संपादकीय लेख


Volume-51

योग्यता आधारित कौशल विकास पर बल

राजेश अग्रवाल

हर वर्ष 1.3 करोड़ से अधिक  भारतीय काम करने योग्य आयु में प्रवेश करते हैं. राष्ट्र की वार्षिक प्रशिक्षण क्षमता सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, पोलिटेक्निक संस्थानों, स्नातक कॉलेजों, व्यावसायिक कॉलेजों आदि की प्रशिक्षण और शैक्षिक क्षमताओं को मिला कर 30 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षण देने की है. एक भारतीय को शिक्षित/प्रशिक्षित बनने में एक से चार वर्ष का समय लगता है. इसलिए तेजी से क्षमता बढ़ाने का कार्य यदि शुरू भी कर दिया जाए, तब भी एक करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने का अंतराल दूर करना अत्यंत कठिन है, क्योंकि प्रशिक्षण के लिए लंबी गर्भावधि होने के कारण कौशल प्रदान करने की गति नए भारतीयों के काम करने की आयु में प्रवेश करने की गति की तुलना में धीमी है. भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठाने के लिए इस मुद्दे का समाधान अत्यंत महत्वपूर्ण है.

उपरोक्त संदर्भ में भारत सरकार ने एक पृथक मंत्रालय के रूप में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का सृजन किया है, जिसने भारत में योग्यता आधारित कौशल विकास पर नए सिरे से बल प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) नाम का प्रमुख कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया है. कौशल प्रमाणपत्र प्रदान करने और पुरस्कृत करने का लक्ष्य बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को सक्षम बनाना और एकजुट करना है ताकि वे परिणाम आधारित कौशल का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें, रोजगार सक्षम बन सकें और अपनी जीविका कमा सकें. इस कार्यक्रम से उद्योग संचालित योग्यता आधारित प्रशिक्षण संस्थानों की कमी दूर करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं. इस तरह यह कार्यक्रम योग्यता आधारित प्रशिक्षण से संबंधित बाजार की कुछ विफलताओं को भी दूर करने में मदद कर रहा है.

यह कार्यक्रम विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर 15 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था. इसका कार्यान्वयन कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है. कार्यक्रम के प्रथम वर्ष (2015-2016) का इस्तेमाल इसे आगे बढ़ाने के लिए एक सही फाउंडेशन का निर्माण करना था. उसके बाद से यह कार्यक्रम नियोक्ताओं विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए प्रशिक्षित कार्मिक उपलब्ध कराने का एक प्रमुख स्रोत बन गया है.

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन द्वारा 2011-12 के लिए कराए गए रोजगार और बेरोजगारी सर्वेक्षणों के अनुसार अनौपचारिक क्षेत्र के अंतर्गत कुल सामान्य रोजगार (प्रमुख और अनुषंगी) ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 75 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 69 प्रतिशत है. अनौपचारिक रोजगार संबंधी आंकड़े अधिक विस्तृत हो सकते हैं, क्योंकि ‘‘परिवार नियोक्ता’’ के रूप में पहचान किए गए उद्यमों को अनौपचारिक क्षेत्र की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है, जिनमें घरेलू सेवाओं के प्रावधान जैसे कार्यों में रोजगार प्रदान किया जाता है.

पीएमकेवीवाई की अनौपचारिक क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका है. यह कार्यक्रम उद्योग और राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) से सम्बद्ध प्रशिक्षित कार्मिकों के एक पूल का निर्माण करता है. पीएमकेवीवाई (2016-2020) में यह लक्ष्य रखा गया है कि कम से कम 70 प्रतिशत ऐसे प्रशिक्षार्थियों को दिहाड़ी रोजगार प्रदान किया जाए, जिनका सफल प्रशिक्षार्थी के रूप में मूल्यांकन किया गया हो. यह कार्यक्रम उन प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रोत्साहन उपलब्ध कराता है, जो अपेक्षित नियुक्ति मानदंड सफलतापूर्वक पूरे करते हैं. एक प्रमुख कौशल विकास कार्यक्रम होने के नाते, अनौपचारिक क्षेत्र में परिष्कृत उत्पादकता के लिए एनएसक्यूएफ मानदंडों से सम्बद्ध उद्योग में प्रशिक्षित कार्मिकों का एक बड़ा पूल प्रदान करना इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण सफलता है.

पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण पारिस्थितिकी प्रणाली के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण रोजगार भूमिकाएं शामिल हैं, जो स्वयं सूक्ष्म उद्यमों के सृजन में परिवर्तित हो सकती हैं. पीएमकेवीवाई के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए ऐसी रोजगार भूमिकाओं के चुने हुए उदाहरणों में दर्जी के रूप में स्व-रोजगार, हाथों से कढ़ाई, लघु पोल्ट्री कृषक, ई-रिक्शा ड्राइवर और सेवा तकनीशियन, कार्पेंटर, स्टिचिंग ऑपरेटर (आंशिक रूप से देशभर में परंपरागत क्लस्टरों में), आदि शामिल हैं.

इसके फलस्वरूप कुशल और सक्षम पीएमकेवीवाई प्रशिक्षार्थियों द्वारा नए सूक्ष्म उद्यमों का निर्माण होता है. हाल ही में मोबाइल ऐप आधारित मार्किट एग्रीगेटर्स जैसे अर्बन क्लैप, हाउसजॉय आदि ने चुने हुए व्यवसायों में पहले से उपलब्ध स्वरोजगार के अवसरों को और भी मजबूती प्रदान की है.

कार्यक्रम के राज्य घटक के हिस्से के रूप में राज्य कौशल विकास मिशनों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे सम्बद्ध राज्यों के कारीगरी और हस्तशिल्प क्लस्टरों में परंपरागत उद्यमिता प्रशिक्षण शुरू करें. देश की परंपरागत कला और शिल्प धरोहर के संरक्षण के लिए अगली पीढ़ी के प्रशिक्षित शिल्पकारों का एक पूल बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है. चिकनकारी, हाथ से बने खेल के सामान आदि व्यवसायों का प्रशिक्षण प्रयोग के आधार पर पीएमकेवीवाई कार्यक्रम के अंतर्गत पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है.

पीएमकेवीवाई के प्रशिक्षण पूर्व घटक की पहचान के अंतर्गत मुख्य रूप से अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के कौशलों के मूल्यांकन और प्रमाणन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है. किसी व्यवसाय के लिए सीखे गए कौशल का मूल्यांकन और तत्संबंधी परीक्षण के जरिए प्रमाणपत्र देने से प्रशिक्षार्थियों को अनौपचारिक क्षेत्र में अधिक रोजगार प्राप्त करने में मदद मिलती है. कुछ मामलों में यह देखा गया है कि प्रशिक्षण पूर्व घटक के प्रमाणन से श्रमिकों को बेहतर वेतन के लिए मोलभाव करने में मदद मिलती है और अपने व्यवसाय में आगे बढऩे की संभावनाएं खुलती हैं. लगभग सभी मामलों में प्रशिक्षार्थियों ने कौशल प्रमाणपत्र प्राप्त करने के जरिए अधिक आत्मविश्वास और गर्व प्रदर्शित किया है.

कार्यक्रम के प्रथम वर्ष में इसकी बुनियाद कायम करने का अवसर मिलने के साथ ही इससे कुछ सबक भी सीखने को मिले. अत: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ देश के एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए अगले चार वर्षों (2016-2020) के लिए कार्यक्रम का अनुमोदन करते समय यह महसूस किया कि इस कार्यक्रम का विस्तार तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित होना चाहिए:-

1.प्रशिक्षण ढांचे का मानकीकरण और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए स्पष्ट गुणवत्ता बेंचमार्क निर्धारित करना.
2.अंतिम परिणाम के लिए नियुक्तियों पर निरंतर बल देना.
3.निष्पक्ष और प्रक्रिया आधारित निर्णय फ्रेमवर्क के जरिए पारदर्शिता को प्रोत्साहित करना.

उपरोक्त तीन प्रमुख स्तंभों के आधार पर, पीएमकेवीवाई (2016-2020) के कार्यान्वयन के लिए सुधार के कुछ उपाय किए गए:-

1. प्रशिक्षण केंद्रों का प्रत्यायन और संबद्धीकरण : प्रशिक्षण केंद्र प्रत्यायन और संबद्धीकरण की नई प्रक्रिया के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदाताओं की बजाए प्रशिक्षण केंद्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया. क्षेत्रगत कौशल परिषदों ने विस्तृत ढांचागत दिशा निर्देश विकसित किए, जिनके आधार पर निरीक्षण किया गया. प्रत्यायन का निर्णय प्रशिक्षण केंद्र की रेटिंग और ग्रेडिंग पद्धति पर आधारित होता है. सम्बद्ध क्षेत्र कौशल परिषदें अनुमोदित रोजगार भूमिकाओं के लिए किसी प्रशिक्षण केंद्र को एफिलिएशन यानी सम्बद्धता प्रदान करती हैं. जियो-स्टैम्प्ड और टाइम-स्टैम्प्ड  पिक्चर्स प्रदान करने के लिए यह प्रक्रिया निरीक्षण और स्व-रिपोर्टिंग ऐप के जरिए प्रौद्योगिकी का व्यापक लाभ उठाती है. एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल (ह्यद्वड्डह्म्ह्लठ्ठह्यस्रष्.शह्म्द्द) इस प्रक्रिया की सहायता के लिए विकसित किया गया है.
2. कोर्स सामग्री का मानकीकरण : पीएमकेवीवाई (2016-2020) के अंतर्गत निर्धारित प्रशिक्षणों के लिए क्षेत्र कौशल परिषदों ने आदर्श सामग्री पाठ्यक्रम प्रकाशित किया है. इससे पाठ्य पुस्तकों की मानक गुणवत्ता सुनिश्चित हुई है. प्रशिक्षण प्रारंभ होने के समय सभी प्रशिक्षार्थियों को एक मानक भर्ती किट भी प्रदान की जाती है.
3. प्रशिक्षकों का अनिवार्य प्रशिक्षण : सम्बद्ध क्षेत्र कौशल परिषदों के ट्रेन द ट्रेनरयानी प्रशिक्षक को प्रशिक्षित करेंकार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य है.
4. विशिष्ट पंजीकरण और आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली : सभी प्रशिक्षकों की आधार आईडी बैच बनाते समय वेलिडेट की जाती है, जिससे जाली पंजीकरण रोकने में मदद मिलती है. इसके अतिरिक्त इस स्तर पर डुप्लीकेशन की भी जांच की जाती है ताकि ऐसे उम्मीदवारों का पता लगाया जा सके, जो एनएसडीसी पारिस्थितिकी प्रणाली में पहले ऐसा ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हों. पीएमकेवीवाई के अंतर्गत आधार सक्षम बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (एईबीएएस) अनिवार्य है. पूर्वोत्तर के चुने हुए राज्यों और जम्मू कश्मीर में प्रशिक्षण प्रदाताओं को एक बायोमीट्रिक डिवाइस के जरिए उपस्थिति लगवानी होती है, क्योंकि इन क्षेत्रों में आधार का प्रसार बहुत कम है.
5. मूल्यांकनों के लिए मोबाइल अप्लीकेशन : साक्ष्य आधारित मूल्यांकनों के लिए एक नया मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है.
उम्मीद की जा रही है कि उपरोक्त उपायों से प्रशिक्षण के बेहतर नतीजे प्राप्त किए जा सकेंगे, जिससे अंतत: नियुक्तियों की मात्रा और गुणवत्ता पर असर पड़ेगा. इस कार्यक्रम के अंतर्गत 70 प्रतिशत दिहाड़ी रोजगार संबंधी पदों के लिए प्रशिक्षण देना अनिवार्य बनाया गया है और तदनुरूप प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रोत्साहन दिया जाता है.

पीएमकेवीवाई ने व्यापक पैमाने पर योग्यता आधारित और निर्धारित गुणवत्ता युक्त प्रशिक्षण प्रदान करने में कुछ बड़ी सफलताएं प्राप्त की हैं. यह कार्यक्रम भारतीय श्रमिकों, विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र में लगे श्रमिकों की अभिरुचि, जानकारी और कौशल को बढ़ावा देने में सफल रहा है. इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, वर्तमान में इस कार्यक्रम के अंतर्गत भर्ती स्तर की रोजगार भूमिकाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रमुख व्यवसायों के समूचे व्यावसायिक मार्ग पर ध्यान केंद्रित किया जा सके. इस कार्यक्रम में समुचित रूप से डिजाइन की गई अप-स्किलिंग और री-स्किलिंग पद्धतियों को शामिल करना होगा. उद्योग के कारण प्रत्याशित व्यवधानों के संदर्भ में ऐसा करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है. इस प्रकार इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्नातक जैसे कुछ उच्चतर प्रशिक्षार्थी अनुभागों के लिए लंबी अवधि के कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शामिल करने होंगे. समय के साथ-साथ यह कार्यक्रम एक व्यापक और समग्र श्रमिक प्रशिक्षण उपाय के रूप में उभरना चाहिए, जो रोजगार पारिस्थितिकी की वर्तमान और भावी जरूरतों को पूरा कर सके.

(लेखक कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार में संयुक्त सचिव हैं)
चित्र: गूगल के सौजन्य से