नौकरी फोकस


Volume-24, 15-21 September, 2018


 
रोजग़ार कौशल-युवाओं के लिये रोजग़ार की एक नई संभावना

निधि प्रसाद

भारत आज दुनिया में सबसे तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. हाल के सर्वेक्षणों से इंगित होता है कि 2030 तक यह अमरीका और चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जायेगी. इस तथ्य के अनुरूप कि हमारे पास 2020 तक 50-70 मिलियन रोजग़ार सृजित होंगे और आपके पास इसके निर्माण के लिये शानदार अवसर हैं!
संयोग से, भारत के पास दुनिया में सबसे बड़ी युवा जनसंख्या है. 15 और 29 वर्ष की आयु के बीच के लगभग एक तिहाई भारतीय इसे विश्व में युवाओं का देश बना रहे हैं जिसकी 64 प्रतिशत जनसंख्या कामकाजी आयु वर्ग में है.
2020 तक देश की औसत आयु 29 हो जायेगी.
यह सब इसलिये संभव हो पाया है कि भारत ने अपने सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम और ‘‘बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य
शिक्षा का अधिकार’’ जैसे महत्वपूर्ण अधिनियम (आरटीई) के जरिए सभी के लिये शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है.
इन उपलब्धियों के बावजूद, शिक्षा की पहुंच से अधिक शिक्षण और समानता को सुनिश्चित करने पर फोकस किये जाने की चुनौतियां बरकरार हैं. एक तिहाई से अधिक बच्चे प्राथमिक शिक्षा का पूर्ण चक्र पूरा करने से पहले ही स्कूल छोडक़र चले जाते हैं. स्कूल में न जाने वाले अधिकतर बच्चे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजाति समूहों, धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों और दिव्यांग बच्चों सहित, कमज़ोर और उपेक्षित वर्गों से होते हैं. प्रमाणों से यह भी संकेत मिलता है कि बच्चों को अपेक्षित स्तर की शिक्षा नहीं मिल पा रही है. राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा संचालित राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के अनुसार सर्वेक्षण में रखे गये बुद्धिमत्ता पठन और गणित से संबंधित प्रश्नों का कक्षा 5 के छात्रों में से आधे से कम ही सही उत्तर दे पाये.
अब सवाल यह है कि हम किस प्रकार रोजग़ार के योग्य बनें, रोजग़ार कौशल में निपुण बनें और प्रतिस्पर्धा में बने रहें?
रोजग़ार योग्यता कौशल क्या हैं?
रोजग़ार योग्यता रोजग़ार से जुड़े कार्य और योग्यता से संबंधित होती है. आरंभिक रोजग़ार प्राप्त करने की योग्यता. सरल शब्दों में गुणों का संयोजन, जो किसी के लिये भी एक रोजग़ार प्राप्त करने और उसमें बने रहना आसान बना दें.
रोजग़ार कौशलों को स्थानांतरणीय कौशलों के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है जिनकी किसी व्यक्ति को रोजग़ार-योग्यबनाने के लिये आवश्यकता होती है. अच्छी तकनीकी समझ और विषय ज्ञान के साथ नियोक्ता अक्सर कौशलों का एक सेट निर्धारित करते हैं जिसकी वे अपने कर्मचारी से अपेक्षा रखते हैं.
रोजग़ार कौशल जिनकी सर्वाधिक मांग है
*बुनियादी टेक्नोलॉजी. इसका कोई जवाब नहीं: आज के व्यवसायिक कार्य स्थल के लिये आपके पास कम्प्यूटर का ज्ञान अवश्य होना चाहिये.
*सम्प्रेषण, आप प्रभावी तरीके से सम्प्रेषण की योग्यता अवश्य रखते हों, जिससे आशय है बातचीत करना, सुनना और लिखना.
*समस्या-समाधान-सामान्य कौशल जैसे कि समस्या-समाधान की हमेशा आवश्यकता होती है. अपने कॅरिअर में कभी भी चुनौती का सामाना होना अपरिहार्य है और जब ये उत्पन्न होती हैं, तो आप में एक न्यायोचित समाधान प्रस्तुत करने की योग्यता की अपेक्षा की जाती है.
*सीखने की इच्छा शक्ति: यदि आप सोचते हैं कि आप सब कुछ जानते हैं क्योंकि आपने कॉलेज और विश्वविद्यालय में विषय के अध्ययन में तीन या अधिक वर्ष लगाये हैं तो आप गलत हैं! किसी को भी कार्य स्थल पर नये कौशल सीखने के लिये तैयार और उत्सुक रहना चाहिये.
