संपादकीय लेख


ताज़ा अंक-17, 27 जुलाई - 2 अगस्त 2019

डिजिटल स्वास्थ्य सेवा

अंतिम छोर तक पहुंचने की अप्रयुक्त संभावनाएं

डॉ. जतिंदर सिंह

भारतीय स्वास्थ्य सेवा राजस्व और रोज़गार के लिहाज से सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है. देश का स्वास्थ्य सेवा बाजार 100 अरब अमरीकी डॉलर का है. इसके 22 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर के साथ 2020 तक 280 अरब अमरीकी डॉलर का हो जाने की संभावना है. स्वास्थ्य सेवा उद्योग में अस्पताल, चिकित्सा उपकरण, मेडिकल एप्लीकेशन, क्लिनिकल ट्रायल, स्वास्थ्य बीमा और टेलीमेडिसिन शामिल हैं. भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में निजी और सार्वजनिक- दोनों ही क्षेत्र आते हैं. सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र तथा शहरों में इक्का-दुक्का द्वितीय और तृतीय स्तर के उपचार संस्थान शामिल हैं. निजी क्षेत्र का ज्यादा ध्यान महानगरों तथा पहले और दूसरे दर्जे के शहरों पर केन्द्रित है. यह ज्यादातर द्वितीय और तृतीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराता है. स्वास्थ्य सेवा में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. स्वास्थ्य सेवा पर होने वाले खर्च का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र का है. व्यापक दायरे तथा सरकार और निजी क्षेत्र के बढ़ते निवेश की बदौलत स्वास्थ्य सेवा उद्योग में वृद्धि हो रही है. आय के स्तर में वृद्धि, स्वास्थ्य के बारे में बढ़ती जागरूकता, जीवनशैली से जुड़े रोगों में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य बीमा के प्रसार ने इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया है. लेकिन भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में खास तौर से ग्रामीण क्षेत्रों की मांग को पूरा करने के लिये पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली धन की तंगी का सामना कर रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में उसका प्रसार पर्याप्त नहीं है तथा अस्पताल और क्लिनिक मरीजों से भरे पड़े रहते हैं. इससे आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन पैदा होता है. देश में सुस्त जीवनशैली और कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध भोजन का प्रचलन बढ़ा है. इसके साथ ही उम्र और जीवनशैली से संबंधित स्थायी रोगों के मरीजों की तादाद में भी इजाफा हो रहा है. भारत को विश्व में मधुमेह की राजधानी के तौर पर जाना जाता है. हमारा देश विश्व के उन देशों में शामिल है जहां मधुमेह के सबसे ज्यादा मरीज हैं.

भारत में स्पेशिएलिटी, सुपर स्पेशिएलिटी तथा तृतीय स्तर की स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने वाले अस्पतालों की मांग काफी अधिक है. मौसमी बीमारियों के प्रकोप के दौरान अस्पतालों में बिस्तरों की जरूरत और उपलब्धता में काफी बड़ा अंतर रहता है. सस्ते श्रम की उपलब्धता के कारण वैश्विक स्वास्थ्य सेवा संगठनों ने भारत में अपने सहयोगी संस्थान खोले हैं. स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में विशाल संभावनाओं के बावजूद इसका विकास धीमा रहा है. किसी भी नवाचार को व्यापक परीक्षण और नियामक मंजूरियों की जरुरत होती है. भारतीय चिकित्सा परिषद (आईएमसी) के आचार संहिता नियम, 2002 के प्रावधानों की वजह से स्वास्थ्य सेवा एग्रीगेटर खुले बाजार में अपनी पहुंच नहीं बढ़ा पा रहे. धन की व्यवस्था की चुनौतियां तथा उद्भवन और नियमन का प्रतिकूल परिवेश उनके विकास को रोक रहा है. डिजिटल पहलकदमियां स्वास्थ्य सेवा को वहां तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं जहां उसकी पहुंच फिलहाल नहीं है.

प्रभावशाली स्वास्थ्य सेवा

प्रौद्योगिकी ने आपूर्ति की गुणवत्ता तथा उस पर लगने वाले खर्च और समय को घटा कर स्वास्थ्य सेवा में क्रांति ला दी है. अद्र्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी के कारण सीमित स्वास्थ्य सेवा सुविधाएं ही मिल पाती हैं. टेलीमेडिसिन इस समस्या का प्रभावशाली समाधान है. इसके जरिये इन क्षेत्रों में व्यापक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकती हैं. लिहाजा, सूचना टेलीमेडिसिन का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है. अनेक बड़े भारतीय अस्पतालों ने टेलीमेडिसिन सेवाएं शुरू की हैं तथा सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच भागीदारी (पीपीपी) में प्रवेश किया है. हमारे देश में मौजूदा समय में टेलीमेडिसिन सेवाओं का मूल्य 75 लाख अमरीकी डॉलर है. इसके सालाना 20 प्रतिशत की चक्रवृद्धि विकास दर से बढऩे की संभावना है.

विश्व स्तरीय अस्पतालों और कुशल चिकित्साकर्मियों के साथ भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का केन्द्र बनने की ओर बढ़ रहा है. यह चिकित्सा पर्यटन का पसंदीदा केन्द्र बन चुका है. प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में वृद्धि के साथ ही स्टार्टअप से चिकित्सा पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा. विदेशी मरीजों को मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल सेवाओं और इलाज के खर्च के बारे में सूचना देने में स्टार्टअप प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की भरमार की वजह से भारत प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में है. पश्चिमी और अन्य एशियाई देशों की तुलना में भारत में चिकित्सा पर होने वाला खर्च भी कम है. अमरीका और यूरोप की तुलना में हमारे देश में सर्जरी जैसी स्वास्थ्य सेवाओं पर 10 प्रतिशत ही खर्च होता है. इससे मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों के लिये चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में व्यापक अवसर पैदा हुए हैं. फिलहाल भारत में सालाना डेढ़ लाख चिकित्सा पर्यटक आते हैं जिनकी संख्या में प्रति वर्ष 15 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी. घरेलू स्रोतों के साथ ही कम खर्च और चिकित्सा नवाचार विदेशी कंपनियों में भी निवेश को आकर्षित कर रहा है.

ब्लॉकचेन

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य सेवा संगठनों में अंतर संचालकता का इस्तेमाल कर अनेक स्थलों पर विकेन्द्रित रिकॉर्ड प्रणालियां तैयार करती है. इस रिकॉर्ड को स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में संबंधित हितधारकों के साथ साझा किया जा सकता है. मानकीकृत डाटा के विशेष सेट की जरूरत पडऩे की स्थिति में तुरंत पहुंच के लिये ब्लॉकचेन पर सीधे भंडारण किया जा सकता है. चिकित्सा, टीकाकरण, प्रक्रियाओं और प्रदान की गयी सेवाओं जैसे मरीज के बारे में विवरणों तथा अन्य प्राथमिक डाटा को ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के जरिये हासिल किया जा सकता है. ब्लॉकचेन डाटा के आदान-प्रदान और मूल्य आधारित सेवा के जरिये स्वास्थ्य सेवा उद्योग की समस्याओं का समाधान कर सकता है. इसकी विशाल संभावना है. ब्लॉकचेन स्टोर किये गये हर दस्तावेज के लिये अस्तित्व का प्रमाण प्रदान करता है. समुचित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिये मरीज के स्वास्थ्य के बारे में सूचना, सेहत का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और चिकित्सा बीमा दावों का लेखा-जोखा महत्वपूर्ण है. सूचनाओं को दर्ज और कूटबद्ध करने वाली ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकियां इस संबंध में उपयोगी होती हैं. ब्लॉकचेन के साथ सिर्फ  एक रिकॉर्ड होने से दोहराव और डाटा में हेर-फेर की आशंका कम रहती है. किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप या कोई प्रशासक नहीं होने के कारण खर्चों में भी कमी आती है. ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकियों का दवा आपूर्ति शृंखला में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें समूची आपूर्ति शृंखला में हर दवा का पता लगाया जा सकता है जिससे नकली दवाओं की आशंका पूरी तरह खत्म हो जायेगी. डाटा नये जमाने का ईंधन है. बेहतर चिकित्साविधानों की खोज तथा क्लिनिकल अनुसंधान और ट्रायल के लिये  मूल्यवान डाटा संरचनाएं बनायी जा सकती हैं. एक अनुमतिप्राप्त ब्लॉकचेन विभिन्न अनुसंधान संगठनों के डाटा और अध्ययनों की तुलना कर सकता है जो हर अनुसंधानकर्ता के लिये उपलब्ध होगी. इससे डाटा के मिलान की प्रक्रिया की जरूरत नहीं रहेगी और अनुसंधान का एक से दूसरे छोर तक संबंध स्थापित किया जा सकेगा.

स्वास्थ्य सेवा स्टार्टअप

डॉक्टरों, प्रयोगशाला सेवाओं, रोग प्रबंधन, दवा आपूर्ति इत्यादि से मरीज के संपर्क के लिहाज से देखें तो भारत में स्वास्थ्य सेवाएं असंगठित हैं. मौजूदा समय में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अनेक स्टार्टअप आये हैं. इनमें से ज्यादातर ने मरीजों और डॉक्टरों के लिये प्लेटफॉर्म तैयार किया है. भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में पहुंच और नवाचार के लिये विशाल संभावनाएं हैं. हमारी स्वास्थ्य सेवाओं का झुकाव आम तौर पर शहरी क्षेत्रों की ओर है. देश में डॉक्टरों की कमी है. हमारे पास प्रति 1000 व्यक्ति सिर्फ 0.6 डॉक्टर हैं. कई चिकित्सा विधाओं के विशेषज्ञ नहीं मिलते. भारत की 70 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है जहां इनकी सबसे ज्यादा मांग है. स्टार्टअप नवाचार और प्रौद्योगिकी के जरिये किफायती और सुलभ समाधान मुहैया कराते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति ला सकते हैं. अब फिटनेस, स्वास्थ्य निगरानी, चिकित्सा उपकरण आपूर्ति, अस्पताल प्रबंधन प्रणाली, दवा सप्लाई और घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रों में भी स्टार्टअप विकसित हो रहे हैं. अनेक स्टार्टअप अपने उपभोक्ताओं को उनकी निजी जरूरत के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं. मूल्य और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं. कई स्टार्टअप बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिये डाटा संकलन में सक्षम परिधेयों, ओआईटी और मोबाइल उपकरणों के जरिये समाधान मुहैया करा रहे हैं. डिजिटल प्रौद्योगिकियों में विकास के साथ ही खून में ग्लूकोज के स्तर, रक्तचाप और हृदय गति जैसे मरीज के स्वास्थ्य के मानकों का एक क्लिक मात्र से पता लगाया जा सकता है. उपभोक्ताओं में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरुकता बढऩे के साथ ही बचाव स्वास्थ्य सेवा का प्रसार भी बढ़ा है. बड़ी संख्या में स्टार्टअप बचाव स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं. ज्यादा-से-ज्यादा लोग प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों के इस्तेमाल से बचाव स्वास्थ्य सेवा को अपना रहे हैं. अनेक स्टार्टअप उपभोक्ताओं, डॉक्टरों और अस्पतालों को नैदानिक प्रयोगशालाओं की शृंखला से जोडऩे के साथ ही डाटा, संचार और भुगतान को शृंखलाबद्ध कर एक केन्द्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं.

देश को अगले पांच से छह वर्षों में अस्पतालों में छह लाख से सात लाख तक अतिरिक्त बिस्तरों की जरुरत होगी. लिहाजा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 25 से 30 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश के अवसर हैं. पूंजी की इस मांग के कारण स्वास्थ्य सेवा उद्योग में लेन-देन में जबर्दस्त वृद्धि देखने को मिलेगी. इस माहौल में स्टार्टअप अभिगम्यता और सामथ्र्य के लिये नवाचारी समाधान मुहैया करा  कर गेमचेंजर की भूमिका निभाने जा रहे हैं. पिछले कुछ अरसे में भारत स्टार्टअप के केन्द्र के रूप में उभरा है. विभिन्न क्षेत्रों में अनेक उद्यमी नयी प्रौद्योगिकियों को लेकर आये हैं. स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति के मॉडलों में नवाचार और नयी पहल तथा प्रौद्योगिकी आधारित ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं और नैदानिकी के सहारे स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं. भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा स्टार्टअप आधार है. स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यवसाय से उपभोक्ता (बी2सी) स्टार्टअप लगातार विकसित हो रहे हैं.

उच्च नेट वर्थ वाले व्यक्तियों (एचएनआई), बीज कोष, इनक्यूबेटर और अन्य निजी इक्विटी कोषों की बढ़ती संख्या के साथ ही स्वास्थ्य सेवा स्टार्टअप विकास की राह पर हैं. वे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिये वरदान साबित होंगे. कई इनक्यूबेटर प्रैक्टिस प्रबंधन, औषधि खोज और चिकित्सा प्रौद्योगिकी उपकरण जैसी समस्याओं को हल करने वाले स्टार्टअप को सहयोग दे रहे हैं. उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की कीमत में भी इजाफा हो रहा है. ऐसे परिवेश में प्रौद्योगिकीय रुझान वाले नौजवान उद्यमियों के साथ भारत किफायती स्वास्थ्य सेवा नवाचारों में लगे स्टार्टअप के केन्द्र के तौर पर उभरा है. स्टार्टअप पूंजी निवेश और संचालन खर्च को घटाने के लिये पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यक्तियों के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं.

भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचारों के प्रति रुझान बढ़ रहा है. लेकिन भारत की विशाल और विविधतापूर्ण आबादी के स्वास्थ्य सेवा संबंधी मसलों के समाधान के लिये अनेक अन्य पहलकदमियों की दरकार है. इस सिलसिले में एक ऐसी एकीकृत रणनीति अपनाने की जरूरत है जिससे नवाचारी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिये संवहनीय नवाचार और स्टार्टअप स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आयें और फल-फूल सकें. आखिरी छोर पर खड़े ग्राहक को सेवा देने के लिये यही एक समाधान है.

(डॉ. जतिंदर सिंह पीएच.डी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नयी दिल्ली में निदेशक हैं. ईमेल:jatinder@phdcci.in)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)