अत्याधुनिक धारणाओं और प्रौद्योगिकियों का मिश्रण है, जिसमें 21वीं सदी के उत्पादन परिदृश्य का कायाकल्प करने की क्षमता है. इसके अंतर्गत मुख्य रूप से एक कनेक्टिड शॉप फ्लोरयानी सुसम्बद्ध कार्य प्रणाली शामिल है, जिसमें विभिन्न सेंसरों से डेटा एकत्र किया जाता है और भविष्य सूचक रख-रखाव, बेहतर नियंत्रण और दीर्घावधि विश्लेषण के लिए इनपुट डिवाइस इस्तेमाल किया जाता है.

उद्योग 4.0 को अपनाने की आवश्यकता

विनिर्माण क्षेत्र आज अग्रणी अवस्था में है और उसके लिए उच्च स्तरीय कौशल की आवश्यकता है. वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र आज एक संरचनागत रूपांतरण से गुजर रहा है. भारत हालांकि विकास के लिए सेवा क्षेत्र पर बाहरी निर्भर है, फिर भी विनिर्माण क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की आवश्यकता है. विनिर्माण क्षेत्र को भारत में उच्च वृद्धि को गति प्रदान करने में योगदान करना होगा. भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाते हुए विश्व मानचित्र में उच्च स्थान प्रदान करने के लिए मेक इन इंडियाकार्यक्रम शुरू किया. विनिर्माण क्षेत्र, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भारतीय अर्थव्यवस्था में ध्रुवीय भूमिका है और वे कृषि के बाद सबसे अधिक रोज़गार प्रदान करते हैं. वृद्धि के लक्ष्यों को रोज़गार के साथ समाभिरूपित करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2022 तक 16 प्रतिशत से बढ़ा कर 25 प्रतिशत की जाए और 2022 तक रोज़गार के 10 करोड़ अतिरिक्त अवसर पैदा किए जाएं.

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के अंगीकरण के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी आधार प्रदान करती है. भारत में इंटरनेट के बढ़ते प्रसार और ई-कॉमर्स के विस्तार को देखते हुए इंटरनेट पर उद्यमिता की उपस्थिति अवश्यंभावी हो गई है. औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करते हुए भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया, जिसका लक्ष्य भारत को डिजिटल रूप में सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करना है.

स्मॉर्ट फैक्टरी का स्वरूप लचीली प्रणालियों और मशीनों, समूचे नेटवर्क में कार्यों के विभाजन, समूची श्रेणीबद्धता में सभी प्रतिभागियों के बीच संचार/वार्तालाप, स्व-अनुकूलन और स्वायत्त निर्णय करने जैसी धारणाओं से बनता है. डिजिटल प्रौद्योगिकियां नए व्यापार मॉडलों और लाभकारी अवसरों को बढ़ावा देती हैं और अधिकतर विकासशील देश उन्हें हासिल करने की स्थिति में हैं.

उद्योग 4.0 के साथ रोज़गार के अवसर

उद्योग 4.0 के साथ औद्योगिक श्रम बल का विकास कैसे होगा, यह जानने के लिए इन नई प्रौद्योगिकियों के विनिर्माण परिदृश्य पर परिकल्पिक प्रभाव का अध्ययन किया गया. यह पाया गया है कि उद्योग 4.0 को अपनाने से विनिर्माता अपनी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने में सक्षम होंगे, जिससे वे उत्पादकता बढऩे के साथ-साथ अपने औद्योगिक कार्मिकों का विस्तार कर सकेंगे. उत्पादन के अधिक पूंजी सघन होने के साथ ही परंपरागत कम लागत वाले स्थानों के श्रम लागत लाभ सिकुड़ जाएंगे, जिससे विनिर्माताओं के लिए पीछे छूटे हुए रोज़गारों की वापसी का आकर्षण बढ़ जाएगा. उद्योग 4.0 को अपनाने से विनिर्माताओं को मौजूदा बाजारों के विकास और नए उत्पाद एवं सेवाओं की शुरूआत से उत्पन्न उच्चतर मांग पूरा करने के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित करने की आवश्यकता पड़ेगी. यह अनुकूल माहौल प्रौद्योगिकी विषयक प्रगति के पिछले युग के विपरीत है, जिसमें समग्र उत्पादन की मात्रा बढऩे के बावजूद  विनिर्माण क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों में कमी आई थी. बीसीजी रिपोर्ट के अनुसार उद्योग 4.0 का श्रमिक वर्ग पर संभावित प्रभाव निम्नांकित रूप में पड़ेगा:

व्यापक-डेटा-संचालित गुणवत्ता नियंत्रण: विनिर्माण में व्यापक आंकडों का प्रयोग करने से गुणवत्ता नियंत्रण में विशेषज्ञता रखने वाले श्रमिकों की संख्या में कमी आयेगी, जबकी औद्योगिक डेटा वैज्ञानिकों की मांग बढ़ेगी.  

