नौकरी फोकस


volume 52,23 - 29 March, 2019

बीमा उद्योग में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

रोज़गार समाचार के इन्हीं पृष्ठों में कुछ समय पहले एक्चुअरियल साइंस के बारे में एक लेख प्रकाशित हुआ था. वास्तव में, एक्चुअरी के रूप में योग्यता प्राप्त करने पर, किसी भी व्यक्ति के बीमा उद्योग में प्रवेश करने की अत्यधिक संभावना होती है. तथापि, बीमा उद्योग में कई और अवसर और भूमिकाएं उपलब्ध हैं और यह लेख इनका पता लगाने का एक प्रयास है.

एक बीमा कंपनी के विज्ञापन में आपने जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भीअवश्य पढ़ी-सुनी होंगी. बीमा के लाभ किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के दौरान उपलब्ध हो सकते हैं और यदि स्थितियां बदलती हैं तो ये लाभ उसके अपने परिवार को उपलब्ध होते हैं.

बीमा का जोखिम से सीधा संबंध होता है जोखिम जिसे जीवन और व्यवसाय का एक अंतरंग भाग माना जाता है, एक संभावना या अप्रत्याशित खतरे के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को चोट लग सकती है या उसकी मृत्यु हो सकती है अथवा किसी सम्पत्ति की क्षति या नुकसान हो सकता है. जब कभी भी किसी जीवन के नुकसान जैसी अप्रिय घटना घटती है तो इससे परिवार कई तरह से प्रभावित हो सकता है. भावात्मक उथल-पथल होती है और परिवार एक नियमित आय खो सकता है. ऐसे में परिवार को उस समर्थन/सहायता की आवश्यकता होती है जो मृत व्यक्ति द्वारा अर्जित की जाती थी. इसी तरह जब कोई व्यक्ति चोट लगने या घायल होने के कारण अस्थायी अथवा स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है तो चिकित्सा व्यय के कारण वित्तीय हानि होने तथा धन-राशि अर्जन की क्षति होने की संभावना हो सकती है. संपत्ति, चाहे वह चल हो या अचल, के मामले में वित्तीय हानि परिसंपत्ति की मरम्मत या नई परिसंपत्ति खरीदने के लिए अपेक्षित धनराशि के संबंध में हो सकती है.

उक्त सभी मामलों में बीमा एक बड़ी सहायता है और यह सहायक भूमिका लोगों को बीमा पॉलिसी लेने के लिए प्रोत्साहित करती है. बीमा को बीमा कंपनी जिसे बीमाकर्ता कहा जाता है और बीमा करने का विकल्प लेने वाले व्यक्ति अथवा संस्था- जिसे बीमाकृत व्यक्ति या संस्था/ग्राहक कहा जाता है, के बीच विशेष अनुबंध के रूप में परिभाषित किया जाता है. बीमा एक ऐसी व्यवस्था है जिसके द्वारा, कोई प्रभावित पक्ष किन्हीं अप्रत्याशित या अनजान घटनाओं के परिणामस्वरूप होने वाली किसी वित्तीय हानि की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में समर्थ होता है. ग्राहक को, एक बीमा करार के अंतर्गत बीमा कंपनी को बीमा शुल्क/प्रभार का भुगतान करना अपेक्षित होता है. बीमा शब्दावली में यह शुल्क/प्रभार प्रीमियम कहा जाता है, जो कराए गए बीमा की शर्तों के आधार पर एक कालिक या आवधिक भुगतान हो सकता है. इस प्रीमियम के बदले बीमा कंपनी, पॉलिसी में परिभाषित किसी अप्रत्याशित घटना के मामले में ग्राहक को कुछ भुगतान करने या ग्राहक की लागत को वहन करने के लिए सहमत होती है.

वास्तव में, बीमा जोखिमों और वित्तीय हानि को साझा करने का एक मॉडल होता है.

कुछ व्यक्तियों की हानि को व्यक्तियों की बड़ी संख्या में विभाजित किया जाता है. बीमा खरीदने वाले सभी व्यक्ति उन कुछ व्यक्तियों को हानि को साझा करेंगे जिन्होंने वास्तव में हानि उठाई है.

भारत में बीमा व्यवसाय

वैश्विक मानकों की तुलना में, हमारे देश में बीमा की पहुंच बहुत कम मानी जाती है. तथापि, अब अधिकाधिक व्यक्ति अपने तथा अपने परिवार के लिए बीमा के महत्व को समझ रहे हैं. कई संगठन अपने कर्मचारियों को भी बीमा कवरेज देते हैं. बढ़ते हुए मध्यम वर्ग, बीमा येाग्य युवा जनसंख्या, संगठनात्मक पहल और सरकारी भागीदारी जैसे जनसांख्यिकी घटक बीमा जगत में प्रवेश कर रहे हैं और रुझानों के अनुसार 2020 तक संपूर्ण बीमा उद्योग 2180 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा.

बीमा के प्रकार

मोटे तौर पर बीमा के दो क्षेत्र हैं- जीवन बीमा और गैर-जीवन बीमा जिसे सामान्य बीमा भी कहा जाता है. जीवन बीमा व्यक्तियों के जीवन को कवरेज देता है.1956६ में निगमित भारतीय जीवन बीमा निगम इस क्षेत्र में एक मात्र सरकारी कंपनी है. पूरे देश में इसके लगभग ११५ मंडल और ३७०० अन्य कार्यालय हैं.

सामान्य बीमा के अंतर्गत मुख्य श्रेणियां निम्नलिखित हैं:-

स्वास्थ्य बीमा

यात्रा बीमा

मोटर/वाहन बीमा

घरेलू बीमा

अग्नि बीमा

समुद्री बीमा

फसल बीमा

निर्यात, इंजीनियरिंग वस्तुओं आदि के लिए भी बीमा प्रदान किया जाता है.

भारत सरकार द्वारा प्रवर्तित गैर-जीवन बीमा कंपनियां निम्नलिखित हैं

नेशनल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

यूनाइडेट इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

उपरोक्त सभी कंपनियां निम्न पदों पर जनशक्ति की आवश्यकता के लिए विज्ञापन देती हैं:

सहायक प्रशासनिक अधिकारी (ए.ए.ओ.): यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में परिवीक्षाधीन अधिकारी के समान है. सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए रिक्तियों को जमा कर लिया जाता है और एक सामान्य चयन परीक्षा आयोजित की जाती है, व्यक्तिगत बीमा कंपनियों द्वारा ए.ए.ओ. उनके द्वारा जारी किए गए रोज़गार नोटिस के माध्यम से भर्ती किए जाते हैं.

सभी विषयों के स्नातक ए.ए.ओ. पद के लिए आवेदन करने के लिए पात्र हैं. चयन प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, पहली प्रारंभिक परीक्षा जिसमें तर्क क्षमता, मात्रात्मक अभिरुचि, अंग्रेजी भाषा (व्याकरण, शब्दावली, समझ) के प्रश्न शामिल होते हैं.

साक्षात्कार हेतु मैरिट सूची केवल मुख्य परीक्षा में अंकों के आधार पर बनाई जाती है.

सहायक: सहायक का पद लिपिकीय पद होता है और इस पद की रिक्तियां सामान्यत: ए.ए.ओ. के पद की रिक्तियों से अधिक होती हैं. इस पद के लिए भी सभी स्नातक पात्र होते हैं. ए.ए.ओ. का चयन अखिल भारतीय आधार पर किया जाता है और उन्हें देश में कहीं भी तैनात किया जा सकता है जब कि सहायक के पदों के लिए उम्मीदवारों को उस राज्य/संघ शासित क्षेत्र का उल्लेख करना होता है जिसके लिए वे आवेदन करते हैं, चयन होने पर उन्हें तद्नुसार तैनात किया जाता है.

जो सहायक अच्छा कार्य निष्पादन करते हैं उन्हें अपेक्षित वर्षों की सेवा करने के बाद अधिकारी संवर्ग में पदोन्नति मिल सकती है बशर्तें कि रिक्तियां उपलब्ध हों.

विशेषज्ञ पद: बीमा कंपनियों में अनेक विशेषज्ञ पद होते हैं, किंतु सामान्य पदों की तुलना में इन पदों की संख्या कम होती है. चंूकि इन पदों के लिए विशिष्ट योग्यताएं अपेक्षित होती हैं इसलिए इन पदों हेतु आवेदकों की संख्या कम होती है और परीक्षा का संचालन भी तद्नुसार किया जाता है. बीमा कंपनियों में विशेषज्ञ के अत्यधिक सामान्य पद निम्नलिखित हैं:-

एक्चुअरी: भारतीय एक्चुअरी संस्थान/ इंस्टीट्यूट एंड फैकल्टी ऑफ एक्चुअरीज, युनाइटेड किंगडम द्वारा संचालित परीक्षा में अपेक्षित प्रश्न-पत्र उत्तीर्ण करने वाले स्नातक इस पद के लिए आवेदन करने हेतु पात्र हैं.

