नौकरी फोकस


Volume-27, 6-2 October, 2018

 

 

न्यायिक विज्ञान में केरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

डि टेक्टिव मूवीज़ तथा स्पाई थ्रिलर्स में हम देखते हैं कि अपराध करने वाले व्यक्ति का पता लगाने के लिए जांचकर्ता किस तरह सुराग ढूंढ़ते हैं. तो ऐसी चीजों की भी खोज करते हैं जो उन्हें अपराधियों तक पंहुचा सकें. वे तथ्यों का पता लगाने और अपने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए न्यायिक विज्ञान का भी व्यापक रूप में उपयोग करते हैं. इससे हम देख सकते हैं कि न्यायिक विज्ञान का विषय कितना महत्वपूर्ण है. सामान्य रूप में कहें तो न्यायिक विज्ञान विधि के मामलों पर भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, कम्प्यूटर विज्ञान और इंजीनियरी जैसे विज्ञान के विभिन्न विषयों का अनुप्रयोग है. न्यायिक विज्ञान, भौतिकीय प्रमाण के विश्लेषण के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से आधारित सूचना उपलब्ध करा कर आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जांच के दौरान, अपराध के घटना-स्थल से या किसी व्यक्ति से प्रमाण एकत्र किए जाते हैं, किसी अपराध प्रयोगशाला में उनका विश्लेषण किया जाता है और उसके बाद अपराधी पर दोष सिद्धि के लिए तथा मामले पर न्याय करने के लिए परिणाम प्रस्तुत किए जाते हैं. यह समझना आसान है कि  अपराध की प्रत्येक घटना अलग होती है और प्रत्येक मामला अपनी निजी चुनौतियां प्रस्तुत करता है. ऐसे मामलों को रोचक मानने वाले और इन चुनौतियों को पूरा करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति न्यायिक विज्ञान मे केरिअर के बारे में सोच सकते हैं. न्याय एवं जन-सुरक्षा के समर्थन में न्यायिक विज्ञान एक सशक्त साधन हो सकता है. उपयुक्त अनुप्रयोग किए जाने पर यह निर्दाेष व्यक्तियों को बचाता है और अपराधी पर दोष सिद्धि में सहायता करता है. न्यायिक वैज्ञानिकों का कार्य जांच के दौरान भौतिकीय प्रमाण को एकत्र करना, सुरक्षित रखना तथा उसकी जांच करना है.

इस विषय को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है. प्रथम वर्ग न्यायिक औषधि से संबद्ध है जिसमें न्यायिक रोग विज्ञान, मनश्चिकित्सा, मनोविज्ञान और ओडोंटोलोजी शामिल है.

दूसरा  वर्ग प्रयोगशाला विज्ञान का है, जिसमें रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, विष विज्ञान, बैलिस्टिक्स, फिंगरप्रिंट, लक्षित प्रलेख और धारणा शामिल है.

अंतिम वर्ग क्षेत्र विज्ञान है जिसमें अपराध घटना की जांच शामिल और इसमें अन्य आगजनी तथा विस्फोट के मामलों एवं नशीले पदार्थों को बनाने तथा वितरण-स्थानों की जांच भी निहित है. न्यायिक विज्ञान में अन्य के साथ-साथ अपराधी पहचान प्रणाली बे्रन इलेक्ट्रिकल ऑसिलेशन,  सिग्नेचर प्रोफाइलिंग, नार्को- विश्लेषण, पॉलीग्राफ जांच, ऑडियो-वीडियो टेप प्रमाणन प्रणाली, हस्तलेख विश्लेषण, विषय शामिल हैं. न्यायिक विज्ञान स्वयं में एक व्यापक विषय है और इसकी बहु- शाखाएं तथा विशेषज्ञताएं हैं. इनमें से कुछ का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:-

फोरेसिंक सीरोलोजी:- न्यायिक विज्ञान की यह शाखा विभिन्न अपराधों में प्रस्तुत किए गए शारीरिक प्रमाणों जैसे मानव हत्या, शारीरिक हमला, चोरी, डकैती, आदि की जांच करने से संबंधित है.

न्यायिक मनश्चिकित्सा:- मनश्चिकित्सा मानव के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित एक विषय है. जब कोई व्यक्ति अपराध करता है तो वह अपराध उस व्यक्ति की मनोदशा को दर्शाता है. न्यायिक विज्ञान आपराधिक घटनाओं के मानवीय पहलुओं को समझने के लिए तंत्रिका विज्ञान में नैदानिक अनुभव तथा अनुसंधानों में विगत कथनों को एकीकृत करता है.

न्यायिक इंजीनियरी: न्यायिक इंजीनियरी सडक़ दुर्घटनाओं, आग लगाने की घटनाओं और अभिघात के अन्य मामलों के ऐसी उलझनों की जांच करती है जिनका व्यापक अन्वेषण किए जाने की आवश्यकता होती है.

न्यायिक वास्तुकला: न्यायिक वास्तुकार शवगृहों और न्यायिक विज्ञान संस्थानों का अभिकल्पन करते हैं. यह वास्तुकला एवं न्यायिक विज्ञान का सम्मिश्रण होता है.

न्यायिक प्रयोगशाला विश्लेषण: इस क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों का कार्य अपराध से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए रक्त आदि का सूक्ष्म विश्लेषण करने सहित डीएनए जांच संचालित करना है.

न्यायिक रोग विज्ञान: अभिघात अथवा मृत्यु के कारणों, समय तथा तरीके का पता लगाने के लिए पोस्ट मार्टम का संचालन इस शाखा के अंतर्गत आता है.

न्यायिक पशुचिकित्सा विज्ञान: पशु- शव परीक्षण संचालन, पशुओं की अकारण मौतों की जांच करना इस शाखा के मुख्य कार्य हैं.

न्यायिक विष विज्ञान: यह शाखा मुख्य रूप से अपराधों में रसायनों, विष आदि की प्रकृति एवं प्रयोगों की जांच करना और मनुष्य तथा अन्य जीवित जीवों पर रसायनों के प्रतिकूल प्रभावों की भी जांच करने से संबंधित है.

वन्यजीव न्यायिक विज्ञान: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह शाखा पशुओं और वन्यजीवों से जुड़ी है. कई मामलों में पशुओं की चमड़ी हाथी दातों के ऊंचे मूल्य दिए जाते हैं जिसके कारण अपराधी पशु हत्या और पशु चमड़ी तथा दांतों आदि की तस्करी करते हैं. वन्य जीव न्यायिक विज्ञान, अपराधियों को पकडऩे और संरक्षित पशुओं के गैर- कानूनी तस्करी पर नियंत्रण रखने में सहायता करने के लिए अपराध के समय तथा स्थितियों की जांच करने में सहायता करता है.

न्यायिक ओडोंटोलोजी: न्यायिक ओडोंटोलोजी ऐसे अपराधों से संबद्ध अभिघात या मृत्यु को स्पष्ट करने के लिए दंत-संरचना को समझने से जुड़ा है जिन अपराधों में चेहरे, दांत पर हमला किया गया हो और जिसके परिणामस्वरूप अभिघात या मृत्यु हुई हो.

न्यायिक वाक् विज्ञान: यह शाखा, बोलने वाले व्यक्ति का पता लगाने के उद्देश्य से आवाज रिकॉर्ड करने और प्रौद्योगिकीय उपस्करों का प्रयोग करके आवाज के नमूनों का विश्लेषण करने से संबद्ध है. आवाज (वॉइस) रिकार्डिंग को विधि न्यायालय में प्रमाण समझा जाता है और यह अपराधों के प्रमाणों का पता लगाने में महत्वपूर्ण सहायक सिद्ध हो सकता है.

न्यायिक विज्ञान का अध्ययन: एक स्वतंत्र विषय के रूप में न्यायिक विज्ञान का अध्ययन स्नातक स्तर पर कराया जाता है. देश में अनेक संस्थान, दोनों- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में, न्यायिक विज्ञान में बी.एससी. पाठ्यक्रम चलाते हैं. इस क्षेत्र में एक व्यवसायी बनने एवं केरिअर  की बेहतर संभावनाओं के लिए कोई स्नातकोत्तर योग्यता अधिक वांछनीय होती है. न्यायिक विज्ञान में बी.एससी. पाठ्यक्रम के लिए उम्मीदवार ने १०+२ स्तर पर विज्ञान विषय पढ़ा हो. न्यायिक विज्ञान में मास्टर डिग्री के लिए सभी विज्ञान स्नातक पात्र होते हैं. स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कुछ विश्वविद्यालय अपनी निजी प्रवेश परीक्षा संचालित करते हैं. अन्य विश्वविद्यालय, स्नातक योग्यता में प्राप्त अंकों के आधार पर प्रवेश देते हैं.

औषधि में डिग्री (एमबीबीएस) धारी व्यक्ति भी न्यायिक विज्ञान में कुछ विशेषज्ञताएं कर सकते हैं.

न्यायिक विज्ञान एवं समवर्गी विषयों में पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थान अपराध घटाने और अपराधियों का पता लगाने के महत्व को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने नई दिल्ली में लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराध विज्ञान एवं न्यायिक विज्ञान संस्थान की स्थापना की है. गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध यह संस्थान अपराध विज्ञान में एम.ए. तथा न्यायिक विज्ञान में एम.ए. के रूप में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाता है. पहले पाठ्यक्रम के लिए सभी विषयों के स्नातक पात्र होते हैं. दूसरा पाठ्यक्रम केवल विज्ञान स्नातकों के लिए खुला है.

संस्थान ने न्यायिक विज्ञान अभिरुचि एवं क्षमता परीक्षा संचालित करने की योजना भी प्रारंभ की है. विज्ञान के निर्दिष्ट विषयों में स्नातकोत्तर योग्यताधारी व्यक्तियों को परीक्षा में बैठने के लिए पात्र माना जाता है. यह यूजीसी-नेट/गेट आदि की पद्धति पर एक जांच परीक्षा होती है.

गुजरात न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय (जीएफएसयू), अहमदाबाद न्यायिक विज्ञान एवं अन्य संबंधित विषयों के क्षेत्र में एक अन्य मुख्य संस्थान है.

इसके कुछ पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैं:-

एम.एससी न्यायिक विज्ञान

एम.एससी डिजिटल न्यायिकी एवं सूचना सुरक्षा.

एम.बीए. वित्त न्यायिक लेखाकरण में विशेषज्ञता सहित

एम.एससी. न्यायिक ओडोंटोलोजी

न्यायिक प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा

न्यायिक प्रलेख जांच में पीजी डिप्लोमा

फिंगर प्रिंट विज्ञान में पीजी डिप्लोमा

न्यायिक विष विज्ञान में पीजी डिप्लोमा

न्यायिक लेखाकरण में पीजी डिप्लोमा

न्यायिक नर्सिंग में पोस्ट बेसिक डिप्लोमा

जीएफएसयू अनेक ऑनलाइन ई-पाठ्यक्रम भी चलाता है जैसे प्रमाणित धोखाधड़ी जांच व्यवसायी, प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण परीक्षक, कंप्यूटर न्यायिकी में प्रमाणपत्र डिप्लोमा आदि. सूचना सुरक्षा से संबंधित ई- पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं:- प्रमाणित सूचना सुरक्षा व्यवसायी, भारतीय बैंक संघ एसोसिएशन (आईबीए)/भारतीय रिजर्व बैंक अनुमोदित प्रमाणित सूचना सुरक्षा व्यवसायी पाठ्यक्रम और साइबर सुरक्षा में प्रमाणपत्र डिप्लोमा. विश्वविद्यालय डॉक्टरल तथा अध्येतावृत्ति पाठ्यक्रम भी चलाता है.

अहमदाबाद स्थित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना गुजरात सरकार द्वारा की गई थी और यह न्यायिक विज्ञान में एम.एससी. तथा एम.फिल. पाठ्यक्रम, साइबर सुरक्षा तथा साइबर न्यायिकी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाता है.

मुंबई स्थित न्यायिक विज्ञान संस्थान न्यायिक विज्ञान में बी.एससी. तथा एम.एससी. पाठ्यक्रम और दो स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम पहला न्यायिक विज्ञान में और दूसरा साइबर तथा डिजिटल न्यायिकी एवं संबंधित विधि में चलाता है. औरगंाबाद स्थित राजकीय न्यायिक विज्ञान संस्थान भी ऐसे ही पाठ्यक्रम चलाता है. पंजाब विश्वविद्यालय का एक न्यायिक विज्ञान तथा अपराध विज्ञान संस्थान न्यायिक विज्ञान एवं अपराध विज्ञान में एम.एससी. पाठ्यक्रम चलाता है. इसके अतिरिक्त, देश के अनेक विश्वविद्यालय न्यायिक विज्ञान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाते हैं. इनमें से कुछ विश्वविद्यालय निम्नानुसार हैं:-

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी

उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद

गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यलाय, दिल्ली

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक

डॉ. हरि सिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर

गुरू घासी दास विश्वविद्यालय, बिलासपुर

कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़

कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र, हरियाणा

मुंबई विश्वविद्यालय

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ

गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद

कार्य अवसर

न्यायिक विज्ञानी के रूप में सरकारी तथा निजी दोनों क्षेत्रों में कार्य करने के अवसर मिलते हैं. न्यायिक विज्ञान में आपकी विशेषज्ञता के क्षेत्र के आधार पर भी आपको कार्य-अवसर मिलते हैं. इसके व्यापक कार्य-क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं- प्रलेखों की प्रामाणिकता का पता लगाना, अपराध अन्वेषण, बहु- आपदा प्रबंधन, साइबर अपराध अन्वेषण, पर्यावरण परिरक्षण, उपभोक्ता परिरक्षण, मानव अधिकार, बौद्धिक संपदा अधिकार परिरक्षण.

केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न केंद्रों पर अनेक न्यायिक विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अपनी निजी न्यायिक प्रयोगशाला है. न्यायिक विज्ञानियों की ऐसी सभी प्रयोगशालाओं में आवश्यकता होती है.

अकादमिक जीवन में रुचि रखने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर यह विषय पढ़ाने का विकल्प ले सकते हैं. न्यायिक विज्ञान अनुसंधान के व्यापक अवसर देता है.

यदि आपका झुकाव पुलिस बल में कार्य ग्रहण करने की और है तो न्यायिक विज्ञान में कोई योग्यता आपके लिए सहायक हो सकती है. अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियों को भी न्यायिक विज्ञानियों की सेवा की आवश्यकता होती है. कई निजी गुप्तचर एजेंसियां बड़े तथा महानगरों में कार्यरत हैं. ये एजेंसियां न्यायिक विज्ञानियों की सेवाओं पर निर्भर होती हैं. ये सेवाएं पूर्णकालिक या अंशकालिक आधार पर हो सकती हैं. बड़े अस्पतालों, विधि फर्मों में भी रोज़गार के अवसर उपलबध हो सकते हैं.

न्यायिक विज्ञान के किसी या कई निर्दिष्ट क्षेत्रों में आप अपना निजी कार्य भी कर सकते हैं. हस्तलेख विश्लेषण ऐसा एक क्षेत्र हो सकता है.

विश्व डिजिटल की दिशा में आगे बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में वित्तीय संव्यवहार ऑनलाइन तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप में किए जा रहे हैं. इसके साथ ही साइबर अपराधों में भी वृद्धि हो रही है. इन मामलों को सुलझाने के लिए साइबर न्यायिकी विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. इसलिए यह क्षेत्र भी केरिअर  के अवसरों के लिए एक उभरता हुआ क्षेत्र है. न्यायिक विज्ञान की अन्य शाखाओं में इन व्यवसायियों की नियमित मांग होती है. हाल ही में भारतीय बैंक संघ तथा भारतीय रिज़र्व बैंक ने न्यायिक ऑडिटर्स की अनेक रिक्तियां विज्ञापित की थीं.

न्यायिक विज्ञान में केरिअर हेतु उपयुक्तता

न्यायिक विज्ञान में कोई केरिअर  ऐसे व्यक्तियों  के लिए अधिक उपयुक्त होता है जो लम्बे समय तक किसी कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो साहसी होते हैं और पर्याप्त धैर्यशील होते हैं. व्यापक सोच, एकजुट होकर कार्य करने की क्षमता विस्तृत एवं सशक्त विश्लेषिक कौशल आपके लिए अत्यधिक सहायक हो सकते हैं. यदि आप न्यायिक विज्ञान के क्षेत्र में कोई केरिअर चुनते हैं तो आपको श्रेष्ठ करने के लिए इन गुणों का विकास करने के प्रयास करने चाहिएं.

लेखक मुंबई में एक केरिअर सलाहकार हैं ई-मेल: v2j25@yahoo.in