संपादकीय लेख


Volume 24, 14-20 September 2019

अर्थव्यवस्था पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का प्रभाव

 

डॉ. एस.पी. शर्मा और सुश्री कृतिका भसीन

जीएसटी (माल एवं सेवा कर) ने एक जुलाई, 2019 को अपने सफल दो वर्ष पूरे कर लिए हैं. इन दो वर्षों के दौरान जीएसटी बुनियादी ढांचे को आसान और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को विभिन्न सुधारों का सुझाव देने के लिए जीएसटी परिषद की 36 बैठकें हुईं और यह काम अभी जारी है.

विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी के बावजूद भारत ने विश्व पारिस्थितिकी तंत्र में अपना मजबूत स्थान बनाए रखा है. हाल के वर्षों में भारत तेज वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्थाओं में रहा है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के अनुसार आगे भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत बनी रहेगी. ऐसा भारत के प्रगतिशील विकास लक्ष्यों और महत्वपूर्ण सुधारों के प्रति सरकार की पहल से संभव हुआ है. इन पहलों में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, जनधन योजना, स्टार्ट अप इंडिया, आयुष्मान भारत, सूक्ष़्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए सरकार के 12 विकास मंत्रों का पैकेज और अन्य उपाय शामिल हैं. माल और सेवा कर ऐसा ही एक सुधार है और इसे भारत के इतिहास में सबसे बड़ा कर सुधार कहा जा सकता है. इसे लागू करने का लक्ष्य है- पूरे देश को ''एक राष्ट्र एक करÓÓ व्यवस्था के दायरे में लाना.

जीएसटी के क्रियान्वयन ने पूरे विश्व का ध्यान भारत की ओर खींचा है और 133 करोड़ से अधिक लोगों के लिए एक साझा बाजार सृजित किया है. जीएसटी पहली जुलाई 2017 को लागू किया गया था. इसके तहत 0 प्रतिशत, 0.25 प्रतिशत, 3 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत  के कर स्लैब तय किए गए हैं. निर्माता से उपभोक्ता तक माल और सेवाओं पर अनेक अप्रत्यक्ष करों को एक कर में बदल दिया गया. जीएसटी लागू करना एक ऐतिहासिक कदम था और इसने विश्व की तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था की ओर भारत के कदम को मजबूती दी.

जीएसटी के क्रियान्वयन से सरकार के राजस्व के साथ साथ बेहतर कर अनुपालन में बढ़ोतरी हुई और कर चोरी में कमी आई. पारंपरिक कराधान प्रणाली की तुलना में तंत्र पर अधिक नियंत्रण स्थापित हुआ और कुशल निगरानी में सुविधा हुई. उपभोक्ता की दृष्टि से सामान पर कुल कर प्रभार में कमी आई. एक राज्य से दूसरे राज्य तक माल का निर्बाध लाना-ले जाना संभव हुआ. राज्य की सीमाओं पर राज्य कर या प्रवेश कर के भुगतान के लिए घंटों का इंतजार समाप्त हुआ और कागजी कार्रवाई में बड़ी सीमा तक कमी आई.

जीएसटी लागू करते समय माल और सेवाओं का महत्वपूर्ण भाग 28 प्रतिशत के सर्वोच्च कर दायरे में आ गया था. हालांकि जीएसटी परिषद की सिफारिशों के बाद दो वर्ष के समय अंतराल में कई वस्तुओं  को सर्वोच्च स्लैब से 18 प्रतिशत, 12 प्रतिशत और 5 प्रतिशत के कर दायरे में स्थानांतरित कर दिया गया.

जीएसटी के विभिन्न स्लैब के तहत प्रमुख वस्तुएं

क्र.सं.

कर स्लैब

शामिल मुख्य वस्तुएं/श्रेणियां 

1

0%

पोल्ट्री; ताजा दूध और पास्चुरीकृत दूध, दही; लस्सी; छाछ; छेना या पनीरपेड़-पौधे, आलू; टमाटर; प्याज; फल; गेहूं; हल्दी; ओट्स; चावल; चेकअखबार; यात्री सामान; कच्चा सिल्क और अन्य.

2

0.25%

मध्यम-मूल्यवान पत्थर; बिना कट के मूल्यवान पत्थर (हीरे को छोड़कर)श्रेणी रहित मूल्यवान पत्थर (हीरे को छोड़कर); सिंथेटिक या पुन: निर्मित मध्यम मूल्य के पत्थर; बिना कट के या हल्के फुल्के काम या मोटे तौर पर आकार दिए गए पत्थर; सिंथेटिक या पुन: खचित मूल्यवान पत्थर.

3

3%

मोती, नैसर्गिक या कृत्रिम; नैसर्गिक या सिंथेटिक मूल्यवान या मध्यम मूल्यवान पत्थरों के कण और पाउडर; स्वर्ण (प्लेटिनम की परत के साथ सोना) अनगढ़ा या अर्द्ध निर्मित रूप में; मूल्यवान धातु का स्क्रैप; कृत्रिम आभूषण; सिक्काचांदी का काम, और अन्य. 

4

5%

क्रीम, दही, केफीर; प्राकृतिक शहद; फल और मेवे; नारियल, पिज्ज़ा ब्रेडप्राकृतिक ग्रेफाइट, टिन अयस्क और सांद्र; इन्सुलिन; रेशम धागा; सौर वाटर हीटर और प्रणाली; हवाई जहाज की सीट; हाथ की कढ़ाई वाली वस्तुएं, कड़ेअन्य.

5

12%

मक्खन; पनीर; खजूर; खट्टे फल; जैम, फरूट जैली, मार्मालेड्स, सोया दूध पेय; मधुमेहरोधी आहार; ग्रेनाइट की सिलें; आयोडीन; बायो-डीज़ल; प्लास्टिक के मोती; बांस की फ्लोरिंग; सिंथेटिक या अप्राकृतिक फिलामेंट धागे; टेक्सटाइल वाल कवरिंग; केरोसिन बर्नर, केरोसिन स्टोव, लोहे या स्टील के चूल्हे, खाने और पकाने के मिट्टी और टेराकोटा के बर्तन और कई अन्य.

6

18%

माल्ट; पेस्टरी केक, बिस्कुट और अन्य बेकरी सामान; ग्रेनाइट-सिल्लियां नहीं, पेट्रोलियम तेल और बिटुमिन खनिज से प्राप्त तेल, खनिज या रासायनिक उर्वरक, पोटैसिक; परफ्यूम और टायलेट वाटर; फोटोग्राफी का पेपर, पेपर बोर्ड और वस्त्र; ट्यूब, पाइप और हॉसपाइप; लक़डी का चिरान या बुरादा; रबड़प्लास्टिक, चमड़े के बाहरी सोल वाले चप्पल-जूते और अन्य.

7

28%

पान मसाला; संगमरमर और ट्रेवनटाइन; तम्बाकू या तम्बाकू विकल्प के सिगार; चुरुट और सिगरेट, मॉनीटर और प्रोजेक्टर, मोटर वाहनों के कल पुर्जे और असेसरीज़; रिवाल्वर और पिस्टल, राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत लॉटरी और अन्य.

स्रोत: पीएचडी रिसर्च ब्यूरो, पीएचडीसीसीआई केंद्रीय प्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड से संकलित (नोट: समान उत्पाद अपनी विशिष्टता के अनुसार विभिन्न कर स्लैब के दायरे में श्रेणीकृत किए जा सकते हैं).

आईजीएसटी माल और सेवा कर जीएसटी का एक भाग है जो कर योग्य माल और सेवाओं के अंतर-राज्यीय लेन-देन पर खेप या माल और सेवाओं के स्थानांतरण के लिए समुचित प्रावधानों के साथ लगाया जाता है. केंद्र जीएसटी के बदले आईजीएसटी लगाता है और वसूल करता है तथा इसे केंद्र और राज्य के बीच साझा किया जाता है. अंतर-राज्यीय डीलर खरीद पर आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी का  समायोजन कर आईजीएसटी का भुगतान करता है. आईजीएसटी मॉडल डीलरों को अंतर्राज्यीय लेन-देन, अंतर्राज्यीय विक्रेता या खरीददार के लिए कर भुगतान की अनुपस्थिति, या निधि की महत्वपूर्ण कमी, अंतर्राज्यीय लेन-देन लागत में कमी पर अबाधित इनपुट टैक्स क्रेडिट शृंखला, प्रतिस्पर्धी मूल्य प्रणाली में सुगमता और कुशलता के रूप में कई लाभ उपलब्ध कराने के लिए लागू किया गया. 

जीएसटी परिषद का गठन माल और सेवा कर संबंधी मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों से सिफारिशों के लिए एक सशक्त और संवैधानिक समिति के रूप में किया गया था. यह समिति संशोधित संविधान के अनुच्छेद 279ए के अनुसार केंद्र और राज्यों का एक संयुक्त फोरम है और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं तथा केंद्रीय राजस्व या वित्त राज्य मंत्री और सभी राज्यों के वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री इसके सदस्य हैं. जीएसटी को एक उत्तम और सरल कर बनाने के लिए अब तक जीएसटी परिषद की 36 बैठकें हो चुकी हैं. जीएसटी परिषद की बैठकों के दौरान हुई कुछ प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं:

 

·         रीयल एस्टेट सेक्टर के आवासीय खंड को बढ़ावा देने के लिए फैसला किया गया कि:

·         सस्ते आवास खंड से इतर की आवासीय इकाइयों पर आईटीसी के बिना 5 प्रतिशत की प्रभावी जीएसटी दर लगाई जाएगी.

·         सस्ते आवासीय खंडों पर आईटीसी के बिना एक प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगी.

·         सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (छोटे व्यापारियों सहित) को राहत देने के लिए प्रमुख फैसलों में शामिल हैं :

·         मौजूदा कंपोजिशन स्कीम के लिए टर्नओवर सीमा में बढ़ोतरी: वस्तुओं के लिए कंपोजिशन स्कीम हासिल करने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में वार्षिक टर्नओवर सीमा डेढ़ करोड़ रुपये तक बढ़ाई जाएगी. 

·         माल आपूर्तिकर्ता के लिए अधिक छूट की सीमा: माल आपूर्तिकर्ताओं के लिए पंजीकरण और जीएसटी भुगतान से छूट के लिए दो सीमाएं होंगी - 40 लाख और 20 लाख.

·         सेवाओं के लिए कंपोजिशन स्कीम: पिछले वित्त वर्ष में 50 लाख रुपये तक के वार्षिक टर्नओवर वाले सेवा आपूर्तिकर्ताओं के लिए कंपोजिशन स्कीम 6 प्रतिशत कर दर (3 प्रतिशत सीजीएसटी +3 प्रतिशत एसजीएसटी) के साथ उपलब्ध कराई जाएगी.

·         जीएसटी दरों में बदलाव के लिए लिए गए निर्णय:

 

28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत

·         एचएस कोड 8483 के अंतर्गत पुली, ट्रांसमिशन शाफ्ट और क्रैंक, गियर बॉक्स इत्यादि;

·         32 इंच तक के स्क्रीन साइज वाले मॉनिटर और टेलीविजन;

·         इस्तेमाल में आ चुके रबड़ चढ़े टायर;

·         लीथियम आयन बैटरी के पॉवर बैंक. लीथियम आयन बैट्री 10 प्रतिशत के दायरे में है. इस फैसले से पॉवर बैंक और लीथियम आयन बैटरी पर जीएसटी दरों में एकरूपता आएगी;

·         डिजिटल कैमरा और वीडियो कैमरा रिकॉर्डर;

·         एचएस कोड 9504 के अंतर्गत वीडियो गेम कंसोल और अन्य खेल और खेल कूद के लिए जरूरी चीजें.

28 प्रतिशत से 5 प्रतिशत

·         दिव्यांग लोगों के वाहनों के लिए काम आने वाले पार्ट पुर्जे और एसेसरीज़.

·         18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत

·         रफली स्क्वायर्ड या डीबैग्ड कार्क 

·         प्राकृतिक कार्क के सामान

·         एग्लोमेरेटिड कॉर्क

 

18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत

·         मार्बल रबल

 

12 प्रतिशत से 5 प्रतिशत

·         प्राकृतिक कॉर्क

·         टहलने की छड़ी

·         राख से बनी ईंट

 

5 प्रतिशत से शून्य प्रतिशत

·         सब्जियां, (अनपकी या भाप या पानी में उबाल कर पकाई गईं), फ्रोजन, ब्रांडिड और अलग कंटेनर में रखी गईं.

·         अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियां, लेकिन उस अवस्था में तुरंत खाने योग्य नहीं.

 

बिजली चालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सभी बिजली चालित वाहनों पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत कर दी गई है. बिजली चालित वाहनों के चार्जिंग केंद्र या चार्जर पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत की गई है. स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा बिजली चालित बसें किराए पर लिया जाना जीएसटी से मुक्त होगा.

·         करदाताओं को और नई प्रणाली से समायोजन के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से जीएसटी परिषद ने अपनी 35वीं बैठक में घोषणा की कि नई प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और परिषद ने रिटर्न भरने की अंतिम तिथि आगे बढ़ाने की घोषणा की.

केंद्रीय बजट 2019-20 में सरकार ने जीएसटी के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक इनवायस प्रणाली का प्रस्ताव किया था, जिसमें इनवायस ब्यौरा जारी किए जाने के समय केंद्रीय प्रणाली में दर्ज हो जाएगा. इसका उपयोग करदाताओं के रिटर्न के प्रीफिल के लिए किया जा सकेगा इसलिए अलग से ऑनलाइन बिल भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जनवरी 2020 से यह प्रणाली लागू की जाएगी, इससे करदाताओं पर अनुपालन भार में काफी कमी होगी।

जीएसटी संरचना में बदलाव का प्रभाव

जीएसटी के तहत वस्तुओं को जीएसटी कर स्लैब के अनुसार श्रेणीकृत किया जाता है. जीएसटी लागू होने के समय, जुलाई 2017 में अधिकतम वस्तुएं (543) 18 प्रतिशत के स्लैब में रखी गई थीं. यह परिदृश्य अभी भी समान बना हुआ है. अधिकतम वस्तुएं (608) 18 प्रतिशत के कर दायरे में हैं. हालांकि 28 प्रतिशत के सर्वोच्च कर स्लैब की श्रेणी में भारी बदलाव देखा जा सकता है. इस स्लैब में वस्तुओं की संख्या लागू किए जाने के समय के 228 से घट कर केवल 36 रह गई हैं. इससे उपभोक्ताओं को बहुत राहत मिली है. शून्य प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के अन्य कर स्लैब में वस्तुओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ये जुलाई 2017 के क्रमश: 149, 263 और 242 बढ़ कर मार्च 2019 में 164, 321 और 285 हो गई हैं.

18 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब में मौजूदा समय में लगभग 41 प्रतिशत वस्तुएं आती हैं, जबकि जीएसटी लागू किए जाने के समय केवल 33 प्रतिशत वस्तुएं इस दायरे में थीं. इसके बाद अधिकतम वस्तुएं 5 प्रतिशत के कर स्लैब में हैं. जुलाई 2017 में इस स्लैब में 19 प्रतिशत के लगभग वस्तुएं थीं, जबकि मार्च 2019 में यह बढ़कर 22 प्रतिशत हो गईं. 12 प्रतिशत और शून्य प्रतिशत की श्रेणी में उनके दायरे में आने वाली वस्तुओं की दृष्टि से मामूली बदलाव आया है और मार्च 2019 में क्रमश: 19.3 प्रतिशत और 0.3 प्रतिशत वस्तुएं इनमें आ गई हैं. अधिकतम बदलाव 28 प्रतिशत के कर दायरे में हुआ है. इस स्लैब के अंतर्गत मार्च 2019 में केवल 2 प्रतिशत वस्तुएं रह गई हैं, जबकि जीएसटी लागू किए जाने के समय इसमें 18 प्रतिशत वस्तुएं थीं. 

जीएसटी का आकार लागू किए जाने के समय  (जुलाई 2017) के लगभग 14 प्रतिशत से कम होकर मार्च 2019 में 12 प्रतिशत से नीचे आ गया है. यह कमी जीएसटी परिषद की बैठकों में की गई सिफारिशों के बाद वस्तुओं के नीचे के कर स्लैब में आने के कारण हुई है. 

वस्तुओं की अंतर्राज्यीय आवाजाही पर जीएसटी का प्रभाव

पूरे देश मे व्यापारियों और निर्माताओं को जीएसटी लागू किए जाने से लाभ हुआ है, क्योंकि एक राज्य से दूसरे राज्य में वस्तुओं की आवाजाही काफी सुचारू हो गई है. जीएसटी ने करों के एक के ऊपर एक लगने के असर को दूर कर दिया है, जिससे कच्चे माल की लागत और निर्माण लागत में कमी आई है. जीएसटी ने व्यापारियों और निर्माताओं को स्थानीय अंतरों से अलग सर्वोत्तम मूल्य पर वेंडर, आपूर्तिकर्ता और अन्य के चयन की स्वतंत्रता दी है, क्योंकि देश में हर जगह जीएसटी दर एक समान है और इसके लिए नहीं के बराबर कागजी कार्रवाई की जरूरत पड़ती है. इससे कार्यकुशलता और बिक्री में बढ़ोतरी हुई है.

इसके अलावा व्यवस्था और प्रचालन के प्रयासों तथा समय में 50 प्रतिशत से अधिक की बचत हुई है, क्योंकि जीएसटी ने राज्यों की सीमाओं पर विविध चुंगी व्यवस्थाओं को हटा दिया है. इससे माल की आपूर्ति में लगने वाला समय कम हुआ है और उनकी तेज डिलीवरी सुनिश्चित हुई है; इसकी वजह से श्रम की बचत हुई है और श्रम कुशलता बढ़ी है. इसके अलावा जीएसटी के कारण पहले की अपेक्षा आसान प्रक्रियाओं और कम लागत से प्रतिस्पर्धी मूल्य और निर्माण इकाइयों का लाभ सुनिश्चित हुआ है. इससे निर्माता और व्यापारी अधिक प्रतिस्पर्धी बने हैं और उन्हें मिलने वाले लाभ में बढ़ोतरी हुई है.

सरकार के राजस्व पर जीएसटी का प्रभाव

जीएसटी से सरकार की कर राजस्व वसूली में वर्ष दर वर्ष बढ़ोतरी हो रही है. वित्त वर्ष 2017-18 में मासिक औसत वसूली 89,825 करोड़ रुपये की हुई थी, जो वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़ कर 98,114 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़ कर 1, 04,044 करोड़ रुपये हो गई.  2019 की मई, जून और जुलाई में कुल जीएसटी राजस्व वसूली लगभग एक लाख करोड़ रुपये प्रति माह हुई, जबकि अप्रैल में यह 1.12 लाख करोड़ रुपये थी, जो जीएसटी लागू किए जाने के बाद से सर्वाधिक वसूली थी. जीएसटी से कर आधार बढ़ा है और कर संकलन में बढ़ोतरी हुई है. अप्रत्यक्ष कर दाता आधार जीएसटी लागू किए जाने के बाद से 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है. ऐसा विशेष रूप से स्वैच्छिक पंजीकरण में भारी वृद्धि के कारण संभव हुआ है. 

कारोबार सुगमता पर जीएसटी का प्रभाव

जीएसटी से कारोबार करने में आसानी बढ़ी है क्योंकि अब जीएसटी रिटर्न पूरी तरह से ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से भरे जाते हैं, जिससे प्रतिदिन के कार्यों और आकलन के लिए कर दाताओं को कर प्रशासन के पास जाने की परेशानी में कमी आई है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बिल व्यवस्था के कारण परिवहन लागत और संबंधित अन्य लागत में भी कमी आई है. जीएसटी के कारण पूरी प्रणाली में सुधार हुआ है, जिसमें आईटी सेट-अप, खरीद, आपूर्ति शृंखला, निर्यात, बिल व्यवस्था और कर भुगतान व्यवस्था शामिल हैं, यही कारण है कि जीएसटी से व्यापार सुगमता बढ़ी है.

भारत की विश्व बैंक व्यापार सुगमता रैंकिंग

स्रोत:पीएचडी रिसर्च ब्यूरो, विश्व बैंक से संकलित पीएचडीसीसीआई 

निष्कर्ष और अनुशंसाएं 

जीएसटी ने समाज के सभी वर्गों और अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टर पर असर डाला है और उनमें सुधार सुनिश्चित किया है. इससे भारत को विश्व की सर्वाधिक तेज वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिली है. जीएसटी का क्रियान्वयन अत्यधिक सराहनीय कदम है, क्योंकि इससे राज्यों के बीच की बाधाएं दूर हुई हंै और भारत एक साझा बाजार के रूप में उभर सका है. कर राजस्व में बढ़ोतरी और व्यवसायों की लेनदेन लागत में कमी से अर्थव्यवस्था की सक्षमता बढ़ेगी और व्यापार में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित होगी. जीएसटी से जुड़ी जटिल समस्याएं दूर होने के बाद आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के और ऊंची वृद्धि दर की ओर अग्रसर होने की आशा है.

इसी पथ पर आगे बढ़ते हुए, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाना अनिवार्य है, क्योंकि इससे उत्पाद कर, मूल्य संवर्धित कर सहित केंद्रीय बिक्री कर की कर के ऊपर कर जैसी समस्याएं दूर करने में मदद मिलेगी. 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की स्लैब दरें हटाए जाने की जरूरत है और जीएसटी के तहत 4 की बजाय केवल दो मुख्य कर दरें  5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत रखी जानी चाहिएं. इसके अलावा जीएसटी फार्म में जटिलताओं को दूर कर इसे अधिक सरल और तर्कसंगत बनाया जाना है. व्यापार लागत को और कम करने के लिए साजोसामान और बुनियादी ढांचे की मौजूदा व्यवस्था में भी सुधार किया जाना होगा. जीएसटी नियमों को और सरल बनाने, प्रक्रियाओं में आसानी लाने और वस्तुओं को निचले कर स्लैब में स्थानांतरित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों से व्यापार सुगमता बढ़ेगी, निर्माण को बढ़़ावा मिलेगा, निर्माताओं के मूल्य और लागत के बीच का अंतर बढ़ेगा और रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित हो सकेंगे.

(डॉ. एस.पी. शर्मा और सुश्री कृतिका भसीन पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री, नई दिल्ली स्थित क्रमश: मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान अधिकारी हैं.

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं. 

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)