संपादकीय लेख


Volume-1-7 September, 2018

 

भारत का सडक़ क्षेत्र और
रोज़गार के अवसर

डॉ. रणजीत मेहता

सडक़ें बाहरी जगत के साथ संपर्क कायम करती हैं. सडक़ें जीवन की गतिविधियों का माध्यम हैं. सडक़ों का आर्थिक विकास और वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान है और वे महत्वपूर्ण सामाजिक लाभ प्रदान करती हैं. किसी राष्ट्र की वृद्धि और विकास के लिए सडक़ें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. रोज़गार, सामाजिक, स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी सेवाओं तक पहुंच कायम करने के अतिरिक्त सडक़ें गरीबी के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण नेटवर्क प्रदान करती हैं. किसी राष्ट्र की प्रगति के लिए सडक़ ढांचा सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटकों में से एक है. उत्पादकों को बाजारों से, श्रमिकों को रोज़गार से, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों से जोडऩे और बीमारों को अस्पतालों तक पहुंचाने में योगदान करते हुए सडक़ें किसी भी विकास कार्यसूची के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. विश्व बैंक शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं के लिए संयुक्त रूप से जितनी राशि उधार देता है, उससे कहीं ज्यादा धन वह सडक़ों के लिए प्रदान करता है.
सडक़ ढांचा एक प्रमुख क्षेत्र है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को आगे बढ़ाता है. भारत की अर्थव्यवस्था विशाल है और निरंतर बड़ी होती जा रही है. अनुमान है कि भारत 2050 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. स्थायी आर्थिक विकास के लिए सडक़ परिवहन ढांचे का महत्व भली-भांति समझा गया है. अपर्याप्त और अक्षम ढांचे के कारण ऊंची ट्रांजेक्शन लागत अर्थव्यवस्था को पूरी क्षमता के साथ विकसित होने में रुकावट बन सकती है, भले ही अन्य क्षेत्रों में कितनी ही प्रगति क्यों न हो. बुनियादी ढांचे का कार्य निष्पादन व्यापक रूप में अर्थव्यवस्था के कार्य निष्पादन को व्यक्त करता है. भारत में हालांकि एक विस्तृत और विविध परिवहन क्षेत्र है, जिसकी अपनी चुनौतियां हैं, फिर भी ऊर्जा सक्षम प्रौद्योगिकियों और ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए उन पर काबू पाया जा सकता है. परिवहन का महत्व इससे अधिक व्यक्त नहीं किया जा सकता कि इस क्षेत्र को राष्ट्र की जीवन रेखाकहा गया है. परिवहन ढांचा इस तरह राष्ट्र की प्रगति को गति और सक्षमता प्रदान करता है, यह बात अनेक उदाहरणों से प्रमाणित की गई है.
भारत में सडक़ ढांचे का विकास तेज गति के साथ हो रहा है. पिछले चार वर्षों के दौरान सुदृढ़ मांग, उच्चतर निवेश, आकर्षक अवसर और नीतिगत सहायता जैसे उपायों ने देश में सडक़ क्षेत्र का रूप बदल दिया है. भारत का सडक़ नेटवर्क विश्व में दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें 56 किलोमीटर लंबी सडक़ें शामिल हैं. साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. इस क्षेत्र का तीव्र विकास अवश्यंभावी है. भारत सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में सडक़ ढांचा एक है, क्योंकि वस्तुओं की समग्र ढुलाई में इस क्षेत्र का योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है, जबकि यात्री परिवहन के क्षेत्र में इसका योगदान 85 प्रतिशत है.
भारत ने 2018 में ‘‘ऐतिहासिक गति’’ के साथ सडक़ निर्माण संबंधी ठेके अवार्ड किए हैं. इससे यह संभावना बढ़ गई है कि इस वित्त वर्ष के दौरान रिकॉर्ड संख्या में कार्य आदेश दिए जाएंगे. भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा दिए जाने वाले आर्डर 12 महीने की अवधि में एक लाख करोड़ रुपये (15.3 अरब अमरीकी डॉलर) को पार कर सकते हैं, जो एक वर्ष पहले 60,000 करोड़ रुपये के थे. सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए संरचनाबद्ध और पद्धति विषयक उपाय किए जा रहे हैं. इनमें अवरुद्ध परियोजनाओं को फिर से चालू करने के उपाय, सडक़ क्षेत्र को अधिक निवेशक अनुकूल बनाने और अलग- अलग समय पर इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त नए मॉडल अपनाना शामिल है.
पिछले कुछ वर्षों में भारत के सडक़ ढांचे में निरंतर महत्वपूर्ण सुधार हुआ है. कनेक्टिविटी में सुधार आया है और सडक़ परिवहन तीव्र विकास का केंद्र बिंदु बन गया है. सडक़ें सेवाओं तक बेहतर पहुंच कायम करने, आवागमन की सुविधा प्रदान करने और लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आने-जाने की स्वतंत्रता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. देश में भरोसेमंद और सुगम सडक़ नेटवर्क तथा आर्थिक विकास में उसके महत्व को समझते हुए भारत सरकार के सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने गुणवत्तापूर्ण सडक़ों और राजमार्गों के निर्माण का दायित्व संभाला है.
भारत में पिछले 4 वर्षों के दौरान शुरू की गई प्रमुख सडक़ ढांचा विकास परियोजनाओं में से कुछ का ब्यौरा नीचे दिया गया है:-
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाएं
सात चरणों वाली एनएचडीपी परियोजनाएं भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनका अनुमानित व्यय 92 अरब अमरीकी डॉलर है. वर्ष 2000 के बाद सबसे बड़ी राजमार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत देश में 49,260 किलोमीटर से अधिक सडक़ों का उन्नयन अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है.
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग निम्नांकित मार्गों को चार/छह लेन मानक के अनुरूप विकसित कर रहा है: दिल्ली-मुम्बई, चेन्नै-कोलकाता, जैसे 4 प्रमुख मेट्रोपोलिटन शहरों को जोडऩे वाला स्वर्ण चतुर्भुज, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम मार्ग (एनएस-ईडब्ल्यू), जो श्रीनगर से कन्याकुमारी और सिल्चर से पोरबंदर तथा सेलम को कोच्चि से जोड़ता है, देश के प्रमुख बंदरगाहों का सडक़ संपर्क राष्ट्रीय राजमार्गों से जोडऩा, 4000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों को 4 लेन का बनाना, करीब 20,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को दो लेन का बनाते हुए उनका उन्नयन करना, 6,500 किलोमीटर लंबे 4 लेन वाले मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों को 6 लेन का बनाना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत डिज़ाइन-निर्माण-वित्त व्यवस्था-प्रचालन (डीबीएफओ) पद्धति के अनुसार 1000 किलोमीटर लंबे राजमार्गों का एक्सप्रेस मार्ग के रूप में विकास करना, जिसके अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले 9 एक्सप्रेस मार्गों की पहचान की गई है. उपरोक्त सभी मार्गों का लक्ष्य शीघ्र कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है, जिसे बढ़ाने के लिए इन मार्गों के साथ एकल रिंग मार्गों, बाईपासों, ग्रेट सैपरेटरों, फ्लाईओवरों, एलिवेटिड मार्गों, सुरंगों, रोड ओवर ब्रिजों, अंडर पासों, सर्विस मार्गों आदि का निर्माण बीओटी (यानी बनाओ चलाओ और सौंपो) आधार पर किया जा रहा है.
सरकार कम से कम 24 सडक़ और राजमार्ग परियोजनाओं को पहले ही तेजी से पूरा कर चुकी है और करीब 10,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का अनुमोदन करने की योजना बना रही है. इसके अतिरिक्त भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 2022 तक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की लंबाई दोगुनी करने अर्थात् दो लाख किलोमीटर पर पहुंचाने के दीर्घावधि लक्ष्य के हिस्से के रूप में 250 अरब अमरीकी डॉलर की लागत से 50,000 किलोमीटर लंबी सडक़ों के निर्माण की योजना बनाई है. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के अभियान के रूप में सडक़ निर्माण की गति का लक्ष्य बढ़ा कर प्रतिदिन 28 किलोमीटर कर दिया गया है, ताकि कम से कम समय में अधिक कनेक्टिविटी हासिल की जा सके.
सरकार आम नागरिकों की कठिनाइयां दूर करने के लिए देश में एक छोर से दूसरे छोर तक विभिन्न सडक़ परियोजनाएं कार्यान्वित कर रही है. मंत्रालय ने उल्लेखनीय ट्रेंड शुरू किए हैं, जिनसे आने वाले समय में भारत सडक़ ढांचे के क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा.
भारतमाला परियोजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 अक्तूबर, 2017 को अगले 5 वर्षों में 83,677 किलोमीटर लंबे सडक़ नेटवर्क के निर्माण के लिए 6.92 ट्रिलियन रुपये का परिव्यय मंजूर किया था. सडक़ निर्माण के लिए अब तक का सबसे बड़ा परिव्यय ऐसे समय मंजूर किया गया, जब मोदी सरकार अंतर-राज्य शुल्क  बाधाओं को समाप्त करने के लिए एक साझा बाजार विकसित करने के उद्देश्य से वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू करने जा रही थी. सुदृढ़ सडक़ ढांचा इस दिशा में मददगार साबित होगा.
सडक़ निर्माण को बढ़ावा देने के इन उपायों में भारतमाला परियोजना भी शामिल है, जिसके लिए 5.35 ट्रिलियन रुपये के निवेश को मंजूरी दी गई, जिससे 34,800 किलोमीटर लंबी सडक़ों का निर्माण होगा. इसके अतिरिक्त भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय राज्यों द्वारा संचालित 48,870 किलोमीटर लंबी सडक़ों के निर्माण पर 1.57 ट्रिलियन रुपये खर्च करेंगे.
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत करीब 9,000 किलोमीटर लंबे आर्थिक मार्गों, करीब 6000 किलोमीटर लंबे अंतर-कॉरिडोर और फीडर मार्ग, राष्ट्रीय कॉरिडोर सक्षमता कार्यक्रम के अंतर्गत 5000 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण, सीमावर्ती और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी कार्यक्रम के अंतर्गत करीब 2000 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण तटीय और बंदरगाह कनेक्टिविटी के अंतर्गत करीब 2000 किलोमीटर लंबी सडक़ें, करीब 800 किलोमीटर के एक्सप्रेस मार्ग और 10,000 किलोमीटर के एनएचडीपी मार्गों का निर्माण शामिल है प्रथम चरण के दौरान सडक़ों की कुल लंबाई करीब 34,800 किलोमीटर होगी. भारतमाला परियोजना गुजरात और राजस्थान में शुरू की जाएगी. बाद में इसे पंजाब और उसके बाद हिमालयी क्षेत्र में बढ़ाया जाएगा, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर (भारत-म्यामां सीमा तक) और मिजोरम को जोड़ेगी. इस परियोजना में पूर्वोत्तर के राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है.
रोज़गार सृजन
यह उम्मीद की जा रही है कि भारतमाला से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, निर्यात और निवेश में वृद्धि होगी. सरकार की विशिष्ट परियोजना भारतमाला के अंतर्गत निर्माण चरण के दौरान 10 करोड़ कार्य दिवसों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे तथा इससे आर्थिक क्रियाकलापों को बढ़ावा मिलने से 2.2 करोड़ रोज़गार के स्थायी अवसर सृजित होंगे. सरकार को उम्मीद है कि माननीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार भारतमाला सहित सडक़ निर्माण के कार्यक्रमों से 14.20 करोड़ कार्य दिवसो के लिए रोज़गार सृजन होगा. भारतमाला से न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि सडक़ दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या में भी 50 प्रतिशत से अधिक कमी आएगी. सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मानव त्रुटि, सडक़ों की खराबी, वाहनों में विनिर्माणगत खामियां और यातायात में बढ़ती भीड़-भाड़ आदि ऐसे घटक हैं, जो दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाते हैं.
सडक़ निर्माण के क्षेत्र में उठाए जा रहे सभी कदमों से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में रचनात्मक सुधार होगा. इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए भारी मात्रा में धन जुटाना, विशेषकर निजी क्षेत्र से धन जुटाना अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह ढांचागत योजना सकल घरेलू उत्पाद में 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी में योगदान करेगी. भारत के महत्वाकांक्षी भारतमाला कार्यक्रम के अंतर्गत बनाई गई सडक़ों से वाहनों की गति में 20-25 प्रतिशत का इजाफा होगा, जिससे लॉजिस्टिक की लागत में कमी आएगी. इससे भारत की आपूर्ति शृंखला की लागत घट कर 6 प्रतिशत रह जाएगी, जो वर्तमान में 18 प्रतिशत है. केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग तथा जहाजरानी और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुत्थान मंत्री श्री नितिन गडकरी के अनुसार इन परियोजनाओं से दो लाख करोड़ कार्यदिवसों के लिए रोज़गार का सृजन होगा.
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि नई परियोजनाएं आवंटित किए जाने और कुछ रुकी हुई परियोजनाओं में गति लाने से भारत के सडक़ क्षेत्र की संभावनाएं अत्यंत उज्ज्वल हैं. नियामक परिवर्तनों और सरकारी निवेश में बढ़ोतरी से पिछले 4 वर्षों में सडक़ क्षेत्र का जीर्णोद्धार करने में मदद मिली है. मोदी सरकार ने मई 2014 में सत्ता में आने के बाद कई महत्वपूर्ण उपाय किए, जिनमें तेजी से मंजूरी प्रदान करने और विवाद समाधान, अंतिम मील तक वित्त पोषण और कंपनियों के लिए बाहर निकलने की सुविधा प्रदान करना शामिल है. सरकार द्वारा सडक़ क्षेत्र में शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान करने से कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कायम की, ताकि सडक़ क्षेत्र के विकास में पूंजी लगाई जा सके. भारतीय बुनियादी ढांचा क्षेत्र निवेश के व्यापक अवसर प्रदान करता है. जहां आने वाले वर्षों में करीब 28.2 ट्रिलियन रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी, सरकार ने अनेक परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी है और ऐसी परियोजनाओं को बहाल करने के लिए एक बारगी पूंजी निवेश का प्रस्ताव किया है, जो धन अभाव के कारण रुकी हुई थीं. इसके लिए हाईब्रिड वार्षिकी मॉडल अपनाया गया, जिसमें परियोजना लागत का 40 प्रतिशत सरकार प्रदान करती है. यह समझा जा रहा है कि सडक़ों की गतिशीलता बढऩे से लोगों का अकेलापन दूर होगा और नतीजतन गरीबी घटेगी. सडक़ परिवहन उद्योग सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और गतिशील समाज का आधार है. अत: यह सर्वदा उचित और अपरिहार्य है कि एक ऐसे उद्योग को सुरक्षा प्रदान की जाए, जो आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समृद्धि और अंतत: शांति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. लोगों और वस्तुओं की निरंतर गतिशीलता की मांग पूरी करते हुए यह क्षेत्र विकसित और विकासशील देशों में समान रूप से लोगों के जीवन को प्रभावित करता है. सडक़ परिवहन उद्योग वास्तव में सभी व्यापारों को विश्व के प्रमुख बाजारों से जोडऩे, व्यापार को गति प्रदान करने और रोज़गार के अवसर पैदा करने की दिशा में सक्रिय है.
(लेखक डॉ. रणजीत मेहता पीएच.डी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली के प्रधान निदेशक हैं. लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. ईमेल ranjeetmehta@ gmail.com)