नौकरी फोकस


Volume-12, 23-29 June, 2018

 
विज्ञापन-क्षेत्र में रोजग़ार के अवसर

चार्वी शर्मा

कुछेक नये रोजग़ार क्षेत्र, जहां रोज़ाना एक नई ताजग़ी अनुभव की जा सकती है, में से एक विज्ञापन उद्योग है. कार्य के लंबे घण्टे, कड़ी प्रतिस्पर्धा में उच्च विषयगत अभियान को लेकर अंतिम क्षणों में सुधार करते रहने से जुड़ा विज्ञापन व्यवसाय उन लोगों के लिये बना है जो लगातार उत्कृष्टता हासिल करना चाहते हैं. विज्ञापन के क्षेत्र में कॅरिअर में कार्य के घण्टों में लचीलापन और रोज़मर्रा एक निर्धारित समय-सीमा को हासिल करना होता है. इसमें कोई भी दो दिन एक जैसे नहीं होते हैं क्योंकि यह एक ऐसा उद्योग है जो कि क्रमागत विकास और नियमित बदलाव की धुरी पर कायम है. चूंकि उपभोक्ता व्यवहार में परिवर्तन होता रहता है, ऐसा ही उद्योग की सूरत के साथ होगा जिसके लिये किसी को भी इस खेल में सर्वोच्च स्थान पर बने रहने के लिये नये-नये कौशल सीखने की ज़रूरत होती है.
विज्ञापन उद्योग एक ऐसा उद्योग है जहां पर किसी भी द्वारा प्रदान की गई आउटपुट चीज़ों को तुरंत बना और बिगाड़ सकती हैं. उच्च प्रभावशाली विज्ञापन फर्में काफी अधिक धन की वसूली और बदलते समय तथा विश्वास और कौशल निर्माण के साथ अपनी फीस में बढ़ोतरी कर सकती हैं. यह एक मॉडल या जनता का जाना पहचाना चेहरा बनने और मांग के आधार पर फीस को बढ़ाने की तरह होता है. यह विज्ञापन उद्योग का सबसे बड़ा आकर्षण होता है. यदि आप सृजनात्मक होना चाहते हैं और इसमें अच्छे हैं अथवा अपने को अच्छा बनाना चाहते हैं, और अपेक्षित समय और स्थान पर आउटपुट प्रदान करने के लिये पर्याप्त उत्साह रखते हैं, आप किसी भी फर्म के लिये बहुत मायने रखते हैं और कोई भी फर्म इधर-उधर भटकने की बजाए आपके प्रति अच्छी दृष्टि रखेगी. कुछ अच्छे सम्प्रेषण कौशल सदैव उद्योग क्षेत्र के आसपास आपके नेटवर्क संपर्कों को व्यापक और गहन बनाते हैं.
बदलती गतिशीलता के इस युग में, यदि आप विज्ञापन के क्षेत्र में कॅरिअर को अपनाना चाहते हैं, तो इस उद्योग की प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है जिसमें जबरदस्त बदलाव आये हैं. पूर्व में, विज्ञापन एजेंसियां एक ही छत के नीचे विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराती थीं. इस प्रवृत्ति में ऐसे परिदृश्य के बीच व्यापक परिवर्तन देखने में आया है जहां इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कारक मीडिया, विशेषकर केबल और डिजिटल चैनलों का प्रसार तीव्रता और व्यापकता के साथ हुआ है. विज्ञापन एजेंसियों पर विपणन अभियान के लिये प्रमुख अवधारणा तैयार करने की प्रमुख जिम्मेदारी होती है और इसके बाद इसे विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए विज्ञापनों की एक शृंखला का प्रयोग करते हुए विस्तारित करना होता है. अत: किसी फर्म की विपणन टीम और विज्ञापन एजेंसियों के बीच का संबंध अनिवार्य तौर पर किसी उत्पाद के भविष्य को तय करता है और जहां इसमें विज्ञापन तथा व्यवसाय सृजन के व्यापक अवसर मौजूद होते हैं.
इस प्रयास में सबसे सामान्य माध्यम जो प्रयोग में लाये जाते वे हैं टेलीविजन विज्ञापन, रेडियो और प्रिंट मीडिया. हालांकि डिजिटल मीडिया प्लेटफार्मों के संबंध में हाल के विस्फोट ने परंपरागत विज्ञापन एजेंसियों की प्रकृति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. स्मार्टफोनों की बढ़ती उपलब्धता के फलस्वरूप सोशल मीडिया डिजिटल विज्ञापन नेटवर्क के विकास का प्रमुख संचालक सिद्ध हुआ है. कम लागत की मदद से उच्च गति नेटवर्कों की उपलब्धता ने डिजिटल मीडिया की दक्षता पर व्यापक असर डाला है. उपभोक्ताओं तक संगत विज्ञापन ले जाने के लिये कृत्रिम इंटेलीजेंस की शुरूआत जितना अधिक चाहें उतना अधिक स्थानों के लिये की जा सकती है, चाहे मोबाइल फोन एप्प, सोशल मीडिया प्लेटफार्म, कस्टमर सॉफ्टवेयर, डेस्कटॉप, एप्लीकेशन्स, वेबपेज और अन्य माध्यम हों, विज्ञापन जगत को बदल कर रख दिया है और विज्ञापन होस्टिंग एजेंसियों (जैसे कि गूगल विज्ञापन) के साथ-साथ विज्ञापन सृजकों के लिये राजस्व जुटाने का काम किया है. डिजिटल मीडिया अभी तक एकमात्र माध्यम तो नहीं बना है बल्कि यह कुछ ऐसा बन चुका है कि समूचा व्यवसाय इस पर भरोसा करने लगा है. यह प्रत्येक व्यवसाय और उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित करता है.
विज्ञापन एजेंसियों को फर्म जिस धनराशि का भुगतान करती हैं उससे भी अनेक अपेक्षाएं होती हैं. उदाहरण के लिये विज्ञापनों के फलस्वरूप बिक्री में वृद्धि होनी चाहिये अथवा कम से कम फर्म की साइट (वेब अथवा भौतिक, बिक्रक और मोर्टार साइट्स) पर ट्रैफिक तो बढऩा ही चाहिये. इसके लिये कुछेक मान्यताप्राप्त कौशल हैं जिन्हें एक पाठ्यक्रम के जरिए सिखाया जा सकता है और ऐसे बहुत से कॉलेज तथा विश्वविद्यालय हैं जो पूर्णरूपेण पाठ्यक्रम के तौर पर इसकी पढ़ाई कराते हैं, जो कि छात्रों को इस क्षेत्र में शिक्षण और अनुप्रयोग की अपनी यात्रा शुरू करने में सहायक होते हैं.
विज्ञापन के क्षेत्र में कॅरिअर शुरू करने के लिये अपनी रुचि के अनुसार 12वीं कक्षा तक किसी भी विषय क्षेत्र का अध्ययन किया जा सकता है. किसी मान्यताप्राप्त संस्थान से बैचलर डिग्री अपेक्षित होती है, जहां ज़्यादातर छात्र पत्रकारिता का पाठ्यक्रम चुन लेते हैं. अपनी स्नातकपूर्व डिग्री पूरी करने के बाद छात्र विज्ञापन के क्षेत्र में स्नातकोत्तर अथवा डिप्लोमा कर सकते हैं.
