संपादकीय लेख


Volume-17, 28 July- 3 August, 2018

 
आयुष्मान भारत योजना
सर्व-जन स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक बड़ा कदम

संतेश कुमार सिंह

वर्ष 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और इसके सदस्य राष्ट्रों ने सतत विकास लक्ष्यों को स्वीकार किया और ‘‘सब के लिये स्वास्थ्य’’ सुनिश्चित करने के लिये ठोस कदम उठाने के लिये भी प्रतिबद्धता व्यक्त की. यह प्रतिज्ञा इस बात को सुनिश्चित करने के लिये की गई कि किसी को भी कहीं पर भी किसी प्रकार की वित्तीय कठिनाई का सामना किये बिना, अनिवार्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें. सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों का निर्माण करते हुए, सतत विकास के लिये संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा में 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 प्रयोजन निर्धारित किये गये. उन लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिश करते हुए, जो सहस्राब्दि विकास लक्ष्य हासिल नहीं हो पाये, उन सब के लिये मानवाधिकार सुनिश्चित करने और सभी महिलाओं तथा बालिकाओं के लिये लिंग समानता हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है. इसमें विशेष तौर पर सतत विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विषय क्षेत्रों को प्रोत्साहन और संरक्षण दिये जाने तथा मूलभूत स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की चेष्टा की गई है. कार्यसूची में जन स्वास्थ्य के लिये मज़बूत राजनीतिक प्रतिबद्धता का प्रावधान है: ‘‘शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य और सलामती को प्रोत्साहन और सब के लिये जीवन की आकांक्षा बढ़ाने के वास्ते हमें सर्व-जन स्वास्थ्य कवरेज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल अवश्य हासिल करनी चाहिये’’ (एजेंडा 2030 पैरा 26). चाहे सहस्राब्दि विकास लक्ष्य हों अथवा सतत विकास लक्ष्य, विश्व समुदाय का एक हिस्सा होने के नाते भारत, वैश्विक अधिदेश को हासिल करने के वास्ते सदैव सक्रिय रहा है.
2014 में सरकार के गठन के बाद, भारत की स्वास्थ्य नीति में महत्वपूर्ण बदलाव आये हैं. इसने भारत के स्वास्थ्य बज़ट में उत्तरोत्तर वृद्धि की है. उदाहरण के लिये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का कुल व्यय 2012-13 में 14103 मिलियन अमरीकी डॉलर था, जो कि वर्ष 2017-18 में 21467 मिलियन अमरीकी डॉलर हो गया. मौजूदा सरकार देश भर में स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार करते हुए लोगों के साथ किये गये अपने वायदे को पूरा करने का प्रयास कर रही है. पिछले चार वर्षों में सरकार सब के लिये स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के वास्ते विभिन्न स्वास्थ्य योजनाएं लेकर आई है, ये हैं: खुले में शौच से मुक्ति के लिये राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन; 2015 में नई स्वास्थ्य नीति, स्वास्थ्य उपकरण उत्पादन पर विशेष ध्यान के साथ डिजिटल इंडिया अभियान के भाग के तौर पर ई-हेल्थ की पहल. हाल के बज़ट में सरकार आयुष्मान भारत योजना के नाम से दुनिया की सबसे बड़ी सर्व-जन स्वास्थ्य कवरेज योजना लेकर आई है.
बज़ट सत्र 2018-19 के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने 14 मार्च, 2018 को आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की. बाद में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अम्बेडकर जयंती के मौके पर 14 अप्रैल, 2018 को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इस योजना की आधिकारिक घोषणा की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘‘आयुष्मान भारत योजना केवल सेवा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक भागीदारी को जगायेगी ताकि हम एक स्वस्थ, सक्षम और खुशहाल नये भारत का निर्माण कर सकें.’’ सरकार 15 अगस्त, 2018 को एक ही बार में सभी राज्यों में इस योजना को शुरू करने की तैयारी में है. आयुष्मान भारत योजना अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन वर्तमान में जारी दो केंद्र प्रायोजित योजनाओं-राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना (एससीएचआईएस) में सम्मिलित हो जायेगी; आयुष्मान भारत में मुख्यत: दो प्रमुख कार्यसूचियों को पूरा किया जाना है. पहला, इसमें समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करने के लिये देश भर में स्वास्थ्य और देखभाल केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) का नेटवर्क स्थापित किया जायेगा. ये केंद्र सभी चिन्हित गरीब परिवारों को नि:शुल्क दवाइयां और नैदानिक सेवाएं उपलब्ध करवायेंगे. यह सुनिश्चित करने के लिये कि संयुक्त राष्ट्र-सतत विकास लक्ष्यों (यूएन-एसडीजी) के अनुरूप-कोई भी (विशेषकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग) पीछे न रहें, योजना से परिवार के आकार और आयु की सीमा को हटा दिया गया है. इस योजना के अधीन अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के ख़र्चों को शामिल किया जायेगा जिसमें परिवहन भत्ते भी शामिल होंगे.
