संपादकीय लेख


Volume- 5, 4 - 10 May 2019

 

विस्तीर्ण कला शिक्षा में

ज्ञानार्जन की नयी लहर

निधि प्रसाद

बारहवीं कक्षा के ज्यादातर छात्र और उनके अभिभावक खुद को तंग दायरे वाले कुछेक खानों में से किसी एक में समेटने के लिये संघर्ष करते हैं. उनके सामने सवाल होता है कि आगे इंजीनियरी, मेडिकल या वाणिज्य में से किसकी पढ़ाई करना बेहतर होगा. वे नहीं समझ पाते कि शिक्षा का क्षेत्र अब काफी विस्तृत और विविधतापूर्ण हो गया है. अभिभावक मुझसे पूछते हैं कि उनके बच्चों को कौन-सा कॅरिअर अपनाना चाहिये. क्या उन्हें विज्ञान, इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी में भेजना सबसे अच्छा रहेगा? मेरा यही जवाब होता है कि बच्चों को अपना फैसला खुद करने देना सबसे अच्छा है. हमारे माता-पिता ने जो कुछ किया वह इन अभिभावकों को नहीं करना चाहिये. वे बताते रहे कि हमें क्या पढऩा है जिसकी वजह से हमने शिक्षा को बोझ की तरह लिया. अभिभावकों को चाहिये कि वे बच्चों को अपनी दिलचस्पियों को आगे ले जाने और शिक्षा से प्रेम करने के लिये प्रोत्साहित करें.

अधिकतर भारतीय छात्रों और अभिभावकों के व्यवहार को देश के हालात को देखते हुए आसानी से समझा जा सकता है. हमारे देश में लाखों छात्र मुट्ठी भर कॉलेजों की सीटों और रोज़गार के अवसरों के लिये नियमित तौर पर प्रतिस्पर्धा करते हैं. भारतीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश लगातार मुश्किल होता जा रहा है. नयी दिल्ली के कुछ खास प्रमुख कॉलेजों में पिछले साल प्रवेश के लिये जरूरी अंक 99 प्रतिशत तक पहुंच गये थे. इस बेहद तनाव की

स्थिति में छात्र वैसी पढ़ाई करना चाहते हैं जिससे उन्हें रोज़गार मिले. इसकी वजह से कॉलेज में पढ़ाई का अनुभव बौद्धिक गवेषणा के बजाय तकनीकी प्रशिक्षण जैसे हो जाता है.

अनेक समस्याओं से जूझ रहे भारत जैसे विकासशील देश में शैक्षिक आकांक्षाओं पर इंजीनियरी और प्रबंधन के प्रभुत्व के बीच विस्तीर्ण कला (लिबरल आट्र्स) की जरूरत और भी बढ़ जाती है. हमारी खुशकिस्मती से उच्चतर शिक्षा ने अब तक कमतर रही मानविकी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. कुछ बेहतरीन छात्र भी अब मानविकी को चुन रहे हैं. इससे हमें नयी दिल्ली के अशोका विश्वविद्यालय और पुणे की फ्लेम यूनिवर्सिटी जैसे लिबरल आट्र्स के लिये प्रतिबद्ध और उत्कृष्ट संस्थान मिले हैं. दूसरी तरफ  दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज और सेंट स्टीफंस कॉलेज तथा पुणे के सिंबायोसिस स्कूल ऑफ लिबरल आट्र्स जैसे पुराने संस्थान हैं जिन्होंने अपने पाठ्यक्रम और परिवेश को अंतर्विषयी शिक्षा के अनुकूल बनाया है.

मौजूदा समय की सबसे बड़ी सामाजिक और प्रौद्योगिकीय चुनौतियों का सामना करने के लिये उनके मानवीय संदर्भ के बारे में आलोचनात्मक ढंग से सोचने की क्षमता की दरकार है. मानविकी के स्नातक इस काम के लिये सबसे अच्छे ढंग से प्रशिक्षित होते हैं.

सिलिकन वैली के सबसे ज्यादा चमकदार सितारों में कुछेक इंजीनियरी के बजाय विस्तीर्ण कला और मानविकी के छात्र रहे हैं. लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के पास दर्शनशास्त्र की स्नातकोत्तर उपाधि है. यूट्यूब की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूसन वोजसिस्की ने इतिहास और साहित्य, स्लैक के संस्थापक स्टीवर्ट बटरफील्ड ने अंग्रेजी तथा एयरबीएनबी के संस्थापक ब्रायन चेस्की ने ललित कला में उच्च शिक्षा हासिल की है. यहां तक कि चीन में अलीबाबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक मा भी अंग्रेजी में स्नातक हैं. इससे इस विचार को बल मिलता है कि अध्ययन के विषय से ज्यादा महत्वपूर्ण लीक से हट कर सोचना है.

प्रौद्योगिकी के दायरे में काम करने वाले इंजीनियर की तुलना में एक मनोविज्ञानी लोगों को प्रोत्साहित करने और उपयोगकर्ताओं की चाहत को समझने के बारे में बेहतर समझ रखता है. एक ऐसी दुनिया का शहंशाह कोई संगीतकार या कलाकार ही हो सकता है जिसमें आप अपनी किसी भी कल्पना का 3 डी प्रिंट निकाल सकते हैं.

प्रौद्योगिकी एक अद्भुत भविष्य को संभव बना रही है. लेकिन उसकी रचना के लिये भारत में संगीतकारों और कलाकारों को इंजीनियरों के साथ कंधे-से-कंधा मिला कर काम करने की जरूरत है. इनमें से किसी एक के होने से काम नहीं चलेगा. इसके लिये इंजीनियरी और मानविकी दोनों की ही जरूरत है।

कैसे मिला विस्तीर्ण कला को यह नाम?

आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे पुराने विषयों में से एक का अध्ययन कैसा होगा? विस्तीर्ण कला एक ऐसा ही विषय है. इसकी शुरुआत प्राचीन यूनान के लोगों से हुई थी. वे मानते थे कि किसी शिक्षित व्यक्ति के लिये सबसे ऊंची शिक्षा विस्तीर्ण कला ही है.

दुनिया के सबसे पुराने विषयों में से एक, विस्तीर्ण कला की शुरुआत पांचवीं सदी के यूनान में गवेषणा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण काल में हुई. इसे सभी आजाद पुरुषों के लिये अच्छी शिक्षा की कसौटी माना जाता था और इसलिये ही इसे विस्तीर्ण नाम मिला. बेशक इसकी पहचान में बदलाव आया या यूं कहें कि इसका विस्तार हुआ है. लेकिन यह अब भी समाज को साहित्य, भाषा, इतिहास, दर्शनशास्त्र, गणित, मनोविज्ञान और विज्ञान समेत अनेक विषयों की हदों के अनुसंधान में सक्षम बनाती है.

यह एक ऐसा ज्ञान है जिसे राष्ट्र के हर स्वतंत्र नागरिक के पास होना चाहिये. विस्तीर्ण कला के सिद्धांत के विकास के साथ ही इसमें विज्ञान, प्रबंधन, कला, मानविकी और समाज विज्ञान से जुड़े विषय भी शामिल हो गये हैं. लेकिन मूल विचार यही रहा है कि शिक्षा का काम व्यक्ति को सफल जीवन जीने के लिये तैयार करना है. इसका मकसद सिर्फ आपको जीने के लिये किसी उद्योग में अपनी जगह हासिल करने के वास्ते आधे-अधूरे कौशल और ज्ञान से लैस करना नहीं है.

अंतर्विषयी शिक्षा एक आवश्यकता बन गयी है. इस बात पर ध्यान देने की जरूरत बढ़ती जा रही है कि आपकी शिक्षा और कौशल को किस तरह उपयोग में लाया जाये. किसी डिग्री कार्यक्रम में एक समग्र और अंतर्विषयी शिक्षा के लिये विभिन्न क्षेत्रों के कई पाठ्यक्रमों के अध्ययन का अवसर मिल जाये तो कैसा रहेगा? विस्तीर्ण कला शिक्षा आपके इस सपने को साकार करती है.

मौजूदा समय में विस्तीर्ण कला क्या है?

आधुनिक संदर्भ में विस्तीर्ण कला शिक्षा क्या है? अब अनेक विषय इसके व्यापक दायरे में आते हैं.  एक विस्तीर्ण कला डिग्री कार्यक्रम कई विषयों को अपने दायरे में समेटे रहता है. इसमें मानविकी के अलावा सामाजिक, प्राकृतिक और औपचारिक विज्ञान के विषय भी शामिल होते हैं. विभिन्न संस्थानों के विस्तीर्ण कला डिग्री कार्यक्रमों में शामिल विषयों में काफी भिन्नताएं हैं. लेकिन विस्तीर्ण कला के दायरे में आम तौर पर निम्नलिखित क्षेत्र शामिल माने जाते हैं -

मानविकी - कला, साहित्य, भाषा विज्ञान, दर्शनशास्त्र, धर्म, परंपराएं, आधुनिकी विदेशी भाषाएं, संगीत, थिएटर, संभाषण, भाषा इत्यादि.

समाज विज्ञान - इतिहास, मनोविज्ञान, विधि, समाजशास्त्र, राजनीति, लैंगिक अध्ययन, मानवशास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, व्यवसाय, सूचना विज्ञान इत्यादि.

प्राकृतिक विज्ञान - खगोलशास्त्र, जीव विज्ञान, रसायनशास्त्र, भौतिकी, वनस्पतिशास्त्र, पुरातत्व, जंतु विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान इत्यादि.

औपचारिक विज्ञान - गणित, तर्कशास्त्र, सांख्यिकी इत्यादि.

उपर्युक्त विषयों में से किसी एक के अध्ययन को भी विस्तीर्ण कला शिक्षा कहा जा सकता है. मसलन, इतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्र को भी विस्तीर्ण कला का अध्येता माना जा सकता है. लेकिन आम तौर पर ऐसे कार्यक्रम को ही विस्तीर्ण कला कहा जाता है जिसका मकसद ज्ञान और कौशल का ज्यादा व्यापक दायरा मुहैया करना हो.

विस्तीर्ण कला ऐसी शैक्षिक विधाओं के समूह हैं जिनमें विज्ञान और मानविकी दोनों शामिल है. अगर आप विस्तीर्ण कला के पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रहे हैं तो आपका कॅरिअर का कोई खास लक्ष्य होना जरूरी नहीं है. आप ज्ञान की एक व्यापक बुनियाद तैयार करेंगे जिसका इस्तेमाल अनेक तरह के कॅरिअर में किया जा सकता है. आप आलोचनात्मक ढंग से सोचना, अपने आसपास की दुनिया की पड़ताल करना, प्रभावी ढंग से संवाद और बदलती स्थितियों के साथ ढलना सीखेंगे. यदि आप विधि या चिकित्सा जैसे किसी पेशेवर क्षेत्र में प्रवेश करना चाहें तो कई विस्तीर्ण शिक्षा कार्यक्रम आपको किसी स्नातक पाठ्यक्रम में अध्ययन जारी रखने के लिये तैयार कर सकते हैं.

