नौकरी फोकस


Volume-15, 14-20 July, 2018

 
मनोविज्ञान में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

अध्ययन के कई विषय और क्षेत्र हैं जिनकी अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं. इनमें से हर एक विषय का जुड़ाव कहीं न कहीं इंसानों से है. लेकिन एक विषय ऐसा है, जो पूरी तरह इंसानों के बारे में है. जी हां, हम बात कर रहें हैं मनोविज्ञान की. मनोविज्ञान को मानविकी का विषय माना जाता है. ये इंसानों के दिमाग से जुड़ा है, जो बताता है कि लोग कैसे सोचते हैं और व्यवहार करते हैं तथा भावनात्मक और सामाजिक रूप से उनका किस तरह विकास होता है.
धरती पर विभिन्न प्रकार के जीव हैं. इनमें से इंसानों को सबसे बुद्धिमान प्रजाति माना जाता है. इसकी झलक इस प्रजाति द्वारा की गई प्रगति से देखने को मिलती है. जिस तरह हर इंसान का रूप-रंग और देखने में वह अलग होता है, उसी तरह लोगों की सोचने की प्रक्रिया और अन्य लोगों के विचार अपनाने का उनका अपना-अपना तरीका होता है.
मनोविज्ञान ये समझाने की कोशिश करता है कि लोग अलग-अलग क्यों सोचते हैं, धारणाएं कैसे बनती हैं और किस तरह से हम बेहतर विचारक हो सकते हैं. अत: आसान शब्दों में मनोविज्ञान का उद्देश्य मानसिक प्रारूपों पर कार्य कर इंसानों की जिंदगी बेहतर बनाना है. इससे समाज में भी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद होती है जिसकी हमेशा से जरूरत रही है.
इंसानों की जिंदगी दिनों-दिन जटिल होती जा रही है. तनाव ज्यादा है, लोगों के सामने अधिक चुनौतियां हैं और जिंदगी के हर क्षेत्र में स्पर्धाएं फैलती जा रही हैं. इस स्थिति में मनोवैज्ञानिकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. मनोवैज्ञानिक लोगों को तनाव कम करने, ट्रॉमा, मानसिक कठिनाईयों और विकारों से जूझ रहे लोगों की मदद करते हैं. वे व्यक्तिगत रूप से या समूह में लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के वास्तविक कारण जानते हैं और संभावित समाधान देते हैं. अगर इस विवरण से आपको रूचि पैदा हुई है और आप ऐसे ही समाधानदाता बनना चाहते हैं तो मनोविज्ञान को कॅरिअर के रूप में अपनाने पर विचार करें.
मनोविज्ञान का अध्ययन
मनोविज्ञान के बुनियादी तत्व सीखने के लिए इसका 10+2 में विषय के रूप में अध्ययन किया जा सकता है. इसका गहराई से अध्ययन करने के लिए आपको स्नातक स्तर पर ये विषय पढऩा होगा. आप शिक्षा संस्थान में उपलब्ध पाठ्यक्रम के अनुसार मनोविज्ञान में बीए ऑनर्स, बीए या बीएससी चुन सकते हैं, हांलाकि मजबूत कॅरिअर के लिए स्नातकोत्तर ( एमए, एमएससी) वांछित योग्यता है. इस स्तर पर विशेषज्ञता के अवसर उपलब्ध होते हैं.
मनोविज्ञान विषय की कई शाखाएं हैं और आप अपनी पसंद से किसी भी शाखा में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
संज्ञानात्मक मनोविज्ञान
संज्ञानात्मक मनोविज्ञान इंसानी मस्तिष्क की धारणा और समस्या सुलझाने की उसकी क्षमताओं से जुड़ा है. इसके अंतर्गत विचार करने की प्रक्रिया समझने, विचारों का विकास और स्मृति की आदतों को समझने का प्रयास होता है. इस शाखा का शैक्षिक, सामाजिक और औद्योगिक मनोविज्ञान जैसी अन्य सभी शाखाओं से गहरा संबंध है.
विकासात्मक मनोविज्ञान
हम जैसे-जैसे  बड़े होते हैं, विचार करने की हमारी प्रक्रियाओं और चीजों को देखने के नजरिए में बदलाव आता है. विकासात्मक मनोविज्ञान बचपन से किशोरावस्था और फिर वृद्धावस्था तक हो रहे ऐसे बदलावों का अध्ययन करता है. ये ऐसे बदलावों के संभावित प्रभाव पर भी ध्यान देता है. लोगों के मनोविज्ञान से जुड़े सूक्ष्म और वृहद मुद्दों का अध्ययन इस शाखा के अंतर्गत किया जाता है.
शैक्षिक मनोविज्ञान
इसके अंतर्गत इस बात का अध्ययन किया जाता है कि मानव शैक्षिक माहौल में  किस तरह सोचते और व्यवहार करते हैं और शिक्षा ग्रहण करने के मामले में वे अभिप्रेरण, बुद्धिमत्ता और स्वधारणा में कैसे भेद करते हैं. इस शाखा के अंतर्गत आप बाल और प्रौढ़ शिक्षण के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन कर सकते हैं. सीखने में विकृतियों जैसे विषयों का अध्ययन भी इसी शाखा में किया जाता है. इसमें आकलन विधियों, कक्षा प्रबंधन और सीखने के परिणाम सुधारने के तरीके शामिल हैं.
संगठनात्मक - औद्योगिक मनोविज्ञान
संगठनों और उद्योगों में लोग तय लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करते  हैं. लोगों का कार्यनिष्पादन उनके कौशल और उद्देश्यों पर
निर्भर करता है. प्रदर्षन पर कार्यस्थल के माहौल का भी प्रभाव पड़ता है। मनोविज्ञान की इस शाखा में कार्यस्थल पर काम करने योग्य माहौल बनाने, कार्यबल का अभिप्रेरणा का स्तर बढ़ाने और नौकरी में संतोष बढ़ाने के उपायों को पढ़ा जा सकता है. कई साक्षात्कार समितियों में इसी शाखा के विषेषज्ञ होते हैं.
क्लीनिकल मनोविज्ञान
मनोविज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण शाखाओं में से एक, क्लीनिकल मनोविज्ञान में थ्योरी अनुसंधान और क्लीनिकल विषेशज्ञता शामिल है ताकि मनोवैज्ञानिक संबंधी परेशानियों से उत्पन्न होने वाले कष्टों और पीड़ाओं से ग्रस्त लोगों को बेहतर तरीके से समझा जा सके, उनसे रोकथाम और राहत मिल सके. फिजिय़ोथेरेपी की क्लीनिकल मनोविज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका है.
सामाजिक मनोविज्ञान
सामाजिक मनोविज्ञान में सामाजिक माहौल और लोगों की उपस्थिति में हमारे व्यवहार के बारे में अध्ययन किया जा सकता है. इसमें उन परिस्थितियों में पढ़ा जा सकता है जिसमें हमारे कुछ खास तरह के विचार, भाव और व्यवहार होता है. इसमें सामाजिक प्रभाव, समूह/पारस्परिक-निजी प्रक्रियाओं और आवेश, पूर्वाग्रह जैसे लक्ष्णों से जुडे पहलु शामिल हैं.
खेल मनोविज्ञान
मनोविज्ञान की यह शाखा कुछ दशकों पहले ही विकसित हुई है. इसमें कई विषय सम्मिलित हैं जिनमें फिसियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स और मनोविज्ञान के कारक हैं. हम जानते हैं कि खेल में जीतने के लिए सिर्फ  शारीरिक तंदुरूस्ती होना ही ज़रूरी नहीं है. बेहतर प्रदर्शन के लिए मानसिक रूप से भी मजबूती ज़रूरी होती है. सर्वश्रेष्ठ प्रर्दशन देने और उसे कायम रखने के लिए सही सोच भी ज़रूरी होती है. खेल मनोविज्ञान का मुख्य उद्देश्य मानसिक तौर पर लचीलापन लाना है. अनेक मामलों में खेल टीमों के साथ खेल मनोवैज्ञानिक भी होते हैं.
मनोरोग चिकित्सा और मनोविज्ञान कैसे अलग हैं?
अनेक मामलों में मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा का परस्पर इस्तेमाल होता है, जो सही नहीं है. मनोविज्ञान सामाजिक विज्ञान है, जबकि मनोरोग चिकित्सा, चिकित्सा विज्ञान है. अगर आप चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे हैं, तो मनोरोग चिकित्सा आपकी विशेषज्ञता हो सकती है. मनोरोग चिकित्सक दवाओं के बारे में बताता है. मनोवैज्ञानिक संज्ञानात्मक और व्यावहारिक परेशानियों के मामले में फिजिय़ोथेरेपी के बारे में बताते हैं. मनोरोग चिकित्सक, चिकित्सक   होते हैं, जिन्हें आकलन, जांच करने, उपचार और मानसिक रोगों की रोकथाम का विशेष प्रशिक्षण होता है. मनोवैज्ञानिक को जरूरत लगने पर  मरीज़ों को मनोरोग चिकित्सक के पास भेजते हैं. कुछ मामलों में मानसिक रोगियों के उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों को एक साथ काम करना होता है. मनोरोग चिकित्सक बनने के लिए काफी लम्बी अवधि के लिए अध्ययन करना होता है जो कि मेडिकल पाठ्यक्रमों की अवधि से स्पष्ट है. यह दोनों पेशे अलग हैं, लेकिन मनोरोग चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक मानसिक स्वास्थ्य उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
किन संस्थानों में अध्ययन किया जा सकता है?
देश का पहला मनोविज्ञान विभाग कलकत्ता विश्वविद्यालय में स्थापित हुआ था. यह वर्ष 1915 में स्थापित किया गया था. उसके बाद हमने काफी लम्बा रास्ता तय किया है और आज देश के लगभग हर विश्वविद्यालय मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं. इनमें से कुछ जाने-माने विश्वविद्यालय हैं -
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
दिल्ली विश्वविद्यालय
पूणे विश्वविद्यालय
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
महाराष्ट्र विश्वविद्यालय
सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा
मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर
गुरुनानक विश्वविद्यालय, अमृतसर
उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नै
हैदराबाद विश्वविद्यालय
बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल
बैंगलोर विश्वविद्यालय
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
पांडिचेरी विश्वविद्यालय
विश्वभारती, शांतिनिकेतन
पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय
डॉक्टर हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली
नॉर्थ ईस्टर्न हिल विश्वविद्यालय, शिलांग
पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय, रायपुर
राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद
कालीकट विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय से मान्यताप्राप्त कई कॉलेज स्नातकोत्तर मनोविज्ञान पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराते हैं.
पिछले कुछ वर्षों में देश में निजी और मानद (डीम्ड) विश्वविद्यालयों की बाढ़ सी आई है. इनमें से कई मनोविज्ञान में स्नात्तकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हैं. यहां आपको विश्वविद्यालय के चयन में समझ-बूझ से काम लेना होगा. विश्वविद्यालय का चयन संस्थान की प्रतिष्ठा पर आधारित होना चाहिए. यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दी जा रही डिग्री विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यताप्राप्त हो.
अगर कोई निजी विश्वविद्यालय भारी-भरकम फीस मांगता है तो आप उस पर ध्यान न दें, क्योंकि वैसा ही पाठ्यक्रम में किसी अन्य अच्छे संस्थान में कम दाम में भी उपलब्ध हो. मनोविज्ञान पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए स्पर्धा, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी से जुड़े पाठ्यक्रमों की तरह जोरदार नहीं होती. इसका मतलब यह नहीं है कि मनोविज्ञान में योग्यता हासिल करने का कम महत्व है।
राजस्थान में बनस्थली विद्यापीठ (महिलाओं के लिए मानद (डीम्ड) विश्वविद्यालय) और मनिपाल उच्चतर शिक्षा अकादमी मनोविज्ञान के पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाले सबसे पुराने निजी शिक्षा संस्थानों में हैं.
विशेषज्ञता प्राप्त संस्थान
बेंगलुरु में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान और रांची में केंद्रीय मनोरोग चिकित्सा संस्थान मनोविज्ञान और मनोरोग चिकित्सा से जुड़े विषयों में उच्च शिक्षा और अनुसंधान उपलब्ध कराने वाले जाने-माने संस्थानों में हैं.
अनुसंधान अवसर
मनोविज्ञान अनुसंधानोन्मुख विषय है, जिसमें उच्च शिक्षा और अनुसंधान की अपार गुंजाइश है. यह अवसर देश और विदेश के विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञता प्राप्त संस्थानों में उपलब्ध होते हैं. पीएचडी करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शर्तों को पूरा करना होता है. अनुसंधान मनोवैज्ञानिक अध्ययन करने, आंकड़े इकट्ठा करने, परिणामों की जांच में वैज्ञानिक विधियों का इस्तेमाल करते हैं और फिर अपना अनुसंधान अपने अनुसंधान थिसिस/पत्र में देते हैं.
संयुक्त योग्यताएं
मानव संसाधन प्रबंधन/ विकास (बीबीए, एमबीए, मानव संसाधन में विशेषज्ञता के साथ), सामाजिक कार्य (सामाजिक कार्य में स्नात्तक/स्नात्तकोत्तर) शिक्षा (शिक्षा में स्नात्तक/स्नातकोत्तर) ऐसे कुछ पाठ्यक्रम हैं जो मनोविज्ञान से जुड़े हैं. इसका मतलब यह है कि अगर कोई मनोविज्ञान में स्नात्तक है तो वह एमबीए (मानव संसाधन), एमएसडब्ल्यू आदि जैसे पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकता है. और अगर किसी के पास एम.एड/ एम.एस.डब्ल्यू  आदि जैसी डिग्री है तो वह मनोविज्ञान में पीएचडी कर सकता है. यह केवल उदाहरण हैं और इस मामले में निर्णय आपकी रूचि, संसाधनों और उपलब्ध समय के अनुसार लिया जाना चाहिए.
कॅरिअर के अवसर
मनोवैज्ञानिक के रूप में आपको शिक्षा संस्थानों (स्कूलों/ कॉलेजों/ विश्वविद्यालयों/ प्रबंधन/ इंजीनियरिंग संस्थानों आदि), अस्पतालों स्वास्थ्य क्लीनिक किशोर गृह, गैर सरकारी संगठनों, विज्ञापन एजेंसियों, पुनर्वास केंद्रों, एचआर कनसल्टेंसी, आपदा प्रबंधन संस्थानों आदि में काम करने का अवसर मिल सकता है. शिक्षण के क्षेत्र में भी व्यापक अवसर हैं.
खुद का काम करना
मनोविज्ञान में उच्च योग्यता हासिल करने और संभवत: कुछ अनुभव भी लेने से आप अपना खुद का काम या घर से भी काम कर सकते  हैं. बहुत कम विषयों में ऐसे अवसर मिलते हैं. अगर आपकी विशेषज्ञता क्लीनिकल मनोविज्ञान में हैं तो आप मानसिक विकृतियों , ट्रॉमा, अवसाद आदि के शिकार लोगों का इलाज कर सकते हैं. अन्य मनोवैज्ञानिक पारिवारिक सलाहकर्ता, विवाह सलाहकर्ता, कॅरिअर काउंसलर आदि जैसे काम कर सकते हैं. निष्ठा और पेशेवर ईमानदारी से काम करने पर आप अपना नाम बनाने के साथ-साथ अपनी पहुंच भी बढ़ा सकते हैं. आप स्कूलों, कॉलेजों, वृद्धाश्रम, विज्ञापन/ विपणन अनुसंधान एजेंसियों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों और संगठनों में फ्रीलांसर के रूप में भी काम कर सकते हैं.
सफलता के लिए क्या करें
मनोविज्ञान में सफल कॅरिअर बनाने के लिए आपको गहराई से अवलोकन करना, लोगों की मदद करने की तत्परता, मजबूत संचार कौशल, विश्लेषण क्षमता, धैर्य होना चाहिए. लोगों के प्रति मूलभूत संवेदनशीलता होने के साथ-साथ आपके दृष्टिकोण में नैतिकता होनी चाहिए. यह सभी हुनर और विशेषताएं सकारात्मक और समर्पित प्रयासों से संभव हैं.
मनोविज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपको लोगों की मदद करने पर संतुष्टि मिलती है, ताकि वे अच्छी, संतुलित और शांतिपूर्ण जिंदगी जी सकें तथा अपनी मानसिक कठिनाईयों को दूर कर सकें और लोगों की सामाजिक, पारिवारिक और कार्यस्थल पर संबंधों को सुदृढ़ कर सकें. अगर इस विषय में आपको वास्तव में रुचि है, तभी आप मनोविज्ञान में कॅरिअर और काम का मजा उठा सकते हैं. हालांकि मनोविज्ञान में स्नात्तक की योग्यता हासिल करने पर आपको बैंकिंग, सिविल सेवा आदि जैसी अन्य नौकरियों के विकल्प भी उपलब्ध हैं.
(लेखक - मुंबई में कॅरिअर काउंसलर है) ईमेल: v2j25@ yahoo.in यह लेखक के निजी विचार हैं.