*टीम कार्य-अपनी रोजग़ार योग्यता के अवसरों को बढ़ाने के लिये आपको न केवल यह सिद्ध करना होगा कि आप एक टीम प्लेयर हैं बल्कि दूसरों को साथ लेकर चलने और प्रबंधन की भी योग्यता होनी चाहिये. आपको हरेक की मदद करने के लिये सकारात्मक संबंधों के निर्माण करने और संयुक्त लक्ष्य हासिल करने का उदाहरण प्रस्तुत करना भी आवश्यक होता है.
छात्रों में 12 वर्षों से अधिक समय तक रटकर शिक्षा ग्रहण करने की एक खुदपसंदी होती है और वे रोजग़ार बाज़ार में निर्विवाद शिक्षार्थियों से नवप्रवर्तकों के रूप में परिवर्तित होते हैं.
रोजग़ार योग्यता कौशल क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रोजग़ार-योग्यता कौशल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बाज़ार में जबर्दस्त स्पर्धा है और निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र में नियोक्ताओं को ऐसे लोगों की तलाश होती है जो कि
लचीले और पहल करने के इच्छुक होते हैं तथा भिन्न-भिन्न वातावरण में विभिन्न प्रकार
के कार्यों को संचालित करने की योग्यता रखते हैं.
सीधे शब्दों में कहें, एक से अधिक शोधों में यह बात सामने आई है कि मात्र डिग्री ले लेना और अपने नाम के साथ कुछ अक्षरों को जोड़ लेना आपके लिये रोजग़ार पाने या अपने कॅरिअर की शुरुआत करने के लिये पर्याप्त नहीं होता है. आपको रोजग़ार योग्य कौशलों के पोर्टफोलियो की आवश्यकता होती है. नियोक्ता ऐसे स्नातकों की भर्ती करना पसंद करते हैं जिनके पास अतिरिक्त योग्यताएं हैं, जो व्यक्तिश: और एक टीम में दोनों तरह से कार्य कर सकते हैं, जिनमें नेतृत्व करने की क्षमता दिखाई देती है और समय देनेे के साथ-साथ यात्राओं और नई स्थितियों और संस्कृतियों के अनुभवों के जोखि़म उठाने को तैयार रहते हैं और उत्कृष्ट सम्प्रेषण कौशल रखते हैं.
ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में किसी व्यक्ति की सफलता वर्धित कौशलों, सृजनात्मकता और कल्पना-शक्ति पर निर्भर करती है. जबकि बुनियादी शिक्षा, गणना कौशल, तकनीकी कौशल, दस्तकारी कौशल सदैव महत्वपूर्ण बने रहेंगे, आज की अर्थव्यवस्था और समाज में ऐसे लोगों की मांग बढ़ रही है जिनके पास नये वातावरण में लोगों के साथ बदलाव और अनुकूलन की योग्यताएं हैं. यही कारण है कि रोजग़ार योग्यता कौशल अधिक से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
रोजग़ार योग्यता कौशल का विकास कैसे करें?
शिक्षा-शास्त्र बदल रहा है. हमें रूकने, सोचने और पुन: जुडऩे की आवश्यकता है.
ज्ञान, विशेषज्ञता या अभिरुचि के प्रयोजन से पढ़ाई थोड़ा कम हो रही है. इसलिये स्कूलों और कालेजों से उत्तीर्ण होने वाले छात्र अल्प ज्ञान अथवा बिना किसी वास्तविक ज्ञान, सीमित पढ़ाई, यहां तक कि बहुत कम सम्प्रेषण कौशलों के साथ और समस्या समाधान की देख-रेख के लिये अयोग्यता के साथ बाहर आ रहे हैं.
विशेषज्ञों द्वारा जारी राष्ट्रीय रोजग़ार-योग्यता रिपोर्ट की कुछ प्रमुख बातें नीचे दी गई हैं.
*47 प्रतिशत स्नातक किसी भी क्षेत्र में रोजग़ार के योग्य नहीं होते हैं क्योंकि उनके पास अग्रेज़ी भाषा और ज्ञानात्मक कौशल का अभाव होता है.
*50 प्रतिशत से अधिक स्नातक यह नहीं जानते कि कॉपी-पेस्टिंग पाठ जैसे सामान्य कार्य कैसे किये जाते हैं और न ही वे हार्डवेअर और सॉफ्टवेयर के बीच भेद कर पाते हैं.
