नौकरी फोकस


Volume 2, 14-20 aPRIL, 2018

 

  

भारतीय फार्मा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र
अत्यधिक रोज़गार सृजक के रूप में उभर रहा क्षेत्र

डॉ. रणजीत मेहता एवं
सुश्री अंकिता रानी

स्वास्थ्य परिचर्या किसी भी देश के संपूर्ण विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक है और स्वास्थ्य परिचर्या  की स्थिति देश के विकास की प्रकृति की ओर संकेत करती है. लोगों की स्वास्थ्य परिचर्या के सुधार के संबंध में भेषज (फार्मा.) कंपनियां निरंतर कार्यरत रहती हैं. भेषज उत्पाद या औषधियां स्वास्थ्य परिचर्या प्रबंधन एवं उसके व्यय का महत्वपूर्ण घटक होती हैं. लोगों की आय में वृद्धि एवं जीवन-शैली में परिवर्तन होने से कोई भी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य परिचर्या प्रबंधन पर होने वाले व्यय में भी वृद्धि करते हैं. वर्ष २०२० तक विश्व भेषज बाजार का व्यवसाय १.४ ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर  और भारतीय भेषज बाजार व्यवसाय ५५ बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है. २०१५-२०२० की अवधि के दौरान भारतीय भेषज क्षेत्र के तीव्र कंपाउंड वार्षिक विकास दर (सीएजीआर) से बढऩे की आशा है.

स्वास्थ्य जागरूकता में सुधार होने और जीवन अवधि में वृद्धि होने से २०१८ में भारतीय भेषज क्षेत्र का विकास दोगुने अंकों में होने की आशा है. नैदानिक  एवं प्रशासन जैसी भूमिकाओं के लिए भर्ती की आवश्यकता होने के संबंध में औषधि बाजार एवं अस्पतालों में सभी प्रकार की भूमिकाओं के लिए मांग में बढऩे की आशा है. जीवनशैली एवं गैर संचारी रोगों में वृद्धि होने से स्वास्थ्य परिचर्या व्यवसायियों की मांग में वृद्धि होती है तथा भेषज क्षेत्र में अधिक रोज़गार एवं रिक्तियां होती हैं : भर्ती-फर्मों का अनुमान है कि भेषज क्षेत्र में सभी कार्य-भूमिकाओं में फ्रेशर्स के लिए हजारों रोज़गार-रिक्तियां उपलब्ध हैं. भारतीय एवं विश्व भेषज (फार्मा.) कंपनियों में सहयोग बढऩे से नव प्रवर्तन एवं पैमाने में सुधार आने में सहायता मिलेगी जिससे भर्ती में वृद्धि होगी और कमी समाप्त  होगी.

भारतीय भेषज उत्पादक संगठन (ओपीपीआई) द्वारा आयोजित बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि भेषज उद्योग ने अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और परियोजना प्रबंधकों के प्रतिभावान पूल का सृजन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

विश्व में और भारत में भेषज उद्योग में तीव्रता से बदलाव आ रहा है. इस बदलाव गति ने हमारे लिए युवा प्रतिभा के विकास में निवेश करना एवं उनकी आवश्यकता का उपयोग करना जरूरी बना दिया है. युवा पीढ़ी द्वारा कार्यबल में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना प्रारंभ करने से भेषज उद्योग को भी परिवर्तनशील कार्यस्थल गतिकी में सामंजस्य लाने और एक लोकप्रिय नियोक्ता के रूप में अपनी सुदृढ़ छवि बनाने की आवयकता होगी.देश में २० शीर्ष औषधि निर्माताओं के एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि एक डिजिटल वेव १७ बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारतीय भेषज उद्योग में बदलाव ला रही है और उद्योग नई प्रौद्योगिकी के लिए विपणन के पुराने तरीकों को बदल रहे हैं. यह नई प्रौद्योगिकी रोगी-अनुकूलता जैसे मामलों में बेहतर सोच के लिए नए एल्गोरिद्म का उपयोग करने हेतु वैज्ञानिक डिटेलिंग से लेकर डॉक्टरों तक विविध है. पिछले कुछ वर्षों में चीन में भी ऐसी ही प्रवृत्ति रही है. अनुमान है कि अगले दो वर्षों में डिजिटल मंचों के माध्यम से फार्मा. उद्योग का विपणन व्यय लगभग ५० प्रतिशत बढक़र २२० करोड़ रु. हो जाएगा. यह  अनुमान बंगलौर स्थित बाजार अनुसंधान फर्म इंडीजीन के अध्ययन में लगाया गया है, ग्लोबल डिजिटल मार्केटिंग ट्रेण्ड्स पर अध्ययन की एक व्यापक रूप रिपोर्ट में पाया गया है कि मोबाइल ऐप और सामाजिक मीडिया इस प्रगति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं.

