संपादकीय लेख


Editorial Article

नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति
का रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

डॉ.एस.पी.शर्मा

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एक प्रमुख आर्थिक घटक है जो कि अर्थव्यवस्था में निवेश वातावरण को इंगित करता है और घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों में विश्वास बहाली में मदद करता है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रौद्योगिकीय उन्नयन विस्तार, उद्योग में प्रतिस्पद्र्धा बढ़ाने, पूंजीगत स्टॉक में वृद्धि, बुनियादी ढांचा आधार की मज़बूती करने में सहायता करता है और इस प्रकार इससे अर्थव्यवस्था में खुशहाली का संपूर्ण स्तर परिलक्षित होता है. 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के उपरांत, भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रति आकर्षित किया है. सुधार प्रक्रिया लगातार जारी रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है.

बड़ी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आमंत्रित किये जाने का उद्देश्य हमारे युवाओं को बेहतर रोजग़ार अवसर उपलब्ध करवाना, रोजग़ार के अवसरों का सृजन करना और संपूर्ण आर्थिक वृद्धि तथा विकास को प्रोत्साहन देना है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिये सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था ने विश्व आर्थिक प्रणाली की सबसे तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के रूप में उपस्थिति दर्ज की है और हाल के वर्षों में यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिये एक महत्वपूर्ण गंतव्य के तौर पर उभरी है. विदेशी कंपनियां भारत में अपेक्षाकृत कम वेतन, बड़े पैमाने पर कुशल, अकुशल और अद्र्धकुशल कार्यबल की उपलब्धता तथा कर छूटों जैसे विशेष निवेश प्रोत्साहन का फायदा उठाने के लिये निवेश करती हैं.

आज भारत को दुनिया भर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये एक सबसे पसंदीदा स्थान माना जाता है. भारत में कुल वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह में पिछले पन्द्रह वर्षों में नौ गुणा वृद्धि हुई है. वित्तीय वर्ष 2002 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 6.1 अरब अमरीकी डॉलर था जो कि वित्तीय वर्ष 2016 में बढक़र 55.5 अरब अमरीकी डॉलर हो गया.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह में पिछले पन्द्रह वर्षों के दौरान 16 प्रतिशत के सीएजीआर के साथ तेज़ी का रुख रहा. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वृद्धि वित्तीय वर्ष 2002 में 52.1 प्रतिशत थी जिसने पांच वर्षों की अवधि में वित्तीय वर्ष 2007 में 155 प्रतिशत के उच्चतम शिखर को छू लिया. इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह की वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2012 में 34 प्रतिशत थी और वित्तीय वर्ष 2016 में कऱीब 23 प्रतिशत हो गई.

भारत में निवेश करने वाले दस प्रमुख देश

भारत में निवेश करने वाले दस प्रमुख देशों में मारीशस की हिस्सेदारी सर्वाधिक है जिसका अप्रैल 2000 से मार्च 2016 तक की अवधि के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 33 प्रतिशत का योगदान है. इसके बाद सिंगापुर की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत, ब्रिटेन की 8 प्रतिशत, जापान की 7 प्रतिशत, अमरीका और नीदरलैंड्स की प्रत्येक की 6-6 प्रतिशत, जर्मनी और साइप्रस की प्रत्येक की 3-3 प्रतिशत, फ्रांस की 2 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात की 1 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

सेवा क्षेत्र अप्रैल 2000 से मार्च 2016 तक की अवधि के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कऱीब 18 प्रतिशत धारण किये हुए है. इसके बाद निर्माण विकास क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह की हिस्सेदारी कऱीब 7 प्रतिशत की है.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इक्विटी आकर्षित करने वाले सर्वोच्च दस राज्यों अथवा संघ शासित प्रदेशों में अप्रैल 2000 से मार्च 2016 तक की अवधि के दौरान कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इक्विटी प्रवाह में मुंबई की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही है, इसके पश्चात नई दिल्ली की 22 प्रतिशत, चेन्नै और बेगलुरू की प्रत्येक की 7-7 प्रतिशत तथा अहमदाबाद की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत रही है.

भारत में रोजग़ार सृजन और अवसंरचना विकास को प्रोत्साहित करने के लिये प्रत्यक्ष विदेश निवेश नियमों का सरलीकरण

बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि रक्षा, निर्माण विकास, बीमा, पेन्शन क्षेत्र, प्रसारण क्षेत्र, चाय, कॉफी, रबड़, इलायची, पॉम ऑयल के वृक्षों और जैतून तेल वृक्षों के पौधारोपण, एकल ब्रॉण्ड खुदरा व्यापार, विनिर्माण क्षेत्र, सीमित दायित्व भागीदारी, नागर विमानन, क्रेडिट इन्फॉरमेशन कंपनियों, सेटेलाइटस-स्थापना/प्रचालन और परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति में व्यापक सुधार किये हैं. परंतु अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने की हमारी अर्थव्यवस्व्था की क्षमता के मद्देनजऱ सरकार ने हाल में जून, 2016 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश व्यवस्था में विशेषकर खाद्य उत्पादों, रक्षा क्षेत्र, प्रसारण वाहक सेवाओं, औषधीय, नागर विमानन, निजी सुरक्षा एजेंसियों, शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय की स्थापना, पशुपालन और एकल ब्रॉण्ड खुदरा व्यापार के क्षेत्र में अधिक उदारीकरण तथा सरलीकरण किया है.

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रक्रिया को युक्तिसंगत और सरल बनाने के वास्ते हाल में किये गये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुधार

सरकार ने निवेश वातावरण में तेज़ी लाने और बड़ी मात्रा में निवेश आकर्षित करने के वास्ते हाल में खाद्य उत्पादों, विनिर्माण, रक्षा क्षेत्र, प्रसारण वाहक सेवाओं, औषधीय, नागर विमानन, निजी सुरक्षा एजेंसियों, शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय की स्थापना, पशुपालन और एकल ब्रॉण्ड खुदरा व्यापार के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बना दिया है, जिनके बारे में नीचे जिक्र किया गया है.

*भारत में विनिर्मित/उत्पादित खाद्य उत्पाद-सरकार ने भारत में विनिर्मित अथवा उत्पादित खाद्य उत्पादों के संबंध में ई-कॉमर्स सहित, ट्रेडिंग के लिये सरकारी स्वीकृति मार्ग के अधीन 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है.

*रक्षा क्षेत्र- मौजूदा सरकार ने स्वचालित मार्ग के अधीन कंपनी की इक्विटी में 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भागीदारी की अनुमति दी है. 49 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवेश की अनुमति अब सरकारी स्वीकृति मार्ग के जरिये दी गई है. रक्षा क्षेत्र के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को अब शस्त्र अधिनियम 1959 के अधीन छोटे हथियारों और गोली बारूद के विनिर्माण के लिये भी लागू कर दिया गया है.

*प्रसारण वाहक सेवाएं- सरकार ने टेलीपोर्ट्स (अप-लिंकिंग हब्स/टेलीपोर्टस की स्थापना), डाइरेक्ट टू होम (डीटीएच), केबल नेटवक्र्स (मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (एमएसओज)-जो कि राष्ट््रीय अथवा राज्य अथवा जिला स्तर पर प्रचालन में हैं और डिजिटाइजेशन तथा संबोधनीयता के प्रति नेटवर्कों का अपग्रेडेशन कर रहे हैं), मोबाईल टीवी, स्काई ब्रॉडकास्टिंग सर्विस में हेड एंड (एचआईटीएस) के लिये स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान कर दी है. इसके अलावा केबल नेटवर्कों में स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है. (अन्य एमएसओ नेटवर्कों का डिजिटाइजेशन और संबोधनीयता की दिशा में उन्नयन संचालित नहीं कर रहे तथा स्थानीय केबल ऑपरेटर्स (एलसीओज).

*औषधीय क्षेत्र- औषधीय क्षेत्र के लिये लागू नीति में ग्रीनफील्ड फार्मा में स्वचालित मार्ग के अधीन 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और ब्राउनफील्ड फार्मा में सरकारी स्वीकृति के अधीन 100 प्रतिशत तक की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है. इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्राउनफील्ड फार्मास्यूटिकल्स में 74 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग से और 74 प्रतिशत से ऊपर सरकारी स्वीकृति का मार्ग जारी रहेगा.

*नागर विमानन क्षेत्र- हवाई अड्डों के बारे में लागू नीति के अनुसार ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में स्वचालित मार्ग के अधीन 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में 74 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सरकारी मार्ग के अधीन प्रदान की गई है. ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के लिये 74 प्रतिशत से अधिक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सरकारी मार्ग के अधीन है. अब ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति स्वचालित मार्ग के अधीन है. वर्तमान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के अनुसार अनुसूचित वायु परिवहन सेवा/घरेलू अनुसूचित यात्री एअरलाइन और क्षेत्रीय वायु परिवहन सेवा में स्वचालित मार्ग से 49 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है.   

इस सीमा को अब 100 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया गया है जिसमें 49 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति स्वचालित मार्ग से और 49 प्रतिशत से अधिक की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सरकारी स्वीकृति के अधीन है. अनिवासी भारतीयों के लिये 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति स्वचालित मार्ग से जारी रहेगी. यद्यपि विदेशी एयरलाइन्स को भारतीय कंपनियों की पूंजी में उनकी 49 प्रतिशत की प्रदत्त पूंजी की सीमा तक और वर्तमान नीति में निर्धारित शर्तों के अधीन निवेश की अनुमति जारी रहेगी जो कि अनुसूचित और ग़ैर अनुसूचित वायु परिवहन सेवाएं संचालित करती हैं.

*निजी सुरक्षा एजेंसियां- लागू नीति में निजी सुरक्षा एजेंसियों में 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सरकारी स्वीकृति मार्ग के अधीन है. 49 प्रतिशत तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति इस क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के अधीन है और 49 प्रतिशत से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा 74 प्रतिशत तक की अनुमति सरकारी स्वीकृति मार्ग के अधीन है.

*शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय-भारत में शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय अथवा व्यवसाय करने का कोई अन्य स्थान की स्थापना के लिये यदि आवेदक का मूल व्यवसाय रक्षा, दूरसंचार, निजी सुरक्षा अथवा सूचना और प्रसारण है, यह निर्णय किया गया है कि उन मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक अथवा अलग सुरक्षा स्वीकृति प्राप्त करना अपेक्षित नहीं होगा जहां कहीं एफआईपीबी अनुमोदन अथवा लाइसेंस/अनुमति संबंधित मंत्रालय/ विनियामक ने पहले ही प्रदान कर दी है.

*पशुपालन- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति 2016 के अनुसार, पशुपालन (कुत्तों के प्रजनन सहित), मछलीपालन, अक्वाकल्चर और एपिकल्चर में 100 प्रतिशत की अनुमति नियंत्रित शर्तों के अधीन स्वचालित मार्ग के अधीन है. इन गतिविधियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये नियंत्रित शर्तों की इस अपेक्षा को समाप्त करने का निर्णय किया गया है.

*एकल ब्रॉण्ड रिटेल ट्रेडिंग- अत्याधुनिकऔर नवीनतमप्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पादों की एकल ब्रैंड रिटेल ट्रेडिंग संचालित करने वाली कंपनियों के लिये और पांच वर्षों के लिये छूट स्रोत व्यवस्था जारी रखने और तीन वर्षों के लिये स्थानीय स्रोत व्यवस्था की छूट प्रदान करने का फ़ैसला किया गया है.

रोजग़ार सृजन, युवा सशक्तिकरण और आर्थिक विकास में तेज़ी के वास्ते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संबंधी सुधार

हाल के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुधारों को सरल बनाते हुए विदेशी निवेश आमंत्रित करने की प्रक्रिया को निवेशकों के समय और ऊर्जा को बचाने के लिये सरल कर दिया गया है. क्षेत्र सीमा में बढ़ोतरी, स्वचालित मार्ग के अधीन और अधिक गतिविधियों के लाये जाने और विदेशी निवेश के लिये शर्तों को सरल बनाये जाने से भारत विश्व आर्थिक व्यवस्था में अधिक मुक्त अर्थव्यवस्था बन जायेगा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संबंधी नीतियों की घोषणा से अतिरिक्त रोजग़ारों के सृजन के साथ-साथ रोजग़ार में वृद्धि होगी और विदेशी तथा घरेलू निवेशों दोनों पर ज़ोर दिये जाने के साथ ही मेक इन इंडिया कार्यक्रम में तेज़ी आयेगी.

अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश प्रस्तावों से भी घरेलू निवेश वातावरण में मज़बूती आयेगी. इसके अलावा आने वाले दिनों में हमारे देश के लाखों युवाओं को फायदा पहुंचेगा क्योंकि रोजग़ार अथवा उद्यमशीलता के व्यापक अवसरों का सृजन होगा.

अर्थव्यवस्था के चुनिंदा क्षेत्रों में हाल के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुधारों का प्रभाव

भारत में विनिर्मित अथवा उत्पादित खाद्य उत्पाद: देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिये महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करवाना और कृषि अवसंरचना में सहायता करना.

*रक्षा क्षेत्र: अनेक वैश्विक रक्षा कंपनियों की भारत में विनिर्माण आधार की स्थापना के लिये सहायता करना और सरकार की प्रतिष्ठित मेक इन इंडिया पहल को प्रोत्साहित करना.

*प्रसारण वाहक सेवाएं: डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया का तेज़ी से कार्यान्वयन और बुनियादी ढांचा विकास, बेहतर उपग्रह क्षमता में सहायता करना और ग्रामीण बाज़ारों में मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स की वृद्धि करना.

*फार्मास्युटिकल: ब्राउनफील्ड फार्मास्युटिकल्स में क्षेत्र में विलय और अधिग्रहण तथा निजी इक्विटी निवेशों को बढ़ावा देने के लिये स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश.

*विमानन क्षेत्र: मौजूदा हवाई अड्डों में उच्च मानदंडों की स्थापना करने और वर्तमान हवाई अड्डों पर दबाव कम करने में मदद के लिये आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन देना.

*निजी सुरक्षा एजेंसियां: निजी सुरक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना और सुरक्षा गार्डों के कौशल विकास में वृद्धि करना. इससे आगे रोजग़ार के अवसरों का सृजन होगा विशेषकर अकुशल युवा कार्यबल में वृद्धि होगी.

*शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय या परियोजना कार्यालय: उन मामलों में जहां कहीं मूल व्यवसाय रक्षा, दूरसंचार, निजी सुरक्षा या सूचना और प्रसारण है, शाखा कार्यालयों, संपर्क कार्यालयों या परियोजना कार्यालयों की स्थापना में सहायता करना.

*पशुपालन: पशुपालन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना , विभिन्न अनुसंधान और विकास एजेंसियों को देश में पशु प्रजनन सुधारों के वास्ते अपनी नयी और आधुनिक प्रौद्योगिकी भारत में लाने के लिये प्रोत्साहित करना.

*एकल ब्रॉन्ड खुदरा व्यापार: एकल ब्रॉन्ड खुदरा व्यापार में निवेश की वृद्धि करना और क्षेत्र में प्रौद्योकीय विकास को प्रोत्साहन देना. भारत में विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जायेगा और अर्थव्यवस्था में रोजग़ार के अवसर सृजित किये जायेंगे.

निष्कर्ष

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की त्वरित आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. भारत में 1991 के बाद से आर्थिक सुधारों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में विनियामक वातावरण को अधिक से अधिक निवेशक अनुकूल बनाने और घरेलू पूंजी, प्रौद्योगिकी तथा कौशलों में सुधार के लिये लगातार सरल बनाया गया है.

अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में हाल के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति संबंधी घोषणाओं से व्यापक निवेश आकर्षित होने और अतिरिक्त रोजग़ार के सृजन के साथ-साथ रोजग़ार में वृद्धि तथा मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्साहन मिलने की आशा है. क्षेत्रीय सीमा में बढ़ोतरी, स्वचालित मार्ग के अधीन अधिक से अधिक गतिविधियों को लाये जाने और विदेशी निवेश की शर्तें आसान किये जाने से भारत को विश्व आर्थिक प्रणाली में एक अधिक मुक्त अर्थव्यवस्था बनने में सहायता मिलेगी. ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुधार काफी महत्वपूर्ण हैं जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह में वृद्धि होगी जो कि वित्तीय वर्ष 2014 में 36 अरब अमरीकी डॉलर से बढक़र हाल के सरकार के प्रयासों के कारण वित्तीय वर्ष 2016 में 55.5 अरब अमरीकी डॉलर हो गया. सरकार द्वारा सक्रिय सुधारोन्मुख निर्णयों से विशेषकर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों को आसान किये जाने से रोजग़ार के अवसरों में वृद्धि होगी, युवाओं का सशक्तिकरण होगा और आने वाले दिनों में संपूर्ण आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सकेगा. संक्षेप में कहा जा सकता है कि भारत ने केवल हाल में वैश्विक पूंजी को आकर्षित करना और अर्थव्यवस्था को एक आकार देना शुरू किया है और इसकी उच्च विकास क्षमता से यह सामान्य तौर पर निवेश से संबंधित नीति और विशेष तौर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को समर्थन की नीति से निवेश का एक आकर्षक गंतव्य स्थल बना रहेगा. अत: सरकार को भारत को मेक इन इंडिया के लिये अधिक से अधिक आकर्षक बनाये रखने के वास्ते सुधारों का वातावरण अवश्य जारी रखना चाहिये.

-सुरभि शर्मा से इनपुट के साथ
(लेखक चीफ इकोनोमिस्ट, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री हैं)