संपादकीय लेख


Volume-14

बारहवीं कक्षा के बाद गणित सहित विज्ञान विधा में
पाठ्यक्रम एवं कॅरिअर के विकल्प

रुचि

दसवीं कक्षा के बाद पीसीएम (भौतिकी, रसायन विज्ञान एवं गणित) के साथ विज्ञान एक अत्यधिक वरीयता वाला पाठ्यक्रम है. +2 में गणित के साथ विज्ञान विषयों के दो वर्ष के श्रमसाध्य अध्ययन के बाद किसी भी छात्र के मस्तिष्क में सबसे बड़ा यह प्रश्न उठता है कि अब कॅरिअर का कौन सा विकल्प चुना जाए. कॅरिअर का कोई सही विकल्प चुनना न केवल छात्रों के लिए बल्कि उनके अभिभावकों के लिए भी एक चिंता का विषय बन जाता है. सामान्यत: इंजीनियरी एक ऐसा सबसे अधिक सामान्य विकल्प है जो अधिकांश छात्रों के सामने आता है. तथापि, इंजीनियरी के अतिरिक्त, कॅरिअर के ऐसे अनेक विकल्प हैं जिन्हें चुना जा सकता है. सही विकल्प का चयन करना कोई आसान कार्य नहीं है और यह आपकी अभिवृत्ति, रुचि तथा उसमें कॅरिअर की संभावनाओं जैसे कई तथ्यों पर निर्भर करता है. क्या आप सही सोच और तर्कसंगतता का कौशल रखते हैं? क्या आप गणित की समस्याओं का समाधान करने का उत्साह रखते हैं? यदि उक्त प्रश्नों का उत्तर ‘‘हां’’ है तो यह लेख, बारहवीं कक्षा के बाद गणित के साथ विज्ञान विधा के एक छात्र के रूप में आपके लिए उपलब्ध कॅरिअर के मुख्य विकल्प खोजने में आपकी सहायता करेगा. कॅरिअर के कुछ उच्च विकल्प निम्नलिखित हैं :-
बी.टेक./बी.ई.
बी.एससी. (ऑनर्स)
बी.एससी-इलेक्ट्रॉनिकी
बी.एससी.- कम्प्यूटर विज्ञान
बी.एससी.-सांख्यिकी
फैशन प्रौद्योगिकी स्नातक
बैचलर ऑफ डिजाइन
बी.सी.ए.
बी.आर्क.
1. बी.टेक./बी.ई. : हमारे देश में इंजीनियरी एक सबसे अधिक वांछित पाठ्यक्रम है. इंजीनियरी की कई शाखाएं छात्रों को उज्ज्वल कॅरिअर की गारंटी देती है. कुछ सर्वाधिक लोकप्रिय  शाखाएं निम्नलिखित हैं:-
बी. टेक.
बी. टेक.- ऑटोमोबाइल इंजीनियरी
बी. टेक.- एयरोस्पेस इंजीनियरी
बी. टेक.- सिविल इंजीनियरी
बी. टेक.- रासायनिक इंजीनियरी
बी. टेक.- कम्प्यूटर विज्ञान
बी. टेक.- वैद्युत इंजीनियरी
बी. टेक.- इलेक्ट्रॉनिकी इंजीनियरी
बी. टेक.- सूचना प्रौद्योगिकी
बी. टेक.- औद्योगिक उत्पादन
बी. टेक.- इंस्ट्रूमेंटल इंजीनियरी
बी. टेक.- यांत्रिक इंजीनियरी
बी. टेक.- खनन इंजीनियरी
बी. टेक.- धातुकर्म इंजीनियरी
बी. टेक.- विनिर्माण इंजीनियरी
बी. टेक.- महासागर इंजीनियरी
बी. टेक.- उत्पादन इंजीनियरी
बी. टेक.- पावर इंजीनियरी
बी. टेक.- दूरसंचार
2. भारत में कई विश्वविद्यालय  एवं कॉलेज बी.टेक./बी.ई. पाठ्यक्रम चलाते हैं. इसमें विभिन्न आई.आई.टी. या भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हंै, जो इंजीनियरी में श्रेष्ठ पाठ्यक्रम देने के लिए पूरे भारत में स्थापित किए गए हैं. इस समय कुल 16 आई.आई.टी. हैं, जो निम्नलिखित हैं :
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बंबई
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खडग़पुर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुडक़ी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राजस्थान
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मंडी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास
देश के विभिन भागों में निम्नलिखित 30 एन.आई.टी. (निट) राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थित हैं जो बी.टेक. पाठ्यक्रम चलाते हैं :-
एम. एन. निट इलाहाबाद
निट अरुणाचल प्रदेश
निट अगरतला
एम. एन. निट भोपाल
निट कालीकट
निट दिल्ली
एम. निट जयपुर
निट कुरूक्षेत्र
निट जमशेदपुर
निट तिरुचिरापल्ली
निट वारंगल
एम. बी. निट सूरत
निट राउरकेला
निट सूरथकल
निट पटना
वि निट नागपुर
निट मिजोरम
निट मेघालय
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर
निट रायपुर
निट हमीरपुर
निट श्रीनगर
निट नगालैंड
निट उत्तराखंड
निट सिक्किम
निट दुर्गापुर
निट गोवा
निट पुदुच्चेरी
निट मणिपुर
निट सिल्चर
देश में आई.आई.आई. टी. (भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान) भी हैं जो सॉफ्टवेयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता कराते हैं. ये संस्थान निम्नलिखित हैं :-
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं विनिर्माण संस्थान, कांचीपुरम, तमिलनाडु.
पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन एवं विनिर्माण संस्थान, जबलपुर, मध्य प्रदेश.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी, असम.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कोटा, राजस्थान.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, चित्तूर, आंध्र प्रदेश.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बड़ोदरा, गुजरात.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, ऊना, हिमाचल प्रदेश.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कल्याणी, पश्चिम बंगाल.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, सोनीपत, हरियाणा.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, लखनऊ.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इम्फाल.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कोट्टायम.
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरनूल.
राजीव गांधी सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेठी.
प्रवेश प्रक्रिया : विभिन्न आई.आई.टी., आई. एस. एम. यू. (भारतीय खनि विद्यापीठ, धनबाद), एन. आई. टी., आई. आई. आई. टी. एवं अन्य कॉलेजों तथा संस्थानों में अधिस्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश जे.ई.ई. मुख्य एवं जे.ई.ई. उच्च वाली दो टियर परीक्षाओं पर आधारित होता है. पहले, जे.ई.ई.- मुख्य तथा जे.ई. ई. उच्च के स्थान पर ए.आई.ई.ई. ई. एवं आई.आई.टी-जे.ई.ई. थी.
जे.ई.ई.-मुख्य : जे.ई.ई.- मुख्य ऑनलाइन और ऑफ लाइन संचालित की जाएगी. एन.आई.टी., आई.आई.आई.टी. तथा अन्य संस्थानों में प्रवेश के लिए मैरिट सूची बारहवीं कक्षा या समकक्ष परीक्षा के अंकों को 40 प्रतिशत वेटेज और जे.ई.ई. मुख्य परीक्षा में प्रदर्शन को 60 प्रतिशत वेटेज देकर बनाई जाएगी.
जे.ई.ई. उच्च : दूसरे चरण को जे.ई.ई. उच्च कहा जाता है जिसमें जे.ई.ई. मुख्य के उच्च 2 लाख रैंक प्राप्त करने वाले छात्र इस परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे. विभिन्न आई.आई.टी. में प्रवेश केवल जे.ई.ई. उच्च में वर्गवार अखिल भारतीय रैंक पर आधारित होगा. सफल छात्र लागू वर्गों में अपनी बारहवीं बोर्ड परीक्षा के उच्च 20 परसेंटाइल में भी होने चाहिएं.
संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई.) के अतिरिक्त विभिन्न राज्य, राज्य इंजीनियरी कॉलेजों के लिए प्रवेश परीक्षाएं भी संचालित करते हैं. वी.आई.टी. जैसे कई प्रख्यात इंजीनियरी कॉलेज बी.टेक. पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी निजी प्रवेश परीक्षाएं भी संचालित करते हैं.
2. बी. एससी. (ऑनर्स):
भौतिकी, रसायन विज्ञान या गणित में बी.एस.सी. (ऑनर्स) आपको शिक्षा शास्त्र और अनुसंधान में कॅरिअर बनाने में सहायता करेगा. स्नातक योग्यता के बाद कोई मास्टर डिग्री आपको शिक्षा शास्त्र तथा अनुसंधान क्षेत्र में ले जाएगी, जहां आप किसी भी अनुसंधान संस्थान में कनिष्ठ अनुसंधान अध्येता के रूप में कार्य कर सकते हैं या किसी विश्वविद्यालय में लेक्चरर के रूप में कॅरिअर को आगे बढ़ा सकते हैं. रसायन, उद्योग, भेषज उद्योग या ओ.एन.जी.सी. जैसे सरकारी संगठनों में भी रोज़गार उपलब्ध हैं.
3. बी.एससी. (इलेक्ट्रॉनिकी) :
इलेक्ट्रॉनिकी विज्ञान की एक शाखा है जो विद्युत सर्किटों से संबद्ध होती है और जिसमेें सक्रिय विद्युत घटक निहित होते हैं. इलेक्ट्रॉनिकी में कोई डिग्री पाठ्यक्रम छात्रों को उन कौशलों में सक्षम बनाता है जो वैद्युत, इलेक्ट्रॉनिकी, कम्प्यूटर डिजाइन, डिजिटल सिस्टम डिजाइन, ऑटोमेशन तथा संचार डिजाइन के लिए अपेक्षित होते हैं, ऐसे कई कॉलेज और संस्थान हैं जो इलेक्ट्रॉनिकी में अधिस्नातक पाठ्यक्रम चलाते हैं. चूंकि इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोग व्यापक रूप में प्रयोग में है और इलेक्ट्रॉनिक उपस्कर आज के विश्व की बुनियादी आवश्यकता  बन गए हैं. इसलिए इस क्षेत्र में रोजग़ार के बेहतर अवसर हैं. बी.एस.सी. इलेक्ट्रॉनिकी के बाद सरकारी तथा निजी-दोनों क्षेत्रों में रोजग़ार के अवसर उपलब्ध होते हैं. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन लिमिटेड, भारत हैवी इलेक्ट्रॉनिक्स  लिमिटेड (भेल), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल), नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एन.टी.पी.सी.), भारत संचार निगम लिमिटेड (बी.एस.एन.एल) जैसे सरकारी सार्वजनिक  क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिकी में स्नातकों को रोजग़ार के अच्छे अवसर प्रदान करते हैं.
4. बी.एससी. (कम्प्यूटर विज्ञान) :
यदि आप कोई नव-प्रवर्तित सोच रखने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो कम्प्यूटर के बारे में उत्साह रखते हैं तो आपके लिए कम्प्यूटर विज्ञान में बी.एस.सी. एक सही विकल्प है. कई विश्वविद्यालय/ संस्थान/कॉलेज  ऐसे अधिस्नातक पाठ्यक्रम चलाते हैं जो आपको डिजिटल भविष्य के निर्माण करने वाले उच्च क्षमता वाले व्यवसायी बनाते हैं. सॉफ्टवेयर विकास  कंपनियों, सिस्टम अनुरक्षण केंद्रों, विनिर्माणी कंपनियों, सरकारी संगठनों में रोजग़ार के व्यापक अवसर हैं, जहां आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेवलपर, प्रोग्रामर, प्रोग्राम एनालिस्ट तथा डी.टी.पी. ऑपरेटर के रूप में कार्य कर सकते हैं. एम.एस.सी (कम्प्यूटर विज्ञान) जैसे उच्च अध्ययन का विकल्प भी उपलब्ध है जो आपके कॅरिअर की संभावनाओं को बढ़ाएगा.
5. बी.एस.सी. (सांख्यिकी) :
सांख्यिकी में तीन वर्षीय अधिस्नातक पाठ्यक्रम उन छात्रों के लिए श्रेष्ठ रूप में उपयुक्त है जो अच्छी तर्क क्षमता और गणित के प्रति अभिवृत्ति रखने के साथ एक जिज्ञासापूर्ण तथा संयमित मस्तिष्क रखते हैं. इस पाठ्यक्रम को चुनने के लिए आपमें समस्याओं के अच्छे समाधान, निर्णय लेने और अभिव्यक्ति कौशल होना चाहिए. देश में अनेक कॉलेज एवं संस्थान हैं जो सांख्यिकी में बी.एस.सी. कराते हैं जिसके लिए +2स्तर पर गणित एक मुख्य विषय के रूप में होना आवश्श्यक है. निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में सांख्यिकी प्रबंधक, एनालिस्टसांख्यिकी सलाहकार, के्रडिट रिस्क स्टे्रटेजिस्ट, मार्केट रिसर्च एनालिस्ट, रिसर्चर आदि के रोजग़ार होते हैं.
6. बैचलर ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी :
फैशन का मोहक विश्व उन व्यक्तियों के लिए है जो सृजनात्मक अभिवृत्ति और कल्पनाशील क्षमता रखते हैं. फैशन प्रौद्योगिकी में कलर मिक्सिंग, डिजाइन, डिजाइन प्रबंधन, फैब्रिक डिजाइन, फैशन मर्चेंडाइज, फैशन एसेसरी डिजाइन, प्र्रिंटिंग टेक्सटाइल साइंस आदि जैसे अध्ययन के विविध क्षेत्र शामिल हैं. फैशन प्रौद्योगिकी में कोई स्नातक डिग्री एक उज्जवल कॅरिअर का प्रवेश द्वार है. जहां आपको आकर्षक रोजग़ार मिलता है. देशभर में ऐसे अनेक संस्थान हैं जो फैशन प्रौद्योगिकी में अधिस्नातक पाठ्यक्रम चलाते हैं. इस क्षेत्र में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) प्रमुख संस्थान है. यह संस्थान फैशन से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक प्रवेश परीक्षा संचालित करता है. फैशन उद्योग में तथा गारमेंट, टैक्सटाइल, चर्म उद्योग में रोजग़ार के शानदार अवसर हैं.
7. बैचलर ऑफ डिज़ाइन :
 डिज़ाइन का बृहद क्षेत्र आपमें से उन व्यक्तियों के लिए है जो उन चीजों को चित्रांकित करने में रुचि रखते हैं जो आपकी सोच एवं विचार की झलक देते हैं. यह एक रचनात्मक क्षेत्र है जो गारमेंट, चर्म, वस्त्र आदि जैसे फैशन से जुड़े उद्योगों में रोजग़ार देता है. फैशन एवं इंटीरियर डिज़ाइन में कोई अधिस्नातक पाठ्यक्रम आपको गारमेंट, फुटवियर, ज्वेलरी आदि में मूल डिज़ाइन तैयार करने में सक्षम बनाता है. यह क्षेत्र इन उद्योगों में नवीनतम बाजार प्रवृत्तियों  से जुड़ा है. आपको गारमेंट  विनिर्माण इकाइयों तथा गारमेंट स्टोर चेन्स, ज्वेलरी हाउसेस, लेदर कंपनियों वस्त्र मिलों आदि में कॉस्ट्यूम  डिजाइनर, ग्राफिक डिजाइनर, फैशन सलाहकार , तकनीकी डिजाइनर, इलस्टे्रटर आदि रोजग़ार दिए जाएंगे.
8. बी.सी.ए. :
यदि आप कम्प्यूटर में गहरी रुचि रखते हैं और कम्प्यूटर अनुप्रयोग के क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं तो बी.सी.ए. या बैचलर इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन एक सही विकल्प है. यह एक तीन वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम है जो मुख्य रूप से प्रोग्रामिंग लैंग्वेज़ पर बल देता है. यदि आपने बारहवीं कक्षा में गणित एवं अंगे्रजी मुख्य विषय के रूप में लिए हों तो आप यह पाठ्यक्रम चुन सकते हैं. कई कॉलेज बी.सी.ए. में प्रवेश देने के लिए प्रवेश परीक्षाएं संचालित करते हैं. बी.सी.ए. के बाद आप एम.सी.ए. करके अपने कॅरिअर को आगे बढ़ा सकते हैं जो आपको बी.टेक. डिग्रीधारी के समकक्ष बनाएगा.
9. बी. आर्क. :
वास्तुकला भवनों की डिजाइन एवं निर्माण के कार्यों से संबद्ध है. वास्तुकला में तीन-वर्षीय अधिस्नातक पाठ्यक्रम या बी.आर्क. करने के लिए +2 स्तर पर गणित एक मुख्य विषय के रूप में होना आवश्यक है. कई कॉलेज/संस्थान बी.आर्क. चलाते हैं. एक वास्तुकला परिषद है जो वास्तुकला में राष्ट्रीय अभिवृत्ति परीक्षा  संचालित करती है और इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को इस परीक्षा में बैठना होता है. भू-सम्पदा क्षेत्र में आधारिक संरचना एवं अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में बी.आर्क. आपको वास्तुकार, वास्तुकला ड्राफ्ट्समेन, सलाहकार, इंटीरियर डिजाइनर, डाटा एनालिस्ट, वास्तुकला सहायक आदि जैसे रोजग़ार देता है.
इन मुख्य अधिस्नातक पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त, कर्मचारी चयन आयोग (एस.एस.सी) के माध्यम से सरकारी रोजगार के भी विकल्प हैं. सेना, नौसेना तथा वायु सेना भी +2 उत्तीर्ण प्रत्याशियों को विविध कॅरिअर देते हैं. जो छात्र कोई डिग्री पाठ्यक्रम करने की स्थिति में नहीं हैं, इस विधा में उनके लिए अनेक डिप्लोमा पाठ्यक्रम हैं जो उन्हें अच्छे रोजग़ार दिला सकते हैं और उन्हें इंजीनियरी छात्रों के समकक्ष होने के लिए उच्च अध्ययन का विकल्प देते हैं.
(लेखिका एक कॅरिअर काउंसलर एवं लाइफ स्किल्स टे्रनर हैं. ई-मेल : ruchiupadhyay.careercounsellor@gmail.com)