संपादकीय लेख


volume-42,19 - 25 January 2019

 

 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र

सबसे बड़े रोज़गार सृजक के रूप में पहचान

डॉ. रंजीत मेहता

देश में 6.5 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमईज़) हैं, जिनके महत्व की अनदेखी नहीं की जा सकती. इस क्षेत्र के योगदान के अंतर्गत 1.20 करोड़ रोज़गार के अवसरों का सृजन, आर्थिक उत्पादन में 30 प्रतिशत, निर्यात में 49 प्रतिशत, विनिर्माण क्षेत्र में 45 प्रतिशत और भारत में कुल रोज़गार सृजन में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पिछले कुछ दशकों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के एक अत्यंत सशक्त और गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है. यह ऐसा क्षेत्र है, जिसका देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है और जो अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत के साथ कृषि के बाद उद्यमिता को मजबूत बनाते हुए रोज़गार के सर्वाधिक अवसर सृजित करता है. एमएसएमईज़ अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रहे हैं और घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की मांग पूरी करने के लिए विविध प्रकार के उत्पादों और सेवाओं का सृजन कर रहे हैं.

लघु और मध्यम उद्यम (एसएमईज़) किसी भी देश के आर्थिक विकास और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और वे विशेषकर, विकासशील देशों के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, क्योंकि वे आर्थिक गतिविधियों के संचालन में मददगार हैं तथा रोज़गार प्रदान करते हुए गरीबी कम करने में योगदान करते हैं. भारतीय संदर्भ में उन्हें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझा जा सकता है. सूक्ष्म क्षेत्र के अंतर्गत 630.52 लाख उद्यम हैं, जो एमएसएमईज़ की कुल अनुमानित संख्या का 99 प्रतिशत से अधिक हैं. लघु उद्यमों की संख्या 3.3 लाख और मध्यम क्षेत्र के उद्यमों की संख्या 0.05

लाख है, जिनका कुल अनुमानित एमएसएमईज़ में क्रमश: 0.52  और 0.01 प्रतिशत योगदान है.

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 73वें दौर के अंाकड़े एमएसएमई क्षेत्र के महत्व को और भी उजागर करते हैं, जिनके अनुसार 2015-16 की अवधि में एमएसएमई क्षेत्र में 11.10 करोड़ रोज़गार के अवसर सृजित किए (जिनमें से 360.41 लाख विनिर्माण, 387.18 लाख व्यापार और 362.82 लाख अन्य सेवाओं तथा 0.07 लाख नॉन-कैप्टिव विद्युत उत्पादन और पारेषण में सृजित हुए). सूक्ष्म क्षेत्र में 630.52 लाख अनुमानित उद्यम हैं, जो 1076.19 लाख व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करते हैं. यह क्षेत्र कुल रोज़गार में करीब 97 प्रतिशत योगदान करता है. लघु क्षेत्र के अंतर्गत 3.33 लाख और मध्यम क्षेत्र के अंतर्गत 0.05 लाख अनुमानित उद्यम हैं, जो एमएसएमई क्षेत्र में कुल रोज़गार में क्रमश: 31.95 लाख (2.88 प्रतिशत) और 1.75 लाख (0.16 प्रतिशत) व्यक्तियों को रोज़गार प्रदान करते हैं. एमएसएमई क्षेत्र में रोज़गाररत कुल 1109.89 लाख कर्मचारियों में से 844.68 लाख (76 प्रतिशत) पुरुष और 264.92 लाख (24 प्रतिशत) महिलाएं हैं.

निकट अतीत में भारत विचार एवं उद्यमिता के लिए सृजनात्मक भूमि रहा है. नए उद्यमों (स्टार्टअप्स) की स्थापना संबंधी गतिविधियां पहले की तुलना में बहुत अधिक रही हैं. नीतिगत फ्रेमवर्क में अस्पष्टता और अनिश्चितता के बावजूद बाजारों और उद्योगों में स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है.

