संपादकीय लेख


Volume-6, 11 - 17 May 201

स्नातक के बाद रोज़गार के विकल्प

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

म स्नातक के बाद विभिन्न विकल्पों के बारे में बात करने जा रहे हैं. वास्तव में यह आश्चर्यजनक है कि 10+2+3 अथवा 4 अथवा 5 के पश्चात (जैसा कि कुछ मामलों में स्नातक करने में 4/5 वर्ष लग जाते हैं) कॅरिअर की योजना के बारे में पर्याप्त चर्चा या संदर्भ उपलब्ध नहीं हैं जबकि 10+2 के बाद क्या करना है, इसके बारे में मार्गदर्शन प्राप्त करना बहुत आसान है. यह लेख इस खाई को पाटने का एक प्रयास है.

सभी छात्रों के लिये तथ्य के तौर पर एच.एस.सी और इसके बाद स्नातक की पढ़ाई पूरी करना उनके जीवन में दो बड़े मील के पत्थर होते हैं. यद्यपि विकल्पों के संदर्भ में दोनों चरण अलग-अलग हैं. जब आपने एच.एस.सी. की पढ़ाई पूरी कर ली होती है तो आप अभी किशोरावस्था में होते हैं और स्वतंत्र निर्णय लेने के लिये बहुत मज़बूत स्थिति में नहीं होते हैं तथा संभवत: अपने लिये खुले द्वारों (विकल्पों) के बारे में पूरी तरह नहीं जानते होते हैं. ऐसी स्थिति में उन छात्रों को ढूंढऩा आश्चर्यजनक नहीं है, जिन्हें इस बात का आकलन किए बिना कि उनके भविष्य के लिये क्या अच्छा है, एक रास्ता चुनना है. बेशक, भविष्य का कभी भी पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन इसे डिज़ाइन करने की कोशिश करना अच्छा है. जब आप एक स्नातक होते हैं, तो आप अपने भीतर तथा आसपास की दुनिया के व्यापक परिप्रेक्ष्य के साथ वयस्क हो जाते हैं. आपका व्यक्तित्व अपेक्षाकृत परिपक्व हो गया होता है और एक स्वतंत्र राय काम करना तथा अपने लिये एक मार्ग तैयार करना आसान हो जाता है. एक अन्य बड़ा अंतर यह होता है कि जबकि 10+2 के उपरांत, ज़्यादातर मामलों में एक छात्र केवल आगे अध्ययन के बारे में सोचता है (जिसका संक्षेप में अर्थ होता है स्नातक के लिये अध्ययन पाठ्यक्रम चुनना, जैसे कि इंजीनियरी, मेडिकल, कॉमर्स, वास्तुकला, डिज़ाइनिंग, फार्मेसी, कृषि, कम्प्यूटर अनुप्रयोग आदि), स्नातक के बाद यद्यपि कोई उच्चतर अध्ययन कर सकता है, इसके अलावा और भी अनेक मार्ग चुनने के लिये हैं.

मोटे तौर पर, जब आपने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली होती है, आपके लिये निम्नलिखित विकल्प अथवा मार्ग उपलब्ध होते हैं:-

-              आगे अध्ययन जारी रखना

-              अखिल भारतीय सेवाओं के लिये तैयारी करना/परीक्षा देना

-              अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए रोजग़ार तलाशना

-              सशस्त्र बलों में रोजग़ार की तलाश करना

-              तत्काल रोजग़ार के अवसरों का पता लगाना

उपर्युक्त के संबंध में विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिये हमारे पाठकों की सहायता के विचार के साथ नीचे विस्तार से वर्णन किया गया है:-

आगे अध्ययन जारी रखना: जब आप स्नातक के बाद अपना अध्ययन जारी रखने का चुनाव करते हैं, फिर आपके पास विकल्पों की भरमार होती है. आप स्नातकोत्तर डिग्री अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रम कर सकते हैं. अपनी पात्रता और वित्तीय स्थितियों के आधार पर, आपको यह विचार करना होगा कि क्या आप एक सर्वोच्च श्रेणी के संस्थान से जुडऩा चाहेंगे अथवा किसी अन्य संस्थान में भी खुश रहेंगे. आपके लिये एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय स्नातकोत्तर अध्ययन में लिये जाने वाले विषयों के बारे में होगा. आप एक विज्ञान के छात्र हो सकते हैं परंतु अब आप अपनी पटरी को बदलने की सोच सकते हैं. यह बहुत सामान्य है. बहुत से छात्र, जिन्होंने इंजीनियरी (बी.ई अथवा बी.टेक) की होती है, एम.ई. अथवा एम.टेक का अध्ययन करने की बजाए, एम.बी.ए (मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की पढ़ाई करने का निर्णय लेते हैं. यहां तक कि जैवप्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान स्नातक अभ्यर्थी स्नातकोत्तर स्तर पर प्रबंधन शिक्षा का अध्ययन करते पाये गये हैं.

 एम.बी.ए और एम.एस.डब्ल्यू (मास्टर ऑफ  सोशल वर्क) जैसे पाठ्यक्रमों का लाभ यह है कि ये सभी विषयक्षेत्रों के स्नातकों के लिये खुले हैं और व्यापक रूप से उपलब्ध हैं. यही बात विधि में डिग्री के साथ है.  विधि में डिग्री की पढ़ाई, यद्यपि इसकी प्रकृति स्नातक अर्हता की है, किसी भी विषय में स्नातक के बाद ही (हम 10+2 के बाद संभव 5 वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रमों की बात नहीं कर रहे हैं) की जा सकती है. यह स्वतंत्रता सीमित है और सभी विषयों में स्नातकोत्तर के मामलों में लागू नहीं होती है. उदाहरण के लिये यदि एक कला स्नातक में अचानक भौतिकी में रुचि उत्पन्न हो जाती है, उसे भौतिकी में एम.एससी में प्रवेश प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी. अत: आपको इस बात का पता लगाना होगा कि आप बदलाव करने के लिये पात्र हैं. परंतु इससे पहले अधिक संभावित प्रश्नों का उत्तर दिये जाने की आवश्यकता होती है जैसे कि विषय बदलने की इच्छा को लेकर आपका क्या कारण है. क्या इस विषय में आपकी वास्तविक रुचि है अथवा आप एक ऐसा विषय लेना चाहते हैं जिसे उत्तीर्ण करना आसान है. कुछेक मामलों में लोग स्नातकोत्तर के लिये भिन्न विषय को चुनते हैं क्योंकि वे इसे सिविल सेवाएं परीक्षा में एक वैकल्पिक विषय के तौर पर रखना चाहते हैं.

स्नातक के बाद, बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड) का अध्ययन करना ऐसे व्यक्तियों के लिये एक अच्छा विचार होता है जो माध्यमिक स्तर तक शिक्षण में कॅरिअर को अपनाना चाहते हैं. भारतीय और विदेशी भाषाओं में भी स्नातकोत्तर/डिप्लोमा अध्ययन किये जा सकते हैं.

यदि आप अनुसंधान उन्मुख हैं तो आपके लिये पीएच.डी हेतु पंजीकरण के लिये स्नातकोत्तर डिग्री होना अपेक्षित होता है.

आप स्नातकोत्तर अध्ययन के लिये जो भी विषय चुनें, आपको उस संस्थान के संबंध में निर्णय लेना होगा जहां से आप पाठ्यक्रम का अध्ययन करना चाहते हैं. प्रमुख संस्थानों जैसे कि आईआईएम, आईआईटी, आईआईएससी, आईआईआईटी आदि के लिये जबर्दस्त प्रतिस्पद्र्धा होती है. आपको अपनी वित्तीय स्थिति का ध्यान रखना होगा क्योंकि किसी अन्य शहर में जाने के लिये अतिरिक्त व्यय होगा. जो अपनी मास्टर की पढ़ाई के लिये विदेश जाना चाहते हैं उन्हें वीसा आदि जैसी विभिन्न अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शीघ्र योजना बनाने की आवश्यकता होगी.