दूसरा, इस योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा योजना (एनएचपीएस) के नाम से जाना जायेगा. आयुष्मान भारत अथवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा योजना के दायरे में 10 करोड़ गऱीब और वंचित परिवारों (लगभग 500 मिलियन लाभार्थियों) को लाया जायेगा जिन्हें हर साल प्रति परिवार अस्पताल की द्वितीय और तृतीयक देखभाल के लिये 5 लाख रुपये तक की कवरेज प्रदान की जायेगी.
इस योजना के अधीन लाभार्थियों की पात्रता सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना (एसईसीसी) डॉटाबेस पर आधारित होगी. ग्रामीण क्षेत्रों से लाभार्थी ऐसे परिवार होंगे जिनके पास कच्ची दीवार और कच्ची छत के साथ केवल एक कमरा है (कच्चा से आशय अस्थाई से है); परिवार जिसमें 16 से 59 के बीच की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं है; महिला मुखिया वाला परिवार जिसमें 16 से 59 की आयु के बीच कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं है; परिवार में दिव्यांग सदस्य और परिवार में कोई शारीरिक योग्य वयस्क सदस्य नहीं है; अजा/अजजा परिवार; और भूमिहीन परिवार, जिनकी आय का प्रमुख हिस्सा मैनुअल कैजुअल श्रम से होकर आता है; ग्रामीण क्षेत्रों में निम्नलिखित में से कोई भी परिवार स्वत: ही इसमें शामिल हो जायेगा: आश्रयहीन परिवार, निराश्रित, भिक्षा पर आश्रित, मैनुअल कूड़ा उठाने वाले परिवार, आदिवासी जनजातीय समूह और कानूनी तौर पर बंधुआ श्रम से मुक्त व्यक्ति. शहरी क्षेत्रों के लिये योजना के अधीन 11 परिभाषित पेशेवर श्रेणियां पात्र हैं.
इस योजना की एक अन्य प्रमुख विशेषता यह है कि लाभार्थी इस योजना का लाभ सरकारी और पैनलबद्ध निजी दोनों ही अस्पतालों में उठा सकेंगे. क़ीमतों को नियंत्रण में रखने के लिये लाभार्थियों के इलाज के लिये होने वाला भुगतान पैकेज दरों पर किया जायेगा जिसे सरकार अग्रिम तौर पर परिभाषित करेगी.
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य को सुदृढ़ और स्थापित करते हुए, आयुष्मान भारत स्कीम का प्रमुख सिद्धांत सहकारी संघवाद को मज़बूत करना और राज्यों में परिचालन में लचीलापन लाना है. इनमें राज्यों को सहभागिता के जरिए साझेदार बनाने का प्रावधान है. यह विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकारों की मौजूदा स्वास्थ्य बीमा/संरक्षा योजनाओं (उनकी अपनी लागत पर) के साथ उपयुक्त समेकन सुनिश्चित करेगा. राज्य सरकारों को आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन दोनों को क्षैतिज और अनुलंब रूप से विस्तारित करने में सहायता मिलेगी.
योजना के निर्बाध प्रचालन के लिये और नीतिगत निर्देश दिये जाने तथा केंद्र तथा राज्यों के बीच तालमेल को मज़बूत करने के लिये सरकार ने सर्वोच्च स्तर पर आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन परिषद (एबी-एनएचपीएमसी) की स्थापना का प्रस्ताव किया है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री करेंगे. आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन शासकीय परिषद (एबी-एनएचपीएमजीबी) के गठन का भी प्रस्ताव है जिसकी सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) और सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग सह-अध्यक्षता करेंगे, साथ में वित्तीय सलाहकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अपर सचिव और मिशन निदेशक, आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एबी-एनएचपीएम) और संयुक्त सचिव (एबी-एनएचपीएम), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सदस्य के तौर पर रहेंगे. सीईओ, आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन इसके सदस्य सचिव होंगे, आवश्यकता अनुसार राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के सचिव भी सदस्य हो सकते हैं.
