नौकरी फोकस


Volume-29, 20-26 October, 2018

 

 

 

अर्थशास्त्र में पारम्परिक तथा नए कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

प्रमुख अर्थशास्त्री तथा नोबल पुरस्कार से सम्मानित पॉल ए सैमुअल्सन ने एक बार कहा था-यदि मैं किसी राष्ट्र की अर्थशास्त्र की पाठ्य पुस्तकें लिख सकता हूं तो मुझे यह चिंता नहीं है कि उसके कानून कौन लिखता है या उसकी उच्च संधियां कौन तैयार करता है. एक अर्थशास्त्री के दृष्टिकोण से यह कथन अर्थशास्त्र के महत्व को प्रकट करता है. यह मात्र एक परिप्रेक्ष्य है. सच तो यह है कि अर्थशास्त्र हर दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है. अर्थव्यवस्था में विकास और परिवर्तन समाज के कई वर्गों को प्रभावित करते हैं. आर्थिक एवं सामाजिक विकास आपस में जुड़े हैं. निरंतर एवं सर्वतोन्मुखी आर्थिक प्रगति प्रत्येक सरकार के एजेंडा पर होती है. यह विषय विभिन्न रोचक पारम्परिक तथा नए कॅरिअर के अवसर प्रदान करता है. पारम्परिक कॅरिअर के अवसर अधिकांशत: अध्यापन और सामान्य अनुसंधान में रहे हैं. नए अवसर सर्वत्र, सभी के लिए सृजित होते हैं.

अर्थशास्त्र क्या है ?

अर्थशास्त्र को दोनों-शुद्ध विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान माना जाता है. कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अर्थशास्त्र में किसी समस्या का समाधान एक वैज्ञानिक सोच/पद्धति लागू करके किया जाता है, जिसमें सूचना (डाटा) का संकलन एवं विश्लेषण करना तथा संबंधित कानून एवं सिद्धांत बनाना निहित होता है. इस तरह यह विज्ञान का एक विषय है. अन्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार इसे सामाजिक विज्ञान के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. क्योंकि यह मानव की आचरण पद्धति का अध्ययन करता  है. यह वर्गीकरण इस विश्वास पर आधारित है कि अर्थशास्त्र का मूल कार्य यह अध्ययन करना है कि व्यक्ति, परिवार, संगठन एवं राष्ट्र अपने लाभ को अधिकतम बनाने के लिए अपने सीमित संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं.

अर्थशास्त्र के दो प्रभाग हैं-सूक्ष्म अर्थशास्त्र (माइक्रो इकोनॉमिक्स) और वृहद् अर्थशास्त्र (मैक्रो इकोनॉमिक्स). सूक्ष्म अर्थशास्त्र इस तथ्य से जुड़ा है कि लोग क्या आर्थिक विकल्प (व्यय, बचत आदि) लेते हैं और ये विकल्प मांग एवं आपूर्ति परिदृश्य को किस तरह प्रभावित करते हैं. इसलिए यह व्यक्तियों, परिवारों, फर्मों आदि के आर्थिक व्यवहार का अध्ययन है. वृहद् अर्थशास्त्र, बड़ी अर्थव्यवस्था- राष्ट्रीय या वैश्विक से जुड़ी है. यह किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद, ब्याज दरों, मुद्रा स्फीति दर, रोजग़ार परिदृश्य जैसे मामलों को ्रकवर करता है. यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर आयात एवं निर्यात के संपूर्ण प्रभाव से भी संबंध रखता है. सूक्ष्म अर्थशास्त्र किसी एक उद्योग या संगठन की आर्थिक समस्याओं का निपटान करता है, जबकि वृहद् अर्थशास्त्र अर्थव्यवस्था का संपूर्ण रूप में निपटान करता है. ये दोनों शाखाएं व्यवसाय विश्लेषण तथा निर्णय लेने में प्रत्यक्ष रूप में और परोक्ष रूप में एक मुख्य भाग के रूप में योगदान करती हैं.

अर्थशास्त्र के एक छात्र के रूप में आप आर्थिक सिद्धांतों और प्रणालियों, आपूर्ति एवं मांग विधियों, उत्पादक के कारकों, आर्थिक विकास तथा सामाजिक विकास के बीच संबंध, मुद्रा स्फीति, धन आपूर्ति, उपभोक्ता व्यवहार तथा अनेक अन्य विषयों को पढ़ते एवं तलाशते हैं.

शाखाएं/विशेषज्ञताएं :

अर्थशास्त्र की अनेक शाखाएं हैं, जिन्हें विशेषज्ञता के रूप में माना जा सकता है. इनमें से कई शाखाओं का विवरण नीचे दिया गया है :-

अनुप्रयुक्त अर्थशास्त्र :

अनुप्रयुक्त अर्थशास्त्र आर्थिक सिद्धांतों को व्यवसाय प्रक्रियाओं के अमल में लाता है. यह कल्पित विचारों को मूर्त प्रक्रियाओं में परिवर्तित करता है. किसी विषय की व्यवहार्यता इसे अधिक प्रासंगिक बनाती है और यही कारण है कि अर्थशास्त्र की यह शाखा व्यापक मांग कैसे रहती है.

व्यवहारात्मक अर्थशास्त्र : अर्थशास्त्र की यह शाखा अपेक्षाकृत विलंब से विकसित हुई है किंतु तीव्र गति से अग्रसर हो रही है. व्यवहारात्मक अर्थशास्त्र यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि मानव मनोविज्ञान आर्थिक निर्णयों को किस तरह निर्धारित करता है और किस तरह, व्यक्ति द्वारा लिए गए आर्थिक निर्णय अनिवार्य तौर पर तर्कसंगत और विवेकपूर्ण नहीं होते. यह विकल्पों, प्रभावों आदि पहलुओं से जुड़ा है.

विकास अर्थशास्त्र : जैसा कि इस शब्द से ही स्पष्ट है विकास अर्थशास्त्र की एक वह शाखा है जो विकासशील एवं अल्प विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करती है. यह, स्वास्थ्य, रोजग़ार, शिक्षा, कल्याण आदि से संबंधित कार्य नीतियों को किसी राष्ट्र के संपूर्ण विकास की ओर अग्रसर करने और उसे प्रगतिशील एवं समृद्ध बनाने के कार्यों से संबद्ध है. भारत जैसे किसी विकासशील देश के लिये यह अधिक महत्व रखता है.

ग्रामीण अर्थशास्त्र : ग्रामीण अर्थशास्त्र ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मामलों-जो कृषि या गैर-कृषि क्षेत्र-दोनों से संबंधित हो सकते हैं, के बारे में होता है. भूमि उपयोग, ग्रामीण मजदूरी प्रव्रजन, गांव-शहर विभाजन तथा आय में विषमता आदि का अध्ययन एवं जांच कार्य इस विषय के अंतर्गत किया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र:

अर्थशास्त्र की यह शाखा अध्ययन का एक ऐसा क्षेत्र है जो राष्ट्रों के बीच वस्तुओं तथा सेवा-व्यापार से संबंधित है. दूसरे शब्दों में, अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र देशों के आर्थिक पारस्परिक प्रभाव तथा अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्व आर्थिक कार्य पर प्रभाव से संबंधित क्षेत्र है. बढ़ रहे सार्वभौमिकरण ने अर्थशास्त्र की इस शाखा को लोक प्रसिद्ध बना दिया है.

श्रम अर्थशास्त्र : श्रमिकों का योगदान किसी भी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है. श्रम अर्थशास्त्र श्रम की गुणवत्ता/मात्रा तथा उत्पादकता के बीच संबंध को समझता है. श्रम गतिशीलता, श्रमिक कल्याण और संबंधित मामले इस विषय के अंतर्गत आते हैं.

प्रबंधकीय अर्थशास्त्र : प्रबंधकीय अर्थशास्त्र में आर्थिक सिद्धांत, संभार तंत्र तथा व्यवसाय निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रयुक्त साधनों का अध्ययन निहित है. यह उन आर्थिक साधनों से संबद्ध है जो व्यवसाय निर्णय लेने में प्रासंगिक हैं. यह बेहतर परिणामों का पता लगाने में प्रबंधकों की सहायता करने हेतु विभिन्न आर्थिक संकल्पनाओं को अनुप्रयोग में लाता है, जैसे कि मांग एवं आपूर्ति, प्रतिस्पर्धा, संसाधन आवंटन तथा आर्थिक दुविधा.

इकोनॉमीट्रिक्स : इकोनॉमीट्रिक्स अर्थशास्त्र की एक विशिष्ट शाखा है जो व्यवसाय समाधान तथा आर्थिक समस्याओं का पता लगाने के लिए डाटा, विश्लेषण साधनों को प्रयोग में लाता है. इकोनॉमीट्रिक्स के ज्ञान से वित्त, विपणन आदि में पूर्वानुमान लगाने और निर्णय लेने में सहायता हेतु डाटा को मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है. इसमें निर्धारण, पूर्वानुमानन तथा निष्कर्ष पद्धतियां निहित होती हैं. डाटा विश्लेषण विज्ञान की उभर रही विधा इकोनॉमीट्रिक्स पर अत्यधिक निर्भर होती है.

पर्यावरणीय अर्थशास्त्र, कृषि अर्थशास्त्र आदि जैसी कुछ अन्य शाखाएं भी हैं.

अध्ययन कहां करें ?

प्राथमिक रूप से अर्थशास्त्र एक सामान्य विषय है जो पूरे विश्व में सभी विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में पढ़ाया जाता है. तथापि, कुछ ऐसी प्रमुख संस्थाएं भी हैं जो अर्थशास्त्र और संबंधित विषयों में महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम चलाते हैं. भारत में ऐसी संस्थाओं और उनके पाठ्यक्रमों की एक संकेतात्मक सूची नीचे दी गयी है :-

दिल्ली अर्थशास्त्र विद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है और यह बी.ए. एवं एम.ए. पाठ्यक्रम                 चलाता है.

केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के सहयोग में मद्रास अर्थशास्त्र विद्यालय सामान्य अर्थशास्त्र/वित्तीय अर्थशास्त्र/एक्चुरियल अर्थशास्त्र/पर्यावरणीय अर्थशास्त्र में एम.ए. पाठ्यक्रम संचालित करता है.

मुंबई स्थित इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान में अर्थशास्त्र में एम.एससी. कार्यक्रम चलाया जाता है.

गोखले संस्थान के नाम से प्रसिद्ध गोखले राजनीतिविज्ञान एवं अर्थशास्त्र संस्थान पुणे में स्थित भारत का अर्थशास्त्र में एक सबसे पुराना अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संस्थान है. यह वित्तीय अर्थशास्त्र एवं कृषि अर्थशास्त्र में एम.एससी. कार्यक्रम संचालित करता है और आर्थिक विश्लेषण हेतु कंप्यूटर अनुप्रयोग में एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी चलाता है.

भारतीय सांख्यिकी संस्थान, नई दिल्ली का अर्थशास्त्र एंव नियोजन एकक मात्रात्मक अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ साइंस (एमएसक्यूई) पाठ्यक्रम संचालित करता है.

उक्त सभी संस्थान अर्थशास्त्र विषयों में डॉक्टरेट स्तर के अध्ययन के उत्कृष्ट अवसर भी प्रदान करते हैं.

अर्थशास्त्र में मास्टर कार्यक्रम संचालित करने वाले कुछ प्रसिद्ध विश्वविद्यालय नीचे दिए गए हैं :-

*जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली.
*बनारस हिंदू  विश्वविद्यालय.
*गुरुनानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर.
*अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय.
*उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर.
*वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान.
*गुलबर्ग विश्वविद्यालय, कर्नाटक.
*जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर.
*कल्याणी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल.
*शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर.
*जादवपुर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल.
*कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल.
*रांची विश्वविद्यालय.
*सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट.
*पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, शिलांग.
*कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर.
*केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम.

अनेक निजी (प्राइवेट) विश्वविद्यालयों ने पाठ्यक्रमों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शामिल किए हैं. इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से पहले इनके प्रत्यय पत्रों, शुल्क संरचना एवं महत्व की जांच कर लें.

कॅरिअर के विकल्प :

किसी अच्छे कॅरिअर के लिए अधिकांशत: आपको अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्रीधारी होना अपेक्षित होता है. अर्थशास्त्र में कोई अच्छी योग्यता प्राप्त करने के बाद आप विविध क्षेत्रों/व्यवसायों में कार्य करने के अवसर तलाश सकते हैं. इनमें से कुछ विशिष्ट क्षेत्र निम्नलिखित हैं.

अखिल भारतीय सेवा : संघ लोक सेवा आयोग मुख्यालय, नई दिल्ली भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा वार्षिक आधार पर संचालित करता है. ये ऐसी विशिष्ट सेवाएं है जिनमें आप नीति आयोग, भारत सरकार के मंत्रालयों और अन्य विभागों में कार्य करने के अवसर प्राप्त कर सकते हैं. अर्थशास्त्र/सांख्यिकी में स्नातक उम्मीदवार इन सेवाओं के लिए आवेदन करने के पात्र होते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां : अनेक अंतर्राष्ट्रीय निकाय जैसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास कांफ्रेंस (यूएनसीटीएडी), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) आदि को समय-समय पर अर्थशास्त्र में योग्यताधारी व्यक्तियों के साथ-साथ विभिन्न योग्यता रखने वाले व्यक्तियों की आवश्यकता होती है. ऐसी आवश्यकता परियोजना आधारित और अनुभवी व्यक्तियों के लिए हो सकती है.

बैंकिंग क्षेत्र : कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्रीधारी व्यक्तियों को अर्थशास्त्री के रूप में भर्ती करते हैं. इन पदों को विशेषज्ञ पद माना जाता है. इन बैंकों में मुख्य अर्थशास्त्री के पद को पदोन्नति अथवा लेटरल एंट्री द्वारा भरा जा सकता है. निजी बैंकों में भी अर्थशास्त्रियों की आवश्यकता होती है. भारतीय रिजर्व बैंक में, अर्थशास्त्र एवं संबंधित विषयों में स्नातकोत्तर उम्मीदवार ग्रेड अधिकारी-जो प्रबंधकीय पद होता है, के लिए आवेदन करने के पात्र होते हैं. बैंकों में अर्थशास्त्री सामान्यत: उनके नीति निर्माण/नियोजन विभाग में कार्य करते हैं. विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मॉनटरी निधि (आईएमएफ) आदि में सीमित अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं.

म्युचुअल फंड कंपनियां : म्युचुअल फंड कंपनियों में आप अधिकांशत: निवेश निर्णयों से जुड़े होते हैं. यहां आप पर इक्विटी अनुसंधानकर्ता तथा इक्विटी विश्लेषक के पदों के लिए विचार किया जा सकता है. इन भूमिकाओं में आपको शेयर खरीद तथा बिक्री करने के लिए स्टॉक का व्यापक अध्ययन करने और अनुशंसा करने के कार्य करने होते हैं. आपको डेब्ट इंस्ट्रूमेंटेशन, बांड्स आदि में निवेश अवसरों का पता लगाने और मूल्यांकन करने के कार्य भी करने होते हैं. अन्य पद निधि प्रबंधक के होते हैं जो अधिकांशत: अनुभवी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध होते हैं. देश में कार्यरत म्युचअल फंड कंपनियों की सूची एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इंडिया (आईएमएफआई) की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

स्टॉक ब्रोकिंग फम्र्स : इक्विटीज़ का अध्ययन करने और उनके भावी निष्पादन का अनुमान लगाने के लिए स्टॉक ब्रोकिंग फम्र्स भी अर्थशास्त्र की पृष्ठभूमि रखने वाले व्यक्तियों को सेवा में रखती हैं. फम्र्स ऐसे अध्ययन के निष्कर्षों का प्रयोग करती हैं और निवेशकों की निवेश योजना में सहायता करने के लिए उनसे साझा भी करती हैं. एंजल ब्रोकिंग, मोतीलाल सीसवाल, एडलवीस, आसित सी मेहता इंटरमीडिएटरीज़ लिमिटेड देश की कुछ अग्रणी स्टॉक ब्रोकिंग फम्र्स हैं. कई निजी बैंकों की भी उनकी निजी स्टॉक ब्रोकिंग शाखाएं हैं.

अन्य शीर्ष संस्थाएं : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बैंक संघ, राष्ट्रीय आवासन बैंक, भारतीय आयात-निर्यात बैंक, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक को भी अर्थशास्त्रियों की आवश्यकता होती है.

आर्थिक विश्लेषण : आर्थिक विश्लेषक के रूप में आप स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं या ऐसे विश्लेषण में निहित एजेंसियों से जुड़ सकते हैं. आप इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, बिजनेस लाइन, मिंट जैसे समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं (जैसे इकोनॉमिक साप्ताहिक) में अपने विश्लेषणात्मक लेख भी दे सकते हैं. मीडिया हाउस, न्यूज़ चैनलों आदि को भी आर्थिक विश्लेषकों की आवश्यकता होती है.

अध्यापन : अर्थशास्त्र में उपयुक्त योग्यता तथा अध्यापन में अभिरुचि रखने वाले व्यक्ति विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में आवेदन कर सकते हैं. व्यवसाय से जुड़े सभी स्कूलों को भी अर्थशास्त्र संकाय की आवश्यकता होती है. स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं को पढ़ाने के लिए कोई डॉक्टरल योग्यता अत्यधिक सहायक होगी.

डाटा विश्लेषण विज्ञान : विगत के कुछ वर्षों से यह विषय तीव्र गति पकड़ रहा है. व्यवसाय संगठनों ने बड़ी मात्रा में डाटा एकत्र किया है. भविष्य के रुझानों का अध्ययन करने और अनुमान लगाने के लिए कम्प्यूटेशनल साधनों ने इस डाटा का विश्लेषण करना आसान बना दिया है. डाटा विश्लेषण विज्ञान विपणन, मानव संसाधन, उत्पादन आदि जैसे व्यवसाय के कई पहलुओं में लागू होता है.

बड़े व्यवसायिक घरानों, बैंकों, ई-कॉमर्स कंपनियों में डाटा विश्लेषक के अवसर होते हैं.

अनुसंधान : अर्थशास्त्र अनुसंधान के शानदार अवसर देता है और अनुसंधान के विविध क्षेत्र हैं. विश्वविद्यालयों- दोनों भारतीय एवं विदेशी, में डॉक्टरल छात्र के रूप में अनुसंधान कार्य किया जा सकता है. आर्थिक अनुसंधान के महत्व को देखते हुए, ऐसे अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अनेक संस्थानों की स्थापना की गयी है. इनमें से कुछ संस्थानों के नाम नीचे दिए गए हैं :-

राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) नई दिल्ली.
आर्थिक विकास संस्थान, नई दिल्ली.
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली.
महिला विकास अध्ययन केंद्र, नई दिल्ली.
अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान, मुंबई.
राष्ट्रीय श्रमिक अर्थशास्त्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान, दिल्ली.
विकासशील समाज अध्ययन केंद्र, दिल्ली.
राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त एवं नीति संस्थान, नई दिल्ली.

फोर्ड फाउंडेशन, शास्त्री भारत-कनाडा संस्थान तथा कई अन्य निकाय अर्थशास्त्र  एवं संबंधित विषयों सहित अनेक विषयों में अनुसंधान अनुदान एवं अध्येतावृत्तियां प्रदान करते हैं.

जिन उम्मीदवारों ने अभी अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं की है, उन्हें अर्थशास्त्र में किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने का विकल्प लेने से पहले उस विषय के प्रति अपनी अभिरुचि का मूल्यांकन करना बेहतर होगा.

लेखक मुंबई में एक कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल : v2j25@yahoo.in