उत्पादन में रोबोट-सहायता: इस तरह की तरक्की से असेम्बली और पैकेजिंग जैसे उत्पादन प्रचालनों में हाथ से किए जाने वाले श्रम में महत्वपूर्ण कमी दर्ज होगी, परन्तु रोबोट-कॉर्डिनेटर जैसे नए रोजग़ार सृजित होंगे.

स्वचालित लॉजिस्टिक वाहन: एक खाद्य और पेय पदार्थ विनिर्माता ने स्वचालित परिवहन प्रणालियां तैनात की हैं, जो उसकी फैक्टरी के भीतर युक्तिसंगत ढंग से और स्वतंत्र रूप में संचालित होती है. इससे उसकी लॉजिस्टिक्स कार्मिकों की जरूरत कम हो गई है. परंतु तकनीकी डिजाइनरों की उसकी मांग बढ़ गई है.

उत्पादन लाइन सिम्युलेशन: उपभोक्ता वस्तुओं का एक विनिर्माता संस्थापना से पहले उत्पादन व्यवस्थाओं का अनुकरण करने के लिए नवीन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है और प्रचालनों को अनुकूलतम बनाने के लिए अंतर-दृष्टि काम में लाता है. इस प्रौद्योगिकी को लागू करने से औद्योगिक इंजीनियरों और अनुकरण यानी सिम्युलेशन विशेषज्ञों की मांग में बढ़ोतरी होगी.

स्मार्ट सप्लाई नेटवर्क :  समूचे आपूर्ति नेटवर्क पर निगरानी रखने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल आपूर्ति संबंधी बेहतर निर्णय करने में सक्षम बनाएगा. प्रौद्योगिकी का यह अनुप्रयोग आयोजना प्रचालनों में रोज़गार के अवसरों में कमी लाएगा, जबकि आपूर्ति शृंखला में ऐसे समन्वयकों की मांग बढ़ेगी, जो छोटे आकार के लॉट्स में वस्तुओं का वितरण संचालित कर सकें.

संभावित रख-रखाव: निगरानी और सेंसर प्रौद्योगिकियों से विनिर्माताओं को ब्रेकडाउन होने से पहले ही अपने उपकरणों की मरम्मत करने का अवसर मिल जाएगा. इस तरह सिस्टम डिजाइन, आईटी और डेटा साइंस से संबंधित रोज़गारों में महत्वपूर्ण इजाफा होगा. इस तरह की प्रगति से डिजिटल रूप में सहायता करने वाले फील्ड सर्विस इंजीनियरों के रूप में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, जबकि परंपरागत सेवा प्रदाता तकनीशियनों की मांग कम होगी.

सेवा के रूप में मशीनें: कंपनियां ग्राहक की साइट पर मशीनें संस्थापित करने के जरिए ग्राहकों को कुछ नई सेवाएं प्रदान करने के काम में संलग्न हो सकती हैं, जैसे कम्प्रेस्ड एयर, कुकिंग गैस आदि. इससे आपूर्तिकर्ताओं की मांग कम होगी, जबकि उत्पादन और सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे. साथ ही व्यापार के इस मॉडल के लिए विनिर्माताओं को अपने बिक्री कार्मिकों का विस्तार करना होगा.

स्वयं संचालित उत्पादन: कंपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अनुकूलतम उपयोग करने के लिए उत्पादन लाइनों के बीच स्वचालित समन्वय विकसित कर सकती है. इस तरह के स्वचलन से उत्पादन आयोजना के क्षेत्र में श्रमिकों की मांग कम होगी, परंतु इससे डेटा मॉडलिंग और आंकड़ों की व्याख्या करने वाले विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी.

