नौकरी फोकस


volume-49, 9 - 15 March, 2019

वानिकी में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

दि आप युवाओं के सामने यह प्रश्न रखें कि क्या वे वानिकी के क्षेत्र में आजीविका पाना चाहते हैं, तो इस बात की संभावना है कि बहुत-से युवा इस क्षेत्र में आजीविका पाने के प्रति इच्छुक नहीं होंगे. यह एक वास्तविकता है कि बहुत-से युवा इस बात से अवगत भी नहीं हैं, कि वानिकी के क्षेत्र में अनेक पाठ्यक्रम तथा आजीविका के विकल्प  उपलब्ध हैं.

वर्तमान दौर में पारिस्थितिकीय संतुलन, पर्यावरण संरक्षण जैसे शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. दुनिया के सामने अनेक चुनौतियां हैं. पर्यावरण का बढ़ता असंतुलन उनमें से एक है. मानव द्वारा वन्य संसाधनों का नुकसान किया जा रहा है तथा उनका बेतरह दोहन किया जा रहा है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वनों के अस्तित्व पर ही मानव समाज का अस्तित्व निर्भर है. लोगों की अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति वनों से होती है. वनों के महत्व पर विचार करने का यह एक कारण हो सकता है. इस विश्व को रहने के लायक बनाने में वनों एवं वानिकी को बहुमूल्य माना जाना चाहिए.

प्राय: ग्रहों पर जीवन का कोई अता-पता नहीं है, क्योंकि वहां वनों तथा जीवन के लिए आवश्यक अन्य संसाधनों (जैसे-पानी) का अभाव है.

वनों से हमें आश्रय, जल, जीविका, खाद्य सामग्री, ईंधन आदि प्राप्त होते हैं. वन संबंधी गतिविधियां प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर हमारे जीवन से जुड़ी हैं. फलों, सब्जियों, लकडिय़ों की प्राप्ति के साथ-साथ औषधियों रसायनों आदि में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद भी हमें वनों से ही प्राप्त होते हैं. वनों में वन्यजीवों को आश्रय मिलता है, जिसका महत्व कम करके नहीं आंका जा सकता है.

वानिकी में क्या शामिल है

वानिकी में वनक्षेत्र के विस्तार, बंजर भूमि को आबाद करने, वन की उत्पादकता बढ़ाने, लकड़ी तथा अन्य वनोत्पादों के युक्तिसंगत इस्तेमाल, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के विकास के साथ-साथ वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के बारे में अध्ययन किया जाता है.

वानिकी के पाठ्यक्रम में वनाच्छादन वानिकी, सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी, पारिस्थितिकी विज्ञान, जैव विविधता, पादप सुधार, वन जलविज्ञान तथा जलाशय प्रबंधन, काष्ठ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, वन सामग्री एवं सेवा, वन संसाधन प्रबंधन, बीज प्रौद्योगिकी, रेंजलैंड परस्पर प्रबंधन, वानिकी प्रणाली का अर्थशास्त्र, क्षेत्रीय और वैश्विक जलवायु परिवर्तन, वन भू-सूचना विज्ञान, वन्यजीवन संरक्षण एवं पारिस्थितिकी-पर्यटन आदि जैसे विषय शामिल हैं.

शिक्षा

देश के कई महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में बी.एससी (वानिकी) एवं एम.एससी (वानिकी) के रूप में क्रमश:  स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. अधिकांश कृषि संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में ये पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. बी.एससी (वानिकी) पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए छात्रों को विज्ञान विषयों, यानी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान सहित 12वीं कक्षा में उत्तीर्णता होनी चाहिए. कुछ संस्थानों में उम्मीदवार अपने स्नातक स्तर पर एक विषय के रूप में वानिकी का चयन कर सकते हैं. वानिकी में स्नातकोत्तर डिग्री के लिए, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान अथवा कृषि/बागवानी/वानिकी विषयों सहित स्नातकों को पात्र माना जाता है.

नीचे बताए गए संस्थानों में एम.एससी (वानिकी) पाठ्यक्रम उपलब्ध है. इनमें से कुछ संस्थानों में एम.एससी (बागवानी) पाठ्यक्रम उपलब्ध है, जिसका वानिकी से निकट संबंध है.