विज्ञापन में ज़्यादातर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पात्रता स्नातकपूर्व डिग्री में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होते हैं. प्रवेश परीक्षा और तदुपरांत साक्षात्कार सत्र के आधार पर पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रदान किया जाता हैै. यहां भारत के उन सर्वोच्च कॉलेजों की सूची दी गई है जो विज्ञापन में पाठ्यक्रम संचालित करते हैं:-
*भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली
*मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिकेशन्स (एमआईसीए), गुजरात
*जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ  कम्यूनिकेशन, मुंबई
*सिम्बायसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, पुणे
*मासको मीडिया, नई दिल्ली
*नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  एडवरटाइजिंग, नई दिल्ली
*इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन फिल्म एंड टेलीविजन स्टडीज, कोलकाता
*इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, उत्तर प्रदेश
इस उद्योग में कॅरिअर बनाने के लिये शुरूआत के तौर पर एक पेशेवर के लिये कुछेक पूर्वापेक्षित कौशलों की आवश्यकता होती है. इनमें अन्य बातों के अलावा मज़बूत सम्प्रेषण, अंतर-वैयक्तिक और पारस्परिक कौशल, सार्वजनिक तौर पर बोलना और उपभोक्ता संबंध से लेकर इवेंट मैनेज़मेंट, विषयवस्तु सृजन, सर्च इंजिन ऑप्टिमाइजेशन होना अपेक्षित है. यह सूची संपूर्ण नहीं है बल्कि इस तीव्रता से अग्रसर हो रहे उद्योग की प्रकृति और कार्य माहौल को समझने के लिये महत्वपूर्ण है. किसी विज्ञापन एजेंसी के विनिर्दिष्ट विभाग में जाने के लिये आप निम्नलिखित में से कोई एक पाठ्यक्रम चुन सकते हैं:-
*मीडिया-पत्रकारिता या जन संचार
*स्टूडियो-ललित कला में डिग्री
*फिल्म-श्रव्य-दृश्य में विशेषज्ञता
*ग्राहक सेवाएं - विपणन में एमबीए अथवा स्नातकोत्तर डिप्लोमा
इस क्षेत्र में कड़ी प्रतियोगिता को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञता के साथ-साथ इंटर्नशिप का अनुभव इस उद्योग में प्रवेश के लिये एक महत्वपूर्ण कुंजी साबित हो सकती है. विज्ञापन के साम्राज्य में घुसने के लिये भाषा की निपुणता और उत्कृष्ट सम्प्रेषण कौशल प्रमुख घटक हैं. महत्वपूर्ण रोजग़ार अवसर जो कि इस क्षेत्र में उपलब्ध होते हैं, मुख्यत: दो प्रमुख क्षेत्रों में श्रेणीबद्ध किये जा सकते हैं:-
*अधिशासी रोजग़ार पद
इनमें ग्राहक सेवाएं, बाज़ार अनुसंधान, मीडिया अनुसंधान आदि शामिल होते हैं. ग्राहकों की जरूरत को समझना, व्यवसाय में नये अवसरों की तलाश करना और मौजूदा ग्राहकों को बनाये रखना अधिशासी विभाग की जिम्मेदारी होती है. यह विभाग उपयुक्त मीडिया का चयन, समय का विश्लेषण, विज्ञापनों की प्लेसमेंट और समझौते के वित्तीय पहलुओं पर वार्तालाप करता है.
*सृजनात्मक रोजग़ार अवसर:-
विभिन्न मीडिया स्वरूपों में सही विज्ञापन तैयार करने और डिलीवर करने की जिम्मेदारी सृजनात्मक कार्य में लगी टीम की होती है. क्रिएटिव टीम में कॉपीराइटर्स, स्क्रिप्टराइटर्स, विजुएलाइजर्स, क्रिएटिव निर्देशक, फोटोग्राफर्स शामिल होते हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीमी रफ्तार और भारत में बेरोजग़ारी में वृद्धि को देखते हुए छात्रों के लिये यह निर्णय करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे ऐसा कौन सा रोजग़ार चुनें जो कि रोजग़ार के अवसरों की दृष्टि से फायदेमंद हो सकता है. इस संभावना की दृष्टि से, विज्ञापन उद्योग की प्रकृति कुछ ऐसी है कि इसमें निरंतर प्रतिभा की मांग होती है. विभिन्न रोजग़ार अवसरों में ऐसे पद शामिल होते हैं जिनके लिये सृजनात्मक कला, डिज़ाइन, एनिमेशन, मल्टी-मीडिया, विपणन, फोटोग्राफी, कंटेंट, मीडिया प्लानिंग आदि के क्षेत्र में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है. यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि इस उद्योग को शैक्षिक ज्ञान और डिग्रियों से अधिक सृजनात्मक योग्यताओं और नवाचार से परिपूर्ण प्रतिभा की जबर्दस्त तलाश होती है.