विस्तीर्ण कला शिक्षा महाविद्यालयी शिक्षण का एक ऐसा नजरिया है जो व्यक्तियों का सशक्तीकरण करने के अलावा उन्हें जटिलताओं, विविधताओं और बदलावों से सामना करने के लिये तैयार करता है. विस्तीर्ण कला विभिन्न कलाओं, जैविक और भौतिक विज्ञानों, सामाजिक विज्ञानों और मानविकी के अध्ययन के विस्तार पर बल देने वाला संरचित तालमेल है. इसका लक्ष्य ज्ञानार्जन का एक ऐसा अनुभव मुहैया कराना है जो छात्रों को बदलाव, विविधता और जटिलता का सामना करने के कौशल से लैस करे. यह छात्रों को समस्याओं के समाधान में सक्षम, आलोचनात्मक चिंतक और समाज का जिम्मेदार सदस्य बनाता है.

आप विस्तीर्ण कला पाठ्यक्रम में कई विषयों का अध्ययन करते हैं. लेकिन इसमें आपको अपना मुख्य विषय और अन्य विषयों को चुनने का अवसर भी मिलता है. यह आपको विषयों का सबसे दिलचस्प मेल बनाने की आजादी देता है. मसलन, यदि आप पत्रकारिता को अपना प्रमुख विषय बनाते हैं तो आपको अर्थशास्त्र, वित्त, अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन, मानव संसाधन प्रबंधन, साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन, संगीत, नृत्य, डिजाइन और थिएटर जैसे 15 से ज्यादा विषयों में से अपने सहायक विषय चुनने का अवसर मिलता है.

अपने विषयों के चयन के हिसाब से आपको विस्तीर्ण कला में बीए, बीए आनर्स, बीबीए या बीएससी की डिग्री मिलती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका मुख्य विषय क्या है. उदाहरण के लिये अगर आपका मुख्य विषय इतिहास या अर्थशास्त्र है तो आपको विस्तीर्ण कला में बीए की डिग्री मिलेगी. अगर आप अपना मुख्य विषय गणित या जीव विज्ञान चुनते हैं तो आपको विस्तीर्ण कला में बीएससी की डिग्री दी जायेगी.

भारत में विस्तीर्ण कला का अध्यापन आम तौर पर तीन साल के अंडर ग्रेजुएट डिग्री कार्यक्रम के रूप में किया जाता है. लेकिन कुछ विश्वविद्यालय वैकल्पिक चौथे वर्ष का प्रावधान भी रखते हैं. कुछेक विश्वविद्यालयों में विस्तीर्ण कला की कोई अलग से पाठ्यचर्या नहीं होती. इनमें पाठ्यचर्या में विस्तीर्ण कला पाठ्यक्रम समाहित होते हैं.

क्यों है विस्तीर्ण कला की जरूरत?

विस्तीर्ण कला शिक्षा क्या है? जॉन हेनरी न्यूमैन के अनुसार इस तरह की शिक्षा का उद्देश्य मस्तिष्क को खोलना, उसे सही दिशा देना, उसका परिष्कार करना तथा उसे ज्ञानार्जन और ज्ञान को आत्मसात करने में सक्षम बनाना है. यह मस्तिष्क को अपनी शक्तियों पर नियंत्रण और इनके उपयोग के योग्य बनाने के अलावा उसे लचीलापन, व्यवस्था, सटीकता और बुद्धिमता प्रदान करती है. यह मस्तिष्क को संसाधन का बेहतर उपयोग करने, संबोधन और मुखर अभिव्यक्ति की क्षमता से लैस करती है.

विस्तीर्ण कला शिक्षा बौद्धिक जिज्ञासा को बढ़ावा देती है. यह कला से मानविकी तथा सामाजिक विज्ञान से प्राकृतिक और अनुप्रयुक्त विज्ञान तक के विषयों में ज्ञान के सृजन की प्रक्रिया में मददगार होती है. विस्तीर्ण शिक्षा में एक समग्रता है जो सृजनात्मकता और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा देती है.

मशीनीकरण का विस्तार, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम मेधा और प्रकृति की अनियमितताएं हममें बदलावों का सामना करने के लिये ज्यादा चातुर्य का तकाजा करती हैं. आज स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन वाले किसी भी व्यक्ति के पास अनंत सूचनाएं उपलब्ध हैं. हमारे नौजवानों के लिये यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि वे जटिल समस्याओं के बीच विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से समाधानों के लिये किस तरह सोचें.

