नौकरी फोकस


Volume 6, 12-18 May, 2018

पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में कॅरिअर


डॉ. तनवीर आलम

पैकेजिंग, विश्वभर में किसी भी पदार्थ की व्यावसायिक सफलता का एक घटक है. आज व्यवसाय की सफलता इस पर निर्भर करती है कि पैकेजिंग कितनी अच्छी है. पैकेजिंग विपणन का एक प्रभावशाली साधन है, जो शेल्फ पर ब्रांड के महत्व और उत्पाद विशिष्टीकरण को बढ़ाती है. अब, यह केवल उत्पाद की रैपिंग या परिरक्षण से ही नहीं जुड़ी है, बल्कि यह ग्राहकों को भी आकर्षित करती है बल्कि डिब्बाबंद उत्पादों के प्रति धारणा का भी सृजन करती है, आज के युग में पैकेजिंग न केवल किसी उत्पाद की ट्रेसिंग और ट्रैकिंग का स्रोत बन गई है, बल्कि यह किसी भी मूल्यवान सामग्री की नकल की रोकथाम के लिए भी जिम्मेदार है. इसमें महत्वपूर्ण सूचना जैसे होलोग्राम-जो उत्पाद की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, लेबलिंग-जिसमें किसी खाद्य उत्पाद के पोषक तत्वों के तथ्यों का अनिवार्य अनुपालन शामिल होता है,  आदि होती है. पैकेजिंग प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक प्रगति देखी गयी है, जैसे तैयार खाद्य उत्पादों में रिटोर्ट पैकेजिंग, यूएचटी प्रोसेस, परिशोधित एट्मोसफियर पैकेजिंग, नैनो पैकेजिंग, सक्रिय तथा अनुकूल पैकेजिंग. इन उभर रही प्रौद्योगिकियों ने पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों के अध्ययन को वैविध्यपूर्ण बना दिया है और इसलिए इनकी संभावनाओं में भी वृद्धि हुई है. विभिन्न बहु उत्पादों के उत्पादन की बाजार में दैनिक आधार पर हो रही वृद्धि के साथ ही पैकेजिंग विशेषज्ञों की आवश्यकता भी कई गुना बढ़ी है और इस व्यवसाय को लगातार मान्यता भी मिलती जा रही है. इच्छुक छात्र इस उद्योग से लाभ प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि यह उद्योग राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है. यह लेख आपको पैकेजिंग पाठ्यक्रमों तथा इसमें कॅरिअर के व्यापक अवसरों के बारे में महत्वपूर्ण विवरण देगा.
पैकेजिंग उद्योग एक नजर में
भारतीय पैकेजिंग उद्योग में आर्थिक प्रगति देखने के लिए, समय-समय पर आवश्यक सरकारी संशोधन लाए जाने चाहिएं. यह भी प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय पैकेजिंग उद्योग अगले ४-५ वर्षों में १३-१५ प्रतिशत सीएजीआर की दर से वृद्धि करना जारी रखेगा. भारतीय पैकेजिंग उद्योग संघ (इकोनॉमिक टाइम्स, २०१७) के अनुसार, भारत में पैकेजिंग सबसे तीव्र गति से विकासशील क्षेत्र है, क्योंकि यह लगभग प्रत्येक उद्योग क्षेत्र में व्याप्त है. खाद्य एवं पेय पदार्थों, फलों एवं सब्जियों, औषधियों और दवाइयों की पैकेजिंग से लेकर अत्यधिक खतरनाक पदार्थों की पैकेजिंग पिछले कुछ वर्षों से व्यापक विशेषज्ञता एवं परिष्करण में परिवर्तित हुई है. भारत में पैकेजिंग बाजार एक उज्ज्वल उद्योग बन गया है, जिसे बढ़ते शहरीकरण, मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं के अनुपात में वृद्धि, डिस्पोजेबल आय स्तर में वृद्धि, उपभोक्ता जागरुकता में वृद्धि तथा सुविधाजनक एवं संसाधित खाद्य पदार्थों की मांग में वृद्धि जैसे अनुकूल जनांकिक पहलुओं द्वारा पर्याप्त समर्थन मिला है. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जो खाद्य, पेय पदार्थों, सौंदर्य प्रसाधनों और स्नान प्रसाधनों (ट्वॉयलेटरीज़) और भेषज क्षेत्र में तीव्र गति से कदम बढ़ा रही हैं, आशा है कि वे पैकेजिंग के क्षेत्र में इस विकास गाथा के मुख्य संचालक होंगे. ये परिवर्तन पैकेजिंग सुधार जैसे विभिन्न अवसरों, सामग्रियों और सुदृड़ता की की आवश्यकता को प्रेरणा देती हैं. यह महत्वपूर्ण तथ्य पैकेजिंग सप्लायरों तथा अंतिम प्रयोक्ता उद्योग-दोनों के लिए बल्क पैकेजिंग से रिटेल, इकाई-स्तर, प्राथमिक प्रोसेसिंग पैकेजिंग एकक एवं लघु पैकेजिंग क्षेत्र में अंतरण के लिए जिम्मेदार है, इसके अतिरिक्त, संयोजित रिटेल वृद्धि तथा रिटेल एवं अन्य क्षेत्रों में नए शिथिल एफडीआई निवेश मानदंड भारत में पैकेजिंग उद्योग के लिए अच्छे संकेत देते हैं. भारतीय पैकेजिंग उद्योग २०१६-२०२१ के दौरान उल्लेखनीय विकास करेगा, जो २०११-२०१६ के दौरान ६.२ प्रतिशत सीएजीआर की तुलना में उक्त अवधि में ९.२ प्रतिशत सीएजीआर दर से बढ़ेगा. पिछले १० वर्षों के दौरान यह उद्योग १२ बिलियन  अमेरिकी डॉलर से दोगुना बढक़र २४.६ बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो गया है और बाजार प्रेक्षकों तथा उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि २०२० तक यह और बढक़र ३२ बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो  जाएगा और २०२५ तक ५० बिलियन अमेरिकी डॉलर को भी पार कर सकता है. इतना ही नहीं, यह उद्योग पैकेजिंग के क्षेत्र में आकर्षक एवं नव प्रवर्तित रोज़गार का भी सृजन कर रहा है. इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की पैकेजिंग मशीनों जैसे फॉर्म-फिल सील मशीन, स्ट्रैच रेपिंग, श्रिंक रैपिंग, पेलीटाइजिंग आदि के विनिर्माण एवं डिजाइन से संबद्ध बढ़ रहे उद्योगों ने पैकेजिंग प्रौद्योगिकी को लोकसुलभ बनाने की आवश्यकता के संबंध में अपना योगदान किया है. भारत में पैकेजिंग की प्रति व्यक्ति खपत केवल ४.३ किग्रा प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष है, जबकि जर्मनी में ४२ किग्रा और चीन में २० किग्रा है, जो विश्व मानकों की तुलना में बहुत कम है. बड़ी संख्या में अनपैक्ड सामग्रियों को प्रोसेस्ड और पैक्ड तथा नए रूप में प्रस्तुत सामग्रियों में परिवर्तित किए जाने की पहल करने की आवश्यकता  है. भारत का, इसके १२५ मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की कुल पैकिंग मशीनरी के साथ २०-२५ प्रतिशत आयात न केवल भारतीय कंपनियों को घरेलू बाजार में अपना शेयर बढ़ाने के व्यापक अवसरों का, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को भी भारत में नए व्यवसाय अवसरों का पता लगाने का संकेत कराता है. २०१६-२०२१ की अवधि के दौरान मृदु पेय एवं खाद्य उद्योगों की क्रमश: ३.४ प्रतिशत एवं १.३ प्रतिशत की शेयर वृद्धि के साथ सबसे बड़े पैकेजिंग मार्केट शेयर गेनर होने की संभावना है. प्रगतिशील सुनियोजित रिटेल क्षेत्र-विशेष रूप से खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योगों जो भारतीय पैकेजिंग उद्योग के विकास का संचालन करते हैं, के विकास का एक महत्वपूर्ण संचालक है. इसके अतिरिक्त, बेहतर बैरियर प्रोपर्टीज वाले हल्की पैकेजिंग के विकास जैसे पैकेजिंग उद्योग में नवप्रवर्तन पैकिंग उद्योग के सुधार में सहायक होंगे. पैकिंग सामग्रियों के संंबंध में ग्लास एवं रिजिम प्लास्टिक्स की २०१६-२०२१ के दौरान क्रमश: ०.७ और ०.६ प्रतिशत के विकास के साथ बड़े क्षेत्रों में खड़ा होने की क्षमता है. फ्लैक्सीबल पैकेजिंग भारतीय पैकेजिंग उद्योग में पैक प्रकृति में अग्रणी रही है और यह २०१६-२०२१ के दौरान ८.९ प्रतिशत के एक स्वस्थ सीएजीआर पर विकास करेगा, जिसमें मुख्य योगदान खाद्य, घरेलू परिचर्या, सौंदर्य प्रसाधनों तथा स्नान प्रसाधन उद्योगों का है. यह सफलता व्यापक रूप से इनकी कम लागत तथा बहु आकृति एवं आकार के अनुकूल फ्लैक्सीबिलिटी, सुविधा (जिप लॉक, प्लास्टिक क्लोजर्स) तथा रिजिम प्लास्टिक की तुलना में कार्बन का पर्यावरण पर कम प्रभाव होने के कारण है. इसके अलावा उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों में कम घनत्व वाले फ्लैक्सिबल पैकों की बढ़ती हुई उत्कृष्टता भावी विकास की संचालक होगी. ये सभी स्पष्ट रूप से संकेत करते हैं कि भारत में पैकेजिंग उद्योग के विकास की शानदार संभावना है.
