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पर्यटन उद्योग में रोज़गार के अवसर

 
पर्यटन उद्योग में रोज़गार के अवसर


प्रभा नेगी और
अंतरिक्षा नेगी पंत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. इसे प्रकृति से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शानदार भौगोलिक स्थिति और जीव-तंजुओं तथा वनस्पतियों की विविधता का जो उपहार मिला हुआ है उसकी वजह से यह घूमने-फिरने और देखने के लिए दुनिया के बेहतरीन स्थानों में से एक बन गया है. हाल के वर्षों में यात्रा और पर्यटन ने भारत में सबसे बड़े सेवा उद्योगों में से एक का दर्जा प्राप्त कर लिया है. 2016 में इस उद्योग के 7.5 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान लगाया गया था जो कि इससे पहले साल 6.9 प्रतिशत था. विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद की ‘‘यात्रा और पर्यटन: आर्थिक प्रभाव 2015’’ नाम की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस उद्योग का योगदान 2.2 प्रतिशत रहा. ऐसा पूर्वानुमान लगाया गया है कि 2025 में देश के सकल घरेलू उत्पाद में इस उद्योग का योगदान 2.5 प्रतिशत हो जाएगा. संपर्क सुविधाओं में सुधार, ठहरने की बेहतर सुविधा और वीजा संबंधी प्रक्रिया में सुधार को लेकर सरकार की अनुकूल नीतियों (जैसे वीजा ऑन अराइवल) से भारतीय पर्यटन को फलने-फूलने का मौका मिला है. भारत आज विदेश यात्रा पर जाने वाले अपने नागरिकों की संख्या की दृष्टि से सबसे तेजी से विकसित हो रहा बाजार है और विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) के अनुमानों के अनुसार 2020 में भारत से 5 करोड़ लोग पर्यटन के लिए विदेश यात्रा पर जाने लगेंगे. रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव की वजह से आयी मंदी के बावजूद पर्यटन के लिए विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले 7 वर्षों में औसतन 10-12 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ रही है. 2016-2021 की अवधि के दौरान भारत में यात्रा और पर्यटन का बाजार करीब 7.23 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढऩे की संभावना है. बढ़ती हुई उपभोग-प्रेरित अर्थव्यवस्था, विशाल और लगातार समृद्ध होता मध्यमवर्ग और हवाई परिवहन के क्षेत्र में जारी उदारीकरण की प्रक्रिया ने पर्यटन के उद्देश्य से विदेश यात्रा करने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी की है.           
किसी खास मकसद से जुड़े पर्यटन क्षेत्र, जैसे मेडिकल, वैलनेस और साहसिक पर्यटन ने भी इस उद्योग के विकास में योगदान किया है. स्मार्ट फोनों की संख्या में बढ़ोतरी और इंटरनेट के प्रसार से पर्यटन के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराने वालों की संख्या बढ़ी है. ‘‘अतिथिदेवो भव’’ महज दो शब्द भर नहीं हैं बल्कि ये किसी स्थान पर पर्यटक के लिए आतिथ्य के जज्बे को प्रतिबिम्बित करते हैं. आतिथ्य उद्योग सेवा उद्योग के अंतर्गत कई सेवाओं का एक समूह है जिसमें ठहरना, यात्रा-कार्यक्रम बनाना, थीम पार्कों की स्थापना, परिवहन, क्रूज लाइनर संचालन और पर्यटन उद्योग के अंतर्गत आने वाले अन्य क्षेत्र शामिल हैं. आतिथ्य उद्योग कई अरब डालर के कारोबार वाला उद्योग है जो लोगों के पास फुर्सत और अतिरिक्त आमदनी के उपलब्ध होने पर निर्भर रहता है. रेस्टोरेंट, होटल या मनोरंजन पार्क जैसी कोई आतिथ्य इकाई कई समूहों से मिलकर बनती है, जैसे सुविधाओं का रख-रखाव और प्रत्यक्ष संचालन (सेवा करने वाले, रख-रखाव करने वाले, पोर्टर, रसोई के कर्मचारी, बार टेंडर, प्रबंधन, विपणन और मानव संसाधन आदि), आतिथ्य उद्योग में अनगिनत अवसर उपलब्ध हैं. यह मानव इतिहास के सबसे पहले शुरू हुए कारोबारो में से एक है. लोग या तो काम के लिए या फिर फुर्सत के पल बिताने के लिए बाहर जाते हैं ताकि अपने परिवार/दोस्तों से मुलाकात कर सकें. इस समय यह 61 अरब डालर का कारोबार है. सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर मोल-भाव किये बगैर लोगों को इनकी बिक्री करना या इनका प्रबंधन करना एक चुनौतीपूर्ण मामला है. इसके साथ ही टेक्नोलॉजी और वैश्वीकरण की भी चुनौतियां हैं जिन्हें ध्यान में रखते हुए आज आतिथ्य उद्योग के लिए यह आवश्यक हो गया है कि इसके संचालन, विपणन और मानव संसाधन विकास का प्रभावी तरीके से संचालन किया जाए. आतिथ्य उद्योग दुनिया भर में पर्यटन के माध्यम से लोगों को रोजगार देने के लिए उत्तरदायी है.    