राज्य स्तर पर प्रत्येक राज्य में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) होगी. केंद्रीय स्तर पर, आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन एजेंसी (एबी-एनएचपीएमए) नाम से एक नई एजेंसी की स्थापना की जायेगी. इसके प्रमुख भारत सरकार के सचिव/अपर सचिव स्तर के पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) राज्य की सभी सरकारों को योजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया पर सलाह देगी. राज्य और संघ शासित प्रदेश मौजूदा ट्रस्ट/सोसाइटी/लाभ नहीं कमाने वाली कंपनी/राज्य नोडल एजेंसी (एसएनए) को निष्पादन और कार्यान्वयन की शक्ति देने अथवा
कोई नई संस्था स्थापित करने के लिये स्वतंत्र है.
प्रीमियम के भुगतान पर होने वाले खर्च की वित्त मंत्रालय के लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार विनिर्दिष्ट अनुपात में केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच हिस्सेदारी होगी. अनुमानित प्रीमियम प्रति वर्ष प्रति परिवार 2000 रु. से अधिक नहीं होगा. योजना के लिये होने वाला व्यय केंद्रीय (60त्न) और राज्य (40त्न) सरकारें मिलकर उठायेंगी. कुल व्यय उन राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों में भुगतान किये गये वास्तविक बाज़ार निर्धारित प्रीमियम पर निर्भर करेगा जहां बीमा कंपनियों के जरिये आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन कार्यान्वित किया जायेगा. जिन राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में योजना को ट्रस्ट/सोसाइटी पद्धति के जरिये लागू किया जायेगा, निधियों का केंद्रीय हिस्सा पूर्व निर्धारित अनुपात में वास्तविक व्यय अथवा प्रीमियम सीमा (जो भी कम है) के आधार पर प्रदान किया जायेगा. राज्य को अनुदान की अपनी मैचिंग हिस्सेदारी का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर करना होगा. यह सुनिश्चित करने के लिये समय पर निधियां राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के पास पहुंच जाये, केंद्रीय सरकार से निधियों का अंतरण आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा मिशन से राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सीधे एसक्रो खाते के जरिये किया जा सकता है. यह अनुमान है कि इसके कार्यान्वयन के पहले वर्ष में कुल 100 अरब रु. की लागत आयेगी जिसमें से 60 अरब रु. केंद्र की तरफ  से और शेष 40 अरब रु. राज्यों को वहन करने होंगे.
लाभार्थियों के व्यापक आधार को देखते हुए और डिजिटल इंडियाकी नीति के अनुरूप सरकार ने नीति आयोग की साझेदारी में एक मज़बूत मॉडयूलर, स्केलेबल और इंटर ऑपरेबल आईटी मंच शुरू करने का भी फैसला किया है जिससे समूची प्रक्रिया कागज़ रहित और नकदी रहित हो जायेगी.
योजना से जनसंख्या के वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण विस्तारित स्वास्थ्य और नैदानिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी. इसके अलावा उन लोगों की जरूरतें, जो कि वित्तीय संसाधनों के अभाव में दबी रह जाती थीं, पूरी हो सकेंगी. इससे समय पर इलाज, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार, रोगी की संतुष्टि, उत्पादकता और कार्यकुशलता में सुधार, रोज़गार सृजन में सुधार आयेगा, जिसके परिणामस्वरूप जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा. आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य देश के गऱीब और वंचित लोगों के लिये सभी क्षेत्रों अर्थात स्वास्थ्य में निवेश, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के संयोजन और वित्तपोषण, रोगों की रोकथाम और विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए अच्छे स्वास्थ्य को प्रोत्साहन देना, प्रौद्योगिकियों की पहुंच, मानव संसाधन का विकास करना, चिकित्सा बहुलवाद को प्रोत्साहन देना, बेहतर स्वास्थ्य के लिये अपेक्षित ज्ञान आधार का निर्माण करना, वित्तीय संरक्षा रणनीतियां और स्वास्थ्य के लिये नियमन तथा प्रगामी आश्वासन आदि में स्वास्थ्य प्रणालियों को मूर्तरूप देने में केंद्रीय और राज्य-वार सरकारों की भूमिका को सूचित, स्पष्ट, सुदृढ़ और लोकप्रिय बनाना है. आयुष्मान-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षा योजना और संबद्ध नियामक ढांचे से इस बात की
आशाओं को बल मिला है कि भारत ‘‘सब के लिये स्वास्थ्य’’ और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में स्थाई प्रगति करेगा.
लेखक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय, क्वालालम्पुर, मलेशिया में पोस्ट डॉक्टरल फैलो हैं., ई-मेल: shanteshjnu@gmail. Com व्यक्त विचार उनके अपने हैं.