संपादकीय लेख


Volume-21, 25-31 August, 2018

 
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता, विचार और चिंतन


जन-जन के नेता, वयोवृद्ध नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त, 2018 को नई दिल्ली में देहावसान हो गया. 93 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान - एम्स में अंतिम सांस ली.
स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रधानमंत्री के रूप में एक समृद्ध धरोहर है, जिसे स्मरण किया जाएगा और संजोकर रखा जाएगा. वे एक प्रखर राष्ट्रीय नेता, विद्वान राजनीतिज्ञ, निस्वार्थ समाजसेवी, सशक्त वक्ता, कवि और साहित्यकार, पत्रकार और वास्तव  में बहुआयामी व्यक्तित्व थे.
नीचे उनके उस भाषण के कुछ अंश दिए गए हैं, जो उन्होंने उस समय दिया था, जब विश्व नई सदी में प्रवेश कर रहा था. यह भाषण प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ‘‘सेलेक्टिड स्पीचेज़ ऑफ प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी - (वाल्यूम-2)’’ नामक पुस्तक में संकलित है. उनके भाषण में निहित दूरदॢशता और विचार निरंतर प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे.
‘‘20वीं सदी में अंतिम सूर्यास्त के साथ ही मानव इतिहास के एक नए अध्याय की शुरूआत हुई है. यह खुशी और उत्सव का मौका है. सभी राष्ट्र मिल कर अधिक धैर्य, प्रौद्योगिकी, ताकत और बुद्धिमता के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जीत सकते हैं. भारत दुनिया को आतंकवाद, जो मानवता के खिलाफ एक अपराध है, से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में मदद करेगा. नई सदी के लिए यह हमारा प्रथम संकल्प है. आतंकवाद के साथ ही गरीबी और निरक्षरता का अभिशाप भी दूर करना होगा. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक भारतीय का अपना घर हो और निर्धन से निर्धन व्यक्ति भी गरिमापूर्ण जीवन जीये. हमें जाति, भाषा और धर्म के बंधन तोडऩे होंगे. हमें वे कृत्रिम दीवारें मिटानी होंगी, जो भारतीय को भारतीय से अलग करती हैं. हमें सभी तरह का भेदभाव, विशेष रूप से महिलाओं के साथ भेदभाव समाप्त करना होगा. नए समाज के निर्माण की कुंजी तीव्र आर्थिक विकास और तीव्र सामाजिक परिवर्तन में निहित है. हमें समानता के साथ विकास सुनिश्चित करना होगा, ताकि भारत की खुशहाली का लाभ प्रत्येक भारतीय को मिले. भारत एक ऐसा विकसित राष्ट्र बनेगा, जो सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचे और उसकी देखभाल करे. नई सदी के लिए यह हमारा दूसरा संकल्प हो सकता है. हमें व्यक्तियों के स्तर पर और राष्ट्र के स्तर पर उत्कृष्ट बनना है. हमारे पास विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सर्वोत्तम प्रतिभा है. हमारे खिलाड़ी विश्व में सर्वश्रेष्ठ समझे गए हैं. हमारे शिक्षकों की दुनिया के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में मांग है. हमारे किसान विषम परिस्थितियों मे फसल उत्पादन में कीर्तिमान स्थापित करते हैं. हमारे उद्योग हर तरह की प्रतिस्पर्धा का सामना करने में सक्षम हैं. 20वीं सदी के अंतिम दशकों में प्रचुर अवसर सृजित हुए हैं. आविष्कारों की बदौलत नए अवसर उपलब्ध हुए हैं, जिनकी 20 वर्ष पहले तक कोई कल्पना नहीं की जा सकती थी. प्रतिभा और संसाधनों के बलबूते पर हम एक उत्कृष्ट राष्ट्र बन सकते हैं. हमें आने वाले युग के अवसरों का मूल्यांकन अवश्य करना चाहिए ताकि हम एक ऐसे शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभर सकें, जिसकी ताकत उसकी उपलब्धियों में निहित हो. उत्कृष्टता हमारा मंत्र होगी. आओ इसे हम नई सदी के लिए अपने तीसरे संकल्प का नाम दें. 26 जनवरी को हम अपने गणराज्य की स्वर्ण जयंती मनाएंगे. भारत के संविधान ने हमारे लोकतंत्र के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में काम किया है, विधि का शासन और लोगों की सर्वोच्चता कायम की है. हम एक सशक्त लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में उभरे हैं. लोकतंत्र की भावना और लोकतांत्रिक प्रणाली में लोगों का भरोसा समय के अनुसार खरा उतरा है, परंतु हमारे संस्थानों में कमजोरियां उजागर होने लगी हैं. इसे रोकने और तत्काल दुरुस्त करने की आवश्यकता है. लोकतंत्र का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए आपकी सहायता से संस्थानों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है, ताकि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटा जा सके. भारत के संस्थानों को फिर से स्वस्थ बनाया जाएगा. यह नई सदी के लिए हमारा चौथा संकल्प है. प्रिय देशवासियो, हम ऐसी सभ्यता के साथ 21वीं सदी में प्रवेश कर रहे हैं, जिसका इतिहास 5000 साल से अधिक पुराना है. सदियों से हमने परंपराओं और मूल्यों का पोषण किया है. वही हमारी वास्तविक ताकत हैं. भारत ने विश्व के लिए उपहार के रूप में सदियों से इन मूल्यों को संरक्षित रखा है. ये मूल्य ऐसी सच्चाईयां हैं, जिन्हें अब विश्व ने मार्ग तलाश करने, सुकून और बुद्धिमता हासिल करने के लिए अपनाना शुरू कर दिया है. अरविंदो ने कहा था, ‘‘भारत के भाग्य का सूर्योदय होगा और समूचे भारत में उसका प्रकाश फैलेगा और वह एशिया को पार करके समूचे विश्व तक जाएगा’’. हमें उस लक्ष्य को साकार करना चाहिए. आइए, नई सदी को भारत की सदी बनाएं. मेरी कामना है कि वर्ष 2000 और आने वाले दशक एक नए युग, सुरक्षा के नए युग और सभी लोगों के बीच भाईचारे और सभी राष्ट्रों के लिए खुशहाली के युग के रूप में सामने आएं.’’
स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखित और प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं:
अंग्रेजी टाइटल्स
1.सेलेक्टिड स्पीचेज़ ऑफ प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी - (वाल्यूम-1)
2.सेलेक्टिड स्पीचेज़ ऑफ प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी - (वाल्यूम-2)
3.सेलेक्टिड स्पीचेज़ ऑफ प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी - (वाल्यूम-3)
4.टुवड्र्स ए डिवेलप इकोनॉमी - डिफाइनिंग मोमेंट्स
5.टुवड्र्स ए न्यू वर्ड - डिफाइनिंग मोमेंट्स
हिंदी पुस्तकें
6.प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुने हुए भाषण (खंड-1)
7.प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुने हुए भाषण (खंड-2)
8.प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुने हुए भाषण (खंड-3)
9.विकसित अर्थव्यवस्था की ओर - निर्णायक दौर
10.नए विश्व की ओर  - निर्णायक दौर
(ब्यौरा हमारी वेबसाइट www.publicationsdivision.nic. in पर उपलब्ध है)