नौकरी फोकस


Volume-13, 30 June- 6 July, 2018

 
प्रतिभा प्रबंधन में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

संगठन का निर्माण लोगों से होता है और ये संगठन अपने लोगों के जरिए लक्ष्यों और उद्देश्यों को हासिल करते हैं. अत: किसी भी संगठन की सफलता के लिये लोगों की गुणवत्ता और कार्यनिष्पादन को बहुत अधिक निर्णायक माना जाता है. समय बीतने के साथ-साथ लोगों की यह ताक़त अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और अब प्रत्येक संगठन (व्यावसायिक, सामाजिक, शैक्षणिक आदि) अपनी आवश्यकताओं के लिये सही लोगों का चुनाव करने और उनके अधिकतम योगदान के लिये उन्हें आवश्यक कौशलों से लैस करने पर विशेष ध्यान देते हैं. प्रतिभा प्रबंधन पूर्ववर्ती कार्मिक या मानव संसाधन प्रबंधन के कार्यों, जिनसे हम सब सुपरिचित हैं से कहीं अधिक व्यापक होता है. प्रतिभा प्रबंधन मुख्यत: सही लोगों का चयन करने और उनका विकास करने तथा उन्हें बनाये रखने के लिये कार्यनीतियां तैयार करने और निष्पादित करने से संबंधित होता है. इसमें लोगों को किसी संगठन के कार्यनिष्पादन में वास्तविक परिवर्तनकारी माना जाता है और उन्हें प्रतिभा के तौर पर लिया जाता है. बहुत से संगठनों ने अपने मानव संसाधन संकार्य का नामकरण प्रतिभा प्रबंधन संकार्य कर दिया है और लोगों के पहलुओं पर अधिक ध्यान देना भी शुरू कर दिया है.
प्रतिभा प्रबंधन के अंतर्गत शामिल प्रमुख गतिविधियों का वर्णन नीचे किया गया है:
प्रतिभा सोर्सिंग: संगठनों और व्यवसायों में लोगों की विभिन्न भूमिकाओं के लिये आवश्यकता होती है. इस आवश्यकता को भर्ती प्रक्रिया के जरिए पूरा किया जाता है जिसके लिये इस नये पारिभाषिक शब्द का प्रयोग किया जाता है. दरअसल प्रतिभा सोर्सिंग भर्ती संकाय का विस्तार है. विज्ञापन जैसी भर्ती की परंपरागत पद्धतियों को अब भी प्रयोग में लाया जाता है परंतु अधिक से अधिक संगठन अब लोगों की भर्ती संदर्भों, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों आदि से सोर्सिंग के जरिए करने के इच्छुक होते हैं. एंट्री स्तर के पदों के लिये अनेक बड़ी और मध्यम आकार की कंपनियां कैम्पस भर्ती पर निर्भर रहती हैं. विनिर्दिष्ट रोजग़ार भूमिकाओं के लिये उपयुक्त लोगों का चुनाव करना मानव संसाधन का प्रमुख कार्य होता है. यह दिन प्रतिदिन
और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. प्रतिभा प्रबंधन में अवसरों की अधिकतर संख्या भर्ती क्षेत्र में है और मानव संसाधन में अर्हता रखने वाले ज़्यादातर युवाओं के कॅरिअर की शुरूआत भर्ती संबंधी कार्यों से शुरू होती है.
प्रतिभा विकास: प्रतिभा प्रबंधन के अंतर्गत प्रतिभा विकास पर जबर्दस्त फोकस रहता है. प्रत्येक प्रगतिशील संगठन अपने लोगों को अपेक्षित ज्ञान, कौशल और अभिरुचि से लैस करने के लिये काफी निवेश करते हैं. यह निवेश धन, समय और प्रयासों के तौर पर किया जाता है. प्रतिभा विकास के उद्देश्य के लिये विभिन्न पद्धतियों को अपनाया जाता है. इनमें प्रशिक्षण सर्वाधिक सामान्य है. विनिर्दिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप संगठन अपने लोगों को उत्पाद, प्रक्रिया और व्यवहार्य प्रशिक्षण प्रदान करते हैं. कोचिंग और निगरानी प्रतिभा विकास के लिये प्रयुक्त अन्य औज़ार हैं. प्रतिभा विकास के अंतर्गत प्रशिक्षण के लिये कार्यक्रमों की पहचान, निर्माण, प्रशिक्षण और विकास, प्रशिक्षण बजट तैयार करना और निवेश से अर्जित लाभ का मूल्यांकन करना प्रमुख कार्य होता है. इसमें नेतृत्व विकास को भी शामिल किया जाता है.
उत्तराधिकार योजना: आमतौर पर संगठन लोगों की अपेक्षा अधिक दिनों तक जारी रहने वाले होते हैं. संगठनों में लोगों के चले जाने के बाद भी भूमिकाएं कायम रहती हैं. एक निश्चित आयु के बाद लोगों को सेवानिवृत्त होना पड़ता है. इसके अलावा संगठनों को आकस्मिकताओं के लिये योजना बनानी होती है जब कर्मचारियों की मृत्यु और छंटनी के कारण अचानक रिक्तियां हो जाती हैं. उत्तराधिकार योजना उपयुक्त प्रतिभा की जब भी जरूरत हो उपलब्धता सुनिश्चित करने की कार्यनीति होती है. इसके तहत संगठन उच्चतर उत्तरदायित्वों और नई भूमिकाओं के लिये लोगों को सुनिश्चित करते हैं जो कि भविष्य में उभर कर आ सकती हैं. इन दिनों संगठन बाहर से अनुभवी लोगों की सोर्सिंग पर निर्भरता घटाने के लिये एक आंतरिक प्रतिभा पूल विकसित करने को वरीयता देते हैं. यह उनके प्रतिभा अधिग्रहण लागत को कम रखता है और कर्मचारियों के लिये एक प्रेरक कारक माना जाता है.
कर्मचारी संलग्नता: संगठनों को अपने लोगों में से सर्वोत्कृष्ट प्राप्त करने के लिये एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा. यह वातावरण कर्मचारी अनुकूल और प्रोत्साहन वाला होना चाहिये. कर्मचारी संलग्नता गतिविधियों का उद्देश्य कार्यस्थल डिज़ाइन में सुधार करना, कर्मचारियोंं की अपने काम में सार्थकता हासिल करने में मदद करना, उन्हें अपने कार्य से अधिक संबद्ध रखना और संगठन के लिये उनकी प्रतिबद्धता को बढ़ाना होता है. अनेक अनुसंधानों में यह प्रमाणित हो चुका है कि कार्यरत कर्मचारी मात्रात्मक और गुणात्मक तौर पर बेहतर सांगठनिक परिणाम देते हैं. वह संगठनों में जारी रहना चाहते हैं जिससे संगठन छोडऩे की दर में कमी आती है. उच्चतर कर्मचारी संलग्नता के निर्माण के लिये मनोरंजक गतिविधियों और अन्य हस्तक्षेपों सहित विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं.
प्रतिपूर्ति और लाभ: प्रतिभा प्रबंधन का यह संकार्य कर्मचारियों को वेतन, भत्तों, अन्य प्रतिपूर्तियों और भुगतानों से जुड़ा होता है. निजी क्षेत्र के रोजग़ारों के मामले में, लगभग प्रत्येक नियुक्त होने वाले कर्मचारी के लिये वेतन समझौता किये जाने की प्रवृत्ति है. संगठन कोस्ट टु कंपनी की गणना करते हैं और तद्नुसार वित्तीय पैकेज का प्रस्ताव करते हैं जो कि समान भूमिका अथवा पद के लिये हायर किये गये विभिन्न कर्मचारियों के लिये अलग-अलग हो सकता है. साथ ही कई मामलों में वेतन को नियत और परिवर्तनशील वेतन में बांटा जाता है. वेतनवृद्धियों की मात्रा और अवधियां भी मामला दर मामला अलग-अलग होती हैं. नई उम्र के कर्मचारी कार्य की शर्तों और वेतन की भिन्न-भिन्न अपेक्षाओं के साथ आते हैं. तद्नुसार संगठन सही प्रतिभा को आकर्षित और बनाये रखने के उद्देश्य से संगठन ऐसे मामलों में अधिक लचीले हो जाते हैं. इसका एक उदाहरण कर्मचारियों को घर से कार्य करने की अनुमति दिया जाना है.
