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संपादकीय लेख


अंक संख्या 11, 11-17 जून,2022

पीएम गति-शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

शासन में आदर्श बदलाव और समावेशी अवसंरचना का सृजन

 

डॉ रंजीत मेहता

वर्ष 2022 एक बहुत ही खास वर्ष है, जब भारतीय नागरिक देश की आजादी के 75 साल के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव और अपने लोगों, संस्कृति तथा उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास का जश्न मना रहे हैं. भारत एक वैश्विक शक्ति बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है, हमारे प्रयासों में हमारे लोगों और सामान्य रूप से दुनिया दोनों के लिए जबरदस्त संभावनाएं हैं. हम जिस प्रकार का नया भारत और विश्व- व्यवस्था बनाना चाहते हैं यह हमें उसकी कल्पना करने का अवसर और अधिकार दोनों प्रदान करता है. अवसंरचना, भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने वाला एक प्रमुख वाहक है. किसी राष्ट्र की अवसंरचना की गुणवत्ता उसकी आर्थिक जीवन शक्ति का एक महत्वपूर्ण सूचकांक है. विश्वसनीय परिवहन, स्वच्छ पानी और कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था किसी सभ्य समाज और उत्पादक अर्थव्यवस्था के मूल तत्व हैं. भारत की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है तथा यह और बड़ी हो रही है. कुछ अनुमान बताते हैं कि भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. सतत आर्थिक विकास के लिए अवसंरचना का महत्व स्वीकृत तथ्य है. परिवहन, बिजली और संचार को कवर करने वाली भौतिक आधारभूत संरचना, अपने पश्चगामी और अग्रगामी संयोजन के माध्यम से विकास की सुविधा प्रदान करती है, जो जीवन की गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव डालती है. इसमें जल आपूर्ति, स्वच्छता, सीवेज निपटान, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित सामाजिक आधारभूत संरचना शामिल है. अवसंरचना का निष्पादन काफी हद तक अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का प्रतिबिंब है.

 

मई 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में तेजी से मंजूरी और विवाद समाधान, अटकी परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण और कंपनियों के लिए आसान निकास शामिल हैं. सरकार द्वारा सड़क क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के साथ, कई विदेशी कंपनियों ने इस क्षेत्र के विकास के लिए भारतीय निर्माताओं के साथ भागीदारी की है. बदलाव लाने की कोशिश करते समय बड़ा सोचना जरूरी है, क्योंकि परिवर्तन मामूली योजनाओं से नहीं आता है. नए भारत की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, हम प्रस्तावित 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में क्या देखना चाहेंगे? निश्चित रूप से, इसके लिए डिज़ाइन, वित्त पोषण और शासन की आवश्यकता होगी. सरकार का ध्यान अवसंरचना और अन्य क्षेत्रों में निजी निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाने पर है जहां सरकार अपनी वित्तीय मजबूरियों को देखते हुए निवेश करने में असमर्थ है. सरकार ने संरचनात्मक सुधारों, नीतियों तथा प्रक्रियाओं में स्पष्टता, आवंटन जोखिम दक्षता और संसाधनों की स्थापना करके एक सक्षम वातावरण बनाना जारी रखा है.

 

 

तेजी से शक्तिशाली अवसंरचना के निर्माण की आवश्यकता

प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर, 2021 को मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और अवसंरचना के समग्र विकास के लिए देश में 100 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मास्टर प्लान – ‘पीएम गति शक्तिका वादा किया. प्रधानमंत्री ने कहा, 'यह भारत को दुनिया की व्यापारिक राजधानी बनने के सपने को साकार करने में मदद करेगा.

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान निम्नलिखित छह स्तंभों पर आधारित है:-

·         व्यापकता: इसमें एक केंद्रीकृत पोर्टल के साथ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की सभी मौजूदा और नियोजित पहल शामिल होगी. प्रत्येक विभाग को अब एक-दूसरे की गतिविधियों की जानकारी होगी और व्यापक तरीके से परियोजनाओं की योजना बनाने और निष्पादित करने में  महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध हो सकेगा.

·         प्राथमिकता: इसके माध्यम से विभिन्न विभाग क्रॉस-सेक्टोरल इंटरैक्शन के माध्यम से अपनी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने में सक्षम होंगे.

·         अनुकूलन: राष्ट्रीय मास्टर प्लान बड़ी कमियों की पहचान के बाद परियोजनाओं की योजना बनाने में विभिन्न मंत्रालयों की सहायता करेगा. एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल के परिवहन के लिए, योजना समय और लागत के मामले में सबसे इष्टतम मार्ग चुनने में मदद करेगा.

