नौकरी फोकस


Volume-1, 6 – 12 April, 2019

 

मेडिकल कोडिंग में रोज़गार के अवसर

निधि प्रसाद

कुछ समय पहले, मुझे कॅरिअर के बारे में बारहवीं कक्षा के एक युवा,  प्रतिभाशाली छात्र के  एक दिलचस्प सवाल का उत्तर देने का अवसर मिला, जिसने भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान (पीसीबी) को मुख्य विषयों के रूप में चुना था. विद्यार्थी किसी डॉक्टर परिवार से संबद्ध था, लेकिन अधिक दिलचस्प बात यह थी कि वह डॉक्टर नहीं बनना चाहता था. उसे मेडिकल के अलावा पीसीबी में किसी उभरते हुए या नए कॅरिअर की जानकारी नहीं थी. कॅरिअर के लिए अन्य विकल्पों की खोज करते हुए, उसे मेडिकल कोडिंगके बारे में पता लगा, जो उसे आकर्षक लग रहा था. उसने एक बार इसके बारे में सुना था, लेकिन उसे इस क्षेत्र के बारे में बहुत सीमित ज्ञान था. कई सवाल उसके दिमाग में कौंध गए, जैसे कि क्या है मेडिकल कोडिंग? क्या यह मेडिकल बिलिंग के समान है? क्या इस क्षेत्र में पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं? मेडिकल कोडिंग होने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए? इसलिए मैंने यह आलेख लिखने का फैसला किया, जो इस उदीयमान क्षेत्र पर प्रकाश डालता है.

इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध कॅरिअर के अवसरों में असाधारण वृद्धि हुई है. भारतीय रोजग़ार बाजार में अनेक नए अवसर पैदा हो रहे हैं. स्वास्थ्य देखभाल प्रशासन के क्षेत्र में मेडिकल कोडिंग एक संभावनाशील क्षेत्र है, जहां मांग बहुत अधिक है.  कॅरिअर के विभिन्न अन्य उदीयमान अवसरों के बीच, मेडिकल कोडिंग भी हमारे देश के युवाओं के लिए एक बहुत अच्छा कॅरिअर विकल्प है. विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ोतरी के साथ ही, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र भी हमारे देश में अकस्मात् बढ़ता दिख रहा है. यह क्षेत्र न केवल भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में बल्कि अन्य विकसित और विकासशील देशों में लाखों नौकरियों का सृजन कर रहा है.

व्यवसाय पर एक नजर- मेडिकल कोडिंग क्या है?

सरल शब्दों में, मेडिकल कोडिंग मेडिकल  रिपोर्टों का स्वास्थ्य देखभाल उद्योग में इस्तेमाल होने वाले संक्षिप्त (शॉर्ट) कोड में अनुवाद है. यह अन्यथा बोझिल चिकित्सा रिपोर्ट को, संक्षेप में कुशल, डेटा-अनुकूल कोडों में प्रस्तुत करने में मदद करता है. ये कोड समूह  किसी मरीज की स्थिति का वर्णन करने में कोड-व्यवसायी की मदद करते हैं और उसकी स्थिति के जवाब में रोगी पर की गई चिकित्सा प्रक्रिया का वर्णन करते हैं. यह मेडिकल बिलिंग में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और समग्र प्रतिपूर्ति चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

मेडिकल कोडिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रदाताओं की सफलता के लिए मेडिकल बिलिंग और कोडिंग कर्मचारी आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं. वे अपने रोगियों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की बिलिंग और दावों के निपटान में सहायता के लिए मेडिकल कोडिंग और बिलिंग व्यवसायियों की विशेषज्ञता पर  निर्भर रहते हैं. मेडिकल रिकॉर्ड प्रलेखन, जैसे  चिकित्सक के नोट्स, प्रयोगशाला और रेडियोलॉजिक परिणामों का लिप्यंतरण, आदि से निदान और प्रक्रिया कोड  लियेे जातेे है. मेडिकल कोडिंग पेशेवर यह सुनिश्चित करने में मदद करते हंै कि मेडिकल बिलिंग प्रक्रिया के दौरान कोड सही तरीके से लागू किए गए हैं, जिसमें प्रलेखन से जानकारी निकालना, उपयुक्त कोड निर्दिष्ट करना, और बीमा कंपनियों से भुगतान प्राप्त किए जाने का दावा करना.

क्या मेडिकल कोडिंग और मेडिकल बिलिंग एक ही व्यवसाय है?

