नौकरी फोकस


Volume-30, 27 October - 2 November, 2018

 
वाणिज्य में कॅरिअर

डॉ. शीतल कपूर

शिक्षा की एक विधा के रूप में वाणिज्य को, उत्पादक से उपभोक्ता को सामग्रियों और सेवाओं के विनियम जैसे व्यापार एवं व्यवसाय कार्यों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है. एक लोकप्रिय विधा के रूप में वाणिज्य छात्रों को बारहवीं कक्षा के बाद अपना कॅरिअर बनाने के अवसर देता है. विदेशी कंपनियों के लिए हमारे बाजारों के तीव्र गति से खुलने, जीडीपी के बढऩे और भारत सरकार द्वारा किए गए अनेक सुधारों के साथ ही, वाणिज्य के छात्र इस क्षेत्र में रोज़गार के व्यापक अवसरों की आशा कर सकते हैं. प्रगतिशील सेवा क्षेत्र लेखाकरण, बैंकिंग, बीमा, विज्ञापन, जनसंचार, जन संपर्क, स्टॉक मार्केट, पर्यटन, रिटेलिंग, व्यवसाय विधि, अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय, विपणन अनुसंधान, कराधान, अध्यापन आदि में रोज़गार के वृहद् अवसर देता है.
कॅरिअर के विकल्पों की बढ़ रही संख्या छात्रों के मस्तिष्क में दुविधा की स्थिति पैदा करती है और इसलिए इस बारे में एक स्पष्ट सोच होना आवश्यक है कि बारहवीं कक्षा के बाद उन्हें क्या करना चाहिए. बारहवीं कक्षा के दौरान वाणिज्य विधा का विकल्प लेने वाले छात्र अब लेखाकारिता, व्यवसाय अध्ययन, अर्थशास्त्र और गणित जैसे विषयों से परिचित होते हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश
दिल्ली विश्वविद्यालय वाणिज्य छात्रों को बी.कॉम. ऑनर्स तथा बी.कॉम. पाठ्यक्रमों में मैरिट के आधार पर प्रवेश देता है. इनमें से बी.कॉम. ऑनर्स एक अत्यधिक लोकप्रिय पाठ्यक्रम है जो छात्रों को विभिन्न व्यवसाय संकल्पनाओं तथा प्रक्रियाओं के बारे में वैचारिक ज्ञान देता है और व्यवसाय प्रबंधकों के रूप में चुनौतियों का सामना करने के विभिन्न उपायों को लागू करने में उन्हें सक्षम बनाता है. यह पाठ्यक्रम उन्हें प्रबंधन, बैंकिंग, बीमा, विपणन, लेखाकरण, विज्ञापन, वित्त, कराधान आदि क्षेत्रों में कॅरिअर के आकर्षक अवसर प्रदान करता है. यह पाठ्यक्रम छात्रों को कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए तैयार करने हेतु बनाया गया है और कंप्यूटर, टैली, ई-फाइलिंग, उपभोक्ता कार्य तथा ग्राहक देखभाल, विज्ञापन, ई-मार्केटिंग, ई-कॉमर्स जैसे कई पेपरों में इनका अनुप्रयोग भाग है. दिल्ली विश्वविद्यालय में किसी नियमित कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए छात्र बी.कॉम. (ऑनर्स) अथवा बी.कॉम. (प्रोग्र.) चुन सकते हैं. बी.कॉम. का अध्ययन करने के लिए कुल अंकों का परिकलन करते समय गणित अनिवार्य नहीं है. इस तहर, जिन इच्छुक छात्रों ने बारहवीं कक्षा के दौरान गणित विषय नहीं चुना हो वे बी.कॉम. पाठ्यक्रम ले सकते हैं, जबकि बी.