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात

चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला,

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखंड

उड़ीसा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर

बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर, छत्तीसगढ़

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू/श्रीनगर परिसर

कृषि विद्यापीठ, डपोली, महाराष्ट्र

गंगा कावेरी विज्ञान एवं प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरू

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर

कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल

मिजोरम विश्वविद्यालय, आईजॉल

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना

बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावार, राजस्थान

सरगुजा विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़

डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर

कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय धारवाड़

उत्तर बंग कृषि विश्वविद्यालय कूचबिहार

उत्तर पूर्व क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, निरजुली, अरुणाचल प्रदेश

डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश

बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

वानिकी महाविद्यालय, बेलानिक्कारा, केरल

बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, पासीघाट, अरुणाचल प्रदेश उत्तराखंड बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार, पौड़ी गढ़वाल

उपर्युक्त सूची केवल संकेतात्मक है. निश्चित तौर पर भारत के और भी अधिक महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में वानिकी/संबद्ध विषयों में पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं.

अधिकांश संस्थानों/विश्वविद्यालयों में वानिकी में सामान्य पाठ्यक्रम उपलब्ध है. इनमें से कहीं-कहीं वानिकी की खास शाखाओं में विशेषज्ञता सहित पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं. उदाहरण के तौर  पर कृषि वानिकी, पर्यावरण प्रबंधन, वन्य जिनेटिक संसाधनों, औषधीय एवं सुगंधित पादप, काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वाटर शेड प्रबंधन, सिल्वीकल्चर, सतत विकास, वन्य जीव विज्ञान एवं पादप विकास, वनोत्पाद एवं उपयोगिता आदि विषयों में विशेषज्ञता क्षेत्रों को लिया जा सकता है.

कुछ विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाता है, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा प्रवेश परीक्षा/चयन प्रक्रिया निर्धारित हैं. संबंधित वेबसाइटों से इनके बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

कई विदेशी संस्थानों में भी वानिकी की पढ़ाई होती है, जैसे- यूनिवर्सिटी ऑफ फोरेस्ट्री, सॉफिया, बुल्गेरिया, बीजिंग फोरेस्ट्री यूनिवर्सिटी,  चीन, मास्को स्टेट फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी, सेल स्कूल ऑफ फोरेस्ट्री एंड एनवॉयरनमेंट स्टडीज, फोरेस्ट्री यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलम्बिया एवं अन्य.

हालांकि एम.एससी (वानिकी) में कुछ हद तक प्रबंधन की विषय-सामग्री शामिल है, वहीं वन प्रबंधन में पूर्णत: प्रबंधकीय पाठ्यक्रम में भी प्रवेश लिया जा सकता है. भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, वन प्रबंधन में अपने स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए विख्यात है, जो एमबीए के समकक्ष है. यहां सस्टेनेबिलिटी प्रबंधन में भी स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया गया है. इस संस्थान को डॉक्टरल अनुसंधान सम्पन्न करने के लिए वन्य अनुसंधान संस्थान, देहरादून के एक अनुसंधान केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है. इस विख्यात संस्थान से उम्मीदवारों की भर्ती करने वाले कुछ प्रमुख संगठनों के नाम हैं-

द नेचर कंजरवेंसी, वाटर एड, वल्र्ड वाइल्ड लाइफ फंड, यूएनडीपी, ग्रामीण फांउडेशन इंडिया, द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, स्पंदन स्फूर्ति फाइनेंशियल कार्पोरेशन, स्वदेश फाउंडेशन, टेक्नोसर्व, पेरियार टाइगर रिजर्व, माइक्रोसेव, जयपुर रग्स, जीविका लावलीहुड सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन आदि.

कृषि व्यापार, ग्रामीण प्रबंधन, ग्रामीण विकास में विशेषज्ञता सहित प्रबंधन में स्नातकोत्तर योग्यता रखने वाले व्यक्ति के लिए वानिकी से जुड़े उपक्रमों में प्रबंधकीय पद भी मिल सकता है.

रोजगार एवं आजीविका

वानिकी को एक आजीविका के रूप में अपनाने के कई रास्ते हैं. विभिन्न अवसरों के बारे में निम्नलिखित विवरण से मदद मिल सकती है.

फॉरेस्ट गार्ड: फॉरेस्ट गार्ड बनने के लिए 10+२ में उत्तीर्णता की जरूरज होती है. ये भर्तियां राज्य स्तर पर की जाती हैं. इस पद के लिए वानिकी अथवा संबद्ध विषयों में किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं होती है सामान्यता ये रिक्तियां अधिक संख्या में होती हैं और इसी प्रकार उम्मीदवारों की संख्या भी अधिक होती है, क्योंकि इसके लिए योग्यता का मापदंड ऊंचा नहीं है.

फॉरेस्ट रेंज अधिकारी: प्रत्येक राज्य और केंद्रशाशित प्रदेश में फॉरेस्ट रेंज अधिकारियों/रेंजरों की आवश्यकता होती है तथा इसके लिए समय-समय पर विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं. इस पद के लिए भी, वानिकी में किसी औपचारिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है तथा सामान्य तौर पर कृषि/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी स्नातकों को पात्र माना जाता है. अन्य बातें सामान्य होने के बावजूद, बी.एससी (वानिकी) डिग्री को कुछ लाभ मिल सकता है. सामान्यता लिखित परीक्षा तथा उसके बाद साक्षात्कार के माध्यम से चयन किया जाता है. लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है. चयन के बाद व्यापक तौर पर प्रशिक्षण दिया जाता है. फॉरेस्ट रेंज अधिकारियों और राज्य के वन विभागों के कर्मचारियों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के क्रम में अच्छी बुनियादी सुविधाएं तैयार की गई हैं. इस उददेश्य की पूर्ति के लिए कई राज्यों के पास अपनी प्रशिक्षण संस्थापनाएं हैं, जैसे-

वन प्रशिक्षण संस्थान धारवाड़, कर्नाटक

तेलंगाना राज्य वन अकादमी, हैदराबाद

गुजरात फॉरेस्ट रेंजर महाविद्यालय, राजपिपला

केंद्रीय फॉरेस्ट रेंजर महाविद्यालय, चंद्रपुर

उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी, हलद्वानी

तमिलनाडु वन अकादमी, कोयम्बटूर

वन प्रशिक्षण संस्थान, जयपुर

वन प्रशिक्षण संस्थान एवं रेंजर महाविवद्यालय, सुंदर नगर हिमाचल प्रदेश

प्रवेश प्रशिक्षण के अलावा, ऐसे संस्थान रिफ्रेशर और निष्पादन विकास कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं.

भारतीय वन सेवा: हम सभी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित सिविल सेवा परीक्षा तथा पूरी प्रक्रिया में अंतिम रूप से चयनित होने पर इससे जुड़ी प्रतिष्ठा के बारे में जानते हैं. यूपीएससी की ओर से अखिल भारतीय स्तर पर अन्य परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं. भारतीय वन सेवा परीक्षा (1966 में स्थापित) उनमें से एक है.

इसे प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है. जिस प्रकार देश के प्रत्येक जिले में एक जिला दंडाधिकारी होता है, उसी प्रकार जिले एवं डिवीजनों में जिला/डिवीजन वन अधिकारी भी नियुक्ति किए जाते हैं. इन पदों को भरे जाने के लिए भारतीय वन सेवा अधिकारियों का चयन किया जाता है. ये अधिकारी उप वन संरक्षक, वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक,  प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद तक भी पहुंच सकते हैं.

भारतीय वन सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए स्नातक स्तर पर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, गणित, सांख्यिकी, वनस्पति विज्ञान, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान में से कम-से-कम किसी एक विषय में स्नातक डिग्री होनी चाहिए. कृषि, वानिकी अथवा इंजीनियरी के स्नातकों को भी पात्र माना जाता है.

लिखित परीक्षा को दो भागों में विभाजित किया गया है. प्रारंभिक परीक्षा सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के साथ आयोजित की जाती है, जिसमें वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न शामिल होते हैं. प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों को भारतीय वन सेवा (मुख्य) परीक्षा के लिए आवेदन करना होता है. रिक्तियों की संख्या की तुलना में मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों की संख्या 12 से 13 गुणा रखी जाती है.

प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र शामिल होते हैं. पहले प्रश्नपत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व के समसामयिक घटनाक्रमों, भारतीय एवं विश्व इतिहास/भूगोल, आर्थिक एवं सामाजिक विकास, राजनीति एवं शासन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन तथा सामान्य विज्ञान से संबंधित प्रश्न शामिल होते हैं. दूसरे प्रश्नपत्र में उम्मीदवार के संवाद कौशल, तार्किकता, गणितीय विश्लेषण क्षमता, समस्या समाधान और निर्णय कायम करने तथा आंकड़ा प्रस्तुतिकरण कौशलों की जांच की जाती है.

मुख्य परीक्षा में चार प्रश्नपत्र होते हैं, जिनमें से दो साझा तथा 2 वैकल्पिक होते हैं. साझा प्रश्नपत्र सामान्य अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान पर आधारिरत होंगे. वैकल्पिक प्रश्नपत्रों के माध्यम से वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, रसायन विज्ञान, अभियंत्रण आदि जैसे चुने गए विषयों में विषय आधारित जानकारी का मूल्यांकन किया जाता है.

मेधा सूची में स्थान के आधार पर, उपलब्ध रिक्तियों के एक खास अनुपात में उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है. अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवारों को खास राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का काडर आबंटित किया जाता है, वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में लंबी अवधि का प्रवेश प्रशिक्षण दिया जाता है. इसके बाद रोजगार से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा सकता है. इसके बाद उन्हें किसी फॉरेस्ट डिवीजन में डिवीजनल फॉरेस्ट अधिकारी के रूप में नियमित रूप से पदस्थापित किया जा सकता है.

शैक्षिक क्षेत्र: शैक्षिक आजीविका के लिए लोग किसी कृषि विश्वविद्यालय/महाविद्यालय में काम शुरू करते हैं, जहां वानिकी तथा संबंधित विषयों का अध्यापन किया जाता है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होता है.

अनुसंधान: वानिकी के विभिन्न विषयों में अनुसंधान की काफी संभावना है. विश्वविद्यालयों, वानिकी संस्थानों तथा सरकारी निकायों द्वारा स्थापित विशेष अनुसंधान एजेंसियों में अनुसंधान सम्पन्न किया जा सकता है. वानिकी एवं संबद्ध विषयों में स्नातकोत्तर के बाद अनुसंधान किया जा सकता है. कुछ अनुसंधान संस्थानों के नाम निम्नानुसार हैं:-

एरिड वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर

काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु

हिमालयी वन अनुसंधान संस्थान, शिमला

वन उत्पादकता संस्थान, रांची

ट्रॉपिकल वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर

फॉरेस्ट जिनेटिक्स एवं पादप ब्रीडिंग संस्थान कोयम्बटूर

उन्नत बांस एवं बेंत अनुसंधान केंद्र, आइजॉल

सामाजिक वानिकी एंव पारिस्थितिकीय पुनर्वास केंद्र, इलाहाबाद

वन अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद

वानिकी संसाधन एवं मानव संसाधन विकास केंद्र छिंदवाड़ा

रेन फॉरेस्ट अनुसंधान संस्थान, जोरहाट

भारतीय प्लाइवूड प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान बंगलुरु.

अंतर्राष्ट्रीय संगठन: वानिकी वैश्विक तौर पर एक महत्वपूर्ण मुद्दा है तथा इसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी उपलब्ध हैं. फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइजेशन (एफ ए ओ), द इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिम्बर ऑर्गनाइजेशन, सेंटर फॉर इंटरनेशनल फॉरेस्ट्री रिसर्च, इंडोनेशिया, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर, स्विट्जरलैंड, बायोदाय यूनिवर्सिटी, इटली इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन, ऑस्ट्रिया, वल्र्ड एग्रोफॉरेस्ट्री सेंटर, केन्या आदि जैसे संगठनों में काम करने के प्रति इच्छुक लोगों के लिए अवसर उपलब्ध होते हैं.

हमें पता चलता है कि वानिकी में वैज्ञानिक, प्रशासनिक, शैक्षिक तथा प्रबंधकीय क्षेत्रों में आजीविका के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं. पर्यावरणीय, विकासात्मक तथा संरक्षणात्मक जरूरतों के लिए भी वानिकी के क्षेत्र में आजीविका के अवसर उपलब्ध होते हैं.

जैसा कि इस लेख में बताया गया है, इन आजीविकाओं को पाने में पाठ्यक्रम संबंधी आवश्यकताएं और पहुंच के तरीके में अंतर हो सकता है.

वानिकी में शिक्षित लोगों के लिए वन्यजीव अभ्यारण्यों, कागज उत्पादक कम्पनियों, सूक्ष्म वित्त संगठनों, संरक्षण इकाइयों, डिब्बाबंद खाद्य निर्माण कम्पनियों, काष्ठ उत्पाद कम्पनियों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की औषधि कम्पनियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं.

सफलता के सूत्र

आपके कार्य एवं भूमिका के अनुसार वानिकी के क्षेत्र में शारीरिक एवं मानसिक तौर पर आजीविका के अवसर मांग आधारित हैं. सामान्य तौर पर शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त होना चाहिए तथा प्रकृति बाहर घूमने फिरने के प्रति प्रेम होना चाहिए.

व्यक्ति को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति इच्छुक होना चाहिए

शैक्षिक क्षेत्र में आजीविका पाने के इच्छुक व्यक्ति के लिए काफी सीखने तथा अनुसंधान के  लिए काफी अवसर उपलब्ध हैं.

(लेखक मुंबई स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल: v2j25@yahoo.in )

व्यक्त विचार व्यक्तिगत है.

(छायाचित्र: गूगल से साभार)