इसका जवाब है, मेडिकल कोडिंग और मेडिकल बिलिंग दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. मेडिकल कोडर का मुख्य कार्य नैदानिक बयानों की समीक्षा करना और मानक कोड प्रदान करना है. दूसरी ओर, मेडिकल बिलर्स, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की प्रतिपूर्ति के लिए स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को भेजे गए दावों पर प्रक्रिया और अनुवर्ती कार्रवाई करते हैं. मेडिकल कोडर और मेडिकल बिलर एक ही व्यक्ति हो सकता है या बिलों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं. सुचारू कोडिंग और बिलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए, कोडर रोगी के मेडिकल रिकॉर्ड (यानी, डॉक्टर के नोट्स का प्रतिलेखन, ऑर्डर किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों, अनुरोधित इमेजिंग अध्ययन, और अन्य स्रोत) की जांच करता है ताकि किए गए परीक्षणों की विश्वसनीयता प्रमाणित की जा सके. बीमा भुगतान से किसी कंपनी के मुकरने की स्थिति को टालने के लिए दोनों एक साथ काम करते हैं.

मेडिकल कोडर क्या करता है?

मेडिकल कोडर स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं, रोगियों और बीमा कंपनियों के बीच संबंध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कोडर के रूप मे आपको चिकित्सा इतिहास निर्धारित करने के लिए निदान और प्रदत्त उपचार सहित रोगी चार्ट पढऩे की आवश्यकता होगी. इन चार्टों के आधार पर, आप मरीज के इतिहास को लिप्यंतरित करने के लिए ‘‘शॉर्टहैंड’’ की तरह के स्थापित मेडिकल कोडों के एक समूह का उपयोग करेंगे, जिसका प्रयोग  स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं और बीमा कंपनियों दोनों द्वारा किया जाएगा.

क्लिनिकों से अस्पतालों और अस्पतालों से चिकित्सकों के कार्यालयों तक, मेडिकल कोडर रोगी निदान और उपचार के लिए चिकित्सा कोड का उपयोग करते हैं. उनके  दायित्वों में विशेष रूप से, निम्नांकित शामिल हैं:

·         रोगी रिकॉर्ड पढऩा और विश्लेषण करना;

·         रोगी रिकॉर्ड के लिए सही कोड निर्धारित करना;

·         बिल बीमा प्रदाताओं के लिए कोड का उपयोग करना;

·         सटीकता सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों और सहायकों के साथ बातचीत करना;

·         बार- बार जाकर देखना ताकि रोगी से संबंधित जानकारी पर निगरानी रखी जा सके;

·         विस्तृत, विशेष रूप से कोडित जानकारी का प्रबंधन;

·         रोगी की गोपनीयता और सूचना सुरक्षा बनाए रखना;

एक मेडिकल कोडर के रूप में अपने कॅरिअर के लिए आपको हर प्रकार के वातावरण में  उत्कृष्ट एकाग्रता और ध्यान बनाए रखने की आवश्यकता होगी. रोज़मर्रा के आधार पर, आपको सभी प्रकार के रोगी चार्टों का निपटान करना होगा, जिन्हें आपको सही ढंग से कोड करना होगा और फिर बीमा कंपनियों को बिलिंग के लिए भेजना होगा संभावित स्थान इस प्रकार हैं, जहां आप एक मेडिकल कोडर के रूप में काम कर सकते हैं.

·         अस्पताल

·         चिकित्सक का कार्यालय

·         नर्सिंग देखभाल केन्द्र

·         गृह स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं

मेडिकल कोडिंग व्यवसाय स्व-रोज़गार की तलाश करने वालों के लिए भी लोकप्रिय है. इस क्षमता में, आप चिकित्सा केन्द्रों  पर जाकर या उनसे दूर रहकर कार्य कर सकते हैं. मेडिकल कोडर्स आमतौर पर किसी स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों  के साथ साझेदार के रूप में दूर रहकर काम करते हैं, जो उन्हें, रोगी रिकॉर्ड कोडबद्ध करने और बिल बीमा कंपनियों से संबद्ध अपेक्षित जानकारी प्रदान करते हैं. 

अपेक्षित कौशल: मेडिकल कोडिंग एक प्रतिस्पर्धात्मक क्षेत्र है, जिसमें सफलता के लिए आपको कई महत्वपूर्ण कौशलों की आवश्यकता पड़ती है. मेडिकल कोडिंग के क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने वाले व्यक्ति के पास निम्नांकित कौशल और योग्यताएं अवश्य होनी चाहिएं:

1. ब्यौरों पर ध्यान देना

यह महत्वपूर्ण है कि आप कोडिंग करने में या बिलिंग जानकारी प्रस्तुत करते समय कभी गलती न करें. यहां तक कि एक छोटी सी त्रुटि भी रोगियों या बीमा कंपनियों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है. आप तेज दिमाग रखने में सक्षम हों और काम करते हुए कभी एकाग्रता न खोएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि  कोडिंग  के छोटे से छोटे अंश से लेकर सभी विवरण सही हों.

2. निष्ठा

मेेेडिकल कोडिंग के पद पर काम करते हुए, आपका  सरोकार  निरंतर  रोगी संबंधी संवेदनशील जानकारी से होगा, और आपके पास यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि ये विवरण गोपनीय रहें. यदि आप अपने सहकर्मी सहित किसी के साथ भी जानकारी साझा करते हैं, तो आपके खिलाफ  कानूनी कार्रवाई हो सकती है. अत: यह जरूरी है कि आप मेडिकल स्टॉफ और अन्य समानधर्मी कोडरों से सहायता प्राप्त करते समय  हमेशा गोपनीयता बनाए रखें.

3. कंप्यूटर कौशल

मेडिकल कोडर के रूप में आपके अधिकांश काम में कंप्यूटर का उपयोग करना शामिल होगा. आपको बुनियादी वर्ड प्रोसेसिंग और स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड और मेडिकल एवं कोडिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करना भली-भांति आना चाहिए. आप किसी भी स्वास्थ्य देखभाल सेवा केन्द्र के लिए अत्यन्त उपयोगी  सिद्ध होंगे, बशर्ते आप नई तकनीक का उपयोग शीघ्र सीखने में सक्षम हों.

4. संगठनात्मक कौशल

आपको एक ही समय में बड़ी संख्या में मामलों को संभालना पड़ सकता है. संगठनात्मक कौशल आपको कुशलता से काम करने, उचित समय सीमा के साथ ट्रैक पर रहने और सही स्थानों पर रिकॉर्ड भेजने में सक्षम बनाएगा. यह कई चिकित्सा केंद्रों पर काम करने वाले फ्रीलांसरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.

5. फिजियोलॉजी की बुनियादी समझ

जानकारी को सही कोड में बदलने के लिए, आपको चिकित्सा शब्दावली सीखने की आवश्यकता है. इसका अर्थ है मानव शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान और सामान्य बीमारियों की बुनियादी समझ आपको होनी चाहिए. आपको सरल प्रक्रियाओं की अवधारणा और उद्देश्य को समझने की भी आवश्यकता होगी. लाइफ  साइंस में डिग्री होना आपके लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है.

6. लेखन कौशल

अंत में,  आपको अपनी रिपोर्टों में भ्रम की कोई आशंका न रखते हुए, खुद को, स्पष्ट  शब्दों में व्यक्त करने में सक्षम होना चाहिए. इसका मतलब है कि व्याकरणिक रूप से सही वाक्य बनाना, जो टंकण और वर्तनी की गलतियों से मुक्त हों.

मेडिकल कोडर कैसे बने? इस क्षेत्र में बेहतर व्यवसाय के लिए आपको क्या करना होगा?

मेडिकल कोडिंग एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें अत्यन्त सटीकता की आवश्यकता होती है, जो अभ्यास के साथ आती है. मेडिकल कोडिंग कार्य को अंजाम देने के लिए मानव शरीर रचना विज्ञान और जीव विज्ञान का अच्छा ज्ञान होना चाहिए. इस संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि  मेडिकल कोडिंग कौन कर सकता है या मेडिकल कोडिंग व्यवसाय के लिए क्या कोई पात्रता मानदंड हैं?

अधिकांश मामलों में लाइफ  साइंस से संबंधित विषयों में स्नातक उपाधि आवश्यक होती है. उदाहरण के लिए, जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान, फिजियोथेरेपी, बी.फार्मा आदि में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए. विज्ञान के अलावा अन्य पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी भी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयों या संस्थानों से प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करके मेडिकल कोडिंग में अपना कॅरिअर बना सकते हैं. इस व्यवसाय में चिकित्सा जानकारी को पूर्वनिर्धारित कोड में परिवर्तित करते हुए व्यवस्थित करना और उसे बनाए रखना शामिल है, अत: इसे अच्छी तरह से डिजाइन किया जाता है. इसमें महिलाओं के लिए भी विशेष संभावनाएं हैं क्योंकि वे चीजों को प्रबंधित करने और व्यवस्थित करने में निपुण समझी जाती हैं.

मेडिकल कोडिंग में सर्टिफिकेट कोर्स उत्तीर्ण उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन  के पात्र हैं. इस पद के लिए स्नातक के बाद प्रमाणपत्र होना वांछनीय है. मेडिकल कोडर बनने के लिए इस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव भी अनिवार्य है.

·         मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थान से डिग्री प्राप्त करें.

·         मेडिकल कोडिंग में प्रमाणपत्र उत्तीर्ण करें या ऐसी कंपनी में काम करें जो प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ साथ रोजग़ार भी देती हो.

भारत में, अधिकांश कंपनियां मेडिकल कोडर के पद के लिए आवश्यक योग्यता के रूप में स्नातक पसंद करती हैं. मेडिकल कोडिंग में सर्टिफिकेट कोर्स से व्यक्ति को नौकरी में प्रवेश पाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही उम्मीदवार के पास मेडिकल कोडिंग के क्षेत्र में प्रमाणित अनुभव होना चाहिए. इस पद के लिए मेडिकल इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बैचलर डिग्री,  अंतर्राष्ट्रीय फर्मों द्वारा अनविार्य योग्यता समझी जाती है. फिर भी, पर्याप्त कौशल और अनुभव वाले स्नातकों को भी इस पद के लिए पात्र समझा जायेगा. मेडिकल कोडिंग जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षणों के लिए ऑन-लाइन प्रशिक्षण की तुलना में नियमित प्रशिक्षण के लिए जाना उचित है.

रोजग़ार की संभावनाएं

हेल्थकेयर उद्योग तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग है. इस उद्योग में रोजग़ार के अवसर भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहे हैं. मेडिकल कोडर्स की मांग दिन-प्रतिदिन दुनिया भर में बढ़ रही है. भारत में निजी बीमा क्षेत्र के प्रसार के साथ ही, देर-सबेर हमारे देश का स्वास्थ्य उद्योग भी बीमा पर आधारित हो जाएगा और हमें स्वास्थ्य सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में मेडिकल कोडिंग करने की भी आवश्यकता हो सकती है. चिकित्सक कार्यालयों, अस्पतालों और बीमा कंपनियों में भविष्य में अधिक से अधिक मेडिकल कोडर्स की मांग की जा सकती है. वर्तमान में भारत में आउट सोर्सिंग कंपनियों में कोडर्स की आवश्यकता अधिक है.

भारत एक विकासशील देश है और वह स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में सुधार लाने और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों तक बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहा है. तथ्य यह है कि देश भर में कई अस्पताल और चिकित्सा सुविधाएं हैं जो सस्ती दरों पर शीर्ष श्रेणी की सेवाएं प्रदान कर रही हैं. एक और पहलू यह है कि न केवल घरेलू रोगियों, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और अन्य महाद्वीपों के लोग भी बेहतर उपचार और सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए देश में आ रहे हैं. इसलिए, मेडिकल उद्योग में कॅरिअर बनाने के लिए उम्मीदवारों का दायरा बहुत अधिक बढ़ रहा है, जिसमें  मेडिकल कोडिंग भी शामिल है.

दो ऐसे कारक हैं, जिनसे मेडिकल कोडर्स की मांग और भी बढ़ गई है. आई सी डी-10 (रोगों का अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण-10वां संशोधन) और ईएचआर (इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड) के तत्काल कार्यान्वयन के कारण, हेल्थकेयर उद्योग आक्रामक रूप से प्रशिक्षित, कुशल, जानकार और प्रमाणित कोडर्स की तलाश कर रहा है.

इस प्रकार मेडिकल कोडिंग के क्षेत्र में व्यावसायिक अवसरों के विकास की जबरदस्त संभावनाएं हैं. कई स्वास्थ्य सेवा कंपनियां भारत और विदेशों में संचालित हैं जो स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रही हैं. वे हर वर्ष मेडिकल कोडिंग कार्यों के लिए चिकित्सा, फार्मा और लाइफ साइंस से संबद्ध अन्य विषयों की पृष्ठभूमि वाले हजारों प्रशिक्षित कोडर्स को रोज़गार प्रदान कर रहीं है. वेतन आदि लाभ के संदर्भ में मेडिकल कोडिंग उद्योग बहुत अच्छे हैं. कंपनियां इस उद्योग में शानदार पैकेज और तरक्की के अवसर प्रदान कर रही हैं.

कोडिंग में प्रमाणपत्र के साथ बेहतरीन संचार कौशल से विद्यार्थियों को अग्रणी उद्योगों  का हिस्सा बनने में मदद मिलेगी.

(लेखक एक वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक सलाहकार हैं. ई-मेल आईडी:nidhiprasadcs@gmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल से साभार)