जिन्होंने एम.बी.बी.एस अथवा बी.वी.एससी जैसी अर्हताओं के साथ स्नातक का अध्ययन किया है उन्हें रोजग़ार हासिल करने अथवा प्रैक्टिस शुरू करने के लिये पूर्णरूपेण तैयार माना जाता है. लेकिन यदि वे विशेषज्ञता का चुनाव करते हैं, उनके लिये स्नातकोत्तर ही विकल्प है.

लंबी और अल्पावधि के व्यावसायिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम स्नातक के बाद भी शुरू किये जा सकते हैं. यह सुनिश्चित कर लें कि डिप्लोमा की क़ीमत है और इसमें उस उद्देश्य को पूरा करने की अपेक्षा है जिसके लिये आपने इसे चुना है. डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुछेक उदाहरण हैं- ज्वैलरी डिज़ाइनिंग, कम्प्यूटर नेटवर्किंग, वेब डिज़ाइनिंग, प्रशिक्षण और विकास, अनुवाद, होटल प्रबंध आदि.

अखिल भारतीय सेवाओं में कॅरिअर: जब आप स्नातक हो जाते हैं, तो प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवाओं में प्रतियोगिता के लिये पात्र हो जाते हैं. ये परीक्षाएं वार्षिक आधार पर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित की जाती हैं. सिविल सेवा (पूर्ववर्ती भारतीय प्रशासनिक सेवा) परीक्षा सभी विषयक्षेत्रों के स्नातकों के लिये खुली है. चयन होने पर अभ्यर्थियों को प्रशासनिक (आईएएस), पुलिस (आईपीएस), विदेश (आईएफएस) और संबद्ध सेवाओं जैसे कि भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा, भारतीय रेल यातायात सेवा आदि आबंटित की जाती हैं. भारतीय वन सेवा परीक्षा में उपस्थित होने के लिये आप भौतिकी, रसायनशास्त्र, प्राणीविज्ञान, वनस्पति विज्ञान, गणित, सांख्यिकी, भूविज्ञान, पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक होने चाहियें. कृषि, वानिकी अथवा इंजीनियरी में स्नातकों को भी पात्र माना जाता है.

सभी स्नातक इंजीनियर्स (किसी भी विषयक्षेत्र में बी.ई/बी.टेक) भारतीय इंजीनियरी सेवाएं परीक्षा में उपस्थित होने के लिये पात्र हैं.

भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा उन सभी स्नातकों के लिये खुली है जिन्होंने सांख्यिकी, अनुप्रयुक्त सांख्यिकी अथवा गणितीय सांख्यिकी में से किसी एक विषय के साथ अपनी डिग्री की पढ़ाई पूरी की है.

उपर्युक्त सभी की चयन प्रक्रिया में तीन चरण अर्थात प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और विस्तृत साक्षात्कार सम्मिलित होता है. अधिक विवरण वेबसाइट upsc.gov.in से प्राप्त किया जा सकता है.

राज्य सिविल सेवाएं: सिविल सेवाएं परीक्षाओं की तरह ज़्यादातर राज्यों के अपने लोक सेवा आयोग हैं जो प्रशासनिक पदों को भरने के लिये परीक्षा आयोजित करते हैं. यदि चयन हो जाता है, आपको उसी राज्य के भीतर काम करना होगा.  

प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए रोजग़ार की तलाश करना: स्नातक होने पर आप सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों में लिपिकीय और अधिकारियों के पद के लिये आवेदन करने के लिये पात्र हो जाते हैं. सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये संयुक्त परीक्षा आयोजित की जाती है, जबकि बीमा कंपनियां अपनी-अपनी भर्तियां अलग-अलग करती हैं. ये पद लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिए भरे जाते हैं. लिपिकीय पदों के लिये कोई साक्षात्कार नहीं होता है. अधिकारियों के पद अखिल भारतीय आधार पर भरे जाते हैं जबकि लिपिकीय रिक्तियोंं की घोषणा राज्यवार की जाती है. भारतीय स्टेट बैंक अपनी परीक्षा अलग से आयोजित करता है.

कर्मचारी चयन आयोग केंद्रीय सरकार के विभागों में रिक्तियां भरने के लिये विभिन्न परीक्षाएं आयोजित करता है. अवसरों के बारे में जानने के लिये उनकी वेबसाइट ssc.nic.in देखते रहिए.

स्नातक पुलिस बलों में उप निरीक्षकों के पदों के लिये आवेदन करने के पात्र होते हैं. भर्ती राज्य स्तर पर की जाती है.

सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों में रोजग़ार: इसका संदर्भ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (ओएनजीसी, आईओएल आदि), विद्युत (एनटीपीसी, पावरग्रिड कार्पोरेशन और अन्य), गैस (गेल, पेट्रोनेट एलएनजी आदि) और अन्य कंपनियां जैसे कि भेल, एचएएल, आरईसी आदि से है. इनमें से कई के पास प्रबंधन और अभियांत्रिकी में प्रशिक्षु योजना है. अभियांत्रिकी प्रशिक्षु के लिये स्नातक इंजीनियर्स (अपेक्षित विषयक्षेत्र में) पात्र हैं. कई मामलों में ऐसे पद के लिये आवेदन करने के लिये गेट स्कोर अपेक्षित होता है. राज्य सरकार के उपक्रमों जैसे कि गुजरात स्टेट पेट्रोनेट, में भी समान तरह के अवसर उपलब्ध होते हैं.

भारतीय सेना में रोजग़ार: हम भारतीय सशस्त्र सेना कमान के सम्मान के बारे में सब जानते हैं. स्नातक की पढ़ाई के बाद सेवा में शामिल होने के लिये विभिन्न अवसर होते हैं. एनसीसी से सीप्रमाणपत्र के साथ स्नातकों के लिये पुरुष/महिला की भर्ती के लिये एक विशेष स्कीम है. स्नातकों के लिये अन्य एंट्री स्कीम अल्प सेवा कमीशन (तकनीकी/ग़ैर तकनीकी) है. संयुक्त रक्षा सेवा आपको एक पूर्णरूपेण सेना अधिकारी के तौर पर नियुक्त करने से पहले व्यापक प्रशिक्षण के लिये भारतीय सैन्य अकादमी/भारतीय नौसेना अकादमी/वायु सेना अकादमी/अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में लेकर जायेगी. सेना में रोजग़ारों के बारे में आपको वेबसाइट: joininindiarmy.nic.in से पूरी जानकारी प्राप्त होगी. आपके लिये सेना में सेवानिवृत्त होने के समय तक जारी रहना आवश्यक नहीं है. सेवा आपको कमीशनिंग/परिभाषित अवधि पूरी करने होने के बाद नागरिक जीवन में पुन: लौटने की अनुमति प्रदान कर देती है.

निजी क्षेत्र में रोजग़ार: उदार सरकारी नीतियों और व्यापार करना आसान होने से हमारे देश में निजी उद्यमों को विकास और विस्तार करने में सहायता मिली है. यह रोजग़ार चाहने वालों के लिये अच्छा है. निजी बैंकों, बीमा कंपनियों आदि में स्नातकों के लिये काउंटर और सेल्स संबंधी रोजग़ार उपलब्ध हो सकते हैं. निजी नौकरियों के लिये खुले रहने के दौरान, आपको एक मज़बूत व्यक्तित्व लेकर चलने की ज़रूरत है ताकि आप भोले-भाले न लगें और चलायमान न हो जायें. इस पहलु पर इस लिये ज़ोर दिया जा रहा है क्योंकि रोजग़ार चाहने वालों का रोजग़ार की फर्जी पेशकश करके उत्पीडऩ करने वाले अनेक बेईमान तत्व मौजूद हैं.

काम और पढ़ाई साथ-साथ: देखने में यह एक कठिन विकल्प प्रतीत हो सकता है, लेकिन यह कुछ के लिये अपनी वित्तीय जरूरतों और विकास आकांक्षाओं में संतुलन बनाने का तरीका है. आप जब काम के साथ-साथ अध्ययन करने का निर्णय लेते हैं तो आपको कुछ बातों को लेकर समझौता करना पड़ सकता है. लेकिन यह वक्त के साथ एक परिवर्तनकारी साबित हो सकता है. आप संध्याकालीन कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं (जो सायंकालीन पारी में काम करते हैं वे दिन की कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं), किसी मुक्त विश्वविद्यालय में एक प्राइवेट छात्र के तौर पर एनरॉल कराएं अथवा किसी पाठ्यक्रम के लिये पंजीकरण करा लें. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम, अध्ययन सामग्री और संपर्क कक्षाओं आदि जैसी छात्र सहायता सेवाओं के संबंध में एक जगह बनाई है. आप जो भी संस्थान/पाठ्यक्रम का चुनाव करें, यह अच्छी तरह से सोच विचार के साथ और उद्देश्यपरक होना चाहिये क्योंकि आप इसके लिये अपना पर्याप्त समय और संसाधन ख़र्च करेंगे.

बाद में काम से जुडऩे के लिये पढ़ाई से ब्रेक लेना: अमेरिका जैसे कई पश्चिमी देशों में, यह आम बात होती है, विशेषकर उनके लिये जो बिजनेस स्टडीज/मैनेजमेंट में जाने के इच्छुक होते हैं. दरअसल कई संस्थानों में, किसी के बिजनेस मैनेजमेंट स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश से पहले कुछेक कार्यानुभव अपेक्षित होता है. भारत में भी कुछेक प्रबंध संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया में कार्यानुभव को अधिमान दिया जाता है अथवा कार्यानुभव आवश्यक होता है. (उदाहरण के लिये-हैदराबाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस). कुछ कार्यानुभव के पश्चात कोई व्यक्ति काम जारी रखते हुए भी अंश-कालिक एम.बी.ए के अध्ययन में प्रवेश ले सकता है. कुछेक संगठन अपने कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश प्रदान करते हैं और कुछेक ऐसे भी हैं जो कर्मचारियों को उच्चतर अध्ययन के लिये प्रायोजित करते हैं.

ऐसे मामलों में कर्मचारी के लिये एक निर्धारित अवधि के लिये रोजग़ार में जारी रहने के लिये बॉण्ड पर हस्ताक्षर करने अथवा कंपनी को बॉण्ड की राशि का भुगतान करना अपेक्षित हो सकता है.

आप स्नातक की पढ़ाई के बाद जो भी करने का निर्णय लें वह अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित पर आधारित होना चाहिये:-

आपकी पारिवारिक स्थितियां और वित्तीय स्थिति

आपका व्यक्तित्व और अभिविन्यास तथा यदि आवश्यक हो तो आप इसमें सुधार करने के कितने इच्छुक हैं,

आप किस तरह का जीवन जीना चाहते हैं

आपकी प्रवृत्ति आरामदायक क्षेत्र से बाहर निकलने की है

आपके अल्प और दीर्घावधि रोजग़ार लक्ष्य

आपकी जोखि़म लेने की क्षमता

आपके मध्य और दीर्घकालिक भविष्य के लिये अंतिम उद्देश्य अपनी क्षमता को समझना होना चाहिये ताकि जब आप पीछे मुडक़र देखें तो आप विश्वास के साथ कह सकें कि आपने अपनी योग्यता, प्रतिभा और स्थितियों में सर्वश्रेष्ठ किया है और इसलिए कोई कारण नहीं है कि आपको पछताना पड़ें.

(लेखक मुंबई स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल:v2j25@yahoo.in)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)