संपादकीय लेख


volume-18, 03-09 August 2019

भारत के निर्यात की उत्पाद और बाज़ार विविधता

डॉ. एस.पी. शर्मा और सुश्री आशिमा दुआ

हाल के वर्षों में भारत के निर्यात में मात्रा, संरचना और दिशा के संदर्भ में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं. बाज़ार में लचीलापन और गतिशीलता के समर्थन से, वित्त वर्ष 2017-18 और वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान निर्यात में लगातार 9-1० प्रतिशत की वृद्धि देखी गई. विशेष रूप से, पिछले कुछ वर्षों में, भारत के निर्यातों के उत्पाद और बाज़ार विविधीकरण में काफी वृद्धि हुई है जिससे मात्रा और वृद्धि के संदर्भ में नये मार्ग खुले हैं. इस लेख में नए बाज़ारों और नये उत्पादों में विविधता लाने के लिये पिछले कुछ वर्षों के दौरान किये गये विभिन्न उपायों के परिणामस्वरूप भारत से निर्यात की दिशा और संरचना में परिवर्तन का आकलन और विश्लेषण करने पर फ़ोकस किया गया है.

भारत की अग्रणी निर्यात बॉस्केट

निर्यात विनियमित विकास की रणनीति के तहत, एक अर्थव्यवस्था द्वारा निर्यात उत्पाद विविधीकरण पारंपरिक से गैर-पारंपरिक निर्यात उत्पादों के लिये देश की निर्यात बॉस्केट की संरचना में परिवर्तन इसकी एक विशेषता है. एक उन्नत मूल्य संवर्धन के माध्यम से निर्यात की संरचना के विविधीकरण के लिये एक व्यापक आधार विस्तारित वृद्धि अवसरों के साथ निर्यात आय में स्थिरता के तौर पर कार्य करती है. 

वर्ष 2010-11 और 2018-19 के लिये भारत से निर्यात के शीर्ष 10 उत्पादों की तुलना से पता चलता है कि भारत की सघनता 62.7 प्रतिशत से घटकर 60.6 प्रतिशत हो गई है. इससे यह इंगित होता है कि भारत से अन्य 10 शीर्ष उत्पादों के अलावा दूसरे उत्पादों की मात्रा में वृद्धि तथा निर्यात बॉस्केट में अधिक उत्पादों के शामिल होने के साथ भारत की निर्यात बॉस्केट में विविधीकरण दिखाई देता है. इससे यह पता चलता है कि भारत की पारंपरिक निर्यात बॉस्केट पर निर्भरता में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसकी घरेलू मूल्य शृंखलाओं का ऐसा विस्तार घरेलू मोर्चे पर मज़बूत विनिर्माण क्षेत्र के साथ-साथ भारतीय निर्यातकों द्वारा वर्षों से अपनाई गई विविधता की रणनीति की ओर इशारा करता है.

यह देखा जा सकता है कि इन वर्षों में, परिधान और वस्त्रों से संबंधित वस्तुएं और अनाजों से संबंधित उत्पाद, वर्ष 2018-19 में प्रत्येक में 2.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ भारत से निर्यात के नये प्रमुख उत्पाद बन गये हैं. इन वस्तुओं ने वर्ष 2010-11 में महत्वपूर्ण रूप से अग्रणी स्थान हासिल नहीं किया. यद्यपि, कपास के मामले में, जो 2010-11 में भारत के लिये 9वें प्रमुख निर्यात उपाद के रूप में थी, 2018-19 में इस क्षेत्र में देश ने प्रमुखता को खो दिया. 

इन वर्षों के दौरान भारत की अग्रणी निर्यात बॉस्केट में तीन वस्तुओं की प्रतिशत हिस्सेदारी में गिरावट आई है जिनमें मोती, कीमती या अर्द्धनिर्मित पत्थर, ईंधन और आसवन के उत्पाद तथा इलेक्ट्रिकल मशीनरी तथा उपकरण और इनके हिस्से पुर्जे शामिल हैं.