भारत को हर वर्ष 60 से 70 लाख नए रोज़गारों की आवश्यकता पड़ती है और वैश्विक आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े उद्यमों की तुलना में स्टार्टअप्स सहित एमएसएमई क्षेत्र देश में अधिक संख्या में रोज़गार के नए अवसर सृजित करता है. स्टार्टअप्स नवाचार के केंद्र हैं और अर्थव्यवस्था में रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने का एक बड़ा माध्यम भी हैं.

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी, 2016 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में औपचारिक रूप से ‘‘स्टार्ट-अप इंडिया’’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया था. इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमशीलता को मजबूती प्रदान करना और नवाचार को बढ़ावा देना है ताकि एक ऐसी पारिस्थितिकी प्रणाली का निर्माण किया जा सके, जो स्टार्ट अप्स की बढ़ोतरी के अनुकूल हो. लक्ष्य यह है कि भारत रोज़गार मांगने वालों की बजाए रोज़गार पैदा करने वालों का देश बन सके. प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम भारत में उद्यमियों के बीच पहले ही काफी रचनात्मक भावना पैदा कर चुका है. उद्योग इस तथ्य से प्रफुल्लित है कि विश्वभर में स्टार्ट अप्स की संख्या की दृष्टि से भारत तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है. देश में नवाचार की उपयोगी संस्कृति को सुदृढ़ बनाना एक लंबी और महत्वपूर्ण यात्रा है. भारत सरकार ने यह वचनबद्धता दोहराई है कि वह देश को नवाचार, डिजाइन और स्टार्ट अप्स का केंद्र बनाने के प्रति समर्पित है. इससे इस कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बल मिलेगा.

हमने यह महसूस किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना समूचा ध्यान एमएसएमई क्षेत्र के जीर्णोद्धार पर केंद्रित कर दिया है. प्रधानमंत्री ने हाल ही में एमएसएमई सहायता और संपर्क कार्यक्रमप्रारंभ किया और देश में लघु व्यापार उद्यमों की सहायता और विकास के लिए 12 बड़े फैसलों की घोषणा की.

एमएसएमईज़ की सहायता के लिए मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित  12 महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:-

1. 59 मिनट में ऋण

एक नए पोर्टल के जरिए जीएसटी पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज़) के लिए मात्र 59 मिनट में 1 करोड़ रुपये तक का ऋण मंजूर करने की व्यवस्था की गई है. इससे एमएसएमईज़ मात्र 59 मिनट में ऋण मंजूर कराने में सक्षम होंगे.

2. ब्याज दर में रियायत

जीएसटी पंजीकृत एमएसएमईज़ को 1 करोड़ रुपये तक के संवर्धित नए ऋणों पर ब्याज में 2 प्रतिशत का अनुदान या रियायत मिलेगी. एमएसएमईज़ द्वारा निर्यात के लिए लदान पूर्व और लदान परवर्ती ब्याज सब्सिडी भी 3 प्रतिशत से बढ़ा कर 5 प्रतिशत की गई है.

3. नकदी प्रवाह सुनिश्चितता

500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए अब यह अनिवार्य है कि वे ट्रेड रिसिविएबल्स ई-डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) में शामिल हों. इस प्रावधान से एमएसएमईज़ को अपने हाथ में नकदी रख पाने में मदद मिलेगी और इससे उनकी नकदी प्रवाह की समस्याएं दूर होंगी.

4. सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों द्वारा खरीद

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, जिनके लिए पहले यह अनिवार्य था कि वे अपनी वार्षिक खरीद का 20 प्रतिशत हिस्सा एमएसएमईज़ से जुटाएंगी, के लिए अब यह अनिवार्य बनाया गया है कि वे कम से कम 25 प्रतिशत वार्षिक खरीद एमएसएमई क्षेत्र से करें.

5. महिला उद्यमी

एमएसएमईज़ से खरीद के लिए अधिदेशित 25 प्रतिशत खरीद में 3 प्रतिशत खरीद महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित की गई है.

