संपादकीय लेख


volume-7,18 - 24 May 2019

जैव सूचना विज्ञान में रोजग़ार के अवसर

मनीषा माथुर

जैव सूचना विज्ञान ‘‘आणविक जीवन विज्ञान के क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी’’ का अनुप्रयोग है. यह बॉयोलॉजिकल डाटा विशलेषण  के लिए विकासशील विधियों और सॉफ्टवेयर टूल्स हेतु एक अंतरविषयीय क्षेत्र है. पॉलीन हॉगगेग ने 1970 में जैव सूचना प्रणाली में सूचना प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिये जैव सूचना विज्ञान शब्द का निर्माण किया था. जैव सूचना विज्ञान एक अनुप्रयुक्त विज्ञान है जो बड़ी मात्रा में जैविक डेटा के विश्लेषण, विशेष तौर पर कम्प्यूटेशनल उपकरणों को जीनोमिक्स, प्रोटियोमिक्स और आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में विशेषीकृत है. जैव सूचना विज्ञान एक गतिशील और तेज़ी से बढ़ता अंत: विषय विज्ञान है जो जीवन विज्ञान, गणित, सांख्यिकी और कम्प्यूटर विज्ञान के मध्य उपस्थित है.

इस व्यापक डेटा से निपटने का एक मार्ग जैव सूचना विज्ञान है. जैव सूचना विज्ञान ‘‘सांसारिक और विशिष्टता का मिश्रण’’ है. सांसारिक में डेटा एकीकरण, डेटा फॉर्मेटिंग और रूपांतरण (जिसे पार्सिंग के रूप में भी जाना जाता है) और ऑटोमेशन शामिल हैं-‘‘कुछ दिनों के लिये एक लाख बार अपेक्षाकृत सरल विश्लेषण करना और फिर प्राप्त परिणामों की मात्रा से निपटना और उन्हें कुछ उपयोगी विवरण में बदलना’’. यह तब होता है जब उपयोगी भाग उभरने लगते हैं जो उदात्त पहलुओं की सतह होते हैं. कुछ रोमांचक चीजें अनुक्रम के बड़े हिस्सों के साथ काम कर रही होती हैं जिनसे इस बात के पैटर्न का पता चलता है कि वे जीव विज्ञान को कैसे पुन: प्रस्तुत करते हैं. 

आर एंड डी सेक्टर में जैव सूचना विज्ञान की भूमिका

जैव सूचना विज्ञान में नवाचारजैव प्रौद्योगिकी विज्ञान, औमिक्स प्रौद्योगिकियों, प्रणाली जीवविज्ञान मॉडलिंग और बायोमार्कर खोज़ से उच्च थ्रूपुट डेटा के प्रबंधन के लिये नई व्यावसायिक अंतर्दृष्टि उत्पन्न करते हैं. जैव सूचना विज्ञान में नवीनतम घटनाओं की पहचान करने के लिये आवश्यक ज्ञान प्रबंधन समाधानों की समीक्षा की जाती है, उन उपकरणों और प्लेटफार्मों का मूल्यांकन किया जाता है जो दवा के विकास और रणनीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन को बेहतर बना सकते हैं. अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाएं जैविक डेटा की बढ़ती मात्रा के विश्लेषण का समन्वय कर रही हैं, जिसमें मुख्य रूप से जीन और प्रोटीन अनुक्रम शामिल हैं. जैव सूचना विज्ञान ने कंपनियों के लिये अपने आर एंड डी कार्यक्रमों में उत्पादकता बढ़ाने के लिये डेटा प्रबंधन को सक्षम बनाया है ताकि नये औषधि लक्ष्य, नैदानिक बायोमार्कर और बायोमार्कर की दवा प्रभावकारिता तथा विषाक्तता की पहचान की जा सके. एक प्रणाली जीव विज्ञान दृष्टिकोण से जैव सूचना विज्ञान के मार्गों को उजागर करने के लिये संवादात्मक मॉडल में डेटा संयोजित करता है और यौगिकों के ऑफ-टारगेट प्रभावों की खोज़ में सहायता करता है.   

पारंपरिक औषधि खोज़ प्रौद्योगिकियां नवीनतम दवाओं के उत्पादन की अपनी क्षमता की अधिकतम सीमाओं तक पहुंच रही हैं. नतीजतन, फार्मास्युटिकल फर्म और शोधकर्ता तेज़ी से जैव सूचना विज्ञान तकनीकों की ओर रूख कर रहे हैं, जो सदैव तर्कसंगत, लक्षित दवाओं की पहचान और विकास में आनुवंशिक जानकारी का उपयोग करते हैं.

यह अध्ययन, संभावित अवसरों को उजागर करता है और कंपनियों को सबसे प्रभावी व्यवसाय योजना विकसित करने की अनुमति देता है. सुस्थापित, वित्तीय रूप से मज़बूत फर्म अनुसंधान और विकास को गति देने के लिये जैव सूचना विज्ञान सॉफ्टवेयर विकसित करने या क्रय करने के लिये प्रौद्योगिकियों की मांग कर रहे हैं.

डेटा प्रसार में जैव सूचना विज्ञान की भूमिका

अधिकांश फार्मा कंपनियों के सूचना संसाधन वर्तमान में अलग-अलग समूहों में विस्तारित और प्रबंधित किये जाते हैं. इनमें से

कुछ को कॉरपोरेट इंट्रानेट पर अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जायेगा, लेकिन अन्य केवल स्थानीय रूप से सुलभ मशीनों पर ही रहेंगे. इंटरफेस की रेंज विविध होगी, जिसमें कुछ विक्रेताओं या लेखकों द्वारा आपूर्ति किये गये उनके मूल इंटरफेस के साथ और अन्य को एचटीएमएल पेज या सीजीआई रूपों पर आधारित इंटरफेस में शामिल किया जायेगा.

जीनोमिक्स विभिन्न जैव सूचना विज्ञान अनुप्रयोग क्षेत्रों में से सबसे बड़़ा हिस्सा है. यद्यपि इसमें प्रोटियोमिक्स अग्रणी है. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और इंटरनेट में अभूतपूर्व प्रगति ने जैव सूचना विज्ञान उद्योग के विकास को बढ़ावा दिया है. कंप्यूटर एडेड ड्रग डिज़ाइन का उपयोग करके, दवा-डिज़ाइन करने वाली कंपनियां एक नई दवा की खोज़ करने के लिये लागत और समय दोनों में 30 प्रतिशत से अधिक बचत कर सकती हैं. पेटेंट सुरक्षा और मानकीकरण का अभाव जैव सूचना विज्ञान उद्योग के लिये सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

जैव सूचना विज्ञान के प्रमुख वित्तीय कारोबारियों में आईबीएम लाइफ साइंसिस, एसेलिर्स, एफिमीट्रिक्स, एप्लाइड बायोसिस्टम्स गु्रप, कम्पुजेन लिमि, सिफरजेन बायोसिस्टम्स, क्युराजेन कार्पोरेशन, केलेरा जिनोमिक्स ग्रुप, इन्साइट कार्पोरेशन और ट्रिपोस इंक शामिल हैं.

जैव सूचना विज्ञान औषधि तैयार करने में सहायता करता है

जैव सूचना विज्ञान और आनुवंशिकी में नये विकास, जैसे कि फार्माकोजेनेटिक्स (अर्थात बीमारियों, जीन, प्रोटीन और फार्मास्युटिकल्स के बीच संबंध का अध्ययन), शोधकर्ताओं को कुछ बीमारियों के संबंध के साथ-साथ उनकी संभावित दवा प्रतिक्रिया के लिये जल्दी से रोगी की आनुवंशिक प्रवृत्ति की पहचान करने में सक्षम बनाएगा.

प्रोटियोमिक्स का अर्थ प्रोटीन का सामान्य बनाम व्यग्र कोशिकाओं का अलगाव और पहचान करना है. आज, प्रोटियोमिक्स उपकरण का जीन अभिव्यक्ति, संरचनात्मक प्रोटियोमिक्स (स्पेक्ट्रोस्कोपिक या कम्प्यूटेशनल तकनीकों द्वारा बड़ी संख्या में प्रोटीन 3 डी संरचनाओं का निर्धारण), प्रोटीन का प्रोटीन से संपर्क और जैव रासायनिक मार्ग के अध्ययन के साथ प्रोटीन अभिव्यक्ति को जोडऩे के लिये उपयोग किया जाता है. पुराने और नए प्रतिमान के बीच मुख्य अंतर उच्च-थ्रूपुट, समानांतर सोच में है जो अब नई शोधित दवाओं के विकास में लक्षित प्रोटीन की विशाल क्षमता पर लागू होता है. प्रोटिओमिक्स, बायोमार्कर और मेटाबोमिक्स (मेटाबोलाइट्स) के संयोजन ने रोगों के लिये अधिक प्रभावी नैदानिक उपकरण और चिकित्सा के डिजाइन के लिये नए अवसर उत्पन्न किये हैं.

दवा में प्रोटीन के बढ़ते उपयोग के साथ, डिजाइनिंग शोधकर्ताओं को प्रोटीन के नमूनों को तेज़ी से स्क्रीन पर तैयार करने, शोधित करने और ध्यान केंद्रित करने के लिये मज़बूत नए अनुसंधान उपकरण और किट बनाने के लिये मज़बूर कर रहा है. प्रोटियोमिक्स में अवसरों की व्यापक समीक्षा एक शिखर को एन्कैप्सुलेटेड रूझानों में बढ़ते मूल्यों और विकासोन्मुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लियेे रणनीतिक कॉर्पोरेट गतिविधि को बढ़ावा देने के लिये प्रोटियोमिक्स अनुसंधान में तीव्रता लाने के वास्ते प्रोटियोमिक्स और संबद्ध पहलों को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक उपकरणों की खोज के लिये प्रेरित करती है. प्रोटियोमिक्स एक उभरता हुआ विज्ञान है जो उद्योगों को व्यवसाय संचालित अर्थव्यवस्था से अनुसंधान संचालित अर्थव्यवस्था के लिये अग्रसर कर रहा है.

जीव विज्ञान में उन्नति के लिये जैव सूचना विज्ञान महत्वपूर्ण है

जैव सूचना विज्ञान की एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में बढ़ती स्वीकार्यता के लिये केंद्रित व्यावसायिक समर्थन और गतिविधि की आवश्यकता होती है, जो पेटेंट दवाओं के समाधान के लिये नई दवाओं के विकास और खोज़ के आधार पर फर्मों के लिये अपेक्षित है. उद्योग में जैव सूचना विज्ञान की शुरुआत उन कंपनियों ने की थी जिनके पास जीन अनुक्रमण आदि में इस उपकरण की उच्च कोर ताक़त स्थापित करने की दूरदर्शिता थी, जहां आज की दवा फर्मों के क्षमता क्षेत्र से बाहर प्रलेक्षित अनुसंधान के लिये परंपरागत तौर तरीकों में वर्षों का समय लगेगा, जिन्हें अवसरों और विस्तारित गति के साथ प्रमाणित नैदानिक परिणाम के साथ ही प्रक्रिया के लिये बाज़ार की पहचान करने की ज़रूरत है.  

हाल के वर्षों में, नवाचारों ने जहां आईटी और जीवन विज्ञान के साथ अभिसरण किया है, बड़ी मात्रा में डेटा तैयार किया गया है. स्वचालित डीएनए अनुक्रमण और अन्य नवीन पद्धति के विकास ने विभिन्न जीवों के आनुवंशिक शृंगार की खोज करने के लिये आवश्यक लागत और समय को कम कर दिया है. इसके अतिरिक्त, इस तरह की उच्च प्रयोग स्क्रीनिंग और सूक्ष्म परीक्षण जीन और प्रोटीन कार्यों (अर्थात जीनोमिक्स और प्रोटियोमिक्स) के अध्ययन को सक्षम कर रहे हैं. यह विस्तार की जटिलता और जानकारी की विविधता भरी नई चुनौतियों का सामना करती है. उदाहरण के लिये, प्रोटीन और जीन फंक्शन और इंटरैक्शन के अध्ययन से उत्पन्न डेटा को विभिन्न स्वरूपों में और विभिन्न स्रोतों से जानकारी के समेकन की आवश्यकता होती है. इसके अतिरिक्त, डेटा एक मानक या आसानी से उपयोग करने योग्य प्रारूप में नहीं होता है, विशेषकर यदि वे इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध नहीं हैं या वैज्ञानिक साहित्य, पेटेंट और नैदानिक परीक्षणों से पाठ आधारित जानकारी हैं. महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी विभिन्न वैज्ञानिक विषयों जैसे कि रासायनिक विज्ञानों आदि में भी पाई जाती है. जीवन विज्ञान अनुसंधान एवं विकास की भविष्य में सफलता के लिये इस विविध और व्यापक डेटा प्रबंधन और विश्लेषण के लिये शोधकर्ताओं की क्षमता महत्वपूर्ण है.

जैव सूचना विज्ञान क्षमता और बाज़ार वृद्धि

आज के दिन जैव सूचना विज्ञान आर एंड डी, आईटी और अन्य संबद्ध विषयक्षेत्रों में गहराता जा रहा है क्योंकि यह डेटा के विश्लेषण के लिये महत्वपूर्ण अल्गोरिदम, विधियों, साफ्टवेयर आदि का विकास जारी रखता है. जैव सूचना विज्ञान में अगले दशक में तीन आयामी दुनिया में आनुवंशिकी जानकारी के संचरण के लिये महत्वपूर्ण उपकरण विकसित करके अपनी और अन्य प्रोटीन और अणुओं के साथ प्रोटीन की प्रक्रिया के अध्ययन के लिये महत्वपूर्ण औजार विकसित करते हुए बहुत सी संभावनाएं और क्षमताएं हैं. अगले दशक के लिये जैव सूचना विज्ञान पेशेवरों के सामने मुख्य चुनौती इस अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने और इसे बनाये रखने के तरीकों की जटिलता को कम करना है. जैव सूचना विज्ञान का मूल्य वर्तमान प्रौद्योगिकी बाज़ार क्षेत्र में जीनोमिक्स संचालित औषधि खोज परिदृश्य में अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिये तैनात जैविक डेटा और एल्गोरिदम के, जहां उद्योग प्रगति कर रहा है, दिन प्रति दिन विश्लेषण करने में निहित है.

-              जैव सूचना विज्ञान धीरे धीरे लागत प्रभावी डेटा विश्लेषण के आधार से परिपूर्ण हो गया है लेकिन अगला दशक जैव सूचना विज्ञान विश्लेषण कोशिकीय प्रक्रियाओं के प्रणालीगत स्तर के व्यवहार और विश्लेषण को सुविधाजनक एवं तीव्र करने में सहायता प्रदान करेगा ताकि कोशिकीय प्रक्रियाओं को इलाज और बीमारियों को नियंत्रित करने के लिये प्रयोग किया जा सके. हाल ही में, शोधकर्ताओं ने पुन: संयोजित प्रोटीन के उत्पादन के लिये इन तकनीकों का उपयोग करना शुरू किया है.

जैव सूचना विज्ञान जीवन विज्ञान में अनुसंधान और विकास का भविष्य है क्योंकि पेशेवर जैविक मोर्चे पर व्यापक जानकारी के साथ काम करें और जैव सूचना विज्ञान उपकरण कुशलतापूर्वक एकत्र करने, अपना हिस्सा बनाने और जैविक तथा नैदानिक डेटा के महत्व का विश्लेषण करने में मदद करेंगे. जैव सूचना विज्ञान परिदृश्य को अगले दशक के लिये ‘‘उम्र से अधिक कदम’’  के रूप में  दर्शाया गया है. विशेषज्ञ पहलेे ही जैव सूचना विज्ञान को -बेहतर चिकित्सा और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के लिये प्रणाली जीव विज्ञान की समझ के लिये जीव विज्ञान और कम्प्यूटर विज्ञान की जोड़ी वाले एक हाईब्रिड व्यवसाय के तौर पर डब कर चुके हैं.

जैव सूचना विज्ञान-सक्षम प्रोटीन बायोमार्कर की खोज़ सुरक्षित और अधिक प्रभावी दवाओं, लक्षित चिकित्सा और आणविक निदान के विकास को सक्षम करेगी. सिस्टम बायोलॉजी मॉडलिंग अगले पांच वर्षों में 35 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है, जो कि किसी भी जैव सूचना विज्ञान क्षेत्र की उच्चतम वृद्धि है. दवा की खोज़ के सभी चरणों में व्यापक एकीकरण की क्षमता इस विस्तार के लिये एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगी. ज्ञान प्रबंधन वर्तमान में अग्रणी जैव सूचना विज्ञान बाज़ार का हिस्सा है.

अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ा बाज़ार बना हुआ है, लेकिन एशिया-प्रशांत देशों, विशेष रूप से भारत और चीन, सबसे तेज़ी से विकास कर रहे हैं और भविष्य में प्रमुख शक्तियों के रूप में उभरने का अनुमान है. जैव सूचना विज्ञान अवसरों से भरा है. यह क्षेत्र अन्य संबंधित क्षेत्र के लिये भी नये रास्ते खोलने के लिये तैयार हैं. लेकिन जैव सूचना विज्ञान बाज़ार में सबसे बड़ा अवसर दवा खोज़ क्षेत्र में होगा. जैव सूचना विज्ञान उपकरण और साफ्टवेयर क्षेत्र के साथ तेज़ी से विकास के कारण एक नई दवा की खोज में लगने वाली लागत और समय दोनों में कमी होना भी दवा की खोज को एक आकर्षक क्षेत्र का उद्यम बना रहा है.

