संपादकीय लेख


Volume-1, 7-13 April, 2018

 

चौथी औद्योगिक क्रांति और इंजीनियरी उद्यमशीलता

डा. सीमा सिंह

 आज हम चौथी औद्योगिक क्रांति के कऱीब हैं और 19वीं सदी के बाद से लेकर 20वीं सदी तक जारी रहने वाली व्यापक उत्पादन विनिर्माण की प्रक्रिया तेज़ी से अप्रचलित हो रही है. पहली औद्योगिक क्रांति में उत्पादन यंत्रीकरण के लिये जल और भाप ऊर्जा को प्रयोग में लाया गया. दूसरी में व्यापक उत्पादन के निर्माण के लिये इलेक्ट्रिक ऊर्जा को प्रयोग में लाया गया. तीसरी में उत्पादन के स्वचालन में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी को अपनाया गया। चौथी क्रांति तीसरी क्रांति की डिजिटल प्रौद्योगिकियों के निर्माण को लेकर है, इसे न केवल डिजिटल क्षेत्र में (जैसे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनी शिक्षण, उन्नत रोबोटिक्स और नये प्रकार का ऑटोमेशन) बल्कि भौतिक क्षेत्र (नई सामग्रियां) के साथ-साथ जैविकीय क्षेत्र (बायोइंजीनियरिंग) में भी नई सफलताओं की व्यापक रेंज से ऊर्जा मिली है. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सर्वत्र मोबाइल इंटरनेट, सेंसर्स और ब्लॉक चेन और वितरित लेजर्स, 3डी प्रिंटिंग, स्वायत्त वाहन जैसे कि कारें और ड्रोन, नई सामग्रियां, ग्राफेन, आनुवंशिकी प्रगतियां, जैव इंजीनियरिंग, नेनोटेक्नोलॉजी, व्यक्तिगत और सटीक दवा, नये ऊर्जा स्रोत और भण्डारण प्रौद्योगिकियां, तथा क्वांटम कम्प्यूटिंग शामिल हैं. (विश्व आर्थिक मंच 2017, पीपी.07).

प्रत्येक औद्योगिक क्रांति रोजग़ारों में कमी का ख़तरा लेकर आती है. सुमपीटर ने इसे ‘‘सृजनात्मक विघात’’ की संज्ञा दी जो कि अभिनव यंत्रीकरण को संदर्भित करता है जिसमें पुरानी उत्पादन इकाइयों का स्थान नई इकाइयां ले लेती है. पूर्व में आमतौर पर नई प्रौद्योगिकियों से नये उद्योगों के विकास के जरिए अधिक रोजग़ार सृजन के अवसर प्रदान किये हैं. अत: थोड़े से समय के लिये अस्थाई बेरोजग़ारी बनी रही थी. चौथी औद्योगिक क्रांति के तहत, ये परिदृश्य कम सकारात्मक प्रतीत होता है. ग्राहकों को व्यक्तिगत उत्पादन और सेवाएं आकृष्ट और उपलब्ध कराने के लिये कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स का इस्तेमाल करेंगी. मनुष्य की अपेक्षा मशीनें बेहतर और तीव्रता के साथ काम करेंगी. यद्यपि इससे लागत में कमी आयेगी और उत्पादकता में वृद्धि होगी, यह न केवल अल्प कुशल, दिहाड़ी रोजग़ारों (असेम्बली लाईन वर्कर्स) बल्कि सेवा संबंधी रोजग़ारों के लिये भी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग के तौर पर ख़तरा पैदा करेगी.

हालांकि प्रौद्योगिकी सघन क्षेत्र में नवाचार और उद्यमशीलता की उच्च मांग होगी. भारत एक युवा देश है. 2011 की जनगणना के अनुसार तीस प्रतिशत भारतीय जनसंख्या 14 वर्ष से कम आयु की है और सौभाग्य से पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में इंजीनियरी की शिक्षा में व्यापक वृद्धि देखने को मिली है. लेकिन इंजीनियरों के बीच बढ़ती बेरोजग़ारी इस बात का संकेत है कि छात्रों को अपने ज्ञान को व्यापक करने और स्वयं को अभियांत्रिकी उद्यमशीलता के लिये तैयार करने की आवश्यकता है. सुमपीटर ने कहा है कि उद्यमी में नवाचार की अच्छी संभावना होने की क्षमता होती है, जो भी हो वह भी अन्वेषक होता है. (सुमपीटर, 1942). विज्ञान और इंजीनियरी विषयों के अलावा, उन्हें निम्नलिखित कौशलों में सुदृढ़ होने की भी आवश्यकता है:

1. सदैव कमी को दूर करने का प्रयास करें

प्रणाली या प्रक्रिया में कमीका पता लगाना नवाचार/उद्यमशीलता का पहला कदम होता है. अपने आसपास देखें. अंतरका पता लगाने की कोशिश करें कि क्या कुछ चूक है और अंतर को पाटने के बाद संतुष्टि/ उत्पादकता में वृद्धि होगी. आपके समक्ष चुनौती है अपने विशेषज्ञता क्षेत्र में कमी का पता लगाना.

2. अपने ज्ञान क्षेत्र में वृद्धि करें

उस क्षेत्र में अधिक से अधिक ज्ञान/सूचना एकत्र करने का प्रयास करें जिसमें आप उद्यम लगाना चाहते हैं. विस्तार और गहराई के साथ इसे हासिल करें. नज़दीकी लाइब्रेरी, गूगल और इंटरनेट से जुड़ें. विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात करें और उनके विचारों को जानने का प्रयास करें.

3. प्रतिस्पर्धा करने की अपेक्षा सहयोग करें

अपने प्रस्तावित कार्य के संबंध में आगे और पीछे संपर्क स्थापित करने का प्रयास करें. प्रतिस्पर्धा की अपेक्षा सहयोगवर्तमान माहौल में सफलता का नया मंत्र है. अपने सहयोगियों का पता लगायें.

4. प्रस्ताव अच्छी तरह तैयार करें

वित्त की योजना और व्यवस्था करना सफलता की एक पूर्वापेक्षा है. एक अनुमान के अनुसार आधे से अधिक स्टार्ट अप गलत/दोषपूर्ण योजना के कारण ब्रेक-ईवन प्वाइंट हासिल नहीं कर पाते. योजना की प्रक्रिया में विशेषज्ञता की सहायता लें.

5. उत्पादकता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिये प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करें

आपका इंजीनियरी ज्ञान आपके लिये फायदेमंद है. प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने से न झिझकें भले ही शुरूआत में यह मंहगी प्रतीत हो. उत्पादकता में वृद्धि शीघ्र इसकी भरपाई कर देगी.

6. अल्पावधि और दीर्घावधि लक्ष्य पर नजऱ रखें

किसी भी समय परिस्थिति बदल सकती हैं अत: लंबे समय तक बने रहने के लिये निकट से निगरानी बहुत महत्वपूर्ण है. इंजीनियरिंग उद्यमियों के लिये वातावरण बहुत ही उपयुक्त है. सरकार, उद्यम पूंजीपति, बैंक स्थाई बिजनेस प्रस्तावों के वित्तपोषण के लिये तैयार हैं और इंजीनियरी स्नातकों को इसका फायदा उठाना चाहिये.

संदर्भ:

1 सुमपीटर, जे (1942), ‘‘पूंजीवाद, समाजवाद और लोकतंत्र. न्यूयार्क,

हार्पर एंड ब्रदर्स.

https://economtcs.mit.edu/

फाइलें/1785 10/1/2018 को रिट्रीव की गईं

2. विश्व आर्थिक मंच (2017) ‘‘आसियान’’

4.0: क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिये चौथी औद्योगिक क्रांति का क्या मायने हैं1 एडीबी श्वेत पत्र

https://www.adb.org/ फाइलें/प्रकाशन/379401/आसियान-चौथी औद्योगिक क्रांति

revolution-rci.pdf 08/01/2018 रिट्रीव की गई

डॉ. सीमा सिंह, अर्थशास्त्र संकाय, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दिल्ली-110042.

ई-मेल: seemasinghdtu@gmail.com