नौकरी फोकस


Volume-23, 8-14 September, 2018


  
आईएएस (मुख्य) परीक्षा 2018
लेखन पद्धति में सुधार कैसे करें

एस. बी. सिंह

सं.लो.से.आ. हर वर्ष लगभग इसी समय (अर्थात सितंबर-अक्तूबर में) आईएएस मुख्य परीक्षा आयोजित करता है जिसमें वैकल्पिक पेपर, चार सामान्य अध्ययन पेपर्स, एक निबंध का पेपर और भाषा संबंधी परीक्षाएं शामिल होती हैं. व्यापक पाठ्यक्रम और विविध क्षेत्रों से जुड़े विषयों को देखते हुए, मुख्य परीक्षा सच में ‘‘आईएएस परीक्षा की जननी’’ होती है. इसके लिये सं.लो.से.आ. परीक्षा की वास्तविक शुरूआत से पहले एक अच्छी रणनीति, अग्रिम तैयारी महीनों तक करना आवश्यक होता है. परीक्षा के तीन स्तरों अर्थात प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में यह परीक्षा मुख्य होती है जिससे आपके वास्तविक रैंक, संवर्ग आबंटन और सेवा की पसंद का संकेत मिलता है क्योंकि मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल 2025 अंकों में से इसके सर्वाधिक 1750 अंक गणना में शामिल होते हैं. अत: बिना कहे ये बात सत्य है कि मुख्य परीक्षा आपकी सफलता में और आपके रैंक तथा संवर्ग आबंटन में एक निर्णायक घटक है. यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि परीक्षा के इस खण्ड को सावधानीपूर्ण विचार तथा विजय की रणनीति के साथ पूरा महत्व दिया जाना चाहिये. मुख्य परीक्षा में दो महत्वपूर्ण कौशलों की जांच की जाती है:
1. ज्ञान संबंधी कौशल: ज्ञान संबंधी कौशल समझ, अनुभव और विवेक के जरिए ज्ञान और समझ अर्जित करने की प्रक्रिया है. ज्ञान को केवल अर्जित कर लेना पर्याप्त नहीं है बल्कि दिये गये संदर्भ में इसका तात्पर्य प्रस्तुत करना भी महत्वपूर्ण होता है. ज्ञान संबंधी कौशल हासिल करने का पहला कदम विभिन्न स्रोतों के जरिए ज्ञान अर्जित करना होता है जिनमें पाठ्य पुस्तकें, संदर्भ पुस्तकें, पत्रिकाएं, समाचार-पत्र आदि शामिल होते हैं. दूसरा कदम अर्जित ज्ञान का अभिप्राय तैयार करने का कौशल हासिल करना होता है. अन्य शब्दों में अर्जित ज्ञान को जैसे का तैसा पुन: प्रस्तुत करना नहीं होता है बल्कि किसी पूछे गये प्रश्न विशेष के तात्पर्य के अनुरूप इसे पुन: ढालना और नयापन प्रदान करना होता है. अत: ज्ञान कौशल में आपकी अपक्व बुद्धिमत्ता के साथ-साथ आपकी परिशोधित बुद्धिमत्ता दोनों की जांच की जायेगी.
ज्ञान संबंधी कौशलों का विकास कैसे करें?
किसी भी उम्मीदवार को सामान्यत: प्रत्येक विषय पर कुछेक लोकप्रिय पुस्तकों पर निर्भर रहने की सलाह दी जाती है जो कि बाज़ार में आसानी से उपलब्ध होती हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये पुस्तकें ज़रूरी होती हैं क्योंकि इनमें बुनियादी सूचना होती है. परंतु केवल कुछेक पुस्तकों तक अपने आपको सीमित कर देने मात्र से यह आपको तैयारी की संकीर्ण गलियों में धकेल देगा. आपको वास्तव में जरूरत है एक चौड़े मार्ग अर्थात तैयारी के राजमार्ग की. इसके लिये आपको कई अन्य स्रोतों से परामर्श लेने की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिये कोई बिपिन चंद्रा द्वारा रचित इतिहास की मौलिक पुस्तक पढ़ सकता है. परंतु यह आधुनिक भारतीय इतिहास पर संपूर्ण जानकारी प्रदान नहीं करेगी. किसी को भी नेहरू जी द्वारा लिखित भारत की खोज जैसी पुस्तकों को पढऩा चाहिये जिनमें भारतीय इतिहास, संस्कृति आदि का सुंदर वर्णन किया गया है. मुख्य परीक्षा का वर्तमान स्वरूप पुराने स्वरूप से काफी भिन्न है क्योंकि इसके लिये ज्ञान के बहुत विविध आधार की आवश्यकता होती है जिसे कुछेक पुस्तकें पढक़र हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि विषय पर प्रामाणिक अध्ययन सामग्रियों का व्यापक अध्ययन आवश्यक होता है.
भाषा संबंधी कौशल:              
इस कौशल के दो पहलु हैं. एक है भाषा पर अच्छी पकड़ और दूसरा है आकर्षक लेखन योग्यता. अन्य शब्दों में भाषा संबंधी कौशलों के मुख्य घटक हैं (क) सारगर्भित, स्पष्ट लेखन, (ख) साधारण, मूल पद्धति, (ग) सुव्यवस्थित पैराग्राफ, (घ) लघु उत्तर लेखन की अच्छी पकड़ (150-160 शब्द)
भाषायी कौशल में पारंगतता के बिना अच्छे अंक हासिल करना असंभव है भले ही आपको विषय की पर्याप्त सूचना और जानकारी क्यों न हो. इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा जाता है: सं.लो.से.आ. के परीक्षक किस तरह का लेखन पसंद करते हैं? अच्छा, इस प्रश्न का कोई आधिकारिक उत्तर उपलब्ध नहीं हो सकता. परंतु अनुभवों से पता चलता है कि एक अच्छा जानकार, शिक्षित परीक्षक अपेक्षा करेगा कि आपका उत्तर सचमुच में उत्तर हो और कोई पाठ्य पुस्तक अथवा पत्रकारिता वाला उत्तर नहीं हो. वे यह जानना चाहते हैं कि आप प्रश्न का उत्तर किस तरह देते हैं न कि पुस्तक अथवा पत्रिका या समाचार पत्र में इसके संबंध में तथ्यों को किस तरह प्रस्तुत किया गया है. इसलिये अपनी स्वयं की पद्धति में लिखने का प्रयास करने के लिये एक अच्छा भाषा ज्ञान कौशल अवश्य हासिल कर लेना चाहिये जो कि निश्चित तौर पर बार बार लिखने के अभ्यास से हासिल किया जा सकता है. आपकी एक अच्छे शिक्षक तक अवश्य पहुंच होनी चाहिये जो कि आपको लेखन कौशल के बारे में उक्तियां दे सकता है. यद्यपि कोाचिंग की दुनिया में अनेक टेस्ट सीरिज उपलब्ध होती हैं, जरूरी नहीं कि इनसे आपके लेखन स्टाइल्स में सुधार होगा क्योंकि अत्यधिक अनुभवी और सक्षम परीक्षक ही आपकी प्रतियों का मूल्यांकन नहीं कर रहे होते हैं. अत: आपको व्यापक टेस्ट मॉडयूल्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिये. बेहतर तरीका यह होगा कि कुछेक परीक्षाओं को लिखें और उनका किसी सक्षम व्यक्ति से मूल्यांकन कराएं. ये कोई युनिवर्सिटी का प्रोफेसर, वरिष्ठ नागरिक अधिकारी हो सकता है जो कि विषय का जानकार हो. वे आपको अपना लेखन कौशल सुधारने के लिये उपयोगी जानकारी दे सकते हैं.
प्रत्येक मुख्य पेपर के लिये भिन्न-भिन्न शब्दों और शब्दावलियों की आवश्यकता होती है: ज्ञान संबंधी कौशलों और भाषा संबंधी कौशलों को विकसित करने के अलावा आपको यह अवश्य समझ लेना चाहिये कि मुख्य परीक्षा के प्रत्येक पेपर के लिये आपका लेखन स्टाइल एक समान नहीं हो सकता. ऐसा इसलिये है क्योंकि प्रत्येक पेपर का एक अलग पाठ्यक्रम होता है और इसके लिये उचित शब्दों और शब्दावलियों के प्रयोग की आवश्यकता होती है. उदाहरण के लिये नीति शास्त्र के पेपर के लिये आपको एक खास प्रकार के शब्दों की आवश्यकता होती है जो कि आपके उत्तर में बारंबार और संदर्भ के अनुसार शामिल किये जाने चाहियें. आपके नीति शास्त्र के पेपर में और मामला अध्ययन में उदारता, परोपकार, करूणा, सत्यनिष्ठा, स्वायत्तता, जवाबदेही जैसे शब्दों का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिये. इसी तरह यदि आप आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रश्नों का उत्तर लिख रहे हैं तो न्यूनीकरण, अनुकूलन, पुनर्वास, लचीलापन शब्द आपके उत्तर में अवश्य शामिल किये जाने चाहियें. इसी तरह यदि आप अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रश्नों का उत्तर लिख रहे हैं तो बहुपक्षवाद, बहुपक्षीय, नियम आधारित आदेश, समावेशी दृष्टिकोण, स्वयं के हितों के प्रकाश में आदि का प्रयोग किया जाना चाहिये. इन शब्दों के प्रयोग से आपकी मुद्दों के बारे में समझ परिलक्षित होती है और इससे बेहतर अंक मिलेंगे. परीक्षक इस बात की प्रशंसा करेगा कि आपने विषय को समझने में गहन रुचि दिखाई है और आप विषय विशेष में प्रयुक्त लोकप्रिय  भाषा की जानकारी रखते हैं.
गति से लिखना स्पर्धा का नाम है: मुख्य परीक्षा के वर्तमान स्वरूप में आपको सामान्य अध्ययन के पेपर में 20 उत्तर और वैकल्पिक विषय में 28 उत्तर लिखना अपेक्षित होता है. तीन घंटों में यह लगभग असंभव काम है. अनेक उम्मीदवार परीक्षा के बाद, यहां तक कि सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले रिपोर्ट करते हैं कि वे समय के अभाव के कारण सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं दे सके हालांकि उन्हें उत्तर आते थे. यह एक वास्तविक चुनौती है और किसी को भी लेखन गति विकसित कर लेनी चाहिये. इससे यह पता चलता है कि किसी को भी अपनी सामान्य लेखन की आदतों से कहीं अधिक तीव्र गति से लिखना होगा. प्रत्येक प्रश्न पर आप केवल 6 से 7 मिनट लगा सकते हैं. यह नियमित अभ्यास से हो सकेगा. आपको तीव्र गति से लिखने की रणनीति बनानी होगी और एक समयावधि के लिये इस पर काम करना होगा. तीव्र लेखन के लिये आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की
जरूरत है:-
1. लंबे उत्तर न लिखें: यद्यपि सामान्यत: कोई उत्तर 150 शब्दों का होना चाहिये, लेकिन शब्दों की सीमा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता है. यह उत्तर की गुणवत्ता होती है जो मायने रखती है. अत: बिना इस बात के डर के कि आपको दंडित किया जायेगा, मात्र 120-130 शब्दों में अपना उत्तर लिखने की कोशिश करें. सं.लो.से.आ. ने स्वयं अपनी अधिसूचना में कहा है कि शब्दों की सीमा केवल सांकेतिक है और अंक गहन जानकारी के लिये दिये जायेंगे और न कि बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी दिये जाने पर.
2. असंगत पहलुओं पर न लिखें: सिर्फ प्रश्न का उत्तर दें. प्रत्येक प्रश्न का विनिर्दिष्ट उत्तर अपेक्षित होता है. अत:, ऐसी जानकारी देने का प्रयास न करें जो कि प्रश्न में पूछी ही नहीं गई है भले ही सूचना उस प्रश्न से संबंधित हो सकती है. इससे अनावश्यक रूप से आपके उत्तर लंबे हो जायेंगे. मान लो कोई प्रश्न पूछा गया कि आचार विचार किस तरह हमारे समय में वातावरण को बहाल करने में भूमिका निभा सकता है. इसके उत्तर में आपको नीतिशास्त्र और इसके विभिन्न घटकों को परिभाषित करने की आवश्यकता नहीं है. अपना उत्तर मात्र इस बात को प्रकाश में रखकर लिखें कि किस प्रकार एक नैतिक दृष्टिकोण वातावरण के लिये उसके सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिये कितना महत्वपूर्ण है.
3. प्रवाह में लिखें और इसे अंत तक बनाए रखें: परीक्षा की स्थिति में, आपके पास सोचने का वक्त नहीं होता है, प्रत्येक प्रश्न को आसानी से पढ़ें और उसका उत्तर लिखें. आपको आखिरी प्रश्न तक पहुंचने तक प्रवाह में लिखते रहना होगा. इसके लिये भी आपको एक अनुकूल वातावरण में अभ्यास करने की आवश्यकता होती है.
4. अच्छी तरह जानने वाले उत्तरों से समय की बचत करें: कुछेक पूछे गये प्रश्नों की आपको अच्छी जानकारी होगी और आप तेज़ी से इन प्रश्नों के उत्तर लिख सकते हैं. इन्हें पहले हल करें ताकि आप जानकारी रखने वाले उत्तरों से समय की बचत कर सकें जिसकी आपको दूसरे उत्तर लिखने से पहले सोचने के समय के लिये आवश्यकता होगी. आप इस पद्धति का अपने फायदे के लिये प्रयोग कर सकते हैं.
5. चाटर्स और डायग्राम्स का प्रस्तुतिकरण: समय बचाने के लिये उम्मीदवारों के बीच अपने उत्तर डायग्राम्स, चार्ट्स आदि के जरिए प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. यद्यपि डायग्राम्स, चाटर्स आदि के साथ अपने उत्तरों का उल्लेख करने की संभावनाएं मौजूद हैं परंतु इसे अपने सभी उत्तरों के लिये नियमित मद न बनायें. बहुत से चार्ट्स और डायग्राम की आवश्यकता नहीं होती है. इसकी बजाए आवश्यकता होती है निबंध की तरह प्रस्तुत करने की. चूंकि मुख्य परीक्षा विषयागत होती है आप पैराग्राफ  लिखने से दूर नहीं भाग सकते और केवल डायग्राम्स आदि से प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकते. अत: अपने उत्तरों में ऐसे प्रस्तुतिकरण का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करें.
6. बिंदुवार उत्तर लेखन: कई उम्मीदवारों को पुन: अपने उत्तरों को बिंदुवार प्रस्तुत करने की लत होती है. वे ऐसा दो महत्वपूर्ण कारणों से करते हैं. एक परीक्षक का ध्यान आकृष्ट करने के लिये और दूसरा समय की बचत के लिये. वेसे बिंदु वार उत्तर लिखने में कुछ भी गलत नहीं है परंतु समूचे उत्तरों को बिंदुवार लिखना मुख्य परीक्षा जैसी विषयागत परीक्षा की भावना के खिलाफ  जाता है. आदर्श रूप में निबंधन की प्रकृति में और बिंदुवार उत्तरों का बुद्धिमानी से संयोजन होना चाहिये. मैं सुझाव देना चाहूंगा कि यद्यपि किसी खास उत्तर को बिंदुवार तरीके से लिखने की संभावना होती है, आपको बिंदुओं का उल्लेख करने से पहले छोटा सा परिचय और निष्कर्ष अवश्य प्रस्तुत करना चाहिये.
7. अपने उत्तरों को रेखांकित करना: बड़ी संख्या में उम्मीदवार अपने वाक्यों के नीचे रेखा खींचना पसंद करते हैं ताकि परीक्षक के सामने उन्हें उल्लेखित कर सकें. इस विषय में भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है. मैंने देखा है कि कई मामलों में उभारे गये वाक्य कुछ असाधारण नहीं होते बल्कि सूचना का एक हिस्सा होते हैं. इससे दो समस्याएं उत्पन्न होती हैं. एक परीक्षक आपके रेखांकित वाक्य से प्रभावित नहीं होगा. दूसरे आप अपने उत्तर के अन्य हिस्सों से उसका ध्यान हटा सकते हैं. वह आपकी परख केवल रेखांकित वाक्यों को पढक़र करेगा और पूरा उत्तर नहीं पढ़ेगा. दोनों ही स्थिति जोखि़म से भरी
हैं अत: अनावश्यक रूप से वाक्यों को रेखांकित न करें.
8. अपने उत्तरों को कैप्शन प्रदान करना: जी हां, कैप्शन से कोई उद्देश्य हल नहीं होता है. वे आपके उत्तर के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित करते हैं. परंतु प्रत्येक उत्तर कैप्शन आधारित उत्तर नहीं हो सकता. अत: आपको बुद्धिमानी के साथ निर्णय लेना होगा कि कहां पर कैप्शन्स फिट हैं और कहां नहीं हैं.
9. परिचय और निष्कर्ष: प्रत्येक उत्तर का परिचय पैराग्राफ, मुख्य हिस्सा और निष्कर्ष होता है. परिचय में, आपको उत्तर की अवधारणा का उल्लेख करना चाहिये ताकि परीक्षक यह महसूस कर सके कि आप उत्तर में क्या लिखने वाले हैं. मुख्य हिस्से में दो, तीन छोटे पैराग्राफ  का प्रयोग करें जो कि उत्तर के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हों. अंत में निष्कर्ष में विषय का निचोड़ लिखें और आगे का मार्ग दर्शाएं.
उद्धरणों का प्रयोग:
निश्चित तौर पर यदि संदर्भ अपेक्षित होता है तो आप गांधी, नेहरू, मदर टेरेसा और कई अन्य का अपने उत्तर की प्रामाणिकता और उसमें जान डालने के लिये प्रयोग कर सकते हैं. परंतु आपको उन्हें उद्धृत करते समय सावधानी बरतनी चाहिये. अनावश्यक उद्धृत करने से बचें. मैंने देखा है कि कई उत्तरों में छात्र बिना किसी अपेक्षित संदर्भ के गांधी जी के मशहूर उद्धरण का प्रयोग करते हैं: धरती हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिये पर्याप्त है परंतु लालच के लिये नहीं. अत: किसी महान व्यक्ति को उद्धृत करते समय दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिये. किसी पत्रकार या राजनयिक के नाम को सिर्फ  इसलिये उद्धृत न करें कि आपने समाचार पत्र में उसके आलेख को पढ़ा है. हो सकता है कि इसकी परीक्षक प्रशंसा न करें. आप उद्धरणों की अपेक्षा उनके विचार लेकर अपने तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं. सभी प्रकार के नामों की बजाए केवल जाने माने नाम जैसे कि गांधी, नेहरू आदि का बेझिझक उल्लेख कर सकते हैं.
इस वर्ष की मुख्य परीक्षा लिखने से पहले आप इस आलेख में प्रस्तुत सुझावों का पूरा लाभ उठाने के लिये कम से कम 5 बार उत्तर लिखने का अभ्यास कर सकते हैं.
(एस बी सिंह एक जाने माने शिक्षाविद, आईएएस गुरु और प्रशिक्षक हैं. उनसे उनके ई-मेल: sb_singh2003@ yahoo.com के जरिए संपर्क किया जा सकता है.)