नौकरी फोकस


Volume-25, 22-28 September, 2018


 सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-२०१८
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्रों की तैयारी कैसे करें?


एस.बी. सिंह

मुख्य सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्रों की सुनियोजित तैयारी करना आवश्यक है क्योंकि पाठ्यक्रम में निर्दिष्ट और उसके अलावा भी विविध विषयों के माध्यम से कईं कौशलों की जांच की जाती है. प्रारंभ में, सभी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि सामान्य अध्ययन (जीएस) प्रश्न पत्रों का पाठ्यक्रम स्वत: स्पष्ट नहीं होते और न ही हो सकते हैं. क्या इसका यह अर्थ समझा जाए कि पाठ्यक्रम केवल व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है न कि उनका विस्तृत क्षेत्र. दूसरे शब्दों में,  सं.लो.से.आ. पाठ्यक्रम केवल संकेतात्मक है, न कि स्वत: पूर्ण. उम्मीदवार को, दिए गए पाठ्यक्रम पर सूक्ष्म दृष्टि का विकास करना चाहिए और सं.लो.से.आ. द्वारा दी गयी रूपरेखा के आधार पर एक विस्तृत पाठ्यक्रम बनाना चाहिए. केवल यही तरीका पाठ्यक्रम को वास्तविक सीमा में ला सकता है, अन्यथा पाठ्यक्रम हमेशा केवल ऊपरी तौर से ही तैयार किया जा सकेगा, न कि स्पष्ट रूप में. इसके लिए अत्यधिक वैज्ञानिक पद्धति यह है कि पिछले १० वर्षों के सामान्य अध्ययन (मुख्य) के प्रश्नों की तैयारी की जाए. ऐसा करने से, आपको यह जानकारी हो जाएगी कि प्रश्न किन क्षेत्रों से पूछे जा रहे हैं. उदाहरण के लिए, पिछले वर्षों पर्यावरण पर पूछे गए सभी प्रश्नों को देखें. इससे आपको यह जानने में सहायता मिलेगी कि इस मुद्दे (पर्यावरण) पर कौन से विषय क्षेत्रों की तैयारी की जानी चाहिए. जो प्रश्न पहले पूछे जा चुके हैं उनके अलावा आपको, पर्यावरण के क्षेत्र में हुए नए विकास तथ्यों की भी निश्चित रूप से तैयारी करनी होगी.
चार प्रश्नपत्रों में निर्धारित, सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम, प्रत्येक प्रश्नपत्र में २-३ विषयों को सम्मिलित करता है. उदाहरण के लिए, जीएस प्रश्न पत्र-१ इतिहास (अर्थात आधुनिक भारत, स्वतंत्रोत्तर भारत, विश्व-इतिहास, कला एवं संस्कृति), भूगोल तथा सामाजिक मुद्दों का मिला-जुला रूप होता है. उम्मीदवार को पता होना चाहिए कि प्रत्येक खंड से प्रश्न किस अनुपात में पूछे जाते हैं, अन्यथा वह, पाठ्यक्रम के छोटे भाग की तैयारी पर अधिक समय लगाएगा और मुख्य विषय क्षेत्रों पर कम. दूसरे, उम्मीदवार को यह ध्यान रखना चाहिए कि सामान्य अध्ययन (जीएस) पाठ्यक्रम में स्थैतिक, सक्रिय एवं सुविचारित पहलु शामिल होते हैं. इतिहास, संस्कृति, भौगोलिक संकल्पनाएं आदि स्थैतिक पहलु हैं, सामाजिक मामले, राज्य तंत्र, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, विज्ञान/प्रौद्योगिकी आदि सक्रिय/गतिशील पहलु होते हैं. सुविचारित पहलु अधिकांशत: नीतिशास्त्र प्रश्न पत्र में होते हैं, जिसमें उम्मीदवार को नीतिशास्त्र, मूल्यों, नैतिकता, आचरण आदि से जुड़े मुद्दों पर विचार देने होते हैं. सामान्य अध्ययन के इन पहलुओं की तैयारी निम्नलिखित नियमों का अनुसरण करके की जा सकती है.
स्थैतिक (स्टेटिक) भाग : स्थैतिक भाग की अच्छी तैयारी मानक पाठ्य-पुस्तकें पढक़र की जा सकती है. इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र आदि पर एनसीईआरटी प्रकाशन की पुस्तकें आधार पुस्तकें हैं. किंतु, एनसीईआरटी की पुस्तकों से अच्छा ज्ञान प्राप्त करने के बाद उच्चतर पाठ्य-पुस्तकों का भी गहन अध्ययन करना आपके लिए आवश्यक है. प्रत्येक स्थैतिक क्षेत्र के लिए, इस लेख के अंत में एक संकेत सूची दी  गयी है.
सक्रिय भाग : सक्रिय भाग ऐसे वर्तमान मुद्दों के बारे में है, जो दिन प्रतिदिन आधार पर घटित/विकसित होते हैं. सक्रिय पहलु सामान्य अध्ययन का एक बड़ा भाग होते हैं और इनकी तैयारी अत्यधिक सावधानी पूर्वक करनी आवश्यक होती है. उम्मीदवार समाचारों में प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रासंगिक विषय का पता लगाए और यह मनन करे कि उस मुद्दे पर किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं. उदाहरण के लिए, पंजाब विधान सभा द्वारा पारित ब्लास्फेमी लॉ विषय पर आपको इन बातों का चिंतन करना चाहिए: ब्लास्फेमी लॉ क्या है, इस कानून का उद्देश्य क्या है? इसकी क्या आलोचना है? हमारे पड़ोसी पाकिस्तान में ऐसे कानूनों का क्या अनुभव रहा है और अंत में, इस कानून पर आपका निजी मूल्यांकन किसी सक्रिय विषय पर इस तरह के चिंतन को मैं एक संपूर्ण दृष्टिकोण मानता हूं, जिसका अर्थ यह है कि किसी मुद्दे को पढऩे और उस पर संक्षिप्त नोट बनाते समय उस मुद्दे के सभी पहलुओं पर उपयुक्त ध्यान दिया गया है. सक्रिय पहलुओं के लिए, उम्मीदवारों को कईं समाचार पत्र और पत्रिकाएं पढऩी चाहिएं. प्रत्याशित उम्मीदवारों में मैंने एक प्रवृत्ति देखी है कि वे अलग-अलग समाचार पत्र, पत्रिकाएं नहीं पढ़ते हैं. वे अपनी पुरानी परिपाटी पर चलते हैं और अपनी पठन आदत को किसी विशेष समाचार पत्र, अधिकांशत: हिंदू और कुछ पत्रिकाओं जैसे योजना एवं कुरुक्षेत्र तक ही सीमित रखते हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये पत्र-पत्रिकाएं सूचना का अच्छा स्त्रोत हैं. किंतु उम्मीदवार को अन्य पत्र-पत्रिकाओं का भी पठन करना चाहिए. अन्यथा तैयारी करने का आपका आधार अत्यधिक सीमित रहेगा. मैंने देखा है कि हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, बिजनेस स्टैण्डर्ड किसी भी विषय पर अतिरिक्त जानकारी प्रकाशित करते हैं. मैं अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कुछ विदेशी समाचार पत्रों सहित ७-८ समाचार पत्र पढ़ता था. किसी प्रत्याशित उम्मीदवार के लिए, हो सकता है कि यह संभव न हो, किंतु इस पहलु के बारे में जागरूकता होना आवश्यक है. फ्रंटलाइन,  डाउन टू अर्थ, इंडिया टुडे कुछ ऐसी अच्छी पत्रिकाएं हैं जिनमें वे विषय शामिल हो सकते हैं जो आपको कहीं अन्यत्र पढऩे के लिए नहीं मिलते. सक्रिय भागों की अच्छी तैयारी करने के लिए यह एक सुव्यस्थित कार्य नीति है.
सुविचारित भाग : सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम का यह, वह भाग है जो आपको, अपने निजी विचारों को आपके जीवन के वास्तविक अनुभव के आधार पर अभिव्यक्त करने में समर्थ बनाता है. ऐसे विवेचनात्मक प्रश्न अधिकांशत: जीएस प्रश्न पत्र-IV अर्थात नीतिशास्त्र प्रश्नपत्र में पूछे जाते हैं. ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखने में किसी पाठ्य पुस्तक का ज्ञान आपकी सहायता नहीं करेगा. ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखने में आपके अपने विचार तथा अनुभव वास्तविक रूप में आपकी सहायता कर सकते हैं. इसके लिए, आपको अपनी सोच-विचार करने की आदत का विकास करना होगा. उदाहरण के लिए, नीति शास्त्र में यदि यह प्रश्न हो : भारत में कानून का व्यापक रूप में पालन क्यों नहीं किया जाता? तो आपको इस पर चिंतन करना होगा. कानूनों का पालन करना इसके अंतर्निहित मूल्यों के समावेशन पर निर्भर है न कि स्वयं विधि के प्रावधानों पर. दहेज कानून, भ्रष्टाचार निरोधी कानूनों या यातायात कानूनों का पालन करने की हमारी स्थिति खराब है क्योंकि समाज के एक बहुत बड़े वर्ग ने उनके मूल्यों का आत्मसात नहीं किया है. सुविचारित या विवेचनात्मक प्रकृति के प्रश्नों से मेरा यही तात्पर्य है.
