नौकरी फोकस


Volume-1, 7-13 April, 2018

 

दूरसंचार उद्योग में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

संचार क्रांति हमारी आंखों के सामने घट रही है और इसने हम में से अधिकांश लोगों को प्रभावित किया है. यदि इस लेख को आप अपने मोबाइल फोन पर पढऩे में सक्षम हैं तो इसका श्रेय दूरसंचार में की गई प्रगति को जाना चाहिए. दो दशक पहले तक हम बात किया करते थे कि सूचना प्रौद्योगिकी किस तरह विश्व को रूप दे रही है. इक्कीसवीं शताब्दी में संचार प्रौद्योगिकी एक समान भूमिका निभा रही है, जो नि:संदेह सूचना एवं अन्य प्रौद्योगिकी द्वारा समर्थित है. ऐसा समय भी था जब हमारे देश में लैंडलाइन फोनों की संख्या दस प्रतिशत (या प्रत्येक 10 व्यक्तियों के लिए एक कनेक्शन) भी नहीं था. आज  देश में 1150 मिलियन से भी अधिक फोन सबक्रिप्शन है. संचार (दूरसंचार का संक्षिप्त नाम) उद्योग देश में सबसे तीव्र गति से विकासशील उद्योगों में से एक रहा है. भारत का टेलीफोन ग्राहक आधार पिछले वर्षों के दौरान 19.16 प्रतिशत की कम्पाउण्ड वार्षिक दर पर बढ़ा है. कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उद्योग में कुछ समेकन की स्थिति चल रही है. दूरसंचार कंपनियां भी अपने प्रचालन को ईष्टतम बनाने और पुनर्गठन करने की प्रक्रिया में हैं. इस चरण पर कुछ मंथन हो सकता है, किंतु सक्षम व्यावसायियों की निरंतर मार्ग के साथ दूरसंचार उद्योग का भविष्य आशाजनक है.

आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है. भारतीय मोबाइल अर्थव्यवस्था विशिष्ट रूप से तीव्र गति से विकासशील है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसके महत्वपूर्ण योगदान करने की संभावना है. बोस्टन कंन्सल्टिंग गु्रप (बीसीजी) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व में चौथी सबसे बड़ी ऐप अर्थव्यवस्था है.

आपने देखा होगा कि ऐप किस तरह ऐप संचार, खरीददारी के हमारे तरीके में बदलाव ला रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक भारत, विश्व के 4.7 बिलियन इंटरनेट प्र्रयोक्ताओं में से 700 मिलियन प्रयोक्ताओं वाले अग्रणी देश के रूप में उभरकर सामने आएगा.

दूरसंचार क्षेत्र के विकास का श्रेय हमारी सरकार की उदार एवं प्रोत्साहनशील नीतियों और उद्योग समूहों को जाता है, जिन्होंने इस क्षेत्र में निवेश को वरीयता दी. दूरसंचार  सेवाएं विगत की तुलना में अब सस्ती लागत पर उपलब्ध हैं. आसानी से पहुंच एवं सरल उपयोग से इस व्यवसाय का और विस्तार होने की आशा है. अब हमारी पहुंच 3जी तथा 4जी नेटवर्क तक हो गई है और अब 5जी नेटवर्क हमारी पहुंच से बहुत दूर नहीं है. यह दर्शाता है कि दूरसंचार का क्षेत्र कितना गतिशील है.

दूरसंचार व्यवसाय के दो मुख्य भाग हैं- पहला उपस्कर एवं दूसरा नेटवर्क. पहले भाग में उपस्कर, हैंडसेट और ट्रांसमिशन टॉवर आदि शामिल हैं, जबकि दूसरा भाग एयरवेज, स्पेक्ट्रम आदि से बना है. यहां तक कि वायरलेस नेटवक्र्स को भी केबलिंग आदि के प्रावधान वाले उपयुक्त उपकरणों के स्थापन की आवश्यकता होती हैं.

दूरसंचार उद्योग में तकनीकी एवं प्रबंधकीय दोनों तरह के रोजग़ार उपलब्ध हैं.

तकनीकी रोजग़ार निम्नलिखित किसी या अधिक क्षेत्रों में प्राप्त किया जा सकता है.

नेटवर्क प्रबंधन : बेस स्टेशन सेवा, कोर नेटवर्क, क्षेत्रगत रखरखाव, ट्रांसमिशन, ऑप्टिकल फाइबर, ब्रॉडबैंड संस्थापन, नेटवर्क सुरक्षा आदि.

अनुप्रयोग विकास : मोबाइल एप्लीकेशन्स/गेम्स/ऐप डेवलपर, हैंडसेट सॉफ्टवेयर डेवलपर, ऐम्बैडेड हार्डवेयर डेवलपर, नेटवर्क सॉफ्टवेयर डेवलपर आदि.

बैकग्राउण्ड/पैसिव अवसंरचना :प्रयोक्ताओं का ऐसी अवसंरचनाओं से सीधा संबंध नहीं होता किंतु दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने में यह महत्वपूर्ण होती हैं. इनमें ट्रांसमिशन टावर, रेडियो फ्रिक्वेंसी आदि शामिल होती हैं.

तकनीकी सेवा समर्थन: इन कार्यों में स्थल पर तथा स्थल से बाहर समर्थन देना और दोषनिवारण शामिल हैं.

उक्त सेवाओं का ध्यान रखने के लिए दूरसंचार कंपनियों को ऐसे कुशल तकनीशियनों की आवश्यकता होती है जिनकी तकनीकी विशेषज्ञता किसी नियमित डिग्री या योग्यता से अधिक महत्व रखती है. उच्च दायित्वों के लिए कंपनियों को ऐसे स्नातक इंजीनियरों की आवश्यकता होती है जो यांत्रिक, वैद्युत या दूरसंचार इंजीनियरी में प्रशिक्षित होते हैं. यांत्रिक तथा वैद्युत इंजीनियरी पाठयक्रम बहुत पहले से उपलब्ध हैं. दूरसंचार इंजीनियरी पाठ्यक्रम, आवश्यकता उत्पन्न होने और दूरसंचार की प्रौद्योगिकी का विकास होने पर बाद में प्रारंभ किए गए. अधिकांश इंजीनियरी संस्थानों में दूरसंचार इंजीनियरी इलेक्ट्रॉनिकी के एक युग्मक के साथ पढ़ाई जाती है, तथापि, ऐसे संस्थान भी हैं जो दूरसंचार इंजीनियरी को विशेष डिग्री के रूप में पढ़ाते हैं. इन दोनों पाठ्यक्रमों की करवेज के बीच बहुत भिन्नता नहीं है और उम्मीदवार पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के आश्वासन तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और/या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) जैसे विनियामक निकायों द्वारा मान्यता के आधार पर इनमें से कोई भी पाठ्यक्रम चुन सकते हैं.

इलेक्ट्रॉनिकी एवं दूरसंचार इंजीनियरी में दूरसंचार उपस्करों और नेटवर्क की डिजाइनिंग से संबंधित विभिन्न सिद्धांतों और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन निहित होता है. इलेक्ट्रॉनिक एवं दूरसंचार इंजीनियर एकीकृत सरकिट घटकों, आदि के प्रोटोटाइप का विकास करते हैं. पाठ्यक्रम में सेमिकंडक्टर उपस्कर, नेटवर्क सिद्धांत, सिग्नल्स तथा सिस्टम्स डिजिटल लॉजिक, एनालॉग सर्किट्स की डिजाइनिंग, एंटेना और प्रोपेगेशन, राडार एवं रेडियो नेवीगेशन साधन, संचार प्रणालियां और तकनीकें, इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म, ट्रांसमिशन तकनीकें आदि विषय शामिल किए जाते हैं. पाठ्यक्रम की अवधि 4 वर्ष है और उम्मीदवारों को बी.ई.,बी.टेक या बी.एस.सी. (इंजीनियरी) डिग्री प्रदान की जा सकती है.

