नौकरी फोकस


volume-42,19 - 25 January 2019

 

ऑडियोलॉजी और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी में कॅरिअर

अंकिता कुमारी

संबद्ध स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के साथ अध्ययन के कई विषय हैं. ऑडियोलॉजी एवं स्पीच व लैंग्वेज पैथोलॉजी एक संबंद्धित स्वास्थ्य विज्ञान है, जो पूरे जीवन में  किसी भी उम्र के व्यक्ति की अक्षमता की जांच व निदान करने के साथ-साथ विकृतियों व निगलने की क्षमता का आकलन, निदान व उपचार करने लिए ज्ञान और निपुणताओं से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है. इसमें उन लोगों को भी परामर्श दिया जाता है जो बात करने में असमर्थ हैं और उनके परिवार के सदस्य वाक व भाषा संबंधित विकारों से ग्रस्त, शब्दों को बोलने में कठिनाई महसूस करने वाले तथा सुनने में असमर्थ लोगों का पुनर्वास करते हैं.

भाषण और भाषा विकृति विज्ञान (एसएलपी) में योग्यता रखने वाले पेशेवरों को ऑडियोलॉजिस्ट और भाषण (वाक) भाषा रोग विज्ञानी कहा जाता है. ऑडियोलॉजी विज्ञान की एक शाखा है जो श्रवण, संतुलन और संबंधित विकारों का अध्ययन करती है. इसके चिकित्सक, जो उन लोगों का इलाज करते हैं जिन्हें सुनाई नहीं देता है और लगातार संबंधित क्षति को रोकते हैं, ऑडियोलॉजिस्ट होते हैं. विभिन्न परीक्षण तरीकों का प्रयोग  करते हुए, ऑडियोलॉजी का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि कोई व्यक्ति सामान्य सीमा के भीतर सुन सकता है या नहीं और यदि नहीं, तो सुनने के कौन से हिस्से प्रभावित हैं, किस हद तक, और कहां घाव के कारण सुनाई नहीं दे रहा है.  यदि एक ऑडियोलॉजिस्ट को लगता है कि एक सुन न पाने की विकृति या वेस्टिबुलर असामान्यता मौजूद है, तो वह  मरीज को सुझाता है कि कौन से ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जिससे उसे लाभ मिल सकता है या उसकी मदद हो सकती है.

इसी तरह, स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी (एसएलपी) विशेषज्ञता का एक क्षेत्र है जिसे चिकित्सीय भाषा में एक वाक-भाषा रोग विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है, जिसे कभी-कभी वाक और भाषा चिकित्सक या स्पीच थेरेपिस्ट भी कहा जाता है.  एसएलपी को ऑडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा (ऑक्यूपेशनल थेरेपी), क्लीनिकल साइकोलॉजी,  फिजिकल थेरेपी आदि के साथ एक 'संबद्ध स्वास्थ्य पेशामाना जाता है. एसएलपी के क्षेत्र को अन्य 'संबंधित स्वास्थ्य पेशोंसे ज्यादा विशिष्ट माना जाता है क्योंकि एसएलपी को कानूनी रूप से कुछ विकारों के निदान की अनुमति होती है जो उनकी चिकित्सीय प्रैक्टिस के दायरे में आते हैं. एसएलपी  मूल्यांकन, निदान और संप्रेषण विकृतियों के उपचार, संज्ञानात्मक-संप्रेषण विकारों, ध्वनि विकारों और निगलने वाले विकारों आदि के विशेषज्ञ होते हैं. एसएलपी ऑटिज्म (आत्मविमोह) स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के निदान और उपचार में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो विकास संबंधी विकार बनता जा रहा है.

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में विकलांगों की संख्या 2.68 करोड़ है, जिसमें 50.71 लाख लोग ऐसे हैं जो सुन नहीं सकते हैं और 19.98 लाख व्यक्ति बोलने के विकार से पीड़ित हैं. संक्षेप में, ऑडियोलॉजी और वाक भाषा (स्पीच लैंग्वेज) पैथोलॉजिस्ट पेशेवर रूप से वाक, भाषा, निगलने, और संज्ञानात्मक-संप्रेषण और श्रवण दोष की एक विस्तृत श्रेणी के मूल्यांकन और उपचार के लिए जिम्मेदार हैं. इस तरह के दोष संरचनात्मक या कार्यात्मक कारणों से हो सकते हैं, और या समय के साथ विकसित हो सकते हैं, या स्ट्रोक, सिर की चोट, या सिर और गर्दन के कैंसर जैसे कारणों की वजह से हो सकते हैं.

रोज़गार और स्व-रोज़गार

ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट विश्वविद्यालयों या कॉलेज में और श्रवण विज्ञान और विकारों के साथ-साथ संप्रेषण विज्ञान और विकृतियों और निगलने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शिक्षकों के रूप में काम करते हैं. यही नहीं, श्रवण दोष और मानसिक विकलांगता, ऑटिज्म और कई अन्य लोगों सहित स्पीच और भाषा की समस्याओं वाले बच्चों के इलाज के लिए, व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट की भारी मांग है. उनके पास अस्पतालों, विशेष स्कूलों, वाक और श्रवण संस्थानों, श्रवण यंत्र निर्माण उद्योग, विकलांग व्यक्तियों के लिए काम करने वाले सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सेंस विद डिसएबीलिटी, कंपोजिट रीजनल सेंटर्स फॉर पर्सेंस विद डिसएबीलिटी (सीआरएस), विश्वविद्यालय, सीबीएसई स्कूल, अस्पताल, पुनर्वास केंद्र, एनआरएचएम, डिस्ट्रिक्ट डिसएबीलिटी रीहेबीलिरेशन सेंटर्स (जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र-डीडीआरसी), राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (आरबीएसके), बुनियाद केंद्र, डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स (डीईआईसी), एसएसए और साथ ही स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने के लिए विदेश में उच्चतर अध्ययन और प्रैक्टिस के लिए उत्कृष्ट अवसर हैं उनके पास. वर्तमान में, प्रशिक्षित पेशेवरों की सेवाएं जिला मुख्यालय स्तर तक सीमित हैं. हालांकि, विकलांगता अधिनियम 2016 के व्यक्तियों के अधिकार जनादेश के अनुपालन के तहत ब्लॉक और उपखंड स्तर पर स्पीच व लैंगवेज ऑडियोलॉजिस्ट की मांग की पूर्ति सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है. लेकिन प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी के कारण सरकार जरूरतमंदों को सेवाएं देने में असमर्थ है. इसलिए, कई और पेशेवरों की आवश्यकता होगी.

प्रैक्टिस  ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट के लिए अवसर 

भारतीय पुनर्वास परिषद (द रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया-आरसीआई) एक वैधानिक निकाय है, जिसे भारतीय पुनर्वास परिषद अधिनियम, 1992 के तहत बनाया गया है, जिसे विकलांगता क्षेत्र में कर्मियों के प्रशिक्षण को विनियमित करने और निगरानी करने और एक केंद्रीय पुनर्वास रजिस्टर कायम रखने की दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है. विकलांगता क्षेत्र में कोई भी पेशेवर जो विकलांगता के किसी भी क्षेत्र में काम करना चाहता है, उसके पास न केवल आरसीआई द्वारा मान्यताप्राप्त स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री होनी चाहिए, बल्कि आरसीआई के साथ पंजीकृत होना भी अनिवार्य है और केंद्रीय पुनर्वास रजिस्टर में उसका शामिल होना जरूरी है. स्पीच-लैंग्वेज और हियरिंग या कम्युनिकेशन डिसऑर्डर में डिप्लोमा वाले किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरतमंदों के लिए सेवाओं का वितरण किया जा सकता है, लेकिन ऐसा वह केवल एक ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट पेशेवर जिसके पास ग्रैजुएट की डिग्री हो, की देख-रेख में ऐसा करेगा.

ऑडियोलॉजी और स्पीच और लैंग्वेज पैथोलॉजी में पाठ्यक्रम

1. हियरिंग एड और ईयर मोल्ड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा (डीएचए और ईटी)

इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को श्रवण यंत्रों के रख-रखाव और मरम्मत के साथ-साथ ईयर मोल्ड तकनीक में प्रशिक्षण देना है. व्यावहारिक प्रशिक्षण पर ध्यान अधिक दिया जाता है और छात्र प्रशिक्षुओं को विभिन्न प्रकार के श्रवण यंत्रों की मरम्मत और कानों के सांचे तैयार करने का मौका भी मिलता है.

2. अर्ली चाइल्डहुड स्पेशल एजुकेशन में डिप्लोमा (श्रवण दोष)

यह डिप्लोमा कार्यक्रम जनशक्ति पैदा करने में मदद करता है जो 3 साल से कम उम्र के बच्चों की जरूरतों और उनकी देखभाल करने वाले बच्चों की जरूरतों को पूरा करेगा. जो प्रशिक्षित होते हैं, वे श्रवण दोष वाले बच्चों को प्री-स्कूल, पूर्व-शैक्षणिक कौशल से लैस करने में मदद करने में सक्षम होंगे. इससे ये बच्चे अधिक आसानी से स्कूली पाठ्यक्रम सीख सकेंगे. इस प्रकार, जो लोग डीईसीएसई (एचआई) प्रोग्राम करते हैं,  उन्हें श्रवण दोष से पीड़ित बच्चों को स्कूल में प्रवेश लेने से पहले, प्रशिक्षित करने में मदद करना होगा ताकि सामान्य ढंग से सुनने वाले बच्चों के साथ वे नियमित स्कूलों में पढ़ना उनके लिए संभव हो सके.

3. हियरिंग, लैंग्वेज एंड स्पीच में डिप्लोमा (डीएचएलएस)

इस कार्यक्रम को जनशक्ति उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो जमीनी स्तर पर संप्रेषण विकृति वाले व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा. इस कार्यक्रम में, छात्रों को संप्रेषण विकारों वाले व्यक्तियों की पहचान करने और आगे के निदान के लिए उचित निर्देश देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. छात्रों को पुनर्वास के लिए पेशेवरों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए देखभाल करने वालों की निगरानी करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है. सैद्धांतिक ज्ञान के पूरक के लिए व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

4. बैचलर ऑफ ऑडियोलॉजी और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी (बी.एएसएलपी)

बी.एएसएलपी/ बीएएसएलपी के स्नातक छात्र वाक, भाषा और श्रवण के सामान्य पहलुओं और विकृतियों के बारे में सीखते हैं. छात्रों को मूल्यांकन, निदान, उपचार और संप्रेषण विकारों के प्रबंधन में प्रशिक्षित किया जाता है. प्रशिक्षण में नैदानिक शिक्षण-शिक्षण पर ध्यान देने के साथ सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलू शामिल हैं. छात्रों को योग्य कर्मचारियों की देख-रेख में ग्राहकों से निपटने का तरीका सिखाया जाता है.

5. ऑगमेंटेटिव व अल्टरनेटिव कम्युनिकेशन (पीजीडीएएसी) में पी.जी. डिप्लोमा

इस कार्यक्रम का उद्देश्य शैक्षिक और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है जो जटिल संप्रेषण  जरूरतों वाले व्यक्तियों के लिए अनुशासनात्मक और क्षेत्र-आधारित एएसी सेवाएं प्रदान करने के लिए वाक भाषा रोगविज्ञानी और विशेष शिक्षकों को तैयार करने के लिए है ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकें.

6.  स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी के लिए क्लीनिकल लैंग्विस्टिक पैथोलॉजी में डिप्लोमा

नैदानिक भाषाविज्ञान, भाषाविज्ञान की एक शाखा है जो भाषाई सिद्धांतों के अनुप्रयोग से संबंधित है, विशेषकर नैदानिक स्वरूपों में. इसमें विभिन्न क्षेत्रों जैसे वाक और भाषा विकृति, भाषाविज्ञान, नैदानिक मनोविज्ञान और शिक्षा के बीच अंतर-अनुशासनात्मक अध्ययन शामिल है. कार्यक्रम का उद्देश्य भाषा विकास और इसके विकारों के बारे में ज्ञान प्रदान करना है. मुख्य रूप से, कार्यक्रम उम्मीदवारों को वाक, भाषा और अनुभूति के क्षेत्रों में अंतर-अनुशासनात्मक अनुसंधान करने के लिए तैयार करेगा. इसके अलावा, यह कार्यक्रम वाक भाषा विकृतिविदों को भारतीय संदर्भ में संप्रेषण समस्याओं वाले बच्चों और वयस्कों के लिए मूल्यांकन, निदान और मध्यस्थता योजना के बारे में उनके पहले से ही प्राप्त ज्ञान को बढ़ाने के लिए सुसज्जित करेगा.

7. फोरेंसिक स्पीच साइंस एवं टेक्नोलॉजी में पी.जी. डिप्लोमा

वाक विशेषताओं के माध्यम से व्यक्तियों की पहचान स्पीच साइंस का एक क्षेत्र है जो कि विधि चिकित्साशास्त्रियों (फोरेंसिक विशेषज्ञों) का विश्वसनीयता से ध्यान आकर्षित करता है. भारत में बहुत कम फोरेंसिक प्रयोगशालाएं हैं जो फोरेंसिक स्पीकर की पहचान करती हैं. फोरेंसिक स्पीच साइंसेस और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम (टेक्नोलॉजी) में डिप्लोमा फोरेंसिक स्पीकर पहचान के क्षेत्र में पेशेवरों को प्रशिक्षित करना चाहता है जो फोरेंसिक साइंस में लागू होगा.

8. न्यूरो-ऑडियोलॉजी में डिप्लोमा

न्यूरोऑडियोलॉजी, ऑडिओलॉजी की विशिष्ट शाखा है जो श्रवण तंत्रिका मार्ग और संबद्ध तंत्रिका नेटवर्क की संरचना, कार्य और विकारों से संबंधित है. इस विशेषता का दायरा अंतर्विषयक है. इस क्षेत्र के ज्ञान का उपयोग उन जगहों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, जहां  घाव हैं, साथ-साथ श्रवण और संबंधित तंत्रिका मार्गों के विसरित घावों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है. इसका उपयोग श्रवण संकेत के प्रसंस्करण का अध्ययन करने के लिए किया जा सकता है, साथ ही उन व्यक्तियों में जिनकी श्रवण शक्ति सामान्य है और साथ ही साथ नैदानिक आबादी के एक विस्तृत क्षेत्र में किया जा सकता है. यह श्रवण तंत्रिका तंत्र में प्लास्टिसिटी का मूल्यांकन करने में भी उपयोगी है. कार्यक्रम का ध्यान श्रवण और वेस्टिबुलर प्रणाली के बारे में अनुसंधान और नैदानिक कौशल प्रदान करने पर है. कार्यक्रम, क्षेत्र से संबंधित अनुसंधान करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल भी प्रदान करता है.

8. एम.एससी (स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी)

स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी में स्नातकोत्तर कार्यक्रम स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी के पेशे के अनुसार उन्नत ज्ञान और कौशल प्रदान करने की दिशा में सक्षम है. कार्यक्रम को स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी के अनुशासन के लिए सैद्धांतिक, नैदानिक, अनुसंधान, क्षेत्र-आधारित और प्रौद्योगिकी आधारित ज्ञान में योगदान करने के लिए जनशक्ति विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. कार्यक्रम विभिन्न निदानों और संप्रेषण विकारों के प्रबंधन पर केंद्रित है और देश में पेशे को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान करता रहता है.

9. एमएससी (ऑडियोलॉजी)

ऑडियोलॉजी में स्नातकोत्तर कार्यक्रम उन छात्रों के लिए तैयार किया गया जो इस क्षेत्र में गहन ज्ञान और निपुणता पाना चाहते हैं. ऑडियोलॉजी में स्नातकोत्तर कार्यक्रम श्रवण प्रणाली के सामान्य पहलुओं के साथ-साथ श्रवण विकारों के विभिन्न निदान और अंतर प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने पर केंद्रित है. इसके अलावा, छात्रों को विकलांगों से संबंधित प्रासंगिक पहलुओं और अनुसंधान की जरूरतों और योजना अनुसंधान की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है जो नैदानिक और पुनर्वास सेवाओं को उन्नत करने में मदद करेगा.

 

10. पीएच.डी. (स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी, ऑडियोलॉजी एंड स्पीच एंड हियरिंग)

डॉक्टरल कार्यक्रम स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी, स्पीच साइंसेज एंड लैंग्वेज साइंसेज के क्षेत्र में गुणवत्ता और शोध की वृद्धि करने के लिए तैयार किया गया है और साथ ही बोलने व  सुनने के विस्तृत क्षेत्र में ऑडिटरी फिजियोलॉजी, साइकोफिजिक्स, स्पीच परसेप्शन, डायग्नोस्टिक ऑडियोलॉजी, रिहैबिलिटेशन ऑडियोलॉजी, इंडस्ट्रियल और फोरेंसिक ऑडियोलॉजी, एजुकेशनल ऑडियोलॉजी,  पेडियाट्रिक और जराचिकित्सा ऑडियोलॉजी और उपकरण, ग्राहक और सहयोग में अनुसंधान करने के लिए.

ऑडियोलॉजी और स्पीच और लैंग्वेज पैथोलॉजिकल कोर्स में प्रवेश

स्नातक कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को 10 + 2 परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिए या उसने संबंधित राज्य सरकार के प्री यूनिवर्सिटी बोर्ड ऑफ एजुकेशन द्वारा आयोजित एक समकक्ष परीक्षा में न्यूनतम 50त्न अंक प्राप्त किए हों. अंक में छूट संबंधित विश्वविद्यालय / राज्य / केंद्र शासित प्रदेशों या केंद्र सरकार के नियमों और विनियमों के अनुसार होगी. आवेदक/उम्मीदवार के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान/गणित/कंप्यूटर विज्ञान/सांख्यिकी/इलेक्ट्रॉनिक्स/मनोविज्ञान में से किसी एक का अध्ययन किया होना आवश्यक है. पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के कार्यक्रमों के लिए किसी भी विश्वविद्यालय के बीएएसएलपी या बी.एससी (वाक और श्रवण) की डिग्री, जिसे भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा मान्यताप्राप्त है या किसी अन्य डिग्री के समकक्ष माना जाता है और औसतन 55 प्रतिशत से कम क न हों तो वे मास्टर डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए योग्य  हैं. प्रवेश के वर्ष के 1 जुलाई को आवेदक 30 वर्ष से अधिक उम्र का नहीं होना चाहिए. संबंधित संस्थानों द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश सीधे संबंधित विश्वविद्यालयों के निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाता है. शैक्षणिक सत्र हर साल मई/जून में शुरू होता है और हर साल अप्रैल में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होती है. इसलिए, किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए संबंधित संस्थान और विश्वविद्यालयों से सीधे संपर्क किया जा सकता है. आरसीआई, नई दिल्ली के तहत पुनर्वास में राष्ट्रीय

 

 

 

परीक्षा बोर्ड (एनबीआर) ने डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की है. पाठ्यक्रमों की अवधि इस प्रकार है

क्रम                   पाठ्यक्रम का नाम                                              पात्रता                                                                अवधि

सं.

1 .                   डिप्लोमा इन हियरिंग एड एंड ईअर                         12 वीं/ढ्ढढ्ढ पीयूसी/डिप्लोमा इन                                        1 वर्ष

                                    मोल्ड टेक्नोलॉजी                               इलेक्ट्रॉनिक्स/आईटीआई)

2.     डिप्लोमा इन अर्ली चाइल्डहुड स्पेशल                                      12 वीं/II पीयूसी                                                       1  वर्ष

                एजुकेशन 

3              डिप्लोमा इन हियरिंग, लैंग्वेज एंड स्पीच                          12 वीं/II पीयूसी (साइंस स्ट्रीम)                                                   1 साल 

4              बी.एएसएलपी                                                      12 वीं/II पीयूसी (पीसीएम/बी)                                    4साल       

 5    पीजी डिप्लोमा ऑगमेंटेटिव और                                           बी.एस.सी (Sp & Hg.)/बी.एएसएलपी/                           1वर्ष

            वैकल्पिक में संचार                                                     बी.एस.ईडी 

                                                                                    (एचआई, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑडर्स,

                                                                                      लर्निंग डिसेबिलिटी, मंदबुद्धि, मस्तिष्क

                                                                                       पक्षाघात, एकाधिक विकलांगताएं)

6              स्पीच लैंग्वेज में क्लीनिकल                                    बीएससी (Sp & Hg.)/बी.एएसएलपी                                  1 वर्ष

                लैंगविस्टक में पीजी डिप्लोमा पैथोलॉजी                  

7              फॉरेंसिक स्पीच साइंस एंड टेक्नोलॉजी                        बी.एस.सी. (पी/एम/ई/सीएस)/बी.एस.सी.                            1 वर्ष

                में पीजी डिप्लोमा बीएससी                                     (Sp & Hg.)/बी.एएसएलपी/बी.टेक/ 

                                                                                          एमबीबीएस)

8              न्यूरो ऑडियोलॉजी में पीजी डिप्लोमा                        बीएससी (Sp & Hg.)/ बी.एएसएलपी                                   1 वर्ष

9              एमएससी (एसएलपी)                                      बीएससी (Sp & Hg.)/बी.एएसएलपी                                       2साल

10           एमएससी (्रह्वस्र)                                             बीएससी (Sp & Hg.)/बी.एएसएलपी                                                

11           पीएच.डी. (एसएलपी), (ऑड),                           एम.एससी. (एसएलपी)/एम.एससी.                                        3 वर्ष

                (स्पीच एंड हियरिंग)                                       (ऑड)/एम.एससी./एमएएसएलपी

                                                                                          1 वर्ष कार्य अनुभव के साथ  

विशिष्ट प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान

पूरे भारत में लगभग 58 आरसीआई मान्यताप्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों के अलावा, इनमें से कुछ प्रसिद्ध संस्थान / विश्वविद्यालय नियमित पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं- मैसूर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग (एआईआईएसएच), डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (डीएसएमएनआरयू), लखनऊ, अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसएबिलिटीज (दिव्यांगजन) (एवाईजेएनआईएसएचडी), मुंबई, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग (एनआईएसएच), तिरुवनंतपुरम, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन फॉर मल्टीपल डिसएबिलिटीज (एनआईईपीएमडी); चेन्नै, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़; गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, फरीदकोट, पंजाब, सी.यू. शाह मेडिकल कॉलेज,  सुरेंद्रनगर,  नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (एनएससीबी), जबलपुर, टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज (बी.वाई.एल. नायर चैरिटेबल हॉस्पिटल), मुंबई, जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जेआईपीएमईआर, पांडिचेरी, रिजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, (आरआईएमएस), इम्फाल, मणिपुर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी), वेल्लोर, श्री रामचंद्र मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नै, ऑडियोलॉजी और स्पीच और लैंग्वेज पैथोलॉजी से संबंधित विषयों में उच्च अध्ययन और शोध के लिए प्रसिद्ध संस्थान हैं.

इंडियन स्पीच एंड हियरिंग एसोसिएशन (आईएसएचए)

 भारतीय इंडियन स्पीच एंड हियरिंग एसोसिएशन (आईएसएचए) 3160 से अधिक सदस्यों का पेशेवर और वैज्ञानिक संघ है, जो भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाक-भाषा रोगविज्ञानी, ऑडियोलॉजिस्ट और वाक, भाषा और श्रवण वैज्ञानिक हैं. आईएसएचए मैसूर सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1960 के तहत पंजीकृत है और 1966 से पेशेवरों का ख्याल रख रही है.  एसोसिएशन का अपना कार्यालय ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग (एआईआईएसएच), मानस गांगोत्री, मैसूर, कर्नाटक में है. आईएसएचए  स्पीच लैंग्वेज और श्रवण सेवाओं में पेशेवर उत्कृष्टता, पेशेवर नैतिकता और पेशेवरों की रुचि और स्पीच लैंग्वेज और श्रवण दोष वाले लोगों को अपने मिशन के माध्यम से स्पीच लैंग्वेज और सुनने के पेशे में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और सार्वजनिक और व्यावसायिक जागरूकता, नैतिक विचार और परिणाम की निगरानी और पेशेवर नेटवर्किंग और अनुसंधान के लिए समर्थन, नेतृत्व, अद्वितीय व निरंतर शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास के बारे में परिकल्पना करता है.  व्यावसायिक विकास के लिए पूरे भारत में एआईआईएसएच  की पंजीकृत राज्य इकाई की स्थापना की जा रही है जैसे उत्तर प्रदेश स्पीच एंड हियरिंग एसोसिएशन (यूपीआईएसएचए), लखनऊ, बिहार स्पीच एंड हियरिंग एसोसिएशन (बीआईएसएचए), पटना आदि में.

अनुसंधान के अवसर

ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट सामान्य प्रक्रियाओं और श्रवण संतुलन, संप्रेषण, शब्दों को ठीक से न कह पाने, और अन्य संबंधित पहलुओं के विकारों से संबंधित आधार और अनुप्रयुक्त अनुसंधान में शामिल होते हैं. ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज के पैथोलॉजिस्ट ज्ञान के आधार को बढ़ाने, नए तरीकों और कार्यक्रमों को विकसित करने और मूल्यांकन और उपचार प्रतिमान की दक्षता निर्धारित करने के लिए बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के डिजाइन और तरीकों,संबंधित क्षेत्रों में अन्य पेशेवरों और जनता के लिए अनुसंधान के निष्कर्षों का प्रसार करने में संलग्न हैं. भारत और विदेशों में सीआरसी के  विशेष राष्ट्रीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के अवसर उपलब्ध हैं. पीएच.डी करने के लिए, यूजीसी की अनिवार्यताओं को पूरा करना होता है.

सफलता के लिए विशेषताएं

ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच पैथोलॉजिस्ट के रूप में एक सफल कैरियर बनाने के लिए कुछ खास गुणों की आवश्यकता होती है जैसे कि गहन अवलोकन करने की क्षमता, लोगों की मदद करने की इच्छा, मजबूत संप्रेषण कौशल, विश्लेषणात्मक क्षमता, दूसरों के साथ धैर्य और दृढ़ता. विकलांग लोगों के प्रति एक बुनियादी संवेदनशीलता की भी आवश्यकता होती है और सही दृष्टिकोण होने की आवश्यकता होती है. इस तरह के सभी कौशल और गुणों को  सकारात्मक और ईमानदार प्रयासों से विकसित किया जा सकता है. ऑडियोलॉजी और स्पीच व लैंग्वेज पैथोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आप दिव्यांग व्यक्तियों की एक अच्छे, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने में मदद करते हैं, मानसिक समस्याओं को दूर करते हैं और लोगों के सामाजिक, पारिवारिक और कार्यस्थल संबंधों को समृद्ध करते हैं. सामान्य तौर पर यह कोई चमक-दमक वाला कॅरिअर नहीं है और न ही इसमें नियमित पदोन्नति होती है. इसलिए, यदि वास्तव में विषय में आपकी रुचि हो, तभी आप ऑडियोलॉजी और स्पीच और भाषा पैथोलॉजी में अपने काम और कॅरिअर का आनंद ले पाएंगे. इसके अलावा, ऑडियोलॉजी और स्पीच और लैंग्वेज पैथोलॉजी के साथ आपकी स्नातक की योग्यता अन्य नौकरियों जैसे बैंकिंग, सिविल सर्विसेज, रेलवे आदि के लिए भी काम करेगी.

लेखिका डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ, के पुनर्वास और एकाधिक विकलांगता विभाग में एक स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट और विषय विशेषज्ञ संकाय हैं. मोबाइल : 9450601073 (ईमेल-ankitaa.kumari@gmail.com). लेख में व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं.