नौकरी फोकस


Volume-17, 28 July- 3 August, 2018

 
बागवानी के क्षेत्र में
उज्ज्वल भविष्य

उषा अल्बुकर्क एवं
निधि प्रसाद

कॅरिअर ओवरव्यू
*क्या आप ऐसे व्यक्ति हैं जो उद्यान के शौकिन हैं और अपने उद्यान को सभी विदेशी पौधों, फूलों, बेल-बूटों और पेड़ों  से सजाने का सपना देखते हैं?
*आपने इस तथ्य के बारे में कितनी बार सोचा है कि हमारे शहर में पर्याप्त हरियाली नहीं है ?
*क्या आपको लगता है कि आप पौधों पर घंटों खर्च कर सकते हैं ताकि वह ठीक से फल-फूल सकें?
*क्या आप कभी मुरझाए हुए पौधों को जीवन देने के लिए अपने घर लाए हैं और महीनों में उन्हें पुन: विकसित होते हुए देखा है?
यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने जीवन में पौधों की भूमिका की सराहना करते हैं तो बागवानी में कॅरिअर आपके लिए सही विकल्प  हो सकता है. आजकल बागवानी, कृषि में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक माना जाता है और घरेलू पोषण की तेजी से बदलती खाद्य आदतों और अधिक पौष्टिक भोजन और विदेशी मांग में वृद्धि के कारण यह क्षेत्र कृषि विकास को उत्साहित करने हेतु एक फोकस क्षेत्र है.
बागवानी कृषि का एक व्यापक उप समूह है जो फूलों, पौधों, सब्जियों और फलों से संबंधित है. बागवानी सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पौधों के उपयोग, भोजन और अन्य मानव उद्देश्यों के साथ-साथ पर्यावरण और व्यक्तिगत सौंदर्य ज्ञान को बेहतर बनाता है.
भारत, अपने विभिन्न कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों समेत अपनी विविध मिट्टी और जलवायु के साथ, विभिन्न बागवानी फसलों को विकसित  करने का अवसर प्रदान करता है.  ये फसलें देश में कुल कृषि उपज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसमें फल, सब्जिया, जड़ें और कंद-फसल, फूल, सजावटी पौधे,  औषधीय और सुगंधित पौधे, मसाले, वृक्षारोपण फसल और मशरूम शामिल हैं.
बागवानी फसल ग्रामीण लोगों की आयु में सुधार लाकर भारत की अर्थव्यवस्था में एक अद्वितीय भूमिका निभाती है. हाईटेक ग्रीन हाउस देसी अनुसंधान एवं मंदी-समय (ऑफ सीजन) कृषि ने इस क्षेत्र में तीव्र विकास की प्रवृत्ति प्रारंभ की है जो भारत को विश्व के सबसे बड़े फल एवं सब्जी उत्पादकों में खड़ा करती है.
बागवानी क्या है?
इस शब्द को लैटीन में दो शब्दों में विभाजित किया जा सकता है : हॉट्स जिसका अर्थ है-बाग और टिलिंग जिसका अर्थ है-कृषि. बागवानी बढ़ते पौधों फलों, सब्जियों, फूल इत्यादि का विज्ञान और कला है. इसमें पौधों का संरक्षण, भूदृश्य, बहाली, मिट्टी प्रबंधन, भूदृश्य और उद्यान डिजाइन, निर्माण और रखरखाव, और आर्बोरिकल्चर भी शामिल है. उद्यान वैज्ञानिक व्यक्तिगत तथा सामाजिक जरूरतों के लिए पौधों के व्यापक विकास के लिए, अपने कौशल, ज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं. उनका मुख्य उद्देश्य पौधों की वृद्धि, फसल पोषण, मूल्य, गुणवत्ता और कीड़ों और रोगों से प्रतिरोध में सुधार करना है. उद्यान वैज्ञानिक बागवानी के क्षेत्र में गार्डनर, डिजाइनर और तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं.
बागवानी में मूल रूप से कार्य के दो क्षेत्र शामिल हैं :
वाणिज्यिक बागवानी में कच्चे माल और प्रसंस्करण उद्देश्यों-दोनों की बिक्री के लिए फलों के उद्यानों और बागानों में बढ़ते फल और सब्जियां शामिल हैं. बागवानी विशेषज्ञ इंटर ब्रीडिंग द्वारा विदेशी और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे भी उगाते हैं जिन्हें वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए बड़े पैमाने पर विकसित किया जाता है.
एमनिटी-बागवानी में उद्यान को सुखद पर्यावरण में ढालना और बनाए रखना शामिल है.
बागवानी के पांच विशिष्ट विषय हैं:
*पुष्प उत्पादन-पुष्पोत्पादन फूलों के उत्पादन और विपणन से संबंधित है.
*भू-दृश्य बागवानी- भू-दृश्य बागवानी सजावट वाले भू-दृश्य क्षेत्रों के लिए पौधों का उत्पादन, विपणन और रख-रखाव करने के बारे में है.
*ओलेरीकल्चर सब्जियों की खेती के बारे में है.
*पोमोलॉजी फल उत्पादन से संबंधित है.
*फसलोत्तर शरीर विज्ञान-अंत में, फसलोत्तर शरीर विज्ञानी सब्जियों और फलों को खराब होने से रोकने के लिए किराने की दुकानें किराए पर लेते हैं. वे भी बागवानी विज्ञानी होते हैं.
इस कॅरिअर में व्यापक रूप से निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:
उत्पादन- जिस में मुख्य रूप से किसानों द्वारा कच्चे फलों, सब्जियों और फूलों की खेती शामिल है. तथापि अनेक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं थोक संगठनों द्वारा कृषि  के क्षेत्र में आगमन से अब फूलों, सब्जियों और फूलों की खेती तथा विपणन में अधिक वैज्ञानिक एवं प्रबंध कार्य का निवेश होता है.
प्रसंस्करण- इस कार्य-क्षेत्र का एक अन्य पहलु है जिसमें फूलों, फलों और सब्जियों का, प्राकृतिक रूप में या संसाधित खाद्य के रूप में वितरण हेतु रखरखाव के सभी पहलु शामिल हैं. पादप प्रजनन एवं प्रसंस्करण की नई एवं वैज्ञानिक पद्धतियों ने न केवल इन शीघ्र खराब होने वाले पदार्थों की जीवन अवधि बढ़ाई है बल्कि पैकेटबंद या डिब्बाबंद फलों, प्रिजव्र्स, जूस, जैम आदि जैसे रूपों में भी प्रसंस्करण को संभव बनाया है.
मनोहर (एमेनिटी) बागवानी में बागों में सजावट के उद्देश्य वाले फूलों, फूलों वाले पौधों, झाडिय़ों तथा सजावटी पेड़-पौधों की खेती शामिल है. एमनिटी बागवानी में नगर एवं ग्रामीण उद्यानों, पिकनिक क्षेत्रों, गोल्फ कोर्सों का विकास एवं रखरखाव एवं उद्यानों, मैदानों, हॉट-हाउसेस पौधशालाओं तथा अन्य क्षेत्रों के भूदृश्यांकन भी उद्यान विज्ञानियों द्वारा हस्तन किया जाता है.
वैज्ञानिक तकनीकों जैसे टीशू कल्चर, माइक्रोप्रोपेगेशन एवं एम्ब्रियो कल्चर आदि के अनुप्रयोग द्वारा फलों और सब्जियों या फूलों की नई किस्मों का सुधार एवं प्रजनन करने हेतु अनुसंधान उद्यान विज्ञानियों का एक अन्य कार्य क्षेत्र है, यह कार्य सामान्यत: सरकारी निधि प्राप्त अनुसंधान संस्थाओं में किया जाता है, हालांकि निजी क्षेत्र की कंपनियां बागवानी खाद्य एवं पौधों के संसाधन या विपणन के व्यवसाय में अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाएं स्थापित कर रही हैं.
इसके अन्य कार्य-क्षेत्रों में कृषि व्यवसाय संगठनों के साथ प्रबंधन एवं विपणन शामिल है.
पात्रता:
अब वे दिन नहीं रहे जब हम बिना किसी व्यावसायिक योग्यता के, इस क्षेत्र में आसानी से कार्य कर लिया करते थे. यदि आप व्यावसायिक शिखर पर पहुंचना चाहते हैं तो आपको क्षेत्र का अध्ययन करना होगा और जहां तक संभव हो अत्यधिक ज्ञान अर्जित करना होगा.
इस व्यवसाय में आने के लिए उम्मीदवार को पी.सी.बी./पी.सी.एम. के साथ विज्ञान विधा में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होना और उसके बाद 3 वर्ष अवधि की बी.एससी.-बागवानी (ऑनर्स) या बी.एससी.- कृषि एवं तत्पश्चात 2 वर्ष की एम.एस-सी.- बागवानी (ऑनर्स) डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है और यदि अपेक्षित हो तो पी-एच.डी. कर सकते हैं.
बागवानी पाठ्यक्रमों में पादप प्रोपेगेशन, पौध सामग्री, टीशू कल्चर, फसल-उत्पादन, फसलोत्तर हस्तन, पादप प्रजनन, परागण प्रबंधन, फसल पोषण, कीट विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, अर्थशा एवं कृषि व्यवसाय जैसे विषय-क्षेत्र शामिल हैं.
अपेक्षित कौशल:
उद्यानविज्ञानी में निम्नलिखित गुण होने चाहिएं:-
*प्रकृति, पेड़-पौधों में रुचि
*पौध-जीवन के प्रति लगाव
*व्यापक देख-रेख (अवलोकन)
*अत्यधिक धैर्य
*पर्यावरण के प्रति जागरूकता
*वैज्ञानिक प्रवृत्ति
*कठिन स्थितियों में कार्य करने की क्षमता
कार्य भूमिकाएं:-
इस क्षेत्र में किसी डिग्री के साथ कोई भी व्यक्ति निम्नलिखित रूप में कॅरिअर तलाश सकता है:-
*उद्यान थेरापिस्ट
*अनुसंधानकर्ता/उद्यान वैज्ञानिक
*पुष्पोत्पादक (भू पुष्प कृषक)
*वनस्पति उत्पादक (वनस्पति कृषक)
*भू-दृश्य डिजाइनर (व्यावसायिक एवं आवासीय बाग एवं उद्यान डिजाइनिंग एवं रख-रखाव)
*अंगूर उत्पादक (अंगूर कृषक)
*फलोत्पादक (फल कृषक) आदि.
कोई भी व्यक्ति उद्यान वैज्ञानिक के रूप में अनुसंधान क्षेत्र में जा सकता है और कृषि की नई तथा बेहतर पद्धतियों का विकास कर सकता है. उद्यान विज्ञानी औषधीय उद्देश्य के लिए विशेष पौधों की भी खेती करते हैं.
उद्यान विज्ञानियों के लिए निम्नलिखित आवश्यक है:-
*नव प्रवर्तित उत्पादों का विकास एवं ग्राहकों तथा वितरकों का प्रबंधन.
*व्यापार प्रणालियों का प्रबंधन और शीघ्र समाप्त होने वाले उत्पादों की अवसंरचना, भंडारण एवं ढुलाई प्रचालन में सहायता करना.
*उत्पादों की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता मानकों और सिद्धांतों की पूर्ति को सुनिश्चित करना.
*बागवानी क्षेत्र में नए विकास से अवगत रहना.
*स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सिद्धांतों के समान नाशीकीटों, रोग, खरपतवार नियंत्रण कार्यक्रमों का पर्यवेक्षण करना.
*उत्पाद वर्ष भर भिन्न होने के कारण ग्रीन हाउसों में प्रत्यारोपण लाइनों की योजना, प्रबंधन एवं प्रचालन.
*बागवानी कार्यों के उत्पाद, लागत एवं लाभ की जांच करना.
संभावनाएं:-
इस क्षेत्र की बढ़ रही लोकप्रियता के कारण, इस विषय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए रोज़गार के अनेक अवसर हैं. योग्यताप्राप्त उद्यान विज्ञानी उद्योग, सरकारी या शैक्षिक संस्थाओं अथवा निजी संस्थाओं में विभिन्न कार्य-क्षेत्रों में प्रवेश कर सकते हैं. इनके अनेक कार्य-क्षेत्र हंै, जिनमें कृषि व्यवसाय, वनस्पति बाग, संरक्षण, फसल प्रबंधन, पुष्प डिजाइन, खाद्य रसायन विज्ञान, फल एवं सब्जी उत्पादन, बागान केंद्र, ग्रीन हाउस, मैदान प्रबंधन, भू-दृश्य निर्माण एवं प्रबंधन, पौधशाला प्रबंधन और विक्रय, विपणन/जनसम्पर्क, अनुसंधान एवं  विकास, अध्यापन/अनुदेश, तकनीकी लेखन एवं प्रकाशन शामिल हैं.
इनके लिए पैकेजिंग, परिवहन, कोल्ड स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण एककों जैसे सहायक उद्योगों में भी रोजग़ार के अवसर होते हैं.
होलीडे रिजाटर्स, हैल्थ फाम्र्स तथा फार्म हाउसेस में आवासी उद्यान विज्ञानी होते हैं और वास्तु कलात्मक फर्मों में भू-दृश्यांकन से जुड़े अनेक कार्य होते हैं. बागवानी कौशल वाले व्यक्ति कार्यालयों और व्यावसायिक संगठनों में सलाहकार भी बन सकते हैं और उन्हें सजावटी पौधे, गमले में लगे पौधे उपलब्ध कराने, लॉन और उद्यानों  के रखरखाव तथा ताजे फूलों की सप्लाई एवं सजावट से संबंधित कार्यों में सहायता कर सकते हैं.
वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान जैसी संस्थाओं या सरकारी बागवानी विभागों में भी कार्य कर सकते हैं. बीज की गुणवत्ता एवं पैदावार में सुधार की हमेशा आवश्यकता होती है और इसलिए ऐसे साधनों तथा उत्पादों का विकास करने में उद्यान विज्ञानी अन्य व्यवसायियों के सहयोग में कार्य करते हैं.
स्नातकों के लिए सलाहकार या पुष्प सज्जाकार जैसे स्व-रोजगार के अन्य विकल्प हैं. फलों, सब्जियों, फूलों तथा सजावटी पौधों की खेती के लिए अपने निजी फार्म की स्थापना करना या पौधशालाएं चलाना आदि स्व-रोजगार के विभिन्न अवसर भी विद्यमान हैं. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड बागवानी/पुष्पोत्पादन एककों की स्थापना करने हेतु कंपनियों को ऋण उपलब्ध कराता है.
कार्य-क्षेत्र:
*उत्पादन एवं विक्रय: पौधों एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए व्यवसाय चलाना या कृषि योग्य भूमि का प्रबंधन करना.
*सार्वजनिक उद्यान: भू-दृश्यांकन प्रबंधन और पौधों का संकलन पौधों और लोगों दोनों के प्रति लगाव रखने वाले व्यक्तियों के लिए श्रेष्ठ है.
*विपणन: ताजे एवं संसाधित फलों तथा सब्जियों की बिक्री निहित है.
*अध्यापन: स्कूलों और कॉलेजों में तथा ऐसे लोगों को पढ़ाना जो बागवानी के नए दृष्टिकोण सीखना चाहते हैं.
*कृषि इंजीनियरी: यह मृदा तथा जल एवं फार्म अवसंरचनाओं के संरक्षण से संबद्ध है.
*भू-दृश्य डिजाइन, निर्माण एवं प्रबंधन: वांछित सौंदर्य प्रभाव के लिए उद्यान स्थापित करना और उपयुक्त पौधों के उपयोग का ज्ञान अर्जित करना.
*नाशीकीट प्रबंधन: कृषि विशेषज्ञ के रूप में विनियामक एजेंसियों, कृषि उत्पाद वितरकों, प्रसंस्करण निगमों, बड़े फार्म संगठनों के साथ कार्य करना.
उद्यान विज्ञानी निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य कर सकते हैं.
*काजू, चाय और कॉफी बागान
*पौध-रखरखाव ठेकेदार
*फूल एवं फल निर्यातक
*पुष्प प्रबंधन एवं कट-फ्लोवर व्यवसाय
*फल एवं पुष्प पौधरोपण
*सरकारी बागवानी विभाग
*भू-दृश्यांकन फर्म
*बड़ी एवं छोटी पौधशालाएं
*पैकेजिंग, परिवहन, कोल्ड स्टोरेज, खाद्य प्रसंस्करण तथा विनिर्माण उद्योग
*पौधे, बीज, उर्वरक तथा उद्यान उपस्कर बिक्री.
*रिजॉटर्स, स्वास्थ्य फार्म, फार्म हाउस.
संस्थानों की सूची:
बागवानी में बी.एस-सी. चलाने वाले कुछ उच्च संस्थान निम्नलिखित हैं:-
*डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश www.yspuniversity.ac.in
*तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बत्तूर www.tnau.ac.in
*आणंद कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात www.aau.in
*पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना.
*महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, पुणे www.mpkv.ac.in
*आई.जी.एन.ओ.यू. (इग्नू), दिल्ली www.ignou. ac.in
*भा.कृ.अ.प.- केन्द्रीय उपउष्ण-कटिबंधीय बागवानी संस्थान, उत्तर प्रदेश- www.cish. res.in
[उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर स्मार्ट, नई दिल्ली में क्रमश: निदेशक एवं वरिष्ठ परामर्श मनोवैज्ञानिक हैं.] ई-मेल: careerssmartonline @gmail.com