नौकरी फोकस


Career Volume-25

मौसम विज्ञान में कॅरिअर
मौसम के मिज़ाज को समझें और पूर्वानुमान लगाएं

प्रतिभा मिश्रा

चेन्नै के श्री रामानन तमिलनाडु के एक अत्यधिक लोकप्रिय मौसम पूर्वानुमानकर्ता हैं। उन्हें छात्र रेन मैनभी कहते हैं क्योंकि वर्षाकालीन अवकाश की आधिकारिक घोषणा करने में वह स्कूलों की सहायता करते हैं। वह क्षेत्रीय तूफान चेतावनी केन्द्र के निदेशक भी हैं। गैर-आधिकारिक रूप में वह सोशल मिडिया सेलेब्रेटी हैं। रामानन कहते हैं, ‘‘मैं मौसम पूर्वानुमान क्षेत्र में इसलिए आया क्योंकि मैं इस क्षेत्र में अत्यधिक रुचि रखता हूं। मेरा भूगोल ज्ञान अच्छा था, लेकिन कॉलेज में मैंने इस विषय के बदले भौतिकी विषय लिया तथापि कॉलेज स्तर पर मेरी रुचि वायुमंडल भौतिकी में थी, और अंतत: मैं एक प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) बन गया।’’

यद्यपि, श्री रामानन चेन्नै में कार्य करते हैं, किंतु वह मलेशिया, सिंगापुर तथा श्रीलंका सहित विश्व भर से सूचना तथा डाटा पर निर्भर रहते हैं। वह प्रतिदिन दिल्ली में स्थित सहकर्मियों से वीडियो कॉन्फरेंस करते हैं, छोटी वेधशालाओं से सूचना प्राप्त करते हैं और उपग्रह डिवीजन और राडार डिवीजन से फोटो भी प्राप्त करते हैं। कोई भी मौसम-विज्ञानी कभी भी अलग रहकर कार्य नहीं करता, उसे विश्व-प्रवृत्तियों से अवगत रहना होता है।

मौसम विज्ञान में कॅरिअर अत्यधिक सुरक्षित और अच्छा वेतनग्राही होता है। यद्यपि इसमें एक आकर्षण भी है। सरकारी रोजग़ार निश्चित घंटों के रोजग़ार माने जाते हैं, किंतु मौसम पूर्वानुमान एक 24&7 का कार्य होता है। रामानन कहते हैं कि वह छुट्टी के दिनों में और उत्सव के दिनों में भी कार्य करते हैं। यदि आप इस क्षेत्र के प्रति उत्साह रखते हैं तो मौसम विज्ञान में रोजग़ार तलाशना तुलनात्मक रूप से आसान है।

कॅरिअर के एक विकल्प के रूप में मौसम-विज्ञान किसे चुनना चाहिए?

क्या आप बादल देखते हैं और हैरान होते हैं, ये अलग-अलग तरह के क्यों दिखते हैं? क्या आपको कभी आश्चर्य हुआ है कि समाचारों में दिन के मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली महिला यह पूर्वानुमान कैसे लगाती है कि कहां बारिश होगी और कितनी? यदि आप मौसम के पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन के प्रति जिज्ञासा रखते हैं तो मौसम विज्ञान आपकी आजीविका का एक माध्यम हो सकता है।

मौसम विज्ञान वायुमंडल विज्ञान की एक शाखा है, जो मुख्य रूप से मौसम एवं जलवायु के पूर्वानुमान पर और हमारे पर्यावरण में परिवर्तन लाने वाले तथ्यों के अध्ययन पर केंद्रित होती है। मिटिऔरलएक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है आसमान में घटित होने वाली कोई घटना। इस क्षेत्र में विशेषज्ञों को मौसम विज्ञानी या जलवायु विज्ञानी अथवा वायुमण्डल वैज्ञानिक कहा जाता है।

किसी भी मौसम विज्ञानी को गणित एवं भौतिकी विषयों का अच्छा ज्ञान होना चाहिए और वह पर्यावरण मामलों में अत्यधिक रुचि रखता हो। उन्हें समस्या समाधान, निर्णय लेने, डाटा विश्लेषण तथा संचार में अच्छा कौशल रखना भी आवश्यक होता है। आजकल मौसम विज्ञानी अपने कार्यों में उच्च प्रौद्योगिकी तथा सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, इसलिए उनका कंप्यूटर कौशल भी उत्कृष्ट होना चाहिए।

मौसम विज्ञानी क्या करते हैं?

कोई भी मौसम विज्ञानी तापमान नापने के लिए थर्मामीटर, हवा की गति को नापने के लिए ऐनेमोमीटर, वायुमंडल के दबाव को नापने के लिए बैरोमीटर, बारिश को नापने के लिए रेनगॉज़ जैसे विभिन्न उपकरणों का प्रयोग करते हैं, और मौसम की स्थितियों का पूर्वानुमान लगाने के लिए सभी विभिन्न टिप्पणियों का प्रयोग करते हैं, वे नमी और वायु की गुणवत्ता भी नापते है। आज, मौसम का पूर्वानुमान अधिक जटिल साधनों जैसे उपग्रह तथा डोपल राडार का उपयोग करके लगाया जाता है।

उपग्रह बादल बनना दर्शाते हैं और पूरे विश्व की मौसम प्रणालियों का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण होते हैं। चूंकि वे पूरे विश्व, सभी उप-महाद्वीपों, महासागरों और ध्रुवों का मौसम देख सकते हैं। और उनके पास व्यापक डाटा होता है, इसलिए वे हरिकेन्स (तूफान) जैसी मौसम घटनाओं का सही अनुमान लगा सकते हैं।

डॉपलर राडार में ध्वनि तरंगें एक राडार एंटेना से प्रसारित होती हैं, और उनके प्रतिबिंब अभिग्रहीत किए जाते है। यदि वे प्रतिबिंब आइस क्रिस्टल या धूल के कणों जैसे किसी वस्तु के सम्पर्क में आते हैं तो उनकी ध्वनि-तरंगों की फ्रीक्वेंसी परिवर्तित हो जाती है। यह किसी तूफान के समय मौसम विज्ञानियों की ट्रैक प्रगति में सहायक एक उपयोगी साधन है।

मौसम पूर्वानुमान कई उद्देश्यों के लिए उपयोगी है। यात्री प्रतिदिन यह निर्णय लेने के लिए इसका उपयोग करते हैं कि उनके लिए कौन सा रास्ता सुरक्षित रहेगा और क्या दिन में छतरी ले जाने की जरूरत है या नहीं। पर्वतारोही बर्फीले तूफान और हिमस्खलन से अपना बचाव करने के लिए इसका उपयोग करते हैं। किसानों को यह निर्णय लेने के लिए सूचना आवश्यक होती है कि वे अपनी फसल कब बोएं और कब काटें। हवाई जहाज अपने उड़ान कार्यक्रम के दौरान, स्थानीय मौसम स्थितियों का ध्यान रखते हैं। मौसम विज्ञानी तूफान तथा सुनामी आने का भी अनुमान लगा सकते हैं और संबंधित क्षेत्रों के व्यक्तियों को समय पर चेतावनी जारी करते हैं।

आज, आधुनिक मौसम पूर्वानुमान में कई वायुमंडलीय प्रेक्षणों ऐतिहासिक प्रवृत्तियों और पद्धतियों के ज्ञान और कंप्यूटर मॉडल्स का उपयोग किया जाता है ताकि पांच दिन पहले सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सके।

समाचारों में आप जो दैनिक पूर्वानुमान देखते हैं उनके लिए उपग्रह प्रक्षेपित किए जाते हैं। मौसम केन्द्र स्थापित किए जाते हैं, मौसम बैलूनों का उपयोग किया जाता है और स्थानीय मौसम वेधशालाएं स्थापित की जाती हैं।

मौसम विज्ञान में लोकप्रिय कॅरिअर हैं - पूर्वानुमान, परामर्श, अध्यापन और अनुसंधान।

मौसम विज्ञान में विशेषज्ञता के क्षेत्र

इस क्षेत्र की कुछ शाखाएं निम्नलिखित हैं जिनमें कोई भी विशेषज्ञता कर सकता है -

*एयरोलोजी- यह ऐसी खुली हवा का अध्ययन है जो पृथ्वी की सतह के आसपास नहीं होती।

*एयरोनोमी- यह ऊपरी वायुमंडल की भौतिकीय सम्पत्तियों का अध्ययन है।

*कृषि मौसम विज्ञान- कृषि मौसम विज्ञानी, फसलों पर मौसम के प्रभाव का तथा यह अध्ययन करते हैं कि मौसम विज्ञान के पूर्वानुमान किसानों को बेहतर फसल लगाने, अपनी फसल सुधारने तथा विपरीत मौसम स्थितियों से अपनी फसल बचाने में किस तरह सहायता करते हैं।

*अनुप्रयुक्त मौसम विज्ञान- अनुप्रयुक्त मौसम विज्ञानी विमान डिजाइनिंग, वायु प्रदूषण नियंत्रण, वास्तुकलात्मक डिजाइन, वातानुकूलन संयंत्रों, क्षेत्र के पर्यटन के सुधार, सौर एवं वायु ऊर्जा परियोजनाओं तथा शहरी नियोजन जैसी दैनिक समस्याओं पर विशिष्ट अनुप्रयोग के लिए मौसम सूचना का उपयोग करते हैं।

                मछुवाही, कृषि, नागर विमानन, सैन्य परिचालन, हवाई तथा समुद्री परिवहन, वायु प्रदूषण नियंत्रण, अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में और भू-जलवायु परिवर्तन (जैसे ग्लोबल वार्मिंग, ओज़ोन परत में क्षीणता) की प्रवृत्तियों के अध्ययन में मौसम विज्ञान अत्यधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

*जलवायु-विज्ञान- जैसा कि नाम से पता चलता है, यह लम्बे समय से किसी क्षेत्र के मौसम के संकलित रिकॉर्डों के आधार पर उस क्षेत्र की जलवायु का अध्ययन है।

*डायनामिक मौसम विज्ञान- जिन व्यक्तियों का गणित का ज्ञान अच्छा है, वे इस क्षेत्र में आ सकते है क्योंकि यह क्षेत्र वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के वर्णन के लिए संख्यात्मक मॉडल्स का सृजन करने से जुड़ा है।

*भौतिकीय मौसम विज्ञान- भौतिकीय मौसम विज्ञानी, वायुमंडल की कैमिस्ट्री पर बल देते हुए श्रेष्ठ संभावित रूप में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (जैसे विंडर एनर्जी) का उपयोग करने के उपाय तलाशते हैं।

*संक्षिप्त मौसम विज्ञान- इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ कम दबाव वाले क्षेत्रों, वायु के दबाव, ऊष्णकटि -बंधीय तूफानों, फ्रंट्स, दबाव तथा अन्य मौसम प्रणालियों पर निगरानी रखते हंै।

पात्रता अपेक्षाएं:

मौसम विज्ञान पाठ्यक्रम भारत में उतने प्रसिद्ध नहीं हैं जितने कि पश्चिमी देशों में। इसका मुख्य कारण हमारे यहां सूचना का अभाव है। कई संस्थान मौसम विज्ञान पाठ्यक्रम अधिस्नातक स्तर पर चलाते हैं। अधिस्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए, आप विज्ञान विधा के साथ 10+2 उत्तीर्ण होने चाहिएं, और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए आपने किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित क्षेत्र में बी।एससी। योग्यता पूर्ण की हो, स्नातक पाठ्यक्रम सामान्यत: तीन से चार वर्ष की अवधि के होते हैं, मास्टर पाठ्यक्रम दो वर्ष की अवधि के होते हैं और जो इस क्षेत्र में अनुसंधानकर्ता अथवा वैज्ञानिक बनना चाहते हैं उन्हें प्राय: मौसम विज्ञान में एक पी।एच।डी। कार्यक्रम करना होता है और इस कार्यक्रम को पूरा करने में सामान्यत: लगभग तीन वर्ष लगते हैं।

मौसम विज्ञान में एक वर्ष का डिप्लोमा कार्यक्रम भी है, लेकिन यदि आप इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाना चाहते हैं तो स्नातक पाठ्यक्रम को वरीयता दें, डिप्लोमा पाठ्यक्रम उन व्यक्तियों के लिए अच्छा हो सकता है जो भौतिकी या गणित में कोई स्नातक डिग्री कर चुके हैं और इस क्षेत्र में आगे बढऩा चाहते हैं।

मौसम विज्ञान पाठ्यक्रमों में छात्रों को सामान्यत: मौसम विज्ञान, मौसम मापन तथा विश्लेषण, मौसम पूर्वानुमान, वायुमंडलीय भौतिकी और थर्मोडायनामिक्स, विश्व वायुमंडल, समुद्री मौसम विज्ञान आदि के बुनियादी सिद्धांतों के बारे में पढ़ाया जाता है, डाटा संकलन, विश्लेषण तथा पूर्वानुमान जैसे कौशल एवं कंप्यूटर मॉडलिंग भी पाठ्यक्रम में शामिल किए जाते हैं।

परिचालन, सिनोप्टिक, भौतिकीय, पर्यावरण या  जल-मौसम विज्ञानियों जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों के लिए प्राय: किसी मास्टर डिग्री की आवश्यकता होती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आई।एम।डी।) संघ लोक सेवा आयोग (यू।पी।एस।सी।) के माध्यम से ग्रेड-ढ्ढढ्ढ में उम्मीदवारों की भर्ती करता है, जिसके लिए न्यूनतम योग्यता निम्नानुसार निर्दिष्ट है:-

*इंजीनियरी या कंप्यूटर विज्ञान या कंप्यूटर अनुप्रयोग में बी।टेक। या

*इलेक्ट्रॉनिकी में बी।टेक या एम।एससी।

*भौतिकी, गणित, अनुप्रयुक्त भौतिकी या अनुप्रयुक्त गणित में एम।एससी। तथा एस्ट्रोनोमी या एस्ट्रोफिजिक्स एक विषय रहा हो, या

*मौसम विज्ञान, वायुमंडल विज्ञान या भू-भौतिकी एक विषय के रूप में लेकर मास्टर डिग्री, या

चयनित छा़त्रों को आई।एम।डी। कैंपस, पुणे या नई दिल्ली में मौसम विज्ञान में एक वर्ष का उच्च पाठ्यक्रम करना पड़ता है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग समय-समय पर रोजग़ार कार्यालय के माध्यम से भी विज्ञान-स्नातकों की भर्ती करता है।

मौसम विज्ञान में कहां अध्ययन करें?

भारत में अत्यधिक लोकप्रिय पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैं:-

* आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम

*आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ आब्जर्वेशनल साइसेंस, नैनीताल

*वायुमंडल एवं समुद्री विज्ञान केन्द्र, भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर

*कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, केरल

*आई.आई.टी. दिल्ली

* आई.आई.टी. खडग़पुर

*भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे

*महाराजा सायाजीराव बडौदा विश्वविद्यालय, वड़ोदरा

*शिवाजी विश्वविद्यालय, विद्यानगर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र

किसी मौसम विज्ञानी के लिए रोजग़ार अवसर

जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग के मामले तथा सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे मौसम विज्ञान में कॅरिअर  लोकप्रिय होता जा रहा है। मौसम विज्ञानी प्राय: कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सरकारी एजेंसियों तथा प्राइवेट कंपनियों द्वारा अनुसंधानकर्ता या अध्यापकों के रूप में रखे जाते हैं। मौसम प्रसारण केन्द्र, सैन्य विभाग, पर्यावरण से जुड़ी एजेंसियां, रेडियो और दूरदर्शन केन्द्र, औद्योगिक मौसम अनुसंधान संस्थाएं उपग्रह अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र तथा विश्व मौसम केन्द्र भी मौसम विज्ञानियों या जलवायु विज्ञानियों की सेवाएं लेते हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अतिरिक्त, सभी समाचार चैनल तथा एजेंसियां प्रतिदिन मौसम पूर्वानुमान प्रसारित करती हैं। प्रत्येक हवाई-अड्ड़े पर एक मौसम विभाग कार्यालय भी होता है, जहां योग्य मौसम विज्ञानियों की आवश्यकता होती है। निजी वास्तुकला फर्में मकानों, भवनों, कार्यालयों, सेतुओं और फ्लाइओवर्स आदि की डिजाइनिंग के समय सलाहकार के रूप में प्राय: मौसम विज्ञानियों की सेवाएं लेती हैं।

निर्माण एजेंसियां, परिवहन फर्में, तथा विद्युत उत्पादन और कृषि विभाग भी समय-समय पर रोजग़ार विज्ञापित करते हैं। आई।आई।टी।एम।, आर्यभट्ट ऑब्जर्वेशनल साइंस अनुसंधान संस्थान, भारतीय विज्ञान संवर्धन एसोसिएशन, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद्, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग एजेंसी, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, जैसे मौसम विज्ञान केन्द्र एवं संस्थान अनुसंधान कर्ता तथा वैज्ञानिको की भर्ती कर सकते हैं। अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र तथा एयरलाइन कंपनियां भी मौसम की स्थितियों के आधार पर उपग्रहों के प्रक्षेपण तथा उड़ानों के समय निर्धारण में सहायता के लिए मौसम विज्ञानियों की भर्ती करती हैं।

भौतिकीय मौसम विज्ञानी प्रकाश, ऊर्जा, ध्वनि एवं रेडियो तरंगों के वायुमंडल में संचरण का अध्ययन करते हंै। सिनोप्टिक मौसम विज्ञानी नए मौसम पूर्वानुमान उपकरणों तथा प्रौद्योगिकी का विकास कर सकते हैं। पर्यावरण मौसम विज्ञानी प्रदूषण या खाद्य पदार्थ, ईंधन या पानी की कमी के कारण होने वाली समस्याओं का अनुमान लगा सकते हैं। इसलिए, विभिन्न विषय विभिन्न क्षेत्रों में रोजग़ार दिला सकते हैं।

उपग्रह आधारित सेवाओं के बढऩे के साथ ही, मौसम विज्ञान में कॅरिअर का भविष्य इस समय पर्याप्त उज्ज्वल दिखाई देता है।

वेतन एवं कार्य-स्थितियां

मौसम विज्ञानियों का प्रारंभिक वेतन उनकी शिक्षा, अनुभव तथा रोजग़ार के स्थान पर निर्भर होता है। प्रारंभ में ऐसा कोई भी व्यक्ति सामान्यत: 20000 रु. से 25000 रु. प्रतिमाह के लगभग प्राप्त कर सकता है, किंतु क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव के बढऩे के साथ ही वेतन में भी पर्याप्त वृद्धि होती है। कुछ अनुभव के साथ कोई भी व्यक्ति लगभग 35000/- रु. प्रति माह आसानी से अर्जित कर सकता है।

राज्य चालित कार्यालयों के मौसम विज्ञानी राज्य वेतनमान के अनुसार, जबकि आई.एम.डी. तथा आई.एस.आर.सी संगठनों और केन्द्रीय सरकार के रोजग़ार में वेतन, वेतन आयोग के अनुसार प्राप्त करते हैं।

अधिकांश वायुमंडल वैज्ञानिक प्राय: कार्यालयों के अंदर, मौसम केन्द्रों में या प्रयोगशालाओं के कार्य करते हैं, किंतु उन्हें डाटा एकत्र करने, बबंडर आने जैसी मौसम की घटनाओं पर निगरानी के लिए कभी-कभी क्षेत्रगत कार्य करने के लिए बाहर भी जाना पड़ता है। ऐसी स्थितियों में जमीन से ही मौसम के वास्तविक हालात पर निगरानी कर सकते हैं या ऊपर से (हवाई जहाज से) इनका अध्ययन कर सकते हैं। आपात स्थितियों में, इन्हें देर रात तक कार्य करना पड़ सकता है। कभी-कभी ये वैज्ञानिक यह अध्ययन करने के लिए कि मौसम की वास्तविक स्थितियों में वस्तुएं कैसे कार्य करती हैं मौसम की घटनाओं की छोटी प्रतिकृतियां भी सृजित कर सकते हैं।

अब कंप्यूटर मॉडल्स से पूर्वानुमानों की परिशुद्धता में काफी सुधार आया है, जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए अनुकूल बनाए जा सकते हैं। व्यवसायों की इन्वेंटरी एवं डिलीवरी सेवाओं के अधिक कुशल प्रबंधन के लिए मौसम की रिपोर्टों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। प्रयोक्ता कंपनियां भी, सौर एवं वायु विद्युत के क्रय-विक्रय के लिए मौसम पूर्वानुमान रिपोर्टों का सहारा लेती हैं। इसलिए इस क्षेत्र में रोजग़ार के अवसर बढ़ते जा रहे हैं।

मौसम विज्ञानी रोजग़ार के लिए विदेशों में आवेदन कर सकते हैं, जहां वे आकर्षक वेतन प्राप्त कर सकते हैं, अमरीका में, यह नोट किया गया कि यहां मौसम विज्ञानियों के लिए रोजग़ार के अवसर औसत की तुलना में 9त्न तक अधिक बढ़ रहे हैं। 2015 में, अमरीका में एक वायुमंडल वैज्ञानिक का मध्यम वेतन 89,820 अमरीकी डॉलर प्रति वर्ष के लगभग था।

(लेखिका एक स्तंभकार हैं। ई-मेल –pratibhatana@gmail.com)