पर्यटन की परिभाषा
पर्यटन एक ऐसी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिघटना है जिसके तहत लोग व्यवसाय/पेशे से संबंधित अपने सामान्य गंतव्यों की बजाय दूसरे देशों या स्थानों की यात्रा पर जाते हैं. इन लोगों को यात्री कहा जाता है (ये पर्यटक या सैर-सपाटे पर निकले लोग) निवासी या अनिवासी हो सकते हैं और पर्यटन का संबंध उनसे संबंधित ऐसी गतिविधियों से है जिनमें से कुछ में पर्यटन संबंधी खर्च भी शामिल होता है (संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन, 2008). सरल शब्दों में यात्रा और पर्यटन बुनियादी तौर पर एक ही सिक्के के दो अलग-अलग पहलू हैं. जहां यात्राएं हमें साहसिक कारनामों की जीवनपर्यन्त बनी रहने वाली यादें देकर जाती हैं, वहीं पर्यटन आतिथ्य उद्योग के क्षेत्र में हमारे पेशेवर लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मंच प्रदान करता है.  
भारत में यात्रा और पर्यटन उद्योग
पर्यटन की दृष्टि से भारत को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: उत्तरी भारत, पूर्वी भारत, पश्चिमी भारत और दक्षिणी भारत. देश के विभिन्न भाग अलग-अलग तरह का पर्यटन अनुभव प्रदान करते हैं जो प्रकृति की सुंदरता से लेकर देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत तक कुछ भी हो सकता है. इस तरह के सभी स्थान विदेशी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं और उन्हें भारत में इसी तरह की दूसरी जगहों का अनुभव लेने को प्रेरित करते हैं. यात्रा और पर्यटन उद्योग देश के लिए राजस्व अर्जित करने के अलावा करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार भी प्रदान करता है. हाल के वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में घरेलू पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है जिसके कुछ प्रमुख कारणों में बेहतर सडक़ संपर्क, लागों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव और मध्यम वर्ग के पास बुनियादी जरूरत की चीजों से हटकर अन्य कार्यों पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त आमदनी का होना आदि शामिल हैं. इसी तरह विदेशियों के लिए भी भारत छुट्टियां बिताने के लिए आकर्षक और किफायती गंतव्य बन गया गया है. राजस्थान और केरल जैसे प्रमुख राज्यों को सबसे अधिक लोकप्रिय अवकाशकालीन गंतव्य स्थान के रूप में विकसित किये जाने और अतुल्य भारतजैसे अभियान की सफलता से पर्यटन क्षेत्र को और बढ़ावा मिला है.  
भारत में पर्यटन उद्योग की संभावनाएं
भारत में पर्यटन आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका तेजी से विकास हो रहा है. विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद के अनुमान के अनुसार 2017 में भारत को पर्यटन से 15.24 लाख करोड़ रुपये (230 अरब डालर) यानी देश के सकल घरेलू उत्पाद के 9.4 प्रतिशत के बराबर आमदनी हुई. इससे 4.16 करोड़ लोगों को रोजी-रोटी मिली जो देश में कुल रोज़गार का 8 प्रतिशत है. इस क्षेत्र के बारे में पूर्वानुमान लगाया गया है कि इसका कारोबार 6.9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढक़र 2028 तक 32.05 लाख करोड़ (480 अरब डालर) हो जाने की संभावना है जो सकल घरेलू उत्पाद का 9.9 प्रतिशत है. अक्तूबर 2015 में भारत के मेडिकल टूरिज्म क्षेत्र का कारोबार 3 अरब डालर होने का अनुमान लगाया गया था. 2020 तक इसके बढक़र 7-8 अरब डालर हो जाने का अनुमान है. 2014 में 1,84,298 विदेशी रोगी इलाज कराने के लिए भारत आए. 