कॉम. (ऑनर्स) में प्रवेश के लिए अर्हता परीक्षा के रूप में गणित/ व्यवसाय गणित पढऩा एवं उत्तीर्ण करना आवश्यक है. यदि विज्ञान या मानविकी का छात्र बी.कॉम. (ऑनर्स) या बी.कॉम.  पाठ्यक्रम करना चाहता है तो इन पाठ्यक्रमों हेतु अंकों में कटौती की जाती है. इसके लिए छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी तथा इसकी वेबसाइट 222.स्रह्व.ड्डष्.द्बठ्ठ पर उपलब्ध बुलेटिन देख सकते हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम. (ऑनर्स)/बी.कॉम. के लिए श्रेष्ठ चार विषयों की प्रतिशतता के परिकलन की पद्धति इसमें, एक भाषा अर्थात् अंग्रेजी/हिंदी तथा तीन श्रेष्ठ विषय- जिनमें लेखाकारिता, व्यवसाय अध्ययन, अर्थशास्त्र तथा गणित शामिल होते हैं, पर विचार किया जाता है. यदि छात्र ने विषयों का कोई अलग युग्मक लिया हो तो कुल प्रतिशतता में से अंक काटे जाते हैं. उदाहरण के लिए यदि उम्मीदवार ने निम्नानुसार अंक प्राप्त किए हैं- लेखाकारिता (९०), व्यवसाय अध्ययन (९२), अंग्रेजी कोर (८८) और अर्थशास्त्र (९४), तो कुल अंक ९० + ९२ + ८८ + ९४= ३६४ होंगे. चूंकि छात्र ने गणित विषय नहीं पढ़ा है इसलिए वह बी.कॉम. (ऑनर्स) पाठ्यक्रम के लिए पात्र नहीं होगा. किंतु छात्र बी.कॉम. में प्रवेश ले सकता है. यदि उम्मीदवार ने अंक इस तरह प्राप्त किए हैं:- भौतिकी (९६), रसायन विज्ञान (९२), अंग्रेजी कोर (९०) और गणित (९४), तो कुल अंक ९६ + ९२+९०+९४=३७२ होंगे तथा प्रतिशतता ९३% होगी. बी.कॉम. (ऑनर्स) और बी. कॉम. दोनों के लिए प्रभावी प्रतिशतता ९३-२&१=९१% होगी.
लोकप्रिय कॉलेज: श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), शहीद भगत सिंह कॉलेज, ऑफ कॉमर्स, गुरु गोविंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स, जीसस एंड मैरी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में ५५ कॉलेज बी.कॉम. (ऑनर्स) पढ़ाते हैं. इनमें से १५ कॉलेज महिला कॉलेज हैं. ४३ कॉलेज बी.कॉम. पढ़ाते हैं जिनमें १३ कॉलेज महिला कॉलेज हैं.
कॅरिअर के उपलब्ध अवसर: बी.कॉम. (ऑनर्स) और बी.कॉम. में स्नातक योग्यता प्राप्त करने के बाद लेखाकरण, विपणन, विधि, कराधान प्रबंधन, बैंकिंग, वित्त आदि क्षेत्रों में कॅरिअर के व्यापक अवर उपलब्ध होते हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों को श्रेष्ठ संकाय-जो अधिकांशत: पीएच.डी. डिग्री धारी होता है, से पढऩे, प्रोजेक्टरों वाली स्मार्ट कक्षाओं, अनिवार्य उपस्थिति, इंटर्नशिप, सेमीनारों तथा कार्यशालाओं के माध्यम से उद्योगों से संपर्क तथा शिक्षा की नवप्रवर्तित पद्धत्तियों जैसी सुविधाओं का लाभ मिलता है. विगत में वाणिज्य-छात्रों को गुगल एनस्र्ट एंड यंग, केपीएमजी, स्टैण्डर्ड एंड चार्टर्ड बैंक, लाइम टे्र, ई-मार्केटिंग फर्मों जैसी बडी कार्पोरेट कंपनियों में ३ लाख रु. या इससे अधिक के प्रारंभिक वेतन पैकेज वाले रोज़गार में रखा गया है.
वाणिज्य विधा के छात्रों के लिए उपलब्ध कुछ अन्य विकल्प
क.कला स्नातक (अर्थशास्त्र): यह डिग्री, अर्थशास्त्र एवं व्यवसाय के क्षेत्रों में विकसित नवीनतम तकनीकों के अनुप्रयोग द्वारा, परिवर्तनशील कार्पोरेट जगत में समस्या समाधान के लिए एक विश्लेषिक तथा मात्रात्मक दृष्टिकोण से बढ़ती हुई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रस्तुत की गई है. छात्र सूक्ष्म एवं वृहद् अर्थशास्त्र, के व्यवसाय नीति एवं योजना, औद्योगिक अध्ययन, पर्यावरणीय तथा संसाधन अर्थशास्त्र, विदेश व्यापार, वृहद् आर्थिक नीति, अंतर्राष्ट्रीय वित्त एवं विपणन, अनुप्रयुक्त इकोनॉमीट्रिक्स, ऊर्जा अर्थशास्त्र, श्रमिक अर्थशास्त्र तथा जलवायु परिवर्तन अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में विशेषज्ञता करते हैं. वर्ष १९९५ से दिल्ली विश्वविद्यालय अपने विभिन्न कॉलेजों में बी.ए. (ऑनर्स) अर्थशास्त्र में डिग्री चला रहा है.
लोकप्रिय कॉलेज: सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली).
ख.कला स्नातक (एएसपीएसएम): जिन वाणिज्य छात्रों ने गणित विषय नहीं पढ़ा है किंतु विपणन, विज्ञापन एवं विक्रय प्रबंधन में अत्यधिक अभिरुचि रखते हैं वे बी.ए. [विज्ञापन, विक्रय संवर्धन तथा विक्रय प्रबंधन (एएसपीएसएम)] में तीन वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम कर सकते हैं. कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), जीसस एंड मैरी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), दिल्ली कॉलेज ऑफ आटर्स एंड कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) आदि कुछ कॉलेज यह पाठ्यक्रम चलाते हैं. इसके अतिरिक्त, अहमदाबाद स्थित मुद्रा का माइका संस्थान विज्ञापन, विक्रय तथा विपणन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाता है.
ग.व्यवसाय प्रशासन स्नातक (बीबीए): व्यवसाय प्रशासन स्नातक डिग्री एक व्यावसायिक डिग्री है, जो व्यवसाय उद्योग में सफलता प्राप्त करने के लिए छात्रों में प्रशासनिक कौशलों के प्रतिपादन पर बल देती है. बीबीए डिग्री पाठ्यक्रम मुख्य रूप से विश्वविद्यालय संबद्धता के अधीन चलाए जाते हैं. बीबीए कार्यक्रम चलाने वाले कुछ उच्च विश्वविद्यालयों में दिल्ली विश्वविद्यालय, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय, सिम्बियोसिस अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, एनएमआईएमएस विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं. ये विश्वविद्यालय न केवल बीबीए/बीबीएम/बीएमएस पाठ्यक्रम चलाते हैं बल्कि छात्रों का चयन करने के लिए अपनी निजी प्रवेश परीक्षा भी संचालित करते हैं.
प्रसिद्ध कॉलेज: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), इंदौर, शहीद सुखदेव व्यवसाय अध्ययन कॉलेज, दिल्ली, क्राइस्ट विश्वविद्यालय (बंगलौर), व्यवसाय प्रशासन विभाग-एसआरएम विश्वविद्यालय (चेन्नै), एमिटी अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय विद्यालय (नोएडा), प्रबंधन अध्ययन संस्थान (नोएडा).
घ.प्रवेश आधारित प्रबंधन पाठ्यक्रम: छात्र सामान्यत: प्रबंधन पाठ्यक्रमों में विशेषज्ञता करते हैं और विशिष्ट छात्रों को प्रवेश देने के लिए विश्वविद्यालय सामान्यत: प्रवेश-परीक्षाएं संचालित करते हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय प्रबंधन अध्ययन स्नातक (बीएमएस) का एक सामान्य प्रवेश कार्यक्रम संचालित करता है, जिसके अंतर्गत छात्र तीन पृथक कार्यक्रमों में प्रवेश लेने के प्रयास करते हैं. ये पाठ्यक्रम हैं- व्यवसाय अध्ययन स्नातक (बी.बीए), व्यवसाय अर्थशास्त्र में बी.ए. (ऑनर्स) (बीबीई) तथा वित्त एवं निवेश विश्लेषण स्नातक (बीएफआईए).
वाणिज्य में व्यावसायिक पाठ्यक्रम
क.चार्टरित लेखाकार: सी.ए. पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होता है. लेखाकारिता पाठ्यक्रम एक अत्यधिक कठिन व्यावसायिक पाठ्यक्रम माना जाता है, जिसको पूरा करने के लिए प्रत्येक प्रयास में केवल ८.०-१६.% उम्मीदवार ही उत्तीर्ण होते हैं. संस्थान में ८७४६९४ छात्र हैं जो चार्टरित लेखाकारिता पाठ्यक्रम के विभिन्न स्तरों पर अध्ययन कर रहे हैं. चार्टरित लेखाकारिता परीक्षाओं को तीन स्तरों में विभाजित किया जाता है:-
स्तर-१ : सीपीटी में चार मूल विषय यथा लेखाकरण के सिद्धांत, मर्केंटाइल विधि, अर्थशास्त्र एवं मात्रात्मक अभिरुचि शामिल होते हैं. उम्मीदवार गे्रड १० पूरा करने के बाद सीपीटी के लिए पंजीकरण करा सकते हैं और हाई स्कूल (ग्रेड-१२) पूरा करने के बाद परीक्षा दे सकते हैं. छात्र चार खंडों में से प्रत्येक में यदि ३० प्रतिशत एक सिटिंग में और संपूर्ण परीक्षा में कुल ५० प्रतिशत अंक प्राप्त करते हैं तो उन्हें सीपीटी उत्तीर्ण माना जाता है.
स्तर-२ : आईपीसीसी या एकीकृत व्यावसायिक सक्षमता पाठ्यक्रम चार्टरित लेखाकारिता परीक्षाओं का द्वितीय स्तर है. कोई भी उम्मीदवार सीपीटी उत्तीर्ण करने और अध्ययन के ९ महीनों के बाद आईपीसीसी की परीक्षा में बैठ सकते हैं. आईपीसीसी में सात विषयों के दो समूह होते हैं. समूह-ढ्ढ में चार विषय और समूह-II में तीन विषय होते हैं.
स्तर-३ :  सीए अंतिम परीक्षा : यह स्तर चार्टरित लेखाकारिता परीक्षा का अंतिम स्तर होता है. यह परीक्षा विश्व में एक सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है. यदि कोई उम्मीदवार आर्टिकलशिप के अंतिम छह महीनों के दौरान आईपीसीसी के दोनों समूह उत्तीर्ण कर लेता है तो वह अंतिम परीक्षा में बैठ सकता है. इस परीक्षा में चार-चार विषयों के दो समूह होते हैं. छात्र किसी भी विषय में स्नातक पाठ्यक्रम के साथ या स्नातक पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने के बाद सीए कर सकते हैं.
(ख) आईसीएआई (भारतीय लागत लेखाकार संस्थान) : भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) जो पहले भारतीय लागत एवं कार्य लेखाकार संस्थान (आईसीडब्ल्यूएआई) के नाम से प्रसिद्ध था, भारत में लागत एवं प्रबंधन लेखाकारिता के क्षेत्र में विशेषज्ञ एक मात्र व्यावसायिक निकाय है, जिसका उद्देश्य लागत एवं प्रबंधन लेखाकारिता विषय में कोचिंग तथा प्रशिक्षण देना है. लागत लेखाकार संस्थान किसी उत्पाद के निर्माण या सेवा प्रदान करने में, कच्चे माल तथा श्रम से लेकर प्रशासनिक लागत तथा ऊपरी खर्चों से संबंधित लागत शामिल है. दूसरे शब्दों में, लागत लेखाकार संगठन के व्यवसाय कार्यों से संबंधित डाटा के संकलन, मिलान एवं व्याख्या कार्य करता है और उन्हें धन-राशि स्थिति में परिवर्तित करता है तथा उसके द्वारा प्रबंधकीय निर्णय लेने में मागदर्शन करता है एवं संगठन को अधिकतम लाभ प्राप्त करने में समर्थ बनाता है.
भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीडब्ल्यूएआई), आईसीडब्ल्यूए-आई भवन, , सांस्थानिक क्षेत्र, लोदी रोड, नई दिल्ली-११०००३ इस क्षेत्र में उन छात्रों को प्रशिक्षण देता है जो जमा दो परीक्षा पूर्ण कर लेते हैं. ऐसे छात्रों को तीन स्तर उत्तीर्ण करने होते हैं अर्थात फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और अंतिम स्तर. स्नातक छात्रों को फाउंडेशन पाठ्यक्रम से छूट होती है. आईसीडब्ल्यूएआई की पूरे देश में अनेक शाखाएं हैं.
ग. कंपनी सचिव : भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) भारत में कंपनी सचिव व्यवसाय के विनियमन तथा विकास के लिए संसद के एक अधिनियम अर्थात कंपनी सचिव अधिनियम, १९८० के अंतर्गत स्थापित संगठन है. कंपनी अधिनियम, १९५६ की धारा ३८३ ए के परंतु के अनुसार ५०० मिलियन रु. चुकता पूंजी वाली सभी कंपनियों को अनिवार्य रूप से एक पूर्णकालिक कंपनी सचिव की नियुक्ति करना आवश्यक होता है. १० मिलियन  से अधिक और ५०० मिलियन से कम चुकता पूंजी वाली कंपनियों को किसी प्रेक्टिसरत कंपनी सचिव से अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक  होता है और यह प्रमाणपत्र वार्षिक लेखा सहित निदेशक मंडल रिपोर्ट के साथ संलग्न करना होता है. इस तरह इस में दो क्षेत्र हैं. पूर्णकालिक रोज़गार और पूर्ण-कालिक प्रेक्टिस. किसी कंपनी में एक प्रधान अधिकारी/मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक के रूप में वह विभिन्न विधियों का विशेषज्ञ होता है. वह निदेशक मंडल हेतु कार्पोरेट विधि का मुख्य सलाहकार होता है. वह कंपनी में साचिविक लेखा परीक्षा संचालित करता है, जिसके द्वारा वह कंपनी को श्रम विधि, कंपनी विधि, पर्यावरणीय विधि, सुरक्षा विधि तथा अन्य संबंधित विधियों पर अपनी स्वतंत्र राय देता है. कार्पोरेट विधि, प्रबंधन तथा अभिशासन में उच्च स्तर की व्यावसायिक विशेषज्ञता प्रदान करने के लिए आईसीएसआई कंपनी सेके्रटरीशिप परीक्षा संचालित करता है.
कंपनी सचिव पाठ्यक्रम निम्नलिखित तीन चरणों में संचालित किया जाता है :
*फाउंडेशन कार्यक्रम : वरिष्ठ माध्यमिक परीक्षा (१०+२) उत्तीर्ण उम्मीदवार फाउंडेशन कार्यक्रम में प्रवेश लेने के पात्र होते हैं.
*कार्यपालक कार्यक्रम : ललित कला को छोडक़र किसी भी विधा में स्नातक या फाउंडेशन परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवार कार्यपालक कार्यक्रम में प्रवेश लेने के पात्र होते हैं.
*व्यावसायिक कार्यक्रम : कार्यपालक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर पंजीकृत छात्र को व्यवसायिक कार्यक्रम में प्रवेश दिया जाता है.
इस तरह वाणिज्य छात्रों के लिए असीम अवसर और कॅरिअर के अनेक विकल्प हैं. आवश्यकता है तो उत्कृष्टता और अपने लक्ष्य को साधने की.
(लेखक कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं. ई-मेल: sheetal_kpr@hot mail.comव्यक्त विचार लेखक के निजी हैं