नौकरी फोकस


Volume-32, 10-16 November, 2018

 
ग्रामीण प्रबंधन में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

प्रत्येक देश की कुछ विशेषताएं हाती हैं. भारत की ऐसी अनेक विशेषताएं हैं. विश्व में दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या के साथ यह सभी महाद्वीपों में सबसे तीव्र गति से विकासशील अर्थव्यवस्था है. यद्यपि शहरीकरण व्यापक पैमाने पर हो रहा है, किंतु भारत अभी भी मुख्य रूप से एक कृषि-अर्थव्यवस्था है और दूसरी अधिकांश जनसंख्या अभी भी गांवों में रहती है. हम सभी अपने स्कूल के दिनों से ही यह सुनते आ रहे हैं कि भारत गांवों में रहता है. यह कथन अभी भी प्रचलित है.
किंतु हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्र में कई परिवर्तन आ रहे हैं. कृषि उत्पादन बढ़ रहा है. गांवों में एवं उनके आस-पास सडक़ों के निर्माण ने उन्हें बेहतर रूप से जोड़ दिया है. व्यापक विद्युतीकरण हुआ है और चिकित्सा सुविधाओं में भी सुधार आया है. पिछले दो दशकों से विभिन्न कारणों से ग्रामीण आय में भी सुधार आया है, जिससे उच्च निपटान योग्य आय में वृद्धि हुई है. बढ़ती हुई क्रय शक्ति से वाहनों (दुपहिया और चार पहिया वाहनों), तीव्रता से आ रहे उपभोक्ता माल तथा निर्माण सामग्री आदि जैसे सामानों की मांग में उछाल आया है.
कृषि 58त्न भारतीय जनसंख्या की आजीविका का मुख्य स्रोत है. कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन द्वारा समर्थित सकल मूल्य 2018 में समाप्त वित्त वर्ष में 17.67 ट्रिलियन का था. किंतु जैसा कि हम सभी जानते हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवल कृषि के बारे में ही नहीं है. विभिन्न उपभोक्ता सामान एवं सेवाओं जैसे - दूरसंचार आदि के लिए मांग के संबंध में यह शहरी बाजार जैसा बनता जा रहा है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उभरने के साथ ही करिअर के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं.
किसी ग्रामीण प्रबंधन कॅरिअर के लिए शिक्षा-
ग्रामीण क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए ग्रामीण प्रबंधन में किसी औपचारिक योग्यता की अनिवार्य रूप से आवश्यकता नहीं है. निम्नलिखित किसी भी विषय में किसी उच्च शैक्षिक पृष्ठभूमि के साथ आप ग्रामीण क्षेत्र में कॅरिअर की योजना बना सकते हैं:-
*अर्थशास्त्र
*कृषि विज्ञान
*कृषि इंजीनियरी
*सामाजिक कार्य
*प्रबंधन
तथापि ग्रामीण क्षेत्र के विकास तथा व्यवसाय संभावना के संबंध में व्यापक अवसरों को ध्यान में रखते हुए अनेक संस्थाओं ने ग्रामीण प्रबंधन/ विकास एवं संबंधित विषयों जैसे कृषि व्यवसाय में विशेषज्ञतापूर्ण पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं. वास्तव में ऐसी संस्थाएं और संकाय हैं जो इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए जनशक्ति को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष रूप से सृजित किए गए हैं. अनेक संस्थानों में कंपनियां/संगठन कैम्पस प्लेसमेंट प्रस्ताव हेतु उनका दौरा करते हैं.
अध्ययन के विषय:-
किसी ग्रामीण प्रबंधन पाठ्यक्रम में वह सब कुछ शामिल है जो किसी नियमित प्रबंधन पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है. तथापि, यहां बल ग्रामीण स्थापनाओं में सिद्धांतों, व्यवहार तथा संकल्पनाओं के कार्यान्वयन पर होता है. ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट विषय भी पढ़ाए जाते हैं. सामान्य रूप से आपको विकास के सिद्धांतों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संरचना, विकास प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक अनुसंधान प्रणाली विज्ञान, जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, आपदा प्रबंधन, परियोजना प्रबंधन, गैर-सरकारी संगठनों के प्रबंधन, भूमि एवं जल संसाधन प्रबंधन, कार्पोरेट सामाजिक दायित्व, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण वित्तीय सेवाओं का प्रबंधन, ग्रामीण उद्यमिता, फसल उत्पादन और जलवायु का प्रभाव, सामाजिक न्याय, सामाजिक कार्य, और मानव अधिकार आदि जैसे विषयों का ज्ञान मिलता है. इसे व्यवहार में लाने के लिए क्षेत्रगत जानकारी, पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य भाग है.
पाठ्यक्रम
नीचे उन संस्थाओं की सूची दी गई है जो प्रख्यात संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले ग्रामीण प्रबंधन एवं समवर्गी विषयों में विशेषज्ञता पूर्ण पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं. यह सूची उदाहरण मात्र है.
गुजरात में आणन्द में ग्रामीण प्रबध्ंान संस्थान (आई.आर.एम.ए.) देश में ग्रामीण प्रबंधन शिक्षा को व्यवसाय का रूप देने वाला प्रतिष्ठित संस्थान है. इसमें चार पाठ्यक्रम हैं यथा ग्रामीण प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, ग्रामीण प्रबंधन में अध्येता कार्यक्रम, प्रबंधन (ग्रामीण) में कार्यपालक स्नातकोत्तर डिप्लोमा, ग्रामीण प्रबध्ंान में प्रमाणपत्र.
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एन.आई.आर.डी.), हैदराबाद - ग्रामीण विकास प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.
भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद- खाद्य एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम.
भारतीय प्रबंधन संस्थान, लखनऊ - कृषि-व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम.
असम कृषि विश्वविद्यालय-विश्वविद्यालय, जोरहाट - एम.बी.ए. कृषि व्यवसाय.
केरल कृषि विश्वविद्यालय, त्रिचुर-विश्वविद्यालय - एम.बी.ए. कृषि व्यवसाय प्रबंधन.
राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद - प्रबंधन (कृषि व्यवसाय प्रबंधन) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, कृषि विस्तार प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.
प्रबंधन अध्ययन संकाय, ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, जयपुर - प्रबंधन (ग्रामीण प्रबंधन) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर - एम.बी.ए. ग्रामीण प्रबधन राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान जयपुर - प्रबंधन (कृषि व्यवसाय प्रबंधन) में स्नातकोत्तर कार्यक्रम के आई.आई.टी. ग्रामीण प्रबंधन स्कूल, भुवनेश्वर - एम.बी.ए. ग्रामीण प्रबंधन.
ज़ेवियर प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर - एम.बी.ए. ग्रामीण प्रबंधन
ज़ेवियर सामाजिक सेवा संस्थान, रांची - पी.जी.डी.एम. (ग्रामीण प्रबंधन)
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय - एम.बी.ए. कृषि व्यवसाय.
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर - एम.बी.ए. कृषि व्यवसाय.
ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर - एम.बी.ए. कृषि व्यवसाय प्रबंधन.
बैकुंठ नाथ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान, पुणे - पी.जी.डी.एम. कृषि व्यवसाय एवं प्रबंधन, सहकारी व्यवसाय प्रबंधन में डिप्लोमा.
भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल- वन प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.
गोखले राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र संस्थान - एम.एस.सी. कृषि व्यवसाय अर्थशास्त्र.
कार्यक्षेत्र:
कृषि व्यवसाय के बहु-आयाम हैं और आपका कार्यक्षेत्र  आपके द्वारा प्राप्त शिक्षा एवं विशेषज्ञता पर निर्भर हो सकता है. कुल मिलाकर, किसी ग्रामीण प्रबंधन व्यवसायी के रूप में आप निम्नलिखित एक या अधिक क्षेत्रों में रोजग़ार प्राप्त कर सकते हैं:-
विपणन: ग्रामीण भारत में व्यवसाय की व्यापक संभावना को देखते हुए कई कंपनियां - दोनों भारतीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कार्य-नीतियां तैयार तथा निष्पादित करती हैं. इन कंपनियों में, सम्पूर्ण विपणन योजना के अंतर्गत एक ग्रामीण विपणन योजना है. यह आश्चर्यजनक हो सकता है, किंतु कार, मोटर, बाइक, मोबाइल फोन, बिस्कुट के विनिर्माता ग्रामीण बाजारों में प्रवेश करने के कोई प्रयास नहीं छोड़ रहे हैं. ग्रामीण उपभोक्ता की बदलती हुई पसंद और ग्रामीण बाजारों की अन्य गतिशीलता पर अनुसंधान भी एक कार्यक्षेत्र हो सकता है.
परियोजना प्रबंधन: ग्रामीण भारत के लाभ के लिए सरकार तथा निजी क्षेत्र विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं. ऐसी कई परियोजनाओं पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत कार्य किया जा रहा है. ये परियोजनाएं विद्युत संयंत्रों, सडक़ निर्माण, आवासन तथा उत्पादन संयंत्रों आदि से संबंधित हो सकती हैं. परियोजना प्रबंधन के अंतर्गत कार्य परियोजना निष्पादन की दैनिक निगरानी तथा समयबद्धता और लागत अनुकूलन आदि से सबद्ध होंगे.
कृषि प्रशासन:
भारत का कृषि क्षेत्र पर्याप्त रूप से विविध है. कम क्षमता एवं बड़ी क्षमता वाले किसान भी हैं. कई मामलों में कृषि को व्यवसाय के रूप में चलाया जाता है. एक दशक या अधिक समय से ठेका कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है. इसके अंतर्गत इस तरह के ठेके (अनुबंध) करने वाली कंपनियों को नियमित आधार पर उपज की खरीद का आश्वासन दिया जाता है. उदाहरण के लिए चिप्स निर्माता कई कंपनियों ने बड़े किसानों से आलू की आपूर्ति करने का समझौता किया है. बड़े कृषि कार्यों के लिए व्यवसायियों की आवश्यकता होती है.
सामाजिक परिवर्तन: सामाजिक परिवर्जन या गांवों के परिवर्तन में विभिन्न निकाय शामिल हैं. इनसे गैर-सरकारी संगठन भी जुड़े है. जो राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करते है. कुछ ऐसे संगठन भी हैं जो वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे हैं (उदाहरण के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, आगा खां फाउंडेशन आदि). कार्पोरेट सामाजिक दायित्व के अधीन अनेक व्यावसायिक संगठन अपने लाभ का एक हिस्सा समाज कल्याण पर खर्च करते हैं और इसमें से अधिकांश खर्च गांवों पर किया जाता है. बड़े कार्पोरेट क्षेत्र-सार्वजनिक एवं निजी - दोनों के अपने निजी कार्पोरेट सामाजिक दायित्व तथा सामुदायिक सेवा विभाग हैं.
ग्रामीण वित्त: सामाजिक तथा आर्थिक विकास को समाविष्ट किया जाता है. बैंकों के राष्ट्रीयकरण का मुख्य उद्देश्य हमारे देश के सामाजिक, आर्थिक विकास में बैंकों की सेवाओं को उपयोग में लाना था. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ग्रामीण विकास अधिकारी या कृषि अथवा कृषि वित्त अधिकारियों की रिक्तियां होती हैं. ये बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय संवाददाताओं की भी नियुक्ति करते हैं जो एक पर्यवेक्षक के अधीन कार्य करते है. गैर-वित्तीय बैंकिंग कंपनियों (एन.बी.एफ.सी.) ने भी छोटे कस्बों और गांवों में अपने कार्यों का विस्तार किया है. सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा सृजित अवसरों को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, जो अधिकांशत: गरीब व्यक्तियों को असुरक्षित ऋण की छोटी राशि देते हैं और उनकी बचत का भी प्रबंधन करते हैं. ये संस्थाएं आर.बी.आई. के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करती हैं.
ग्रामीण उद्यमिता: भारत में एक उद्यमिता तथा स्टार्ट-अप मिनी क्रांति है. अपनी आवश्यकताओं के साथ अनेक युवक कुछ नया करना चाहते हैं. इनमें से कुछ युवक गांवों में अज्ञात तथा नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं. कुछ उद्यम पूंजी निवेश संस्थान हैं. जो ऐसे उत्पादों में निवेश करने के लिए तैयार हैं. परियोजना द्वारा प्रस्तुत संभावनाओं के आधार पर अन्य स्रोतों से सांस्थानिक सहायता भी उपलब्ध हो सकती है.
हमें यह भ्रांति नहीं होनी चाहिए कि ग्रामीण प्रबंधन में किसी कॅरिअर के लिए हमें गांवों में रहना और कार्य करना होता है. अनेक प्रबंधकीय पद शहरी केन्द्रों/महानगरों पर आधारित होते हैं. तथापि इन पदों हेतु ग्रामीण क्षेत्रों के व्यावहारिक अनुभव और इस क्षेत्र की मूल वास्तविकताओं की समझ के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के निरंतर दौरे करने की आवश्यकता होती है.
कॅरिअर के अवसर
हिंदुस्तान यूनीलिवर, आई.टी.सी. आदि जैसे बड़े कार्पोरेट्स को ग्रामीण प्रबंधन व्यवसायियों की आवश्यकता होती है. कुछ संगठनों तथा कंपनियों ने हाल ही में कैम्पस प्लेसमेंट के माध्यम से कार्मिकों की भर्ती की है. इस सूची से आपको पता लग सकता है कि ग्रामीण प्रबंधन और संबंधित विषयों में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आप संभवत: कहां कार्य कर सकते हैं:- जीविका-बिहार लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी, राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद, भारत इन्सेक्टीसाइड्स लिमिटेड, बेयर क्रॉपसाइसेंस, रैलीज़ इंडिया लि., रिलाएंस रिटेल, धातु का एग्रीटेक, दिशा माइक्रो फाइनेंस, भारत फाइनेंशियल इनक्लूजन लि., इफको, ईद पैरी, कृषक भारती को-ऑपरेटिव लि., मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजीटेबल (प्रा.) लि., जी.सी.एम.एम.एफ. लि. (अमूल) जैसे मिल्क को-ऑपरेटिव, पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर फैडरेशन लि., तमिलनाडु को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फैडरेशन लि., महिंद्रा एग्री सोल्यूशन्स, नेशनल पेमेंट्स को-ऑपरेशन ऑफ इंडिया (एन.पी.सी.आई.) लिमिटेड, गोदरेज एग्रोसेट लि. येस बैंक (कृषि ग्रामीण एवं सामाजिक बैंकिंग), उज्जीवन फाइनेंशियल सर्विसेस प्राइवेट लि., नाबार्ड फाइनेंशियल सर्विसेस लि., माइक्रोसेव, फिनकेयर, बिजनेस सर्विसेस लि., गुजरात स्टेट वुमन्स सेवा को-ऑपरेटिव फैडरेशन, भारतीय स्टेट बैंक (कृषि व्यवसाय प्रभाग), आईसी.आई.सी.आई. बैंक लि., (ग्रामीण तथा विशेष बैंकिंग समूह), जी.सी.एम.एम.एफ. लि. (अमूल) जैसे मिल्क को-ऑपरेटिव, पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर फैडरेशन लि., तमिलनाडु को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फैडरेशन लि., आदि शामिल हैं.
ग्रामीण प्रबंधन/विकास में कोई कॅरिअर चुनकर आप राष्ट्र निर्माण में तथा उन व्यक्तियों के सामथ्र्य जिन्हें इसकी अधिक आवश्यकता है, में सुधार लाने में योगदान कर सकते हैं. तथापि, ऐसे कॅरिअर का आपका विकल्प बेहतर रूप में सोच-समझकर किया जाना चाहिए न कि गैर नियोजित रूप में.
लेखक मुंबई में कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल: v2j25@ yahoo.in