जैव सूचना विज्ञान का बाज़ार स्थिर है, जिसमें जीनोमिक्स और प्रोटियोमिक्स पर आधारित कई अनुप्रयोगों की खोज़ की गई है, जो जैव सूचना विज्ञान उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने का काम जारी रखे हुए है. सूचना विज्ञान आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली को सक्षम करने के लिये दुनिया भर में अनुसंधान और विकास केंद्रों की एक बड़ी संख्या डेटा, सूचना और ज्ञान के हस्तांतरण के लिये एक सामान्य आधार की मांग कर रही है.

भविष्य की चुनौतियां

भविष्य में कोई भी फार्मास्युटिकल और कंप्यूटिंग फर्मों का अपने अनुसंधान और आईटी क्षमताओं को साथ-साथ लाने का संयोजन देख सकता है. दवा की खोज तेज़ करने के लिये बड़ी फार्मा और बायोटैक फर्मों के आंतरिक क्षमताओं में भारी निवेश किये जाने, अथवा अपनी आवश्यकताएं आउटसोर्सिंग के जरिए पूरी करने की आशा की जाती है. बाज़ार की परिपक्वता के रूप में सहकारी उद्योग की पहल और भी अधिक जैव सूचना विज्ञान की मांग को बढ़ा सकती है. नवाचार कंपनियों के कार्यों और उनके पास मौजूद डॉटाबेस के एकीकरण पर निर्भर करेगा.

जैव सूचना विज्ञान या कम्प्यूटेशनल जीव विज्ञान आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग या जैविक डेटा के प्रबंधन और विश्लेषण के लिये कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग है. यहां कम्प्यूटर का उपयोग जैविक डेटा को इकट्ठा करने, विश्लेषण और विलय करने के लिये किया जाता है. यह एक उभरता हुआ अंत: विषय अनुसंधान क्षेत्र है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिये तेज़ी से उपयोग किया जा रहा है. जैव सूचना विज्ञान का अंतिम लक्ष्य अनुक्रम, संरचना, साहित्य और अन्य जैविक आंकड़ों के द्रव्यमान में छिपी हुई जैविक जानकारी की धरोहर को उजाकर करना और जीवों के मौलिक जीवन विज्ञान में एक स्पष्ट अंतर्दृष्टि प्राप्त करना तथा इस जानकारी का उपयोग मानवजाति का जीवन स्तर बढ़ाने में इस्तेमाल करना है. जैव चिकित्सा अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने के लिये मानव स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी पर जैव सूचना विज्ञान का गहरा प्रभाव पड़ता है.

इसका उपयोग अब आणविक चिकित्सा के क्षेत्रों में किया जा रहा है ताकि बीमारियों को रोकने या ठीक करने के लिये बेहतर और अधिक अनुकूलित दवाओं का उत्पादन करने में मदद मिल सके. इससे अपशिष्ट स्वच्छ बैक्टीरिया की पहचान करने और कृषि में पर्यावरणीय लाभ होता है और इसका उपयोग उच्च उपज वाली और कम रखरखाव खर्च वाली फसलों के उत्पादन के लिये किया जा सकता है.

आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिक से अधिक उपयोग के साथ इस क्षेत्र में रोजग़ार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं. जैव प्रौद्योगिकी, औषधीय और जैव चिकित्सा विज्ञानों में, अनुसंधान संस्थान, अस्पताल और उद्योग आदि सभी क्षेत्रों में रोजग़ार की संभावनाएं हैं. जैव सूचना विज्ञान के दायरे में आने वाले कुछेक रोजग़ार के क्षेत्रों में अनुक्रम एकत्रीकरण, डेटा बेस डिज़ाइन और रख-रखाव, अनुक्रम विश्लेषण, प्रोटियोमिक्स (प्रोटीन का अध्ययन, विशेष रूप से उसकी संरचना, संकार्य), फार्माकोजेनोमिक्स, फार्माकोलॉजी, क्लीनिकल फार्माकोलॉजिस्ट, इन्फार्मेटिक्स डेवलपर, कम्प्यूटेशनल केमिस्ट, बायो एनालिटिक्स और एनालिटिक्स आदि शामिल हैं. जैव सूचना विज्ञान के रोजग़ार क्षेत्र में कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है और इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें मुख्यत: जैव सूचना विज्ञान के शैक्षणिक कार्यक्रमों की संख्या में बढ़ोतरी होना, रोजग़ार चाहने वाले स्नातकों की संख्या में वृद्धि, जैव सूचना विज्ञान से संबंधित रोजग़ारों की वृद्धि दर में लगातार कमी और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की मात्रा में लगभग मंदी की स्थिति होना शामिल है.

(लेखक स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, जयपुर में अनुसंधान अध्येता हैं. ईमेल:Matmanisha@gamil.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)