कार्यनिष्पादन समीक्षा और प्रबंधन: दशकों से कर्मचारी के कार्यनिष्पादन की समीक्षा मानव संसाधन प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है. अब संगठन इसे अधिक वास्तविक, सकारात्मक और वैज्ञानिक बनाने के स्थाई प्रयास कर रहे हैं. अनेक संगठनों में मूल्यांकन प्रक्रिया भागीदारीपूर्ण है और न केवल कार्यनिष्पादन के मूल्यांकन पर फोकस किया जाता है बल्कि कर्मचारी क्षमता को समझने पर भी होता है. इस समझ से संगठन के लिये कर्मचारियों को ऐसी भूमिकाओं, पदों और संकार्यों में तैनात करना आसान हो जाता है जहां उनके अधिक योगदान की संभावना होती है. बड़े संगठनों में कार्यनिष्पादन की समीक्षा एक बहुत बड़ा संकार्य बना रहता है.
सोशल मीडिया उपस्थिति: हम सब इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि नई पीढ़ी किस प्रकार सोशल मीडिया से जुड़ी हुई है. बीते 4-5 वर्षों में प्रतिभा प्रबंधन संकार्य सोशल मीडिया से बहुत अधिक प्रभावित रहा है और प्रतिभा सोर्सिंग, ब्रैंड निर्माण तथा रोजग़ार चाहने वालों तक पहुंच कायम करने के लिये इसका प्रयोग होने लगा है. अब बहुत से संगठन अपनी मज़बूत सोशल मीडिया उपस्थिति की स्थापना करने और एक सकारात्मक नियोक्ता ब्रैंड के निर्माण पर ध्यान देने लगे हैं. कर्मचारी सोशल मीडिया चैनलों पर अपने नियोक्ताओं के बारे में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के अनुभवों को पोस्ट करने लगे हैं. कंपनियां भी ऐसी टिप्पणियों के बारे में जानने को उत्सुक होती हैं जो कि पास फीडबैक के तौर पर आती हैं और जहां कहीं जरूरी होता है अपने प्रतिभा प्रबंध व्यवहारों में सुधार करने में उन्हें सहायता मिलती है.
मानव संसाधन विश्लेषण: यह प्रतिभा प्रबंध में शामिल किया गया सबसे नवीनतम संकार्य है. इसे प्रतिभा विश्लेषक के तौर पर भी जाना जाता है. विश्लेषण के अधीन हम निष्कर्ष निकालने और निर्णय करने के लिये डाटा का इस्तेमाल करते हैं. मानव संसाधन विभागों के पास वर्तमान और पूर्ववर्ती कर्मचारियों से संबंधित बड़ी मात्रा में डाटा होता है. डाटा विलेषण के जरिए भविष्य की प्रवृत्तियों और आवश्यकताओं के लिये अनुमान लगाये जा सकते हैं. उदाहरण के लिये विश्लेषक यह जानने में सहायता कर सकता है कि जब एक दर विशेष पर व्यवसाय विकसित हो जायेगा तो कितने अतिरिक्त लोगों की आवश्यकता होगी, कौन से कर्मचारी हंै जिनके रोजग़ार छोडऩे की अधिक संभावना है और विभिन्न परिसरों से भर्ती उम्मीदवारों के कार्यनिष्पादन संकेतकों में क्या कोई अंतर है.
पुरानी लंबे समय से कार्यरत बड़े संगठनों में आप मानव संसाधन संकार्य के अधीन स्थानांतरण और प्लेसमेंट, पदोन्नति, औद्योगिक संबंधें आदि के लिये विशिष्ट विभाग पायेंगे. ये प्रतिभा प्रबंधन का भी हिस्सा होते हैं.
शैक्षणिक और व्यावसायिक अर्हता: प्रतिभा प्रबंधन में कॅरिअर बनाने के लिये आपके पास मानव संसाधन प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री/डिप्लोमा होना चाहिये अथवा प्रबंधन में आपने एमबीए/ एमएमएस/ पीजी डिप्लोमा में मानव संसाधन को विशेषज्ञता के तौर पर चुना हो. ये पाठ्यक्रम ज्यादातर प्रबंध संस्थानों में अथवा विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हैं जिनके पास प्रबंधन विभाग हैं. यह अर्हता प्राप्त करने के लिये न्यूनतम 2 वर्ष लग जाते हैं.
ऐसे पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रतिष्ठित संस्थानों की एक सांकेतिक सूची नीचे दी गई है:-
*भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद, कोलकाता, बंगलुरू, इंदौर, कोझिकोड, लखनऊ, नागपुर, अमृतसर, रोहतक, काशीपुर, रांची, शिलांग, तिरुचिरापल्ली, विशाखापत्तनम, जम्मू, सिरमौर, बोध गया
*जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
*जेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टीट्यूट, जमशेदपुर
*प्रबंधन अध्ययन संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय/बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
*देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
*मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, गुडग़ांव
*अलकेश दिनेश मोदी इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई विश्वविद्यालय
*वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ  मैनेजमेंट डेवलपमेंट एंड रिसर्च, मुंबई
*टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसिस, मुंबई
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मुंबई, दिल्ली, खडग़पुर
*हरि सिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर
*लॉयल स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, चेन्नै
प्रतिभा प्रबंधन में रोजग़ार के अवसर निम्न प्रकार के सभी संगठनों में उपलब्ध हैं:
सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम: सभी बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मानव संसाधन में प्रबंध प्रशिक्षुओं की भर्ती करते हैं. ऐसे प्रतिष्ठानों में नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन, नेशनल हाईड्रोइलेक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन, ऑयल इंडिया लिमिटेड, ऑयल एवं नेचुरल गैस कमीशन, पावर ग्रिड कार्पोरेशन आदि. इसी प्रकार के अवसर राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों में भी उपलब्ध हैं.
निजी क्षेत्र की कंपनियां: निजी क्षेत्र की सभी बड़ी कंपनियां फ्रेशर अर्हता प्राप्त मानव संसाधन प्रबंध पेशेवरों की भर्ती के लिये चुनिंदा प्रबंधन संस्थानों के परिसरों का दौरा करती हैं. उदाहरण के तौर पर ऐसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम हैं: हिंदुस्तान यूनिलीवर, प्रॉक्टर एंड गैम्बल, होमग्राउन कंपनियां-आईटीसी, गोदरेज, मारिका और आईटी कंपनियां जैसे कि इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल, एसेंचर, कॉग्निजेंट और अन्य
प्रबंधन शिक्षा: सभी प्रबंधन कालेजों तथा विश्वविद्यालयों के प्रबंधन विभागों में मानव संसाधन संकाय की आवश्यकता होती है. भर्ती अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद तथा विश्वविद्यालय नियमों के तहत की जाती है. सामान्यत: संकाय पदों के लिये पात्रता हेतु डॉक्ट्रेट अपेक्षित होती है. प्रबंधन में अध्येता कार्यक्रम आईआईएम संस्थानों में उपलब्ध होते हैं जो आपको शिक्षण में कॅरिअर हासिल करने में सहायक हो सकते हैं. प्रबंधन विभागों को अनुसंधान एसोसिएट्स की भी आवश्यकता होती है.
ग़ैर सरकारी संगठन: स्वैच्छिक/ग़ैर सरकारी संगठनों को प्रशासनिक, प्रशिक्षण और काउंसलिंग उद्देश्यों के लिये मानव संसाधन पेशेवरों की ज़रूरत होती है. ऐसे संगठन अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तरों पर प्रचालन में होते हैं. सुविख्यात गैऱ सरकारी संगठनों के तौर पर चाइल्ड रिलीफ एंड यू, एक्शन एड, ऑक्सफाम, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज, वल्र्ड विजऩ आदि को जाना जाता है. बहुत से कार्पोरेट्स के कार्पोरेट सामाजिक दायित्व गतिविधियों के लिये अपने कर्मचारी होते हैं. इनमें भी काम के अवसर उपलब्ध होते हैं.
बैंक और वित्तीय संस्थान: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने प्रशासनिक कार्यालयों में विशेषज्ञ अधिकारियों के तौर पर तैनाती करने के लिये मानव संसाधन विशेषज्ञों की भर्ती करते हैं. सेवा की एक निश्चित अवधि के बाद वे सामान्य बैंकिंग में जा सकते हैं. निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक भी इसी तरह के अवसरों के प्रस्ताव करते हैं. सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में गैऱ बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, हाउसिंग/ इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियां, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां, म्युचुअल फंड्स कंपनियां को प्रतिभा प्रबंधन पेशेवरों की नियमित आवश्यकता होती है.
मानव संसाधन कन्सलटिंग फर्में: एओएन हेविट, डिलोइट, इक्या ह्यूमैन कैपिटल, केली सर्विसिज इंडिया मानव संसाधन कन्सलटिंग में जानी मानी फर्में हैं. अनुभवी पेशेवर स्वतंत्र कन्सलटेंट्स के तौर पर कार्य को चुन सकते हैं.
भर्ती एजेंसियां: एबीसी कन्सलटेंट्स, रेंडस्टेड, टीमलीज, एडेको राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत बड़ी भर्ती एजेंसियां हैं. राज्य स्तरों पर अथवा किसी शहर विशेष में कार्यरत छोटी-छोटी एजेंसियां भी हैं.
स्टार्टअप्स: एक प्रतिभा प्रबंधन पेशेवर के तौर पर आप किसी स्टार्टअप में कर्मचारी के तौर पर कार्य की संभावना तलाश सकते हैं. आप इसी तरह के स्टार्टअप में साझेदार के तौर पर भी शामिल हो सकते हैं अथवा उसका स्वामी भी बन सकते हैं. स्टार्ट अप्स को भी मानव संसाधन सहित विभिन्न प्रबंधन विषय क्षेत्रों में इंटर्न की आवश्यकता होती है.
रोजग़ार पथ: मानव संसाधन में स्नातकोत्तर अर्हता के साथ आपके पास सार्वजनिक या निजी संगठन में प्रशिक्षु अथवा कनिष्ठ कार्यपालक के तौर पर कॅरिअर की शुरूआत करने का अवसर है. जहां किसी संगठन और इसके प्रतिभा प्रबंधन विकास का आकार बड़ा होता है, आपको इसमें कार्य करने के लिये विशेष तौर पर मानव संसाधन विषय क्षेत्र (उदाहरणार्थ भर्ती, प्रतिपूर्ति और लाभ) सौंपा जा सकता है. छोटे संगठनों में आपको बहुल मानव संसाधन संकार्यों की देख-रेख करनी होगी. जो एक ही संगठन में लंबे समय तक जारी रहना चाहते हैं वे ऐसा कर सकते हैं. अन्यों के लिये लेटरल एंट्री के जरिए बेहतर स्थान प्राप्त करने के लिये हमेशा बाहर में अवसर उपलब्ध रहते हैं. अनुभवी प्रतिभा प्रबंधन पेशेवरों की नियमित मांग रहती है और 2-3 या अधिक संगठनों में कार्य कर चुके 7-8 वर्षों के अनुभवी लोगों को ढूंढना कोई हैरानी की बात नहीं है. यह सुनिश्चित करें कि रोजग़ार बदलने का आपका फैसला सोच समझकर लिया गया फैसला है और जल्दबाज़ी में नहीं लिया गया है.
प्रत्येक प्रतिभा प्रबंधन पेशेवर को यह भी निर्णय करना होता है कि यदि वह प्रतिभा प्रबंधन के सभी विषयों को सीखना चाहता है/चाहती है अथवा एक ख़ास क्षेत्र (जैसे कि प्रतिभा विश्लेषक) में विशेषज्ञता हासिल करना चाहता/चाहती है. दोनों विकल्पों के लिये साथ-साथ प्रयास करना संभव होता है. यदि आप अच्छी प्रगति करते हैं, आपके कौशल और कार्यनिष्पादन पर निर्भर करता है, आपमें से कुछेक किसी बड़ी/लघु आकार की कंपनी में 12-15 वर्षों की सेवा के बाद प्रतिभा प्रबंधन संकाय के प्रमुख बन जाने चाहियें. कुछेक मानव संसाधन पेशेवर सीईओ के स्तर तक भी पहुंच चुके हैं. यह केवल कार्पोरेट दुनिया के कॅरिअर्स में ही लागू होता है. कुछ उद्योग अनुभव प्राप्त करने के बाद कोई व्यक्ति शिक्षण अथवा कन्सलटिंग के क्षेत्र में भी जा सकता है. अनुभवी लोगों को प्रबंधन संस्थानों में प्लेसमेंट अधिकारी के तौर पर भी नियुक्त किया जा सकता है.
सफलता के गुण: प्रतिभा प्रबंधन में कॅरिअर लोगों के साथ संपर्क और संव्यवहार का क्षेत्र होता है. इसलिये आप मौखिक और ग़ैर मौखिक सम्प्रेषण में अच्छे होने चाहियें. धैर्य, सहानुभूति, समय-सीमा का पालन करने के लिये कठोर परिश्रम करने की योग्यता, निर्णय लेना, समस्या समाधान और वार्तालाप कौशल आदि कुछेक अन्य अपेक्षाएं हैं जो प्रतिभा प्रबंधन कॅरिअर में सफलता के लिये आपकी सहायता कर सकती हैं.
लेखक मुंबई-स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल: v2j25@yahoo.in