यात्रा और पर्यटन पाठ्यक्रमों में सिखायी जाने वाली आम अवधारणाएं इस प्रकार हैं: विश्व का भूगोल, संचार और ग्राहक सेवा कौशल, बिक्री संबंधी कौशल, संगठनात्मक कौशल, विपणन नीतियां, यात्रा और परिवहन नियोजन.
भारत में पर्यटन के प्रकार: साहसिक पर्यटन
भारत में पर्यटन के एक प्रकार के रूप में साहसिक पर्यटन का विकास हाल ही में हुआ है. इसके अंतर्गत दूर-दराज और अनोखे स्थानों की यात्रा और विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में पर्यटकों की हिस्सेदारी शामिल रहती है. भारत में साहसिक पर्यटन के लिए लोग लद्दाख, सिक्किम और हिमालय के विभिन्न स्थानों में ट्रैकिंग के लिए जाना पसंद करते हैं. हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर वहां उपलब्ध स्कीइंग सुविधाओं के लिए भी लोकप्रिय हैं. इधर व्हाइट वाटर रैफ्टिंग भी भारत में लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में पर्यटक इसके लिए उत्तराखंड, असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में नदियों की लहरों से जूझने की साहसिक गतिविधियों में हिस्सा लेने आने लगे हैं.
वन्यजीव पर्यटन
भारत में काफी बड़ा इलाका वनों से आच्छादित है जिसमें बड़े सुंदर और अनोखे जीव-जंतु निवास करते हैं. इनमें से कुछ तो समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों के दुर्लभ जीव-जंतु हैं. दुनिया भर से पर्यटक इन्हें देखने के लिए आते हैं जिससे देश में वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा मिला है. देश में वन्यजीव पर्यटन के प्रमुख स्थानों में सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य, केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान और कॉर्बेट नेशनल पार्क शामिल हैं.
चिकित्सा पर्यटन
दुनिया भर से लोग किफायती और श्रेष्ठ गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाओं, खास तौर पर शल्य चिकित्सा और सामान्य उपचार के लिए बड़ी तादाद में भारत आने लगे हैं. भारत में ऐसे कई चिकित्सा संस्थान हैं जो विदेशी रोगियों का इलाज करते हैं और उन्हें बेहतरीन किस्म की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं. इनका खर्च अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में इलाज कराने पर होने वाले खर्च की तुलना में बहुत ही कम होता है. चेन्नै में विदेशों से चिकित्सा के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या भारत में इस तरह के पर्यटकों की कुल संख्या का करीब 45 प्रतिशत है.  
तीर्थ यात्रा
भारत अपने मंदिरों और अन्य उपासना स्थलों के लिए विश्व विख्यात है और यही वजह है कि देश में विभिन्न प्रकार के पर्यटकों के साथ-साथ तीर्थयात्रा पर आने वाले पर्यटकों की संख्या भी सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही है. भारत में तीर्थयात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों में वैष्णों देवी, स्वर्ण मंदिर, चारधाम और मथुरा-वृंदावन आदि शामिल हैं. 
ईको टूरिज्म
भारत में हाल में जिस तरह के पर्यटन में बढ़ोतरी हुई है उसमें ईको टूरिज्म भी शामिल है. ईको टूरिज्म के अंतर्गत प्रकृति के उपहारों से संपन्न किसी क्षेत्र या इलाके का इस तरह से विकास किया जाता है कि इसका संरक्षित रूप चिरस्थायी बना रहे. देश के पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण सभी क्षेत्रों के पारिस्थितिकीय दृष्टि से विकास के संदर्भ में भी आज इस तरह का टिकाऊ संरक्षण अधिकाधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है. देश में ईको टूरिज्म के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थानों में काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, गिर राष्ट्रीय उद्यान और कान्हो राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं.  
सांस्कृतिक पर्यटन
भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और रहस्यवाद के लिए मशहूर है जिससे आकर्षित होकर बहुत से पर्यटक यहां की यात्रा का अनुभव प्राप्त करने के लिए भारत आते हैं. पुष्कर मेला, ताज महोत्सव और सूरज कुंड मेला जैसे अनुष्ठान इस तरह के पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र होते हैं. 
आर्थिक विकास में यात्रा और पर्यटन उद्योग की भूमिका - रोज़गार सृजन
आतिथ्य/पर्यटन कारोबार के विकास से देश में रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा हो रहे हैं. पर्यटन उद्योग रोज़गार के अनेक अवसर उत्पन्न कर रहा हैं. ये अवसर आतिथ्य और पर्यटन कारोबार के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं.
*बुनियादी ढांचे का विकास: पर्यटन के क्षेत्र में ज्यादातर उदीयमान राष्ट्र नये राजमार्गों, हवाई अड्डों, होटलों, लॉज, रेस्तरां, गेस्ट हाउस और ट्रैकिंग पथों का निर्माण कर रहे हैं ताकि उनके पर्यटन क्षेत्र का विकास हो. अधिक से अधिक संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस तरह का विकास बहुत जरूरी है.  
*सांस्कृतिक विकास: इसके अलावा पर्यटकों को संस्कृति और जीवन-मूल्यों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है. आतिथ्य पर्यटन के कारोबार से स्थानीय लोगों को दुनिया के विभिन्न भागों के लोगों की जीवन शैलियों और धर्मों के बारे में जानने-समझने का अवसर प्राप्त होता है.
*राजस्व प्राप्ति: देश में पर्यटन और आतिथ्य के कारोबार से स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलती है. पर्यटक करों के रूप में सरकार को जो कुछ भुगतान करते हैं उससे देश के विकास में मदद मिलती है. पर्यटकों से स्थानीय व्यापारियों का कारोबार बढ़ता है. वे जो खरीदारी करते हैं उससे उनके मुनाफे में वृद्धि होती है.
व्यवसाय के रूप में यात्रा और पर्यटन
पर्यटन और आतिथ्य के कारोबार में बढ़ोतरी से छोटे व्यवसायियों और जन समुदायों को कई फायदे होते हैं. यही कारण है कि दुनिया भर में अनेक विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देश भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं. पर्यटन और फुर्सत का मजा लेने के कारोबार के तहत ऐसी तमाम आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां भी आती हैं जो यात्रा करने, मनोरंजन और मौज-मस्ती से संबंधित होती हैं. इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर लोगों की यह जिम्मेदारी होती है कि उनके ग्राहकों के फुर्सत के क्षणों को ज्यादा से ज्यादा आनंददायक बनाएं. इसके लिए उन्हें पर्यटकों के साथ सीधे संपर्क के समय में या लेजऱ रिसॉर्ट में काम करने वालों अथवा विभिन्न सैर-सपाटे की गतिविधियों के दौरान उनकी सुख-सुविधाओं का पूरा ध्यान रखना पड़ता है. यात्रा और पर्यटन उद्योग की विभिन्न गतिविधियों के आयोजन और खेल तथा स्वास्थ्य केन्द्रों के कार्यक्रमों में इन पेशेवर विशषज्ञों को पर्यटकों की सुख-सुविधाओं का ध्यान रखना पड़ता है.
*उपलब्ध पाठ्यक्रमों की सूची: यात्रा और पर्यटन के सिद्धांत इस कक्षा में विद्यार्थी व्यवसाय और संसाधन प्रबंधन, विश्व अर्थव्यवस्था पर पर्यटन के प्रभाव, पर्यटन पर राजनीति के प्रभाव. यात्रा और पर्यटन की प्रारंभिक कक्षाओं में इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी जाती है. इनमें शामिल हैं: होटल मैनेजर, एयरलाइन मैनेजर, इवेंट प्लानर, ट्रैवल एजेंट आदि. यह कक्षा सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होती है.
*आतिथ्य प्रबंधन: इस कक्षा में विद्यार्थियों को विभिन्न पहलुओं जैसे यात्रा, ठहरने व खाने-पीने की सेवाओं और इवेंट प्लानिंग की जानकारी दी जाती है. आतिथ्य उद्योग में सूचना टेक्नोलॉजी का उपयोग भी सिखाया जाता है. इस कक्षा में कार्यस्थल में नेतृत्व के महत्व और व्यवसाय संचालन में महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों के बारे में भी जानकारी दी जाती है.
*अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन: अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की कक्षाओं में विद्यार्थियों को उद्योग पर असर डालने वाले वैश्विक मुद्दों के बारे में बताया  जाता है. इसमें राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, पर्यावरण संबंधी सरोकारों और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन प्रबंधन की जानकारी दी जाती है. आम तौर पर इस पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वालों को इस कोर्स की आवश्यकता पड़ती है और कॉलेज शिक्षा के दौरान इसे कभी भी पूरा किया जा सकता है.
*पर्यटन में वित्तीय मुद्दे: इस पाठ्यक्रम में पर्यटन उद्योग में लिये जाने वाले व्यावसायिक और वित्तीय निर्णयों के बारे में बताया जाता है. वित्त संबंधी पर्यटन प्रबंधन पाठ्यक्रम उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं जो इस क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाना चाहते हैं. ये उसी तरह के होते हैं जैसे पारम्परिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम. इनके विषयों में व्यवसाय के लिए वित्तपोषण, निर्माण, बिक्री प्रबंधन और विदेशी मुद्रा विनिमय आदि की जानकारी दी जाती है. इस पाठ्यक्रम की कक्षाएं जूनियर या सीनियर स्तर पर किसी भी साल हो सकती हैं.
*पर्यटन नियोजन: इस पाठ्यक्रम के छात्र संभावित ग्राहकों के लिए यात्रा और पर्यटन योजनाएं बनाते हैं जिसमें वे भूगोल, वित्त और विपणन की अपनी जानकारी का उपयोग करते हैं. बिक्री की तकनीकों की भी इस पाठ्यक्रम की कक्षाओं में जानकारी दी जाती है. ये कक्षाएं जूनियर और सीनियर दोनों ही स्तर के छात्रों के लिए हो सकती हैं.
*क्रूज़ जहाज उद्योग: कुछ पाठ्यक्रमों में क्रूज़ जहाज उद्योग के बारे में विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाता है. विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के क्रूज़ जहाजों का आकलन करने, उनसे यात्रा-योजना बनाने, और इनसे संबंधित समसामयिक मुद्दों की जानकारी दी जाती है. आम तौर पर यह पाठ्यक्रम ऐच्छिक होता है और क्रूज लाइन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन का आधिकारिक प्रमाणपत्र प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थी इस कोर्स को करके क्रेडिट प्वाइंट हासिल कर सकते हैं.  
इस क्षेत्र में दाखिला और पात्रता
*मानदंड: स्नातक स्तर के पर्यटन पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं तक की शिक्षा पूरी होना जरूरी है. इस नये उभरते उद्योग में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. अगर आप स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं तो आपको किसी मान्यताप्राप्त संस्था से स्नातक होना जरूरी है. इसके अलावा आपको प्रवेश-परीक्षा देनी होगी और ग्रुप डिस्कशन एवं व्यक्तिगत इंटरव्यू में शामिल होना होगा. कई संस्थान यात्रा प्रबंधन में दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के जरिए स्नातक डिग्री, स्नातकोत्तर डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं. यात्रा और पर्यटन प्रबंधन उद्योग का हिस्सा बनने के इच्छुक विद्यार्थी निम्नलिखित में से कोई चुन सकते हैं: स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम (बैचलर ऑफ  टूरिज्म स्टडीज) में प्रवेश ले सकते हैं. स्नातकोत्तर स्तर पर यात्रा और पर्यटन प्रबंधन में पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. इसके अलावा मास्टर ऑफ टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन, मास्टर ऑफ ट्रैवल एडमिनिस्ट्रेशन, एम.ए. टूरिज्म मैनेजमेंट, ट्रैवल एंड टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्लोमा कोर्स, ट्रैवल और टूरिज्म मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिप्लोमा कोर्स, पर्यटन और होटल प्रबंधन में डिप्लोमा, एयर लाइन प्रबंधन में डिप्लोमा जैसे पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं.      
*यात्रा और पर्यटन के क्षेत्र में व्यवसाय के अवसर: पर्यटन क्षेत्र का हिस्सा बनने के लिए इसमें प्रवेश के कई विकल्प हैं. पहला विकल्प तो निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र में से चुनाव का है. पर्यटन के प्रमुख क्षेत्रों में रोज़गार के कई अवसर हैं जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
*पर्यटन विभाग: इसमें आरक्षण कर्मचारी और काउंटर स्टाफ  के रूप में रोज़गार मिल सकता है. इसके अलावा बिक्री और विपणन कर्मचारी, टूर प्लानर और टूर गाइड के रूप में भी रोज़गार के अवसर उपलब्ध हैं. पर्यटन विभागों के अंतर्गत सूचना सहायकों की आवश्यकता होती है जिनका चयन कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से किया जाता है. पर्यटन विभाग में टूरिस्ट गाइड के तौर पर भी रोज़गार मिल सकता है. पर्यटन मंत्रालय के अनुसार तीन तरह के गाइड होते हैं: क्षेत्रीय, राज्य स्तरीय और स्थानीय.
*एयरलाइन्स: एयरलाइन्स में ग्राउंड स्टाफ और फ्लाइट स्टाफ  के तौर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध हैं. एयर होस्टेस/स्टीवर्ड के अलावा आप ट्रैफिक असिस्टेंट, आरक्षण और काउंटर स्टाफ  आदि के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं.
*होटल: होटल उद्योग सेवा उद्योग के अंतर्गत आता है और यह पर्यटकों की खाने-पीने और ठहरने की आवश्यकताओं को पूरा करता है. होटलों में फ्रंट ऑफिस, हाउस कीपिंग, फूड एंड बीवरेजज, अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग/ मेंटेनेंस, सेल्स, पब्लिक रिलेशन्स और सिक्योरिटी जैसे विभिन्न प्रमुख विभाग होते हैं जहां आप कार्य कर सकते हैं.
*टूर ऑपरेटर: ये लोग विभिन्न पर्यटन स्थलों के लिए टूर संचालित करने में मदद करते हैं और पर्यटकों की सुखद यात्रा तथा ठहरने का प्रबंध करते हैं.
*ट्रैवल एजेंट्स: ट्रैवल एजेंट पर्यटकों और कारोबारियों की आवश्यकताओं का आकलन करते हैं और उनके लिए उपलब्ध विकल्पों में से चयन करके बेहतरीन यात्रा की व्यवस्था करते हैं. कई रिसॉर्ट, ट्रैवल ग्रुप अपने टूर पैकेजेज को पयटकों में बढ़ावा देने के लिए ट्रैवल एजेंट्स का उपयोग करते हैं. 
*ट्रांसपोर्ट: एयरलाइन्स के अलावा बहुत से पर्यटक रेल सेवाओं, कोच आपरेटरों, किराये की कारों का उपयोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक विमान, रेलगाड़ी, समुद्री जहाज आदि से जाने में करते हैं. इन सबकी व्यवस्था ट्रांसपोर्ट यानी परिवहन के साधनों को देखने वालों द्वारा की जाती है.
यात्रा और पर्यटन पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछ विश्वविद्यालय/संस्थान
*भारतीय यात्रा और पर्यटन प्रबंधन संस्थान दिल्ली, ग्वालियर, भुवनेश्वर, नेल्लोर
*हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला
*बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
*अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
*पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़
*केरल पर्यटन और यात्रा अध्ययन संस्थान तिरुअनंतपुरम,
*राष्ट्रीय पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन संस्थान हैदराबाद
*डिब्रुगढ़ विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज डिब्रुगढ़,
*इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज गाजियाबाद
*रीजनल कॉलेज आफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर, ओडिशा. 
यात्रा और पर्यटन उद्योग: आगे का रास्ता अगर हम किसी काम को करने के जुनून और कॅरिअर के विकल्पों के बारे में विचार करते हैं तो यात्रा और पर्यटन बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह आजीविका का एक माध्यम तो हैं ही, इसमें जीवन पर्यन्त साहसिक जीवन जीने का विकल्प भी रहता है. किसी ने ठीक ही कहा है कि यात्राएं आपके जीवन में शक्ति और प्रेम को लौटा लाती हैं. 
यात्रा काम करने का पुरस्कार नहीं है, यह जीवन जीने की शिक्षा है. पर्यटन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आपका घर सामान से भरा भले ही न हो सके, आपका जीवन अनुभवों से अवश्य भर जाएगा. हम लोग हमेशा पैसा कमाने की फिराक में रहते हैं क्यों न हम ज्यादा यादें जोडऩे की कोशिश करें. सभी चीजों का छोटा सा हिस्सा सहेज कर रखना-यही तो है यात्रा का उद्देश्य. ऐसा न हो कि अंत में अगर हम अपने जीवन का लेखा-जोखा तैयार कर रहे हों तो पर्यटन को व्यवसाय के रूप में न चुनने का खेद होने लगे. इन बातों को हम जीवन में कहीं भी लागू कर सकते हैं, चाहे यह हमारा व्यक्तिगत जीवन हो या व्यावसायिक जीवन, अथवा जीवन का कोई अन्य पहलू जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं. ये पंक्तियां आज के संदर्भ में यात्राओं के प्रति लोगों के जुनून को प्रदर्शित करती हैं और ऐसा लगता है कि यही आज की आवश्यकता भी है. अनुमान है कि भारत 2028 तक अपने आप को यात्रा और पर्यटन की दृष्टि से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर लेगा. वल्र्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल की 2018 की इम्पैक्ट रिपोर्ट से इसका संकेत मिलता है. यात्रा और पर्यटन उद्योग का विकास किया जाना चाहिए ताकि यह और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकृष्ट कर सके जिससे पर्यटन उद्योग के विकास के लिए अनुकूल माहौल विकसित हो सके. भारत में पर्यटन के बारे में जनवरी 2015 में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 तक घरेलू पर्यटक पर्यटन के खर्च में 85 प्रतिशत का योगदान कर रहे होंगे जबकि बाकी 15 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों से प्राप्त होगा. इसलिए यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक योगदान बढऩे वाला है और यह क्षेत्र बड़ी तादाद में देश की महत्वाकांक्षी युवा पीढ़ी को रोज़गार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान करने जा रहा है.
पर्यटकों द्वारा सैर सपाटे पर किये जाने वाले खर्च से (बाहर से आने वाले और घरेलू) 2016 में यात्रा और पर्यटन का जीडीपी 12,079.0 अरब रुपये रहा जबकि कारोबारी पर्यटन का खर्च 689.0 अरब रुपये था जो पहले का  5.4 प्रतिशत है. सैर-सपाटे वाले पर्यटन के खर्च में 2017 में 6.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से इसके 12,910.2 अरब रुपये के स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है. यह भी अनुमान लगाया गया है कि यह 7 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढक़र 2027 तक 25,391.1 अरब रुपये हो जाएगा. इसी तरह कारोबारी यात्राओं के खर्च में 5.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि से 2017 में इसके 26.6 अरब रुपये हो जाने का अनुमान है जबकि 7.2 प्रतिशत वार्षिक की वृद्धि से 2027 तक इसके 1,43.5 अरब हो जाने का भी अनुमान है.  
घरेलू पर्यटकों द्वारा किये जाने वाले खर्च से 2016 में यात्रा और पर्यटन के जीडीपी का 88.0 प्रतिशत प्राप्त हुआ जबकि विदेशी पर्यटकों यानी अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन से इसके 12 प्रतिशत के बराबर प्राप्तियां हुई. घरेलू यात्राओं के खर्च में 2017 में 7.0 प्रतिशत की दर से वृद्धि होकर इसके 12,024.4 अरब रुपये पहुंच जाने की संभावना है जबकि अनुमान है कि यह 7.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि से बढक़र 2027 तक 23,942.9 अरब डालर हो जाएगा. इसके साथ ही भारत यात्रा पर आए विदेशी पर्यटकों के यात्रा खर्च के (विजिटर एक्सपोर्ट) 2017 में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,612.5 अरब रुपये और इसके बाद 6.1 प्रतिशत वार्षिक की वृद्धि के साथ 2027 तक 2,901.7 अरब रुपये के स्तर पर पहुंचने की संभावना है. विजिटर एक्सपोर्ट यानी विदेशी पर्यटकों द्वारा यात्रा पर किया जाने वाला खर्च यात्रा और पर्यटन में प्रत्यक्ष योगदान का महत्वपूर्ण घटक है. 2016 में भारत को विजिटर एक्सपोर्ट से 529.3 अरब रुपये की आमदनी हुई. 2017 में इसके 5.4 प्रतिशत की दर से बढऩे और देश में 9,450,000 विदेशी पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है. अनुमान है कि यात्रा और पर्यटन ने 2016 में 2,284.9 अरब रुपये के पूंजीगत निवेश को आकृष्ट किया. 2017 में इस तरह के निवेश में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि होने और अगले 10 वर्षों में 5.7 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढक़र 2027 तक 4,249.0 अरब रुपये के स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है. 
प्रभा नेगी स्वतंत्र पत्रकार हैं. ई-मेल: prabha1102@gmial.com और अंत्रिक्षा नेगी वीआईपीएस, पीतमपुरा, नई दिल्ली (गुरु गोबिन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय) में सहायक प्राध्यापक हैं. ई-मेल:anti15390@gmail.com