संपादकीय लेख


Volume-19, 11-17 August, 2018

 
 
स्वतंत्रता दिवस और
नये भारत का निर्माण


डॉ. राजीव रंजन गिरि

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के नेताओं ने इसके महान भविष्य का सपना संजोया था. उन्होंने नये देश के निर्माण के लिये एक व्यापक रूपरेखा बनाई थी. यद्यपि उन्होंने एक नये भारत के निर्माण के लिये अनेक मार्गों की कल्पना की थी, लेकिन उन सब का एक समान लक्ष्य था, यानी भारत के लिये शिखरतम विकास का लक्ष्य. प्रत्येक भारतीय को भोजन, सिर पर छत और संपूर्ण रहन-सहन व्यवस्था की पहुंच होनी चाहिये. प्रत्येक बच्चे को संपूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिये. कोई भी खेत सिंचाई के अभाव के कारण सूखा नहीं रहना चाहिये. ऊंची श्रेणी-निचली श्रेणी की अनुभूति का अस्तित्व मिट जाना चाहिये. नये भारत में किसी भी तरह का उत्पीडऩ और बर्बरता की अनुमति नहीं होनी चाहिये. राष्ट्र निर्माताओं ने इस दिशा में हर संभव योगदान किया.
इस संबंध में हमें राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी के स्वप्न को अवश्य याद करना चाहिये. उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहां गऱीब से गऱीब लोग भारत से संबद्ध होने की अनुभूति को महसूस करें-जहां राष्ट्र निर्माण में उनकी आवाज़ की भी भूमिका हो. उन्होंने कहा था कि उनका एक ऐसे भारत के लिये प्रयास होगा जिसमें ऊंच और नीच का कोई भेदभाव नहीं होगा और जहां विभिन्न समुदाय पूर्ण सौहार्द के साथ रहेंगे. ऐसे भारत में अस्पृश्यता, शराब और अन्य नशे की लत का गंभीर संकट नहीं होगा. जहां पुरुष और महिला को समान अधिकार होंगे. दुनिया के सभी देशों के साथ हमारे शांतिपूर्ण संबंध होंगे, जिसका अर्थ है कि हम न किसी दूसरे देश का उत्पीडऩ करेंगे और न ही किसी अन्य देश को हमारा उत्पीडऩ होने देंगे. गांधी जी ने 1931 में इस सपने की रूपरेखा बनाई थी. हमने इसके 16 वर्ष बाद स्वतंत्रता हासिल की.
अगले चार वर्षों में हम अपनी आज़ादी की हीरक जयंती मना रहे होंगे. नये भारत का विचार इस संबंध में फिर प्रकाश में आया है. 75 वर्ष किसी समाज या राष्ट्र के लिये एक विशाल समयावधि होती है. भारतीय परंपरा में भी 75 वर्ष की अवधि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हीरक जयंती को रजत जयंती और स्वर्ण जयंती के गौरवशाली सिलसिले का हिस्सा माना जाता है. अत: यह नये भारत की संकल्पना के लिये उपयुक्त समय है. इस बार स्थितियां बेहतरी की दिशा में हैं. भारत में अब 130 करोड़ से अधिक लोग हैं. इस जनसंख्या का 62 प्रतिशत हिस्सा 59 वर्ष से कम आयु का है. युवाओं की अधिकतम संख्या भी भारत में है. इस के प्रकाश में हम भी भारत को अधिकतम क्षमतावान देश के तौर पर विचार कर सकते हैं. यौवन जीवन का सबसे क्षमतावान समय होता है और अधिकतम संख्या में युवाओं वाले इस देश में अधिकतम क्षमता है. हमारे पास काम करने के लिये अधिक संख्या में हाथ हैं और सोचने के लिये अधिकतम संख्या में दिमाग हैं. मानव संसाधनों के मामले में कोई भी अन्य देश भारत का मुकाबला नहीं कर सकता है.
भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों का अटूट भंडार है, जो नये भारत के सपने को पूरा करने में मददगार बनेगा. भारत में 19,94,555 वर्ग किलोमीटर भूमि खेती योग्य है. यह भारत में कुल भूमि का 56.76 प्रतिशत है. भारत में पर्वतों, नदियों, वनों और सामान्य भूमि भी प्रचुर मात्रा में है. इसे कोयला संसाधनों की दृष्टि से भी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश होने का गौरव प्राप्त है. इन सब बातों के मद्देनजऱ इसे अवसरों का देश कहा जा सकता है जिसमें हर किसी के लिये प्रचुर मात्रा में संसाधन मौजूद हैं. गांधी जी ने ठीक ही कहा था कि प्रकृति ने भी भारत का पूरा साथ दिया है. उन्होंने कहा था कि प्रकृति के पास किसी की तृष्णा के लिये नहीं, बल्कि हरेक की आवश्यकता को पूरा करने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं.
नये भारत की अवधारणा को हासिल करने की समय-सीमा हीरक जयंती के समय पर निर्धारित की गई है. उस समय तक गरीबों के लिये घर, किसानों के लिये दोगुनी आय और महिलाओं की सुरक्षा के वायदे किये गये हैं. जातिवाद, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को समाप्त करने की कार्यनीतियां तैयार की गई हैं. नया भारत पूरी तरह स्वच्छ होगा. काले धन को वापस लाया जायेगा. अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण कर दिया जायेगा. मेक इन इंडिया और क्लीन इंडिया इस नये भारत के दो महत्वपूर्ण पहलु हैं. हर किसी को कार्य की आज़ादी होगी. ऐसा वातावरण बनाया जायेगा जहां युवा उद्यमी देश के विकास के लिये अपनी प्रतिभाओं का सदुपयोग कर सकेंगे. इस नये भारत का आधार लोगों के लिये अपने कौशलों के पूर्ण विकास की आज़ादी होगी. इससे एक ऐसे महान भारत का निर्माण होगा जहां पहले वाली कोई भी समस्या नहीं रहेगी. नये भारत के सभी घरों में एलपीजी, बिजली, इंटरनेट कनेक्शन और एअरकंडीशनर्स होंगे. सभी घरों में शौचालय भी होंगे. नये भारत के नागरिक उच्च शिक्षित होंगे. संपूर्ण भारत में अत्याधुनिक और व्यापक अवसंरचना का नेटवर्क होगा. हर किसी के पास ऑटोमोबाइल होगा. इन ऑटोमोबाइल्स और सामग्री संसाधनों का विनिर्माण पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखकर किया जायेगा. शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई को पाट दिया जायेगा. दोनों ही क्षेत्रों में हवा और पानी स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में भी सब तरह की सुविधाएं होंगी. शहर शांतिपूर्ण होंगे. इस तरह नया भारत दुनिया में एक प्रभावशाली राष्ट्र बन जायेगा. गऱीबी, बेरोजग़ारी और भ्रष्टाचार से मुक्त नया भारत दुनिया की तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगा.
नये भारत की अवधारणा खूबसूरत और स्वतंत्रता के मूल्यों के अनुरूप है. परंतु यह उतना आसान नहीं है. इसके लिये अनेक बाधाएं पार करनी हैं. यह सत्य है कि भारत 2007-08 की वैश्विक मंदी से मुख्यत: अप्रभावित रहा था. इसकी अर्थव्यवस्था भी तेज़ी से विकसित हो रही है. परंतु क्या यह विकास समाज से असमानता को हटाने में सफल रहा है? इस प्रश्न का उत्तर असंतुष्टि कारक है. यह स्थिति नये भारत के लिये एक बड़ी चुनौती है.
नये भारत के लिये इसके मार्ग में एक और बड़ी चुनौती है. हमारी आधी आबादी कृषि क्षेत्र से संबंधित व्यवसाय में लगी है. यह एक छिपी बेरोजग़ारी है. इतनी बड़ी जनसंख्या के आंशिक रोजग़ार के कारण मानव संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है. यह विशाल अकुशल जनसंख्या विकास के पहिये में बाधक है. इतनी बड़ी जनसंख्या को कुशल रोजग़ार के लिये प्रशिक्षित करना भी एक बड़ी चुनौती है. प्रौद्योगिकी उन्नयन ने मानव श्रम का स्थान ग्रहण कर लिया है. ऐसे अनेक कार्य हैं जो कि श्रमिक करते थे परंतु अब इन्हें प्रौद्योगिकी के जरिए आसानी से किया जा सकता है. एक मशीन कई मानव श्रमिकों का काम कर लेती है. नये भारत में प्रौद्योगिकी पर बड़ा ज़ोर दिया जा रहा है. वैश्विक विकास के स्तर तक पहुंचना अनिवार्यता है. प्रौद्योगिकी और व्यापक जनसंख्या के बीच संतुलन बिठाना एक बड़ी चुनौती है.
आधी दुनिया अर्थात महिलाओं को राष्ट्र निर्माण से जोडऩा एक अन्य बड़ी चुनौती है. महिलाओं का प्रश्न हमें नये भारत के साथ-साथ स्वतंत्रता की अवधारणा के लिये एक अच्छे पैरामीटर के साथ प्रस्तुत करता है. कोई भी राष्ट्र महिलाओं के योगदान को नजऱ अंदाज करके कभी विकसित नहीं हुआ है. भारत में मौजूद पितृसत्तात्मक प्रणाली ने महिलाओं को केवल घरों की दीवारों के भीतर रखा है. यद्यपि पहले की अपेक्षा उनकी स्थिति में सुधार हुआ है, उनकी पूरी क्षमता का अभी सदुपयोग किया जाना है.
इन तमाम बाधाओं के बावजूद नये भारत की अवधारणा ने भारतीय आज़ादी की भावना को बढ़ाने में सहायता की है. नये भारत की अवधारणा तार्किकता के साथ-साथ सुनियोजित है. अनेक योजनाएं नये भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार हैं. इनमें कुछेक के नाम हैं-जन धन योजना, कौशल भारत-मानव संसाधानों को प्रशिक्षित करने के लिये, खाद्य सुरक्षा मिशन-कुपोषण से छुटकारा पाने के लिये और ई-गवर्नेंस तथा डिजिटल इंडिया-भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद को समाप्त करने के लिये.
युवा नये भारत और भारतीय स्वतंत्रता के बीच संपर्क सूत्र बने हुए हैं. भारतीय जनसंख्या की औसत आयु 28 वर्ष है. नये भारत में युवाओं की भागीदारी जोडऩे का अर्थ है उन्हें स्वतंत्रता के पूर्ण अवसर प्रदान करना. यह भी नोट करने लायक है कि गांधी जी के अनुसार स्वतंत्रता और ‘‘स्वाधीनता’’ भिन्न-भिन्न अवधारणाएं हैं. जबकि ‘‘स्वाधीनता’’ स्वयं की चेतना का विकास करने पर केंद्रित है, स्वतंत्रता में भौतिकतावादी आज़ादी पर ज़ोर दिया जाता है. आत्म-नियंत्रण और संतुष्टि के विचार दोनों के बीच अंतर करते हैं. यदि गांधी जी के इस मूल तत्व को नये भारत के साथ जोड़ दिया जाए तो यह और अधिक व्यापक हो जायेगा.
(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं)
ई-मेल: rajeev.ranjan.giri@gmail.com इस लेख में व्यक्त विचार उनके अपने हैं.