नौकरी फोकस


Volume-4, 28 April-4 May, 2018

 

 

वाणिज्य विधा में कॅरिअर के अवसर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

अच्छी संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले प्रबंधन पाठ्यक्रम आज मांग में हैं. अध्ययन के विषय के रूप में प्रबंधन पाठ्यक्रम हमारे देश में काफी विलंब से आए और प्रारंभ में हमने इनकी अधिकांशत: विदेश से नकल की. तथापि, हमारे देश में अनेक प्रबंध विषयों को वाणिज्य के अध्ययन में शामिल किया गया. वाणिज्य देश में शिक्षा की एक प्रसिद्ध विधा रही है और उपलब्ध व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में यह कई रूप में प्रथम रही है. जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का विकास होता रहा और व्यवसाय की मात्रा बढ़ती रही, वाणिज्य का अध्ययन भी उतना ही आशाजनक होता गया. यद्यपि आजकल इंजीनियरिंग या प्रौद्योगिकी में डिग्री एक अत्यधिक वांछित योग्यता है, किंतु वाणिज्य की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. वाणिज्य का एक मुख्य लाभ यह है कि इस विषय के अध्ययन पर किसी को बहुत अधिक धनराशि खर्च नहीं करनी पड़ती जबकि इंजीनियरिंग, औषधि, वास्तुकला आदि पाठ्यक्रमों पर अत्यधिक वित्तीय लागत, विशेष रूप से निजी संस्थाओं में लगती है. तथापि, किसी भी विषय की तरह आप वाणिज्य को अध्ययन के लिए तभी चुनें यदि आप इसमें रुचि रखते हैं और आपका इसमें रुझान है.

अध्ययन की विधा के रूप में वाणिज्य को 10 + 2  स्तर के बाद चुना जा सकता है. यदि आप विज्ञान के छात्र रहे हैं तो आप बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद किसी बी.कॉम. पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं. वाणिज्य पाठ्यक्रम में प्रवेश अधिकांशत: मैरिट आधारित होता है. पिछली परीक्षा में आपके अंक, पाठ्यक्रम में आपके प्रवेश को निर्धारित करने में ध्यान में रखे जाएंगे. इस विधा में आपको, कई इंजीनियरिंग, चिकित्सा तथा कुछ अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश  के लिए जे.ई.ई. या एन.ई.ई.टी. जैसी परीक्षाओं में बैठने की आवश्यकता नहीं होती.

वाणिज्य मुख्य रूप से उत्पादकों द्वारा रिटेलरों और अंतिम प्रयोक्ता को पदार्थों तथा सेवाओं की बिक्री जैसे व्यापार एवं व्यवसाय से जुड़ा होता है. वाणिज्य के एक छात्र के रूप में, आप लेखाकरण सिद्धांतों, अर्थशास्त्र, व्यवसाय/निवेश नीतियों तथा ऐसे अन्य विषयों का अध्ययन करेंगे. यह विषय आपको तुलन पत्र, व्यापार लेखा, लाभ एवं हानि विवरण तथा अन्य ऐसे विवरण तैयार करने में सक्षम बनाता है जो किसी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को उजागर करते हैं. आप व्यवसाय लेखाकरण में कम्प्यूटर के उपयोग का भी अध्ययन

करते हैं.

वाणिज्य आधारित किसी कॅरिअर में प्रवेश के लिए आप इस विषय में कम से कम स्नातक डिग्री जो सामान्यत: बी.कॉम. के रूप में प्रसिद्ध है, रखते हों. इस डिग्री को पूरा करने में तीन वर्ष लगते हैं. एक वाणिज्य स्नातक बनने के बाद, आपके पास अनेक विकल्प होते हैं. आप वाणिज्य में स्नातकोत्तर (एम.कॉम.) कर सकते हैं, जिसके लिए अन्य दो वर्ष लगते हैं. यदि आप एम.कॉम. नहीं करना चाहते तो आप आगे अध्ययन करने के कई विकल्प चुन सकते हैं. इन विकल्पों का विवरण नीचे दिया गया है.