जटिल हिस्से पुर्जों का योगात्मक विनिर्माण: विशिष्ट लेजऱ सिंटेरिंग और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसी तकनीकें विनिर्माताओं को जटिल हिस्से-पुर्जों का निर्माण एकल प्रयास में करने में सक्षम बनाती हैं. इससे पृथक हिस्से-पुर्जों की असेम्बली और इन्वेंटरीज़ की जरूरत समाप्त हो जाती है. थ्री-डी कम्प्यूटर एडिड डिजाइन और थ्री-डी मॉडलिंग के सृजन से अनुसंधान और विकास एवं इंजीनियरी के क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे, जबकि हिस्से पुर्जों की असेम्बली के क्षेत्र में अवसर कम होंगे.

सवंर्धित कार्य, रख-रखाव और सेवा: सवंर्धित-रियलिटी ग्लासेज़ जैसी प्रौद्योगिकी के जरिए कंपनी शेल्फ में किसी वस्तु की सही स्थिति सहित, डिस्पैच की गई जानकारी और नेवीगेशन अनुदेशों को देख सकती है, तथा बार कोड्स को स्वचालित रूप में स्कैन कर सकती है. ऐसी प्रणाली भी डिजाइन की गई है, जो बुनियादी रख-रखाव कार्यों के साथ दूर से सहायता प्रदान कर सकती है, तथा ग्राहक विषयक पैकेजिंग अनुदेश प्रदान कर सकती है. इस सवंर्धित रियलिटी तकनीक के इस्तेमाल से सेवा तकनीशियनों के लिए प्रक्रिया सक्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जबकि कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अनुसंधान और विकास, आईटी और डिजिटल सहायता प्रणालियों में व्यापक नई क्षमताएं पैदा करें.

रोबोटों और कम्प्यूटरों के व्यापक इस्तेमाल से असेम्बली और उत्पादन के क्षेत्र में रोज़गारों की संख्या कम होगी. परंतु, यह कमी नए रोज़गारों के सृजन से पूरी की जा सकेगी. रोज़गार के अवसरों में बढ़ोतरी उच्च प्रशिक्षित कार्मिकों की मांग से होगी, जिनमें आईटी, अनेलिटिक्स और अनुसंधान एवं विकास संबंधी प्रशिक्षित कार्मिक शामिल होंगे. इसके साथ ही राजस्व वृद्धि के अवसरों से भी नए रोज़गारों का सृजन होगा.

उद्योग 4.0 के साथ कौशल संबंधी चुनौतियां: उद्योग 4.0 इस दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगा कि औद्योगिक श्रमिक अपने कार्यों को कैसे अंजाम दें और इससे एक तरफ पूरी तरह नए रोज़गारों का सृजन होगा, जबकि परंपरागत रोज़गार अप्रचलित हो जाएंगे. हालांकि उद्योग 4.0, विशेष रूप से रोबोटिक्स, किस हद तक मानव श्रम को स्थानापन्न करेगा यह विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय है. परंतु, हमने इस बारे में एक सार्वभौम सहमति पायी है कि विनिर्माता रोबोटिक्स और अन्य आविष्कारों का इस्तेमाल अधिकाधिक श्रमिकों की सहायता के लिए करेंगे. कुछ विशेषज्ञों की राय इस धारणा के विपरीत है कि सभी विनिर्माण कार्यों को स्वचालित किया जा सकता है. अनुमान है कि पूर्ण स्वचलन वास्तविक नहीं है. प्रौद्योगिकी मुख्य रूप से भौतिक और डिजिटल सहायता प्रणालियों के जरिए उत्पादकता में बढ़ोतरी कर सकती है, न कि मानव श्रम का स्थान लेकर. सहायता प्रणालियों के अधिकाधिक इस्तेमाल का अर्थ है कि उद्योग 4.0 के जरिए लाए गए गुणात्मक परिवर्तन श्रमिकों के लिए रचनात्मक रहने की संभावना है. शारीरिक श्रम की आवश्यकता वाले अथवा रोजमर्रा के कार्यों की संख्या में कमी आएगी, लेकिन लचीली अनुक्रियाओं, समस्या समाधान और ग्राहक अनुकूलन से संबंधित कार्यों में वृद्धि होगी.