*स्नातक शिक्षा में उत्तीर्ण होने वाले 25 प्रतिशत से अधिक छात्र वित्त और लेखा के विषयक्षेत्र में वास्तविक दुनिया की समस्या के समाधान की संकल्पना नहीं कर सकते.
अत: यदि आपको जब डिग्री एक अच्छा रोजग़ार नहीं दे सकती, छात्र किस प्रकार कॉलेज में रहकर अपनी रोजग़ार योग्यता में सुधार कर सकते हैं?
कौशल प्रशिक्षण में अंतर बहुत विशाल है. काम की दुनिया में प्रवेश करने के लिये आवश्यक जीवन कौशल हमारे पाठ्यक्रम से पूरी तरह गायब हैं. वर्तमान रोजग़ार उद्योग में सॉफ्ट कौशल की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है.
ज्ञान अर्थव्यवस्था में अंग्रेजी का किसी भी भूमिका में एक प्रमुख दायरा होता है और 47 प्रतिशत स्नातकों को यहां तक कि भाषा का बुनियादी कार्यात्मक ज्ञान भी नहीं होता है.
व्याकरण संबंधी त्रुटियां होती हैं; एसएमएस-स्टाइल, भाषा और संपूर्ण वाक्य संरचना के लिये पूर्ण ज्ञान के साथ निम्नलिखित जरूरी है:-
*अपनी पढऩे की आदत विकसित करें. महीने में एक पुस्तक पढऩे की आदत डालें.
*अपना लेखन कौशल सुधारें. किसी एक विषय का चयन करें जिसमें आप की रुचि है और इसके बारे में लिखें.
*स्कूलों/कालेजों में रोज़मर्रा की स्थितियों के लिये समस्या समाधान अभ्यास संचालित करें.
*अपनी तरह के लोगों का समूह बनाएं और उनके साथ सामूहिक चर्चाएं करें.
*जिस व्यवसाय में आपकी रुचि है उसके बारे में अपेक्षित अद्यतन जानकारी हासिल करने के लिये समाचार पत्र पढ़ें और इंटरनेट ब्राउज करें.
*अपने को प्रौद्योगिकी अनुकूल बनाएं-सभी को नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी की जानकारी रखना आवश्यक होता है क्योंकि इससे उनके रोजग़ारों और संगठनों को दिशा मिलती है.
*नई भाषा सीखें-आज की वैश्विक दुनिया में द्विभाषी कर्मचारियों को निश्चित तौर पर अधिमान मिलता है.
*जब भी संभव हो कालेज की गतिविधियों में शामिल हों और कालेज के कार्यक्रमों की आयोजन समिति का हिस्सा बनें. इन पहलों से आप टीम कार्य के मूल्यों, नेतृत्व कौशल, सम्प्रेषण कौशल सीख पायेंगे और आपके भविष्य के निर्माण में बहुत काम आयेंगे.
*सकारात्मकता-सकारात्मक अभिरुचि को एक महत्वपूर्ण कौशल के तौर पर रखने को अक्सर नजऱ अंदाज कर दिया जाता है परंतु यह एक अच्छा गुण होता है. नियोक्ताओं को ऐसे स्टाफ  सदस्यों की तलाश होती है जिनमें कर सकते हैंकी प्रवृत्ति हो और वे दबाव में अच्छा काम कर सकते हैं तथा जो कुछ भी वे करते हैं उसमें आनंद महसूस करते हैं.
शिक्षा और उद्योग के बीच अलगाव उच्चतर शिक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है. स्पष्ट तौर यदि कहा जाये तो नियोक्ताओं को अपने संगठन में विभिन्न भूमिकाओं के लिये सही उम्मीदवारों के चयन करने में अभिरूचि, भाषा, व्यक्तित्व और विषयागत कौशलों के सम्मिलन की तलाश होती है.
जैसा कि कहा जाता है ‘‘खुद की सहायता करना श्रेष्ठतम सहायता होती है’’, हरेक व्यक्ति अपनी स्वयं की रोजग़ार योग्यता के लिये जि़म्मेदार होता है क्योंकि उसे ही कौशल की आवश्यकता और अपेक्षा होती है. शैक्षणिक संस्थान भी किसी व्यक्ति में रोजग़ार योग्य कौशलों का विकास और वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपनी जि़म्मेदारी से नहीं भाग सकते हैं, क्योंकि वे कौशल और ज्ञान प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं.
(लेखक वरिष्ठ काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक हैं. ई-मेल आईडी- nidhiprasadcs@ gmail.com)