नौकरी फोकस


Volume-11, 16-22 June, 2018

संभावनाओं से भरपूर व्यवसाय के लिए योग

श्रीप्रकाश शर्मा

घर से किसी काम के लिए निकलते वक्त हमें अक्सर अपने माता-पिता से ये हिदायत सुनने को मिलती है: ध्यान से चलना, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना, ध्यान से रहना, ध्यान से काम करना, खाना-पीनाऔर भी इसी तरह की न जाने कितनी नसीहतें. इस संदर्भ में मन में एक जिज्ञासा सहज रूप से उठती है. आखिर ध्यानशब्द का क्या मतलब है? असल में यही शब्द ध्यान लगानेसे संबंध रखता है और एक तरह से उसका पर्यायवाची है जिसका शाब्दिक अर्थ है: आध्यात्मिक गतिविधि के रूप में किसी चीज पर पूरा ध्यान देना या अपने मन को तनाव मुक्त करने की प्रक्रिया या कार्य प्रणाली. वास्तव में ध्यान होमो सेपियंस (यानी मानव प्रजाति) का सबसे अभिन्न, अंतरंग और स्वाभाविक हिस्सा है. इसे बाहर से जोर-जबरदस्ती से नहीं अपनाया जा सकता और साथ ही इसे मनुष्यों से अलग भी नहीं किया जा सकता. इसीलिए ध्यान, जो योग के अत्यंत अनिवार्य घटकों में से एक है जीवन जीने का एक तरीका है और पानी, हवा तथा मिट्टी की तरह जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है.     
एक प्राचीन आध्यात्मिक साधना के रूप में योग के इतिहास की शुरूआत पूर्व-वैदिक युग यानी 3000 ई.पू. से मानी जाती है. यह एक ऐसा विज्ञान है जिसका अभ्यास मन और आत्मा के बीच समन्वय स्थापित करने तथा दिव्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है. बीते वर्षों में जीवनशैली से उत्पन्न होने वाली बीमारियों और मनो-दैहिक विकारों की रोकथाम और उपचार के लिए योग एक सशक्त वैकल्पिक उपचार प्रणाली के रूप में उभर कर सामने आया है.
पौराणिक कथा के अनुसार योग के छह सबसे महत्वपूर्ण संप्रदायों में से एक योगसूत्रके प्रतिपादक पतंजलि को आधुनिक योग का जनक माना जाता है. उन्हें धर्मग्रंथों में योग के बुनियादी सिद्धांतों को लिपिबद्ध करने के महान कार्य का श्रेय भी दिया जाता है.  
ऋग्वेद में योग को चित्तवृत्ति-निरोधका विज्ञान यानी मन की उधेड़-बुन, चपलता और सनक को नियंत्रित करने वाला बताया गया है. इसका एक और मतलब अशांत मन को शांत करने वाला और मन को परमात्मा के साथ एकाकार करने का साधन भी माना जाता है. यह बात अब सिद्ध हो गयी है कि योग का नित्य अभ्यास उन तमाम तरह के शारीरिक और मानसिक विकारों तथा बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाला रामबाण इलाज है जिनके आगे मनुष्य अपने आप को असहाय और निरुपाय पाते हैं.   
अचूक इलाज के विज्ञान के रूप में योग की गिनती विश्व की नयी पीढ़ी को प्राचीन सभ्यता के एक आधुनिक उपहार के रूप में की जाती है. योग के महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का सुझाव दिया. इस प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया. पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दुनिया भर में 21 जून 2015 को मनाया गया. योग विज्ञान ज्ञान की एक युगांतरकारी शाखा है. यह समय निरपेक्ष दर्शन है. यह महान रहस्य है जिसका प्रभामंडल धर्म, पंथ, जाति, संप्रदाय और राष्ट्र जैसी तमाम सीमाओं से परे है.    