6. गवर्नमेंट ई-बाजार (जीईएम)

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उद्यमों को गवर्नमेंट ई-बाजार (जीईएम) की सदस्यता लेनी होगी, ताकि वे विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों के लिए सामान्य उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद कर सकें. जीईएम एक बड़ा मंच है, जो एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाता है. सरकार, उद्योग और उद्यमियों के बीच ऑनलाइन व्यापार की सुविधा प्रदान करते हुए, जीईएम, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र द्वारा प्रस्तावित उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता और सक्षमता सुधारने में मदद करता है. एमएसएमईज़ ई-खरीद पोर्टल के जरिए बाजार निविदाओं के लिए नि:शुल्क बोली लगा सकते हैं. इससे एमएसएमईज़ को विभिन्न सरकारी खरीद कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर मिलेगा. इससे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को भी यह सुविधा मिलेगी कि वे 2012 की खरीद नीति में निर्धारित अनुसार एसएमईज़ से 20 प्रतिशत अनिवार्य खरीद कर सकेंगे और एमएसएमईज़ के विकास में और योगदान कर सकेंगे.

7. प्रौद्योगिकी विषयक उन्नयन

सरकार ने लघु उद्यमों को बेहतर प्रौद्योगिकी विषयक सहायता और उपकरण प्रदान करने के लिए 6000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है. इस धन का इस्तेमाल 20 केंद्रों और 100 टूल रूमों के प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए किया जाएगा.

8. फार्मा कंपनियां

सरकार एमएसएमई फार्मा समूहों का निर्माण करेगी. इन समूहों की स्थापना की 70 प्रतिशत लागत सरकार द्वार वहन की जाएगी.

9. मात्र एक वार्षिक रिटर्न

आठ श्रम कानूनों और दस केंद्रीय नियमों के बारे में एमएसएमईज़ को केवल एक वार्षिक रिटर्न दाखिल करनी होगी.

10. इंस्पेक्टर राज की समाप्ति

एमएसएमई क्षेत्र की फैक्टरियों के निरीक्षण की मंजूरी अब केवल कम्प्यूटर के जरिए रेंडम आधार पर दी जाएगी और इंस्पेक्टरों को 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर लोड करनी होगी. इससे उन्हें अनावश्यक परेशान किए जाने से मुक्ति मिलेगी.

11. एमएसएमईज़ को पर्यावरण मंजूरियों में रियायत

एमएसएमईज़ को अब केवल वायु और जल संबंधी मंजूरी लेने की आवश्यकता होगी और मात्र एक सहमति से वे फैक्टरी स्थापित कर सकेंगे. इससे व्यापार प्रारंभ करने के मामले में मदद मिलेगी.

12. कंपनी अधिनियम के बारे में अध्यादेश

 कंपनी अधिनियम के अंतर्गत छिटपुट अपराधों के लिए दंड दिए जाने की प्रक्रिया सरल बनाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया. इससे एमएसएमईज़ को अवांछित बाधाओं से मुक्ति मिलेगी और उनका पर्याप्त समय बचेगा.

एमएसएमईज़ को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए अन्य महत्वपूर्ण उपाय नीचे दिए गए हैं:-

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्या हैं?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषाएं:

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है:

1. विनिर्माण उद्यम: उद्योग, (विकास और नियमन) अधिनियम, 1951 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट किसी उद्योग से संबंधित वस्तुओं के विनिर्माण या उत्पादन में संलग्न उद्योग अथवा एक विशिष्ट नाम या वर्ग अथवा इस्तेमाल वाले अंतिम उत्पाद की मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया में नियोजित प्लांट और मशीनरी. विनिर्माण उद्यमों को प्लांट और मशीनरी में निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है.

2. सेवा उद्यम: सेवाएं प्रदान या संचालित करने में संलग्न उद्यम, जिन्हें उपकरण में निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया गया है.

