संपादकीय लेख


volume-37,15-21 December 2018

 

जी-२० प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच

बहुआयामी सहयोग को प्रोत्साहन

शिशिर सिन्हा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 अर्जेंटीना शिखर सम्मेलन के अंत में घोषणा की कि 2022 में भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शीर्ष 19 देश नई दिल्ली में आयोजित समारोह में हिस्सा लेंगे, ‘‘भारत जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए उत्सुक है, आप सभी भारत, विश्व की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था, में आमंत्रित हैं. आइए, भारत के समृद्ध इतिहास और विविधता को जानें, और भारतीय आतिथ्य सत्कार का अनुभव करें.

नि:संदेह, श्री मोदी का यह कथन ब्यूनस आइरस, अर्जेंटीना में दो दिन (नवंबर 30-दिसंबर 1) के शिखर सम्मेलन की समाप्ति पर अखबारों की सुर्खी बना, लेकिन सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया और नेताओं ने इसकी समाप्ति पर जो घोषणा की, वह निश्चित रूप से समूचे विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. जी-20 देशों की पहली बैठक 10 वर्ष पूर्व वाशिंगटन डीसी में हुई थी. उसके बाद से इस कड़ी में यह संगठन की 13वीं बैठक थी. इसकी प्रथम बैठक में दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों ने 2008 के वित्तीय संकट के समाधान के लिए एक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया था. बैठक से पहले अमरीका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के कारण एक तरह के संकट की व्यापक आशंका थी, परंतु, सम्मेलन के एक दिन बाद जब दोनों देशों ने शुल्क युद्धविराम की घोषणा की, तो संकट की वह आशंका समाप्त हो गई.

समूह-20 में भले ही मात्र 20 राष्ट्र हैं, लेकिन वे विश्व की प्रमुख 19 अर्थव्यवस्थाओं (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमरीका) और यूरोपीय राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. सामूहिक तौर पर, जी-20 सदस्य राष्ट्र सभी आबादी वाले महाद्वीपों में फैले हैं, जिनकी विश्व के आर्थिक उत्पादन में 85 प्रतिशत, दुनिया की जनसंख्या में 66 प्रतिशत, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 75 प्रतिशत और वैश्विक निवेश में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है. ये सभी आंकड़े जी-20 बैठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

भारत के लिए ऐसे सम्मेलन का महत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले दिए गए अपने बयान में भलीभांति रेखांकित किया था, जब उन्होंने कहा कि ‘‘जी-20 समूह का लक्ष्य दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बहुआयामी सहयोग को प्रोत्साहित करना है. अपने 10 वर्ष के अस्तित्व के दौरान, जी-20 ने स्थिर और स्थायी वैश्विक वृद्धि को बढ़ावा देने का प्रयास किया है. यह लक्ष्य विकासशील देशों और भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था, जो आज विश्व में सबसे अधिक तेजी के साथ बढ़ रही है, के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.’’ उन्होंने कहा किवैश्विक आर्थिक वृद्धि और खुशहाली में भारत का योगदान हमारी इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि हम निष्पक्ष और स्थायी विकास के लिए आम सहमति विकसित करना चाहते हैं, जो इस सम्मेलन का विषय है.’

त्रिपक्षीय और द्विपक्षीय

सम्मेलन से इतर कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री ने विश्व के नेताओं के साथ दो त्रिपक्षीय और अनेक द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया. प्रथम त्रिपक्षीय बैठक में जापान, अमरीका और भारत शामिल थे, जबकि दूसरी त्रिपक्षीय बैठक में रूस, भारत और चीन ने हिस्सा लिया. जापान-अमरीका-भारत त्रिपक्षीय बैठक को ऐतिहासिक और एक महान शुरूआत बताते हुए श्री मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि यह ऐसा अवसर है, जब तीन मित्र राष्ट्र एक साथ आए हैं. ‘प्रधानमंत्री आबे, राष्ट्रपति ट्रम्प और मैंने उपयोगी बातचीत की है, जिसका लक्ष्य कनेक्टिविटी, समुद्री सहयोग और भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना था.’ इन नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि के लिएस्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम आधारितव्यवस्था अनिवार्य है.  

