संपादकीय लेख


Editorial Volume-26

पर्यटन: एक बढ़ता उद्योग

मनोज दीक्षित

भारत में पर्यटन एक बढ़ता उद्योग है, जहां विश्वभर के लोग देश के प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने और इसके राज्यों के विस्तृत क्षेत्रों का भ्रमण तथा उनकी संस्कृतियों एवं जलवायु का आनंद लेने के लिए आते हैं। अनेक पर्यटक ताजमहल और खजुराहो मंदिरों जैसे भारत के ऐतिहासिक स्थलों से आकर्षित होकर यहां आते हैं। सर्वाधिक संख्या में पर्यटकों का आगमन आमतौर पर सर्दी के महीनों दिसंबर और जनवरी में होता है, जब तापमान अच्छा समझा जाता है। पर्यटन भारत में सबसे बड़ा सेवा उद्योग है, जिसका देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान है।

वीजा ऑन अराइवल अर्थात् देश में पहुंचने पर वीजा प्रदान करने की सुविधा 2014 में प्रारंभ हुई और अप्रैल, 2015 तक 40 से अधिक देशों पर यह लागू हो चुकी थी। इसे अगले कुछ वर्षों में करीब 100 देशों के नागरिकों को प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत में सिर्फ आने वाले पर्यटकों की संख्या ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि भारतीय नागरिक भी अधिक यात्रा करने लगे हैं। भारत से बाहर जाने वाले नागरिकों की संख्या सन 2000 में मात्र 442 करोड थी, जो 2014 में बढ़ कर 18 करोड़ से अधिक हो गई। परंतु, घरेलू पर्यटन की तुलना में गिने-चुने भारतीय नागरिक गिनी चुनी अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं पर निकलते हैं। 2012 में पहली बार घरेलू-पर्यटन यात्राओं की संख्या 1 अरब को पार कर गई थी।

भारत में पर्यटकों का आगमन जून,  2016 में 5,50,000 था, जो जुलाई में बढ़ कर 7,36,000 पर पहुंच गया। वर्ष 2000 से गणना करें तो भारत में पर्यटकों के आगमन की औसत 2016 तक 4,20,60860 रही है। दिसंबर, 2015 में यह संख्या बढ़ कर 9,13,000 की सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंच गई। भारत में पर्यटकों के आगमन के बारे में देश का पर्यटन विभाग रिपोर्ट करता है।

भारत में यात्रा और पर्यटन उद्योग के बारे में आंकडे और तथ्य

यात्रा और पर्यटन उद्योग ने 2013 में भारत में कुल 1132 अरब अमरीकी डॉलर का योगदान किया, जो भारत की कुल जीडीपी का 535 प्रतिशत था। वर्तमान में अनुमान है कि इस क्षेत्र का योगदान जीडीपी का 623 प्रतिशत है और कुल रोजगार में इसका योगदान  9 प्रतिशत है। यह उद्योग 22 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं, भारत एशिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा पर्यटन बाजार है, और विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार सर्वाधिक तेजी से बढ़ रहे पर्यटक स्थलों में भारत का 20वां स्थान है। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में योगदान की दृष्टि से पर्यटन और यात्रा क्षेत्र का 11वां स्थान है, जिसमें 2014 और 2024 के बीच औसत वार्षिक वृद्धि 64 प्रतिशत होने की संभावना व्यक्त की गई है।

2013 में भारत में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन 685 करोड़ था। वर्ष 2000 के 265 करोड़ पर्यटकों की तुलना में मात्र 13 वर्ष में यह भारी बढ़ोतरी समझी गई है। भारत में पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा स्रोत बाजार अमरीका रहा है और उसके बाद ब्रिटेन का स्थान है।  2013 में भारत में आगंतुकों ने 184 अरब अमरीकी डॉलर खर्च किए। भारत से बाहर जाने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। 2013 में करीब 8,60,000 भारतीय नागरिकों ने अमरीका की यात्रा की। अनुमान है कि 2018 तक यह संख्या बढ़ कर 132 करोड़ पर पहुंच जाएगी। यूरोप की यात्रा इससे भी अधिक लोकप्रिय है। जहां 2014 में 177 करोड़ भारतीय पर्यटकों ने यात्रा की।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी 2016 के प्रथम 4 महीनों में पर्यटकों की संख्या में औसत से अधिक इजाफा हुआ। इसे एक मजबूत शुरुआत कहा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन -यूएनडब्ल्यूटीओ विश्व पर्यटन बैरोमीटर के अद्यतन अनुमान के अनुसार इस वर्ष जनवरी और अप्रैल, 2016 के बीच पर्यटक आगमन में 5 फीसदी इजाफा हुआ। लगभग सभी उप-क्षेत्रों के परिणाम मजबूत रहे और अनेक लक्ष्य ऐसे थे, जहां वृद्धि दर दो अंकों में दर्ज हुई। मई-अगस्त की अवधि के लिए संभावनाएं सकारात्मक हैं, जहां ग्रीष्मकालीन अवकाश के व्यस्त मौसम में करीब 50 करोड़ पर्यटकों द्वारा उत्तरी गोलार्ध में विभिन्न देशों की यात्राएं करने का अनुमान है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन से निर्यात में 2015 में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विश्वभर के पर्यटन लक्ष्यों में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन प्राप्तियों में 2015 में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक आगमन में 4.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ। लगातार चौथे वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन विश्व के माल व्यापार की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा, जिससे विश्व के निर्यात में पर्यटन की भागीदारी 2015 में बढ़ कर 7 प्रतिशत हो गई। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के निर्यात का कुल मूल्य 14 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर रहा।

संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन -यूएनडब्ल्यूटीओ विश्व पर्यटन बैरोमीटर के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक आगमन में 2015 में 4 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह 1.2 अरब के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। भारत में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक आगमन में 2015 में 4.4 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई और यह 118.4 करोड़ पर पहुंच गया। करीब 5 करोड़ से अधिक अन्य पर्यटकों ने 2014 की तुलना में पिछले वर्ष विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थलों (ओवरनाइट विजिटर्स) की यात्रा की।

वीजा मुक्त बनाने के प्रयासों में भी निरंतर प्रगति हुई। विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) काफी पहले से पर्यटन के विकास और उसके सामाजिक-आर्थिक फायदों को बढ़ाने के साधनों के रूप में अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं की आवश्यकता पर बल देता रहा है। यूएनडब्ल्यटीओ की अद्यतन वीजा ओपननेस रिपोर्ट के अनुसार यात्रा प्रारंभ करने से पहले वीजा प्राप्त करने की अपेक्षा रखने वाले पर्यटकों की संख्या में निरंतर कमी आई है और यह संख्या अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।

नई वैश्विक प्रवृत्तियां

ऐसे पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो अवकाश के दिन पूरी तरह मुक्त और काम से छुट्टी चाहते हैं। ऐसे पर्यटकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जो ‘‘हमेशा यात्रा पर’’ रहना पसंद करते हैं। 2013 में ब्रिटेन के 72 प्रतिशत पर्यटक (अथवा यथासंभव अधिक) घूमने निकले, और आने वाले समय में ऐसे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने का अनुमान है।

पर्यटक ऐसे अवसरों की तलाश करेंगे, जो अभी तक कम ज्ञात रहे हैं। इनमें विशेष रूप से ऐसे स्थल शामिल हैं, जो अभी तक अनछुए या बेजोड़ रहे हैं। यह समय साहसिक यात्रा का है और स्वयं के आरामदायक क्षेत्र की सीमाएं तय करने का है।

परंपरागत दृष्टि से होटलों के निर्माण के लिए बैंकों और निवेश द्वारा वित्त पोषण किया जाता रहा है, परंतु, लग्जरी होटल सेग्मेंट वित्त पोषण के इन स्रोतों से निरंतर नए विकल्प तलाश कर रहा है, जिनमें क्राउड सोर्सिंग जैसे विकल्प शामिल हैं। वित्त पोषण पर दीर्घावधि लीड टाइम की संभावना को देखते हुए बेजोड़ विशेषताओं वाले अलग अलग लग्जरी होटल लोगों को अपील करने वाली पेशकश करते हैं, ताकि ऐसी वित्त व्यवस्था हासिल की जा सके, जो अधिक परंपरागत मार्गों से संभव नहीं हो पाती। क्राउड फंडिंग के जरिए विभिन्न होटल धारणाओं में रुचि रखने वाले व्यक्ति सीधे नई संपत्तियों के विकास में निवेश कर सकते हैं। बदले में होटल उन्हें दीर्घावधि और अल्पावधि दोनों के लिए स्पेस आफर करते हैं।

अकेले यात्रा करना नई बात नहीं है। नई बात यह है कि अधिकाधिक लोग अकेले यात्रा करने में रुचि रखते हैं और अकेले यात्रा में दिलचस्पी रखने वाले लोगों की संख्या हजारों में है। अमरीकी वयस्कों के बारे में एमएमजीवाई ग्लोबल सर्वेक्षण ने यह पाया है कि हजारों प्रतिभागियों में से 37 प्रतिशत से अधिक ऐसे थे, जिन्होंने जुलाई, 2015 में स्वयं यात्रा की योजना बनाई। 2014 में ऐसे लोगों की संख्या में 5 प्रतिशत वृद्धि हुई। अकेले यात्रा का मुख्य कारण यह है कि दो या अधिक लोगों की तुलना में एक व्यक्ति के लिए ट्रिप प्लान करना अधिक आसान होता है।

आज का पर्यटक यूरोप के प्रमुख शहरों में बड़े वाणिज्यिक और बार-बार यात्रा किए जाने वाले केंद्रों से निरंतर ऊब चुका है। अब अवकाश पर जाना घिसे-पिटे मार्ग से मुक्ति पाने, कुछ अलग से करने और प्रामाणिकता खोजने से सम्बद्ध होता जा रहा है। लंदन, पेरिस और रोम की यात्राओं के दौरान अनेक पर्यटक कुछ मिसिंग महसूस करते हैं।

विभिन्न वेल्नेस (तंदरुस्ती) उपायों में हिस्सा लेने के साथ-साथ पर्यटक अपने रिजार्ट या होटल का आराम छोडऩा भी पसंद करेंगे और वास्तव में चुने हुए देश की संस्कृति से अपने आपको जोडऩा चाहेंगे। इस वर्ष पर्यटक किसी स्थान का प्रामाणिक अनुभव सक्रिय रूप से हासिल करने का प्रयास करेंगे, ऐसे स्थानों की खोज करेंगे, जिन पर पर्यटकों का ध्यान कम गया हो और घिसे-पिटे या जाली समझे जाने वाले लक्ष्यों से बचने का प्रयास करेंगे। इससे अवकाश के दौरान सेल्फी लेने की प्रवृत्ति में कमी आ सकती है, क्योंकि यात्री अपने को वातावरण से अधिक जोडऩा पसंद करेंगे।

व्यापार और अवकाश यात्रा का यह समीकरण अधिक लोकप्रिय बनेगा। अनेक उद्योगों में व्यापार के कारण यात्रा पहले से सामान्य बात है, परंतु 2016 में व्यवसायी अपनी यात्राओं में थोड़ा अवकाश भी जोडऩा चाहेंगे और परिवार एवं मित्रों को भी साथ ले जाने की संभावनाएं देखेंगे।

अन्यथा जिसे वालंटियर ट्रैवल अथवा वालंटियर अवकाश (स्वैच्छिक यात्रा या स्वैच्छिक अवकाश) के रूप में जाना जाने लगा है, वह स्वैच्छिक पर्यटन किसी नेक या धर्मार्थ लक्ष्य के लिए स्वेच्छा से यात्रा हेतु प्रेरित करता है। विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए विश्वभर में यात्री न केवल आराम के लिए अवकाश लेते हैं, बल्कि उन समुदायों की सेवा करना ही उनका ध्येेय होता है, जहां वे यात्रा पर जाने का निश्चय करते हैं। स्वैच्छिक पर्यटन गतिविधियों के कुछ उदाहरणों में परियोजनाओं का निर्माण, स्थानीय वन्यजीव क्षेत्रों की सफाई, उद्यानों में वृक्षारोपण, अंग्रेजी शिक्षण या अनाथों की देखभाल शामिल है।

ब्रिक्स यात्री

ब्रिक्स यात्रियों में वे यात्री शामिल हैं जो ब्राजील, रूस, भारत और चीन से सम्बद्ध होते हैं। इन देशों को परिवर्णी शब्द के साथ पृथक करके देखने का कारण यह है कि वे यात्रा, पर्यटन और आवभगत में तेजी से बढ़ते हुए बाजारों के रूप में उभर रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि वे विश्वभर में उद्योग के लिए आर्थिक वृद्धि का संचालन करेंगे। इन चार देशों में चीन और भारत प्रथम और द्वितीय स्थान पर हैं, जो भीतरी और बाहरी यात्रा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। विश्वभर में उद्योग से जुड़े संगठन इस व्यापक प्रवृत्ति का लाभ उठाने के लिए अपनी व्यापारिक योजनाएं बना रहे हैं।

पाक विद्या पर्यटन

पाक विद्या पर्यटन जिसे दूसरे शब्दों में भोजन पर्यटन के रूप में भी जाना जाता है, के अंतर्गत विभिन्न देशों की यात्रा की जाती है और भोजन एवं भोजन संबंधी अनुभवों तथा उत्सवों और व्यंजन प्रतियोगिताओं जैसी घटनाओं के जरिए सम्बद्ध संस्कृतियों की जानकारी प्राप्त की जाती है। यह इस उद्योग की सर्वाधिक रचनात्मक प्रवृत्तियों में से एक है और आज के पर्यटक प्रत्यक्ष अनुभव करना चाहते हैं जहां वे स्थानीय खेतों, मद्यशालाओं और पनीर बाजारों की यात्रा कर सकें, रसोइयों या पाक विद्या ग्रंथों के लेखकों के साथ बातचीत कर सकें और भोजन यात्राओं अथवा स्वाद चखने संबंधी यात्राओं पर निकल सकें, जो स्थानीय अथवा जातीय विशेषज्ञों और रेस्त्राओं को उजागर करने वाली हों।

अंतरिक्ष पर्यटन

अंतरिक्ष पर्यटन के अंतर्गत मनोरंजनात्मक, अवकाश अथवा व्यापारिक प्रयोजनों के लिए अंतरिक्ष यात्रा की जाती है। हाल के वर्षों में अनेक स्टार्ट-अप कंपनियां उभरी हैं, जिनसे एक सब-आर्बिटल (उप-कक्षीय) अंतरिक्ष पर्यटन उद्योग की संभावनाओं को बल मिला है। कक्षीय अंतरिक्ष पर्यटन के अवसर अत्यंत सीमित और खर्चीले हैं। केवल रूसी अंतरिक्ष एजेंसी अभी तक इसके लिए ट्रांसपोर्ट प्रदान करती है। परंतु, कई अन्य कंपनियों ने भी इस शैली को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और वे संभावनाएं तलाश कर रही हैं।

पर्यटन से प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों ही तरह के रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। प्रत्यक्ष रोजगार स्वयं पर्यटन उद्योग में और परोक्ष रोजगार खुदरा एवं परिवहन जैसे अनुषंगी क्षेत्रों में उपलब्ध होता है। जब ये लोग वस्तुओं और सेवाओं पर अपनी दिहाड़ी खर्च करते हैं, तो उसे ‘‘मल्टी प्लायर इफेक्ट’’ यानी गुणक प्रभाव के रूप में जाना जाता है, जिससे अधिक रोजगार का सृजन होता है। पर्यटन उद्योग लघु उद्योग व्यापार उद्यमों के लिए भी अवसर प्रदान करता है, जो ग्रामीण समुदायों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं और एयरपोर्ट तथा होटल करों के रूप में अतिरिक्त कर राजस्व उत्पन्न करता है, जिसका इस्तेमाल स्कूलों, आवास और अस्पतालों के लिए किया जा सकता है।

सफल पर्यटन सडक़ों और होटलों जैसी बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर करता है। इसकी कीमत आमतौर पर सरकार को चुकानी पड़ती है, अत: सरकार को कर राजस्व व्यय करना होता है। पर्यटन क्षेत्र द्वारा सृजित रोजगार अक्सर मौसमी और कम लाभकारी होते हैं, फिर भी पर्यटन स्थानीय संपत्ति के मूल्यों और वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत में वृद्धि कर सकता है। पर्यटन द्वारा सृजित धन हमेशा स्थानीय समुदाय को लाभ नहीं पहुंचाता, क्योंकि इसका कुछ रिसाव बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों, जैसे होटल शृंखलाओं तक भी पहुंचता है। पर्यटन पर निर्भर लक्ष्यों पर आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक मंदी जैसी घटनाओं का भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

फिर भी पर्यटन से होने वाले ढांचागत सुधारों और नई विलासितापूर्ण सुविधाओं के परिणामस्वरूप स्थानीय समुदायों को भी लाभ पहुंचता है। पर्यटन परंपरागत रीति रिवाजों, हस्तशिल्पों और त्योहारों का भी संरक्षण करता है, जो अन्यथा व्यर्थ जा सकते थे। यह नागरिक गौरव पैदा करता है। मेहमानों और मेजबानों के बीच संवाद एक बेहतर सांस्कृतिक समझ पैदा करते हैं और गरीबी तथा मानवाधिकारों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों के बारे में वैश्विक जागरूकता पैदा करने में भी मदद पहुंचाते हैं।

पर्यटन विशेष रूप से प्रकृति और पारिस्थितिकी पर्यटन वन्यजीवों और बरसाती जंगलों जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद पहुंचाता है, क्योंकि इन्हें अब पर्यटन की परिसंपत्तियां समझा जाता है। पर्यटन से शुल्कों और फीस के जरिए पशु अभ्यारण्यों और समुद्री उद्यानों के रख रखाव के लिए धन जुटाने में भी मदद मिलती है। रोजगार के वैकल्पिक स्रोत पैदा करते हुए पर्यटन क्षेत्र विकासशील देशों में अत्यधिक मछली पकडऩे  (ओवर-फिशिंग) और वनों के ह्रास जैसी समस्याओं को कम करने में भी योगदान करता है।

सरकार पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि पर्यटकों को उच्च स्तरीय सेवाओं के जरिए अविस्मरणीय यात्रा अनुभव कराए जा सकें। विश्व में गिने चुने यात्रा लक्ष्य ऐसे हैं, जो भारतीय पर्यटक स्थलों की विविधता और विस्मयकारिता की बराबरी कर सकते हैं। भू-परिदृश्यों, संस्कृति और अन्य आकर्षणों का बेजोड़ समीकरण भारत की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए बेमिसाल अनुभव कराते हैं।

पर्यटन क्षेत्र रोजगार और उद्यमशीलता पैदा करने में वृद्धि एवं विकास का नया प्रतिमान है। यह क्षेत्र बुनियादी ढांचा विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अनेक अवसर प्रदान करता है। सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच निवेश एवं साझेदारी के जरिए महत्वपूर्ण (कोर) क्षेत्रों और पर्यटन संबंधी क्षेत्रों में ढांचागत सुधार के साथ भारत में वह क्षमता विद्यमान है जो उसे विश्व के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटक केंद्रों में से एक बना सकती है।

 

(लेखक लखनऊ विश्वविद्यालय के पर्यटन अध्ययन संस्थान में निदेशक हैं। ईमेल manojdixit23@gmail.com)