प्रबंधन: जो व्यक्ति व्यवसाय प्रबंधन व्यवसायी बनना चाहते हैं उनके लिए प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री/डिप्लोमा एक उपयुक्त विकल्प है. वाणिज्य के छात्र इस पाठ्यक्रम को कई संबंधों में ज्ञात तथा समझने के लिए आसान पाएंगे. आपके द्वारा चुना गया पाठ्यक्रम पूर्णकालिक और दो वर्ष की अवधि का तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (ए.आई.सी.टी.ई.) द्वारा मान्यताप्राप्त होना चाहिए. आपको इस पाठ्यक्रम में कोई विशेषज्ञता चुननी होगी. यद्यपि अधिकांश वाणिज्य छात्र वित्त में विशेषज्ञता करते हैं. कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार विपणन, प्रचालन, मानव संसाधन, सूचना प्रौद्योगिकी आदि चुन सकता है. व्यवसाय विश्लेषण विज्ञान जैसी नई विशेषज्ञताएं भी कुछ संस्थानों में उपलब्ध हैं.

विधि: विधि (एल.एल.बी.) में कोई स्नातक डिग्री करने के लिए आप स्नातक होने चाहिएं. आपकी बी.कॉम. योग्यता विधि में डिग्री का प्रवेश द्वार हो सकती है, जो आपको कोई विधिक कॅरिअर प्रदान कर सकती है. आप, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा विधि विद्यालयों/विश्वविद्यालयों में संचालित 3 वर्षीय विधि स्नातक पाठ्यक्रम चुन सकते हैं. उसके तत्काल बाद विधिक प्रेक्टिस कार्य प्रारंभ कर सकते हैं, किंतु आपको स्नातकोत्तर (एल.एल.एम.) करने या कार्पोरेट विधि, साइबर विधि आदि जैसे विशेषज्ञतापूर्ण पाठ्यक्रम करने का भी विकल्प होता है.

कम्प्यूटर अनुप्रयोग : कई छात्र यह समझते हैं कि एम.सी.ए.-मास्टर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन में केवल वे छात्र प्रवेश ले सकते हैं जिन्होंने पहले कम्प्यूटर या सूचना विज्ञान का अध्ययन किया हो. जबकि वाणिज्य स्नातक कम्प्यूटर विज्ञान में एम.ई. या एम.टेक. के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं होते. उनके लिए एम.सी.ए. एक व्यवहार्य विकल्प है. वाणिज्य एवं कम्प्यूटर का ज्ञान रखने वाले छात्र व्यवसाय कम्प्यूटिंग, सॉफ्टवेयर विकास आदि में उच्च कॅरिअर प्रारंभ कर सकते हैं.

चार्टरित लेखाकारिता : यह पाठ्यक्रम भारतीय चार्टरित लेखाकार संस्थान (आई.सी.ए.आई.) द्वारा संचालित और नियंत्रित है. इस पाठ्यक्रम के लिए किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक आधार पर प्रवेश लेना जरूरी नहीं है. आई.सी.ए.आई. द्वारा लिए  गए निर्णय के अनुसार, यह पाठ्यक्रम स्व-अध्ययन सम्पर्क कक्षाओं और व्यावहारिक प्रशिक्षण का युग्मक है. इस पाठ्यक्रम में १०+२ तथा आई.सी.ए.आई. द्वारा संचालित सामान्य दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रवेश लिया जा सकता है. पाठ्यक्रम दो भागों-इंटरमीडिएट तथा फाइनल में विभाजित होता है. फाइनल भाग पूरा करने के बाद आप आई.सी.ए.आई. के सदस्य बन सकते हैं, जो इसके छात्रों  की तैनाती में सहायक होता है. वाणिज्य पाठ्यक्रम में स्नातक तथा सी.ए. पाठ्यक्रम एक साथ किए जा सकते हैं और कई छात्र ये दोनों पाठ्यक्रम एक साथ करते हैं.

सी.ए. बनने का अन्य मार्ग भी है. न्यूनतम ५५त्न  अंक धारी वाणिज्य स्नातक/स्नातकोत्तर तथा ६०त्न अंक धारी अन्य स्नातक/स्नातकोत्तर पहले इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम के  लिए संस्थाान में पंजीकरण करा सकते हैं. यह पाठ्यक्रम करने के बाद, उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा आर्टिकलशिप पूरी करनी होगी. अंतिम परीक्षा पूरी करने के बाद उम्मीदवार आई.सी.ए.आई. के सदस्य के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं और चार्टरित लेखाकार बन सकते हैं.

लागत लेखाकारिता : यह योग्यता भी सी.ए. योग्यता के समान है, किंतु पाठ्यक्रम विषय-वस्तु काफी अलग होती है. यह पाठ्यक्रम भारतीय लागत लेखाकार संस्थान-जिसका नाम पहले भारतीय  लागत एवं कार्य लेखाकार संस्थान था, द्वारा संचालित एवं विनियमित है. यह सुझाव दिया जाता है कि पहले चार्टरित लेखाकारिता  एवं लागत लेखाकारिता के पाठ्यक्रमों की तुलना करें और उसके बाद निर्णय लें कि आपके कॅरिअर के लिए कौन सा विकल्प सही है.

चार्टरित वित्त विश्लेषक :- यह संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित सी.एफ.ए. संस्थान द्वारा संचालित एक अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन पाठ्यक्रम है और भारत सहित विश्व के सभी देशों में उपलब्ध है. सी.एफ.ए. कार्यक्रम उच्च निवेश विश्लेषण और पोर्टफोलियों प्रबंधन कौशल में सुहढ़ आधार प्रदान करता है. स्नातक उम्मीदवार विभिन्न विकल्पों के साथ पाठ्यक्रमों के लिए पंजीकरण कर सकते हैं. यह पाठ्यक्रम तीन स्तरों- I, II, एवं III में विभाजित है. सी.एफ.ए. बनकर आप अपना वैश्विक कॅरिअर बना सकते हैं. इस योग्यता के साथ आपको निजी संगठनों में रोजग़ार मिलने की संभावनाएं अधिक हैं.

कंपनी सचिव:- वाणिज्य छात्रों के लिए कंपनी सचिव भी एक लोकप्रिय कॅरिअर विकल्प है, यह पाठ्यक्रम भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आई.सी.एस.आई.) द्वारा चलाया जाता है. यह पाठ्यक्रम चुनने वाले उम्मीदवारों को वाणिज्य या समकक्ष में १०+२ पूरी करने के बाद पाठ्यक्रम के तीन चरण पूरे करने होते हैं. इन चरणों में फाउंडेशन कार्यक्रम, एक्जीक्यूटिव कार्यक्रम और व्यावसायिक कार्यक्रम शामिल हैं. स्नातक के बाद इसमें प्रवेश लेने वालों को केवल दो चरण-एक्जीक्यूटिव  एवं व्यावसायिक चरण पूरे करने होते हैं. दोनों समूहों के लिए व्यावसायिक कार्यक्रम केवल एक्जीक्यूटिव कार्यक्रम करने के लिए भी किया जा सकता है. कंपनी सचिव पाठ्यक्रम सी.ए. पाठ्य-पद्धति पर भी कार्य करता है. तथापि, २०१४ से आई.सी.एस.आई. ने उन छात्रों के लिए एक ३ वर्षीय पूर्णकालिक पाठ्यक्रम प्रांरभ किया है जो ५0त्न अंकों के साथ स्नातक हैं या जिन्होंने फाउंडेशन पाठ्यक्रम उत्तीर्ण किया है. यह पूर्णकालिक पाठ्यक्रम नवी मुंबई में चलाया जाता है और इसमें कुल ५० सीटे हैं.

सभी बड़ी एवं मझली कंपनियों के अपने लेखा विभाग होते हैं, जो अपने लेखा के रखरखाव और संबंधित कार्यों की देखभाल के लिए वाणिज्य-स्नातकों की भर्ती करते हैं. वाणिज्य छात्रों के लिए उपयुक्त और भी अनेक कॅरिअर हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है :-

बैंकिंग : जैसा कि सभी जानते हैं भारत में बैंक, अधिकांश रूप से सरकारी बैंक, बड़ी संख्या में भर्ती कर रहे हैं और इस तरह रोजग़ार तलाशने वालों के लिए यहां अधिक संभावनाएं हैं. वाणिज्य छात्रों के लिए पाठ्यक्रम में बैंकिंग एक मुख्य विषय के रूप में निर्धारित है. जब कभी भी रिक्तियां विज्ञापित की जाती हैं वाणिज्य स्नातक सार्वजनिक एवं निजी बैंकों में लिपिकीय तथा अधिकारी पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. यद्यपि सभी विषयों के स्नातक सार्वजनिक  क्षेत्र के बैंकों में आवेदन करने के पात्र होते हैं, किंतु कई मामलों में निजी एवं को-ऑपरेटिव बैंक वाणिज्य की पृष्ठभूमि रखने वाले उम्मीदवारों को वरीयता देते हैं, हालांकि भर्ती के विज्ञापनों में इसका विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया जाता है. मुख्यधारा बैंकिंग इसके अतिरिक्त मर्चेन्ट बैंकिंग, निवेश बैंकिंग आदि में भी रोजग़ार के अवसर उपलब्ध होते हैं.

स्टॉक ब्रोकिंग : भारत में स्टॉक एक्सचेंज की संख्या बढ़ रही है और अधिकाधिक व्यक्ति शेयर में निवेश कर रहे हैं. शेयर की खरीद-फरोक्त सेक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) पंजीकृत स्टॉक ब्रोकर्स के माध्यम से होती है. आप किसी भी ऐसी स्टॉक ब्रोकिंग एजेंसी में कार्य ग्रहण कर सकते हैं जहां आपका कार्य ग्राहकों के आदेशों से निपटने, उन्हें सलाह देने, इक्विटी अनुसंधान से जुड़ा हो सकता है. ऐसे कार्य मुख्य रूप से बड़े शहरों में उपलब्ध होते हैं. कई बैंकों की ब्रोकिंग  शाखाएं भी होती हैं.

लेखा परीक्षण : ऐसी अनेक लेखा-परीक्षण फर्म हैं, जो लेखा-परीक्षा कार्य करने या अपने वरिष्ठ लेखा-परीक्षकों की सहायता के लिए चार्टरित लेखाकारों और वाणिज्य स्नातकों को रोजग़ार में रखती हैं. बैंको तथा अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के लिए लेखा की जांच कराना अनिवार्य होता है और वे यह कार्य मान्यताप्राप्त लेखा परीक्षण फर्मों से कराती हैं. कुछ लेखा-परीक्षा फर्में स्थानीय या क्षेत्रीय स्तर पर कार्य करती हैं और अनेक अन्य फर्में अखिल भारतीय आधार पर या विश्वभर में कार्य करती हैं.

अध्यापन : एम.कॉम. योग्यता धारी छात्र माध्यमिक या उच्च कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रबंधन शिक्षा के लिए अध्यापन कॅरिअर भी चुन सकते हैं. ऐसे अनेक कोचिंग संस्थान भी हैं जो विभिन्न लेखाकरण पाठ्यक्रमों तथा प्रमाणन के लिए तैयारी करने में छात्रों की सहायता करते हैं और वे वाणिज्य के अध्यापकों को सेवा में रखते हैं.

परामर्श कार्य : वाणिज्य की पृष्ठभूमि तथा वरीयत:  कुछ अनुभव रखने वालों के लिए परामर्श कार्य में अच्छे अवसर होते हैं. परामर्श कार्य के कई क्षेत्र हंै. जैसे लेखापरीक्षण (कंपनियों को लेखापरीक्षा के लिए तैयार रहने का परामर्श देना), आयकर, सेवाकर , वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) आदि. गूड्स एंड सर्विस टैक्स (जी.एस.टी.) चलन में है, और इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले परामर्शदाताओं के लिए व्यापक अवसर हैं. वित्तीय नियोजन भी परामर्श का एक क्षेत्र है, जिसके लिए आप प्रमाणित वित्तीय नियोजक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने का विकल्प ले सकते हैं. कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र परामर्शदाता के रूप में कार्य कर सकता है और डेलोट, इडलवीस आदि जैसी परामर्श देने वाली फर्मों में अवसर तलाश सकते हैं. ये सभी कॅरिअर सी.ए., सी.एफ.ए तथा कंपनी सचिवों आदि के लिए खुले हैं. वाणिज्य में कोई उत्कृष्ट कॅरिअर बनाने के लिए आपको अंकों में  रुचि होनी चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र में अधिकांश समय आंकड़ों एवं अंकों से संबंधित कार्यों से जुड़े रहेंगे. आपकी बुद्धि तार्किक एवं विश्लेषिक प्रकृति की भी होनी चाहिए, जो आपको तुलन-पत्र, लाभ-हानि विवरणिका तथा अन्य वित्तीय सांख्यिकी में सहायता करेगी.

ये सभी गुण सच्चे प्रयासों और कठोर परिश्रम से विकसित किए जा सकते हैं.  लेखक मुंबई में कॅरिअर काउन्सलर हैं.. ई.मेल : v2j25@yahoo.in