पूरी तरह से व्यावसायिक प्रशिक्षण वक्त की जरूरत नहीं है. कुछ बहुत ही विचारवान विद्वानों ने संकेत दिया है कि औद्योगीकरण के बाद के इस वैश्विक समाज में खुद को बचाये रखने और सफलता के लिये पूरी तरह से अलग कौशलों और दृष्टिकोण की जरूरत है. ये गहरी कल्पनाशीलता और किसी ऐसे पैराशूट की तरह दिमाग वाले लोग हैं जो खुल कर ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है. विस्तीर्ण कला शिक्षा से इस लक्ष्य को ज्यादा आसानी से हासिल करने में मदद मिलेगी.

विस्तीर्ण कला के महाविद्यालयों का लक्ष्य अपने छात्रों को व्यापक कौशल वाले पूर्ण और सूचना संपन्न वैश्विक नागरिक बनाने का होता है. उनका प्रयास छात्रों की तर्कशीलता, गणितीय कौशल और लेखन क्षमता बढ़ाने का होता है. आपकी शिक्षा कुछ भी हो, अगर आप इन गुणों से लैस हैं तो कोई भी काम अच्छी तरह कर पायेंगे.

विस्तीर्ण कला डिग्री लेने के फायदे

विस्तीर्ण कला डिग्री कार्यक्रम के दौरान आप जो कौशल और ज्ञान अर्जित करते हैं उससे वैसा कॅरिअर खोजना आसान हो जाता है जिसे लेकर आप बेहद उत्साहित हैं. विस्तीर्ण कला शिक्षा के कुछ फायदे इस प्रकार हैं-

1.            यह आपकी विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक क्षमताओं को बढ़ाती है

2.            यह कॅरिअर की अनिश्चितताओं के लिये आपको तैयार करती है - विस्तीर्ण कला शिक्षा अनेक कॅरिअर के दरवाजे खोलती है. आप एक कॅरिअर को छोड़ कर दूसरे को अपना सकते हैं. कॉलेज के छात्र के तौर पर आपके पास अपना मन बदलने का विकल्प होता है.

3.            आप बेहद जरूरी व्यावहारिक कौशल विकसित करते हैं - विस्तीर्ण कला पाठ्यक्रमों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि इससे आपकी लेखन, सार्वजनिक भाषण, प्रस्तुति, सहयोग और सृजन की क्षमता में निखार आता है.

4.            सांस्कृतिक समझ में वृद्धि - समाजशास्त्र, सांस्कृतिक मानव विज्ञान, दर्शनशास्त्र, अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन इत्यादि का अंतर्विषयी अध्ययन आपको संवद्र्धित सांस्कृतिक समझ के लिये तैयार करता है.

5.            यह नेतृत्व क्षमता का विकास करती है - विस्तीर्ण कला की डिग्री आपको सिर्फ बेहतर राजनीतिक नेता ही नहीं बना सकती. यह कॉरपोरेट जगत में भी आपको सृजन, सहयोग, प्रेरणा और नवाचार के जरिये टीमों का नेतृत्व करने में सहायता देती है.

क्या है विस्तीर्ण कला की संभावनाएं?

विस्तीर्ण कला शिक्षा छात्रों को एक समग्र शिक्षण प्रदान करती है. वह उन्हें रचनात्मक विचारक बनने का मौका देती है जिनकी जरूरत व्यवसाय जगत को आने वाले दशक में होगी. विस्तीर्ण कला डिग्री के छात्रों के सामने अनंत संभावनाएं होती हैं जो परंपरागत स्नातक डिग्री में नहीं मिलतीं. विस्तीर्ण कला की शिक्षा देने वाले कुछ महाविद्यालय पहली कुछ छमाहियों में कई बुनियादी पाठ्यक्रम मुहैया कराते हैं. इससे आपको अपने मुख्य विषय के बारे में जानकारी के आधार पर सुविचारित फैसला करने में मदद मिलती है.

विस्तीर्ण कला की डिग्री अनेक क्षेत्रों में काम करने की तैयारी में मददगार होती है. यह डिग्री गणित को साहित्य और भाषा को विज्ञान से जोडऩे वाले अंतर्विषयी ज्ञानार्जन पर केन्द्रित होती है. यह कॅरिअर के अनगिनत अवसरों के द्वार खोलती है. विस्तीर्ण कला डिग्री के साथ आप पत्रकारिता, जनसंपर्क, लेखन, विधि, राजनीति, भाषा विज्ञान, प्रकाशन, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, प्रबंधन, सिविल सेवा और विपणन जैसे अनेकानेक कॅरिअर अपना सकते हैं. सलाह, बैंकिंग, मीडिया, विज्ञापन, जनसंपर्क, अनुसंधान, शिक्षण और सामाजिक क्षेत्र लिबरल आट्र्स के स्नातकों के लिये अच्छी संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं. उद्यमिता में भी इन स्नातकों के लिये अच्छी संभावनाएं होती हैं.

भारत में लिबरल आट्र्स विश्वविद्यालयों की सूची

जागरूकता और विपुलता भारत में शिक्षा के विकल्पों की उभरती लहर के बड़े कारण मानी जाती हैं. विस्तीर्ण कला पाठ्यक्रम भी इसका अपवाद नहीं हैं. वर्ष 2005 से 2015 तक इस कार्यक्रम को संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों और आवेदनकर्ताओं की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है. विस्तीर्ण कला के कार्यक्रम चलाने वाले विश्वविद्यालयों में कुछ इस प्रकार हैं -

1.            अशोका विश्वविद्यालय, दिल्ली

2.            जिंदल स्कूल ऑफ लिबरल आट्र्स एंड ह्यूमनिटीज, दिल्ली

3.            लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली

4.            सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली

5.            फ्लेम यूनिवर्सिटी, पुणे

6.            सिंबायोसिस स्कूल ऑफ  लिबरल आट्र्स, पुणे

7.            लोयोला कॉलेज, चेन्नै

8.            मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नै

9.            क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलूरू

10. अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, बेंगलूरू

अलबर्ट आइंस्टीन ने कहा है, ‘ज्ञान से ज्यादा अहमियत कल्पना की है. ज्ञान का दायरा सीमित होता है. कल्पना के घेरे में समूची दुनिया आती है.’

ज्यादातर विस्तीर्ण कला शिक्षा में मजबूत शिक्षणशास्त्र पर आधारित शैक्षिक अनुसंधान होता है. विस्तीर्ण कला पाठ्यक्रम में अंतर्विषयी और अनुभूत ज्ञानार्जन प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा प्रतिपालन के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ विषयवस्तु, कोर्स और ज्ञान शामिल होता है. इन सबका मकसद युवा मस्तिष्कों को सर्वश्रेष्ठ शैक्षिक अनुभव की ओर आकृष्ठ करना और उन्हें वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करना है.

विस्तीर्ण कला शिक्षा आपको पुरातन और निरर्थक होने से बचाती है। यह आपको भविष्योन्मुखी शिक्षा से लैस करती है. कार्यक्रम की सफलता काफी हद तक व्यक्ति और इस प्रणाली के अंदर उसके नजरिये और प्रयोग के तरीके पर निर्भर करती है. यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है. ‘अंतर औरबहु से शुरू होने वाले बड़े शब्द काफी आकर्षक लग सकते हैं. लेकिन इनका सामना और इनमें विद्वता हासिल करना भी काफी श्रमसाध्य है.

(लेखक एक वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक सलाहकार हैं. -मेल आईडी:Nidhiprasadcs@gmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)