मोती और कीमती पत्थरों और उनके आसवन के खनिज ईंधन उत्पाद 2010-11 और 2018-19 में दोनों वर्षों में निर्यात के दो शीर्ष मद बन रहे, हालांकि इन वर्षों में उनकी संबंधित हिस्सेदारी 17.5 प्रतिशत से गिरकर 12.3 प्रतिशत हो गई है, जबकि मोती और कीमती पत्थरों तथा खनिज ईंधन और उनके आसवन के उत्पादों के मामले में यह 17 प्रतिशत से गिरकर 14.5 प्रतिशत हो गई. निर्यात बॉस्केट में इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों तथा इनके हिस्से पुर्जों की भागीदारी का हिस्सा 4.1 प्रतिशत से घटकर 3.9 प्रतिशत हो गया.

परमाणु रिएक्टरों, बॉयलर, मशीनरी और यांत्रिक उपकरणों तथा इनके हिस्से पुर्जों की उत्पाद श्रेणी के लिये निर्यात में हिस्सेदारी वर्ष 2010-11 में 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 2018-19 में 6.4 प्रतिशत हो गई है. इसके अलावा वर्ष 2010-11 के लिये, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी, भारतीय निर्यात बास्केट में छठा सबसे बड़ा हिस्सा था लेकिन 2018-19 में यह भारत से निर्यात का तीसरी प्रमुख मद बन गई है.

इसी तरह, अन्य उत्पादों में, जिनमें भारत के शीर्ष निर्यात बॉस्केट में अपनी संबद्ध हिस्सेदारी में वृद्धि देखने को मिली है, उनमें रेलवे या ट्रामवे रोलिंग स्टॉक के अलावा, वाहन और इनके हिस्से पुर्जे, जैविक रसायन, औषधीय उत्पाद और आयरन एवं स्टील शामिल हैं. रेलवे के अलावा अन्य वाहनों की प्रतिशत हिस्सेदारी में 3.7

सारणी 1: भारत से निर्यात किए गए शीर्ष 10 उत्पाद

क्र.सं.

वस्तु (2010-11)

2010-11 (अरब अमेरिकी डॉलर)

% हिस्सेदारी (2010-2011)

वस्तु (2018-19)

2018-19 (अरब अमेरिकी डॉलर)

% हिस्सेदारी (2018-2019)

1

प्राकृतिक या कृत्रिम मोती, कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर

43.68

17.5

खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनके आसवन के उत्पाद ; बिटुमिनस पदार्थ; खनिज मोम

47.89

14.5

2

खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनके आसवन के उत्पाद ; बिटुमिनस पदार्थ; खनिज मोम

42.74

17.1

प्राकृतिक या कृत्रिम मोती, कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर

40.45

12.3

3

विविध वस्तुएं

11.82

4.7

न्यूक्लियर रिएक्टर्स, बायलर्स, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण तथा उनके हिस्से पुर्जे

20.97

6.4

4

इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरण तथा उनके हिस्से पुर्जे, टेलीविजन इमेज और साउंड रिकार्डर्स

तथा पुन:उत्पादक और हिस्से पुर्जे 

10.14

4.1

जैविक रसायन

18.24

5.5

5

रेलवे या ट्रामवे रोलिंग स्टॉक के अलावा,  वाहन और इनके हिस्से पुर्जे 

9.32

3.7

रेलवे या ट्रामवे रोलिंग स्टॉक के अलावा,  वाहन और इनके हिस्से पुर्जे 

18.10

5.5

6

न्यूक्लियर रिएक्टर्स, बायलर्स, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण तथा उनके हिस्से पुर्जे

9.1

3.6

औषधीय उत्पाद 

14.75

4.5

7

जैविक रसायन

9.02

3.6

इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरण तथा उनके हिस्से पुर्जे, टेलीविजन इमेज और साउंड रिकार्डर्स

तथा पुन:उत्पादक और हिस्से पुर्जे 

12.73

3.9

8

आयरन और स्टील

7.14

2.9

आयरन और स्टील

9.74

3.0

9

कपास 

6.93

2.8

परिधान वस्तुऍ और वस्त्र अक्सेसरीज , बुने हुए अथवा  क्रोकेटेड  नहीं

8.34

2.5

10

औषधीय उत्पाद

6.68

2.7

अनाज

8.16

2.5

 

कुल

156.57

62.7

कुल

199.37

60.6

स्रोत: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार

प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत की प्रभावी वृद्धि दर्ज की गई है. औषधीय उत्पादों ने भारतीय निर्यात बॉस्केट में अपना हिस्सा 2.7 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत तक बढ़ाया है.

कार्बनिक रसायनों के लिये, भारतीय निर्यात बॉस्केट में इसकी हिस्सेदारी 5.5 प्रतिशत तक बढ़ गई है और लौह तथा इस्पात निर्यात में 2.9 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. यह ध्यान देने योग्य बात है कि वर्ष 2010-11 में भारत से प्रमुख निर्यात की वस्तुओं में परिधान वस्तुओं और वस्त्र उत्पाद, बुने हुए या क्रोकेटेड नहीं, अनाज अग्रणी रहे हैं. लेकिन आठ वर्षों में दोनों ने अपनी संबंधित हिस्सेदारी में वर्ष 2018-19 में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई है.

प्रमुख व्यापारिक निर्यातक देश

चीन वर्ष 2018 में 2494 अरब अमरीकी डॉलर के मूल्य के निर्यातों के साथ विश्व में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सबसे आगे है, इसके बाद अमरीका, जर्मनी, जापान और नीदरलैंड्स का स्थान है. वर्ष २018 के लिये भारत के व्यापारिक निर्यात का मूल्य 323 अरब अमरीकी डॉलर है जो विश्व पारिस्थितिकी तंत्र में 18वां स्थान है. वस्तुओं के निर्यात में भारत का हिस्सा विश्व का 1.7 प्रतिशत है.

यह देखा गया है कि 2018 में दुनिया के अग्रणी निर्यातक देशों में भारत के अपने शीर्ष दस गंतव्यों में इसके निर्यात की सघनता कम से कम 45.5 प्रतिशत है. दूसरी ओर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात बाज़ार के अपने संबंधित दिशाओं की सघनता की अपेक्षाकृत अधिक गति है.

वर्ष 2018 के लिये, हांगकांग से निर्यात का 81 प्रतिशत इसके शीर्ष  दस निर्यात स्थलों में केंद्रित है जबकि कोरियाई अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत की है. शीर्ष दस निर्यात गंतव्यों के साथ जापान की हिस्सेदारी लगभग 71 प्रतिशत है इसके बाद नीदरलैंडस (69त्न), फ्रांस (65त्न), अमरीका (64त्न), ब्रिटेन (63त्न), जर्मनी (59त्न), चीन (58त्न) और इटली (58त्न) का स्थान है.

सारणी 2: अग्रणी व्यापारिक निर्यातक देश

विश्व के अग्रणी व्यापारिक निर्यातक के तैार पर रैंक

अग्रणी निर्यातक देश

अबर अमरीकी डॉलर में कुल निर्यात

निर्यातों के शीर्ष      १० गंतव्यों की % हिस्सेदारी (2018)

विश्व निर्यात में % हिस्सेदारी (2018)

1

चीन

2494

58.4

13.0

2

अमरीका

1664

64.2

8.7

3

जर्मनी

1557

58.7

8.1

4

जापान

738

70.9

3.8

5

नीदरलैंडस

723

69.2

3.8

6

कोरिया

605

71.5

3.1

7

हांगकांग

569

81.2

3

8

फ्रांस

568

65.3

3

9

इटली

547

58.4

2.8

10

ब्रिटेन

487

62.8

2.5

18

भारत

323

45.5

1.7

स्रोत: ट्रेडमैप डाटाबेस

उक्त विवरण यह दर्शाता है कि जब 2018 के प्रमुख निर्यातक देशों के मध्य तुलना की गई तो भारतीय अर्थव्यवस्था अपने निर्यात की दिशा में भौगोलिक विविधीकरण की दिशा में सबसे अग्रणी है. रिलायंस अपने शीर्ष दस व्यापार साझेदारों के बाज़ारों में निर्यात करता है और यह अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ज़्यादा नहीं है, जो कि वर्षों से उठाये गये कठोर विविधीकरण रणनीतिक उपायों के परिणामस्वरूप अपने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों का विस्तार करता है.  

यद्यपि, निर्यात की मात्रा के मामले में, भारत का व्यापारिक निर्यात वर्ष 2018 के लिये 323 अरब अमरीकी डॉलर पर खड़ा है जो कि अन्य अग्रणी निर्यातक देशों से काफी नीचे है. चीन 2018 में 2494 अरब अमरीकी डॉलर मूल्य के निर्यातों के साथ विश्व के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अग्रणी स्थान पर है और इसके बाद अमरीका, जर्मनी, जापान तथा नीदरलैंडस का स्थान आता है.

भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य

इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि केवल कुछ बाज़ारों पर निर्यात एकाग्रता स्थिर और टिकाऊ निर्यात वृद्धि की गति प्राप्त करने के लिये एक बाधा के रूप में कार्य करती है. भारत ने एक विविधीकरण रणनीति तैयार की है जिसमें निर्यातकों को नये निर्यात स्थलों में उद्यम लगाने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है. यह ऐसी मज़बूत नीतियों का परिणाम है कि भारत से निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.

वर्ष 2010-11 और 2018-19 के लिये भारत से निर्यात के शीर्ष दस स्थलों की तुलना करने से पता चलता है कि प्रमुख निर्यात बाज़ारों की कुल हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से घटकर 45.5 प्रतिशत रह गई है. यह इस बात को इंगित करता है कि भारत के निर्यात बाज़ार में विविधीकरण और नये निर्यात के मार्ग ढूंढे गये हैं. यह सच्चाई है कि भारत के पारंपरिक व्यापार भागीदारों पर निर्भरता में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन इसके अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में विस्तार वर्षों से भारतीय निर्यातकों द्वारा उठाये गये ज़ोरदार विविधीकरण प्रयासों की तरफ इशारा करता है.

सारणी 3: भारत में 10 शीर्ष निर्यात गंतव्य

क्र.सं.

देश

 (2010-11)

2010-11 में निर्यात का मूल्य (अरब अमेरिकी डॉलर)

% हिस्सेदारी (2010-2011)

देश

 (2017-18)

2018-19 में निर्यात का मूल्य (अरब अमेरिकी डॉलर)

% हिस्सेदारी (2018-2019)

1

यूएई

33.82

13.5

यूएसए

52.4

15.9

2

यूएसए

25.29

10.1

यूएई

30.13

9.1

3

अविनिर्दिष्ट

14.39

5.8

चीन

16.75

5.1

4

चीन

14.17

5.7

हांगकांग

13.00

3.9

5

हांगकांग

10.32

4.1

सिंगापुर

11.57

3.5

6

सिंगापुर

9.83

3.9

जर्मनी

8.9

2.7

7

जर्मनी

6.75

2.7

सऊदी अरब

5.56

1.7

8

इंडोनेशिया

5.70

2.3

इंडोनेशिया

5.28

1.6

9

सऊदी अरब

4.68

1.9

कोरिया

4.7

1.4

10

स्विट्जरलैंड

0.69

0.3

इराक

1.79

0.5

 

कुल

125.65

50.3

कुल

150.09

45.5

स्रोत: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार

यह देखा जा सकता है कि इन वर्षों में कोरिया और इराक की अर्थव्यवस्थाएं वर्ष 2018-19 में 1.4 प्रतिशत और 0.5 प्रतिशत की संबद्ध हिस्सेदारी के साथ भारत के लिये प्रमुख निर्यात गंतव्य बन गये हैं. इन देशों ने वर्ष 2010-11 में प्रमुख स्थानों पर कब्जा नहीं किया. हालांकि 2010-11 में भारत के लिये प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक स्विट्जरलैंड, 2018-19 में अपनी प्रमुखता को खो चुका है.

भारत के निर्यात गंतव्य स्थानों के तौर पर यूएई, चीन और सिंगापुर जैसे देशों की संबंधित हिस्सेदारी इन वर्षों में कम हुई है. वर्ष 2010-11 की तुलना में, भारतीय निर्यात में यूएई की प्रतिशत हिस्सेदारी में 13.5 प्रतिशत से 9.1 प्रतिशत की जबर्दस्त गिरावट आई है. इसने अग्रणी निर्यात गंतव्यों में यूएई का स्थान वर्ष 2010-11 में पहले स्थान की अपेक्षा वर्ष 2018-19 में दूसरे स्थान पर ला दिया है. चीन की हिस्सेदारी 2010-11 में 5.7 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 5.1 प्रतिशत हो गई और सिंगापुर की हिस्सेदारी 3.9त्न से घटकर 3.5त्न हो गई. 2010-11 से वर्ष 2018-19 तक के वर्षों के दौरान, सऊदी अरब की हिस्सेदारी 1.9 प्रतिशत से घटकर 1.7 प्रतिशत हो गई और इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 2.3 प्रतिशत से कम होकर 1.6 प्रतिशत हो गई है.

इन वर्षों में, दस प्रमुख निर्यात गंतव्यों में से अमरीका, हांगकांग और जर्मनी आदि ऐसे चार देश हैं जिनके संबंध में भारतीय निर्यात में प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ी है. 2010-11 में अमरीका में भारत का निर्यात 10.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ 25.29 अरब अमरीकी डॉलर था, जबकि वर्ष 2018-19 के लिये भारत में अमरीका का आयात मूल्य दोगुणा से बढ़कर 52.4 अरब अमरीकी डॉलर हो गया और इसकी हिस्सेदारी 15.9 प्रतिशत की है. भारत के निर्यात स्थलों के रूप में जर्मनी का हिस्सा 2.7 प्रतिशत पर बरकरार है. इसके अलावा हांगकांग के लिये भारत से आयात प्रतिशत हिस्सा वर्ष 2010-11 में 4.1 प्रतिशत कम हो गया और वर्ष 2018-19 में यह 3.9 प्रतिशत हो गया.

ग्राफ भारत से शीर्ष 10 निर्यात गंतव्य

स्रोत: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भारत सरकार

वर्ष 2018-19 से अमरीका शीर्ष निर्यात गंतव्य है. भारतीय निर्यात के साथ-साथ भारत के प्रमुख निर्यात स्थलों में इसकी मात्रा में भारी वृद्धि हुई है. 2010-11 में, अमरीका में भारत का निर्यात 10.1त्न की हिस्सेदारी के साथ 25.29 अरब अमरीकी डॉलर था, जबकि वर्ष 2018-19 के लिये भारत से अमरीका का आयात मूल्य दोगुना से अधिक 52.4 अरब अमरीकी डॉलर था और भारत से इसका निर्यात प्रमुख निर्यात स्थल के रूप में 15.9त्न है.

इन वर्षों में, यूएई को निर्यात की मात्रा 33.82 अरब अमरीकी डॉलर से घटकर 30.13 अरब अमरीकी डॉलर हो गई है और भारत की निर्यात बॉस्केट में हिस्सेदारी 13.5 प्रतिशत से गिरकर 9.1 प्रतिशत हो गई है. इसने यूएई की स्थिति को वर्ष 2010-11 में पहले स्थान से प्रमुख निर्यात स्थलों में दूसरे स्थान में बदल दिया है. भारत से चीन के आयात की मात्रा 14.17 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 16.75 अरब अमरीकी डॉलर हो गई है, हालांकि भारत से निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 2010-11 में 5.7 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 5.1 प्रतिशत रह गई है. इसी प्रकार हांगकांग और सिंगापुर में भारत के निर्यात की मात्रा पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है. हांगकांग के लिये 10.32 अरब अमरीकी डॉलर से 13 अरब अमरीकी डॉलर और सिंगापुर के लिये 9.83 अरब से 11.57 अरब अमरीकी डॉलर तक यह वृद्धि हुई है, परंतु भारत के निर्यात बाज़ारों में उनके दोनों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है. हांगकांग की प्रतिशत हिस्सेदारी 4.1 से गिरकर 3.9 प्रतिशत और सिंगापुर की 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत रह गई है.

इन वर्षों के दौरान, भारत से इंडोनेशिया के लिये निर्यात 5.70 अरब अमरीकी डॉलर से गिरकर 5.56 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है. इसमें भारत निर्यात गंतव्य के रूप में इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था की प्रतिशत हिस्सेदारी में 2010-11 में 2.3 प्रतिशत से 2018-19 में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा, यद्यपि सऊदी अरब को निर्यात की मात्रा 4.68 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर 5.36 अरब डॉलर हो गई है, लेकिन वर्ष 2010-11 में इसकी प्रतिशत हिस्सेदारी 1.9 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 1.7 प्रतिशत हो गई. भारत से स्विटजरलैंड में निर्यात की मात्रा वर्ष 2010-11 में 0.69 अरब अमरीकी डॉलर थी.

हालांकि स्विटज़रलैंड अब 2018-19 में भारत के प्रमुख निर्यात स्थलों में नहीं है. दूसरी ओर कोरिया और इराक ने इस यूरोपीय देश का स्थान ले लिया है और वर्ष 2018-19 में भारत के लिये प्रमुख निर्यात बाज़ारों में जगह बनाई है. कोरिया और इराक को निर्यात की दिशा का विस्तार भारत के लिये निर्यात स्थलों के लिये नये मार्ग खोलने का अवसर है.

निष्कर्ष और सिफारिशें

भारत के निर्यात बाज़ार की सघनता में 2010-11 से 2018-19 में गिरावट आई जो यह दर्शाती है कि भारत के पारंपरिक व्यापार भागीदारों पर निर्भरता में लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई है. इसके अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में ऐसा विस्तार, वर्षों से भारतीय निर्यातकों द्वारा विविधीकरण के लिये उठाये गये ज़ोरदार प्रयासों की तरफ इशारा करता है.  

भारत के निर्यातों का विकसित से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की दिशा में संरचनात्मक बदलाव वैश्विक आर्थिक असंतुलन, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बढ़ते रूझान, विनिमय दर का उतार चढ़ाव, व्यापार सुविधा उपायों के संदर्भ में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मोर्चों पर विभिन्न प्रगतियों और सबसे महत्वपूर्ण सरकार द्वारा शुरू किये गये निर्यात विविधीकरण नीतिगत उपायों तथा निर्यातकों पर अत्यधिक ध्यान दिये जाने का परिणाम माना जाता है. 

भारत के कुल निर्यात में चीन, सिंगापुर, हांगकांग, यूएई, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे पारंपरिक निर्यात स्थलों पर देश की निर्भरता में इन वर्षों में गिरावट आई है. यद्यपि भारत से निर्यात गंतव्य के रूप में अमरीका की प्रमुखता अब भी अधिक है. 2010-11 से 2018-19 तक भारत के प्रमुख निर्यात स्थलों में अमरीका की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 16 प्रतिशत हो गई है.

2008 के वित्तीय संकट और वैश्विक मांग में परिणामी संकुचन के कारण, भारत ने विदेशों में अपने प्रमुख बाज़ारों को खो दिया और इसका विदेशी निवेश, जिस पर यह विकास पूंजी के लिये निर्भर था, कमज़ोर हो गया. बहरहाल, विभिन्न नीतिगत पहलों के कारण अमरीका जैसे उन्नत देशों में मांग फिर से उभरी है. इस प्रकार, इस तरह के पारंपरिक निर्यात स्थलों को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है और उनके साथ दीर्घकालिक व्यापार संबंधों को लगातार मज़बूत करने की आवश्यकता है.

इसके अलावा पिछले आठ वर्षों में भारत के निर्यात की संरचना के विश्लेषण से पता चलता है कि देश अपने निर्यात उत्पादों में विविधता बढ़ाने में सफल रहा है. निर्यात उत्पादों की सघनता 2010-11 से 2018-19 तक गिरकर लगभग 2 प्रतिशत हो गई है. 2018-19 की निर्यात बॉस्केट की प्रमुख वस्तुओं की सूची में जो नये उत्पाद जोड़े गये हैं, उनमें परिधान और कपड़े के सामान, न कि बुना हुआ या क्रोकेटेड, शामिल हैं. दूसरी तरफ, कपास, जो वर्ष 2010-11 में निर्यात के प्रमुख उत्पादों में से एक था, अब 2018-19 की अग्रणी निर्यात बॉस्केट की सूची में नहीं है.

आगे बढ़ते हुए, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ, उनके द्वारा प्रदर्शित की गई विशाल क्षमता को देखते हुए, भारत की व्यापार भागीदारी को मज़बूत करने के लिये निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है. भारत की निर्यात बॉस्केट को लगातार बदलती वैश्विक गतिशीलता के बीच एक अधिक मज़बूत विविधीकरण की दिशा में विकसित करने की आवश्यकता है. घरेलू क्षमता का विस्तार और वैश्विक मूल्य शृंखला में एमएसएमई की विस्तारित भागीदारी भारतीय निर्यात की मांग बढ़ाने और कुल वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी.

इसके अलावा, व्यापार क्षेत्र में बेहतर रसद प्रदर्शन व्यापार विकास, निर्यात विविधीकरण और आर्थिक विकास के साथ दृढ़ता से जुड़ा हुआ है. भारत से निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और निर्यात वृद्धि की तीव्रता के लिये, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने हेतु बाज़ारों में ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी को मज़बूत करने, उद्योग के हितधारकों को वैश्विक बाज़ारों के अवसर के बारे में जागरूकता, कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं के बीच मज़बूत संबंध बनाने की आवश्यकता है. प्रसंस्करण इकाइयों, नवीनतम और सबसे कुशल प्रौद्योगिकी तथा तकनीकों तक पहुंच, प्रमुख प्रतिभागियों के लिये प्रतिस्पर्धात्मक लाभ अर्जित करने में सहायता करेगी.

संक्षेप में कहा जा सकता है कि भारत को अपने निर्यात स्थलों के रूप में नये बाज़ारों की खोज़ जारी रखनी चाहिये और नीतिगत पहलों को भौगोलिक तथा साथ ही उत्पाद विविधीकरण के लिये निर्देशित करना चाहिये. वैश्विक वातावरण में संरक्षणवाद की बढ़ती चिंताओं के मद्देनज़र कुशल, अर्द्ध कुशल और अकुशल युवाओं के वृद्धिशील कार्यबल के लिये जबरदस्त अवसरों के साथ घरेलू अर्थव्यवस्था, संभावित बाज़ारों के दोहन और देश की निर्यात बॉस्केट की सीमा का विस्तार किये जाने से व्यापार में अधिक सुगमता, एक स्थिर और टिकाऊ निर्यात वृद्धि तथा विस्तारित उत्पादन संभावनाओं की सीमाएं छूने की दिशा में एक लंबा मार्ग तय कर लेगी.

एस.पी. शर्मा मुख्य अर्थशास्त्री, पीएच.डी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली से हैं और आशिमा दुआ रिसर्च स्कॉलर, पीएच.डी. चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली से हैं व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)