·         समन्वय: मंत्रालय और विभाग अक्सर अलग-थलग रहकर काम करते हैं. परियोजना के नियोजन एवं क्रियान्वयन में समन्वय का अभाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप विलम्ब होता है. पीएम गति शक्ति प्रत्येक विभाग की गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच काम का समन्वय सुनिश्चित करके शासन की विभिन्न परतों को समग्र रूप से समन्वित करने में मदद करेगी.

·         विश्लेषी: योजना जीआईएस- आधारित स्थानिक नियोजन और 200 से अधिक परतों वाले विश्लेषणात्मक उपकरणों के साथ एक ही स्थान पर संपूर्ण डेटा प्रदान करेगी, जिससे निष्पादन एजेंसी को बेहतर दृश्यता प्राप्त होगी.

·         गतिशील: सभी मंत्रालय और विभाग अब जीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से बहु-क्षेत्रीय परियोजनाओं की प्रगति की परिकल्पना, समीक्षा और निगरानी करने में सक्षम होंगे, क्योंकि उपग्रह इमेजरी समय-समय पर जमीनी प्रगति देगी, और परियोजनाओं की प्रगति को पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा. यह मास्टर प्लान को बढ़ाने और अद्यतन करने के लिए महत्वपूर्ण उपायों की पहचान करने में मदद करेगा.

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के बाद भारत में अवसंरचना के विकास की दिशा में तीसरा बड़ा कदम और एक लंबा आसन्न सुधार है. गति शक्ति सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर लाकर परियोजनाओं को अधिक गति और शक्ति देने का अभियान है. इस तरह, विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को एकसमान दृष्टि से डिज़ाइन और क्रियान्वित किया जाएगा.भारत सरकार के उद्योग विभाग ने कई बुनियादी ढांचा मंत्रालयों में 81 उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं की पहचान की है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सूचीबद्ध 81 उच्च-प्रभाव वाली परियोजनाओं में से आधे के लिए जिम्मेदार है, इसके बाद अन्य हैं. राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) प्रमुख औद्योगिक गलियारे, प्रमुख एक्सप्रेसवे और राजमार्ग, जिनमें 1,257 किलोमीटर अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे, 1,350 किलोमीटर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और 210 किलोमीटर दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे शामिल हैं. दुनिया की सबसे बड़ी ब्रॉडबैंड परियोजना भारतनेट, सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में होगी.इसके अलावा, राज्यों और मंत्रालयों को सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि वे गति शक्ति का उपयोग कर सकें. कई मंत्रालयों के अधिकारियों से बना एक नेटवर्क नियोजन समूह, यह गारंटी देने के लिए स्थापित किया गया है कि परियोजनाओं की योजना मास्टर प्लान के अनुसार बनाई गई है. गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान में वन भूमि और उपलब्ध औद्योगिक संपदा के बारे में जानकारी के साथ 400 से अधिक डेटा लेयर्स उपलब्ध हैं. नतीजतन, परियोजना संरेखण और अन्य प्रकार की अनुमतियां डीपीआर चरण में ही संभव होंगी.

 

गति शक्ति मास्टर प्लान एक केंद्रीकृत पोर्टल में भू-मानचित्रण और रीयल-टाइम डेटा का उपयोग करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विशेष रूप से बहु-क्षेत्रीय और बहु-क्षेत्रीय पहुंच वाली जिन प्रमुख परियोजनाओ की योजना बनाई जा रही है, उनके बारे में विभाग और राज्य, जानकारी हासिल कर सकें. रेलवे, सड़क तथा राजमार्ग, पेट्रोलियम तथा गैस, बिजली, दूरसंचार, नौवहन, विमानन और अन्य सहित केंद्र सरकार के 16 विभाग इस पहल का हिस्सा होंगे.प्रत्येक विभाग को अब एक-दूसरे की गतिविधियों की जानकारी  होगी, उन्हें व्यापक तरीके से परियोजनाओं के नियोजन और निष्पादन के दौरान महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हो सकेगा. इसके माध्यम से विभिन्न विभाग क्रॉस-सेक्टोरल इंटरैक्शन के माध्यम से अपनी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने में सक्षम होंगे. 110 लाख करोड़ रुपये से कम की अधिकांश मेगा परियोजनाओं, नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन की निगरानी, गति शक्ति के तहत की जाएगी.गति शक्ति विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को शामिल करेगी - भारतमाला परियोजना, सागरमाला, उड़ान, अंतर्देशीय जलमार्ग, शुष्क/भूमि बंदरगाह, आदि. यह योजना लागत दक्षता के साथ कार्यों को त्वरित रूप से पूरा करना भी सुनिश्चित करेगी. इसके पीछे विचार, सभी प्रासंगिक हितधारकों को, उपयुक्त स्थान पर सही आकार के अवसंरचना का शीघ्रता से निर्माण करने के लिए पंक्तिबद्ध करना है.

 

 

 

 

गति शक्ति के तहत क्या परिकल्पित है

·         योजना में 2024-25 तक 11 औद्योगिक गलियारे, रक्षा उत्पादन में 1.7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार और 38 इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर तथा 109 फार्मा क्लस्टर हासिल करना शामिल हैं.

·         राष्ट्रीय मास्टर प्लान सभी बुनियादी ढांचा मंत्रालयों के लिए 2024-25 तक के लक्ष्य निर्धारित करता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए, दो लाख किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का लक्ष्य है, तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ 5,590 किलोमीटर के चार या छह लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरा करना और उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों की राजधानियों को चार लेन राष्ट्रीय राजमार्गों या दो दो लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ा जाना है.

·         रेलवे के लिए, 2020 में 1,210 मिलियन टन से 2024-25 तक 1,600 मिलियन टन कार्गो, अतिरिक्त लाइनों को पूरा करके रेलवे नेटवर्क की भीड़ को 51 प्रतिशत  कम करना और दो समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के कार्यान्वयन का लक्ष्य है.

·         नागरिक उड्डयन में, 2025 तक कुल 220 हवाई अड्डों, हेलीपोटर््स और वाटर एयरोड्रोम बनाकर मौजूदा विमानन सुविधाओं को दोगुना करने का लक्ष्य है, जिसका अर्थ है कि तब तक अतिरिक्त 109 ऐसी सुविधाओं का निर्माण करना होगा. जहाजरानी में, 2024-25 तक बंदरगाहों पर कुल कार्गो क्षमता को 1,759 मिलियन टीपीए करने का लक्ष्य है, जो 2020 में 1,282 मिलियन टीपीए था.

·         योजना के अनुसार, उद्योगों के लिए प्रमुख मांग और आपूर्ति केंद्रों को जोड़ने वाली अतिरिक्त 17,000 किमी लंबी ट्रंक पाइपलाइन का निर्माण करके देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क को 2024-25 तक दोगुना करके 34,500 किमी करने का लक्ष्य है. विद्युत लाइनों में, 2024-25 तक कुल पारेषण नेटवर्क 4.52 लाख सर्किट किमी और अक्षय ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 87.7 गीगावाट से बढ़ाकर 225 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है.

पीएम गति शक्ति आर्थिक विकास तथा सतत विकास के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण है और निम्नलिखित सात वाहकों से संचालित है:-

1. रेलवे

2. सड़कें

3. बंदरगाह

4. जलमार्ग

5. हवाई अड्डे

6. सार्वजनिक परिवहन

7. रसद अवसंरचना

ये सभी 7 वाहक एक साथ अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे. ये एनर्जी ट्रांसमिशन, आईटी कम्युनिकेशन, बल्क वाटर एंड सीवरेज, और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरक भूमिकाओं द्वारा समर्थित हैं. यह दृष्टिकोण स्वच्छ ऊर्जा और सबका प्रयास द्वारा संचालित है जो केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के सम्मिलित प्रयासों - सभी के लिए, विशेष रूप से युवाओं के लिए नौकरी और उद्यमशीलता के अनेक अवसर प्रदान करते हैं. इनमें योजना, वित्तपोषण सहित नवीन तरीकों, प्रौद्योगिकी के उपयोग और तेजी से कार्यान्वयन पर ज़ोर दिया जाएगा.

अंत में, गति शक्ति कार्यक्रम विभागवाद के चलन को तोड़कर निर्णय लेने में एक आदर्श बदलाव का प्रतीक है. प्रधानमंत्री गति शक्ति, प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए हितधारकों के वास्ते समग्र योजना को संस्थागत बनाने के माध्यम से पिछले मुद्दों को संबोधित करेगा. अलग से योजना बनाने और डिज़ाइन करने के बजाय, इन्फ्रा परियोजनाओं को अब एक सामान्य दृष्टि के साथ डिज़ाइन और निष्पादित किए जाने की उम्मीद है. संपर्क में सुधार और भारतीय व्यवसायों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कपड़ा क्लस्टर, फार्मास्युटिकल क्लस्टर, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक पार्क, औद्योगिक गलियारे, मछली पकड़ने के क्लस्टर, कृषि क्षेत्र जैसे आर्थिक क्षेत्र भी होंगे.इस योजना में, सभी मौजूदा और प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्रों को एक ही प्लेटफॉर्म में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी अवसंरचना के साथ मैप किया गया है. विभिन्न मंत्रालयों की अलग-अलग परियोजनाओं की जांच की जाएगी और भविष्य में समग्र योजना के मापदंडों के अंतर्गत मंजूरी दी जाएगी, जिससे प्रयासों में तालमेल बिठाया जा सकेगा. गति शक्ति भारत में एक विश्व स्तरीय, निर्बाध मल्टी-मॉडल परिवहन नेटवर्क बनाने के लिए तालमेल बनाएगा. राष्ट्रीय मास्टर प्लान अवसंरचना के समन्वित नियोजन के लिए आधुनिक तकनीक और नवीनतम आईटी उपकरणों को नियोजित करेगा. साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए 200 से अधिक परतों वाली जीआईएस-आधारित उद्यम संसाधन नियोजन प्रणाली एक उदाहरण है. निगरानी के लिए उपग्रह इमेजरी, एक और उपयोग है. समय पर मंजूरी सुनिश्चित करने तथा संभावित मुद्दों को चिह्नित करने और परियोजना की निगरानी में डिजिटीकरण एक बड़ी भूमिका निभाएगा.गति शक्ति योजना परियोजनाओं के समय और लागत में कटौती के अलावा नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी के माध्यम से आधुनिक अवसंरचना के विकास को एक नई दिशा देगी. अवसंरचना में निवेश में वृद्धि केवल अर्थव्यवस्था में मांग पैदा करेगी बल्कि टिकाऊ, न्यायसंगत तथा समावेशी विकास भी करेगी और रोज़गार के विशाल अवसर पैदा करेगी. गुणक प्रभाव के कारण, अवसंरचना पर खर्च किया गया एक रुपया अर्थव्यवस्था में 2.5 रुपये के रूप में होता है. यदि सकल घरेलू उत्पाद पर अवसंरचना के निवेश के गुणक प्रभाव को कम समय सीमा के भीतर अधिकतम करना है, तो यह महत्वपूर्ण है कि विशिष्ट बुनियादी ढांचा परियोजनाएं जो प्रमुख व्यापार मार्गों, आंतरिक और बाहरी दोनों का हिस्सा हैं, को प्राथमिकता दी जाए.

 

मैक्रो नियोजन और सूक्ष्म कार्यान्वयन के बीच व्यापक अंतर, समन्वय की कमी, अग्रिम जानकारी की कमी, और अलग-थलग काम करने के कारण बजट की बर्बादी और निर्माण में बाधा रही है, इसलिए गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से इन मुद्दों का समाधान होगा और मास्टर प्लान के आधार पर काम करने से  संसाधनों का इष्टतम उपयोग होगा.भारत में अनियोजित विकास के कारण सकल घरेलू उत्पाद की लगभग 13 प्रतिशत की उच्च रसद लागत है, क्योंकि इसमें बंदरगाहों को बिना रेल लाइनों के छोड़ दिया था, तटों तक पहुंच के बिना समुद्र तट-क्षेत्र का निर्माण किया था, और किसानों को बाजारों का सहारा नहीं मिला था. नतीजतन, उत्पादन की लागत बढ़ जाती है और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाती है, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ जाती है. गतिशक्ति योजना इन कमियों को दूर करेगी और व्यापक रूप से प्रौद्योगिकी का लाभ उठाएगी, जिसमें भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन एंड जियोइनफॉरमैटिक्स द्वारा विकसित इसरो इमेजरी के साथ स्थानिक योजना उपकरण शामिल हैं.

जमीनी स्तर के विकास का मूल लक्ष्य रोज़गार पैदा करना है, संपर्क का एक ऐसा स्तर हासिल करना है जहां सभी गांवों में सड़कें हों, सभी परिवारों के बैंक खाते हों, 100 प्रतिशत लाभार्थियों के पास आयुष्मान भारत कार्ड हों, और सभी पात्र लोगों के पास उज्ज्वला योजना के माध्यम से गैस कनेक्शन हों.

(लेखक वरिष्ठ उद्योग सलाहकार, प्रबंधन में पीएच.डी हैं और उन्हें  विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिकाओं में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है. ranjeetmehta@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है).

 व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.