इससे भारत को, चीन जैसे टेक-सेवी उभर रहे बाजार के  बराबर होने में सहायता मिलेगी, जहां लगभग आधी कंपनियों द्वारा २०१८ तक  अपने विपणन बजट का पांचवा हिस्सा डिजिटल विपणन को आवंटित करने की आशा है. भारतीय फार्मा. कंपनियों ने नई प्रौद्योगिकी अपनानी प्रारंभ कर दी है.

भेषज क्षेत्र को भारतीय स्वास्थ्य परिचर्या बाजार का अंतरंग भाग देखा जाता है, जिसका १००००/- करोड़ रु. मूल्य का  होने का  अनुमान  है और २२.९ प्रतिशत के सीएजीआर पर बढ़ रहा है. मात्रा की दृष्टि से भारतीय  फार्मा. उद्योग का विश्व बाजार में तीसरा स्थान है और मूल्य की दृष्टि से १३वां स्थान. २०२० तक जेनेरिक औषधियां बाजार का ७० प्रतिशत शेयर धारण कर लेंगी तथा उसके बाद काउंटर पर २१ प्रतिशत एवं ९ प्रतिशत बाजार शेयर पर पकड़ रखने वाली पेटेंट औषधियां.

भेषज उद्योग में गति को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्षेत्र के कुछ पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए,  जो अत्यधिक असंगठित प्रकृति का है. यहां लगभग २५०००/- कंपनियां हैं और केवल ३३० संगठित हैं. बी. फार्मा. डिग्रियों वाले रोज़गार योग्य उम्मीदवारों की संख्या २०१६ में ४२.३ प्रतिशत थी, जबकि २०१५ में यह संख्या ४०.६२ प्रतिशत थी. फार्मा एवं स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र में महिलाओं के लिए उद्योगवार हायरिंग लक्ष्य के अनुसार भी, भारत कौशल रिपोर्ट के अनुसार लगभग ३८.६७ प्रतिशत महिलाओं का लक्ष्य है और महिलाओं की कुल रोज़गार संभावना केवल २८.२८ प्रतिशत है. जिससे भेषज उद्योग में लिंग वैविध रखरखाव की आवश्यकता को पूरा किया जाना अपेक्षित है.

मूल्य के संबंध में भारतीय भेषज क्षेत्र विश्व भेषज क्षेत्र का ३.१-३.६ प्रतिशत और मात्रा के संंबंध में १० प्रतिशत होने का अनुमान है. २०१६-१७ में भारतीय भेषज निर्यात १६.८ बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और अगले ३ वर्षों में इसके ३० प्रतिशत बढऩे की आशा है, जिससे २०२० तक २० बिलियन हो जाएगा. यह भारतीय भेषज निर्यात संवर्धन परिषद (फार्माएक्सिल) का मानना है. भेषज मदों का  निर्यात अप्रैल, २०१७ के दौरान ६९६.८४ बिलियन रु. (१०.७६ बिलियन अमेरिकी डॉलर) पर पहुंचा था. २०१७ में भारतीय कंपनियों को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से ३०४ एब्रिविएटेड न्यू ड्रग अप्लीकेशन अनुमोदन प्राप्त हुए. ७०-८० बिलियन अमेरिकी जेनेरिक बाजार में देश का लगभग ३० प्रतिशत (मात्रा से) और लगभग १० प्रतिशत (मूल्य) भाग है.

विश्व में जेनेरिक औषधि उपलब्ध कराने में भारत सबसे बड़ा देश है और भारतीय जेनेरिक्स, मात्रा के संंबंध में विश्व निर्यात का २० प्रतिशत है. हाल ही में समेकन, भारतीय भेषज बाजार का एक महत्वपूर्ण विशेषता बन गई है. क्योंकि यह उद्योग काफी विखंडित है. विश्व भेषज क्षेत्र में भारत एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. भारत के पास वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों का एक बड़ा पूल है जो उद्योग को उच्चतर स्तर से भी आगे ले जाने की संभावना रखते हैं. एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम) का सामना करने के लिए विश्व भर में उपयोग में लाई जाने वाली एंटीरिट्रॉवायरल औषधियों का, ८० प्रतिशत भाग भारतीय भेषज फर्मों द्वारा सप्लाई किया जा रहा है.

भारत में फार्मा एवं स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र में सरकार की बड़ी पहलें :

भारत में भेषज एवं स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गयी कुछ पहल (नव प्रवर्तन) निम्नानुसार हैं :-

कुछ शर्तों के साथ चिकित्सा उपस्करों के विनिर्माण के लिए ऑटोमेटिक रूट के अंतर्गत १०० प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भेषज क्षेत्र में विद्यमान विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ.डी.आई.) नीति में संशेधन हेतु सहमति दे दी है. औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा जारी डाटा के अनुसार औषधि एवं भेषज क्षेत्र अप्रैल २००० से दिसंबर २०१७ के बीच १५.५९ बिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के संचित एफ.डी.आई. इनफलो को आकर्षित किया.

*सहमति, अनुमोदन एवं अन्य सूचना प्रदान करने के लिए सिंगल-विंडो सुविधा प्रांरभ करने के लिए भारत के महा औषधि नियंत्रक ने मार्च २०१८ में अपनी योजनाओं की घोषणा की. इसका उद्देश्य मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देना है.

*औषधि विनिर्माण में भारत को विश्व-अग्रज बनाने के उदेश्य से भारत सरकार ने फार्मा विजन-२०२० का अनावरण किया. निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई सुविधाओं के लिए अनुमोदन समय कम कर दिया गया है.

*औषधियों को सस्ता करने एवं उपलब्ध कराने के मामले से निपटने के लिए औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश और राष्ट्रीय भेषज मूल्य निर्धारण प्राधिकरण जैसी व्यवस्था प्रारंभ की गई है

*भारत में द्वितीयक और तृतीयक परिचर्या हेतु १०० मिलियन परिवारों के लिए और ५०० मिलियन लाभार्थियों के लिए रुपये ५ लाख प्रतिवर्ष की राष्ट्रीय बीमा योजना प्रारंभ की गई है जो विश्व की सबसे बड़ी जन स्वास्थ्य बीमा योजना होगी.

*भारत सरकार ने एक नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति प्रारंभ की है जो १५ वर्ष पहले अनुमोदित की गई अंतिम स्वास्थ्य योजना के बाद लागू की गई है. योजना में भारतीय स्वास्थ्य परिचर्या को सुदृढ़ करने का उद्देश्य निहित है, नीति में स्वास्थ्य परिचर्या पर व्यय की जाने वाली वर्तमान दो प्रतिशत जीडीपी को बढ़ाकर २.५ प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है. नीति का उद्देश्य मात्र मृत्यु दर, शिशु एवं बाल मृत्यु दर को कम करने का उद्देश्य है ये मौतें गैर-संचारी और संक्रमणकारी रोगों के कारण होती हैं. नीति में वर्ष २०१८ तक कुष्ठ रोग को समाप्त करना और २०१७ तक काला-अजर और लिम्फेटिक, फिलेरियासिस्ट को समाप्त करना लक्ष्ति है नीति का उद्देश्य २०२० तक एचआईवी/एड्स के विश्व लक्ष्य को प्राप्त करना शामिल है जिसमें एचआईवी से ग्रस्त सभी ९०' व्यक्तियों को उनको उसकी जानकारी देना और संपोषित एंटीविट्रो वायरल थेरोपि प्राप्त करने वाले एचआईवी ग्रस्त सभी ९०' व्यक्तियों को सूचना देना शामिल है.

*सरकार द्वारा चलाई गई ई-फार्मेसी, ई-डायग्नोस्टिक्स सेवाएं स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र की कई कुरीतियों को समाप्त कर सकती हैं और स्वास्थ्य परिचर्या तक कम पहुंच रखने वाले दूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों तक इसकी पहुंच बना सकती हैं. इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड दूर शिक्षा के लिए राष्ट्रीय ज्ञान नेटकर्व, टेली कंसल्टेशन और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी कुछ पहल राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल कार्यक्रम हैं. विशेषज्ञ डॉक्टरों को कहीं से भी डिजिटल रूप में जोडऩे से व्यवसायी रोगियों से संपर्क कर सकेंगे.

*पुरानी बीमारियों की घर-घर जांच एक व्यापक निशुल्क घर-घर जांच है जिससे कैंसर, हृदय रोग और मघुमेह का शीघ्र पता लगाने और उपचार करने में सहायता मिलेगी. इस कार्यक्रम का लक्ष्य ३० से ६९ वर्ष तक की आयु के व्यक्तियों को शामिल करना है. भारत जैसे विकासशील देश के लिए कार्यशील आयु वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य अत्यधिक महत्वपूर्ण है. उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना, जीवन एवं जनन के अवसर, निर्धनता को समाप्त करना और देश के विकास की प्रगति के लिए आवश्यक है.

*प्रधानमंत्री ने २०१५ में निर्मित प्रथम देशी टीके-भारत बायोटेक के रिट्रो वायरस टीके/रोटावेक का प्रारंभ किया था. प्रत्येक वर्ष रोटा वायरस के कारण ५ वर्ष से कम आयु के लगभग ८० हजार बच्चों की डायरिया से मृत्यु हो जाती है. भारत बायोटेक ने एचएनवीएसी-टीएम नामक ब्रांड के अंतर्गत पहली देशी रूप में विकसित एच-१ एन-१ स्वाइन फ्लू वैकसीन भी प्रारंभ की है. यह मच्छर वाहित रोगों जैसे मलेरिया और चिकनगुनिया रोगों के लिए भी टीकों का विकास कर रही है. इससे स्वास्थ्य परिचर्या में पर्याप्त प्रभाव पड़ेगा और इस सरकार से कई अन्य ऐसे बड़े सुधार करने की आशा है जो भारत में स्वास्थ्य परिचर्या और भेषज क्षेत्र को बढ़ावा दे सके ताकि स्वस्थ भारत का विकास हो सके.

*प्रधानमंत्री भारतीय जनोषधि परियोजना- यह भेषज विभाग भारत सरकार द्वारा चलाया गया अभियान है जो प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधी के रूप में प्रसिद्ध विशेष केन्द्रों के माध्यम से जनता को सस्ते दामों पर गुणवत्ता पूर्ण औषधि प्रदान करेगी. प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र जेनेरिक औषधि उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए हैं, जो कम मूल्य पर किन्तु महंगे ब्रांड वाली औषधियों की गुणवत्ता और दक्षता के समान उपलब्ध कराई जाती है.

*भारतीय फार्मा जन स्वास्थ्य क्षेत्र उपक्रम ब्यूरो की स्थापना भेषज उद्योग, भारतीय सरकार के अधीन की गई है जो प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र के माध्यम से जेनेरिक औषधियों के अधिप्रापण, सप्लाई और विपणन में समन्वय के लिए सभी सीपीएसयू को सहायता करती है.

*आयुष मंत्रालय ९ नवबंर २०१४ को स्थापित किया गया था जो स्वास्थ्य परिचर्या की आयुष प्रणाली के अधिकतम विकास और उन्नति को सुनिश्चित करने के लिए किया गया था पहले यह भारतीय औषधि एवं होमियोपेथी प्रणाली विभाग के नाम से प्रसिद्ध था और मार्च १९९५ में स्थापित किया गया था तथा नवंबर २००३ में इसे आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक उपचार, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी विभाग का नाम दिया गया. जिसका ध्येय बल आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक उपचार, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी में शिक्षा के विकास पर बल देना था.

स्वास्थ्य कमियों को दूर करने पर लक्षित नई आयुष्मान भारत योजना भी लाखों रोज़गार विशेष रूप से महिलाओं के लिए सृजित करेगी. अंत में, इस वर्ष भेषज एवं स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र में हायरिंग में २०' से अधिक वृद्धि होने की संभावना है और यह भी आशा है कि भारतीय कौशल रिपोर्ट २०१६ के अनुसार लगभग १,३४,००० रोज़गार सृजित होंगे. अनुमान के अनुसार फार्मा उद्योग वर्तमान में लगभग ५.५-५.७ लाख व्यक्तियों को रोज़गार देता है. यह वृद्धि सरकार द्वारा चलाई गई पहलों का भी परिणाम हो सकती है. फार्मा, जीवन विज्ञान और स्वास्थ्य परिचर्या क्षेत्र में अच्छा निवेश सकारात्मक रुख दर्शा रहा है. घरेलू विक्रय में बेहतर वृद्धि हृदय वाहिका, एंटीडायबिटिज, एंटी डीप्रजेंन्टस और एंटी कैंसर जैसे रोगों के लिए पुरानी थैरिपी के संबंध में उनके उत्पाद पोर्टफोलियों के अनुरूप कंपनियों की क्षमता पर भी निर्भर होगी. भारत सरकार ने लागत में कमी लाने और स्वास्थ्य परिचर्या व्यय को कम करने के लिए कई कदम उठाएं हैं. जेनेरिक औषधियों का बाजार में तीव्र गति से प्रवेश केन्द्र बिन्दु रहा है और आशा है कि इससे भारतीय भेषज कंपनियों को लाभ होगा. इसके अतिरिक्त ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रमों, जीवन रक्षक औषधियों और निवारक टीकों पर बल देना भेषज कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय फार्मा क्षेत्र में प्रचलित चुनौतियों के बावजूद ५८,००० अतिरिक्त रोज़गार अवसर सृजित होने की संभावना है, क्योंकि २०२५ तक इस उद्योग के ४५' तक बढऩे की आशा है. भारत बहुत छोटे सुपरिचित वर्ग के साथ, तीव्र गति से विस्तारशील मध्य वर्ग और २२' गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों के साथ एक तीव्र गति से विकासशील अर्थव्यवस्था है. शिशु मृत्युदरों, मातृ मृत्युदरों और जीवन की प्रत्याशाओं के संबंध में भारत को स्वास्थ्य पर वार्ता करनी है. भारत अभी भी अपनी शिक्षा प्रौद्योगिकी का लगभग ८०-८५ प्रतिशत भाग आयात करता है. न्यायोचित योजनाओं और कुशल कार्यान्वयन के साथ निजी क्षेत्र तथा सरकार को  भावी प्रगति और भारत को नवपरिवर्तन का वैश्विक हब तथा स्वास्थ्य परिचर्या विशेष रूप से चिकित्सा प्रौद्योगिकी में निर्माण का विश्व हब बनाने के लिए एक टीम के रूप में कार्य करने की आवश्यकता है. मैट्रो और टियर-१ बाजार इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे जो तीव्र शहरीकरण और व्यापक आर्थिक विकास द्वारा प्रणोदित है. ग्रामीण बाजार पेनेट्रेशन के वर्तमान खराब स्तर से उठकर तीव्र गति से विकसित होंगे. अस्पताल क्षेत्र २०२० तक बाजार में अपने शेयर तथा प्रभाव में २५' तक विकास करेंगे. इससे फार्मा एवं चिकित्सा क्षेत्र में रोज़गार के व्यापक अवसर सृजित होंगे. भारत के पास पर्याप्त आधारभूत संख्या है जो इस विजन को मजबूती देने में सहायता देंगे. अंत में कहा जा सकता है कि फार्मा एवं उद्योग क्षेत्र विशाल घरेलू बाजार, तकनीकी विशेषज्ञता व्यापक प्राकृतिक एवं वित्तीय संसाधनों तथा ऐसे नवोद्यमियों के बड़े पूल जो भारत के फार्मा एवं स्वास्थ्य परिचर्या के क्षेत्र में योगदान देगा, के साथ विकास की नई ऊचाइंयों तक पहुंचने के लिए तैयार हैं.

डॉ. रणजीत मेहता, प्रधान निदेशक, पीएचडी सीसीआई ई-मेल : ranjeetmehta@gmail.com और अंकिता रानी, जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधानकर्ता हैं