नौकरी फोकस


volume 36, 8-14 December, 2018

कॅरिअर का चयन

                                                               विजय प्रकाश श्रीवास्तव

एक युवा व्यक्ति के लिए एक आजीविका का चयन कर लेना संभवत: उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है. इस निर्णय से उसका जीवन अनेक प्रकार से प्रभावित होता है, जिसे हम सभी आसानी से समझ सकते हैं. हमारे रोज़गार और हमारी आजीविका से सीधे तौर पर ये तथ्य जुड़े हुए हैं कि हम कहां रहेंगे, हम क्या करेंगे, हमारी आय कितनी होगी और हमारा रहन-सहन कैसा होगा.

आजीविका का स्थान उतना ही नहीं है, जितना  2-3 दशक पहले होता था. विश्व तेजी से बदल रहा है और इस गतिशील विश्व में रोज़गार और आजीविका के प्रति लोगों की पहुंच में भी बदलाव हुआ है. वास्तव में यह एक अच्छी बात है. हमारा रणनीतिक और समसामयिक होना वास्तविकता के करीब पहुंचने में हमारे लिए मददगार है, जिसके बल पर हम जीवन के सभी हिस्से में बेहतर निर्णय ले पाते हैं. एक आजीविका के चयन के बारे में गंभीरतापूर्वक निर्णय लेना चाहिए, ताकि हम प्रसन्न रह सकें, संतुष्ट रह सकें और पश्चाताप के लिए कोई जगह हो.

दैनिक जीवन में हम ऐसे बहुत से लोगों से मिलते-जुलते हैं, जिनके पास रोज़गार है. उनमें से अधिकांश लोग अपना कार्य निष्ठा और समर्पण के साथ करते हैं. किंतु ऐसा कतई नहीं कहा जा सकता कि उनमें से सभी लोग अपने रोज़गार से खुश हैं. अधिकांश लोगों के लिए उनका रोज़गार एक नियमित कार्य की तरह है. कितना अच्छा होगा कि हमें अपनी पसंद का रोज़गार मिले, जिस काम में हमारा दिल लगे और अपने कार्य से आनंद का अनुभव कर सकें. अपनी आजीविका के लिए समुचित योजना तैयार करना इसमें मददगार हो सकता है. एक आजीविका का चयन होना चाहिए. ऐसा नहीं कि यह महज हो गया हो.

रोज़गार खोजने के दो तरीके हो सकते हैं. पहला यह हो सकता है कि जो कुछ हमें मिलता है, उसे स्वीकार करें. दूसरा रास्ता यह है कि हम अपनी आजीविका के उद्देश्यों को समझें और फिर उसकी पूर्ति के लिए कार्य में जुट जाएं. यह सच है कि रोज़गार के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पद्र्धा है. यह निर्णय करना हमारा काम है कि हम इस प्रतिस्पद्र्धा से अवगत होकर निर्णय करें अथवा प्रतिस्पद्र्धा को तोडऩे के लिए खुद को तैयार करें. यह सच है कि एक समुचित आजीविका योजना और कठिन परिश्रम से आपके लिए इस प्रतिस्पद्र्धा के माध्यम से रास्ता तैयार करना आसान होगा.

आजीविका की योजना बनाना, लक्ष्य को निर्धारित करने और निर्णय कायम करने जैसा है. अच्छी योजना और सही विकल्प से आपको लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी. इस लेख में शामिल सुझावों का लक्ष्य है. प्रथम बार रोज़गार पाने के इच्छुक लोगों की मदद करना और ऐसे व्यक्तियों की मदद करना, जो पहले से नियोजित हैं किंतु उसे बदलना चाहते हैं.

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में काफी बदलाव हुए हैं. पिछले दशकों में नियमित तौर पर बदलाव हुए हैं. हम विश्व की सबसे तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के रूप में जाने जाते हैं. हमारे पास युवा लोगों की संख्या सबसे अधिक है. प्रत्येक दिन नये अवसर हमारे सामने होते हैं. उनका लाभ उठाने के क्रम में हमें अपने लिए उपयुक्त अवसरों का चयन करना होगा.

पहले की पीढ़ी के लिए आजीविका के सीमित विकल्प होते थे और अधिकांश मामले में लोग सेवानिवृत्ति तक अपने पहले रोज़गार में लगे रहते थे. नई पीढ़ी के सामने एक भिन्न स्थिति है. उनके सामने अनेक अवसर हैं. कार्य करने लायक उनके जीवन में इतनी संख्या में रोज़गार अथवा कंपनियां हैं, जितना वे सोच नहीं सकते. इस युवा जनसंख्या के अधिकांश हिस्से के लिए अनेक रोज़गार और अनेक संगठन हैं. दूसरी और, ऐसी स्थिति में पूरा परिदृश्य थोड़ा जटिल हो जाता है. ऐसे योग्य युवा हैं, जिन्हें प्रख्यात कंपनियों में अच्छे वेतन वाले रोज़गार मिले हैं, किंतु वे अपना कारोबार शुरू करने का निर्णय लेते हैं. हरेक व्यक्ति ऐसा जोखिम उठाने में समर्थ नहीं होता. कोई व्यक्ति कहां कार्य करना चाहता है और क्या करना चाहता है, यह उसके व्यक्तिगत निर्णय का विषय है. जो व्यक्ति अच्छी आजीविका सुनिश्चित करना चाहते हैं, वे ऐसे उद्योगों अथवा करोबारों पर ध्यान दें, जिनका अच्छा भविष्य हो. किंतु यह एकमात्र शर्त नहीं हो सकती. वस्तुत: आपको एक आजीविका के लिए बाहरी पक्ष की और देखने से पहले आंतरिक पक्ष की ओर देखना चाहिए.

अपने व्यक्तित्व की विशेषताओं पर ध्यान देने से इसमें मदद मिलती है. यदि आपका रोज़गार आपके व्यक्तित्व से मेल खाता है तो इसे निभाने में आसानी होगी. उदाहरण के लिए, बिक्री और बाजार संबंधी रोज़गार किसी ऐसे व्यक्ति के लिए अच्छा रोज़गार नहीं माना जाएगा, जो अंतर्मुखी हो तथा नये लोगों से मिलना पसंद नहीं करता हो. यदि हम यह मानकर चलते हैं कि ऐसा कोई व्यक्ति मार्केटिंग संबंधी रोज़गार पाना चाहता है तो उसे एक प्रभावी मार्केटर बनने के लिए अपने अंतमुर्खी व्यवहार को त्यागना होगा. हमे ऐसे रोज़गार का चयन करना चाहिए, जिसका हमारे व्यक्तित्व से तालमेल हो अथवा अपने व्यक्तित्व को अपने रोज़गार के अनुसार बदलना चाहिए. यह मुश्किल लगता है किंतु संभव है. कई लोगों ने ऐसा कर दिखाया है.

आपका कौशल भी समान रूप से महत्वपूर्ण है. हम सभी के पास कुछ कौशल हैं और कुछ लोगों के पास अन्य लोगों की तुलना में अधिक कौशल है. सभी प्रकार के रोज़गार के लिए मूल-भूत कौशल की आवश्यकता है. अपेक्षाकृत स्तरीय रोज़गार के लिए विशेष कौशल की जरूरत होती है. यह सुनिश्चित करें कि आप जैसा रोज़गार चाहते हैं, उसके लिए आपके पास मूलभूत कौशल मौजूद हैं. कौशल को सीखा जा सकता है और विकसित किया जा सकता है. यदि आपके पास किसी कौशल की कमी है तो अपने प्रयासों से उसे प्राप्त किया जा सकता है.

यह जरूरी नहीं कि किसी डिग्री से आपको कौशल प्राप्त होता है. कई सर्वेक्षणों में यह बताया जा रहा है कि आधे से अधिक अभियंत्रण स्नातकों को नियोजनीय नहीं माना जाता है, क्योंकि उनमें नियोक्ताओं द्वारा मांगे गए कई प्रकार के कौशल का अभाव होता है. आप अपनी डिग्री अथवा डिप्लोमा को अपने मनोनुकूल रोज़गार के लिए पासपोर्ट नहीं मान सकते. इसके अलावा अन्य कई चीजों की आवश्यकता होगी.

यह मानकर चलना सरल है कि आपके पास रोज़गार के लिए पर्याप्त योग्यता होनी चाहिए. यदि आप एक छात्र हैं और किसी खास रोज़गार की और आपका झुकाव है तो पात्रता संबंधी जरूरतें पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ें. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति एक अर्थशास्त्री के रूप में कार्य करना चाहता है तो उस विषय में स्नातकोत्तर डिग्री की जरूरत होगी. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लिपिकीय और सामान्य अधिकारी के पद के लिए स्नातक डिग्री की जरूरत होगी.

हममें से अधिकांश लोग किसी रोज़गार के बारे में पर्याप्त जानकारी के बिना ही उसके प्रति आकर्षित होने लगते हैं. हम रोज़गार पाने में सफल भी हो जाते हैं और तब महसूस करते हैं कि यह हमारी अपेक्षाओं से भिन्न है. इसलिए यह सलाह देना प्रासंगिक है कि किसी रोज़गार अथवा पद के बारे में हर संभव विवरण जुटाएं ताकि उसके बारे में सही तस्वीर सामने हो. रोज़गार के विज्ञापन में दिए गए विवरण को पर्याप्त नहीं मानना चाहिए. इंटरनेट पर जानकारी जुटाना मददगार हो सकता है, किंतु उस रोज़गार में कार्यरत व्यक्तियों से मिलकर जानकारी जुटाना बेहतर होगा.

आपकी आजीविका संबंधी रणनीति केवल इससे पूरी नहीं हो जाती कि आपने अपनी इच्छानुसार रोजगार के प्रकार के बारे में निर्णय कर लिया है. आप जिस संगठन में शामिल होना चाहते हैं, उसके बारे में आपके  पास स्पष्ट दृष्टिकोण होना चाहिए. उदाहरण के लिए, यदि आप एक स्नातक यांत्रिक अभियंता हैं, तो आपके लिए कई विकल्प होंगे. आपके सामने एनटीपीसी, भेल, ओएनसीजी आदि जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कम्पनियां हैं और ऐसे अभियंताओं की आवश्यकता वाले अन्य संगठनों के साथ-साथ केन्द्र सरकार की  अभियंत्रण सेवा का विकल्प भी है. एक खास समय में उन सभी में रिक्तियां नहीं हो सकती हैं, किन्तु अपनी प्राथमिकताओं से अवगत होना अच्छा रहेगा. यदि आप केवल रोजगार के लिए चिंतित हैं और संगठन के बारे में नहीं सोचते हैं तो आपका नजरिया उसके उसके बारे में स्पष्ट होना चाहिए.

केवल आजीविका के लिए रोज़गार की इच्छा रखना अब बीते दिनों की बात समझी जाती है. नये चलन के रूप में यह देखा जा रहा है कि लोग अपनी रुचि के अनुसार रोज़गार चाहते हैं. यह जरूरी नहीं कि उनके द्वारा चुना गया रोज़गार सीधे तौर पर उनके अध्ययन के विषयों से जुड़ा हो. यह स्पष्ट है कि सभी के लिए ऐसा संभव नहीं हो सकता. तथापि, ऐसा रोज़गार चुनना महत्वपूर्ण है, जिसे आप पसंद करते हैं और इसके लिए कुछ खोज की जरूरत होगी. एक सृजनात्मक सोच वाला व्यक्ति किसी अफसरशाही संगठन में शामिल होकर एक तरह फंसा हुआ महसूस कर सकता है.

किसी रोज़गार के बारे में केवल वेतन और वित्तीय लाभ के आधार पर निर्णय नहीं करना चाहिए. निश्चित रूप से रोज़गार में लगने वाले समय और आपके समपर्ण के अनुसार भुगतान मिलना चाहिए, किन्तु शिक्षण और विकास के अवसरों के बारे में जानना भी महत्वपूर्ण है. विकास करना केवल आजीविका की प्रगति ही नहीं है, बल्कि इसमें आपकी व्यक्तिगत और बौद्धिक विकास भी शामिल है. ऐसे संगठन में कार्य करना हमेशा अच्छा होता है, जिसके पास मानव संसाधन विकास के बारे में स्पष्ट नीति हो और जो अपनी मानवीय पूंजी में अच्छी तरह निवेश करता है.

इस समय आजीविका के उतने अवसर मौजूद हैं, जितने पहले कभी नहीं थे. इस लिए, जो व्यक्ति बदलाव चाहते हैं, उनके लिए अच्छी स्थिति है. किन्तु ऐसा निर्णय लेने से पहले समुचित विश्लेषण किया जाना चाहिए, कि वे आधारहीन कारणों पर निर्भर हों. कभी-कभी यह स्पष्ट करना आसान नहीं होता कि नये रोज़गार का प्रस्ताव किस प्रकार अच्छा है. कुछ मानदंडों के आधार पर वे प्रस्ताव लाभदायक हो सकते हैं किन्तु उसके लिए कुछ समझौते भी करने पड़ सकते हैं. आपको पूरे तौर पर प्रत्येक प्रस्ताव के बारे में निर्णय करना होगा. तभी यह सुनिश्चित हो पाएगा कि अधिकांश संदर्भों में आप एक बेहतर अवसर पाने जा रहे हैं. केवल अधिक वेतन के लिए ही अन्य रोज़गार का विकल्प ढूंढें. इसमें विकास के अवसरों अथवा कार्य संस्कृति की कमी हो सकती है. इसलिए रोज़गार के प्रत्येक पहलुओं का मूल्यांकन करना जरूरी होगा. यह भी सलाह योग्य है कि कोई रोज़गार कड़ी टिप्पणी के आधार पर छोड़ें. कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जब लोग अपने पूर्व-नियोक्ता के पास वापस आने का विकल्प चुनते हैं.

यदि आपने अच्छा संबंध कायम रखा है तो आपकी वापसी में आसानी होगी. यदि आप रोज़गार बाजार मे प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं तो अपनी जानकारी और कौशल बढ़ाएं. अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले व्यक्ति की मांगा हमेशा रहेगी और उन्हें बेहतर पद और उच्चतर भूमिका का प्रस्ताव मिलेगा.

जब कोई व्यक्ति रोज़गार पाने में विफल रहता है तो ऐसे में परिस्थिति, प्रणाली अथवा प्रतियोगिता पर दोषारोपण करना आसान होता है. इससे कोई मदद नहीं मिलेगी. आप अपने कठिन परिश्रम, सतत परिश्रम और सही नजरिये से अपने-आपको सुसज्जित करके सफलता पा सकते है. अपनी कमजोरियों और मजबूतियों का विश्लेषण करें. कमजोरियों को मजबूतियों में बदला जा सकता है. इसके लिए दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है. सफलता की दिशा में अपनी सोच को दृढ़ बनाएं, अपने उद्देश्यों को स्पष्ट करें और अपनी आजीविका के लक्ष्य की ओर बढऩे के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक करें. अपनी आजीविका संबंधी रणनीति कायम करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करें, अपनी जानकारी, अपने कौशल और अपनी रुचि को ध्यान में रखते हुए सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आगे बढ़े.

(लेखक मुंबई स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. -मेल: : v2j25@ yahoo. In)

 

व्यक्त विचार व्यक्तिगत है.