नौकरी फोकस


Volume-33, 17-23 November, 2018

 
सांख्यिकी में कॅरिअर

निधि प्रसाद

हम प्रत्येक चीज के लिए आंकड़े (डाटा) एकत्र करते हैं. विराट की बैटिंग औसत, स्टॉक बाजार में उतार-चढ़ाव, प्रदूषण स्तर की अन्य शहरों से तुलना और कितने एटीएम कार्य कर रहे हैं, नए नोट छपने में कितना समय लगेगा? विश्व अधिकाधिक परिमाणात्मक और डाटा केंद्रित होता जा रहा है. आपके पास जो भी सूचना है उसे समर्थन देने के लिए सांख्यिकी है.
सांख्यिकी डाटा से ज्ञान प्राप्त करने का विज्ञान है. यह इस उद्देश्य का एक वैज्ञानिक अध्ययन है कि किस तरह डाटा एकत्र किया जाए, उसका विश्लेषण किया जाए और अनिश्चितताओं की उपस्थिति में डाटा को तटस्थ भाव से किस तरह प्रस्तुत किया जाए. सांख्यिकी एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है जो हमें प्रायोगिक डाटा सेट्स से निष्कर्ष निकालने की जानकारी देती है. यह गणित की एक शाखा है जो संख्यात्मक डाटा समूह के संकलन, विश्लेषण, उनकी व्याख्या करने और उन्हें प्रस्तुत करने से संबद्ध है.
सांख्यिकीविद् इस ज्ञान को उपयोग अर्थशास्त्र, औषधि, मनोविज्ञान, विपणन, जन स्वास्थ्य, जीव विज्ञान, यहां तक कि खेलों और अन्य क्षेत्रों से कईं विभिन्न क्षेत्रों के आसपास के डाटा की रूपरेखा तैयार करने, उसे एकत्र करने और उसकी व्याख्या करने में करते हैं. सांख्यिकी मानव क्रिया-कलापों के प्रत्येक क्षेत्र में एक अत्यावश्यक भूमिका निभाती है. किसी देश की प्रति व्यक्ति आय, बेरोजग़ारी, जनसंख्या विकास दर, आवासन, चिकित्सा सुविधाओं आदि की वर्तमान स्थिति निर्धारित करने में सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. सांख्यिकी की विभिन्न क्षेत्रों में अपराध सांख्यिकी, जनगणना सांख्यिकी, पारिस्थितिक सांख्यिकी, चिकित्सा सांख्यिकी, शिक्षा पर सांख्यिकी, फिल्म सांख्यिकी, क्रिकेट सांख्यिकी, तेल सांख्यिकी, बाजार सांख्यिकी, श्रमिक सांख्यिकी, जनसंख्या सांख्यिकी, चुनाव सांख्यिकी, जिला शहर राज्य सांख्यिकी, पर्यटन सांख्यिकी आदि शामिल हैं, इस तरह सांख्यिकी का अनुप्रयोग अत्यधिक व्यापक है.
प्रत्येक क्षेत्र अथवा विभाग में डाटा प्रचुर मात्रा में होता है. यद्यपि, डाटा एकत्र करना कोई छोटा कार्य नहीं है, किंतु उसकी व्याख्या करने और उसे प्रस्तुत करने के लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है. इसलिए सांख्यिकीविदों को विश्लेषिक पहलुओं में आधारभूत प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता होती है. सांख्यिकी अनुप्रयुक्त गणित की एक शाखा है, किंतु यह मात्र अंकों से नहीं जुड़ी है. किसी सांख्यिकीविद् की भूमिका डाटा सृजित करने की होती है.
सांख्यिकी आज के आधुनिक युग, जिसे समुचित रूप में नियोजन युगकहा जाता है, में अनिवार्य है. मजदूरी, मूल्य, समय शृंखला विश्लेषण, मांग विश्लेषण जैसी आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में सांख्यिकीय डाटा और सांख्यिकीय विश्लेषण तकनीकें अत्यधिक उपयोगी हैं. यह उत्पादन का अप्रतिस्थाप्य साधन है.
सांख्यिकीविद् क्या करते हैं?
सांख्यिकीविद्, डाटा का विश्लेषण और व्याख्या करने तथा निष्कर्ष तैयार करने के लिए गणितीय तकनीकों का उपयोग करते हैं. सांख्यिकीविद् डाटा का संकलन, सत्यापन करते हैं और उसकी व्याख्या करते हैं और व्यापक विविध क्षेत्रों में समस्याओं का समाधान करने के लिए इनका उपयोग करते हैं. सरकारी कार्यालयों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय खेल संबंधी इवेंट्स तक के प्रत्येक क्षेत्र में सांख्यिकीविद् की सेवाओं की आवश्यकता होती है. किसी सांख्यिकीविद् का कार्य विश्व से बाहर का नहीं होता है, किंतु यह किसी न किसी रूप में हममें से प्रत्येक को कहीं न कहीं प्रभावित करता है.
