नौकरी फोकस


2-8 June, 2018

 
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने की रणनीति

सचिन गुप्ता, सं.लो.से.आ. सिविल सेवाएं परीक्षा-2017 में तीसरा रैंक

मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की पृष्ठभूमि से आता हूं, जहां मेरे पिता जी किसान और माता जी एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका रही हैं. मैंने स्कूलों में, जहां मैं पढ़ता था और जहां मेरी मां पढ़ाती हैं, उस अंतर को देखा है. य*पि उस वक्त मैं एक बच्चा था, लेकिन चीजें बदल गई हैं. जब मैं अचानक समाज के वंचित वर्गों के बच्चों को पढ़ाने के लिये गया, तो उसने सब कुछ बदल दिया. मैं अपने बचपन के अंतर से जोडक़र देखने लगा. इसने इंजीनियरी में कॅरिअर बनाने के विचार की प्रक्रिया को समाज में बदलाव लाने की आकांक्षा की तरफ परिवर्तित कर दिया. मैं हमेशा विश्वास करता हूं कि कोई न कोई सर्वोच्च शक्ति है  जो हर स्थिति में हमारी किसी न किसी प्रकार से सहायता करती है, हमें सिर्फ सही काम करने के लिये प्रयास करने की आवश्यकता होती है.
सं.लो.से.आ.-सीएसई के साथ वास्ता
मैंने कॉलेज के बाद से कार्पोरेट सेक्टर में काम करते हुए तैयारी शुरू कर दी थी. अंतत: मैंने 2015 में अपना पहला प्रयास किया परंतु मुख्य परीक्षा की कट ऑफ में 10 अंकों से रह गया. मैंने महसूस किया कि हो सकता है मैं उच्च अंक हासिल करने के लिये ऐच्छिक विषयों में अच्छा नहीं हूं. इसलिये मैंने अपना ऐच्छिक विषय बदल दिया। एक वर्ष में मेरा ऐच्छिक विषय में स्कोर 175 से 311 हो गया (य*पि मैंने अपना वैकल्पिक भी बदला था). इससे मैं 2016 में 575 रैंक के साथ दूसरे प्रयास में सिविल सेवाएं परीक्षा उत्तीर्ण करने में कामयाब रहा। परंतु मैंने पाया कि मुझे सामान्य अध्ययन और निबंधन में, विशेषकर उत्तर लेखन में गंभीरता से सुधार करने की आवश्यकता है. मुझे विश्वास है कि अनुशासित उत्तर लेखन और निरंतर सुधार के बाद इस यात्रा में निर्णायक मोड़ आया है और मेरी रैंक 575 से 3 पर आ गई.
मुख्य परीक्षा की रणनीति:
मेरा मानना है कि यह अधिकतम अंक अर्जित करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि व्यक्तित्व परीक्षण उस तरीके से हो भी सकता है और नहीं भी जिसे हम चाहते होते हैं। उस चरण में बहुत से बाह्य कारक प्रकटित हुए. परंतु मुझ पर विश्वास करें कि यदि आप वास्तव में विशेषकर मुख्य चरण में कठोर परिश्रम करते हैं, तो कोई भी अच्छे अंक हासिल कर सकता है. मैं यहां पर बताना चाहूंगा कि मैंने क्या किया और किस प्रकार मुख्य परीक्षा तक पहुंचा, जो कि मेरे अंतिम वर्ष में निर्णायक बनकर उभरा.
आगे बढऩे से पहले मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहूंगा कि किसी को भी अपनी स्वयं की कोई रणनीति बनानी चाहिये क्योंकि हम सभी किसी न किसी प्रकार से विशिष्ट होते हैं. अपनी खुद की ताकतों और कमजोरियों को जानने की कोशिश करें, तदनुसार अपनी स्वयं की अध्ययन की योजना बनाएं. मैं यहां पर बताना चाहूंगा कि मेरे लिये क्या काम आया और मैं मुख्य चरण में सफलता के लिये किसे महत्वपूर्ण मानता हूं.
ये वह चरण है जहां आपको उत्तर लेखन में संलग्नता और चौकस रहना कि पाठ्यक्रम में किसी विषय का अध्ययन कैसे करना है, इन दोनों बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो मैंने अपनी यात्रा के दौरान सीखा. इससे मुख्य परीक्षा के प्रति मेरे दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव आया.
सबसे पहले हम उत्तर लेखन की कला के बारे में बातें करेंगे
मैं मानता हूं कि सभी को मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखने के महत्व की जानकारी होती है. आखिऱी दिन किसी का भी मूल्यांकन इस बात को लेकर नहीं होता कि वह कितना अधिक जानता है बल्कि वह कितना अच्छा उत्तर लिखता है और उन 150-200 शब्दों में अपनी बात रख पाता है.
ये वह चरण है जहां कठोर परिश्रम और उत्तर लेखन में संलग्नता मायने रखती है. मैं जानता हूं कि कई बार हम हतोत्साहित हो जाते हैं, उत्तर लिखने या अधिक विषयवस्तु को पढऩे पर फ़ोकस करने की कोशिश जैसा कुछ महसूस न करें. यह मेरे साथ भी घटित हुआ था परंतु यहीं पर सहकर्मियों के समूह अथवा अध्ययन के वातावरण की भूमिका प्रकटित होती है. मैंने महसूस किया है कि हाल के दिनों में InsightsonIndia, ForumIAS, lasbaba  जैसी बहुत सी ऑनलाइन वोबसाइटें आ चुकी हैं जो कि रोज़ाना मुफ्त उत्तर लेखन अभ्यास कराती हैं. वाट्सएप्प और टेलीग्राम? I Think it should be INSTAGRAM Pls Check itजैसे एप्लीकेशन्स के साथ प्रौद्योगिकी का भरपूर लाभ उठायें, जहां कोई भी ग्रुप बना सकता है और हररोज़ उत्तर लिखें तथा एक दूसरे के उत्तर देख सकते हैं. तैयारी की रणनीति में सहकर्मियों का समूह एक महत्वपूर्ण कुंजी होती है. मैंने इसे कोचिंग संस्थानों की टैस्ट सीरिज और कक्षाओं की अपेक्षा अधिक मददगार पाया है. धीरे-धीरे 8-10 टैस्टों के बाद किसी को भी मालूम पड़ जाता है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, उत्तर किस प्रकार से लिखना है. परंतु इसके बाद वास्तविक संघर्ष उत्तर लेखन पद्धति को अपने दिल और दिमाग में बैठाना होता है और इसे उत्तर लेखन का स्वाभाविक मार्ग बनाएं. इसके लिये किसी को भी उत्तर लेखन का सघन अभ्यास करना चाहिये. इस प्रक्रिया में कुछेक बातें जो मैंने सीखी हैं निम्नानुसार हैं:-
*प्रश्न को पढऩे का महत्व:
ज़्यादातर समय क्या होता है कि हम किसी प्रश्न में 2-3 प्रमुख शब्दों के बारे में जो कुछ भी जानते होते हैं लिखना शुरू कर देते हैं, परंतु किसी प्रश्न को कम से कम दो या तीन बार पढऩे की कोशिश करें. यह समझने की कोशिश करें कि परीक्षक आखिऱ क्या जानना चाहता है और केवल उसी के अनुसार लिखें. मैंने भी अपने पहले दो प्रयासों में प्रश्नों के बारे में जो कुछ भी जानता था वही लिखा था और संभवत: सामान्य अध्ययन में कम अंकों का यह संभावित कारण था.
*परिचय: यह उत्तर लेखन का एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और मेरा मानना है कि यह परीक्षक पर पहला प्रभाव छोड़ता है. सही तरीके से लिखने का प्रयास करें. मैंने इसे लिखने के लिये मुख्यत: 4-5 तरीकों को अपनाया.
*परिभाषा: मुद्दे की परिभाषा अथवा महत्व की जानकारी रखनी चाहिये और आइए खा* सुरक्षा को ही लेते हैं, मैंने अपने उत्तर की शुरूआत खा* सुरक्षा की परिभाषा से करने कोशिश की और प्रश्न के तहत पूछे गये उप हिस्सों को इसके साथ जोड़ा. इससे न केवल आपके उत्तर में अच्छा प्रवाह होगा बल्कि आप उत्तर की संरचना भी सही प्रकार से कर पायेंगे.
*हाल के घटनाक्रम: आइए, बात करते हैं कि एक प्रश्न है जो कि एक साथ चुनाव कराने के बारे में पूछा गया है. कोई भी प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्रपति के भाषण से इसे शुरू कर सकता है और जहां कहीं उन्होंने इस विचार का समर्थन किया है उसका उल्लेख कर सकता है. इसके बाद प्रश्न में पूछे गये मुद्दे से इसे जोडऩे का प्रयास करें.
*तथ्य/आंकड़े: तीसरा तरीका किसी प्रश्न को किसी महत्वपूर्ण तथ्य अथवा आंकड़े से शुरू करने का है. यूं कहें कि प्रश्न भारत में बेरोजग़ारी के बारे में है तो कोई भी नीति आयोग की तीन वर्षीय योजना का संदर्भ दे सकता है और कुछ तथ्यों तथा आंकड़ों को भी उद्धृत कर सकता है.
*स्थान: यह सामान्यत: इतिहास और भूगोल के प्रश्न लिखते समय मददगार होता है. उदाहरण के लिये कोई प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के पतन पर पूछा जाता है, कोई भी अपना उत्तर सिंधु घाटी सभ्यता के स्थान और समय के साथ शुरू करके सीधे प्रश्न में पूछे गये उत्तर से इसे जोड़ सकता है.
*परस्पर जोडऩा: चौथा तरीका किसी प्रश्न में पूछे गये सभी उप भागों को परस्पर जोडऩा हो सकता है और अपने उत्तर का निचोड़ एक पंक्ति में लिखें तथा सीधे उप विषय की तरफ बढ़ें.
प्रश्न को उप भागों में बांट लें: सामान्यत: सं.लो.से.आ. एक ही प्रश्न में 2-3 प्रश्न पूछ लेता है. इसे तोडऩे का प्रयास करें और सही प्रकार से हल करें.
स्पष्टता: पूछे गये प्रश्न को उप भागों में बांटने के बाद लिखते समय इस पर प्रकाश डालने की कोशिश करें ताकि परीक्षक आसानी से समझ जायेंगे कि आपने प्रश्न के विभिन्न हिस्सों को कहां और कैसे हल किया है. इससे दो तरह से सहायता होगी, एक तो कोई भी सभी उप भागों का उत्तर दे पायेगा और उत्तरों में प्रवाह भी होगा.
प्वाइंट फार्मेट: अधिकतर उत्तरों को प्वाइंट फार्मेट में विशेष कर जीएस 1,2,3 में लिखने का प्रयास करें और कोई भी उप भाग का उत्तर देते हुए प्रत्येक प्रश्न के सामने उप शीर्षक दें ताकि जो कोई कुछ लिखना चाहता है वह आसान हो जाये. कोई तर्क/विवरण लिखने के बाद अपने कथन को सही ठहराने का प्रयास करें. आइए कहते हैं कि किसी ने हाल में संघीय ढांचे के सुदृढ़ीकरण के पक्ष में तर्क दिया, तो 14वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित किये जाने और अन्य बातों के साथ इसे जोड़ें.
स्मार्ट उत्तर: किसी प्रश्न का उत्तर देते समय थोड़ा यह सोचने का प्रयास करें कि यह प्रश्न कहां से पूछा गया होगा, इसके बाद इसका उत्तर दें. 2016 मुख्य परीक्षा में इसी तरह का प्रश्न सामान्य अध्ययन 1 और सामान्य अध्ययन 3 में पूछा गया था, परंतु यह जानने के बारे में विचार करें कि किस विषय के अधीन यह पूछा गया होगा. सामान्य अध्ययन 1 में यह शहरीकरण की समस्याओं, समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रभाव से अधिक संबद्ध होगा जबकि सामान्य अध्ययन 3 में यह आपदा प्रबंधन विषय या अवसंरचना से संबद्ध हो सकता है. तद्नुसार बिंदुओं को शामिल करने का प्रयास करें. मैंने गलती की है और मुझे नहीं मालूम कि क्या यह सही मार्ग है अथवा नहीं परंतु मुझे विश्वास है कि प्रश्नों को पाठ्यक्रम के बाहर से लिया जाता है और इसे हमें तदनुसार हल करना चाहिये.
प्रवाह चार्ट/डायग्राम/मानचित्र बनाने का महत्व: उत्तर लिखते समय थोड़ा दो या तीन प्रश्नों में एक प्रवाह चार्ट बनाने की कोशिश करें. यदि अपेक्षित हो तो कहीं न कहीं डायग्राम अथवा मानचित्र बनायें (विशेषकर भूगोल में और उद्योगों के स्थानिक कारकों में)
निष्कर्ष: निष्कर्ष लिखते समय यह स्पष्ट होना चाहिये कि आप क्या सम्प्रेषित करना चाहते हैं और 1-2 पंक्तियों में सभी उप भागों का उत्तर दें. कोई व्यक्ति उत्तर पूरा करने से एकदम पहले समाधान दे सकता है परंतु यह प्रश्न की प्रकृति पर निर्भर करता है. मुझे वास्तविक परीक्षा में समय की कमी की जानकारी है परंतु अंत में प्रश्न का निष्कर्ष लिखने का प्रयास करें. इससे दूसरों को एक छोर मिलता है.
यहां पर मैं आपको सचेत भी करना चाहूंगा. मैंने कई कापियों को देखा है जहां कई बार अभ्यर्थी इन बातों को हरेक प्रश्न में करने का प्रयास करते हैं. कृपया ऐसा न करें. यह उत्तर को बहुत मैकेनिकल बना देता है. मूलभूत बातों पर केंद्रित रहने का प्रयास करें जो कि सही प्रकार से प्रश्नों को हल कर रही हैं और परीक्षक को यह संकेत देने प्रयास हो कि आपको सब मालूम है और आपकी राय तथ्यों के आधार पर है.
किसी खास विषय का अध्ययन कैसे करें
*सं.लो.से.आ. पाठयक्रम: सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण अपने साथ हमेशा सं.लो.से.आ. का पाठ्यक्रम रखना है और यह अंतिम स्रोत होना चाहिये जिसके आसपास हमारी तैयारी घूमती रहे. जितना अधिक से अधिक हो सके इसे पढें, इससे आपको इसे समझने में सहायता मिलेगी और समाचार पत्र अथवा करंट अफेयर्स पत्रिकाएं पढ़ते हुए विषयों से जोड़ेगा.
*तैयारी की रणनीति
*परिभाषाएं: प्रत्येक पेपर के लिये अलग-अलग कॉपी बनाएं और सामान्य अध्ययन 2 के लिये महत्वपूर्ण विषयों का पता लगाएं, जैसे कि संविधान, शासन, गऱीबी, भूखमरी, जवाबदेही, नागरिक चार्टर आदि और इनकी सभी की अच्छी परिभाषा लिखें. इसे दिल से पढ़ें और प्रत्येक के निचोड़ को समझें. सामान्यत: प्रश्न इसके इर्द गिर्द घिरे होते हैं. उदाहरण के लिये गरीबी से संबंधित प्रश्नों को पिछले वर्षों में बारंबार पूछा जाता रहा है इसी तरह धर्मनिरपेक्षता पर भी होता है. स्पष्ट अवधारणा और परिभाषा बनाएं जिससे आपको उत्तर लिखते समय सहायता मिलेगी.
*मानसिक चित्रण/चाट्र्स: प्रत्येक विषय पर मानसिक चित्रण अथवा चाट्र्स बना लें और संक्षेप में विभिन्न विषयक्षेत्रों, महत्वपूर्ण तथ्यों, आंकड़ों की अध्ययन रिपोर्ट तैयार करें. इससे आपको अंतिम समय पर दोहराने में सहायता के साथ-साथ इसे हल करने के बाद आपका विश्वास बढ़ेगा.
*महत्वपूर्ण तथ्य और आंकड़े संग्रह करना: सचमुच में किसी खास विषय को पढऩा और उस पर किसी नोटबुक में नोट तैयार कर लेना अथवा मन में चित्रित कर लेना महत्वपूर्ण होता है ताकि आप परीक्षा के दौरान इसे दोहरा सकें और याद कर सकें.
*महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों के बारे में नोट्स: इससे आपको इतिहास के हिस्से को दोहराने में सहायता मिलेगी. सं.लो.से.आ. ने हाल में पिछले दिनों महत्वपूर्ण व्यक्तियों के संबंध में तुलनात्मक प्रश्न पूछने शुरू किये हैं.
*महत्वपूर्ण निर्णय: महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी एकत्र कर लें. इससे आपको सामान्य अध्ययन 2 के उत्तर लिखने में मदद मिलेगी जैसे कि निजता, अध्यादेश अधिकार का दुरूप्योग, केंद्र-राज्य संबंध, बुनियादी संरचना सिद्धांत, पर्यावरणीय निर्णय, चुनाव सुधार आदि.
यहां मैं पुन: कहना चाहूंगा कि अपने पर अत्यधिक बोझ न डालें. इस आलेख का उद्देश्य मेरी रणनीति के बारे में बताना मात्र नहीं था बल्कि उन बातों को अभिव्यक्त करना था जिन्हें मैं मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिये बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं. इसे पढऩे से पहले अपनी ताक़त और कमज़ोरी को महसूस करें. मैंने ये सब बातें कीं हैं क्योंकि इस हिस्से में मैंने अपनी कमज़ोरी महसूस की थी. और इस यात्रा ने मुझे अहसास कराया है कि सफल कहानियों की विधि अपने आपको जानने और किसी की कमजोरी पर काम करने और ताक़तों को महसूस करने में निहित होती है.
(लेखक सचिन गुप्ता ने सं.लो.से.आ. सिविल सेवाएं परीक्षा 2017 में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. उन्होंने 2016 में सिविल सेवाएं परीक्षा में 575 रैंक हासिल किया था और और इंडियन कार्पोरेट लॉ सर्विस (आईसीएलएस) प्राप्त की थी. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा डीएवी सेंटनरी पब्लिक स्कूल, सिरसा (हरियाणा) से और बीई मैकेनिकल में स्नातक थापर यूनिवर्सिटी, पटियाला से की. ई-मेल: guptasachin 1102@gmail.com)