कॅरिअर के तौर पर विज्ञापन को अपनाने का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसमें डिजिटल मीडिया, डिज़ाइन और प्रिंट से लेकर सोशल मीडिया मार्केटिंग तक अनेक अवसर मौजूद हैं. विज्ञापन कंपनियां सफल अभियानों के संचालन के लिये बहुविषयक प्रतिभाओं और विचारों का प्रयोग करती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्षेत्र में व्यापक विकास को देखते हुए भारतीय विज्ञापन उद्योग एक लघु उद्योग व्यवसाय से लेकर पूर्णरूपेण पनपता हुआ उद्योग है जो कि अब एक तृतीयक क्षेत्र रोजग़ार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. यह अनुमान है कि 2018 तक भारत में विज्ञापन पर होने वाले ख़र्च का हिस्सा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कऱीब 0.45 प्रतिशत हो जायेगा. विश्व की सबसे बड़ी मीडिया एजेंसी नेटवर्क, ग्रुप एम ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में घरेलू बाज़ारों में 13 प्रतिशत विज्ञापन वृद्धि का अनुमान लगाया है. विज्ञापन ख़र्च में लगतार वृद्धि को देखते हुए, भारतीय विज्ञापन बाज़ार के 2022 तक 1 खरब रु. के आंकड़े को छू लेने की आशा है. देंतसु एजिज नेटवर्क के अध्यक्ष, कार्तिकेय के अनुसार ‘‘भारत में कम लागत पर उच्च गति के नेटवर्क की उपलब्धता ने डिजिटल मीडिया के दक्षता मैट्रिक्स पर व्यापक प्रभाव डाला है. यह आगे जारी रहेगा और इस तरह डिजिटल एडवरटाइजिंग के तीव्र विकास में सहायता करेगा’’.
वैश्विक वित्तीय गिरावट के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और इसके साथ ही विज्ञापन उद्योग भी निरंतर विस्तार के पथ पर अग्रसर हो रहा है. देश में ई-कॉमर्स की लोकप्रियता बढऩे के साथ विज्ञापन और विपणन उद्योग की गति भी तीव्र होने की आशा है. कार्पोरेट जगत में तीव्र विकास और वृद्धि के फलस्वरूप इस उद्योग ने काफी प्रगति की है. हाल ही में भारत सरकार और कनाडा ने एक दृश्य-श्रव्य सह उत्पादन समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं जिसके तहत दोनों देशों के प्रोड्यूसर अपने तकनीकी, सृजनात्मक, आर्थिक संसाधनों का दोहन कर सकेंगे और दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक और कलात्मक विकास का आदान-प्रदान कर सकेंगे. विज्ञापन उद्योग तेज़ तर्रार जि़ंदगी में अनेक दूसरे अनुलाभों के बीच आकर्षक सामाजिक कार्यक्रमों से जोड़ता है. विज्ञापन एजेंसियों को सदैव सृजनात्मक प्रतिभा, प्रभावी सम्प्रेषण कौशलों वाले व्यक्तियों की लगातार तलाश रहती है. ग्राहक मीडिया नियोजन, सृजनात्मक अवधारणा, बाज़ार अनुसंधान, जन संपर्क जैसी अनेक प्रकार की सेवाओं के साथ-साथ भारतीय विज्ञापन उद्योग ने वैश्विक मंच पर अपनी एक सफल छाप छोड़ी है और निकट भविष्य में भी यह अपनी इस प्रगति को जारी रखेगा.
लेखक नई दिल्ली-स्थित एक स्वतंत्र लेखक हैं. उनका ई-मेल पता है: charveews@gmail.com व्यक्त किये गये विचार उनके अपने हैं.