हिन्दू धर्म में योग का अभ्यास ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग, लय योग और हठ योग के रूप में किया जाता है. पतंजलि के योग सूत्रमें राजयोग को अष्टांग योग के रूप में बताया गया है जिसका अभ्यास समाधि प्राप्त करने अर्थात् मोक्ष प्राप्त करने या जीवन और मरण के चक्र से मुक्ति के लिए किया जाता है. यही जीवन का अंतिम लक्ष्य भी बताया गया है. लेकिन योग और इसके लाभ मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और परम ज्ञान की प्राप्ति तक सीमित नहीं हैं. पिछले कुछ दशकों में यह व्यवसाय यानी कॅरिअर के एक शानदार क्षेत्र के रूप में आश्चर्यजनक रूप से उभर कर सामने आया है, खास तौर पर आज दुनियाभर के तमाम देशों में बह रही वैश्वीकरण की बयार के संदर्भ में इसका महत्व बढ़ता जा रहा है. नौजवानों में सेल्फ ग्रुमिंग यानी अपने व्यक्तित्व का विकास करने और खुद को स्वस्थ रखने की चाह में जिस तरह की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है उसे देखते हुए आकर्षक व्यवसाय के रूप में योग का महत्व और भी बढ़ गया है.    
इतना ही नहीं, मानव समाज में आज बढ़ते मानसिक अवसाद, चिंता और आत्म हत्या की प्रवृत्ति जैसे मनो दैहिक विकारों के उपचार के लिए योग वैकल्पिक और अचूक चिकित्सा पद्धति के रूप में उभर कर सामने आया है. आज योग धर्मग्रंथों और प्रज्ञा के क्षेत्र के विशेषज्ञों के कार्यक्षेत्र के दायरे से बाहर निकल कर आम आदमी के डायनिंग रूम और जिमनेजियम तक पहुंच गया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा से व्यवसाय और रोज़गार के अवसर प्रदान करने वाले क्षेत्र के रूप में योग का महत्व कई गुना बढ़ गया है. इसमें रोज़गार के अवसर मुख्य रूप से योग प्रशिक्षक के रूप में हैं जो अपने शिष्यों को विभिन्न योगासनों के बारे में बताता है, बल्कि उन्हें सांस लेने की सही तकनीक (प्राणायाम), ध्यान और कई अन्य चीजों की भी जानकारी देता है. इसके अलावा वह मानसिक विकारों के उपशमन और शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के बारे में भी मदद देता है. योग विशेषज्ञ या प्रशिक्षण लोगों को आध्यात्मिक चेतना जगाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने की दिशा में भी प्रेरित कर सकता है.
योग को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए क्या करें?
व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में तालमेल बिठाने की प्राचीन कला के रूप में योग रोज़गार का अच्छा विकल्प उपलब्ध करा सकता है. लेकिन इसके लिए जीवन को जीने की इस कला का अभ्यास पूरे मनोयोग और निष्ठा से करना जरूरी है. योग को रोज़गार के विकल्प के रूप में चुनने के लिए निम्नलिखित बातें जरूरी हैं:
1. योग को सही तरह से करने की कला में महारत हासिल करें
योग को व्यवसाय के विकल्प के रूप में अपनाने से पहले किसी अच्छे व्यावसायिक योग विद्यालय या योग संस्थान से योग अभ्यास करने की कला में निपुणता हासिल करना जरूरी है. असल में योग का अभ्यास करने में महारत हासिल करना कोई बच्चों का खेल नहीं है. इस कार्य में कड़े परिश्रम, धैर्य, लगन और जुनून की आवश्यकता होती है. इस समय देश में उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवर योग संस्थान और विश्वविद्यालय हैं जिनमें प्रशिक्षण लेने वालों को योगाभ्यास के आधारभूत तरीकों की जानकारी दी जाती है. बिहार योग विद्यालय मुंगेर, मोरारजी देसाई अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, पतंजलि विश्वविद्यालय, गुरुकुल विश्वविद्यालय, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय और एसडीएम कालेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज की गिनती देश में योग को सीखने के अग्रणी संस्थानों  के रूप में की जाती है.
२. व्यावसायिक डिग्री हासिल करना ज़रूरी
योग के क्षेत्र में पेशेवर बनने के लिए प्रशिक्षण देने वाले कई दीर्घावधि और अल्पावधि पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. भारत सरकार ने पेशेवर योगकर्मियों के लिए स्वैच्छिक प्रमाणन की योजना शुरू की है. यह योजना सरकार के आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है और इसके अंतर्गत योग शिक्षकों को प्रमाणपत्र दिये जाते हैं. योग के क्षेत्र में पेशेवर के रूप में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूआईसी) ने प्रत्यायन की व्यवस्था भी की है जिसके तहत उनका सत्यापन किया जाता है. ऋषिकेश और केरल के शिवानंद आश्रम में योग-वेदांत अकादमी, ऋषिकेश ही में परमार्थ निकेतन, हरिद्वार में शांतिकुंज और बीकेएस अयंगार रामामणि अयंगार स्मारक योग संस्थान में योग अध्ययन में एक साल का डिप्लोमा और एक महीने का योग प्रशिक्षक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम उपलब्ध है. इसी तरह के कई पाठ्यक्रम अन्य संस्थानों में भी उपलब्ध हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि योग के क्षेत्र में नौकरी हासिल करने और इसमें आसानी से पेशेवर के रूप में पहचान बनाने के लिए मास्टर और पी.एचडी. स्तर की डिग्रियां हासिल की जा सकती हैं.
3. योग प्रशिक्षक के लिए संवाद में निपुण होने के साथ-साथ अदम्य साहस और कर्तव्य निष्ठा की भावना से पूर्ण होना जरूरी है.
4. जो लोग योग को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं उनमें दूसरों को प्रेरित करने का स्वाभाविक गुण होना भी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि तभी उसके शिष्य पूरी निष्ठा और लगन से निर्देशों का पालन करेंगे.
5. योग पूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य और संतुलित मानसिक स्थिति का नाम है. इसलिए इस क्षेत्र को व्यवसाय के रूप में चुनने वालों को दोनों ही चीजों में पूरी तरह फिट होना जरूरी है.
6. वही व्यवसाय चुनें जो आप बनना चाहते हैं
हालांकि योग के क्षेत्र में विकल्पों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सबसे अधिक मांग योग प्रशिक्षकों की है. कई संस्थान, कार्पोरेट संगठन और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां, हैल्थ स्पा, ब्यूटी सैलून, जिम और इसी तरह के संगठनों को योग प्रशिक्षकों की आवश्यकता रहती है. बड़े कारोबारी और कार्पोरेट घरानों, फिल्म उद्योग से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों, फैशन उद्योग में काम करने वालों, छात्रों, अध्यापकों, गृहणियों और आम लोगों को पेशेवर फायदे और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से योग प्रशिक्षकों की मदद की आवश्यकता होती है.
टेलीविजन चैनल और आकाशवाणी भी अपने दर्शकों तथा श्रोताओं को मानसिक और शारीरिक रूप से चुस्त-दुरस्त बनाए रखने के लिए योग पर विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसारण करते हैं जिससे ये भी रोज़गार और व्यवसाय का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहे हैं. तरह-तरह की बीमारियों के उपचार और रोकथाम के लिए योग चिकित्सकों की भी भारी मांग है. इस तरह के योग कर्मी स्वास्थ्य केन्द्रों, क्लबों, होटलों और टूरिस्ट रिसॉर्टों में ग्राहकों को खास तरह के योगासनों का प्रशिक्षण देते हैं.
कुल मिलाकर योग के क्षेत्र के पेशेवर विशेषज्ञ निम्नलिखित विकल्पों में से किसी क्षेत्र को चुन सकते हैं:
1.            शैक्षिक क्षेत्र
2.            प्रबंधन और प्रशासन
3.            अस्पताल और चिकित्सा प्रशासन
4.            योग चिकित्सक
5.            योग प्रशिक्षक
6.            योग परामर्शदाता के रूप में प्रशिक्षक, विशेषज्ञ आदि
7.            नैदानिक मनोवैज्ञानिक
न्यूनतम पात्रता और पाठ्यक्रम
योग के क्षेत्र के व्यावसायिक कर्मियों के पास इस विषय में विभिन्न प्रकार की डिग्रियों और डिप्लोमा की आवश्यकता होती है. इनके लिए देश भर में सरकारी और निजी क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा संचालित कई संस्थान, कॉलेज और विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं. ये संस्थाएं योग में डिप्लोमा, डिग्री और मास्टर डिग्री स्तर के पाठ्यक्रम संचालित करते हैं. डिग्री और डिप्लोमा स्तर के पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषयों के साथ 10 + 2 परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है. योग में मास्टर्स डिग्री, एम.फिल. और पी.एचडी. स्तर के पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं जिनमें प्रवेश के लिए उत्तर योग्यता की आवश्यकता होती है. योग के क्षेत्र को व्यवसाय के रूप में चुनने वालों के लिए कुछ प्रमुख पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं:
प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (योग में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम-सीसीवाई)
डेढ़ महीने के इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है. इसके लिए आयु संबंधी कोई प्रतिबंध नहीं है.
स्नातक पाठ्यक्रम (कला स्नातक-योग दर्शन)
तीन साल के इस डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए किसी भी वर्ग में 10 + 2 परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है.
योग शिक्षा में अधिस्नातक डिप्लोमा
एक साल के इस पाठ्यक्रम में 6 महीने की इंटरर्नशिप भी होती है. इसमें प्रवेश के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी वर्ग में स्नातक डिग्री के साथ योग में प्रमाणपत्र भी होना जरूरी है.
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
योग चिकित्सा में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
यह पाठ्यक्रम एक साल का है और इसमें प्रवेश के लिए उम्मीदवार को किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी वर्ग में स्नातक होना जरूरी है.
योग में मास्टर ऑफ  आटर्स
योग में एम.ए. पाठ्यक्रम की अवधि दो साल की है और इसमें प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होना आवश्यक है.
अन्य उच्च पाठ्यक्रम  
अधिस्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अलावा विद्यार्थी योग में उच्च पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश लेकर योग के क्षेत्र में और बेहतर रोज़गार हासिल कर सकते हैं.
योग शिक्षकों के लिए उच्चतर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
इस पाठ्यक्रम की अवधि केवल एक महीने या चार सप्ताह की है. इसमें प्रवेश के लिए उम्मीदवार के पास योग में प्रमाणपत्र, डिप्लोमा या स्नातक डिग्री होना आवश्यक है. इसके अलावा उसके पास योग शिक्षण का दो साल का अनुभव भी होना चाहिए.
योग शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
स्वामी विष्णुदेवानंद ऐसे पहले योग शिक्षक थे जिन्होंने यूरोपीय देशों में योग शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया. हठयोग (आसन, प्राणायाम और विश्राम) के अलावा उनके आश्रम में योग शिक्षकों को योग की चार मुख्य प्रणालियों  राज योग (मन का नियंत्रण), कर्म योग (अहंकार से मुक्ति), ज्ञान योग (योग दर्शन और आत्मज्ञान) और भक्ति योग (मनोभावों को भक्ति में बदलने) को जानने और अनुभव करने के दृष्टिकोण पर आधारित है. शिवानंद योग शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वालों को प्रमाणपत्र दिया जाता है और यह पाठ्यक्रम विश्वभर में पढ़ाया जाता है. शिवानंद योग प्रशिक्षण विद्यालय योग शिक्षकों के लिए 4 सप्ताह का उच्च शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, दो सप्ताह का उच्च अभ्यास पाठ्यक्रम और एक सप्ताह का अग्रिम प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी संचालित करता है.  
योग विज्ञान में पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थान, कॉलेज और विश्वविद्यालय
योग में विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण संस्थान इस प्रकार हैं: 
1.            गवर्नमेंट नैचुरोपैथिक मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद
2.            एसडीएम  कॉलेज ऑफ  नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, उजिरे (कर्नाटक)
3.            जेएसएस इंस्टीट्यूट ऑफ  नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, मैसूर रोड, उटकमंडल
4.            शिवराज नेचुरोपैथी एंड योग मेडिकल कॉलेज सेलम
5.            राजकीय नैचुरोपैथी और योग मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, अन्ना नगर, चेन्नै
6.            एसआरके मेडिकल कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, कुलशेखरम, जिला - कन्याकुमारी, तमिलनाडु
7.            महावीर कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, दुर्ग, छत्तीसगढ़
8.            अलवास कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, मूलदबिद्रि, कर्नाटक
9.            केएलईएस कॉलेज ऑफ  नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, शाहपुर, बेलगाम, कर्नाटक
10.          मोरारजी देसाई इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी एंड योग, नई दिल्ली
11.          गवर्नमेंट नेचर क्योरर एंड योग कॉलेज, पीकेटीआर हॉस्पीटल, मैसूर
12.          मोरारजी देसाई इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज, वडोदरा
13.          आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापट्टणम, आंध्र प्रदेश
14.          बिहार स्कूल ऑफ  योग मुंगेर बिहार
15.          राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति, आंध्र प्रदेश
16.          पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़
17.          मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली
18.          भावनगर विश्वविद्यालय, भावनगर, गुजरात
19.          गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, गुजरात
20.          गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जामनगर, गुजरात
21.          गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद, गुजरात
22.          हेमचंद्राचार्य उत्तरी गुजरात विश्वविद्यालय, पाटण, गुजरात
23.          कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा
24.          हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश
25.          कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़, कर्नाटक
26.          मंगलौर विश्वविद्यालय, मंगलौर, कर्नाटक
27.          मणिपाल विश्वविद्यालय, मणिपाल, कर्नाटक
28.          बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश
29.          डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश
30.          जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
31.          लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
32.          रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश
33.          महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, कटनी, मध्य प्रदेश
34.          कैवल्यधाम, पुणे, महाराष्ट्र
35.          संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती, महाराष्ट्र
36.          इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ योगिक साइंसेज एंड रिसर्च, भुवनेश्वर, ओडिशा
37.          उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर, ओडिशा
38.          पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला, पंजाब
39.          पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, पंजाब
40.          जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान
41.          मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान
42.          जयपुर विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
43.          अन्नामलै विश्वविद्यालय, चेन्नै, तमिलनाडु
44.          कृष्णमाचार्य योगमंदिरम, चेन्नै, तमिलनाडु
45.          लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
46.          डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश
47.          बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी, उत्तर प्रदेश
48.          देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
49.          गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
50.          हेमवती नंदन बहुगुणा  गढ़वाल विश्वविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
51.          पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार, उत्तराखंड
52.          जाधवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
आपसे आपके ग्राहक और संस्थान क्या अपेक्षा करते हैं
कोई संस्थान या ग्राहक आपसे योग कर्मी के रूप में ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पूरी करने की अपेक्षाएं करता है:
1.            अपने व्यवसाय और जिन लोगों से आपका वास्ता पड़ता है उसकी पूरी-पूरी जानकारी.
2.            योग के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे घटनाक्रम के बारे में आपसे पूरी जानकारी की अपेक्षा की जाती है.
3.            विभिन्न पाठ्यक्रमों को तैयार करने और सूझ-बूझ से बनाए गये सम्पूर्ण पाठ योजनाओं के जरिए उन पर अमल की आपसे अपेक्षा की जाती है.
4.            लोगों के फिटनेस के स्तर का विश्लेषण करने के तौर-तरीके निर्धारित करना और समय-समय पर लोगों के कार्यनिष्पादन का आकलन करना.
5.            प्रतिभागियों का विभिन्न प्रकार के आसन सही तरह से करने के बारे में मार्गदर्शन करना.
6.            सभी प्रतिभागियों की आवश्यकताओं को बड़ी गहराई से जानना और उसी के
अनुसार उनसे योग की विभिन्न गतिविधियों का अभ्यास कराना.
7.            लोगों को योग आसन सिखाते समय प्रतिभागियों की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करना.
योग के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर
वैश्वीकरण के तेजी से प्रसार और विकसित एवं विकासशील दोनों ही तरह के देशों के लोगों की जीवनशैली तथा खान-पान की आदतों में आमूल परिवर्तन से योग संभावनापूर्ण कॅरियर और रोज़गार के शानदार अवसरों वाले नवीनतम क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आ रहा है. रोज़गार के अवसरों के अनगिनत द्वार खुलने से ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के नयी पीढ़ी के शिक्षित नौजवान इसमें उपलब्ध अवसरों की ओर आकृष्ट हो रहे हैं. योग के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए निम्नलिखित संभावनाएं हैं:
शिक्षा:
शिक्षा सबसे अधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है. योग में डिग्री और डिप्लोमा हासिल करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में रोज़गार के विभिन्न अवसरों की तलाश कर सकते हैं. स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और केन्द्र तथा राज्य सरकारों की अनगिनत अन्य शिक्षा संस्थाएं ऐसे नौजवानों को रोज़गार के विभिन्न प्रकार के अवसर प्रदान करते हैं. इन संस्थाओं में योग प्रशिक्षक की नियुक्ति विद्यार्थियों तथा शैक्षिक संकाय के सदस्यों को चिंताओं और तनाव से निपटने के सही तौर-तरीके बताने के लिए की जाती है. ये तनाव और चिंताएं नौकरियों की बढ़ती मांग और भिक्षा में एक दूसरे से आगे बढऩे की अंधी दौड़ की वजह से पैदा होते हैं. योग प्रशिक्षक विद्यार्थियों को कक्षाओं में उनके निर्धारित योग पाठ्यक्रम के बारे में भी बताते हैं. राज्य सरकारों ने सभी स्कूलों में योग शिक्षा को अनिवार्य बना दिया है और इसके लिए हर साल हजारों योग शिक्षकों की नियुक्तियां की जाती हैं. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी योग विषय पढ़ाने के लिए शैक्षिक संकाय सदस्य होते हैं जो प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त किये जाते हैं. योग के पेशेवर विशेषज्ञों को सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्र की शिक्षा संस्थाओं में निदेशक, उप-निदेशक, परामर्शदाता आदि के रूप में भी नियुक्त किया जाता है. उनका वेतन और विभिन्न भत्ते कई बातों पर निर्भर रहते हैं जैसे पदक्रम, शिक्षा का स्तर, अनुभव, व्यावसायिक योग्यताएं जैसे डिग्री या डिप्लोमा आदि. मगर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि योग से संबंधित नौकरियों के बाजार में वेतन संबंधी कोई पाबंदियां नहीं हैं.
स्वास्थ्य क्षेत्र
आज के सूचना टेक्नोलॉजी के युग में लोगों की जीवन-शैली में ऐसे नाटकीय मोड़ और बदलाव आये हैं कि उनके जीने के तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं. मनो-दैहिक विकारों और मानसिक अशांति के साथ-साथ चिंताएं और तनाव ने योग को सबसे कारगर वैकल्पिक उपचार पद्धति बना दिया है. इनसे निपटने में योग का नुस्खा बड़ा अचूक साबित हुआ है. इसी कारण आज अस्पतालों, स्वास्थ्य क्लबों और स्पा सैलून आदि में नौकरियों की बाढ़-सी आ गयी है. अस्पताल और ब्यूटी व स्पा सैलून तो नियमित आधार पर योग विशेषज्ञों की सेवाएं लेते हैं. ये विशेषज्ञ ग्राहकों को विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उपाय बताते हैं. ये योग विशेषज्ञ विभिन्न रोगों और व्याधियों से पीडि़त लोगों का योग के जरिए उपचार भी करते हैं.
होटल और पिकनिक स्थल
आज के जमाने के होटल और रिसॉर्ट तनाव कम करने और मनोरंजन करने के स्थान मात्र नहीं हैं. ये सभी स्थान अब मानसिक तौर पर तरोताजा होने और आध्यात्मिक उन्नति के केन्द्र भी बन गये हैं. लोग होटलों और अन्य सुंदर पिकनिक स्थलों में पूरे परिवार के समेत मौज-मस्ती के साथ-साथ योगाभ्यास के विभिन्न सत्रों में भाग लेने के लिए भी आने लगे हैं. यही वजह है कि आज होटल और पिकनिक रिसॉर्ट मेहमानों को योगाभ्यास सिखाने के लिए योग के पेशेवर विशेषज्ञों को नियमित आधार पर काम पर रखने लगे हैं.
जिमनेजियम और लाफिंग क्लब
आज के जमाने के जिमनेजियम में योग सबसे नयी चीज है. लोगों को योग का अभ्यास कराने और योग के बारे में जानकारी देने के लिए योग प्रशिक्षक नियुक्त किये जाते हैं जो लोगों को शारीरिक रूप से चुस्त और मानसिक तौर पर दुरुस्त रखने के बारे में बताते हैं. इन दिनों लाफ्टर क्लब भी बड़े लोकप्रिय हो चले हैं जहां लोगों को बताया जाता है कि योगाभ्यास के माध्यम से किस तरह चिंताओं और तनाव से मुक्त जीवन जिया जाए. यह कार्य योग शिक्षक ही करते हैं. इनमें भी योग के पेशेवर विशेषज्ञों को नौकरियां मिल सकती है और वे मोटी कमाई कर सकते हैं.
