नौकरी फोकस


Volume-16, 21-27 July, 2018

 

भारतीय रिजर्व बैंक में कॅरिअर के अवसर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

बैंक, विश्व में सर्वत्र सबसे अधिक वांछित वित्तीय सेवा प्रदाता हैं. भारत जैसे विकासशील देश में जहां साक्षर कम हैं और वित्तीय साक्षरता अभी भी कम है, बैंक आम व्यक्ति की बचत के संघटन और जरूरतमंद लोगों को क्रेडिट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लोगों, विशेषरूप से दूरवर्ती क्षेत्रों और ग्रामीण स्थानों के व्यक्तियों में बैंकिंग संव्यवहार की आदतें डालने के लिए चलाई गई जनधन योजना तथा कई अन्य योजनाओं के बाद देश में बहुत कम व्यक्ति अब ऐसे हैं जिनकी बैंक सेवाओं तक पहुंच नहीं है. हमारी अधिकांश जनसंख्या बैंकिंग के दायरे में आ गयी है. वेतन, मजदूरी, आर्थिक सहायता, छात्रवृत्तियों तथा प्रोत्साहन राशि आदि के भुगतान के लिए अब बैंक खातों का व्यापक रूप में उपयोग किया जाता है. चूंकि बैंक जनता की धन-राशि से जुड़े कार्य करते हैं इसलिए स्टेक होल्डरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंकों की कार्य पद्वति को विनियमित करने की आवश्यकता आवश्यक समझी जाती है. अधिकांश देशों में ऐसे विनियमन की जिम्मेदारी सेंट्रल बैंक नामक एक निकाय को सौंपी जाती है. हमारे देश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सेंट्रल बैंक और बैंकिंग विनियामक है.

भारत में आरबीआई की स्थापना १ अप्रैल, १९३५ को की गयी थी. बैंक की स्थापना मुख्य रूप से बैंक नोट्स जारी करने के कार्य को विनियमित करने, आर्थिक स्थायित्व सुनिश्चित करने हेतु रिजर्व रखने और देश की क्रेडिट तथा मुद्रा प्रणाली के प्रचालन के लिए की गयी थी. समय के साथ-साथ आरबीआई की भूमिका एक व्यापक सीमा के साथ बढ़ती गयी. देश के एक  विनियामक केंद्रीय बैंक के रूप में, यह बैंकों को आवश्यक समर्थन एवं मार्गदर्शन देता है, बैंकिंग कार्यों की ऑडिट करता है और सुनिश्चित करता है कि हमारे बैंक श्रेष्ठ कार्य-प्रक्रियाओं का अनुपालन करतें हैं और ग्राहक बेहतर सेवाएं प्राप्त करते हैं :

आरबीआई की भूमिका

आरबीआई को हमारे देश की अर्थव्यवस्था में एक व्यापक भूमिका निभाने का कार्य सौंपा गया है. इसे यह भी सुनिश्चित करना है कि देश की अर्थव्यवस्था के बाहरी विश्व के कार्य-संपर्क में आने पर इसके हितों की भी रक्षा की जाती है. देश में आर्थिक प्रणाली के एक पर्यवेक्षकीय प्राधिकरण के रूप में, आरबीआई  बैंकों तथा अन्य  विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के सुचारू कार्य संचालन के लिए आवश्यक विनियम निर्धारित करता है. ये विनियम उपयुक्त कार्य-प्रक्रियाओं, जोखिम प्रबंधन, कार्पोरेट अभिशासन, प्रकटन आदि से जुड़े हो सकते हैं. बैंक की वेबसाइट पर सूचीबद्ध अन्य भूमिकाओं में कुशल भुगतान तथा निपटान प्रणाली का विकास करना, आर्थिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करना-जिसमें मुद्रा जारी करना, विदेशी मुद्रा आवागमन का रखरखाव एवं विनियमन, सरकार तथा बैंकों के लिए बैंकर्स के रूप में कार्य करना शामिल है. यह आर्थिक प्रवृत्तियों पर भी निगरानी रखता है तथा माइक्रो एवं मेक्रो आर्थिक संकेतकों के संबंध में संबंधित पूर्वानुमान भी लगाता है.

आरबीआई का मुख्यालय मुंबई में है. इसके २७ क्षेत्रीय कार्यालय हैं जो अधिकांशत: राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं. इसके ४ उप कार्यालय भी हैं. केंद्रीय बैंक ने मुंबई में उच्च वित्तीय अनुसंधान तथा अध्ययन केंद्र और पुणे में कृषि बैंकिंग कॉलेज जैसी ज्ञान-संस्थाएं स्थापित की हैं. इसने पुणे, मुंबई तथा हैदराबाद में क्रमश: राष्ट्रीय बैंक प्रबंधन संस्थान, इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान और बैंकिंग प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान संस्थान को भी प्रोत्साहन दिया है. बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों में डिपॉजिट इंश्योरेंश एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड और नेशनल हाउसिंग बैंक शामिल हैं.

रिजर्व बैंक विभिन्न अधिनियमों को प्रशासित करता है. इनमें से कुछ अधिनियम इस प्रकार हैं : बैंकिंग विनियमन अधिनियम, १९४९, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, १९३४, राजकीय प्रतिभूति अधिनियम, २००६, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, १९९९, क्रेडिट सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम, २००५, भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, २००७.

आरबीआई के अनेक विभाग हैं जिन्हें विशिष्ट कार्य सौंपे जातेे हैं. इनमें कुछ प्रमुख विभाग इस प्रकार हैं :  बैंकिंग विनियमन, बैंकिंग पर्यवेक्षण, आर्थिक नीति, जोखिम प्रबंधन, वित्तीय समावेशन एवं विकास, वित्तीय बाजार प्रचालन, विदेशी मुद्रा, आंतरिक ऋण प्रबंधन, भुगतान एवं निपटान प्रणाली, सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन, उपभोक्ता शिक्षा एवं परिरक्षण, मुद्रा प्रबंधन, आर्थिक एवं नीति अनुसंधान, सरकारी एवं बैंक खाते आदि. आरबीआई के अधीन बैंकिंग प्रशासनिक शिकायत जांच अधिकारी बैंकों द्वारा सेवाओं में कमियों के मामलों की जांच करते हैं. एक केंद्रीय बैंक के रूप में, आरबीआई वित्त मंत्रालय एवं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, नीति आयोग जैसे निकायों और कुछ अन्य संस्थाओं के सहयोग से कार्य करता है.

एक गवर्नर तथा डिप्टी गवर्नर्स का एक दल आरबीआई का नेतृत्व करते हैं, जिनकी नियुक्ति भारत सरकार करती है. आरबीआई में अधिकारियों, सहायकों (लिपिकीय पद) और कार्यालय अटैंडेंट (श्रेणी -IV पद) के संवर्गों में सीधी भर्ती की जाती है. रिक्तियां बैंक की आवश्यकता के अनुसार विज्ञापित की जाती हैं और भर्ती प्रक्रिया बैंक द्वारा स्वयं संचालित की जाती है. यह नोट करने योग्य है कि बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) द्वारा संचालित प्रक्रिया में आरबीआई की रिक्तियां शामिल नहीं की जाती हैं.

निम्नलिखित पद आरबीआई में कॅरिअर बनाने के अवसर देते हैं :