यह भी अनुमान लगाया गया है कि भातीय पैकेजिंग बाजार, विश्व का चौथा सबसे बड़ा बाजार होगा. भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश (चीन के बाद) है, दूसरा सबसे बड़ा वनस्पति उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा फल उत्पादक देश है. मसालों के मामलों में भारत का विश्व व्यापार मात्रा के संबंध में ४४ प्रतिशत और मूल्य के संबंध में ३६ प्रतिशत है. यद्यपि यह क्षेत्र बड़ी संस्थाओं के लिए व्यापक अवसर देता है. किंतु क्षेत्र को परिभाषित करने वाले बहु कानूनों के कारण विनियामक स्पष्टता के अभाव, विश्व की कंपनियों के प्रवेश द्वारा निर्धारित अधिक कड़े पैकेजिंग मानदंडों को और पोषणीय पैकेजिंग पर ग्राहकों की बढ़ती हुई जागरूकता के कारण कड़े मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता, सामग्रियों को हरा-भरा रखने की आवश्यकता तथा नवप्रवर्तन जिनके लिए अनुसंधान एवं विकास तथा अवसंरचना में निवेश करना आवश्यक है आदि कईं आनुषंगिक चुनौतियां निहित हैं.
भारतीय पैकेजिंग उद्योग बड़ी संख्या में लघु  उद्योगों और कुछ बड़े एकीकृत उद्योगों वाला एक अत्यधिक क्षेत्र है. पैकेजिंग उद्योगों की अंतरण प्रौद्योगिकियों में इस निरंतर प्रगति एवं विकास के कारण ऐसे सुयोग्य पैकेजिंग इंजीनियरों की मांग बढ़ी है जो पैकेजिंग मशीनरी और प्रचालन के विभिन्न इंजीनियरी घटकों के बारे में व्यावसायिक सुझाव दे सकें.
पैकेजिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में कॅरिअर एक विश्व मंच देता है
२०१८ तक विश्व पैकेजिंग बाजार के, ९७५ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने और ४ प्रतिशत की वार्षिक दर पर वृद्धि होने की आशा है. अकेले एशिया में ही विश्व मांग की ४० प्रतिशत से अधिक मांग की संभावना है. फ्लैक्सिबल पैकेजिंग की मांग में वृद्धि रही है. वर्तमान में फ्लैक्सिबल मांग ४ प्रतिशत की दर से बढ़ रही है जिसकी मात्रा १६ मिलियन  टन से अधिक हैं और मूल्य ५० बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है. विश्व बाजार में देखी गयी ऐसी व्यापक वृद्धि, निश्चित रूप से छात्रों के कॅरिअर के लिए एक रचनात्मक माध्यम देती है. छात्रों के लिए ऐसा वैश्विक अवसर पैकेजिंग उद्योग के भविष्य को समृद्ध करेगा.
पैकेजिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बारे में
पैकेजिंग विज्ञान, कला एवं प्रौद्योगिकी है जो उत्पादों का वितरण, भंडारण, विक्रय और उपयोग के लिए परिरक्षण करती है, पैकेजिंग उत्पादों की डिजाइनिंग, मूल्यांकन और उपभोक्ता को इसकी सुरक्षित प्रदायगी सुनिश्चित करने की भी प्रक्रिया होती है.
इसे ढुलाई, भंडारण, सभार तंत्र, विक्रय और अंतिम प्रयोग के लिए सामग्री तैयार की समन्वित प्रणाली के रूप में भी उल्लिखित किया जा सकता है. यह हमारे दैनिक जीवन से भी अत्यधिक जुड़ी है और कोई भी व्यक्ति पैकेजिंग के बिना अपना दैनिक कामकाज नहीं कर सकता. पैकेजिंग में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरी से लेकर प्रिंटिंग, विपणन और ग्राफिक डिजाइन जैसे  अनेक विषय शामिल हैं. व्यापक रूप में कहें तो इसमें डिजाइन, विनिर्माण तथा विपणन निहित हैं. पैकेजिंग प्रौद्योगिकी बहु-विषयीय कॅरिअर प्रदान करती है और इसमें सामग्रियों, प्रोसेसिंग, डिजाइन, गुणवत्ता तथा पर्यावरणीय प्रवृत्तियों का विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान होना आवश्यक है. पैकेजिंग प्रौद्योगिकी का विज्ञान, व्यक्तियों के रासायनिक एवं यांत्रिक इंजीनियरी के ज्ञान के आधार पर सही पैकेजिंग सामग्री और परिरक्षण की दृष्टि से उसे सही रूप में रखने के बारे में मार्गदर्शन करता है. ऐसे डिजाइनर एवं कलाकारों की हमेंशा मांग होती है जो आकर्षक एवं नवप्रवर्तित पैकेजिंग दे सकें. इसे कई उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाया जाता है जैसे नव प्रवर्तित एंव धारणीय डिजाइनिंग तथा सूचनाप्रद पैकेजिंग, जिससे उत्पाद आकर्षक दिखाई दे और जो ढुुलाई तथा भंडारण के लिए सुविधाजनक हो. पैकेजिंग ऐसी हो जो उत्पादों की ढुलाई एवं भंडारण के समय हर तरह के संदूषण, विभिन्न प्रकार के खतरों और क्षति अर्थात यांत्रिक, भौतिकीय एवं पर्यावरणीय प्रभाव से रक्षा कर सके. पैकेजिंग शिक्षा में खाद्य उत्पादों की पैकिंग, संभार तंत्र और भौतिकीय वितरण, पैकेजिंग प्रोसेस, गुणवत्ता नियंत्रण, संचार कौशल, पैकेज विपणन, पैकेज अर्थशास्त्र, पैकेजिंग विधियां एवं विनियम, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिकी, अनुप्रयुक्त यांत्रिकी, प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी, मशीन ड्राइंग, उत्पादन प्रबंधन, आदि जैसे विषय शामिल हैं.
जब हम पैकेजिंग डिजाइन की बातें करते हैं तो कार्यात्मक डिजाइन और ग्राफिक दोनों के रूप में यह पैकेजिंग प्रणाली का एक महत्वपूर्ण भाग होती है. जिसमें प्रिंटिंग, प्रणाली का अंतरंग भाग होती है. पैकेजिंग के उपयोग और इसमें प्रयुक्त सामग्रियों जैसे प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक पैकेजिंग प्रणाली, उपभोक्ता एवं यूनिट तथा बल्क पैकेजिंग प्रणाली, पैकेजिंग उद्योग के लिए प्रयुक्त सहायक सामग्रियों के आधार पर इसके विभिन्न प्रकार एवं वर्गीकरण होते हैं. पेपर और पेपर बोर्ड को रुगेट बॉक्स उद्योग, प्लास्टिक पैकेजिंग, ग्लास पैकेजिंग, मैटल केन, फाइबर ड्रम, कम्पोजिट केन तथा लेमिनेट सामग्रियां पैकेजिंग के लिए मुख्य सामग्रियों के रूप में प्रयोग में लाई जाती हैं.
पैकेजिंग में कॅरिअर के अवसर
केवल भारतीय बी-स्कूल और आईटी क्षेत्र ही अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक समुदाय के राडार पर नहीं हैं. अब पैकेजिंग संस्थान भी व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. देशभर में ३५००० से अधिक पैकेजिंग एकक हैं और उनमें से अधिकांश एकक असंगठित हैं तथा उनमें कुशल जन शक्ति का अभाव है एवं इन्हें औसतन ३००० पैकेजिंग व्यवसायियों की वार्षिक रूप में आवश्यकता होती है. विश्व भर में पैकेजिंग व्यवसायियों की भारी मांग है. विज्ञान की किसी भी विधा के स्नातक या इंजीनियरी तथा प्रौद्योगिकी की पृष्ठभूमि रखने वाले व्यक्ति पैकेजिंग को कॅरिअर के रूप में चुन सकते हैं. पैकेजिंग व्यवसायियों की पैकेजिंग उद्योगों में व्यापक मांग है और यह अत्यधिक वांछनीय है कि पैकेजिंग प्रभारी कार्यापालक पैकेजों के निर्माण की पद्धतियों और सामग्रियों का ज्ञान रखता हो या उनका तकनीकी ज्ञान उसके पास हो. पैकेजिंग के क्षेत्र में पाठ्यक्रमों में खाद्य उत्पादों, वस्त्र, भेषज, सौंदर्य प्रसाधन और ऑटोमोबाइल से संबंधित अनेक कौशल शामिल होते हैं. कोई भी व्यक्ति पैकेजिंग डिजाइन, प्रिंटिंग और इनकी मशीनों के अध्ययन में भी कॅरिअर बना सकते हैं. लगभग ६०० से ७०० पैकेजिंग मशीन निर्माता हैं. जिनमें से ९५ प्रतिशत निर्माता लघु एवं मध्यम क्षेत्र के हैं और पूरे देश में स्थित हैं. हाल ही के एक अनुमान के अनुसार भारत में २२००० से अधिक पंजीकृत पैकेजिंग कंपनियां हैं, जिनमें से ८५ प्रतिशत से अधिक कंपनियां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम में हैं. बड़ी कंपनियां अत्यधिक पूंजीकृत हैं और ये सामान्यत: सामग्रियों के उत्पादन, नवप्रवर्तित उत्पादों एवं डिजाइन जैसे अत्यधिक मूल्य वर्धित कार्यकलापों और अधिक मात्रा में सप्लाई में रत हैं तथा एफ एवं बी और संदर्भ प्रसाधनों जैसे भारी मांग वाले क्षेत्रों की आवश्यकता की पूर्ति करती हैं. भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम वे कंपनियां सामान्यत: कम मूल्य वाले कार्यों जैसे कन्वर्जन, फिलिंग उत्पादन जैसे कार्यों से जुड़ी हैं. भारत में संगठित क्षेत्रों की संख्या लगभग ५०त्न है और शेष क्षेत्र अत्यधिक असंगठित तथा वितरित हैं. विश्व-भर का परिदृश्य किंचित अधिक समेकित हैं. विश्व पैकेजिंग उद्योग का लगभग ७५त्न  भाग मूल्य द्वारा विश्व के सबसे अधिक एकीकृत २०त्न उद्यमियों का है.
अनुलाभ एवं पारिश्रमिक
पैकेजिंग व्यवसायी सामग्री प्रबंधन, स्टोर्स, सप्लाई चेन प्रबंधन, अनु. एवं वि., कन्वर्टर आदि प्रयोक्ता उद्योगों जैसे खाद्य  प्रसंस्करण उद्योगों, रोबोटिक्स, भेषज, रासायनिक, वैद्युत, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिकी उद्योगों के पैकेजिंग प्रभाग में किसी भी पद पर कार्य ग्रहण कर सकते हैं. प्रारंभ में वेतन आम तौर पर ३-७ लाख रु. तक हो सकता है. तथापि इस क्षेत्र में वेतन की कोई सीमा नहीं है. कॅरिअर की उन्नति व्यवसायियों के कौशल और क्षमताओं पर निर्भर करती है. पैकेजिंग व्यवसायियों को एम.एन.सी. सहित अग्रणी पैकेजिंग उद्योगों में उत्पादन क्रय/विपणन तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में अच्छे वेतन वाले रोज़गार दिए जाते हैं. भारतीय पैकेजिंग उद्योग विश्व औसत की दो गुना से अधिक दर पर विकास कर रहा है, किंतु यह क्षेत्र उन व्यक्तियों के लिए भी आर्कषक रोजग़ार सृजित कर रहा है जो इस क्षेत्र में रोज़गार तलाशते हैं. भेषज और एफ.एम.सी.जी. कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान है, वर्तमान परिदृश्य में, बड़े और छोटे-दोनों स्तर की पैकेजिंग कंपनियों को ऐसे भारतीय पैकेजिंग   विशेषज्ञों की तलाश है जो उनके उत्पादों को मूल्य दिला सकें और प्रौद्योगिकी के उच्च स्तर को समाविष्ट कर सकें. रिटेल चेन में एफ.डी.आई. के कार्यान्वयन के बाद पैकेजिंग क्षेत्र में रोज़गार के शानदार अवसर होंगे.
पैकेजिंग व्यवसायियों के लिए चुनौतियां
घरेलू तथा व्यावसायिक बाजार के लिए पैकेजिंग एक महत्वपूर्ण आधार है. मेक इन इंडिया मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के अधिदेश के अनुसार पैकेजिंग उद्योग को प्रोत्साहन भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाने में योगदान करेगा. लागत संवेदी बाजार में, पैकेजिंग लागत में कमी लाने का अत्यधिक दबाव है. भारत में अधिक परिष्कृत पैकेजिंग की मांग बढ़ रही है, इससे पैकेजिंग सप्लायरों के लिए लागत पर और अधिक दबाव पड़ता है. ऐसेप्टिक पैकेजिंग, रिटोर्ट पैकेजिंग तथा वैक्यूम पैकेजिंग जैसे शेल्फ जीवन की वृद्धि के लिए सुविकसित प्रौद्योगिक के साथ एम.ए.पी., सी.ए.पी., इंटेलीजेट पैकेजिंग, नैनो पैकेजिंग तथा स्मार्ट पैकेजिंग प्रणालियों जैसी नॉवेल पद्धत्तियों के विकास से हाल ही के वर्षों में पैकेजिंग में अब व्यापक परिवर्तन आया है. अंतरित सामाजिक आर्थिक भू-दृश्य के साथ, अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत की दिशा में एक प्रयास के परिणामस्वरूप खाद्य प्रोसेसिंग क्षेत्र में विकास दो  गुना हो कर १३.७% हुआ है, और इसलिए पैकेजिंग सामग्रियों के उपयोग में वृद्धि हुई है. अत: धारणीय पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों के उपयोग के संबंध में बल देने के लिए उपभोक्ता जागरूकता तथा सरकारी नीतियों की आवश्यकता है. सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के धारणीय विकास लक्ष्यों के अंतर्गत पुन: उपभोग तथा पुन: शोधन को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं. अध्ययन दर्शाते हैं कि बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग सामग्रियों, बायोप्लास्टिक्स या खाद्य पैकेजिंग के उपयोग जैसी विभिन्न पैकेजिंग प्रौद्योगिकियां, कूड़े  को न्यूनतम सृजन करने की इसकी क्षमता के कारण व्यापक रूप में लोकप्रिय होने की संभावना है. पैकेजिंग विशेषज्ञ पैकेजों की डिजाइन बनाते हैं, जो उत्पादन क्षेत्र से लेकर उपभोक्ताओं तक जाने के विभिन्न चरणों में उत्पादों का परिरक्षण करती है. इससे उत्पादों की बिक्री में वृद्धि होगी. संबंधित उत्पादों की रासायनिक एवं भौतिकीय विशेषताओं के आधार पर, पैकेजिंग प्रौद्योगिकीविद् विचाराधीन पदार्थो के पैकेजिंग रैपर्स के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली सामग्रियों का निर्णय लेते हैं. वे कोई भी सिफारिश करने के समय पर्यावरणीय, विधिक संभार-तंत्र से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हैं तथापि, भारत को अभी भी इस दिशा में आगे बढऩा है क्योंकि पैकेजिंग की आधुनिक संकल्पना को कम आंका गया है. हाल ही के समय में कितनी भी प्रगति की गई हो, उसमें लगभग ५०त्न ऑफ फ्रेट शामिल है, जबकि ९५त्न मदें अभी भी अनपैक्ड भेजी जाती हैं. फिर भी, देश में जागरूकता का विकास हो रहा है कि पैकेजिंग उत्पाद की  गुणवत्ता को परिरक्षित रखती है, उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा करती है और उत्पाद की निर्यात संभावनाओं में वृद्धि करती है, जिससे देश में विदेशी मुद्रा अधिक मात्रा में अर्जित होती है. इस क्षेत्र में बने रहने के लिए रचनात्मकता एक अपेक्षित कौशल है. बॉक्स थिंकिंग में से सीखने की इच्छा वर्तमान विवणन के प्रति जागरूकता, संचार कौशल आदि होना भी आवश्यक है.
इस क्षेत्र में उच्च भर्तीकर्ता
पैकेजिंग के क्षेत्र में प्रसिद्ध उद्योग निम्नलिखित हैं :
आई.टी.सी.लि., नैसले, जीएस के, रेनबैक्सी, हिंदुस्तान यूनी लीवर लि., डाबर इंडिया लि., कैडबरी इंडिया लि., रैकिट बैंकीसेर, जॉनसन एंड जॉनसन लि., केस्ट्रोल इंडिया लि., कोका कोला इंडिया लि., यूफलेक्स, पहाड़पुर ३-पी, सन फार्मा प्रा.लि., एमिल फार्मास्युटिकल्स प्रा.लि., ऑटोमोबाइल कंपनियां, वस्त्र कंपनियां आदि.
भारत में पैकेजिंग संस्थान : भारत में कुछ ही ऐसी संस्थाएं हैं जो पैकेजिंग पाठ्यक्रम चलाती हैं जैसे आई.आई.पी., अन्ना विश्वविद्यालय, तमिलनाडु गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, एस.आई.ई.एस. स्कूल ऑफ पैकेजिंग, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र, तथा आई.आई.टी., रूडक़ी पैकेजिंग पाठ्यक्रम चलाते हैं तथा भारतीय पैकेजिंग संस्थान पैकेजिंग के इस क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान भारतीय पैकेजिंग संस्थान की राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में प्रत्याशित उन्नति होने के साथ देश में पैकेजिंग शिक्षा में एक क्रांति आएगी. इसके अतिरिक्त, डब्ल्यू.पी.ओ ने आई.आई.पी. को, विश्व में मिशिगन यूनिवर्सिटी यू.एस.ए. के  बाद दूसरे श्रेष्ठ पैकेजिंग संस्थान का रैंक दिया है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आई.आई.पी.) मुंबई में स्थित है और इसकी शाखाएं दिल्ली, हैदराबाद तथा कोलकात्ता में हैं. यह संस्थान निम्नलिखित कार्यक्रम चलाता है :-
तलिका १ : भारत में पैकेजिंग पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थान
 
क्र. सं

संस्थान का नाम
भारतीय पैकेजिंग संस्थान
चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम
*दो वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम
*अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम
 
 
क्र. सं

संस्थान का नाम
एस.आई.ई.एस. स्कूल ऑफ पैकेजिंग, नवी मुंबई (महाराष्ट्र)
चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम
*पैकेजिंग विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में २ वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम
*पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में एक वर्षीय स्नातक डिप्लोमा (अंशकालिक)
*पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में एक वर्षीय स्नातक डिप्लोमा (दूरस्थ अध्ययन)                
*उद्योग उन्मुखी अल्प-कालीन पाठ्यक्रम                                     
                                                 
 
 
 
                                                               
क्र. सं

संस्थान का नाम
भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान, रूडक़ी
चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम
*पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में २ वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम              
                                                               
क्र. सं

संस्थान का नाम
राजकीय पॉलिटेकनीक, नागपुर मुंबई (महाराष्ट्र)
चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम
* पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में २ वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम
 
क्र. सं

संस्थान का नाम
जे.एन. राजकीय पॉलिटेकनीक, रामंतापुर, हैदराबाद
चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम
*पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में ३ वर्षीय डिप्लोमा
 
पैकेजिंग में स्नाकोत्तर डिप्लोमा (दो वर्षीय पूर्णकालिक):
यह पाठ्यक्रम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और समवर्गीय क्षेत्रों के सभी स्नातकों के लिए खुला है. पाठ्यक्रम में प्रवेश सभी महानगरों में प्रत्येक वर्ष जून में ली जाने वाली एक अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है. प्रवेश पत्र अप्रैल में उपलब्ध होते हैं और पाठ्यक्रम अगस्त में प्रारंभ होता है. यह पाठ्यक्रम मुंबई और दिल्ली में चलाया जाता है. इस पाठ्यक्रम के चार सेमेस्टर हैं जिनमें तीन सेमेस्टर संस्थान के परिसर में चलाये जाते हैं और चौथे सैमेस्टर के लिए छात्र देश के विभिन्न उद्योगों में परियोजनाओं में कार्य करते हैं. यह पाठ्यक्रम पिछले २८ वर्षों से संचालित किया जा रहा है और इसके कई पूर्व छात्र प्रख्यात राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत हैं. लगभग सभी छात्रों को तैनाती में कैम्पस प्लेसमेंट सहायता दी जाती है.
पात्रता : स्नातक होने के साथ १०+३ पद्धति में गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान या कृषि, खाद्य विज्ञान, पॉलिमर विज्ञान, इंजीनियरी या प्रौद्योगिकी एक मुख्य विषय अथवा द्वितीय विषय के साथ न्यूनतम द्वितीय श्रेणी. अंतिम वर्ष के छात्र भी आवेदन करने के पात्र होते हैं. तथापि, उन्हें साक्षात्कार के समय अपनी डिग्री का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा अन्यथा वे यह अवसर गवां देंगे.
प्रवेश:- इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार में उम्मीदवार के निष्पादन पर आधारित होता है. लिखित परीक्षा में बहुविकल्प वाले प्रश्न होते हैं जो गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और इंजीनियरी विषयों से अधि स्नातक स्तर के होते हैं. यह परीक्षा मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नै और कोलकाता में संचालित की जाती है और साक्षात्कार मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता में लिया जाता है. अधिक विवरण के लिए भारतीय पैकेजिंग संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (iip-in.com) देख सकते हैं.
नवोद्यम विकास में पाठ्यक्रम : पैकेजिंग में प्रमाणपत्र कार्यक्रम (सामान्यत: तीन महिने का) विशेष रूप से पैकेजिंग उद्योग के लिए बनाया गया है. यह पाठ्यक्रम पैकेजिंग क्षेत्र में नवोद्यम कौशल का विकास करने के लिए  उपयुक्त है.
पात्रता : विज्ञान/इंजीनियरी/ प्रौद्योगिकी/ वाणिज्य/  कला में डिग्री और एक वर्ष का कार्य अनुभव. अथवा इंजीनियरी/ प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा और दो वर्ष का कार्य अनुभव.
१०+२ छात्रों के लिए पैकेजिंग पाठ्यक्रम : देश में कुछ पोलिटेक्निक कॉलेजों में पैकेजिंग का पाठ्यक्रम चलाया जाता है. इन पोलिटेक्निकों द्वारा चलाये जाने वाले पाठ्यक्रम में निम्नलिखित शामिल है: छह माह का औद्योगिक प्रशिक्षण. इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश पोलिटेक्निक सामान्य प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है ये परीक्षाएं संबंधित राज्यों द्वारा ली जाती हैं. डिप्लोमा के बाद छात्र किसी रोज़गार का विकल्प ले सकता है या इंजीनियरी डिग्री के लिए पंजीकरण कराकर अपना आगे का अध्ययन जारी रख सकता है. वे यांत्रिक इंजीनियरी, औद्योगिक उत्पादन इंजीनियरी, ऑटोमोबाइल, वैमानिकी तथा यांत्रिकीय, समुद्र शाखाओं में अध्ययन करने के पात्र होते हैं.
 
पैकेजिंग किसानों की आय को दोगुना करने का साधन :
कृषि के भविष्य को सुरक्षित रखने और देश की आधी जनसंख्या की आजीविका में सुधार लाने के लिए, किसानों की आय को दागुना करना एक आवश्यक चुनौती है. कृषि क्षेत्र स्तर पर प्राथमिक पैकेजिंग के कार्यान्वयन से फसलोत्तर क्षति को न्यूनतम करने और कृषि कूड़ा निपटान प्रणालियों के प्रंंबधन के संबंध में योगदान मिलेगा, जो किसानों की आय बढ़ाने की प्रक्रिया को गति देगा. बेहतर मूल्य प्रापण, कुशल फसलोत्तर प्रंबधन, व्यापक मूल्य शृंखला तथा समवर्गी कार्यों को अंगीकार कर के किसानों की आय मेंं लगभग एक-तिहाई वृद्धि आसानी से प्राप्त की जा सकती है. इसके लिए बाजार, भूमि पट्टे में व्यापक सुधार और निजी भूमि पर वृक्ष लगाने की अवश्यकता है. इस तरह, पैकेजिंग प्रौद्योगिकी भारत में कृषि की अर्थवयवस्था में सुधार लाने के एक मुख्य साधन के रूप में कार्य करती है.
सुदूर शिक्षा कार्यक्रम : प्रत्येक वर्ष जनवरी में प्रारंभ होने वाला यह १८ महीने का पाठ्यक्रम उन कार्यरत कार्यपालकों के लिए तैयार किया गया है जो विभिन्न विषयों में स्नातक/डिप्लोमा धारी हैं किन्तु उन्हें अपनी कार्यअपेक्षाओं के सौजन्य से पैकेजिंग ज्ञान की आवश्यकता होती है. सफल उम्मीदवारों को पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में स्नातक डिप्लोमा दिया जाता है जो एशियन पैकेजिंग फैडरेशन द्वारा मान्यताप्राप्त है. अधिक जानकारी के लिए आप www.iip-in.com पर लॉगऑन कर सकते हैं.
लेखक आईआईपी दिल्ली के संयुक्त निदेशक और क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं. ई-मेल :amtanweer@rediffmail.com