उद्योग 4.0 के साथ कारगर ढंग से निष्पादन करने के लिए श्रमिकों को कई तरह के ‘‘हार्ड’’ यानी ठोस कौशलों की आवश्यकता पड़ेगी. उन्हें किसी कार्य विशेष या प्रक्रिया विशेष से संबंधित संयुक्त जानकारी प्राप्त करनी होगी. इसमें रोबोटों के साथ या मशीनों के परिवर्तित उपकरणों के साथ काम करने की तकनीक, बुनियादी (स्प्रेडशीट्स का इस्तेमाल और इंटरफेस आकलन) से लेकर अत्याधुनिक (अडवांस्ड प्रोग्रामिंग और विश्लेषणात्मक कौशल) आईटी सक्षमता तक शामिल है. विभिन्न प्रकार की हार्ड स्किल्स यानी ठोस कौशल और शॉप फ्लोर पर अभूतपूर्व परिवर्तनों की संभावना का अर्थ है, ‘‘सॉफ्ट’’ कौशल का महत्व पहले से कहीं अधिक होगा. नए माहौल में कर्मचारियों को भी प्रक्रियाओं के प्रति अधिक लचीलापन अपनाना होगा, ताकि वे नई भूमिकाओं और कार्य वातावरणों को अपना सकें तथा निरंतर अंतर-विषयी प्रशिक्षण के प्रति अभ्यस्त हो सकें.

उद्योग 4.0 के साथ विनिर्माण संबंधी चुनौतियां :

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को सफलतापूर्वक अपनाने और उद्योग 4.0 की क्षमताओं का दोहन करने के मार्ग में अनेक चुनौतियां हैं, जिनका समाधान अनिवार्य है. कुछ प्रमुख चुनौतियां नीचे दी गई हैं:

*स्पष्ट डिजिटल विजन का अभाव.

*आंकड़ा विश्लेषण क्षमताओं का अभाव.

*एक सुदृढ़ डिजिटल संस्कृति को बढ़ावा देना.

*डिजिटीकरण का स्तर.

*डेटा सुरक्षा

*बड़ी मात्रा में ग्राहक डेटा की रिकॉर्डिंग, भंडारण और विश्लेषण में प्रमुख जोखिम उक्त आंकड़ों का अनुप्रयुक्त इस्तेमाल है.

*मानकीकरण का अभाव.

*डेटा साझा करने और प्रौद्योगिकी के एकीकरण जैसी धारणाएं हालांकि नई नहीं हैं, परंतु मानकीकरण का अभाव अथवा समुचित मानकों का प्रचलन एक प्रमुख बाधा बनने जा रहा है.

उद्योग 4.0 के लाभ:

किसी भी संगठन को प्रासंगिकता, लागत-सक्षमता और उत्पादकता बढ़ोतरी पर प्रभाव के आधार पर उद्योग 4.0 की निम्नांकित सूची में से प्रौद्योगिकियों का चयन करने और उन्हें अपनाने के मामले में अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ानी होगी:

*योगात्मक विनिर्माण -थ्री-डी प्रिंटिंग

*सेंसर्स

*रोबोट्स (ऑटो+को-बोट्स)

*सिम्युलेशन

*सवंर्धित रियलिटी

*क्लाउड कम्प्यूटिंग

*व्यापक  डेटा और विश्लेषण

*औद्योगिक इंटरनेट

*साइबर-सुरक्षा

*समानांतर और शीर्षवत एकीकरण

आवश्यकता आधारित प्रौद्योगिकी अपनाते हुए विनिर्माण इकाइयां उद्योग 4.0 के निम्नांकित लाभों में से कोई एक या अधिक लाभ प्राप्त कर सकती हैं:

*कम लागत

*अतिरिक्त राजस्व

*औद्योगिक कंपनियों को अनुकूलतम ग्राहक संबंध कायम करने में सक्षम बनाना.

*उत्पादन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता

*उत्पादन प्रणाली के सभी पहलुओं की स्थिति के बारे में वास्तविक समयानुसार स्पष्टता

*जो औद्योगिक कंपनियां उद्योग 4.0 को सफलतापूर्वक लागू करेंगी, उन्हें बेहतर शीर्ष अथवा निचली रेखा के बीच ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता नहीं होगी. वे इन दोनों लाइनों में एक साथ सुधार कर सकेंगी.

*लॉजिस्टिक प्रक्रियाएं हल्की हो जाएंगी.