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I : यह प्रश्नपत्र सभी चारों प्रश्नपत्रों में से सबसे अधिक लंबा होता है और इसमें व्यापक स्थैतिक पाठ्यक्रम होता है. सं.लो.से.आ. ने पाठ्यक्रम की केवल एक संक्षिप्त रूपरेखा दी है और पाठ्यक्रम को अपने स्वयं के प्रयासों द्वारा व्यापक रूप देने की आवश्यकता होती है. आधुनिक भारत के लिए उम्मीदवार को, १८८५ के बाद हुए राष्ट्रीय आंदोलन, उसके विभिन्न चरण, गांधी युग,  आंदोलन का समाजवादी तथा क्रांतिकारी दृष्टिकोण, आदि की तैयारी करनी चाहिए. देश के अग्रणी नेताओं जैसे गांधी, नेहरू, पटेल, अंबेडकर, तिलक, गोखले आदि के राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक विचारों को भी कवर करना चाहिए. कुछ महत्वपूर्ण वायसरायों जैसे डलहौजी, कॉर्नवालिस, रिपोन, कर्जन आदि पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं. इसलिए अपनी तैयारी में इन्हें भी शामिल करें. इसके अतिरिक्त ब्रिटिश के सामाजिक, धार्मिक आंदोलनों, आर्थिक नीतियों, शैक्षिक नीतियों, प्रशासनिक नीतियों की भी तैयारी करनी चाहिए.
जहां तक  आधुनिक भारत का संबंध है, कृषि उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विदेश नीति, राष्ट्र निर्माण के कार्य आदि में सभी बड़े विकास पर भी तैयारी की जानी चाहिए. विश्व इतिहास के लिए, बड़ी क्रांतियों, विश्व युद्धों और उनके परिणाम पर तैयारी में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. भूगोल विषय में, परीक्षा में वर्तमान मुद्दे पूछे जाएंगे.
कला एवं संस्कृति : प्राय: उम्मीदवार इसके वास्तविक महत्व को नहीं समझते. केवल कला रूपों में ही इसे निकटता से समझा जाता है. नृत्य, पेंटिंग, मूर्ति कला आदि जैसे कला रूप इसके विस्तार क्षेत्र में आती हैं, किंतु भारत की संपन्न संस्कृति पर आधिकारिक अध्ययन किया जाना चाहिए. रोमिला थापर, एक महान इतिहासकार के अनुसार, हर समाज की अपनी संस्कृति होती है, अर्थात उस समाज में रहने वाले लोगों की जीवन पद्धति. संस्कृति में पर्यावरण, प्रौद्योगिकी, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, पौराणिक एवं सामाजिक संरचना शामिल होती है. इसी तरह सभ्यता को भी समाज में उच्च संस्कृति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है. सभ्यता का मुख्य पहलू दर्शन शास्त्र, धार्मिक पुस्तकें, साहित्य रूप, काव्य, नाटक, महाकाव्य, सौंदर्य शास्त्र है जिन्हें मूर्तिकला, पेंटिंग, वास्तुकला, संगीत, खगोल विज्ञान, गणित, औषधि जैसे कलात्मक रूपों में अभिव्यक्त किया जाता है. यदि कोई उम्मीदवार पिछले वर्ष के प्रश्नों पर ध्यान दे तो उसे संस्कृति के इन वृहद विषयों से संबंधित प्रश्न मिलेंगे. उदाहरण के लिए, कुछ वर्ष पहले संगम साहित्य पर एक प्रश्न पूछा गया था, जो इस परिभाषा के अंतर्गत आता है. इसलिए, उम्मीदवारों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि वे कला एवं संस्कृति के विभिन्न रूपों को समझें और उक्त उल्लिखित क्षेत्रों को अपनी तैयारी में शामिल करें.
विश्व इतिहास : यद्धपि विश्व इतिहास का पाठ्यक्रम विस्तृत है, किंतु उम्मीदवार इस क्षेत्र की एक सीमित तैयारी कर सकते हैं क्योंकि इस भाग से केवल एक या दो प्रश्न ही पूछे जाएंगे. इस भाग में महत्वपूर्ण क्रांतियों जैसे फ्रैंच, रूसी औद्योगिक क्रांतियों, दो विश्व युद्धों और एशिया तथा अफ्रीका में उपनिवेशवाद प्रक्रियाओं का अंत आदि की अच्छी तैयारी की जानी चाहिए.
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-II : यह प्रश्न-पत्र मुख्य संवैधानिक प्रावधानों, हमारी राजनीतिक प्रणाली और अभिशासन मुद्दों के बारे में होता है. दूसरे, पड़ोसी देशों के साथ महाशक्तियों, बहुपक्षीय संगठनों के साथ भारत की विदेश नीति भी इसका भाग होते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय संबंध कहा जाता है. इस प्रश्न पत्र में राजतंत्र तथा अभिशासन विषय पर अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं.
ई-मेल : sb_singh2003@ yahoo.com यहां व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं