नौकरी फोकस


Volume-34, 24-30 November, 2018

 
कॅरिअर कॉउंसिलिंग में रोज़गार


श्री प्रकाश शर्मा


वह मेरे अभिप्रेत कॅरिअर के बारे में मुझसे ज्यादा जानते हैं. मुझे इतना सुयोग्य होना चाहिए कि मैं संपन्न स्थितियों में आम औसत व्यक्तियों के साथ अपनी किस्मत बना सकूं.
- चाल्र्स डिकन्स
अत्यधिक अपेक्षाएं
हम सभी को एक ऐसे योग्य एवं व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति की आवश्यकता होती है, जो हमें यह ज्ञात करा सके कि हममें कौन सी जन्मजात प्रतिभा है और उसके बाद तद्नुसार हमारा मार्गदर्शन कर सके कि हम कौन सा कार्य सर्वोत्तम रूप में कर सकते हैं? जी हां, निस्संदेह. और वह व्यक्ति केवल कॅरिअर कॉउंसलर होता है जो उम्मीदवारों को, उनके जीवन के स्वप्न-कॅरिअर की प्राप्ति के लिए, किसी पाठ्यक्रम विशेष को करने में सहायता करते हैं.
वास्ताव में, कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर एक व्यवसायी, सुयोग्य तथा भावात्मक दृष्टि से संवेदनशील व्यक्ति होता है, जो अभिलाषी का मार्गदर्शन करता है कि उनके लिए कौन सा कॅरिअर अधिक उपयुक्त होगा और कौन सा कॅरिअर उनकी आवश्यकता के अनुसार तैयार किया गया है. इसलिए, किसी कॅरिअर कॉउंसलर का कार्य उम्मीदवार की प्रतिभा और विभिन्न विशेषताओं का पता लगाना और उन्हें तद्नुसार उपयुक्त कॅरिअर चुनने के लिए उनका मार्गदर्शन करना है.
प्राय: होता यह है कि हम अपना कॅरिअर निर्णय लेने में गलती कर बैठते हैं क्योंकि हम अपना मूल्यांकन पूर्णत: अवास्तविक मानदंडों के आधार पर करते हैं. हम अपना कॅरिअर मार्ग अपनी कल्पना के आधार पर चुनते हैं न कि अपने लिए उपयुक्त कार्य के आधार पर. इसके अतिरिक्त, हम अपने आस-पास के विभिन्न कॅरिअर विकल्पों के दिखावटी आकर्षण से भी अनावश्यक रूप से प्रभावित हो जाते है. कई बार, हम अपने अभिभावकों के दबाव में आ जाते हैं और सामाजिक दिखावे से प्रभावित होते हैं. ऐसी अटपटी स्थिति में उम्मीदवार कोई ऐसा कॅरिअर चुने लेता है जो उसके लिए बिल्कुल उपयुक्त और उसकी मानसिक प्रवृत्ति का नहीं होता. इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि कोई अनुपयुक्त कॅरिअर विकल्प चुनने में इस प्रकार की गलतियां अपर्याप्त ज्ञान, भावात्मक अपरिपक्वता, अभिभावकों के अत्यधिक दबाव और उनकी अपेक्षाओं के कारण हो जाती हैं. वास्तव में यह स्थिति अत्यधिक हानिकर स्थिति होती है. मूल रूप से हमारी अवधारणा और मनोविज्ञान, उन व्यक्तिगत विभिन्नताओं की पहचान नहीं करने देते, जो प्रत्येक बच्चे में प्राकृतिक रूप से अलग होती हैं.
डॉक्टर एवं इंजीनियर जैसे कार्य-अवसरों के दिन अब धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं. सुधार पश्चात प्रेरित २१वीं शताब्दी के सूचना प्रौद्योगिकी युग में, जहां पूरा विश्व एक विश्व-ग्राम बन गया है, यह अत्यधिक सांत्वनादायक अनुभूति है कि अब विश्व के सभी देशों में रोज़गार अवसरों की कोई कमी नहीं है. सामाजिक व्यवहारवादी और क्षमता, व्यक्तित्व, अभिवृत्ति, मन के झुकाव एवं रुचि के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति, वर्तमान पीढ़ी के समक्ष उपलब्ध अनेक रोज़गार अवसरों के लिए स्वयं को उपयुक्त पा सकता है. इसलिए, किसी कॅरिअर कॉउंसलर की मूल भूमिका, उम्मीदवार को उसके पृथक पाठ्य- वृत्त एवं पाठ्येत्तर रुचियों, व्यावहारिक पद्धति और व्यक्तित्व की विशेषताओं के अनुसार कॅरिअर चुनने में अत्यधिक वांछित सहायता करने और उनका मार्गदर्शन करने की है.
तथापि, इस प्रकार के कॉउंसलरों की बढ़ती मांग के बाद, कॅरिअर कॉउंसिलिंग पाठ्यक्रम (कोर्स) अब सिलेबस (पाठ्यक्रम) में भी शामिल किया गया है तथा प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में एक कॅरिअर कॉउंसलर की नियुक्ति करने का प्रावधान है. कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर छात्रों का, उनके संतुलित शारीरिक, मानसिक, आत्मिक और मनोवैज्ञानिक विकास के लिए मार्गदर्शन करने के लिए जिम्मेदार होता है, ताकि वे सही समय पर सही प्रवृत्ति एवं अत्यधिक वांछित सफलता के साथ आसानी एवं आशा से कॅरिअर के सही मार्ग पर आगे बढ़ सकें.
कॅरिअर कॉउंसलर के कार्य
कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य करता है:-
१.व्यक्तियों की आत्म-जागरुकता का विकास करता है और यह विकास उन्हें उनकी रुचियों और क्षमताओं को बेहतर रूप में विकास करने में सहायता करता है.
२.बच्चों को उनकी पसंद, रुचि, महत्वाकाक्षां, व्यक्तित्व विशेषताओं और मानसिक प्रवृति के कॅरिअर-निर्णय लेने के लिए तैयार करता है.
३.छात्रों को, उनकी रुचियों तथा क्षमताओं के अत्यधिक उपयुक्त विभिन्न रोज़गार अवसरों और कॅरिअर के विकल्पों से अवगत कराता हैं.
४.उम्मीदवारों को कॅरिअर में बदलाव से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने और उनमें व्यावसायिक निपुणता लाने के लिए उनका व्यावसायिक मार्गदर्शन करता है.
किसी कॅरिअर कॉउंसलर के लिए अपेक्षित अनिवार्य कौशल
किसी कॅरिअर कॉउंसलर का कार्य उतना आसान नहीं होता जितना हम समझते हैं. यह कार्य व्यक्ति की शैक्षिक उत्कृष्टता को समझने से अधिक उसके व्यवहार और मनोविज्ञान को संवेदनशील ढंग से समझने से जुड़ा है, और इसलिए, किसी भी कॅरिअर कॉउंसलर को व्यक्ति की स्वाभाविक क्षमताओं तथा जन्मजात अक्षमताओं को सहानुभूतिपूर्वक समझने के लिए एक अच्छा मनुष्य होना चाहिए.
इसके अतिरिक्त, कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर-
*वर्तमान रोज़गार प्रवृत्तियों और कॅरिअर-अवसरों की उपलब्धता की व्यापक जानकारी रखता हो. उसे विभिन्न संस्थाओं, उनके द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों, पाठ्यक्रम शुल्क, छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का भी संपूर्ण ज्ञान भी होना चाहिए.
*देश तथा विदेश में शिक्षा में बदलाव, कॅरिअर के उभर रहे अवसरों और आने वाले वर्षों में इनकी संभावनाओं की भी अद्यतन जानकारी होनी चाहिए.
*अत्यधिक धैर्य एवं श्रवण कौशल होना चाहिए.
*अच्छे चरित्र, ईमान और प्रतिबद्धता वाला व्यक्ति होना चाहिए.
*मानव-व्यवहार तथा मनोविज्ञान की बेहतर समझ रखने के साथ अत्यधिक धैर्यशील हो.
*विश्व के विभिन्न देशों की रोज़गार नीतियों और सामाजिक- राजनीतिक स्थिति का पूर्ण ज्ञान रखते हों.
*विश्लेषिक शक्ति, संचार दक्षता और संवेदनशीलता धारी हो.
*प्रेरणा शक्ति होनी चाहिए.
*उम्मीदवारों को कॅरिअर विकल्प और रोज़गार अवसरों के सही मार्ग पर अग्रसर करने और प्रेरित करने के नेतृत्व गुण होने चाहिएं.
शैक्षिक योग्यताएं
अधिकांश कॅरिअर कॉउंसलर यह व्यवसाय मनोविज्ञान एक मुख्य विषय के रूप में लेकर करते हैं. क्योंकि मनोविज्ञान विषय मानवीय व्यवहार और नैसर्गिक मानवीय इनस्टिकंट्स की अत्यधिक आवश्यक सूक्ष्मदृष्टि तथा समझ प्रदान करता है और उससे कॅरिअर कॉउंसलर उनकी समस्याओं और वरीयता को बेहतर रूप से समझ सकता है. तथापि कॅरिअर कॉउंसिलिंग का कोई विशेष पाठ्यक्रम नहीं है, किंतु सभी मार्गदर्शन एवं कॉउंसिलिंग पाठ्यक्रमों में कॅरिअर काउंसिलिंग एक विशिष्ट भाग के रूप में शामिल है. किसी भी विषय में स्नातकोत्तर डिग्रीधारी कोई भी उम्मीदवार कॉउंसिलिंग में डिप्लोमा हेतु आवेदन करने के लिए पात्र होता है. तथापि यह एक अन्य तथ्य है कि विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों का एक समूह पृष्ठभूमि के रूप में मनोविज्ञान के साथ मास्टर डिग्री को वरीयता देते हैं. कुछ वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षक भी कॅरिअर मार्गदर्शन एवं कॉउंसिलिंग पाठ्यक्रम करने के पात्र होते हैं.
पारिश्रमिक
जहां तक किसी कॅरिअर कॉउंसलर के वेतन पैकेज का संबंध है यह एक अजीब तथ्य है कि मानव-व्यवहार और मनोविज्ञान के इस क्षेत्र में व्यापक विभिन्नता है. अनेक प्रतिष्ठित एवं सुस्थापित संगठन और शैक्षिक संस्थान आकर्षक पैकेज देते हैं, जबकि शेष क्षेत्रों में कोई कॅरिअर कॉउंसलर २००००/- से ३००००/- रु. मासिक वेतन प्राप्त करता है. तथापि, अधिकांश स्कूलों एवं कॉलेजों में कॅरिअर कॉउंसलरों के नियमित पद हैं और वे उन्हें समय-समय पर यथादेय सभी भत्तों सहित औपचारिक वेतनमानों में वेतन देते हैं. किंतु फ्रीलाँसर अथवा अंशकालिक रूप में कार्य करने वाला कॅरिअर काउंसलर इससे भी अधिक वेतन प्राप्त करता है. कई कॅरिअर प्रबंधन और रोजग़ार एजेंसियां भी कॅरिअर कॉउंसलरों की भर्ती करती हैं और उन्हें आकर्षक वेतन पैकेज देती हैं.
मार्गदर्शन एवं कॉउंसिलिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थान
*राष्ट्रीय शिक्षा एवं अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद-एनसीईआरटी, नई दिल्ली (www.ncert.nic.in).
*राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान, तमिलनाडु (एमए कॅरिअर कॉउंसिलिंग, www. rgniyd.gov.in)
*अन्नामलई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु (Annamalai university.ac.in)
*कर्नाटक विश्वविद्यालय, कर्नाटक- www.kud.ac.in
रोजग़ार संभावनाएं
किसी व्यावसायिक कॅरिअर कॉउंसलर की रोजग़ार संभावनाओं के साथ यह कहावत जुड़ी है कि संभावनाएं अनंत हैं’. यह कहावत, विशेष रूप से आज के सार्वभौमिक विश्व में बिल्कुल सत्य है. जहां रोज़गार के अवसर प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. तथापि, कुछ मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं जहां किसी कॅरिअर कॉउंसलर की अत्यधिक मांग होती है :
१. अधिकांश कॅरिअर कॉउंसलर स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न अन्य शैक्षिक संस्थानों में रोजग़ार प्राप्त करते हैं. छात्रों एवं किशोरों में तीव्रता से बढ़ते हुए तनाव और उनके द्वारा आत्महत्या करने के निरंतर बढ़ते हुए मामलों को ध्यान में रखते हुए देश के सभी शैक्षिक एवं कोचिंग संस्थानों में कॅरिअर कॉउंसलर सेवारत हैं.
२. कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर किसी कॅरिअर सूचना केंद्र में भी कार्य कर सकता है. वह किसी कॅरिअर शिक्षा कार्यक्रम में भी कार्य कर सकता है.
३. कोई कॅरिअर कॉउंसलर, रोजग़ार साक्षात्कार की तैयारी करने के लिए छात्रों की सहायता करने वाले व्यवसायी के रूप में भी कार्य कर सकता है.
४.कौशल का विकास करने में छात्रों की सहायता करना भी कॅरिअर कॉउंसलर का एक महत्वपूर्ण रोज़गार माना जा सकता है. वह साफ-सुथरा और स्पष्ट व्यावसायिक जीवन-वृत्त लिखने में भी सहायता करता है. सामूहिक विचार विमर्श अथवा साक्षात्कार के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों के साथ उम्मीदवारों की सहायता करना भी कॅरिअर कॉउंसलरों का एक कार्य माना जाता है.
५.स्कूल एवं कॉलेज स्तरों पर छात्रों को सही और उपयुक्त विषयों का चयन करने में उन्हें सहायता करना. वे छात्रों को किसी प्रवेश अथवा प्रवेश परीक्षा हेतु विभिन्न प्रलेखों की आवश्यकताओं के लिए परामर्श देेते हैं.
६. कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर किसी उम्मीदवार को वित्त एवं पाठ्यक्रम शुल्क के साधनों के क्षेत्र के बारे में भी मार्गदर्शन करता है.
७.कॅरिअर कॉउंसलर  प्लेसमेंट एजेंसियों के साथ भी कार्य करता है और उम्मीदवारों को कॅरिअर विकास के बारे में परामर्श देता है.
८. विश्व अर्थव्यवस्था के सार्वभौमिकरण के साथ, किसी कॅरिअर कॉउंसलर के विदेश में रोजग़ार अवसर और जिम्मेदारियां बढ़ गयी हैं. कोई भी कॅरिअर कॉउंसलर विश्व के विभिन्न देशों में विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजग़ार के अवसर के बारे में छात्रों को परामर्श देता है.
किसी कॅरिअर कॉउंसलर का कॅरिअर कोई आसान कार्य नहीं है क्योंकि इसमें उम्मीदवारों के कॅरिअर को संवारना और उनके भविष्य को शानदार तथा उज्जवल बनाने का नैतिक दायित्व शामिल होता है. इसके अतिरिक्त उसे स्वयं को अद्यतन जानकारी के प्रति सजग रहना होता है. उसे विभिन्न रोजग़ार बाजारों में हो रहे विभिन्न प्रकार के विकासों का तत्काल ज्ञान रखना होता है. इसके अतिरिक्त उसे एक ऐसा मनोवैज्ञानिक भी होना चाहिए जो व्यक्तियों के मन और मस्तिष्क को सटीक रूप में समझ सके. लंबे और विषम कार्य-घंटे तथा विभिन्न व्यक्तियों के साथ सहानुभूतिपूर्वक संव्यवहार करना कोई आसान कार्य नहीं है. किंतु उम्मीदवारों को उनकी उपलब्धियों के शिखर पर पहुंचाने के लिए अत्यधिक आवश्यक मार्गदर्शन करना और उनके अत्यधिक वांछित सपनों को साकार करने में सहायता करना सामान्य रूप से संतुष्टि का कार्य है. जिसका रोजग़ारधारी बेहतर रूप में अहसास करते हैं.
(लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय, बिरौली (बिहार) में अध्यापन कार्य करते हैं. ई-मेल आईडी : spsharma.rishu@gmail.com)