इलेक्ट्रॉनिकी एवं दूरंसचार इंजीनियरी/दूरसंचार इंजीनियरी में डिग्री पाठ्यक्रम चलाने वाली कुछ संस्थाएं निम्नलिखित हैं :-

-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, दिल्ली, चेन्नै, खडग़पुर.

-राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वरंगल.

-धीरूभाई अंबानी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर.

-मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद.

-दिल्ली इंजीनियरी कॉलेज, दिल्ली.

-मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर.

-एम एस रामैय्या प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु.

-बी.एम.एस. प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु.

-इंजीनियरी कॉलेज तिरुवनंतपुरम.

-मणिपाल प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपाल.

-पी.एस.जी. प्रौद्योगिकी कॉलेज, कोयम्बतूर.

-विश्वेसरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर.

-सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत.

-कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्चि

इंजीनियरी में कोई स्नातक पाठयक्रम 10+2 के बाद किया जा सकता है. विभिन्न पॉलिटेकनीकों द्वारा चलाए जा रहे तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना दूरसंचार इंजीनियरी अध्ययन का एक अन्य विकल्प है, जिसके लिए उम्मीदवार एसएससी उत्तीर्ण होने चाहिएं. ये पॉलिटेक्नीक सामान्यत: राज्य सरकारों द्वारा स्थापित किए जाते हैं. इनमें पाठ्यक्रम शुल्क कम होता है. डिप्लोमा करने के बाद आपको दो विकल्प होते हैं. या तो आप कार्य कर सकते हैं या स्नातक इंजीनियरी पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं जिसके लिए कुछ इंजीनियरी कॉलेजों में कोटा प्रदान किया जाता है.

प्रबंधकीय भूमिकाएं : प्रबंधन के विभिन्न विषयों यथा विपणन, मानव संसाधन, ऑपरेशन्स, वित्त में स्नातकोत्तर डिग्रीधारी व्यक्ति, दूरसंचार उद्योग में रोजग़ार तलाश सकते हैं, किंतु दूरसंचार प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले व्यवसायियों की मांग अधिक होती है. इसे ध्यान में रखते हुए देश में कई प्रबंधन संस्थाओं ने दूरसंचार प्रबंधन में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं या वे दूरसंचार प्रबंधन में विशेषज्ञता कराते हैं.

ऐसी कुछ संस्थाओं के नाम नीचे दिए गए हैं:-

-एम.आई.टी. दूरसंचार प्रबंधन स्कूल, पुणे.

-एमिटी दूरसंचार प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, पुणे.

-अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, पुणे.

-सिम्बियोसिस दूरसंचार प्रबंधन संस्थान, पुणे.

-क्षेत्रीय प्रबंधन कॉलेज, भुवनेश्वर, उड़ीसा.

-बालाजी दूरसंचार एवं प्रबंधन संस्थान, पुणे.

-यह सूची केवल उदाहरण है, न कि सम्पूर्ण.

दूरसंचार में इंजीनियरी योग्यता पूरी करने के बाद दूरसंचार प्रबंधन में विशेषज्ञता वाला एम.बी.ए. पाठ्यक्रम करना दूरसंचार उद्योग में संकेंद्रित कॅरिअर बनाने का एक माध्यम है. बड़ी दूरसंचार कंपनियां एंट्री लेवल के इंजीनियरी एवं प्रबंधकीय पदों की अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए अधिकांशत: कैम्पस प्लेसमेंट पर निर्भर होते हैं.

रोजग़ार अवसर : किसी इंजीनियर के रूप में आपको उन कंपनियों में रोजगार के अवसर होते हैं जो कंपनियां दूरसंचार हार्डवेयर विनिर्माण, सॉफ्टवेयर का विकास करने वाली और नेटवर्क सेवा प्रदाता होती हंै. हार्डवेयर क्षेत्र में सैमसंग, नोकिया, लिनोवो, डेल, रिलायंस, कार्बन, लावा, माइक्रोमेक्स आदि जैसी ब्रांडधारी कंपनियां शामिल हैं. चीन हैंडसेट्स के एक बड़े वितरक के रूप में उभरा है क्योंकि वहां इनके विनिर्माण की लागत बहुत कम है. मोबाइल हैंडसेट्स के चीनी ब्राण्ड हैं और ऐसी कंपनियां भी हंै जो अन्य प्रतिष्ठित एवं कम ज्ञात ब्रांड्स के हैंडसेट्स का विनिर्माण करती हैं. इनमें से कुछ कंपनियों ने हाल ही में भारत में भी विनिर्माण केंद्र स्थापित किए हैं. भारत में भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया सेलुलर, भारत संचार निगम लिमिटेड, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड आदि जैसे प्रमुख नेटवर्क सेवा प्रदाता हैं.

एप्पल, फेसबुक, लिंकडिन जैसी विश्व की बड़ी कंपनियों को भी दूरसंचार व्यवसायियों की आवश्यकता होती है और इनकी व्यापक मांग है.

चाइना मोबाइल लिमिटेड, चाइना टेलकम (दोनों पीपल्स रुपब्लिक ऑफ चाइना से संबद्ध), अमेरिका मोबिल, वेरिजोन कम्यूनिकेशन्स इंस, एटी एवं टी इंस (अमेरिका से संबद्ध) निप्पो टेलिग्राफ एंड टेलिफोन कॉर्पोरेशन (जापान की), डच टेलीकॉम एजी (जर्मनी की), टेलिफोनिका एस.ए. (स्पेन की), वोडाफोन (युनाइटेड किंगडम में उद्भुत) विश्व की सर्वोच्च कंपनियां हैं, जो विश्वभर में दूरसंचार नेटवर्क देती हैं और इनमें भारत सहित विभिन्न देशों का कार्यबल है.

सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी दूरसंचार इंजीनियरों की आवश्यकता होती है, क्योंकि कई मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार एक साथ मिलकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं. टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेस, टाटा एलक्सि, इन्फोसिस आदि जैसी बड़ी कंपनियां दूरसंचार सॉफ्टवेयर का विकास करने में कार्यरत हैं. कुछ छोटी एवं नई कंपनियां भी हैं जो दूरसंचार में उपयोग हेतु कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर का विकास करती हैं. उपग्रह दूरदर्शन एक अन्य कार्य-क्षेत्र है.

दूरसंचार से जुड़े कॅरिअर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बी.ई.एल), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आई.एस.आर.ओ.) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.), जैसे अग्रणी सरकारी संगठनों तथा कुछ अन्य संगठनों में उपलब्ध हैं.

टेलिमेटिक्स विकास केंद्र, जो सी-डॉट के नाम से भी प्रसिद्ध है भारत सरकार के दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित किया गया है और इसके कार्यालय बेंगलुरू, कोलकाता तथा नई दिल्ली में स्थित हैं. यह केंद्र दूरसंचार एवं उनके क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं परामर्श देता है. आप इनके साथ कार्य करने का भी चयन कर सकते हैं और अपने कौशल-विकास के लिए इनकी सेवाएं भी प्राप्त कर सकते हैं. पॉलिटेकनिक्स, इंजीनियरी एवं प्रबंधन संस्थाओं में अध्यापन अवसर उपलब्ध हैं.

इंजीनियरी तथा प्रबंधन भूमिकाओं के अतिरिक्त, दूरसंचार कंपनियां ग्राहक सेवा, लेखाकरण आदि क्षेत्रों में भी कार्य अवसर देती हैं. कोई भी व्यक्ति इनके कॉल सेंटर में कार्य कर सकता है. इन कार्यों के लिए उच्च अध्ययन या विशेषज्ञतापूर्ण योग्यताओं की आवश्यकता नहीं होती है.

(लेखक मुंबई में काउंसलर हैं. ई-मेल : v2j25@yahoo.in)