पात्रता
इस क्षेत्र में प्रवेश लेने के लिए सांख्यिकी या गणित एक मुख्य विषय के रूप में लेकर स्नातक डिग्री एक न्यूनतम अपेक्षित शैक्षिक योग्यता है. सांख्यिकी में किसी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए आवेदन करने हेतु छात्र भौतिकी, गणित तथा निम्नलिखित किसी एक विषय:- रसायन विज्ञान, सांख्यिकी या कंप्यूटर विज्ञान में कुल न्यूनतम ५० प्रतिशत अंकों के साथ १०+२ या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होने चाहिएं. यद्यपि गणित का ज्ञान होना अनिवार्य है, किंतु डाटा की व्याख्या करने हेतु सांख्यिकीविदों को वैज्ञानिक ज्ञान तथा कंप्यूटर का उपयोग करने की क्षमता होनी चाहिए.
भारतीय सांख्यिकी विज्ञान संस्थान (आईएसआई) बी. सांख्यिकीय (ऑनर्स) तथा सांख्यिकी में मास्टर पाठ्यक्रम चलाता है. ३ वर्षीय बी स्टेट (ऑनर्स) स्नातक पाठ्यक्रम के लिए गणित और अंग्रेजी विषयों के साथ हायर सेकेंडरी (१०+२) अथवा समकक्ष परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी करना आवश्यक है. उम्मीदवारों का चयन, संस्थान द्वारा संचालित लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में उम्मीदवारों के निष्पादन के आधार पर तैयार की गयी मैरिट के अनुसार किया जाता है. कॉलेज/ विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर तथा अनुसंधान स्तर पर सांख्यिकी में कईं विशेषज्ञताएं कराते हैं. इनमें एक्चुरियल साइंस, अनुप्रयुक्त सूचना, अर्थशास्त्र, जैव सांख्यिकी, व्यवसाय सांख्यिकी, डाटा विश्लेषण आदि शामिल हैं.
अपेक्षित कौशल
सांख्यिकीविद् अच्छा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कौशल, संख्यात्मक कौशल, विश्लेषिक कौशल रखते हों
*उन्हें परिणामों का मूल्यांकन करने, रुझान का विश्लेषण करने में सक्षम होना चाहिए.
*जटिल डाटा पर सांख्यिकीय प्रणाली विज्ञान लागू करने में सक्षम हों.
*सांख्यिकीविद् लचीली प्रवृत्ति वाले और जिज्ञासु तथा अनुशासित मस्तिष्क वाले हों.
*कंप्यूटरों की अच्छी पृष्ठभूमि होना महत्वपूर्ण है क्योंकि सांख्यिकीविद् कंप्यूटरों का व्यापक उपयोग करते हैं.
*उनमें बौद्धिक रचनात्मकता, समस्या समाधान कौशल, तर्क शक्ति एवं स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता हो.
*वे समस्याओं को समझने के लिए विविध क्षेत्रों के व्यक्तियों के साथ कार्य करने की क्षमता रखते हों.
*नवीनतम साहित्य तथा सांख्यिकी-सॉफ्टवेयर पर अद्यतन जानकारी रखते हों.
किसी सांख्यिकीविद् की विभिन्न जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं :
सूचना एकत्रण
डाटा एकत्र करने, डाटा संयोजन की नई एवं अधिक कुशल पद्धत्तियों का विकास करना. सूचना का विश्लेषण करने के लिए नई पद्धतियों का विकास करना.
सांख्यिकीविद् उत्पादों तथा गुणवत्ता घटकों का विकास करने में भी व्यापक रूप से शामिल होते हैं. वे ट्रायल परीक्षण तथा उत्पाद मूल्यांकन में प्राय: ऑटोमोबाइल, भेषज या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए कार्य करते हैं. विकास के अतिरिक्त, सांख्यिकीविद् विभिन्न फर्मों के विनिर्माण, परिसंपत्ति, देयता तथा जोखिम प्रबंधन एवं विपणन विभागों से भी जुड़े होते हैं.
कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र जिनमें सांख्यिकी का आम तौर पर उपयोग किया जाता है:-
गणित :  सांख्यिकी अनुप्रयुक्त गणित की एक शाखा है, और लगभग सभी प्राकृतिक एवंं सामाजिक विज्ञानों में एक मुख्य भूमिका निभाती है. प्रकृति विज्ञान की पद्धत्तियां अत्यधिक विश्वस्त होती हैं किंतु उनसे लिए गए निष्कर्ष केवल संभावित होते हैं, क्योंकि वे अधूरे प्रमाण पर आधारित होते हैं. सांख्यिकी इन मापदंडों को अधिक शुद्ध रूप में स्पष्ट करती है.
बैंकिंग : बैंकिंग में सांख्यिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बैंक कई उद्देश्यों के लिए सांख्यिकी का प्रयोग करते हैं. बैंक इस सिंद्धात पर कार्य करते हैं कि बैंक में किसी दिन अपनी धन-राशि जमा कराने वाले व्यक्ति वह राशि उसी समय आहरित न करें.
राज्य प्रंबधन (प्रशासन)
किसी भी देश के लिए सांख्यिकी अनिवार्य है. सरकार की विभिन्न नीतियां सांख्यिकी पर निर्भर होती हैं. सभी प्रशासनिक निर्णय लेने में अब सांख्यिकीय डाटा का व्यापक रूप में उपयोग किया जाता है.  अधिकांश सरकारी संगठन एवं एजेंसियां जनसंख्या, जनांकिकी तथा आर्थिक मापदंडों का मूल्यांकन  करने के लिए सांख्यिकीविदों की सेवाएं लेते हैं. सांख्यिकीविद् तुलनात्मक जनसंख्या एवं जनांकिकी, बेरोजग़ारी दर, साक्षरता स्तर, कुपोषण संख्याओं, दहेज-मृत्यु तथा कई अन्य सामाजिक मुद्दों की तुलनात्मक संख्या का निर्धारण करने के लिए प्रतिदर्श तकनीकों का प्रयोग करते हैं. उदाहरण के लिए जीवन-यापन लागत में वृद्धि होने को ध्यान में रखते हुए यदि सरकार कर्मचारियों के वेतनमानों  में संशोधन करना चाहती है तो वह, जीवन-यापन की लागत में वृद्धि का निर्धारण करने के लिए सांख्यिकीय पद्धत्तियों का प्रयोग करेगी.
लेखाकरण एवं लेखापरीक्षण 
परिशुद्धता के बिना लेखाकरण असंभव है, निर्णय लेने के उद्देश्य से, अत्यधिक परिशुद्धता अनिवार्य नहीं है और निर्णय सादृश्य/लगभग सही अनुमान जिसे सांख्यिकी भी कहा जाता है, के आधार पर लिया जा सकता है. लेखापरीक्षण में प्रतिदर्श (नमूनाकरण) तकनीकों का आम तौर पर प्रयोग किया जाता है. कोई भी लेखापरीक्षक, लेखापरीक्षित की जाने वाली बहियों के नमूना पैमाने का निर्धारण त्रुटियों के आधार पर करता है.
प्राकृतिक एवं सामाजिक विज्ञानों में : सांख्यिकीविद् लगभग सभी प्राकृतिक एवं सामाजिक विज्ञानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जीव विज्ञान, भौतिकी, रसायनविज्ञान, गणित, मौसमविज्ञान, वाणिज्य के अनुसंधान अध्ययन, सामाजिकी व्यवसाय, लोक प्रशासन, संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी में प्रायोगिक परिणामों, उनके महत्व के परीक्षण का मूल्यांकन करने के लिए सांख्यिकी पद्धतियों का सामान्य रूप में प्रयोग किया जाता है.
खगोलविज्ञान में
खगोलविज्ञान सांख्यिकीय अध्ययन की एक सबसे पुरानी शाखा है, यह अवलोकन के साधनों द्वारा खगोलीय तत्वों की दूरी, आकार, बहुलता एवं सधनता के अनुमान से जुड़ा है, इन अनुमानों के दौरान त्रुटियां अपरिहार्य होती हैं, इसलिए अत्यधिक संभावित अनुमान (मापदण्ड) लगाने के लिए सांख्यिकीय पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है उदाहरण के लिए सितारों की चाल एवं पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी का पता लगाने के लिए खगोलविज्ञानी प्राचीन काल से ही सांख्यिकीय पद्धतियों का प्रयोग  करते रहे हैं.
औषधि में
चिकित्सा सांख्यिकीविदों के कार्यों में अध्ययन वाले नमूनों की रोग एवं स्वास्थ्य पद्धतियों की मॉनीटरिंग तथा निगरानी करना निहित है. इसमें रोग के कारणों या रोग एवं मृत्यु से जुड़े कारक और यह पता लगाने के लिए अध्ययन का विश्लेषण करना शामिल है कि क्या नई औषधियां एवं चिकित्सा उपस्कर भेषज कंपनियों, चिकित्सा अनुसंधान केंद्रों अथवा खाद्य एवं औषधि विभागों के लिए सुरक्षित एवं प्रभावी हैं.
कृषि एवं पर्यावरण
कृषि एवं कृषि- व्यवसाय के क्षेत्र में सांख्यिकीविद् उत्पादकता तथा फसल पैदावार बढ़ाने के लिए डाटा का कृषि प्र्रयोगों से विश्लेषण करते हैं. वे किसी अनुसंधान प्रयोगशाला, वाणिज्यिक पर्यावरण स्वच्छता फर्म या पर्यावरण परीरक्षण एजेंसियों के लिए वायु, जल मृदा प्रदूषणकारी तत्वों के पर्यावरणीय प्रभावों का भी मूल्यांकन करते हैं.
संभावनाएं
सांख्यिकीविदों को विभिन्न अनेक क्षेत्रों में रोजग़ार के अवसर उपलब्ध हैं जहां उन्हें व्यावसायिक लचीलापन, आकर्षक अवसर तथा पुरस्करणीय, चुनौतीपूर्ण एवं लाभप्रद कॅरिअर दिए जाते हैं. बी.एस.सी- सांख्यिकी में डिग्रीधारी छात्र बैंकिंग, आई.टी., गुणवत्ता नियंत्रण आदि में विभिन्न कार्यों के लिए पात्र होते है. वे एक्चुरियल साइंस को विशेषज्ञता के एक विषय के रूप में चुन सकते हैं और विभिन्न वित्तीय तथा शेयर ट्रेडिंग कंपनियों में कार्य ग्रहण कर सकते हैं. सांख्यिकी की अच्छी सूक्ष्मदर्शिता एवं ज्ञान रखने वाले उम्मीदवार वर्तमान परिदृश्य में व्यापक मांग में हैं. सांख्यिकी में मास्टर अथवा पी.एचडी डिग्री धारी छात्र व्यवसाय विश्लेषक, सांख्यिकी के लेक्चरर, प्रोफेसर आदि जैसे कार्यों के लिए आवेदन कर सकते हैं. वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अन्वेषण-अधिकारी, सांख्यिकी विश्लेषक, अनुसंधानकर्ता आदि जैसे कार्य भी चुन सकते हैं:-
सांख्यिकीविद् निम्नलिखित रूप में कार्य कर सकते हैं:-
*इकॉनोमीट्रिशियन
*सांख्यिकीविद्
*अनुसंधान विश्लेषक
*जैवसांख्यिकीविद्
*बायोमीट्रिशियन
*महामारीविज्ञानी
*डाटा वैज्ञानिक
*खेल सांख्यिकीविद्
*चिकित्सा सांख्यिकीविद्
सांख्यिकी में स्नातक होने के बाद सरकारी क्षेत्र में रोजग़ार
अधिकांश सरकारी संगठन एवं एजेंसियां जनसंख्या जनांकिकी तथा आर्थिक मापदंडों का मूल्यांकन करने के लिए सांख्यिकीविदों को नियोजन में रखती हैं. कई अन्य पर्यावरणीय, वैज्ञानिक एवं कृषि एजेंसियां अपने संबंधित क्षेत्रों में इसी प्रकार के कार्यों के लिए सांख्यिकीविदों को भर्ती करती हैं. यहां तक कि राष्ट्रीय रक्षा संगठन भी अस्त्रों-शस्त्रों तथा रणनीति प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए सांख्यिकीविदों की सेवाएं लेते हैं.
सरकारी क्षेत्र में, सं.लो.से.आ. भारतीय सांख्यिकी सेवाओं के लिए उम्मीदवारों की भर्ती करता है. इसके लिए, पद हेतु आवेदन करने के लिए सांख्यिकी या गणित में मास्टर डिग्री होना आवश्यक है. सांख्यिकी अन्वेषक पदों पर पात्र उम्मीदवारों को नियुक्त करने के लिए कर्मचारी चयन आयोग (एस.एस.सी.) भी एक भर्ती -प्रक्रिया संचालित करता है. निजी क्षेत्रों को भी बीमा, आईटी और सोफ्टवेयर क्षेत्र में अर्हताप्राप्त सांख्यिकीविदों की आवश्यकता होती है. यूरो-स्टेट, आई.ए.ओ.एस., ओ.ई.सी.डी. तथा यू.एन.ई.एस.सी.ओ. कुछ ऐसे संगठन हैं जो विश्वभर में अत्यधिक प्रतिष्ठित सांख्यिकी संगठन हैं.
सांख्यिकी में पाठ्यक्रम चलाने वाले कुछ कॉलेज
*भारतीय सांख्यिकी संगठन, बंगलौर
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर, मुंबई
*भारतीय सांख्यिकी संस्थान, दिल्ली
*दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
*भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंंधान संस्थान (आई.ए.एस.आर.आई.)
*लोयोला कॉलेज, चेन्नै
*भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कलकत्ता
*सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, मुंबई
(लेखिका वरिष्ठ काउंसिलिंग मनोवैज्ञानिक है. ई-मेल आई.डी.- nidhiprasadcs@ gmail.com