नौकरी फोकस


Volume-3, 21-27April, 2018


 विदेशी भाषाओं में कॅरिअर

श्रीप्रकाश शर्मा

‘‘भाषा का ज्ञान बुद्धिमत्ता का द्वार है’’

रोज़र बेकन

कहा जाता है कि भाषा मनुष्य की आत्मा होती है. जो हम सोचते हैं उसके संचार तथा अभिव्यक्ति का सहज साधन भी भाषा ही होती है. इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि बदलते हुए परिदृश्य, विशेषरूप से उदारीकरण एवं सार्वभौमिकरण के अंतरण-पश्चात् अवधि में, भाषा का महत्व कई गुणा बढ़ा है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. बहु-राष्ट्रीय कंपनियों के अंतर्वाह में तीव्र गति से वृद्धि के बाद, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेश में किए गए निवेश की द्रुत दर में आश्चर्यजनक वृद्धि के बाद, विदेशी भाषाओं का ज्ञान, देश और विदेश में कॅरिअर के व्यापक अवसरों का स्वर्णिम पासपोर्ट समझा जाने लगा है.

कोई विदेशी भाषा हमें क्यों सीखनी चाहिए ?

विदेशी भाषाओं को सीखने से न केवल हमारी जीवन-शैली समृद्ध होती है और सांस्कृतिक लोकाचार में वृद्धि होती है, बल्कि अविश्वसनीय व्यापक रोज़गार अवसर एवं शानदार कार्य-अनुभव भी मिलता है. हम जीवन और विश्व के विभिन्न परिदृश्यों तथा दृष्टिकोणों से भी अवगत होते हैं. हमारे ज्ञान की गुणवत्ता और जीवन-कौशल में भी स्वाभाविक रूप से सुधार आता है. किसी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई रोज़गार प्राप्त होने से हमें आकर्षक आय, विश्व-प्रसिद्धि और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलने में भी सहायता मिलती है. हम विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के साथ उदारता, व्यवहार-सामंजस्य और धार्मिक अनुकूलन कला सीखते हैं.

एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, आगामी दो दशकों में, विशेष रूप से तब, जब कि अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां विश्वभर में तीव्रता से बढ़ रही हों, विश्व बाजार में विभिन्न क्षेत्रों में १.६ मिलियन से भी अधिक विदेशी भाषा-विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी. विदेशी भाषा व्यवसायियों को भारत में विभिन्न बीपीओ, आईटी और केपीओ में भर्ती किए जाने की आशा है. इन व्यवसायियों को यूरोपीय देशों से भारत में आउट सोस्र्ड कंपनियों में भी भर्ती किया जा सकता है.

विश्व रोज़गार बाजार एवं कार्पोरेट संस्कृति के नवीनतम प्रचलन के अनुसार, फ्रैंच, रूसी, जर्मन, चीनी, पुर्तगाली, जापानी, कोरियाई, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं में विशेषज्ञ व्यवसायियों की इतनी मांग होने की संभावना है, जिसकी पहले आशा भी नहीं की गयी होगी.

आवश्यक पात्रता

किसी विदेशी भाषा में डिग्री प्राप्त करने लिए उम्मीदवार किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से प्लस-२ परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए. स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम की अवधि सामान्यत: तीन वर्ष होती है. विदेशी भाषा में डिग्री के बाद इच्छुक उम्मीदवार दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री और उसके बाद पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं.

पैकेज एवं अनुलाभ

यदि कोई उम्मीदवार अधिक अनुभव रखता है तो अन्य विधाओं और व्यावसायिक डिग्रियों की तरह ही विदेशी भाषा भी ऊंचा वेतन देती है. तथापि, प्रारंभ में किसी भी उम्मीदवार को ३००००/- से ४००००/- रु. प्रतिमाह वेतन मिलता है. विदेशी राजदूतावासों और व्यवसाय कॉउंसलेट्स में भी लगभग इतना ही वेतन पैकेज मिलता है, किंतु हमेशा मांग में रहने वाले इंटरप्रेटेशन और अनुवाद के क्षेत्रों में रोज़गार के मामले में वेतन पैकेज पर्याप्त रूप में अधिक होता है. एक कुशल इंटरप्रेटर को १०००/- रु.  प्रति घंटे से लेकर २५०००/- रु. प्रतिदिन के बीच भुगतान किया जाता है. अनुवादक १ रु. प्रतिशब्द से १० रु. प्रति शब्द का भुगतान लेते हैं. ये सभी पारिश्रमिक भाषा की प्रकृति तथा सेवा लेने वालों और संगठनों की आर्थिक पृष्ठभूमि और ब्रांड नेम पर निर्भर होता है.

विदेशी भाषा कहां से सीखें

अनेक शैक्षिक संस्थानों मेंं माध्यमिक तथा वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर उनके पाठ्यक्रमों में विदेशी भाषाएं होती हैं ताकि छात्र उन पाठ्यक्रमों में विदेशी भाषा बहुत जल्दी और बिना किसी विशेष प्रयासों के सीखना प्रारंभ कर सकें. किंतु अधिकांश छात्र ऐसे भी हैं जो विदेशी भाषाओं में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी पाठ्यक्रम करने के उद्देश्य से विदेशी भाषा का अध्ययन, हायर सेकेंडरी करने के बाद ही, प्रारंभ करते हैं. विभिन्न संस्थान कम समय अवधि और कम लागत पर डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी चलाते हैं.

विदेशी भाषा अध्ययन के प्रसिद्ध संस्थान

 १.कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र हरियाणा.
 २.गुरू नानक देव विश्वविद्यालय, विदेशी भाषा विभाग, अमृतसर, पंजाब.
 ३.सिम्बियोसिस विदेशी एवं भारतीय भाषा संस्थान, पुणे.
 ४.विदेशी भाषा विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे.
 ५.रामनारायण रुइया कॉलेज, मुंबई.
 ६.सेंट टेरेसा कॉलेज, एर्णाकुलम, केरल.
 ७.अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद.
 ८.भाषा साहित्य एवं सांस्कृतिक अध्ययन विद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली.
 ९.बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी.
 १०.विदेशी भाषा विद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली.
 ११.सुदूर शिक्षा निदेशालय, अन्नामल्लै विश्वविद्यालय.
 १२.सुदूर शिक्षा संस्थान, मद्रास विश्वविद्यालय.
 १३.सुदूर शिक्षा विद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय.
 १४.सुदूर एवं ऑनलाइन शिक्षा निदेशालय.
 १५.विदेशी भाषा प्रशिक्षण संस्थान, बंगलौर.

शुल्क

जहां तक विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों के शुल्क का संबंध है, ये शुल्क अलग-अलग विश्वविद्यालयों और अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग होते हैं. तथापि, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम शुल्क अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों से समुचित रूप से कम है. इन पाठ्यक्रमों के शुल्क ढांचे में अंतर भाषा और किसी भाषा विशेष को चुनने वाले छात्रों की संख्या पर निर्भर करता है.

तथापि, कोरियन, जापानी और चीनी जैसी भाषाएं कठिन मानी जाती हैं और उनके संस्थान भी कम हैं, इसलिए इन भाषाओं के पाठ्यक्रम अत्यधिक लागत वाले होते हैं. जबकि अरबी और परसियन भाषा देश में सभी विश्वविद्यालयों में आम रूप से उपलब्ध है और इसलिए ये पाठ्यक्रम तुलनात्मक रूप से कम लागत पर उपलब्ध होते हैं. मोटे तौर पर इन पाठ्यक्रमों की लागत २ लाख रु. से ३ लाख रु. प्रतिवर्ष के बीच होती है.

छात्रवृत्तियां एवं वित्त पोषण

विदेशी भाषाओं के अध्ययन के लिए उच्च पाठ्यक्रम शुल्क को देखते हुए विश्वविद्यालयों और सरकार द्वारा छात्रवृत्तियों और वित्तपोषण के विभिन्न प्रावधान किए गए हैं. इस संबंध में, भारत में मैक्स म्यूलर भवन की एक अत्यधिक आकर्षक योजना है, जो विदेशी भाषाओं का उच्चस्तर पर अध्ययन करने वाले दो श्रेष्ठ छात्रों को दो छात्रवृत्तियां देती है. इसी तरह, जवाहरलाल विश्वविद्यालय का शानदार एक्सचेंज कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत छात्रों को जे.एन.यू. में उनके अध्ययन के दौरान विदेशी विश्वविद्यालयों में और विलोमत: अध्ययन करने का विकल्प दिया जाता है.

इसके अतिरिक्त, दिल्ली विश्वविद्यालय में भी छात्रवृत्ति का प्रावधान है जिसके मानदंड केवल मैरिट और विश्वविद्यालय परिणामों का स्तर है. तथापि, कोरिया और जापान जैसी विदेशी सरकारों के उनके अपने निजी कार्यक्रम हैं, जिनके अंतर्गत वे उन छात्रों को छात्रवृत्तियां देते हैं जो उन देशों की भाषा का अध्ययन करने का विकल्प लेते हैं.

रोज़गार की संभावनाएं

विदेशी भाषाओं का अध्ययन, विश्व के वर्तमान गतिशील वैश्विक परिदृश्य में रोज़गार की संभावनाओं के द्वार खोलता है. विदेशी भाषाओं के अध्ययन से आप न केवल अपनी उन्नति को गति दे सकते हैं और विदेशी भाषा का ज्ञान का गर्व अनुभव कर सकते हैं, बल्कि आप आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार का बेहतर रूप से सामना करने में भी सक्षम बनते हैं.

किसी विदेशी भाषा की शैक्षिक डिग्री और दक्षता आपको पर्यटन, शिक्षा, डिप्लोमेटिक सेवाओं, इंटरप्रेटेशन, अनुवाद, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और संबंध, मनोरंजन, जनसंपर्क, मास मीडिया और पत्रकारिता, प्रकाशन, संचार, राजदूतावासों और कांस्यूलेट्स के क्षेत्रों में रोज़गार के व्यापक अवसर देती हैं.

विश्व के सभी देशों में अपना सुनियोजित नेट वर्क रखने वाली बहु-राष्ट्रीय कंपनियां भी अपने कार्यालयों में विभिन्न पदों पर विदेशी भाषा विशेषज्ञों की भर्ती करती हैं. इसके अतिरिक्त, इंटरनेट क्रांति ने भी ऑनलाइन कंटेन्ट राइटर, तकनीकी अनुवादक और इंटरप्रेटर के पदों पर विदेशी भाषा विशेषज्ञों की मांग बढ़ाने में सहायता की है. संयुक्त राष्ट्र संगठन (यू.एन.ओ.) की महत्वपूर्ण एजेंसियों सहित विभिन्न संगठनों, जिन्हें बड़ी संख्या में विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, उनमें खाद्य कृषि संगठन, विदेश मंत्रालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक शामिल हैं.

तथापि, विदेशी भाषाओं के व्यवसायियों के लिए रोज़गार के कुछ विशेषज्ञतापूर्ण क्षेत्र हैं-भाषा, विज्ञान, इंटरप्रेटेशन, अनुवाद तथा अध्यापन.

विदेश सेवाएं

विश्व के वर्तमान खुले, वैश्विक तथा राजनीतिक रूप से नाजुक माहौल में, लगभग सभी देशों के पूरे विश्व में राजदूतावास, व्यवसाय कांस्यूलेट्स हैं. ये राजनीतिक संगठन अपने मूल देशों के हितों का ध्यान रखते हैं और इस तरह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और संपर्क के प्रबंधन एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त करते हैं. देशों की सरकारों को विदेशी भाषा बोलने वाले व्यक्तियों की आवश्यकता होती है जिन्हें निम्नलिखित कार्यों के लिए विदेश में रहने की आवश्यकता होती है :

*विदेशी नागरिकों, सरकारों और गणमान्य व्यक्तियों को सुनना.

*विदेशी भाषाओं में इंटेलीजेंस निष्कर्षों, जांच-रिपोर्टों को पढऩा, अध्ययन करना, अनुवाद करना तथा उत्तर देना.

*विभिन्न देशों में विभिन्न विभागों से संपर्क स्थापित करना.

*विभिन्न विदेशी भाषाओं में अनुसंधान कार्य संचालित करना.

*पासपोर्ट और वीज़ा जारीकर्ता कार्यालयों में विभिन्न कार्य करना.

*राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों, पत्तनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों पर यात्रियों की फ्रिस्किंग और जांच करना.

अंतर्राष्ट्रीय संस्थान एवं संगठन

विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र बाल आपात कालीन निधि जैसी संयुक्त राष्ट्र संगठन की एजेंसियों     और रेडक्रास सोसायटी, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी  अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तथा विभिन्न अन्य संगठनों को ऐसे विभिन्न कार्य करने के लिए विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, जो अच्छे प्रबंधन और सुदृढ़ प्रशासन कार्य करने के लिए अपेक्षित होते हैं. अंग्रेजी के अतिरिक्त, फ्रैंच, स्पेनिश, जर्मन और  अरबी भाषाएं इन अंतर्राष्ट्रीय निकायों में अधिक मांग में होती हैं.

पर्यटन तथा आतिथ्य उद्योग

वर्तमान विश्व परिदृश्य में, पर्यटन एक बहुत बड़े व्यवसाय के रूप में उभरा है और जिन देशों में पर्यटक बड़ी संख्या में जाते हैं उन देशों को हमेशा ऐसे विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है, जो विदेशी अतिथियों की भाषा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. इसके अतिरिक्त, होटलों, रेस्तरां, शॉपिंग माल, मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल्स तथा मनोरंजन पार्कों को अपने विदेशी अतिथियों से संव्यवहार के लिए विभिन्न विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. उद्यमी विदेश में कंपनी स्थापित करते हैं और इस उद्देश्य के लिए उन्हें निमंत्रणकर्ता देश के स्थानीय शहरों और नगरों की भाषा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है.

अनुवाद तथा इंटरप्रेटेशन

वर्तमान में, संचार की तथा ज्ञान अर्जन की कार्य-प्रणाली में विश्वभर में व्यापक परिवर्तन आया है. हमें वाणिज्य तथा कल्याण उद्देश्यों के लिए किसी भाषा के प्रख्यात लेखकों की महान रचनाओं का अनुवाद करने के लिए भाषाविदों की आवश्यकता होती है. लेखकों की पुस्तकों के अनुदित पाठ उन्हें पुस्तकों की बिक्री आश्चर्यजनक रूप में बढ़ाने में सहायता करते हैं और लाभ में वृद्धि  होती है.

विदेश एवं राजनयिक संबंध बनाने के संदर्भ में सरकारी अधिकारी एवं राष्ट्राध्यक्ष विभिन्न देशों के दौरे पर जाते हैं और बेहतर संचार के लिए उन्हें विदेशी भाषा के इंटरप्रेटर्स की आवश्यकता होती है. ये इंटरप्रेटर्स सेलेब्रेटीज़ और सरकार के नीति-निर्माताओं के साथ विभिन्न राष्ट्रों का दौरा करते हैं. इसलिए यह क्षेत्र भी विदेशी भाषा के व्यवसायियों को रोज़गार की अत्यधिक संभावनाएं देने वाला क्षेत्र है.

अध्यापन

विदेशी भाषाओं में विशेषज्ञता रखने वाले व्यवसायियों के लिए कभी भी रोज़गार का अभाव नहीं होता है. अध्यापन न केवल एक शालीन कार्य है, बल्कि निरंतर अभ्यास के माध्यम से कईं और भाषाओं का अध्ययन करने का एक प्रतिष्ठित मंच भी है. छात्रों को विदेशी  भाषा की शिक्षा देने के लिए स्कूल विदेशी भाषा व्यवसायियों की भर्ती करते हैं. केंद्रीय विद्यालय संगठन अपने स्कूलों के छात्रों को जर्मन भाषा पढ़ाता है. विश्वविद्यालय तथा कॉलेज विभिन्न विदेशी भाषाओं के विशेषज्ञों को अपने यहां नियमित संकाय सदस्यों के रूप में भर्ती करते हैं.

विदेशी भाषा डिग्री एक - रोज़गार अनेक

रोज़गार के अन्य क्षेत्रों से अलग, विदेशी भाषा इच्छुक उम्मीदवारों को रोज़गार के विभिन्न निम्नलिखित विकल्प देती है :

*विदेशी भाषा प्रशिक्षक.

*राजनयिक सेवा व्यवसायी.

*अनुसंधान एसोसिएट.

*विभिन्न कंपनियों और सरकारी संगठनों के लिए अनुवादक.

*फ्रीलांस लेखक.

*अनुवादक.

*इंटरप्रेटर.

*जन-संपर्क अधिकारी.

*होटल अटेंडेंट.

*एयर होस्टेस एवं फ्लाइट स्टीवर्ड.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि विदेशी भाषा इसके इच्छुक उम्मीदवारों को व्यक्तिगत उन्नति और कॅरिअर के विकास का अत्यधिक वांछित मंच देता है किंतु यह उतना आसान भी नहीं है जितना समझा या कहा जाता है. विभिन्न देशों की भाषाओं में हुए नवीनतम विकास से स्वयं को अद्यतन रखने की असीम जिज्ञासा वाले अडिग शिक्षार्थी ही ऐतिहासिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं और उनके लिए अवसर असीम होते हैं.

लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय, मेमित, दिनथार वेंग, डाक-मेमिट, जिला-मेमिट में प्रिंसिपल हैं. ई-मेल आईडी: spsharma.rishu@gmail.com