विधि अधिकारी: बीमा कंपनियों में विधि अधिकारी के पद के लिए विधि में कोई डिग्री और भारतीय बार परिषद द्वारा विधि प्रैक्टिसकर्ता के रूप में पंजीकृत होना अपेक्षित होता है या तो आपने अपनी स्नातक योग्यता के बाद विधि का अध्ययन किया हो या बारहवीं कक्षा के बाद 5 वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम पूर्ण किया हो.

सूचना प्रौद्यागिकी अधिकारी : बीमा कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप में अंगीकार कर रही हैं और अपनी संबंधित अवसंरचना को सदृढ़ करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारियों की आवश्यकता होती है. आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सूचना प्रौद्योगिकी/कंप्यूटर विज्ञान या इलेक्ट्रॉनिकी में इंजीनियरी में स्नातक होना चाहिए. मास्टर ऑफ कंप्यूटर अप्लीकेशन (एमसीए) या मास्टर ऑफ कम्प्यूटर साइंस (एमएससी कंप्यूटर विज्ञान) भी पात्र माने जाते हैं.

मानव संसाधन अधिकारी : प्रबंधन में कोई मास्टर डिग्री या डिप्लोमा तथा मानव संसाधन में विशेषज्ञता अथवा समकक्ष योग्यता इस पद हेतु एक अपेक्षा है. कुछ मामलों में सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्रीधारी उम्मीदवार भी पात्र माने जाते हैं.

राजभाषा अधिकारी : सभी केंद्रीय सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को, संबंधित अधिनियमों/नियमों में यथा निर्धारित राजभाषा अधिकारियों की आवश्यकता होती है. यह अपेक्षा उक्त बीमा कंपनियों पर भी लागू होती है. अंग्रेजी/हिंदी में स्नातकोत्तर होने के साथ डिग्री स्तर पर हिंदी/अंग्रेजी विषय वाले उम्मीदवार पात्र माने जाते हैं. कभी-कभी स्नातक स्तर पर अंग्रेजी एवं हिंदी के साथ संस्कृत में स्नातकोत्तर उम्मीदवार भी  आवेदन करने हेतु पात्र माने जाते हैं. अनुवाद में कुछ अनुभव/प्रमाणपत्र भी एक अपेक्षा हो सकता है/लाभप्रद हो सकता है.

वित्त कार्यों में भी विषेषज्ञ की रिक्तियां होती हैं, जिनके लिए एमबीए (वित्त), चार्टरित लेखाकारिता जैसी योग्यताओं पर विचार किया जाता है. विशेषज्ञ पदों के लिए उम्मीदवारों को व्यावसायिक विषय के ज्ञान की एक अतिरिक्त परीक्षा में बैठना होता है. उदाहरण के लिए यदि किसी ने मानव संसाधन अधिकारी के पद हेतु आवेदन किया है तो उसे मानव संसाधन प्रबंधन की परीक्षा में बैठना होगा.

निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों में नौकरियां : जीवन और गैर जीवन बीमा व्यवसाय में 50 से अधिक निजी कंपनियां हैं. ये कंपनियां आमतौर पर सरकारी बीमा कंपनियों की तरह भर्ती के लिए एकल या मानकीकृत मॉडल का पालन नहीं करती हैं. कभी-कभी ये निजी कंपनियां बीमा से संबंधित पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए और एक्चुअरी साइंस, मार्केटिंग, लॉ, फाइनेंस आदि में विशिष्ट पदों के लिए कैंपस प्लेसमेंट के लिए जाती हैं. अवसरों को उनकी वेबसाइटों से जांचा जा सकता है.

बीमा एजेंट के रूप में कार्य करना : बीमा अनुरोध का एक मामला है और अधिकांश बीमा पॉलिसियां बीमा कंपनियों द्वारा निर्धारित प्रत्यायित एजेंटों के माध्यम से जुटाई जाती हैं. कम से कम मैट्रिकुलेट (दसवीं कक्षा उत्तीर्ण) और 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति अपेक्षित प्रमाणन प्राप्त करने के बाद बीमा एजेंट के रूप में कार्य कर सकते हैं. कई मामलों में बीमा कंपनियां इच्छुक एजेंसी के लिए कक्षागत प्रशिक्षण की व्यवस्था करती हैं, जिसके बाद उम्मीदवारों को भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा निर्धारित प्रमाणन परीक्षा में बैठना होता है. इसका एक अन्य विकल्प यह है कि ऑनलाइन पाठ्यक्रम में उपस्थित हों, प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण करें और उसके बाद एजेंसी के लिए आवेदन करें. यह प्रमाणन निर्धारित अंतराल के बाद नवीकृत कराना होता है, जिसके लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में उपस्थित होना और अपेक्षित परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यक होता है.

बीमा से संबंधित पाठ्यक्रम : कुछ संस्थानों में आप बी.कॉम (बीमा) या बीबीए (बीमा) जैसे पाठ्यक्रम स्नातक पाठ्यक्रम कर सकते हैं. स्नातकोत्तर स्तर पर बीमा के साथ कोई प्रबंधन पाठ्यक्रम (एमबीए/ प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा) कर सकते हैं. राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बीमा और जोखिम प्रबंधन में एमबीए चलाता है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भी ऐसा ही पाठ्यक्रम है. बीआईएमटेक, नोएडा बीमा व्यवसाय प्रबंधन में पीजीडीएम चलाता है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बैंकिंग, जोखिम एवं बीमा प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा चलाता है. ये मात्र कुछ उदाहरण हैं.

बीमा एवं जोखिम प्रबंधन संस्थान आईआरडीएआई और तेलंगाना सरकार की एक संयुक्त पहल है. यह प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा, निवेश एवं जोखिम प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा, एक्चुअरियल साइंस में पीजी डिप्लोमा, विश्लेषण एवं एक्चुअरियल साइंस में पीजी डिप्लोमा जैसे पाठ्यक्रम संचालित करता है.

भारतीय बीमा संस्थान : मुंबई स्थित भारतीय बीमा संस्थान (आईआईआई) देश में सतत बीमा शिक्षा में अग्रणी है. यह स्वास्थ्य बीमा में पीजी डिप्लोमा, बीमा विपणन में पीजी डिप्लोमा, जीवन एवं सामान्य बीमा में अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन, बीमा प्रबंधन में कार्यपालक डिप्लोमा बीमा में अनुपालन, अभिशासन एवं जोखिम प्रबंधन में प्रमाणपत्र, प्रमाणित बीमा धोखाधड़ी निरोधी व्यवसायी (उत्तरी अमेरिकी प्रशिक्षण समूह के साथ संयुक्त रूप से) जैसे पाठ्यक्रम चलाता है. आईआईआई बीमा एजेंटों/ब्रोकरों के लाइसेंसिंग हेतु ऑनलाइन प्रशिक्षण भी चलाता है.

पुणे स्थित राष्ट्रीय बीमा अकादमी बीमा पर बल देते हुए प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा चलाता है. अकादमी में ब्रोकर ऑनलाइन अध्ययन पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है.

आईआरडीएआई की भूमिका: भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), जिसका मुख्यालय हैदराबाद में है, देश में बीमा व्यवसाय का विनियामक है. यह बैंकों के लिए आरबीआई और स्टॉक बाजारों के लिए एसईबीआई जैसी भूमिका ही निभाता है. आईआरडीएआई में सामान्य रूप से वरिष्ठ स्तर के और अनुभवी उम्मीदवारों के लिए बीमा व्यावसायियों के अवसर हैं. यहा कार्य करना अत्यधिक प्रतिष्ठित कार्य माना जाता है.

कोई भी व्यक्ति आईआरडीएआई द्वारा मान्यताप्राप्त किसी निकाय से अपेक्षित प्रमाणन प्राप्त करके घाटा सर्वेक्षक या घाटा मूल्यांकक के रूप में बीमा उद्योग से जुड़ सकता है. भारतीय कृषि बीमा निगम और डिपोजिट इंश्योरेंस एंड के्रडिट गारंटी कार्पोरेशन जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों में रोजग़ार के अवसर हैं.

(लेखक मुंबई स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल:v2j25@yahoo.in)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.