दूसरी त्रिप़क्षीय बैठक भी समान रूप से महत्वपूर्ण थी. 12 वर्ष बाद हुई इस त्रिपक्षीय बैठक में तीन नेताओं (प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग) ने व्यापक विषयों पर विचार विमर्श किया, जिससे तीनों देशों के बीच मित्रता और मजबूत हुई और विश्व शांति को बढ़ावा मिला. बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह बैठक सद्भावपूर्ण और रचनात्मक रही, जिसमें नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और समन्वय पर विचार विमर्श किया, जिससे वैश्विक शांति और स्थिरता कायम करने में मदद मिलेगी. इन दो प्रमुख बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति मोरिसियो मैक्राइ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रूट, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और स्पेन के नेता पेड्रो सांचेज़ के साथ द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया. इसका लक्ष्य इन सभी देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाना था.

नेताओं की घोषणा

सम्मेलन के अंत में सभी नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित और जारी की गई घोषणा की प्रमुख बातें इस प्रकार थीं:

.  जी-20 नेताओं की पहली बैठक के 10 वर्ष बाद, 30 नवंबर-1 दिसंबर, 2018 को ब्यूनस आयरस, अर्जेंटीना में हुए सम्मेलन का लक्ष्य एक ऐसी कार्यसूची के जरिए निष्पक्ष और स्थायी विकास के बारे में आम सहमति तैयार करना है, जो जन-केंद्रित, समावेशी और प्रगतिशील हैं.

.  इस वर्ष जी-20 कार्यसूची में हमने निम्नांकित तीन स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया है: रोज़गार का भविष्य, विकास के लिए बुनियादी ढांचा, खाद्य की दृष्टि से एक स्थायी भविष्य और स्त्री-पुरुष समानता.

.  परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों से व्यापक आर्थिक अवसर पैदा होने की संभावना है, जिनमें नए और बेहतर रोज़गार, और उच्चतर जीवन स्तर शामिल है. परंतु, यह परिवर्तनकाल व्यक्तियों, व्यापारों और सरकारों के लिए चुनौतियां पैदा करेगा. नीतिगत उपायों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि प्रौद्योगिकी विषयक परिवर्तन के लाभ व्यापक रूप में साझा किए जाएं. हमने भावी रोज़गार के लिए नीति विकल्पों की सूची को मंजूरी प्रदान की है, जिसे हमने अलग-अलग देशों की परिस्थितियों पर विचार करते हुए तैयार किया है, ताकि वृद्धि और उत्पादकता को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का दोहन किया जा सके; संक्रमणकाल के दौरान लोगों की सहायता और वितरण संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके; स्थायी कर प्रणालियां सुनिश्चित की जाएं; और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि हमारी निर्णय करने की प्रक्रिया सर्वोत्कृष्ट संभव साक्ष्यों पर आधारित हो.

.  शिक्षा तक पहुंच एक मानवाधिकार है और यह अधिक समावेशी विकास, समृद्धि और शांतिपूर्ण समुदायों के लिए एक कार्यनीतिक सार्वजनिक नीति क्षेत्र है. हम लड़कियों की शिक्षा का महत्व रेखांकित करते हैं. अपने नागरिकों को सामाजिक और प्रौद्योगिकी विषयक नवाचारों का लाभ उठाने के लिए तैयार करने के वास्ते हम रोज़गार और समान गुणवत्ता शिक्षा नीतियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देंगे, ताकि हम ऐसी व्यापक कार्यनीतियां विकसित कर सकें, जो प्रारंभिक बचपन से जीवन पर्यंत शिक्षण परिदृश्य में बुनियादी ज्ञान, प्रशिक्षण और डिजिटल कौशल जैसी योग्यताओं को बढ़ावा देंगी. हम सभी शैक्षिक स्तरों के लिए साक्ष्य आधारित नवीन अध्यापन-कलाओं और पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस करते हैं.

.  नवाचार वृद्धि और उत्पादकता के लिए डिजिटीकरण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए हम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और उद्यमियों को सुदृढ़ बनाने, स्त्री-पुरुष के बीच डिजिटल जानकारी का अंतर दूर करने और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने, उपभोक्ता संरक्षण में मदद करने और डिजिटल शासन, डिजिटल ढांचे और डिजिटल अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन करने में सुधार लाने के उपायों को बढ़ावा देंगे. हम सूचना संचार प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल में सुरक्षा के मुद्दों का समाधान करने के महत्व को रेखांकित करते हैं. हम सूचना, विचार और ज्ञान के मुक्त प्रवाह का समर्थन करते हैं, जबकि प्रयोज्य कानूनी फ्रेमवर्कों का सम्मान करते हैं, और उपभोक्ता भरोसा, निजता, डेटा संरक्षण और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने का वायदा करते हैं. हम जी-20 डिजिटल नीतियों के संग्रह को साझा करने और नवीन डिजिटल अर्थव्यवस्था व्यापार मॉडलों को प्रोत्साहित किए जाने का स्वागत करते हैं. हम व्यापार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच इंटरफेस के महत्व को समझते हैं. हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और नए व्यापार मंचों के लिए निरंतर काम करते रहेंगे.

.  बुनियादी ढांचा आर्थिक खुशहाली, स्थायी विकास और समावेशी बढ़ोतरी का प्रमुख संचालक है. ढांचागत वित्त पोषण में विद्यमान अंतराल दूर करने के लिए हम ढांचागत निवेश में अधिक निजी पूंजी आकर्षित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं. इसे हासिल करने के लिए, हम परिसंपत्ति वर्ग के रूप में ढांचागत रूपरेखा और ढांचागत परियोजना तैयारी चरण के लिए जी-20 सिद्धांतों का अनुमोदन करते हैं. हम अधिक अनुबंधात्मक मानकीकरण हासिल करने, डेटा अंतराल दूर करने और जोखिम कम करने के साधनों में सुधार लाने के उपाय कर रहे हैं. रूपरेखा के अनुरूप हम गुणवत्तापूर्ण ढांचे की दिशा में 2019 में प्रगति की उम्मीद करते हैं.

.  आर्थिक वृद्धि और स्वतंत्र एवं स्थायी विकास के लिए स्त्री-पुरुष समानता महत्वपूर्ण है. हम संगठन द्वारा ब्रिस्बेन में व्यक्त की गई उस प्रतिबद्धता का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रगति कर रहे हैं, जिसमें 2025 तक श्रम बल भागीदारी दरों में स्त्री-पुरुष अंतराल में 25 प्रतिशत तक कमी लाने का वायदा किया गया था. हम महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सभी प्रकार के भेदभाव और लिंग आधारित हिंसा को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में निरंतर उपायों को बढ़ावा देंगे. हम निजी क्षेत्र में रोज़गार सहित महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का वायदा करते हैं, ताकि सभी के लिए श्रम स्थितियों में सुधार लाया जा सके. इन सुधारों में गुणवत्तापूर्ण और कम खर्च पर देखभाल ढांचे तक पहुंच और दिहाड़ी भुगतान में स्त्री-पुरुष असमानता दूर करना शामिल है. हम नेतृत्व और निर्णय करने की प्रक्रिया से जुड़े पदों तक महिलाओं की पहुंच को बढ़ावा देने, महिलाओं और बालिकाओं के डिजिटल कौशल के विकास और स्टेम (अर्थात् साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमैटिक्स) और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के प्रति भी वचनबद्ध हैं. हम महिला उद्यमी वित्त पोषण उपाय (वी-फी) निरंतर लागू करने का स्वागत करते हैं और हम इस कार्य के लिए बिजनेस वीमेन लीडर्स टॉस्कफोर्स के आभारी हैं. इस अनुभव से प्रेरित होकर हम इस बात पर विचार करेंगे कि महिला उद्यमियों का बेहतर ढंग से कैसे सशक्तिकरण किया जा सकता है.

.  हम स्थायी विकास की दिशा में परिवर्तन की ओर बढऩे का संकल्प व्यक्त करते हैं और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2030 कार्यसूची को फ्रेमवर्क के रूप में अपनाने और जी-20 कार्य योजना पर अमल करने का समर्थन करते हैं. ब्यूनस आयरस सम्मेलन उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी-20 के मौजूदा सामूहिक और ठोस कदमों की रूपरेखा तैयार करता है, और यह स्वीकार करता है कि इसे कार्यरूप देने में विकासशील देशों के बीच परस्पर और विकसित एवं विकासशील देशों के बीच त्रिकोणात्मक सहयोग आवश्यक है. हम जी-20 अफ्रीका भागीदारी का समर्थन जारी रखने का महत्व रेखांकित करते हैं. इसके अंतर्गत अफ्रीका के साथ पूर्ण सहयोग और अन्य उपाय शामिल हैं. हम अवैध वित्तीय प्रवाहों का समाधान करने के प्रति वचनबद्धता दोहराते हैं, जिनका घरेलू संसाधन जुटाने पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है. हम इस दिशा में प्रगति पर निरंतर निगाह रखेंगे. हम क्षेत्रीय आयोजना के जरिए स्थायी परिवास के बारे में जी-20 के उच्च स्तरीय सिद्धांतों का अनुमोदन करते हैं.

.  सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और स्वस्थ ग्रह (पृथ्वी) एक दूसरे के परिपूरक हैं. हम 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड की वैश्विक चेतावनी के प्रभावों के बारे में आईपीसीसी की अद्यतन विशेष रिपोर्ट का संज्ञान लेते हैं. हम व्यापक अनुकूलन कार्यनीतियों का महत्व स्वीकार करते हैं, जिनमें बुुनियादी ढांचे में निवेश शामिल है, ताकि उसे विषम मौसम स्थितियों और आपदाओं के प्रति समुत्थानशील बनाया जा सके. इस अर्थ में हम विकासशील देशों, विशेषकर कैरीबियाई क्षेत्र में छोटे द्वीप राष्ट्रों सहित उन देशों में जो विशेष रूप से कमजोर हैं, में कार्ययोजनाओं और सहयोग का समर्थन करते हैं. हमने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने की दीर्घावधि कार्यनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय वित्त प्रवाहों को उनके समनुरूप बनाने पर विचार किया है. हमने राष्ट्रों के अनुभव साझा किए हैं और 2018-2019 के लिए अनुकूलन संबंधी कार्य योजना पर विचार किया है, विशेष रूप से यह ध्यान रखते हुए कि भविष्य में कम उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रत्येक राष्ट्र स्वयं का मार्ग निर्धारित कर सकता है. हम यूएनएफसीसीसी सीओपी-24 के सफल परिणामों और तेलानोवा डाइलॉग में सम्मिलित होने के प्रति उत्सुक हैं.

.  पेरिस समझौते के हस्ताक्षरी देशों, जिन्होंने हम्बर्ग कार्य योजना को भी स्वीकार किया है, ने इस बात की पुन: पुष्टि की है कि पेरिस समझौता पलटा नहीं जाएगा. उन्होंने इसके पूर्ण कार्यान्वयन की वचनबद्धता व्यक्त की है. यह समझौता भिन्न राष्ट्रगत परिस्थितियों के संदर्भ में साझा लेकिन अलग अलग जिम्मेदारियों और अलग अलग क्षमताओं को रेखांकित करता है. हम स्थायी विकास और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देते हुए जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के उपाय जारी रखेंगें.

.  हम सीमा पार पूंजी प्रवाहों पर निगरानी जारी रखेंगे और उपलब्ध साधनों की समझ को और गहरा बनाएंगे ताकि हम जोखिमों का प्रबंधन करते हुए उनके लाभों का दोहन कर सकें और उनकी समुत्थानशीलता बढ़ा सकें. हम कम आय वाले देशों में ऋण की कमी की समस्या दूर करने के उपाय जारी रखेंगे. इसके लिए सार्वजनिक ऋण और वित्तीय प्रबंधन में क्षमता निर्माण और घरेलू नीति फ्रेमवर्क को मजबूत बनाने में मदद करने के प्रयास करेंगे. हम ऋण पारदर्शिता और स्थायित्व बढ़ाने और ऋणकर्ताओं और ऋणदाताओं द्वारा अपनाई जाने के लिए स्थायी वित्तीय पद्धतियों में सुधार लाने की दिशा में काम करेंंगे. हम एलआईसीज़ ऋण के बारे में आईएमएफ, डब्ल्यूबीजी और पेरिस क्लब द्वारा किए जा रहे कार्यो और विकासशील ऋणकर्ताओं के अधिक समावेशन की दिशा में पेरिस क्लब के सतत प्रयासों का समर्थन करते हैं.

.  हम वैश्विक दृष्टि से एक ऐसी निष्पक्ष, स्थायी और आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय कर प्रणाली के लिए काम करते रहेंगे, जो विशेष रूप से कर संधियों और हस्तांतरण मूल्य नियमों पर आधारित हो. हम विकास समर्थक कर नीतियों को बढ़ावा देने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का स्वागत करते हैं. ओईसीडी/जी-20 आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण पैकेज का विश्वव्यापी कार्यान्वयन अनिवार्य है. हम अंतर्राष्ट्रीय कर प्रणाली पर अर्थव्यवस्था के डिजिटीकरण के दुष्प्रभावों की समस्या का आम सहमति आधारित समाधान करने के लिए मिल कर काम करेंगे. इसे 2019 में अपडेट किया जाएगा और अंतिम रिपोर्ट 2020 तक जारी की जाएगी. हम वित्तीय लेखा जानकारी के स्वचालित आदान प्रदान के प्रारंभ का स्वागत करते हैं और ऐसे अधिकार क्षेत्रों, जिनमें कर पारदर्शिता मानकों को संतोषजनक ढंग से कार्यान्वित नहीं किया गया है, की पहचान करने के लिए ओईसीडी द्वारा विकसित किए गए मजबूत मानदंडों को स्वीकार करते हैं. सूचीबद्ध अधिकार क्षेत्रों के खिलाफ  रक्षात्मक उपायों पर विचार किया जाएगा. कर मामलों में आपसी प्रशासनिक सहायता संबंधी बहुराष्ट्रीय समझौते पर सभी अधिकार क्षेत्रों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिएं और उनकी पुष्टि की जानी चाहिए. हम विकासशील देशों में संवर्धित पर सुनिश्चितता और कर क्षमता निर्माण का समर्थन जारी रखेंगे. इसमें कर संबंधी सहयोग मंच के जरिए किए जाने वाले उपाय भी शामिल होंगे.

.  अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश वृद्धि, उत्पादकता, नवाचार, रोज़गार सृजन और विकास के महत्वपूर्ण इंजन हैं. हम इस दिशा में बहुराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के योगदान को स्वीकार करते हैं. यह प्रणाली वर्तमान में अपने लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं कर पा रही है और इसमें सुधार की आवश्यकता है. अत: हम विश्व व्यापार संगठन में आवश्यक सुधारों का समर्थन करते हैं ताकि उसकी कार्य प्रणाली में बदलाव लाया जा सके. अगले शिखर सम्मेलन में हम इसकी प्रगति की समीक्षा करेंगे.

.  हम सभी प्रकार के आतंकवाद और उसका समर्थन करने की कड़ी निंदा करते हैं. हम आतंकवाद विरोधी हम्बर्ग जी-20 नेताओं की घोषणा को पूरी तरह लागू करने के प्रति वचनबद्ध हैं. हम आतंकवाद और इसे धन प्रदान किए जाने तथा मनी लांडरिंग के खिलाफ अपने प्रयास बढ़ाएंगे. हम डिजिटल उद्योग से अपील करते हैं कि वह इंटरनेट और सोशल मीडिया का दुरुपयोग आतंकवादी प्रयोजनों के लिए किए जाने के खिलाफ  मिल कर काम करे.

अगले चार जी-20 सम्मेलन जापान (2019), सऊदी अरब (2020), इटली (2021) और भारत (2022) में होंगे.

(लेखक  दिल्ली  स्थित पत्रकार हैं. -मेल mail: hblshishir @gmail.com)

व्यक्त विचार निजी हैं.