कार्यालय अटैंडेंट : इस पद के लिए उम्मीदवार दसवीं कक्षा (मैट्रिकुलेशन) उत्तीर्ण होना चाहिए और उसकी आयु १८ से २५ वर्ष के आयु समूह में होनी चाहिए. पात्र उम्मीदवारों को एक ऑनलाइन परीक्षा में उपस्थित होना होता है, जिसमें सामान्य अंग्रेजी, सामान्य जागरूकता, संख्यात्मक क्षमता तथा तर्क-संगतता विषय शामिल होते हैं. उम्मीदवारों के निष्पादन एवं रिक्तियों की संख्या के आधार पर एक मैरिट सूची बनाई जाती है. इस सूची में शामिल उम्मीदवारों को एक भाषा दक्षता परीक्षा में उपस्थित होना होता है. कार्यालय अटैंडेंट के पदों की रिक्तियां राज्यवार वर्गीकृत की जाती हैं और दक्षता परीक्षा संबंधित राज्य की भाषा के लिए ली जाती है. इस तरह यदि उम्मीदवार उड़ीसा की रिक्तियों के लिए आवेदन करता है तो उसे ओडिय़ा भाषा की परीक्षा में बैठना होगा.

सहायक : २० से २८ वर्ष की आयु-समूह के उम्मीदवार सहायक के पद के लिए आवेदन करने हेतु पात्र माने जाते हैं. पद हेतु शैक्षिक योग्यता न्यूनतम ५०% अंकों के साथ स्नातक डिग्री के रूप में निर्धारित है. कम्प्यूटर पर वर्ड प्रोसेसिंग का ज्ञान होना एक अन्य अपेक्षा है. पद के लिए चयन-प्रक्रिया तीन चरणों में की जाती है. प्रथम चरण एक ऑनलाइन प्रांरभिक परीक्षा का होता है  जिसमें तीन क्षेत्र होते हैं अर्थात अंग्रेजी भाषा, संख्यात्मक क्षमता और तर्क-क्षमता. प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा में बैठना होता है, जिसमें तर्कसंगतता, अंग्रेजी भाषा, संख्यात्मक क्षमता, सामान्य जागरूकता और कम्प्यूटर ज्ञान की परीक्षा शामिल होती है.  इस के बाद भाषा दक्षता परीक्षा ली जाती है क्योंकि सहायक के पद भी राज्यवार सूचीबद्ध किए जाते हैं.

नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार कार्यालय अटैंडेंट और सहायक पदों के लिए कोई साक्षात्कार संचालित नहीं किया जाता है.

अधिकारी : आर.बी.आई. में अधिकारी संवर्ग में अधिकांश रिक्तियां ग्रेड-बी अधिकारी-पदों की होती हैं जिन्हें सामान्यत: प्रबंधक के रूप में पदनामित किया है. इसमें सामान्य तथा विशेषज्ञ-दानों पदों  के अवसर उपलब्ध होते हैं, जो उम्मीदवार की योग्यता पर निर्भर होते हैं. ग्रेड-बी के सामान्य पदों हेतु उम्मीदवार न्यूनतम ६०त्न अकों के साथ स्नातक  होना चाहिए और उसने दसवीं तथा १०+२ परीक्षा न्यूनतम ६०त्न  के साथ उत्तीर्ण की हो. निर्धारित आयु-समूह २१ से ३० वर्ष है.  विशेषज्ञ पदों के लिए अर्थशास्त्र/ इकोनॉमीट्रिक्स/गुणात्मक अर्थशास्त्र/ गणितीय अर्थशास्त्र/एकीकृत अर्थशास्त्र/ वित्त/सांख्यिकी/गणितीय सांख्यिकी में न्यूनतम ५५त्न अंकों की मास्टर डिग्री होनी चाहिए. इन क्षेत्रों में एम.फिल./पी.एच.डी. धारी उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है और वे आयु में २/४ वर्ष की सीमा तक छूट के पात्र होते हैं. विशेषज्ञ के ये पद अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान विभाग और सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन विभाग के लिए होते हैं.

सामान्य पदों के लिए उम्मीदवार को पहले एक ऑनलाइन परीक्षा के चरण-ढ्ढ में बैठना होता हे, जिसमें सामान्य जागरूकता, अंग्रेजी भाषा, मात्रात्मक अभिरुचि और तर्कसंगतता से संबंधित प्रश्न होते है. इसमें उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार को चरण-II परीक्षा में उपस्थित होना होता है, जिसमें तीन प्रश्न -पत्र-अर्थशास्त्र एवं साामजिक मुद्दे, वित्त एवं प्रबंधन तथा अंग्रेजी (लेखन-कौशल) होते हैं. अंग्रेजी प्रश्न-पत्र को छोडक़र अन्य दोनों प्रश्न-पत्र ऑबजेक्टिव प्रकृति के प्रश्नों वाले होते हैं. विशेषज्ञ पदों के लिए उम्मीदवारों को तीन प्रश्न-पत्रों में बैठना होता है. प्रश्न-I अर्थशास्त्र/ सांख्यिकी से संबंधित ऑब्जेक्टिव प्रकृति के प्रश्नों वाले होते हैं. जबकि प्रश्न-पत्र-IIमें अर्थशास्त्र/ सांख्यिकी से विषयनिष्ठ प्रश्न होते हैं. अंग्रेजी के तीसरे प्रश्न-पत्र में विवरणात्मक उत्तरों की अपेक्षा वाले प्रश्न होते हैं. अर्थशास्त्र/सांख्यिकी वाले प्रश्न-पत्रों का स्तर देश में किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय की मास्टर डिग्री परीक्षा के स्तर का होता है. अंग्रेजी का प्रश्न-पत्र उम्मीदवार के निबंध लेखन, सार लेखन, कम्प्रिहेंसन तथा व्यवसाय/ कार्यालय पत्राचार कौशल की जांच के लिए बनाया जाता है.

अल्पसूचीबद्ध उम्मीदवारों को साक्षात्कार में उपस्थित होना होता है, जो चयन-प्रक्रिया का अंतिम भाग होता है.

अन्य पद : कई बार आर.बी.आई. को अन्य विशेषज्ञता वाली जन शक्ति की आवश्यकता होती है. इन पदों के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं :-

सुरक्षा अधिकारी, राजभाषा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, विधि अधिकारी/सलाहकार आदि विगत में आर.बी.आई. ने पी.एच.डी. धारियों की ग्रेड-बी. अधिकारियों के रूप में सीधी भर्ती की है.

 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में आर.बी.आई. में रिक्तियों की संख्या कम है. प्रतिस्पर्धा कड़ी होती है, इसलिए सफल उम्मीदवारों की सूची में आने के लिए उम्मीदवारों को कड़ी मेेहनत करनी होती है. इसमें पंहुचने के बाद आप कुछ ऐसे गौरवान्वित व्यक्तियों में शामिल होते हैं जिन्हें देश के केन्द्रीय बैंक और बैंकों के विनियामक निकाय के साथ कार्य करने का अवसर मिलता है. आर.बी.आई. अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा विकास पर पर्याप्त निवेश करता है और उन्हें उन्नति के अच्छे अवसर देता है. अपनी संभावना शक्ति एवं कार्य -निष्पादन के आधार पर अधिकारी सहायक महाप्रबंधक, उप महाप्रबंधक और महा प्रबंधक के रूप में पदोन्नति प्राप्त करते हैं. इनमें से कुछ अधिकारी कार्यपालक निदेशक और डिप्टी गवर्नर के पदों पर भी पंहुचते हैं. शैक्षिक ओरिएंटेशन वाले उम्मीदवारों को बैंक की प्रशिक्षण संस्थापनाओं में संकाय के रूप में कार्य करने का अवसर मिलता है. आर.बी.आई. अधिकारियों के कुछ ऐसे उदाहरण भी हैं जो विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मॉनीटरी फंड, एशियन डेवलपमेंट बैंक, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय/विश्व संगठन तथा अन्य प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थापनाओं में पदासीन हुए हैं.

आर.बी.आई. अपने कर्मचारियों को उत्कृष्ट वेतन पैकेज और विभिन्न अनुलाभ भी देता है. (लेखक मुंबई में एक कॅरिअर काउंसलर हैं). ई-मेल : v2j25@ yahoo.in लेख में व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं.