संपादकीय लेख


Volume-10, 8 - 14 June 2019

भारत में डेयरी शिक्षा :

वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं

वरिन्दर पाल सिंह और

 अनिल कुमार पुनिया

विकासशील देशों में पशुधन क्षेत्र  क्रांति के तौर पर उभर रहा है जहां अगले कुछेक दशकों में दूध और मांस उत्पादन में व्यापक वृद्धि होने की संभावना है. भारत में कृषि क्षेत्र से कुल सकल घरेलू उत्पाद में पशुधन क्षेत्र का योगदान लगभग 26.90त्न है. यह क्षेत्र नियमित आय के अलावा, छोटे और सीमांत ग्रामीण परिवारों को पोषण और सुरक्षा तथा रोजग़ार प्रदान करता है. आय के इस नियमित स्रोत का आय के जोखि़म को कम करने में बहुत बड़ा प्रभाव है क्योंकि फसल क्षेत्र से आय मौसमी होती है. यह किसानों के अधिशेष पारिवारिक श्रम को भी अवशोषित करता है और इस प्रकार वर्ष भर अतिरिक्त आय अर्जित करने में सहायता करता है. इसके अलावा, पशुधन संकट के समय में बेची जाने वाली एक सुरक्षित संपदा होती है. यदि हम पशुधन क्षेत्र के अंदर झांकते हैं, तो डेयरी क्षेत्र कुल आय में लगभग दो तिहाई योगदान देने वाला प्रमुख उद्यम है. किसान घर की खपत और सहायक आमदनी के लिये दूध और दुग्ध उत्पादों के उत्पादन करने के लिये डेयरी फार्मिंग से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं.

भारतीय डेयरी क्षेत्र अभाव की स्थिति से धन प्रदान करने वाले उद्योग के तौर पर उभरा है. आज़ादी से पहले के युग में दूध की कमी थी और आयात पर निर्भरता थी. आप्रेशन फ्लड और डेयरी उद्योग की डी-लाइसेंसिंग के विभिन्न चरणों के बीच डेयरी क्षेत्र के विकास के कारण भारत दूध उत्पादन करने वाले शीर्ष देश के रूप में उभरा है. वर्ष 2017-18 के दौरान, राष्ट्रीय दूध उत्पादन 176.3 मिलियन टन दजऱ् किया गया (विश्व दूध उत्पादन का 20.12 प्रतिशत अर्थात 876 मिलियन टन) जो कि अमरीका (98.6 मिलियन टन) और चीन (39 मिलियन टन) से बहुत आगे है और इसमें 1980-81 के दौरान 31.6 मिलियन टन से यह वृद्धि हुई है. इसके अलावा, 1980-81 के दौरान 128 ग्रा./व्यक्ति/दिन से 2017-18 के दौरान बढक़र 375 ग्राम/ व्यक्ति/दिन हो गई और इसकी सारणी में पंजाब राज्य 1120 ग्राम के साथ शीर्ष पर है.

दूध बहुत तेज़ी से खऱाब होने वाली खाद्य वस्तु है. पशुओं से दूध प्राप्त करने के बाद बैक्टीरिया की संख्या तेज़ी से बढ़ती है. इसलिये, बैक्टीरिया के विकास को नियंत्रण में रखने के लिये इसे तुरंत ठंडा करने की आवश्यकता होती है. अधिशेष कच्चे दूध का विपणन बिना किसी देरी के किया जाना चाहिये ताकि दूध की गुणवत्ता बनी रहे. वैकल्पिक रूप से, कच्चे दूध को अधिक दिनों तक प्रयोग में बनाए रखने के वास्ते विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है. दूध उत्पादों में कच्चे दूध का प्रसंस्करण कम से कम 20-25 प्रतिशत कच्चे दूध के मूल्य को बढ़ाता है जो देश में अतिरिक्त आय और रोजग़ार के अवसर पैदा करने में लंबा सफर तय कर सकता है.

भारतीय डेयरी उद्योग में दो क्षेत्र शामिल हैं, पहला संगठित क्षेत्र, जिसमें सहकारी संस्थाएं, निजी और सरकारी दूध संयंत्र शामिल होते हैं तथा दूसरा असंगठित क्षेत्र, जिसमें दूध विक्रेता, हलवाई, क्रीम तैयार करने वाले आदि शामिल होते हैं. बहुत आश्चर्य की बात है कि संगठित क्षेत्र अभी भी भारत में एक चौथाई से भी कम दुग्ध उत्पादन का प्रसंस्करण कर रहा है जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत तक है. व्यापक संगठित प्रसंस्करण क्षेत्र वाले राज्य हैं-गुजरात (49.1त्न), महाराष्ट्र (40.5त्न), कर्नाटक (39.5त्न) और तमिलनाडु (30.6त्न). पंजाब राज्य में सबसे अधिक दूध उत्पादकता और सबसे अधिक प्रति व्यक्ति दूध उपलब्ध है और संगठित दूध प्रसंस्करण में 10.1 प्रतिशत के साथ 10वां रैंक है. बढ़ते शहरीकरण, आय के स्तर में वृद्धि, खानपान की आदतों में बदलाव और स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि से गुणवत्ता वाले दूध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए, दूध के संगठित प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाने की आवश्यकता है.

डेयरी उद्योग के विकास का भविष्य दूध के प्रसंस्करण को उचित महत्व देकर और डेयरी तथा खाद्य उद्योग के लिये सही प्रकार के मानव संसाधन का विकास करने पर ही संभव है. इस उद्देश्य के लिये विभिन्न शिक्षा स्तरों वाले व्यक्ति अर्थात डिप्लोमा, डिग्री, स्नातकोत्तर और डॉक्ट्रेट आदि अपेक्षित हैं. अत: अनेक संस्थान डेयरी में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. परंतु, भारत में डेयरी शिक्षा के महत्व के संबंध में लोगों में जागरूकता की कमी है. डेयरी विज्ञान के क्षेत्र में स्नातक पांच विषयों का संयोजन है जैसे कि डेयरी प्रौद्योगिकी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी सूक्ष्मजीवविज्ञान, डेयरी रसायनविज्ञान, डेयरी अर्थशास्त्र और बिजऩेस मैनेजमेंट. डेयरी प्रौद्योगिकी शिक्षा का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं को विभिन्न पहलुओं में अल्पकालिक प्रशिक्षण प्रदान करके शिक्षित करते हुए डेयरी उद्योग के लिये प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराना है. डेयरी प्रौद्योगिकी शिक्षा में सेमेस्टर प्रणाली है, जहां छात्रों को सात सेमेस्टरों के लिये विभिन्न संबद्ध पाठ्यक्रमों को पढ़ाया जाता है और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान संयंत्र में प्रशिक्षणों के साथ-साथ एक संपूर्ण सेमेस्टर के लिये प्रशिक्षण हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिये संगत उद्योग में भेजा जाता है.

विभिन्न राज्य स्तरीय कृषि अथवा पशु विज्ञान विश्वविद्यालय साथ में कुछ राष्ट्रीय स्तर के संस्थान डेयरी प्रौद्योगिकी में डिग्री स्तर के पाठ्यक्रम अर्थात बी.टैक (डेयरी प्रौद्योगिकी) संचालित कर रहे हैं. डेयरी में शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों की संख्या 1990 में 10 से बढक़र 2019 में 26 हो गई जिनमें कई निजी संस्थान शामिल हैं. डेयरी प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिये पात्रता मानदंड भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित के साथ वरिष्ठ माध्यमिक (10+2) (सामान्य श्रेणी के लिये कुल मिलाकर 50 प्रतिशत अंक और अजा/अजजा श्रेणी के लिये 40 प्रतिशत). ज्यादातर राज्यों में प्रवेश राज्य कोटे के अधीन 85 प्रतिशत सीटों को भरने के लिये अन्य कृषि और पशु विज्ञान पाठ्यक्रमों के लिये संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर प्रदान किया जाता है. उम्मीदवार को दाखिला परीक्षा में मैरिट के आधार पर प्रदान किया जाता है. इन प्रवेश परीक्षाओं के लिये आवेदन-पत्र सामान्यत: हर साल अप्रैल माह में उपलब्ध होते हैं. सीटों का आरक्षण राज्य/केंद्रीय सरकार के नियमों और विनियमों के अनुरूप होता है. उपर्युक्त के अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान कोटा के अधीन शेष 15 प्रतिशत सीटें प्रवेश हेतु अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षाके जरिए भरी जाती हैं. यह परीक्षा नेशनल टैस्टिंग एजेंसीद्वारा संचालित की जाती हैं. यह एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है जिसे वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है.

भविष्य की संभावनाएं: 2021-22 तक राष्ट्रीय दूध उत्पादन का लक्ष्य 254.5 मिलियन टन और 50 प्रतिशत दूध उत्पादन को वर्तमान 25 प्रतिशत के मुकाबले खऱीद हेतु संगठित क्षेत्र के अधीन लाना है. इन लक्ष्यों को हासिल करने और दूध के रख-रखाव के स्तरों में वृद्धि करने के लिये ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना आवश्यक है जो इस अत्यधिक तेज़ी से खऱाब होने वाले उत्पादन की प्रकृति को समझ सकते हों. इस परिदृश्य में, डेयरी प्रौद्योगिकी शिक्षा में अनेक संभावनाएं हैं. बी.टेक (डेयरी प्रौद्योगिकी) पूरी करने के बाद उत्तीर्ण व्यक्ति विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि दूध प्रापण, दूध प्रसंस्करण, दूध गुणवत्ता जांच आदि में निजी और सहकारी दुग्ध संयंत्रों में रोजग़ार प्राप्त कर सकते हैं. वे फंक्शनल फूड्स और इन्फेंट फूड्स से संबंधित खाद्य उद्योगों तथा डेयरी उपकरणों और मशीनरी से संबंधित उद्योगों में भी रोजग़ार प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा डेयरी विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में उच्चतर शिक्षा ग्रहण करने पर उम्मीदवार कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार संवर्ग में रोजग़ार प्राप्त कर सकते हैं. अनेक डेयरी स्नातक विदेशोंं में भी डेयरी और खाद्य विज्ञान में उच्चतर अध्ययन में शामिल होते हैं. मार्ग यहीं समाप्त नहीं हो जाता है, आगे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कि सिविल सेवाएं, बैंकिंग आदि में अन्य स्नातकों की तरह द्वार खुले हैं.

भारत में डेयरी प्रौद्योगिकी महाविद्यालयों की राज्य वार सूची

महाविद्यालय/विश्वविद्यालय                                                                                                                             राज्य

डेयरी प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, तिरुपति, श्री वेंकटेश्वर पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय-                     आंध्र प्रदेश

एसवीवीयू, तिरुपति-517502               

संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान, जगदेव पथ, पटना, बिहार पशु विज्ञान                                    बिहार

विश्वविद्यालय-बीएएसयू, बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय परिसर, पटना- 800014         

सेठ एम.सी कालेज ऑफ डेयरी साइंस, आणंद कृषि विश्वविद्यालय (एएयू),                                          गुजरात

आणंद- 388001  

डेयरी विज्ञान महाविद्यालय, अमरेली, कामधेनू विश्वविद्यालय, गांधीनगर-382010                   गुजरात

पारूल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पारूल विश्वविद्यालय, लिमडा, वाघोडिया,                                        गुजरात

वडोदरा-391760

श्री जी एन पटेल डेयरी विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, सरदार कृषि                       गुजरात

नगर दांतिवाडा कृषि विश्वविद्यालय, बनासकांठा-385506            

महाविद्यालय/विश्वविद्यालय      राज्य

डेयरी विज्ञान महाविद्यालय, भा.कृ.अ.प.-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान-                                      हरियाणा

एनडीआरआई, करनाल-132001          

कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी, लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ                            हरियाणा

वेटरिनरी एंड एनिमल सांइसिस-एलयूवीएएस, हिसार-125001     

डेयरी विज्ञान महाविद्यालय, हेब्बल, बेंगलुरू, कर्नाटक वेटरिनरी, पशु और मत्स्य विज्ञान                   कर्नाटक

विश्वविद्यालय, नंदीनगर, बीदर- 585401        

डेयरी विज्ञान महाविद्यालय, महागांव, कालाबुरगी, कर्नाटक पशुचिकित्सा, पशु और मत्स्य                   कर्नाटक

विज्ञान विश्वविद्यालय, नंदीनगर, बीदर- 585401          

डेयरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, मन्नुथी, केरल पशु चिकित्सा और पशु                     केरल

विज्ञान विश्वविद्यालय-केवीएएसयू-पूकोडे, वायनाड, तिरुअनंतपुरम-673576               

डेयरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, पूकोडे, केरल पशु चिकित्सा और पशु                       केरल

विज्ञान विश्वविद्यालय-केवीएएसयू-पूकोडे, वायनाड, तिरुअनंतपुरम-673576               

डेयरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, तिरुअनंतपुरम, केरल पशुचिकित्सा और                     केरल

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय-केवीएएसयू-पुकोडे, वायनाड, तिरुअनंतपुरम-673576      

डेयरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, कोलहालमेडु, केरल पशुचिकित्सा और                       केरल

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय-केवीएएसयू-पुकोडे, वायनाड, तिरुअनंतपुरम-673576      

कॉलेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, वारूड, पुसाड, यवतमाल, महाराष्ट्र पशु और मत्स्य                       महाराष्ट्र

विज्ञान विश्वविद्यालय, तेलनखेड़ी, नागपुर- 440001     

कॉलेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, उदगिर, लातुर, महाराष्ट्र पशु और मत्स्य विज्ञान                          महाराष्ट्र

विश्वविद्यालय, तेलनखेड़ी, नागपुर-440001     

डेयरी विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, गुरू अंगद देव पशुचिकित्सा और                                 पंजाब

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय-जीएडीवीएएसयू, लुधियाना-141004  

डेयरी और खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि और                                    राजस्थान

प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-एमपीयूएटी, उदयपुर-313001             

खाद्य और डेयरी प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, अलमाटी-कोडुवल्ली, चेन्नै -600052,                 तमिलनाडु

तमिलनाडु पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, माधावरम मिल्क कालोनी,

चेन्नै- 600051     

वार्नर कालेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, साम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ                                        उत्तर प्रदेश

एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसिस-एसएचयूएटीएस, इलाहाबाद- 211007               

डेयरी प्रौद्योगिकी संकाय मोहनपुर, जिला नाडिया, पश्चिम बंगाल पशु और मत्स्य                        पश्चिम बंगाल

विज्ञान विश्वविद्यालय, 68, के बी सरनी, बेलगाचिया, कोलकाता-700037   

ऊपर वर्णित संस्थानों के अलावा, डेयरी प्रौद्योगिकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये कई अन्य निजी संस्थान आगे आ रहे हैं इनके नाम हैं- देशभगत यूनिवर्सिटी, मंडी गोबिंदगढ, आरआईएमटी यूनिवर्सिटी, मंडी गोबिंदगढ, महर्षि अरविंद यूनिवर्सिटी, जयपुर, पेसिफिक यूनिवर्सिटी, उदयपुर, नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ, सोलापुर आदि.

निष्कर्ष के तौर पर, यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि डेयरी शिक्षा में देश और विदेश में उच्चतर अध्ययन के लिये विकल्प के साथ-साथ रोजग़ार के भरपूर अवसर उपलब्ध हैं. डेयरी स्नातक दुग्ध प्रसंस्करण में अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू करते हुए उद्यमियों के तौर पर काम कर सकते हैं और स्वरोज़गार के साथ-साथ अन्य कुशल और अकुशल लोगों के लिये रोजग़ार के अवसर पैदा कर सकते हैं, इस प्रकार रोजग़ार ढूंढने वाला न बनकर रोजग़ार सृजक बनें. परंतु वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के पश्चात इस विषयक्षेत्र के बारे में प्रवेश चाहने वाले लोगों को बहुत कम जानकारी है. इस चरण में, माता-पिता और छात्रों के समक्ष एक प्रमुख सवाल उत्पन्न होता है कि वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के बाद कौन से विषयक्षेत्र को चुनें? ऐसे में बहुत से विकल्प होने पर किसी एक के बारे में फैसला करना आसान नहीं होता है. उपर्युक्त पृष्ठभूमि के साथ, हमें आशा है कि डेयरी शिक्षा निश्चित तौर पर उनके विकल्पों की सूची में प्रवेश करेगी और वे इस विषय क्षेत्र में प्रवेश पाकर अपने भाग्य को आजमाने की कोशिश के तहत योजना बना सकते हैं.

लेखक विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, गुरु अंगद देव पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना (पंजाब), स्थित संकाय सदस्य हैं. ई-मेल: akpuniya@gmail.com

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)