नौकरी फोकस


Volume-41, 6-12 January, 2018

 
फार्मेसी में कॅरिअर की संभावनाएं

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

हममें से अधिकांश कभी न कभी किसी औषधि का उपयोग करते हैं. इन औषधियों को बनाने के पीछे एक विज्ञान है. यह विज्ञान भेषज विज्ञान कहलाता है. यह विषय भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और सीमित सीमा तक गणित एवं इंजीनियरी का भी मिश्रण है.
इस विषय में, स्वास्थ्य परिचर्या उद्योग में औषधियों को तैयार करने एवं उनकी व्यवस्था करने में निहित तकनीकों का अध्ययन शामिल होता है. छात्र सामान्य भौतिकी, मानव शरीर रचना विज्ञान तथा शारीरिक क्रिया विज्ञान में प्रशिक्षण के साथ औषधि निरूपण के संश्लेषण, औषधि प्रयोग के लिए औषधियों के विश्लेषण, विनियमन, परीक्षण एवं अनुसंधान के बारे में भी ज्ञान प्राप्त करते हैं. यह एक अनुसंधान उन्मुखी विषय है.
फार्मेसी के छात्रों को उपलब्ध ज्ञान तथा संसाधनों का उपयोग करना और औषधियों एवं औषधि निर्माण में नई खोज करना अपेक्षित होता है. एक योग्य फार्मासिस्ट के रूप में वे डॉक्टरों तथा रोगियों के बीच एक कड़ी का काम करते हैं. उनका निष्पादन औषधियों की प्रभावकारिता तथा उपयोग की उनकी समझ पर आधारित होता है. फार्मासिस्ट डॉक्टरों को औषधियों की संरचना, औषधि विशेष किस तरह असर करती है, उसके दुष्प्रभाव यदि कोई हो आदि की जानकारी देता है. इस तरह स्वास्थ्य-परिचर्या को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है. आज कई कठिन रोगों का उपचार करने के लिए हमारे पास अनेक उन्नत औषधियां हैं. इसका श्रेय फार्मासिस्ट्स तथा अन्य अनुसंधान कर्ताओं को जाना चाहिए.
भारतीय भेषज (औषधि) उद्योग, जो १५ प्रतिशत प्रति वर्ष की गति से आगे बढ़ रहा है, के वर्ष २०२० तक ५५ बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की आशा है. इस तरह, यह विश्व का छठा सबसे बड़ा भेषज बाजार होगा. भारत विश्व में जैऩरिक औषधियों का सबसे बड़ा प्रदाता है और मात्रा के संबंध में भारतीय जैऩरिक्स विश्व निर्यात का २० प्रतिशत है. यह उन्नति भारत के अनेक श्रेष्ठताओं के कारण हुई है. औषधियों के क्षेत्र में बात करें तो भारत में इसके उत्पादन की लागत अमरीका से लगभग ३३ प्रतिशत कम है. पश्चिमी देशों की तुलना में यहां श्रमिक लागत भी ५०-५५ प्रतिशत सस्ती है. इंडियन  ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के अनुसार अमरीका से बाहर यू.एस. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यू.एस.एफ.डी.ए.) अनुमोदित विनिर्माणी एककों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या भारत में है. जहां २६३३ एफ.डी.ए. अनुमोदित औषधि उत्पाद हैं.
स्वास्थ्य परिचर्या एक ऐसा क्षेत्र है जो आर्थिक उछाल, उतार-चढ़ाव या मंदी के बावजूद हमेशा मांग में रहेगा.
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि स्वास्थ्य परिचर्या का महत्व कभी कम नहीं होगा. फार्मासिस्ट की आवश्यकता हमेशा रहेगी. यदि इस विषय के प्रति आपका रुझान है और इसे पसंद करते हैं तो आप फार्मेसी को अपने कॅरिअर के रूप में चुन सकते हैं.
शिक्षा
विज्ञान विषयों के साथ १०+२ पूरी करने के बाद फार्मेसी में औपचारिक अध्ययन किया जा सकता है. आप २ वर्ष की अवधि के फार्मेसी पाठ्यक्रम में डिप्लोमा या ४ वर्ष की अवधि का कोई स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम कर सकते हैं. व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए इन दोनों पाठ्यक्रमों के बाद ६ महीने की इंटर्नशिप करनी आवश्यक है. डी.फार्मा में प्रवेश सीधे दिया जाता है. बी. फार्मा के लिए संस्थानों की प्रवेश प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं. कुछ संस्थान १०+२ में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश देते हैं, जबकि कुछ संस्थान एक लिखित परीक्षा लेते हैं. अन्य मामलों की तरह स्नातक डिग्री आपको उच्च कॅरिअर की ओर ले जाती है.
बी. फार्मा करने के बाद फॉर्मेसी में आप किसी मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं. डॉक्टरेट (पीएच.डी.) डिग्री करने के लिए फार्मेसी में अनुसंधान के अनेक अवसर हैं.
विभिन्न फार्मेसी पाठ्यक्रमों में जो विषय शामिल होते हैं वे हैं-अकार्बनिक, कार्बनिक रसायन विज्ञान, जै़व रसायन विज्ञान, भौतिकीय एवं स्वास्थ्य विज्ञान, फार्माकोलोजी तथा टॉक्सिलोजी आदि.
कईं अन्य स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की तरह ही एम. फार्मा के अध्ययन के दौरान छात्रों को कोई विशेषज्ञता क्षेत्र चुनना अपेक्षित होता है.
कुछ उपलब्ध विशेषज्ञताएं इस प्रकार हैं :-
*फार्माकोलोजी
*फार्मास्युटिकल इंजीनियरी
*अस्पताल फार्मेसी
*फार्मास्युटिकल कैमिस्ट्री
*फार्मास्युटिकल जैव प्रौद्योगिकी
*फार्मेसी उत्पादों का गुणवत्ता आश्वासन एवं नियंत्रण
फार्मास्युटिकल (भेषज) प्रबंधन
फार्मास्युटिकल विज्ञान में उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान के लिए कुछ विकसित देश व्यापक अवसर देते हैं. इन देशों में अमरीका, कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड, बैल्जियम, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड शामिल हैं. आप अमरीका, ग्रेट ब्रिटेन आदि जैसे देशों में जन स्वास्थ्य में मास्टर या स्वास्थ्य प्रबंधन में मास्टर पाठ्यक्रम कर सकते हैं. जहां सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य परिचर्या पर सरकार द्वारा अत्यधिक राशि व्यय की जाती है और कम्यूनिटी फार्मेसी की अत्यधिक मांग है.
होनहार एंव जरूरतमंद छात्रों को कई छात्र वृत्तियां भी प्रदान की जाती हैं.
भारत सरकार में फार्मेसी पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थान
देश में फार्मास्युटिकल शिक्षा के समान मानक के विनियमन तथा रखरखाव तथा फार्मा. व्यवसाय में नीतिगत मानकों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष १९४८ में भारतीय फार्मेसी परिषद की स्थापना की थी. इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध सूची के अनुसार, फार्मेसी में पाठ्यक्रम चलाने के लिए ११०० से भी अधिक संस्थान अधिकृत हैं. इस सूची में कुछ प्रतिष्ठित संस्थान निम्नलिखित हैं.
*कमला नेहरू फार्मेसी एवं अनुसंधान संस्थान, सुल्तानपुर, उ.प्र.
*कानपुर प्रौद्योगिकी एवं फार्मेसी संस्थान, कानपुर
*रुडक़ी फार्मेसी कॉलेज, रुडक़ी उत्तराखंड
*इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, जलपाईगुडी, पश्चिम बंगाल
*बंगाल कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस एंड रिसर्च, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल
*राजस्थान फार्मेसी कॉलेज, जयपुर
*क्षेत्रीय फार्मेसी कॉलेज जयपुर
*अलवर फार्मेसी कॉलेज, अलवर, राजस्थान
*हिमालयन फार्मेसी इंस्टीट्यूट, रेंगपो, सिक्किम
*कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मदुरै चिकित्सा कॉलेज, मदुरै
*आर बीएस कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइसेंस, कोयम्बत्तूर
*मद्रास चिकित्सा कॉलेज एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नै
*सैंट मैरी फार्मेसी कॉलेज, सिकंदराबाद
*सरोजनी नायडू वनिता फार्मेसी महाविद्यालय, हैदराबाद
*कमला नेहरू फार्मेसी कॉलेज, नागपुर
*इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस, भुवनेश्वर
*गायत्री फार्मेसी कॉलेज, सम्बलपुर उडीसा
*ऋषिराज फार्मेसी कॉलेज इंदौर
*राजीव गांधी फार्मेसी कॉलेज भोपाल
*सी.एम.आर. फार्मेसी कॉलेज बेंगलुरू
*बसवेश्वर फार्मेसी कॉलेज, बीदर, कर्नाटक
*यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कोट्टयम, केरल
*वैश भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, रोहतक, हरियाणा
*चिकित्सा एवं समवर्गी विज्ञान स्कूल, गुरूग्राम, हरियाणा
*हिमाचल भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, नादौन, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश
*भेषज विज्ञान विभाग, बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा, रांची
*भगवान महावीर फार्मेसी कॉलेज, सूरत गुजरात
*बिहार फार्मेसी कॉलेज, पटना
*भेषज विज्ञान विभाग, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय, असम
*जे.के. फार्मेसी कॉलेज, छत्तीसगढ़
*दिल्ली भेषज विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
*महाराजा सूरजमल फार्मेसी संस्थान, नई दिल्ली
राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) मोहाली (पंजाब) हैदराबाद, अहमदाबाद, गुवाहाटी एवं हाजीपुर (बिहार), स्थित अपने केंद्रों के साथ भेषज विज्ञान मेंं उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान की एक शीर्ष संस्था है जो अधिकांशत: स्नातकोत्तर एवं डॉक्टोल पाठ्यक्रम चलाता है.
किसी भी फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले आप सुनिश्चित कर लें कि वह पाठ्यक्रम भारतीय फार्मेसी परिषद से मान्यताप्राप्त हैं.
रोज़गार के अवसर
फार्मेसी के छात्र ऐसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य अवसरों की तलाश कर सकते हैं. जहां सक्षम व्यवसायियों की हमेशा आवश्यकता होती है.
ये व्यापक क्षेत्र इस प्रकार है :
फॉर्मूलेशन: यहां आप ऐसी औषधि विनिर्माण कंपनी में कार्य करेंगे जो दवाइयों का उत्पादन करती हैं और ये दवाइयां टेबलेट, कैप्सूल, टीकों, सिरप या लोशन आदि के रूप में हो सकती हैं. आपको कुछ दवाइयों की देखभाल उनके उपयुक्त फार्मूलेशन और उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी का कार्य दिया जा सकता है. ऐसे कार्य अवसर बड़ी औषधि विनिर्माण कंपनियों में भी उपलब्ध होते हैं.
अनुसंधान एवं विकास: सभी बड़ी औषधि कंपनियों के अपने अनुसंधान एवं विकास विभाग होते हैं जहां अनुसंधानकर्ता नई औषधियों की खोज, विधमान औषधियों की प्रभावकारिता में सुधार और रसायनों घटकों जो दवाइयों में प्रयोग में लाए जाते हैं, उनकी सम्पत्तियों के अध्ययन में शामिल  होते हैं. औषधि की खोज और भेषजविज्ञान में रत अनुसंधान संस्थाएं भी होती      हैं. यें संस्थाएं या तो सरकार द्वारासमर्थित अथवा निजी निकायों द्वारा स्थापित होती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान संस्थान भी हैं.
विनिर्माण गुणवत्ता नियंत्रण/आश्वासन औषधियों का निर्माण करना एक गंभीर और जिम्मेदारी पूर्ण व्यवसाय है जहां कुछ भी कमी नहीं छोड़ी जा सकती. उत्पादन प्रक्रिया के मानकों को सुनिश्चित करने और सही फॉर्मूलेशन का उपयोग करने के लिएऔषधि विनिर्माणी कंपनियों में सरकारी   दिशा निदेर्शों के अनुसार गुणवत्ता नियंत्रण/आश्वासन पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाते हैं. ऐसी भूमिकाएं विनियामक निकायों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी उपलब्ध होती हैं.
अध्यापन: बी.फॉर्मा योग्यता वाले किसी भी व्यक्ति को डिप्लोमा छात्रों को पढ़ाने के लिए पात्र माना जाता है. बी फॉर्मा छात्रों को पढ़ाने के लिए सामान्यत: कोई स्नातकोत्तर डिग्री अपेक्षित होती है. कई मामलों में अध्यापन कार्यों के लिए फार्मेसी कॉलेज उधोग/व्यवसाय का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को वरियता देते हैं. राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) योग्यता आपकों कोई शैक्षिक भूमिका दिलाने में सहायता कर सकती है. फॉर्मेसी पाठ्यक्रम चलाने वाले फॉर्मेसी कॉलेजों, विश्वविधालयों में अध्यापन के अवसर विधमान होते हैं.
अस्पताल/नैदानिक फॉर्मेसी: फॉर्मेसी में डिप्लोमाधारी व्यक्ति को अस्पतालों और क्लीनिक्स में फॉर्मासिस्ट के रूप में कार्य करने के अवसर होते हैं. सरकारी, रेलवे, सेना और निजी अस्पतालों के साथ साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान जैसे निकायों में अवसर होते हैं. निजी अस्पतालों की विभिन्न शृंखला (अर्थात् अपोलो, वोखार्ड आदि) को फॉर्मासिस्टों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होती है. यहां इनके कार्यों में मरीजों को निर्धारित औषधियों की खुराक, भोजन आदि की सलाह देने और उन्हें परामर्श देना शामिल होता है. फॉर्मासिस्टों को डॉक्टरों और नर्सों के निकट सहयोग में कार्य करना अपेक्षित होता है.
विपणन/विक्रय : दवाईयों की बिक्री करना, कपड़ों और उपभोक्ता सामग्रियों की बिक्री कार्य से अलग होता है. केवल योग्य एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों को ही मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया जा सकता है. ये प्रतिनिधि औषधि कंपनियों के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ से डॉक्टरों से संपर्क करते हैं बी.एस.सी (जीव विज्ञान), बी फॉर्मा जैसी डिग्री रखने वाले व्यक्ति मेडिकल प्रतिनिधि की भूमिका के लिए पात्र माने जाते हैं. यह एक फील्ड जॉब होता है. नियमित वेतन के अतिरिक्त कई कंपनियां प्रोत्साहन राशि भी देती हैं. जो लक्ष्यों को पूरा करने पर निर्भर होती है. इस भूमिका में उच्च निष्पादन करने वाले व्यक्तियों को क्षेत्रीय/राज्य/राष्ट्रीय विक्रय/विपणन प्रबंधक बनने के अच्छे उन्नति के अवसर होते हैं. अन्य बड़े व्यवसायों की तरह औषधि कपंनियों के भी विपणन कार्य होते हैं. कुछ व्यवसाय प्रबंधन संस्थाओं में भेषज प्रबंधन में विशेषज्ञता भी उपलब्ध होती है.
कॅरिअर के बेहतर अवसरों के लिए योग्यताएं बढ़ाना
फॉर्मेसी में कोई डिग्री प्राप्त करने के बाद उम्मीदवारों को इस योग्यता को अन्य उच्च योग्यता के साथ जोडऩे के अवसर होते हैं ताकि करिअर के व्यापक/बेहतर अवसर मिल सकें. संभावित पाठ्यक्रम निम्नलिखित हो सकते हैं :-
व्यवसाय प्रबंधन : यह पाठ्यक्रम फॉर्मा उत्पादों की बिक्री/विपणन में करिअर बनाने में सहायक हो सकता है.
विधि : विधि में कोई भी डिग्री विधिक एवं विनियामक क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए उपयोगी हो सकती है जोकि फॉर्मा उधोगों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है. बौद्धिक संपदा अधिकारों में कोई पाठ्यक्रम या विशेषज्ञता भी एक अच्छा कॉबिनेशन है.
संभावित नियोक्ता  (औषधि कंपनियां)
योग्यता प्राप्त फॉर्मेसी व्यवसायियों के लिए संभावित नियोक्ताओं में भारतीय औषधि कंपनियां जैसे सिपला, सन फॉर्मा, डॉक्टर रेड्डी प्रयोगशाला, अजंता फॉर्मा, अल्केम प्रयोगशाला, अरबिन्दो फॉर्मा, कैडिला हेल्थ, ग्लेनमार्क, टोरेंट फॉर्मा, पिरामल एंटरप्राइजेस, एलेम्बीक फॉर्मा, ल्युपिन फॉर्मास्युटिकलस्, डीविस लैब्स, स्ट्राइड शासुन, यूनिकेम लेबोरेट्रीस्, नाटको फॉर्मा, ज्युबीलैंट लाइफ सांइसेज एडं इंटरनेशनल जेंटस्, ग्लेस्कों स्थिम लाइन्स, फिजर, बुट्स मैर्क एडं कंपनी, एबोट इंडिया आदि शामिल हैं और सरकार द्वारा समर्थित भारतीय औषधि एवं भेषज लिमिटेड आदि कंपनियां भी इनमें से ही हैं. इनमें से कई कपंनियों की वेबसाइट पर, उनमें कॅरिअर के उपलब्ध अवसरों के विवरण होते हैं.
अपेक्षित व्यक्तित्व गुण
फॉर्मेसी से संबंधित करिअर में अच्छे कार्य करने के लिए आपके पास वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत अभिवृति होनी चाहिए. अन्य अपेक्षित गुणों में परिशुद्धता, समर्पण, धैर्य और उच्च स्तर की नैतिक उन्मुखता होना अपेक्षित है. सीखने की लालसा के साथ आपका मस्तिष्क हमेशा जिज्ञासु भी होना चाहिए.
फॉर्मेसी में कोई कॅरिअर आपको मानवता की सेवा करने और उसकी आरोग्यता में सुधार लाने का अवसर देता है.
लेखक मुंबई में एक कॅरिअर काउंसलर हैं, ई-मेल :- v2j25@yahoo.in