*माल सूची में कमी आएगी.

*रख-रखाव प्रक्रियाओं का मानकीकरण.

*शत-प्रतिशत प्राप्ति या सुगमता

उद्योग 4.0 की दिशा में किए गए उपाय:

उद्योग 4.0 से लाभ उठाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्त करने के लिए, यह जरूरी है कि उद्योग 4.0 के सिद्धांतों को मेक इन इंडियाकार्यक्रम के साथ जोड़ा जाए. मेक इन इंडियाबहु-राष्ट्रीयता को प्रोत्साहित करने का व्यापक आधार वाला कार्यक्रम है. इससे राष्ट्रीय कंपनियों को भी भारत में विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिली है. सरकार सक्षम नीतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है तथा कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए ढांचागत सुधारों पर बल दे रही है.

भारत हासिल करने योग्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों में बेजोड़ लाभ की स्थिति में है. वित्तीय सेवाओं में यह एक बेजोड़, अपनी तरह के प्रथम डिजिटल स्टेक (जो ‘‘इंडिया स्टेक’’ के रूप में जाना जाता है), का निर्माण कर रहा है, जिसमें आधार, जन-धन खाते और विभिन्न भुगतान प्रौद्योगिकियां जैसे यूपीआई और आधार भुगतान ब्रिज सिस्टम की सहायता ली जा रही है. एक व्यवहार्य मंच न केवल भारतीय ग्राहकों के लिए नवीन सेवाएं विकसित करने का अवसर प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक ग्राहकों के लिए भी समान सेवाएं संशोधित कर सकता है. निर्माण जैसे भलीभांति प्रसारित, स्वास्थ्य जैसे अद्र्ध प्रसारित या शहरी प्रबंधन सेवाओं जैसे उदीयमान क्षेत्रों में इन ‘‘टेक्नोलोजी स्टेक्स’’ के विकास और उन्हें तैनात करने से न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं, बल्कि रोज़गार के लाखों नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, नई दिल्ली को एशियन प्रोडक्टिविटी संगठन (एपीओ) द्वारा उद्योग 4.0 के लिए आईटी के बारे में एक उत्कृष्टता केंद्र निर्दिष्ट किया गया है  (सीओई: आई 4.0 के लिए आईटी). सीओई को उद्यमियों, स्टार्ट अप्स के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में काम करना है, उसके कार्यक्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी की धारणाएं और उद्योग में उनका अनुप्रयोग, इस ज्ञान का कार्यशालाओं, व्याख्यानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए सम्प्रेषण, अद्यतन प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन/नए स्टार्ट अप्स की मदद के लिए परियोजनाओं का प्रदर्शन आदि कार्य शामिल हैं.

इस परिदृश्य में उत्कृष्टता केंद्र यानी सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (सीओई) सूचना संग्रहण, ज्ञान/जानकारी के विकास एवं सम्प्रेषण, विभिन्न प्रतिभागियों के साथ समन्वय करते हुए उद्योगों की क्षमता निर्माण में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है. इससे स्मार्ट फैक्टरी का सृजन होगा, जो प्रतिभा, संसाधन सक्षमता, आर्थिक डिजाइन और व्यापार भागीदारों के बीच प्रत्यक्ष एकीकरण के साथ काम करेगी.

भारत को विकास के एक पृथक मार्ग पर अवश्य बढऩा चाहिए, जो विभिन्न वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर है और भारत की ताकत को बढ़ाने वाला है. हमारी यह परिकल्पना है कि डिजिटल प्रौद्योगिकियां जन-सेवाओं को उसी तरह शक्ति प्रदान करेंगी, जिस तरह औद्योगिक प्रौद्योगिकियों ने व्यापक विनिर्माण  को शक्ति प्रदान की है. भारत सरकार और अन्य प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं, ताकि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग की धारणा को सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके. इससे मेक इन इंडिया के लक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया तेज होगी. इसमें कोई संदेह नहीं है कि उद्योग 4.0 भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे वह डिजिटल 21वीं सदी में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकेगा.

(साभार: राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद; आप अपने उद्योग को आधुनिक बनाने में सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए महानिदेशक, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, 5-6, इंस्टीट्यूशनल एरिया, लोधी रोड, नई दिल्ली - 110003, ईमेल dg.npc@npcindia.gov.in को लिख सकते हैं).