आदेश संख्या एसओ 1642(ई) दिनांक 29.09.2006 के तहत प्लांट और मशीनरी/विनिर्माण के लिए उपकरण/सेवा उद्यम में निवेश की सीमा इस प्रकार है:

 

 

विनिर्माण क्षेत्र

उद्यम                                                                                                      प्लांट और मशीनरी में निवेश

सूक्ष्म उद्यम                                                                                             25 लाख रुपये से अधिक नहीं    

लघु उद्यम                                                                                             25 लाख रुपये से अधिक, लेकिन 5 करोड़ रुपये

                                                                                                        से अधिक नहीं  

मध्यम उद्यम                                                                                         5 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रुपये

                                                                                                               से अधिक नहीं  

सेवा क्षेत्र

उद्यम                                                                                                  उपकरण में निवेश

सूक्ष्म उद्यम                                                                                           10 लाख रुपये से अधिक नहीं    

लघु उद्यम                                                                                            10 लाख रुपये से अधिक, लेकिन 2 करोड़ रुपये

                                                                                                                से अधिक नहीं  

मध्यम उद्यम                                                                                         2 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 5 करोड़ रुपये

                                                                                                                से अधिक नहीं

 

एमएसएमई समाधान

सरकार ने अक्तूबर 2017 में एमएसएमई समाधान पोर्टल का भी शुभारंभ किया ताकि एमएसएमईज़ को देरी से भुगतान के मुद्दों का समाधान किया जा सके. इस कार्यक्रम के अंतर्गत एमएसएमईज़ अपने मामले ऑनलाइन रजिस्टर कर सकते हैं, जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा स्थापित की जाने वाली सम्बद्ध सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सहायता परिषद (एमएसईएफसी) द्वारा निपटाया जाएगा. एमएसएमईडी अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत, आपूर्तिकर्ता इकाइयों को विलंब से भुगतान किए जाने की स्थिति में बकाया राशि पर मासिक आधार पर चक्रवृद्धि ब्याज अदा करना होगा, जो रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंक दर का 3 गुणा वसूल किया जाएगा.

एमएसएमई संबंध

सरकार ने 8 दिसंबर, 2017 को एमएसएमई संबंध पोर्टल का शुभारंभ किया, ताकि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों द्वारा एमएसएमईज़ से सरकारी खरीद के कार्यान्वयन पर निगरानी रखी जा सके. इस पोर्टल के जरिए एमएसएमईज़ विभिन्न उत्पादों के बारे में सूचना तक पहुंच कायम करने में सक्षम होंगे. इस पोर्टल के जरिए केंद्र सरकार के विभागों/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्ठानों द्वारा एमएसएमईज़ के कुल उत्पाद और सेवाओं का न्यूनतम 20 प्रतिशत अनिवार्य रूप से खरीदे जाने की जांच आसानी से की जा सकेगी. कुल मिला कर इस प्रणाली से एमएसएमईज़ के लिए व्यापार करने में सुगमता बढ़ेगी और इस तरह सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढावा मिलेगा.

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति केंद्र

एमएसएमई मंत्रालय ने 25 जुलाई, 2016 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अजा/अजजा) केंद्र की स्थापना करने के एक कार्यक्रम का अनुमोदन किया था. इस केंद्र का औपचारिक रूप से उद्घाटन 18 अक्तूबर, 2016 को लुधियाना, पंजाब में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया. यह केंद्र अजा/अजजा उद्यमियों को व्यावसायिक सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए केंद्र सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति आदेश 2012 के अंतर्गत अपने दायित्वों को पूरा कर सकें, प्रयोज्य व्यापार पद्धतियां अपना सकें और स्टैंड अप इंडिया उपायों का लाभ उठा सकें.

प्रधानमंत्री सूक्ष्म इकाई विकास और पुनर्वित्त एजेंसी लिमिटेड (मुद्रा)

करीब 10 लाख लघु, मध्यम उद्यमों को लाभ पहुंचाने के लिए 20,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ मुद्रा कार्यक्रम की शुरुआत की गई. आप अपनी व्यापार योजना प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसे अनुमोदित किए जाने पर ऋण मंजूर कर दिया जाएगा. आपको एक मुद्रा कार्ड मिलेगा, जिसका इस्तेमाल आप कच्चा माल खरीदने, अन्य खर्चों आदि के लिए क्रेडिट कार्ड के रूप में कर सकते हैं. इस कार्यक्रम के अंतर्गत शिशु, किशोर और तरुण तीन श्रेणियों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है.

स्टार्ट अप कार्य योजना

स्टार्ट अप कार्य योजना के अंतर्गत 19 सूत्री कार्य सूची तैयार की गई है, जिसमें श्रम और पर्यावरण विनियमों के अनुपालन के मामले में स्व-प्रमाणन, पेटेंट और बौद्धिक संपदा आवेदन दाखिल करने में मदद के लिए सुविधा प्रदाताओं का एक पैनल, प्रारंभिक पूंजी वित्त पोषण, पूंजी लाभ और 3 वर्ष तक आयकर से छूट तथा 4 वर्ष के लिए निधियों की निधि के जरिए 10,000 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता शामिल है. विनियामक देयताओं को कम करने के लिए स्टार्ट अप्स को स्व-प्रमाणन की छूट दी गई है. स्व-प्रमाणन के अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान, श्रम अनुबंध, भविष्यनिधि प्रबंधन, जल और वायु प्रदूषण अधिनियमों सहित विभिन्न कानून शामिल हैं.

स्टार्ट अप इंडिया केंद्र

भारत में स्टार्ट अप फाउंडेशनों के लिए एकल संपर्क बिंदु के रूप में एक अखिल भारतीय केंद्र बनाया जाएगा, जो ज्ञान के आदान प्रदान और वित्तीय सहायता तक पहुंच में उद्यमियों की मदद करेगा.

ऐप के जरिए पंजीकरण

मोबाइल एप्लीकेशन के रूप में एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जा रहा है, ताकि संस्थापक स्टार्ट अप आसानी से अपना पंजीकरण कर सकें.

पेटेंट संरक्षण

केंद्र सरकार कम लागत पर पेटेेंट परीक्षण की एक फास्ट ट्रैक प्रणाली पर विचार कर रही है. इस प्रणाली से स्टार्ट अप फाउंडेशनों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने में मदद मिलेगी.

राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट कंपनी

अगले 4 वर्ष तक हर वर्ष 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट कंपनी (एनसीजीटीसी) की परिकल्पना की जा रही है, जिससे स्टार्ट अप्स के लिए धन का प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी.

पूंजी लाभ कर से छूट

वर्तमान में उद्यम पूंजी निधियों के रूप में निवेश पर पूंजी लाभ कर से छूट प्राप्त है. इस नीति को स्टार्ट अप्स में प्राथमिक स्तरीय निवेशों के मामले में भी लागू किया जा रहा है.

तीन वर्ष के लिए कोई आयकर नहीं

स्टार्ट अप्स को 3 वर्ष के लिए आयकर के भुगतान से छूट दी गई है. इस नीति से भविष्य में स्टार्ट अप्स के विकास की गति को बढ़ाने में क्रांति आएगी.

अधिक मूल्य के निवेश पर कर छूट

बाजार मूल्य से अधिक मूल्य के निवेश के मामले में स्टार्ट अप्स को कर में छूट दी जाएगी.

उद्यमिता सृजन

पांच लाख से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए नवाचार संबंधी अध्ययन योजनाएं बनाई गई हैं. इसके अलावा विश्व स्तरीय इन्क्यूबेटर विकसित करने के लिए एक वार्षिक इन्क्यूबेटर ग्रेंड चेलेंज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी.

इन्क्यूबेटरों केंद्रों की स्थापना

राष्ट्रीय संस्थानों में 35 नए इन्क्यूबेटर और 31 नवाचार केंद्रों की स्थापना के लिए एक निजी-सरकारी भागीदारी मॉडल तैयार किया जा रहा है.

अनुसंधान पार्क

सरकार ने 7 नए अनुसंधान पार्कों की स्थापना की योजना बनाई है. इनमें से 6 पार्क भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के परिसरों में और एक पार्क भारतीय विज्ञान संस्थान परिसर में बनाया जाएगा. इनमें प्रत्येक की स्थापना पर 100 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे.

स्कूलों में प्रतिबद्ध कार्यक्रम

सरकार 5 लाख से अधिक स्कूलों में नवाचार संबंधी पाठ्यक्रम शुरू करेगी, इस तरह आर्थिक प्रणाली में नई प्रतिस्पर्धात्मक गतिशीलता के जरिए स्टार्ट अप कंपनियों को बाजार में सर्वाधिक गतिशील आर्थिक संगठन बनाया जा सकेगा, क्योंकि वे किसी भी आर्थिक प्रणाली की तुलना में अतिरिक्त गतिशीलता और प्रतिस्पर्धा प्रदान करते हैं. वे परिवर्तन के लिए प्रेरक एजेंट के रूप में काम करते हैं, जिसकी परिणति शृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया के रूप में होती है. जैसे ही एक उद्यम की स्थापना की जाती है, औद्योगिकरण की प्रक्रिया में गति आ जाती है. इन सभी गतिविधियों से उद्यमशीलता मजबूत होती है और विभिन्न प्रकार की इकाइयों की मांग पैदा होती है तथा मांग में बढ़ोतरी के करण इसकी परिणति किसी क्षेत्र के समग्र विकास के रूप में होती है और वहां अधिकाधिक इकाइयां स्थापित की जाती हैं. स्वदेशी स्टार्ट अप्स सस्ती और सुविधाजनक सेवाएं प्रदान करते हुए न केवल लोगों के जीवन को सुगम बनाएंगे, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी और प्रगति में प्रमुख रूप से योगदान भी करेंगे. हमारा विश्वास है कि स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम से भारत में खुशहाली आ रही है. अनेक ऐसे उद्यमी युवा हैं, जो संसाधनों के अभाव के कारण स्वयं का व्यापार शुरू करने का सपना पूरा नहीं कर पाते. परिणाम स्वरूप उनके विचारों, प्रतिभा और क्षमताओं का दोहन नहीं हो पाता, जिससे देश संपत्ति सृजन, आर्थिक विकास और रोज़गार के अवसरों से वंचित रहता है. स्टार्ट अप इंडिया ऐसे युवाओं की उद्यमिता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है. यह कार्यक्रम ऐसे व्यक्तियों के लिए संसाधन सुनिश्चित करता है, जिनमें अपना व्यापार प्रारंभ करने की क्षमता और नवाचार है. यह कार्यक्रम ऐसे युवाओं को अनेक स्तरों पर सक्रिय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान करता है.

अंतत: इन सभी उपायों के साथ एमएसएमई क्षेत्र राष्ट्र के विकास, निर्यात में बढ़ोतरी, बड़ी संख्या में अकुशल श्रमिकों, नए स्नातकों और अद्र्ध बेरोज़गारों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने में सक्रिय है. यह क्षेत्र बैंकों को भी उद्यमों के लिए अधिकाधिक ऋण देने के अवसर प्रदान करता है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे परिवर्तनकारी सुधारों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों - एमएसएमईज़ को औपचारिक क्षेत्र के अंतर्गत लाने में मदद की है, जो पहले अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा थे. इन छोटे उद्यमों की बड़ी सफलता के कारणों में से एक यह है कि वे डिजिटल इंडिया का लाभ उठा रहे हैं और स्वयं को इंटरनेट के जरिए ऊंचा उठा रहे हैं. उन्होंने अपनी एक पहचान कायम की है और भारत के लिए डिजिटल रूपांतरण का नेतृत्व किया है. डिजिटल जगत ने वैश्वीकरण को लोकतांत्रिक रूप प्रदान किया है, जिससे एमएसएमईज़ एक लक्ष्य के साथ विश्वभर में ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं. ऑनलाइन स्पेस ने व्यापार करने का एक नया आयाम खोला है, जो पहले उपलब्ध नहीं था. इससे उद्यमशीलता में बढ़ोतरी हुई है और हमारी अर्थव्यवस्था में एमएसएमईज़ का महत्व बढ़ा है. ये ऐसी चीजें हैं जो पहले संभव नहीं थीं.

(डॉ. रंजीत मेहता, प्रधान निदेशक, पीएच.डी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली.)

ईमेल:ranjeetmehta@gmail.com

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)