दृश्य और मुद्रित मीडिया
लगभग सभी टेलीविजन चैनल स्वास्थ्य संबधी मुद्दों को लेकर कोई न कोई कार्यक्रम चलाते हैं जिनमें दर्शकों को अपने आप को विभिन्न प्रकार की शारीरिक बीमारियों से मुक्त रखने और कई तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याओं की रोकथाम के नुस्खे बताये जाते हैं. ये टेलीविजन चैनल इसके लिए योग विशेषज्ञों को नियमित आधार पर रखते हैं और उन्हें अच्छाखासा वेतन भी देते हैं. अब तो विभिन्न भाषाओं के अखबार और पत्र-पत्रिकाएं भी किसी जाने-माने और प्रतिष्ठित योग विशेषज्ञ को अपने लिए कॉलम लिखने को भी आमंत्रित करने लगे हैं. इसके लिए भी योग विशेषज्ञों को मोटी रकम दी जाती है और यह उनके लिए रोज़गार का शानदार अवसर उपलब्ध कराता है.
उच्च वर्गों के पेशेवर लोगों के लिए अनिवार्यता
आज के युग में ऊंचे पदों पर काम करने वाले पेशेवर विशेषज्ञों को निर्धारित समय में बड़े लक्ष्य पूरे करने होते हैं. काम का भारी बोझ उन्हें तनाव और अवसाद ग्रस्त बना देता है. निजी और सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्रों में काम करने वाले इस तरह के पेशेवर लोगों के नियोक्ता योग के माध्यम से इसका समाधान खोजते हैं और उनके लिए योग के विशेष सत्र आयोजित करवाते हैं. इसमें योग विशेषज्ञों और पेशेवर योगकर्मियों की मदद ली जाती है. विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त ये पेशवर योगकर्मी तनाव दूर करने और इससे निपटने के लिए कई तरह के आसनों, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराते हैं ताकि तनाव बाहर निकले और उससे निपटा जा सके. इन पेशेवर योगकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होता है जिससे तनाव प्रबंधन और मानव संसाधन विकास में मदद मिलती है और लोगों को जीवन की विषम स्थितियों से उबरने में बड़ी मदद मिलती है.
जेल प्रशासन
अब वो दिन लद गये जब जेलों को बंदियों और अपराधियों को अमानवीय सजाएं देने का स्थान माना जाता था. आज दंडात्मक कार्रवाई की बजाय सुधार वाले दृष्टिकोण पर जोर दिया जाने लगा है. जघन्य और कुख्यात अपराधियों को अब योग विशेषज्ञ जेल के भीतर ही योगाभ्यास करना सिखाते हैं. इसके लिए जेलों में इंतजाम किये जाने लगे हैं. देश की बड़ी और कड़ी सुरक्षा वाली जेलें अब अपराधियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सुधारात्मक उपाय के तौर पर योग और संगीत चिकित्सा का सहारा ले रही हैं जिसके लिए योग के पेशेवर विशेषज्ञ नियुक्त किये जाते हैं. पेशेवर योगकर्मी अब जेलों में भी नौकरी की तलाश कर सकते हैं और इस तरह एक बड़े ही अच्छे व्यवसाय के रास्ते में सुचारू रूप से अग्रसर हो सकते हैं. 
खेल प्रशासन
खेल-कूद और प्रतियोगिताएं मानवीय भावनाओं को उभारने वाले उच्च तनाव और उन्माद वाले क्षेत्रों के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं जिनमें गुस्सा, चिंता, हताशा और अवसाद जैसी मानवीय भावनाओं का खुल कर प्रदर्शन होता है. मनुष्यों की इन मनोवैज्ञानिक समस्याओं और खेल के मैदान में तथा उससे बाहर लक्ष्य से पीछे रह जाने से उत्पन्न अन्य समस्याओं के समाधान के लिए योग एक बड़े समाधान के रूप में उभर कर सामने आ रहा है. योग से खिलाडिय़ों में हौसला और विश्वास बनाए रखने के साथ साथ विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने में बड़ी मदद मिलती है. सरकार के खेल-कूद से संबंधित विभिन्न संगठन और विभिन्न राज्य सरकारें अपने खिलाडिय़ों को चिंता, क्रोध, बदलती मानसिकता और अन्य मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए योग विशेषज्ञों की मदद लेते हैं.
सार्वजनिक क्षेत्र में योग
इसके अलावा केन्द्र और राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा अपने विभिन्न संगठनों और विभागों में योग कर्मियों के लिए रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं. ये विभाग मुख्यत: स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में या अन्य विभिन्न अनुसंधान संस्थानों से संबंधित होते हैं. इनमें योग में डिप्लोमा, डिग्री और अन्य उच्चतर प्रशिक्षण प्राप्त योग व्यवसायियों के लिए रोज़गार के कई अवसर उपलब्ध रहते हैं. इसके अलावा योग विशेषज्ञ विभिन्न स्तरों की शैक्षिक संस्थाओं में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, अध्यापक और प्रशिक्षक जैसे कई पद भी प्राप्त कर सकते हैं.    
स्व-रोज़गार
योग के क्षेत्र में स्व-रोज़गार का मतलब है घर पर या शहर अथवा कस्बे के किसी सुविधाजनक स्थान पर अपना योग स्कूल खोलना. इस समय इस तरह के कई स्कूल हैं जिनका संचालन योग विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है. योग विशेषज्ञ द्वारा अपना स्पा सैलून, हैल्थ क्लब या जिम खोलना बड़ा फायदेमंद व्यवसाय बनता जा रहा है.
योगकर्मी के लिए आमदनी और वेतन की संभावना
असल में योग के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न कर्मियों का वेतन उस संगठन के ब्रांड और उसकी पहचान पर निर्भर करता है. बहरहाल, शुरूआत में योगकर्मी 10 हजार रुपये से 30 हजार रुपये मासिक तक के वेतन की उम्मीद कर सकते हैं. सामूहिक कक्षाएं आयोजित करके भी लगभग इतनी ही आमदनी कमाई जा सकती है. लेकिन योग के पेशेवर कर्मियों की आमदनी काफी हद तक उनकी निजी पहचान, छवि तथा मान्यता और शैक्षणिक योग्यताओं पर भी निर्भर है. उच्च डिग्रियां  या डिप्लोमा मोटी रकम वाले वेतन का रास्ता साफ कर सकते हैं. ब्यूटी सैलून, हैल्थ सेंटर, कार्पोरेट घराने, पांच सितारा होटल और इसी तरह के प्रतिष्ठित संगठन योग कर्मियों को खुले हाथ से वेतन देते हैं. इस तरह की संस्थाएं योगकर्मियों को 10 लाख रुपये वार्षिक से भी अधिक के सालाना पैकेज दे देती हैं    
योग में रोज़गार की क्या संभावनाएं हैं?
योग शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की विभिन्न बीमारियों के लिए सबसे कारगर वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में बड़ी तेजी से उभरकर सामने आ रहा है. लाइलाज बीमारियों के उपचार के लिए योग की शक्ति पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी बढ़ती लोकप्रियता और भरोसे की वजह से आज योग जीवन में अनिवार्य और धर्म की तरह पवित्र माना जाने लगा है. ऐसी उम्मीद है कि दुनिया भर के देशों और हर आयुवर्ग के लोगों में योग के प्रति लोगों की ललक चरम पर पहुंचने वाली है. 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किये जाने से तो इसकी लोकप्रियता खास तौर पर बढ़ी है. योग चिकित्सा में लोगों के तेजी से बढ़ते भरोसे और इसे मनुष्यों की तमाम समस्याओं का रामबाण नुस्खा मान लिए जाने से आने वाले समय में योग के क्षेत्र में नौकरियों और व्यावसायिक अवसरों में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोतरी होने की संभावना है.  
लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय, मामिट, दिनथार वेंग, पोस्ट: मामिट, जिला: मामिट में प्रधानाचार्य हैं.
ई-मेल:spsharma.rishu@gmail.com
इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.